Manmarjiyan Season 4 – 23
Manmarjiyan Season 4 – 23

गोलू ने एक बुरा सपना देखा और सुबह सुबह गुप्ता जी से थप्पड़ भी खा लिया। अब गोलू गुप्ता जी को तो कुछ कह नहीं सकता था इसलिए नीचे गद्दे पर सोये मंगल फूफा की तशरीफ़ पर लात मारी और बेचारे फूफा गद्दे से नीचे लुढ़क गए। मंगल फूफा हड़बड़ा कर उठे और अपना सर खुजाते हुए इधर उधर देखा तभी गुप्ताइन फोन पर किसी से बात करते हुए आँगन में आयी और बीच में बैठे मंगल फूफा से टकराकर लड़खड़ा गयी और गुस्से से उनको साइड करके कहा,”अरे मंगल फूफा आप बीच मा का कर रहे है ?”
मंगल फूफा फिर लुढ़क कर साइड हो गए उन्हें अभी भी समझ नहीं आया की उनके साथ हो क्या रहा है ? और आता भी कैसे बेचारे अभी भी नींद में थे। गुप्ता जी ने गुप्ताइन को फोन लेकर बाहर जाते देखा तो उठे और उनके पीछे जाते हुए गोलू से कहा,”ए गोलू ! एक लोटा भरके पानी मारो उह्ह्ह कुम्भकर्ण पे हमहू देख के आते है गुप्ताइन का नवा काण्ड करने जा रही है,,,,,,,!!!”
गोलू ने सुना तो उठा और अंदर से पानी का लोटा भरकर ले आया और खींचकर पानी मारा मंगल फूफा पर लेकिन जैसा गोलू है उसका निशाना सही कैसे लग सकता है। पानी गया मंगल फूफा के मुँह से ऊपर सामने से आती पिंकी पर और पिंकी की नयी साड़ी पानी से गीली। एक तो वह पहले ही गोलू से नाराज थी ऊपर से सुबह सुबह गोलू ने ये कांड भी कर दिया। पिंकी ने गुस्से से गोलू को देखा वह उस से कुछ कहती इस से पहले गोलू वहा से गायब हो गया।
पानी के कुछ छींटे मंगल फूफा पर भी आ गिरे तो उनकी नींद खुली वे उठे और पिंकी को पानी से नहाया देखकर कहा,”अरे बिटिया तुमहू तो पूरी गीली हो गयी,,,,,,!!!”
“हाँ तो आप फूंक मार के सुखाय दयो,,,,,पता नहीं सुबह सुबह किसका मुँह देखे रहय”,पिंकी ने कहा और पैर पटकते हुए वहा से चली गयी
गुप्ताइन फोन पर बात करते हुए बाहर आयी तो गुप्ता जी भी उनके पीछे पीछे चले आये। गुप्ता जी को अपने पीछे आया देखकर गुप्ताइन ने थोड़ा ऊँचे स्वर में कहा,”हाँ शनि भैया ! उह्ह्ह चौक से दायी तरफ जोन पोस्ट आफिस है ना हुआ से दुइ गली छोड़कर तीसरी गली से सीधा आ जाईये ,, नुक्कड़ पर आकर किसी से भी पूछ लेना पटकापुर के बारे में हुआ का बच्चा बच्चा हमरे घर का पता जानता है”
गुप्ता जी ने सुना तो परेशानी के भाव उनके चेहरे पर उभर आये और दिल धड़कने लगा। उन्हें लगा गुप्ताइन उन्हें शनि भैया के नाम से डरा रही थी लेकिन शनि भैया तो सच में आ रहे है ये सुनकर गुप्ता जी गुप्ताइन की तरफ बढे लेकिन बेचारे उन तक पहुंच पाते इस से पहले ही गोलू पिंकी से बचने के लिए भागते हए आया और उनसे टकराया और गुप्ता जी गुप्ताइन के पैरों में जा गिरे। गुप्ताइन ने गुप्ता जी को अपने पैरों में गिरे देखा तो कहा,”अब काहे हमाये पैर पकड़ रहे है तब तो बहुत चौड़ मा कह रहे थे कि आप नाही डरते किसी से,,,,,,,;तो अब काहे हालत पतली होय रही है आपकी ?”
