Manmarjiyan Season 4 – 46

Manmarjiyan Season 4 – 46

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

लवली का बनाया खाना खाकर फूफा बाथरूम की तरफ भागे और ऐसा क्यों हुआ भुआ नहीं समझ पायी उन्होंने थाली में रखा हलवा चम्मच भरकर उठाया और मुँह में रखते हुए कहा,”वाह ! का हलवा बनो है लवली , वैसे एक ठो बात बताये कहने को गुड्डू हमाये भतीजे ठहरे पर आज तक एक ठो गिलास पानी तक नाही पिलाये और तुम देखो अभी कुछ दिन पहिले हमाये भतीजे बने हो और हमाये लिए जे हलवा पूड़ी सब्जी खीर बनाये रहय,,,,,,,,,,जे घर मा एक ठो तुमहि हो लवली जिसको हम दोनों की परवाह है”

लवली ने सुना तो मन ही मन खुद से कहा,”परवाह तो इत्ती है न भुआ कि सोच रहे है आज शाम की ट्रेन से ही वापस जौनपुर भेज दे आपको पर हमहू गुड्डू नाही लवली है इह बार जे घर का पूरा स्वाद चखाकर भेजेंगे आप दोनों को”
“अरे भुआ खाइये ना हमहू खास आपके और फूफा के लिए ही तो बनाये है”,लवली ने भुआ को बाते करते देखकर कहा

“हाँ हाँ खाते है खाते है”,कहकर भुआ जल्दी जल्दी कभी हलवा पूड़ी तो कभी पूड़ी सब्जी और कभी खीर पूड़ी गटकने लगी। मुँह सब इतना एक साथ भर लिया कि ठीक से बोला तक नहीं जा रहा था। इसी बीच फूफा वापस आये। सोफे की तरफ आते आते फूफा ने खुद को नार्मल किया ताकि किसी को पता ना चले वो कहा गए थे और क्यों गए थे ?
फूफा एक बार फिर खाने की थाली के सामने सोफे पर आकर बैठे तो लवली ने कहा,”अरे फूफा ! खाना छोड़कर कहा चले गए थे , का खानो अच्छो नाही बनो का ?”

“अरे नहीं नहीं लवली खाना तो बहुते अच्छा बना है हम तो बस हुआ तक टहल के आये थे का है जे सब खाने के लिए पेट मा जगह भी तो हो,,,,,,,,,!!”,फूफा ने कहा और एक निवाला तोड़कर मुँह में रखा
राजकुमारी को जल्दी जल्दी खाते देखकर फूफा ने कहा,”क्यों राजकुमारी ! खाना कैसा लगा ?”
“कष्गजदगसजदगस”,भुआ ने क्या कहा और क्या नहीं कुछ समझ नहीं आया क्योकि उनके मुँह में खाना भरा था और अगले ही पल उनका मुँह बन गया क्योकि उनके पेट में भी गुड़गुड़ होने लगी लेकिन सबको बताये कैसे ?

कुछ गड़बड़ हो इस से पहले भुआ उठी और बाथरूम की तरफ भागी जो कि पीछे आँगन में था। भुआ को जाते देखकर फूफा ने कहा,”जे राजकुमारी खाते खाते अचानक कहा चली गयी ?”
लवली जाती हुई भुआ को देखकर मुस्कुराया और फूफा की तरफ पलटकर कहा,”लगता है भुआ भी आपकी तरह जगह बनाने गयी है , अरे आप रुक क्यों गए खाइये न”

फूफा ने झेंपकर लवली को देखा और मुस्कुराते हुए खाने लगे। लवली के पीछे से गुजरते मिश्रा जी ने जब लवली को आदर्श फूफा के साथ हँसते बतियाते देखा तो बड़बड़ाये,”जे गुड्डू और गोलू के साथ रहकर इह ससुरे लवली का दिमाग भी खराब हुई गवा है , साँप का घर मा बैठाकर दूध पिलाय रहे है”
मिश्रा जी वहा से चले गए क्योकि उन्हें शोरूम जाना था। उनके जाने के बाद भुआ वापस आयी तो फूफा ने कहा,”का राजकुमारी सब ठीक है ना ?”

