Manmarjiyan Season 4 – 21
Manmarjiyan Season 4 – 21

गुप्ता जी ने गोलू के सामने अपनी समस्या रखी और हर बार की तरह गोलू ने चौड़ में आकर कहा कि वह आने वाली इस मुसीबत और शनि भैया से निपट लेगा लेकिन वही मंगल फूफा के चेहरे पर परेशानी के भाव थे जैसे वे पहले से शनि भैया को जानते हो। मंगल फूफा गोलू के पास आये और कहा,”तुमहू जानते हो शनि भैया कौन है ?”
गोलू मंगल की तरफ पलटा और कहा,”अरे कोई भी हो हमहू किसी से डरते है का ? अरे फूफा तुमहू अभी तक हमरा पियार देखे हो हमाओ गुस्सा नाही,,,,,,,,एक बार गुस्सा आ गया ना तो फिर हमरे सामने शनि हो मंगल थर थर काँपते है का समझे,,,,,,,,,,,,,,,पिताजी”
मंगल से कहकर गोलू गुप्ता जी की तरफ देखकर एकदम से चिल्लाया।
“का है बे ?”,गुप्ता जी ने भी झिड़ककर कहा
“अब आपने हमको घर मा वापस बुला ही लिया है , एक कोना जे मंगल फूफा को भी देइ दयो”,गोलू ने कहा
गुप्ता जी ने सुना तो उनकी भँवे तन गयी और उन्होंने कहा,”तुमको घर मा आने दे रहे है क्योकि तुमहू हमायी औलाद हो पर जे साले मंगलवा को हमहू अपने घर मा कदम भी नाही रखने देंगे”
मंगल फूफा ने सुना तो उनका मुँह उतर गया और उन्होंने मायूसी से गोलू की तरफ देखा ,
गोलू ने उन्हें वही रुकने का इशारा किया और गुप्ता जी के तरफ आकर दबी आवाज में कहा,”अरे रहने दीजिये ना पिताजी , कल अगर शनि भैया के सामने हमायी टीम कमजोर पड़ी तो हमरे पास मार खाने के लिए एक ठो एक्स्ट्रा आदमी होगा ना,,,,,,,,अब आप और हम तो मंगल फूफा को मार नाही सकते पर शनि भैया तो मार सकते है ना”
गुप्ता जी ने सुना तो एक नजर मंगल को देखा और फिर दबे स्वर में गोलू से कहा,”बहुते कमीने इंसान हो गोलू तुम,,,,,,,,,,ठीक है आन दयो ओह्ह्ह का पर एक ठो बात समझाय दयो अगर फुलवारी के घर की तरफ पैर करके भी सोया ना तो खटिया समेत घर से बाहिर फेंक देंगे”
“अरे नहीं करेगा कुछो गड़बड़ , हमहू जबान देते है ना पिताजी”,गोलू ने कहा
“आपकी जबान की कोनो वेल्यू है ?”,शर्मा जी की आवाज गोलू के कानों में पड़ी
गोलू ने पलटकर देखा तो पाया शर्मा जी हाथो में कुछ कार्ड लिए खड़े थे। गोलू उनके पास आया और कहा,”आप हिया का कर रहे है ? उह्ह्ह भी जे बख्त,,,,,,,,!!!”
गुप्ता जी और शर्मा जी के बीच अब सुलह हो चुकी थी इसलिए उन्होंने गोलू को साइड किया और शर्मा जी के सामने आकर कहा,”अरे शर्मा तुमहू हिया , अरे बाहिर काहे खड़े हो अंदर आओ यार ?”
शर्मा जी गोलू को घूरते हुए अंदर चले गए। गोलू मंगल की तरफ आया तो मंगल ने कहा,”जे गुप्ता जी भी ना घर के लोगो को बाहिर फेंककर बाहर वालो को अंदर लेकर जा रहे है,,,,,,,,,,!!!”