“सबसे पहिले तो हमका इह बताओ साला हमको धक्का किसने मारा ?”,गुप्ता जी ने उठकर बैठते हुए कहा
गोलू कुछ कहता इस से पहले मंगल फूफा भी बाहर चले आये तो गोलू ने मंगल फूफा को फसाते हुए कहा,”पिताजी जे , जे मारे आपको धक्का”
गुप्ता जी ने इधर उधर देखा तो पास ही पड़ी सेंडिल उनके हाथ में आयी और उन्हें उसे मंगल की तरफ फेंककर कहा,”साले मंगलू ! तुमहू का कसम खा लिए हो कि हमे मारकर ही छोड़ोगे ?”
गुप्ता जी फेंकी सेंडिल मंगल ने अपने मुँह तक पहुंचने से पहले हाथो में कैच कर ली। ये देखकर गोलू ने मुस्कुरा कर कहा,”का बात है फूफा , नाइस कैच,,,,,,अगले साल बच्चो की क्रिकेट टीम मा नाम लिखवाएंगे आपका”
गुप्ता जी उठे और गुप्ताइन की तरफ देखकर गुस्से से कहा,”और तुम गुप्ताइन , तुमको का लगता है हम तुम्हाये उह्ह्ह शनि मनि से डरते है का ? अरे बिल्कुल नाही आज भी कानपूर के लोग हमाये नाम से थर थर कांपते है समझयो ,, हमायी सहनशक्ति की परीक्षा नाही ल्यो तुम अरे आन दो जिसको आना है हमहू किसी से डरते है का ?”
“हाँ तो आ रहे है वही आकर बुद्धि ठीक करेंगे आपकी,,,,,,,,!!”,कहते हुए गुप्ताइन ने गोलू और मंगल फूफा की तरफ देखा और घूरकर कहा,”और जरूरत पड़ी तो इन दोनों की भी,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे हमहू का किये अम्मा ? पिताजी के चक्कर मा हमायी फील्डिंग काहे सेट कर रही है ?”,गोलू ने कहा
“तुमहू बड़ा अपने पिताजी की साइड ले रहे हो और तुम्हाये साथ हमाये जे मंगल फूफा भी,,,,,अब जब मंदिर मा भजन किया है तो अपने पिताजी के साथ थोड़ी परसादी तुम दोनों भी चखो,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर गुप्ताइन वहा से चली गयी।
गोलू गुप्ता जी के पास आया और कहा,”जे अम्मा ने का कहा आपको कुछ समझ आया , कौन परसादी की बात कर रही थी जे ?”
“हम तो कहते है अभी भी बख्त है अंदर जाकर गुप्ताइन से माफ़ी मांग ल्यो”,मंगल फूफा ने कहा
गुप्ता जी एक तो पहले ही गुस्सा थे ऊपर से मंगल की बात सुनकर और गुस्सा हो गए और भड़ककर कहा,”अच्छा ! तो तुमहू चाहते हो थूक कर चाट ले ?”
“अरे हम इसलिए कह रहे है कि अभी आप शनि भैया को जानते नाही है,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने घबराये हुए स्वर में कहा
“ए फूफा का शनि भैया शनि भैया लगा रखे हो , हमाये पिताजी कोनो से डरते नाही है समझे,,,,,,,,,,अरे अपनी जवानी मा तुम्हरे शनि भैया जैसे 10-10 लौंडो को एक साथ पेले है,,,,,,क्यों पिताजी ?”,गोलू ने कहा
“हाँ,,,,,,,,,,,!!!”
– अरे कानपूर की हर गली , हर नुक्कड पर लोग पिताजी से खौफ खाते थे,,,,,,,,,,क्यों पिताजी ?
“हाँ,,,,,,,,,!!!”
– लड़के तो लड़के लड़किया भी थर थर काँपती थी पिताजी को देखकर,,,,,,,इतना दबदबा था पिताजी का कानपूर मा,,,,,,,,क्यों पिताजी ?”
“हाँ,,,,,,,!!!”
– अरे एक बार इनको गुस्सा आय रहा किसी बात पर तो आदमी के पैर पर पैर रखकर पूरा आदमी चीर दिया था इन्होने,,,,,,,,क्यों पिताजी ?”
“हाँ,,,,,,,,अरे जे ज्यादा हो गया गोलू”,गुप्ता जी ने दबे स्वर में कहा
गोलू कहा उनकी सुनने वाला था उसने और बढ़ चढ़कर कहा,”आज भी , अगर आज भी पिताजी के सामने 20 लौंडे आ जाए ना तो 16-17 लौंडे तो पिताजी अकेले निपटा देंगे,,,,,,,,,क्यों पिताजी ?”