“इनको बताया हम काहे गए थे तो जे हमरा खाना ही बंद करवा देंगे”,राजकुमारी ने मन ही मन कहा और फिर मुस्कुराकर फूफा से बोली,”हाँ हाँ सब ठीक है हम तो बस भाभी को देखने गए थे सोचा उनसे भी पूछ ले खाने को”
“अरे कोनो जरूरत नाही है ओह्ह्ह से पूछने की , उह्ह्ह हमको हिया एक ठो गिलास पानी तक नाही पूछी और तुमहू ओह्ह से खाने पूछन जा रही हो ,, चुपचाप बइठो हिया और खाना खाओ तब हम,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,हम,,,,,,,,,,,,,,,हम ज़रा आते है”,कहकर फूफा मुँह बनाते हुए उठे और सर पर पैर रखकर भागे आँगन की तरफ

“ल्यो हमसे कह रहे है चुपचाप बैठकर खाओ और खुद भाग गए ,जे कोमलिया के पिताजी का भी ना कुछो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,कुछो,,,,,,,,,,,,,हाय , हम जरा उन्हें देखकर आते है”,भुआ ने भी मुँह बनाकर लवली से कहा और उठकर भागी।
उन दोनों के जाने के बाद लवली मुस्कुराया और कहा,”बस भुआ अब शाम तक तुम और फूफा एक दूसरे को देखते ही रहो”

लवली ने दोनों थाली उठायी और रसोईघर में आकर बचा खाना डस्टबिन में डालने लगा ये देखकर अंदर आती मिश्राइन ने कहा,”अरे अरे लवली जे का कर रहे हो बिटवा ? खाने को कचरे मा डाल रहे हो जे बहुते बुरी बात है बिटवा खाने का ऐसे अपमान नाही करते”

“हमहू जानते है अम्मा पर जे खाना खाने लायक नाही है , कोई गलती से खा ना ले इहलिये कचरे मा फेंक रहे है”,लवली ने सभी बर्तन खाली करते हुए कहा
“खाने लायक नाही है पर काहे ?”,मिश्राइन ने कहा
लवली मिश्राइन को बताता तो उन्हें समझ नहीं आता इसलिए उसने मिश्राइन को अपने साथ लिया और पीछे आँगन की तरफ चला आया।  

लवली मिश्राइन को लेकर दिवार की ओट में छुप गया। उसी वक्त शगुन कपडे सुखाने आँगन की तरफ जाने लगी तो लवली ने उसे भी अपने साथ रोक लिया। शगुन और मिश्राइन को कुछ समझ नहीं आया तो लवली ने उन्हें बाथरूम की तरफ देखने का इशारा किया। बाथरूम के बाहर का नजारा देखने लायक था। अंदर शायद भुआ थी और फूफा अपना पेट पकडे दरवाजा पीट रहे थे। कुछ देर बाद भुआ बाहर निकली और फूफा लपक कर अंदर चले गए। फूफा को गए एक मिनिट नहीं हुआ कि भुआ अपना पेट पकडे दरवाजा पीटने लगी।

ये नजारा देखकर शगुन और मिश्राइन समझ गयी कि लवली ने कुछ तो गड़बड़ की है। दोनों गंभीर होकर लवली को देखा और फिर एकदम से हंस पड़ी। भुआ और फूफा को सबक सिखाने का ये अच्छा तरिका ढूंढा लवली ने,,,,,,,,,,,,उधर भुआ और फूफा अपना अपना पेट पकडे बाथरूम जाने के लिए झगड़ रहे थे और इधर मिश्राइन और शगुन अपना पेट हंस रही थी। तीनो वापस हॉल में चले आये और मिश्राइन शगुन एक दूसरे को देखकर फिर हंस पड़ी और इस बार लवली भी अपनी शरारत पर हसने लगा क्योकि जितना गंभीर लवली था उस से ये उम्मीद किसी ने नहीं की थी।