“अबे ससुर है हमाये,,,,,,और तुम सुनो पिताजी ने आखरी मौका दिया है तुमको हिया रहने का अब कोनो गड़बड़ की ना माँ कसम हमही तुमको मार डालेंगे और जेल चले जायेंगे,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
“बस क्या गोलू ? कह तो रहे है नहीं करेंगे आगे से कुछो गलती और फूल,,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने जैसे ही फुलवारी का नाम लिया गोलू ने उसका मुँह बंद किया और कहा,”और आज के बाद अगर फुलवारी का नाम भी लिया ना तो तुम्हरी अर्थी के फूल हम खुद अपने हाथो से सजायेंगे,,,,,,,,,,फूल के पास अपना गमला है तुमहू ओह्ह्ह मा खाद नाही बनो समझे,,,,,,,,,,,अब चुपचाप हमाये साथ अंदर चलो , खाना खाओ और सो जाओ क्योकि कल सुबह हमको शनि भैया से भी निपटना है और जे के लिए हमरे दिमाग को चाहिए शांति,,,,,,,,,,,!!!”
“अब तुम गलत नाही कर रहे ?”,मंगल फूफा ने भड़ककर कहा
“हम का गलत किये बे ?”,गोलू ने उन्हें घूरकर पूछा
“हम फुलवारी को प्रेम करे तो उह्ह्ह शादीशुदा है और तुम चार बच्चो की अम्मा शांति की बात करो तो सही,,,,,,,,,,साला जे दोगलापन हमाये साथ क्यों ?”,मंगल फूफा ने भड़ककर कहा
गोलू ने सुना तो अपना सर पीट लिया , सर पर थोड़े बहुत बाल आये थे उन्हें नोच लिया और जमीन पर अपने पैर पटककर कहा,”अबे हम शांति की बात कर रहे है शांति माने पीस , सुकून अबे का बौड़म इंसान हो बे तुम,,,,,,,,,औरत जात के पल्लू से बाहिर निकलो फूफा,,,,,,,,,साला हमको भी अपने जैसा ठरकी समझ लिए है”
मंगल फूफा ने सुना तो झेंप गए और कहा,”सॉरी ! हमको लगा,,,,,,,,,,!!”
“लगा है तो होकर आओ हम जा रहे है अंदर,,,,,,,अंदर बैठे उह्ह्ह असुर से भी तो मिलना है”,कहकर गोलू वहा से चला गया और मंगल फूफा ने जैसे ही गर्दन फुलवारी के घर की तरफ घुमाई गोलू चिल्लाया,”ए,,,,,,,,,अंदर”
“हां हां आ रहे है”,मंगल फूफा ने घबराकर कहा और गोलू के साथ अंदर चला आया।
शर्मा जी अपनी भांजी की शादी का कार्ड देने आये थे। अब शर्मा जी के सामने गुप्ताइन गुप्ता जी के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर कैसे कर सकती थी इसलिए चुपचाप किचन में जाकर पिंकी के साथ उनके चाय नाश्ते का इंतजाम करने लगी। गुप्ता जी शर्मा जी से बात कर रहे थे। गोलू भी अंदर चला आया और बगल में खाली पड़े सोफे पर आ बैठा। शर्मा जी ने एक नजर गोलू को देखा और फिर गुप्ता जी से बात करने लगे। शर्मा जी पिंकी से मिली , चाय नाश्ता किया और फिर उठकर जाने लगे जो गुप्ता जी ने गोलू ने इशारा किया कि वह शर्मा जी को बाहर तक छोड़कर आये।
गुप्ता जी भी कमाल कर रहे थे नेवले से कह रहे थे कि साँप को बाहर छोड़कर आये , मरता क्या न करता गोलू उठा और शर्मा जी के साथ दरवाजे की तरफ चल पड़ा।
“एक से बढ़कर एक 420 , झूठे , धोखेबाज देखे है हमहू लेकिन आप जैसा नहीं देखा , अरे मर्द होकर जबान की कोनो वेल्यू नाही,,,,,,,,,,पता नाही कौनसी मनहूस घडी मा पिंकिया को आपसे पिरेम हुआ और उह्ह्ह आपको चुन ली,,,,,,,,,!!!”,गोलू के साथ चलते हुए शर्मा जी ने कहा
“अरे हम जैसा वर पाने के लिए 16 सोमवार के व्रत रखती है लड़किया पिंकिया को तो हमहू फिर भी बिना मेहनत के मिल गए,,,,,,,,,और जबान की का बात कर रहे है ? का खुश नाही रख रहे का पिंकिया को शादी के बाद ?”,गोलू ने चिढ़कर कहा
“हम मुछो की बात कर रहे है , अभी तक नाही काटे हो,,,,,,,,,,मतलब जबान के पक्के नाही हो”,शर्मा जी ने गोलू की तरफ पलटकर कहा
“हाँ तो काट देंगे जे मा कौनसी बड़ी बात है,,,,,,,,,,वो तो आज गुरुवार था इहलीये नाही काटे”,गोलू ने बहाना बनाया जबकि मुछे काटना उसके लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा था