इस बार गुप्ता जी ने जवाब नहीं दिया तो गोलू ने फिर कहा,”क्यों पिताजी ? पिताजी , पिताजी,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने पलटकर कहा तो देखा बगल में खड़े गुप्ता जी डर से काँप रहे है। गोलू पलटा और देखा सामने 4 आदमी और उसके ठीक सामने एक हट्टा कट्टा आदमी खड़ा है जिसकी सिर्फ छाती गोलू को नजर आयी। उसने बगल में खड़े गुप्ता जी को देखा और कहा,”पिताजी ! जे की मुंडी कहा है ?”
गुप्ता जी ने गोलू की ठुड्डी ऊपर उठा दी गोलू ने ऊपर देखा तो सामने खड़े आदमी का चेहरा भी उसे नजर आया और गोलू घबराकर पीछे जा गिरा।
गुप्ता जी जैसे ही जाने के लिए पलटे उस हट्टे कट्टे आदमी ने गुप्ता जी की कोलर पकड़कर उन्हें रोक लिया और कहा,”ए तुम लोगो में से गज्जू गुप्ता कौन है बे ?”
गुप्ता जी ने नीचे गिरे गोलू से इशारा किया कि वह कुछ ना बोले , गोलू ने तो कुछ नहीं कहा लेकिन मंगल फूफा ने बोल पड़े,”हम , हम बताते है”
गुप्ता जी ने सुना तो मन ही मन मंगल फूफा को 36 गालियाँ दे डाली और गोलू ने भी दबे स्वर में कहा,”पिताजी ! जे साला फूफा तो आस्तीन का साँप निकला”
गुप्ता जी और गोलू मंगल फूफा को बोलने से रोक पाते इस से पहले मंगल फूफा आदमी के सामने जा पहुंचा और कहा,”हम बताते है गज्जू गुप्ता कौन है ?”
“कौन है ?”,आदमी ने पूछा
गुप्ता जी ने तो मारे डर के अपनी आँखे बंद कर ली। मंगल फूफा ने घर के अंदर आते यादव जी की तरफ ऊँगली करके कहा,”वो रहे गज्जू गुप्ता”
आदमी ने पलटकर देखा सामने से सफ़ेद रंग का कुर्ता पजामा पहने यादव जी गुप्ता जी के घर के अंदर आ रहे थे। आदमी ने गुप्ता जी की कोलर छोड़ी तो वे गोलू के बगल में जा गिरे।
आदमी ने साथ खड़े लड़को से यादव जी को पकड़कर लाने का इशारा किया और मंगल की तरफ पलटकर कहा,”तुम हिया का कर रहे हो बे ?”
“अरे शनि भैया ! जैसे गुप्ताइन दीदी आपकी मुंहबोली बहिन है वैसे ही हमायी भी दूर की रिश्तेदार है,,,,,,,,,तो बस उनकी खिदमत में चले आये”,मंगल फूफा ने झेंपते हुए कहा
मंगल फूफा के मुँह से शनि भैया सुनकर गुप्ता जी और गोलू ने हैरानी से एक दूसरे को देखा और गोलू ने धीमे स्वर में मिमियाकर कहा,”पिताजी ! हम तो सोचे थे कि अम्मा के बुलाये शनि भैया भी मंगल फूफा की तरह हाल्फ टिकिट होंगे लेकिन जे तो ताड़ जित्ता लंबा है,,,,,,,हमरा तो हाथ भी जे की छाती तक ही पहुँच पायेगा,,,,,,,,,साला और ल्यो अम्मा से पंगा , आपके चक्कर मा हम भी मरेंगे आज”
“अरे हमको का पता था शनि भैया सच के शनि निकलेंगे,,,,,,,,पर जे साला मंगलवा का कर रहा है इसने यादव को गज्जू गुप्ता काहे बना दिया ?”,गुप्ता जी ने भी गोलू से चिपककर कहा
“पिताजी हम तो कहते है अभी भी बख्त है शनि भैया के पैर पकड़ लेते है और अम्मा के भी,,,,,,साला मार खाने से बच जायेंगे,,,,,,,,,,जे भस्मासुर को देख के लग रहा है कच्चा चबा जाएगा हमको”,गोलू ने कहा
गुप्ता जी को गोलू की बात ठीक लगी लेकिन दोनों जैसे ही इस बात पर अमल करते शनि के आदमियों ने यादव जी को लाकर शनि भैया के पैरो में डाल दिया।
यादव जी बेचारे कुछ समझ पाते इस से पहले शनि भैया ने कोलर पकड़कर उन्हें उठाया और हवा में उठाकर कहा,”का बे ! साले तुम्हायी हिम्मत कैसे हुई हमायी बहिन को परेशान करने की ? तुमको का लगता है ओह्ह्ह का कोई नाही है , अरे हम हम है ओह्ह्ह के भाई ,, का अकेला समझ लिए हो का उनको ? और तुम्हरी साले हिम्मत कैसे हुई फुलवारी के साथ चक्कर चलाने की ?”