चलो बहुत हो गया भुआ फूफा लवली अब जरा उन तीन गरीबो की खबर भी ले ले अरे वही अपने गुड्डू , गोलू और मंगल फूफा और गरीब ना ये लोग पैसे से नहीं बल्कि किस्मत से थे। गुड्डू अपना सर पकडे एक तरफ बैठा था। मंगल फूफा नारियल की मार से बेहोश होकर धरती पर पड़े थे और गोलू हक्का बक्का सा कभी गाड़ी के टूटे शीशे को देखता तो अभी गुड्डू को तो कभी मंगल फूफा को , तभी उसके कानो मे गुड्डु के रोने की आवाज पड़ी

“साला हमायी बुद्धि ख़राब है जो हम भाड़े की गाडी लेकर आये , उस पर तुम दोनों भाँडो को अपने साथ रखा , ऊपर से तुम्हरी बात सुनकर हमने जे पूजा करवाई और साला हमायी बत्ती बन गयी,,,,,,,,,,चंदौली पहुंचने से पहिले गाडी का काँच चला गवा साला चंदौली पहुंचने तक जे गाड़ी रहेगी भी के नाहीं,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने रोते हुए कहा
गोलू ने सुना तो गुड्डू के पास आया और उसके बगल में बैठकर उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”हौंसला रखिये गुड्डू भैया”

गुड्डू ने गोलू को साइड में धक्का दिया और चिढ़कर कहा,”हमहू रख रहे है साले तुमहू निकलो हिया से”
गोलू लुढ़क कर मंगल फूफा के पास जा गिरा और जब उसने देखा मंगल फूफा ना हिल रहे है ना आँखे खुली है तो वह एकदम से चिल्लाया,”गुड्डू भैयाआआआआ”
गुड्डू ने सुना तो गोलू की तरफ आया , मंगल फूफा को बेसुध देखकर गुड्डू भी टेंशन में आ गया तभी गोलू ने कहा,”लगता है आपके नारियल की मार से मंगल फूफा मर गए”

“ए ए ए गोलू का बक रहे हो ,हमने कुछो नाही किया। हमने तो नारियल पत्थर पर मारा था उह्ह गाड़ी से टकराकर फूफा को लगा है। हमने इन्हे नाही मारा”,गुड्डू ने घबराकर कहा
“हाँ लेकिज कोर्ट मा जे बात साबित कैसे करोगे ?”,गोलू ने बहुत ही गंभीर होकर कहा
“का कोर्ट मा ? कोर्ट तक बात कैसे पहुँच गयी गोलू ?”,गुड्डू ने कहा
गोलू उठा और गुड्डू के सामने आकर कहा,”अरे आपने नारियल फेंका ये सच है ना ?”
“हाँ”,गुड्डू ने कहा

“और उह्ह्ह नारियल मंगलफ़ुफ़ा के सर पर लगा , इह भी सच है ना ?”,गोलू ने फिर कहा
“हाँ लेकिन,,,,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने कहना चाहा लेकिन गोलू ने उसकी बात पूरी होने ही नहीं दी और बीच में बोल पड़ा,”अरे लेकिन वेकिन कुछ नाही गुड्डू भैया ! अब पुलिस हिया आही है , फूफा को मारने के जुर्म मा आपको गिरफ्तार करी है और जेल लेकर जाहि है। हुआ रपट लिखेगी फिर आपको कोर्ट मा हाजरी देनी होगी और केस लड़ना होगा और आपका केस मा हारनो तय है और फिर जज साहब फैसला करे है कि

‘सभी सबूतों और गवाहों को मध्य नजर रखते हुए जे अदालत गुड्डू मिश्रा उर्फ़ अर्पित मिश्रा को मंगल फूफा के कत्ल के इल्जाम मा फांसी की सजा सुनाती है’ बस खेल खत्म , आपको तो पैक अप हुई गओ गुड्डू भैया,,,,,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने जो नहीं होना था वो कहानी गुड्डू को ऐसे सुनाई कि गुड्डू को फांसी का फंदा नजर आने लगा