“हाँ तो कल काट ल्यो , कल शुक्रवार है और अच्छो दिन भी है,,,,,,,,,अगर अपनी जबान के मर्द हो तो काटो वरना हम समझेंगे,,,,,,,,,!!!”,शर्मा जी ने कहा लेकिन आगे अपनी बात पूरी कर पाते इस से पहले गोलू चिल्लाया,”ए ससुर जी ! आगे कुछो नाही कहना हां,,,,,मर्द है हम काट लेंगे”
“पक्का काटोगे ?”,शर्मा जी ने आग में घी डालने का काम किया
“अरे कह तो रहे है काट लेंगे,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने झुंझलाकर थोड़ा तेज स्वर में कहा
“गोलू जे का तरीका है हमाये पापा से बात करने का , तुम उन पर चिल्ला रहे हो ?”,सीढ़ियों पर खड़ी पिंकी ने कहा जो कि अपने पापा से कुछ कहने आयी थी
पिंकी को वहा देखकर शर्मा जी ने नाटक करके कहा,”अरे नहीं नहीं बिटिया दामाद जी से कुछ मत कहना , ये तो बस ऐसे ही समझा रहे थे मुझे,,,,,,,,!!!”
“हाँ देखा मैंने कैसे समझाया जा रहा था ?”,पिंकी ने गोलू के पास आकर उसे घूरकर देखा
“अरे अब हमने का किया ?”,गोलू ने कहा लेकिन पिंकी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और शर्मा जी से बात करके उन्हें वहा से भेज दिया। शर्मा जी के जाने के बाद गोलू ने जैसे ही पिंकी से बात करनी चाही पिंकी मुँह बनाकर वहा से चली गयी।
गोलू ने पिंकी को ऐसे मुँह बनाते देखा तो उसे जाते देखकर बड़बड़ाया,”जे साला छोटी गुप्ताइन तो बड़ी गुप्ताइन की भी अम्मा है,,,,,,,,,,,,ए पिंकिया ! हमायी बात सुनो”
गोलू पिंकी के पीछे पीछे घर के अंदर चला गया !
मिश्रा जी का घर , कानपूर
मिश्रा जी , लवली , गुड्डू , वेदी चारो साथ बैठकर खाना खा रहे थे और मिश्राइन सबको खाना परोस रही थी। शगुन की तबियत जरा खराब थी इसलिए मिश्राइन ने उसे आराम करने को कहा। मिश्रा जी ने देखा कि शगुन कही दिखाई नहीं दे रही है तो उन्होंने मिश्राइन से कहा,”शगुन कहा है नजर नाही आ रही ?”
“शगुन की तबियत ज़रा ख़राब है , दोपहर से ही जरा जी घबरा रहा था तो हमने ही उसे आराम करने को कहा , अपने कमरे में होगी”,मिश्राइन ने कहा
गुड्डू ने सुना तो खाते खाते रुक गया और मिश्राइन की तरफ देखने लगा
“अरे दोपहर से तबियत खराब थी तो बताया काहे नाही डाक्टर को भेज देते घर”,मिश्रा जी ने चिंता जताकर कहा
“हाँ अम्मा ! हमे फोन किया होता हम घर आ जाते”,गुड्डू ने कहा
“आप दोनो बाप बेटा को अब कैसे समझाए ? अरे शगुन गर्भवती है शुरू शुरू के 3-4 महीनो मा जे छोटी मोटी परेशानी आती ही है , जी मिचलाना , कुछो खाने का मन ना होना , जे सब होता रहता है,,,,,,,,,!!!”,मिश्राइन ने कहा
मिश्रा जी ने सुना तो वे समझ गए लेकिन गुड्डू तो पहली बार बाप बनने वाला था उसे भला मिश्राइन की बात कहा समझ आती उसने अपनी प्लेट में थोड़ा खाना और लिया और उठकर जाने लगा तो मिश्राइन ने कहा,”अरे गुड्डू ! खाना तो खा ले बिटवा”
“हम शगुन के साथ खा लेंगे अम्मा,,,,,,,,,!!”,कहकर गुड्डू प्लेट लेकर वहा से चला गया।
लवली ये सब देखकर मंद मंद मुस्कुराने लगा। मिश्रा जी ने लवली को मुस्कुराते देखा तो कहा,”पता है लवली ! जब शगुन के साथ गुड्डू का रिश्ता किये थे ना तो कित्ता ड्रामा किये रहय उह्ह कि हमको जे शादी नाही करनी और अब देखो शगुन के बिना खाना गले से नीचे नाही उतर रहा है ओह्ह के,,,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी की बात सुनकर सब हसने लगे , लवली भी मुस्कुरा उठा और ये देखकर मिश्राइन ने कहा,”बस अब एक ऐसी ही सुन्दर सुशील बिटिया जे घर मा और आ जाये जो हमाये लवली को सम्हाल सके और ओह्ह्ह का ध्यान रख सके,,,,,,,,,,!!!”