“अरे काहे हिम्मत नाही करेंगे ? हमायी पत्नी है उह्ह्ह,,,,,,,,,,!!!”,यादव जी ने गुस्से से कहा
शनि भैया ने सुना तो गुस्से से तिलमिला उठे और कहा,”हमरी फूल जैसी बहिन को धोखा देने की तुम्हरी हिम्मत कैसे हुई ? ए मारो रे इसको,,,,,,,हम हाथ नाही उठाएंगे क्योकि जीजा है हमारा,,,,,,,,,,!!!”
कहकर शनि ने यादव जी को अपने लड़को की तरफ फेंक दिया। लड़को ने यादव जी को बोलने का मौका ही नहीं दिया और लगे उनकी धुलाई करने। यादव जी को मार खाते देखकर मंगल फूफा को जो ख़ुशी हुई है क्या बताये ,
वे धीरे से गोलू और गुप्ता जी के पास आये और कहा,”अब जाके हुआ हमरा बदला पूरा खुद को बहुत होशियार समझता था ना इहह्ह फूल का गमला अब शनि करेगा इह गमले की मिटटी अलग खाद अलग मारो साले को”
गुप्ता जी और गोलू ने सुना तो दोनों मुँह फाड़कर मंगल फूफा को देखने लगे , जितना सीधा उन्होंने मंगल फूफा को समझा थे उतने सीधे वे थे नहीं,,,,,,,,,
मिश्रा जी का घर , कानपूर
सुबह से मिश्रा जी के घर में तैयारियां चल रही थी। आज शगुन के घरवाले वेदी और अमन के रिश्ते के लिए घर आने वाले थे और मिश्रा जी किसी भी तरह की कमी नहीं चाहते थे आखिर वेदी उनकी इकलौती बेटी जो थी। पड़ोस के घर से रौशनी की अम्मा चली आयी और मिश्राइन उनके साथ मिलकर नाश्ते के नए नए आइटम बनाने लगी। मिठाईयों का आर्डर मिश्रा जी बीती शाम मोहन हलवाई को पहले ही देकर आ चुके थे। गुड्डू सुबह सुबह नहा-धोकर दुकान के लिए निकल गया क्योकि आज सोनू के ऑफिस में पार्टी थी और गुड्डू आज कोई गड़बड़ बिल्कुल नहीं चाहता था।
लवली भी तैयार होकर शोरूम जाने के लिए नीचे आया और नाश्ता किया। बीती रात बिंदिया को लेकर हुई बात के बाद से ही लवली के चेहरे पर उदासी और परेशानी के भाव थे चल रही तैयारियों को देखकर उसने अपनी परेशानियों को साइड किया और झूठी मुस्कान होंठो पर सजाकर मिश्रा जी के पास आकर कहा,”पिताजी ! हम शोरूम जा रहे है , कुछो जरूरत हो तो आप हमे फोन कर लीजियेगा”
“हाँ बिटवा ! शोरूम जाकर बस उह्ह्ह जौनपुर वाला आर्डर भिजवा देना ओह्ह के बाद सब मैनेजर सम्हाल लेगा तुमहू घर चले आना ,, तुम्हरी हिया जरूरत होगी , तुम्हे शगुन के घरवालों से भी मिलवाना है”,मिश्रा जी ने प्यार से कहा
“ठीक है पिताजी हमहू आ जायेंगे”,कहकर लवली शोरूम के लिए निकल गया।
गुड्डू के पास उसकी बाइक थी और लवली को वेदी ने अपनी स्कूटी दे दी थी इसलिए लवली स्कूटी लेकर ही शोरूम के लिए निकल गया। रास्ते भर वह बिंदिया के बारे में सोचता रहा और सहसा ही उसे मनोज की कही बात याद आयी “ओह्ह के पिताजी आये और उसे डाँटकर ले गए”
लवली ने ब्रेक मारा और स्कूटी रुकी , अब तक लवली को लग रहा था कि मंगेश जेल में होगा लेकिन मंगेश का चकिया में था। वह जेल से कब और कैसे छूटा ये जानने के लिए लवली ने स्कूटी घुमाई और पुलिस स्टेशन की तरफ चल पड़ा।
कुछ देर बाद लवली पुलिस स्टेशन पहुंचा उसने स्कूटी को साइड में लगाया और अंदर चला आया। थाने का इन्स्पेक्टर अभी आया नहीं था इसलिए लवली कॉन्स्टेबल के पास आया और कहा,”मंगेश कहा है ?”