लेकिन अगले ही पल गुड्डू को अहसास हुआ कि गोलू बकवास कर रहा है तो उसने कहा,”तुमहू का जज हो जो फैसला सुनाय रहे हो और हमरो पैकअप हुआ न गोलू तो साथ मा तुम्हरो भी करवा देंगे ,कह देंगे जे गोलू गुप्ता ने ही हमको सुपारी दी थी फूफा को मारने की”
गोलू ने सुना तो हैरानी से गुड्डू को देखा और फिर जल्दी से मंगल फूफा के सीने पर अपना कान लगाकर उनकी धड़कने सुनने लगा और अगले ही पल मारे ख़ुशी के चिल्लाया,” गुड्डू भैया ! मंगल फूफा जिन्दा है , साँस चल रही है जे कि”

“उह्ह्ह तो हमको भी पता है मूसलचंद पर तुमको तो आदत है सबको ऊपर पहुंचाने की पिछले जन्म मा जल्लाद थे का गोलू”,गुड्डू ने गोलू के सर पर चपत मारकर कहा
“इह सब छोड़िये गुड्डू भैया जे बताईये अब का करे , चंदौली जाना है कि नहीं ?”,गोलू ने कहा
“चंदौली तो किसी भी हाल मा जाना है गोलू ,साला पहली बार लवली भैया हमे कोनो काम दिए रहय जे काम तो हमे करना ही है पर जे गाडी का का ? जे शीशा का करे ?”,गुड्डू ने रोआँसा होकर कहा

गोलू ने कुछ सोचा और कहा,”अरे गुड्डू भैया ! जे पास मा ही एक ठो गाड़ी की दुकान है हुआ चलकर शीशा डलवा लेते है”
“हाँ कमाया धामया कुछो नाही और खर्चा पे खर्चा करवाए जाओ तुमहू हमसे”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा
“अरे काहे इत्ता पगलाय रहे है गुड्डू भैया , हमाये हिस्से से काट लेना जे शीशा के पइसा अब चलो”,गोलू ने कहा
“और जे लाश का का करे ?”,गुड्डू ने कहा
“कौनसी लाश ?”,गोलू ने घबराकर कहा

“अबे जे ! तुम्हाये मंगल फूफा जे का का रहे अब ?”,गुड्डू ने फिर चिढ़कर कहा
“जे का उठाय के गाड़ी की पिछली सीट पर डाल देते है ,बेहोश ही तो हुए है कौनसा मर गए है आ जायेगा रस्ते मा होश”,गोलू ने झुककर मंगल को उठाते हुए कहा लेकिन मंगल फूफा इतने भारी की अकेले गोलू से भला क्या ही उठते तो उसने कहा,”ओह्ह्ह गुड्डू भैया ! जरा हाथ तो लगाओ”
गुड्डू भी चला आया और दूसरी तरफ से मंगल फूफा को उठाते हुए कहा,”अबे जे तो बहुते भारी है बे गोलू ऐसा तो का खाते होंगे ?”

“घर मा 4 टेम खाना खाते है , पिताजी की गालिया खाते है , कभी कभी हमाये साथ बाहिर भी कचौड़ी समोसा लपेट लेते है बस एक गज्जू गुप्ता की पिरोपर्टी बची है किसी दिन उह्ह न खा जाये”,गोलू ने कहा और गुड्डू की मदद से मंगल फूफा को गाड़ी की पिछली सीट पर डाल दिया।  

आगे आकर गुड्डू ने ड्राइवर सीट को साफ किया और गोलू बगल वाली सीट साफ करके उस पर आ बैठा। गुड्डू ने गाड़ी स्टार्ट की और गोलू के बताये रास्ते पर चल पड़ा। गुड्डू गाड़ी लेकर दूकान के सामने पंहुचा और नीचे उतरा। गोलू भी उसके साथ आया और दुकानवाले को गाड़ी दिखाकर कहा,”उह्ह्ह गाड़ी का सामने वाला शीशा लगाना है और गाड़ी के अंदर जो शीशा बिखरा है ओह्ह्ह का साफ करना है। इतना समय लग जायेगा ?”

“देखो भैया साफ करने मा तो आधा घंटा जाएगा लेकिन शीशा लगने की गारंटी हमहू नाही दे सकते का है कि बड़ी गाड़ी है तो जे का तो शोरूम भेजना पड़ेगा ,, लगकर आने मा 4-6 घंटे लग जायेंगे”,दुकान के मालिक ने कहा
“4-5 घण्टे ? अबे का बूटी पार्लर भेजोगे जे का ? हमको आधे घंटे मा निकलना है चंदौली तब तक कुछो नहीं हो सकता का ?”,गोलू ने बिदककर कहा

“अरे गोलू भैया हम का पुरे कानपूर मा तुमको कोई जे काम आधे घंटे मा करके नाही देगा”,दुकानवाले ने कहा
गुड्डू ने सुना तो गुस्से से गोलू को देखा और कहा,”हो गयी तसल्ली , मिल गयी तुम्हाये कलेजे को ठंडक,,,,,,,,,,,,!!!”

दुकानवाले को समझ नहीं आया गुड्डू क्यों गुस्सा है ? गोलू ने उसकी तरफ देखा और उसे हाथ से रुकने का इशारा करके गुड्डू की तरफ आया और गुड्डू को साइड में लाकर कहा,”गुड्डू भैया ! हम का कह रहे है , सिर्फ शीशा ही तो गया है गाड़ी तो मक्खन जइसन चल रही है ना अभी भी ,तो हम का कह रहे है अभी गाड़ी मा बिखरा शीशा साफ करवाते है और फिर जे ही गाड़ी लेकर चंदौली निकल जाते है। वापस आकर गाड़ी शोरूम मा देकर चकाचक करवा के भाड़े वाले को लौटा देंगे,,,,,,,,,,,,,,का कहते हो ?”

गुड्डू के पास और कोई चारा था ना नहीं इसलिए उसे गोलू की बात माननी पड़ी और गोलू ख़ुशी ख़ुशी दुकानवाले की तरफ बढ़ गया।  

( इस लजीज खाने के बाद क्या भुआ और फूफा फिर से खाना पसंद करेंगे लवली के हाथ का खाना ? क्या चंदौली पहुंचने से पहले मंगल फूफा को आ जायेगा होश या आगे की कहानी में निभाने वाले है वह लाश का किरदार ? क्या यही खत्म हो जाएगी गुड्डू की मुसीबते या ये है मुसीबतो की शुरुआत ? जानने के लिए पढते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4
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दुकानवाले को समझ नहीं आया गुड्डू क्यों गुस्सा है ? गोलू ने उसकी तरफ देखा और उसे हाथ से रुकने का इशारा करके गुड्डू की तरफ आया और गुड्डू को साइड में लाकर कहा,”गुड्डू भैया ! हम का कह रहे है , सिर्फ शीशा ही तो गया है गाड़ी तो मक्खन जइसन चल रही है ना अभी भी ,तो हम का कह रहे है अभी गाड़ी मा बिखरा शीशा साफ करवाते है और फिर जे ही गाड़ी लेकर चंदौली निकल जाते है। वापस आकर गाड़ी शोरूम मा देकर चकाचक करवा के भाड़े वाले को लौटा देंगे,,,,,,,,,,,,,,का कहते हो ?”

दुकानवाले को समझ नहीं आया गुड्डू क्यों गुस्सा है ? गोलू ने उसकी तरफ देखा और उसे हाथ से रुकने का इशारा करके गुड्डू की तरफ आया और गुड्डू को साइड में लाकर कहा,”गुड्डू भैया ! हम का कह रहे है , सिर्फ शीशा ही तो गया है गाड़ी तो मक्खन जइसन चल रही है ना अभी भी ,तो हम का कह रहे है अभी गाड़ी मा बिखरा शीशा साफ करवाते है और फिर जे ही गाड़ी लेकर चंदौली निकल जाते है। वापस आकर गाड़ी शोरूम मा देकर चकाचक करवा के भाड़े वाले को लौटा देंगे,,,,,,,,,,,,,,का कहते हो ?”

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