“कौन मंगेश ?”,कॉन्स्टेबल ने कहा
“कुछ दिन पहले जिसको इंस्पेक्टर साहब ने गिरफ्तार किया था , लल्लन और उसके आदमीयो के साथ”,लवली ने कहा
“वो तो पिछले हफ्ते ही छूट गया”,कॉन्स्टेबल ने अपना काम करते हुए कहा
“छूट गया ! लेकिन कैसे , किसने छुड़ाया उसे ?”,लवली ने हैरानी से कहा
“का कैसे ? हमको का पता ? अभी बड़े साहब आएंगे तो ओह्ह से पूछना हमरा काम है उनका आर्डर फॉलो करना”,कॉन्स्टेबल ने लवली की तरफ देखकर थोड़ा गुस्से से कहा
“कब तक आएंगे वो ?”,लवली ने थोड़ा खुद को संयत करके पूछा
“आज जायेंगे अभी थोड़ी देर मा , तुमको जल्दी है तो बाद मा आना,,,,,,,,!!!”,कॉन्स्टेबल ने बेरुखी से कहा और फिर अपने काम में लग गया। लवली चुपचाप आकर बेंच पर बैठा गया और इन्स्पेक्टर का इंतजार करने लगा। एक घंटा निकल गया लेकिन इन्स्पेक्टर नहीं आया तो लवली उठकर कॉन्स्टेबल के पास आया और कहा,”और कब तक बैठना पडेगा हमे यहाँ ?”
“काम तुमको है तो तुम्ही ना बैठोगे,,,,,,अरे रोज यहाँ ना जाने कितने ही गुंडे मवाली चोर उचक्के आते है और अगले दिन छूट जाते है,,,,,,,,,,तुम्हरा उह्ह्ह मंगेश भी छूट गया होगा रीजन जानकर का ही कर लोगे तुम,,,,,,,,,जाओ घर जाओ”,कॉन्स्टेबल ने लवली को समझाते हुए कहा
“छूट जाते नहीं छोड़े जाते है तुम जैसे लोगो को घुस खिलाकर”,लवली ने गुस्से से कहा
“का कहे बे ! हमको घूसखोर बोल रहे हो ? अभी उठा के अंदर डाल दिए ना तो तुम्हाये बाप भी जमानत नाही करवा पाएंगे समझे,,,,,,,,,!!”,कॉन्स्टेबल ने कहा
बाप के नाम से लवली गुस्सा हो गया और कॉन्स्टेबल की कोलर पकड़कर कहा,”हमाये बाप का नाम लिया ना तो यही जमीन मा जिन्दा गाड़ देंगे समझे,,,,,,,,!!!”
लवली का कॉन्स्टेबल की कोलर पकड़ना हुआ और उसी पल इंस्पेक्टर का अंदर आना हुआ उन्होंने जब देखा तो गुस्से से लवली की पीठ पर एक डंडा जमाकर कहा,”तेरी जे हिम्म्मत कि पुलिसवाले की कोलर पकडे”
लवली पलटा और जैसे ही इन्स्पेक्टर ने दूसरा डंडा हवा में लहराया लवली ने उसे पकड़कर लिया और गुस्से से भरी आँखों से इंस्पेक्टर को देखा तो इंस्पेक्टर चिल्लाया,”पकड़कर हवालात मा डालो जे का और लिखो रपट ससुरे के खिलाफ,,,,,,,,,बहुत गर्मी है ना तुम्हरे अंदर दुइ दिन हवालात मा रहोगे तो सारी निकल जाएगी”
इंस्पेक्टर का आदेश सुनकर कॉन्स्टेबल ने लवली को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया और लवली गुस्से से इंस्पेक्टर को घूरता रहा।
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संजना किरोड़ीवाल