मिश्राइन की बात सुनकर लवली ने उनकी तरफ देखा। मिश्राइन के चेहरे पर जो चमक और आँखों में जो ख़ुशी थी उसके लिए तो लवली अपनी पूरी जिंदगी कुर्बान कर दे,,,,,,,,,,,,,,!!”
“चिंता नाही करो मिश्राइन ! लवली के लिए भी हम शगुन जैसी ही लड़की ढूंढेंगे,,,,,फिलहाल तो तुमहू कल गुप्ता जी और उनके घरवालों के स्वागत की तैयारी करो”,मिश्रा जी ने कहा
बगल में बैठी वेदी ने सुना तो शरमा गयी और सर झुकाकर खाना खाने लगी आखिर कल उस से मिलने अमन जो आ रहा था।
“आप चिंता नाही कीजिये सब हो जाएगा,,,,,,,,बस आप कल घर जल्दी आ जाईयेगा”,मिश्राइन ने मिश्रा जी की थाली में चपाती रखते हुए कहा
“हम कल शोरूम नाही जायेंगे मैनेजर को बोले है उह्ह देख लेंगे बाकि दोपहर तक लवली वहा चला जाएगा,,,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने कहा
“केशव पंडित जी को आने के लिए कहे रहय ना आप ?”,मिश्राइन ने पूछा
केशव पंडित का नाम सुनते ही मिश्रा जी खाते खाते रुक गए और उनके चेहरे के भाव बदल गए। लवली ने मिश्रा जी को देखा तो समझ गया क्योकि अभी कुछ देर पहले ही वह मिश्रा जी के साथ केशव पंडित से मिलकर आया था।
मिश्रा जी को खामोश पाकर मिश्राइन उन्हें देखने लगी , मिश्रा जी ने मिश्राइन की तरफ देखा और कहा,”जे गुड्डू और गोलू की वजह से केशव पंडित ने आने से साफ मना कर दिया है , कितनी मिन्नते की तब जाकर उन्होंने कल आने के लिए हाँ कहा है हमसे,,,,,,,,,जे गुड्डू और गोलू ने सच मा हमायी जिंदगी मा चरस बो रखी है मिश्राइन जिस को बस वक्त बेवक्त काटते रहो,,,,,,,,,,उह्ह्ह तो शुक्र है कि अभी जे दिनों मा थोड़ा शांत है वरना ऐसा कोनो दिन नाही जाता जब जे दोनों मिलकर कोनो काण्ड ना करे,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी की बात सुनकर लवली की आँखों के सामने आज सुबह वाली घटना आ गई जब गुड्डू और गोलू ने गड़बड़ की थी लेकिन लवली ने सही वक्त पर वहा पहुंचकर उनको मुसीबत से बचा लिया था। लवली चुपचाप अपना खाना खाता रहा मिश्रा जी को इस बारे में बताकर वह उन्हें परेशान करना नहीं चाहता था इसलिए चुप रहना ही बेहतर समझा और फिर गुड्डू गोलू भी तो मिश्रा जी के कहर से बचाना था आखिर वह उन दोनों का बड़ा भाई जो था।
“शांत हो जाईये ! हम समझायेंगे ना उन दोनों को बच्चे है समझ जायेंगे”,मिश्राइन ने कहा
“बच्चे नाही मिश्राइन , बाप बनने वाले है दोनों ! हमको तो डर है इनकी औलादे इनके जैसी ना हो बस,,,,,,,!!”,मिश्रा जी ने कहा और उठकर हाथ धोने चले गए
लवली का फोन बार बार बजे जा रहा था और वह बार बार उसे काट रहा था क्योकि इस वक्त सबके बीच में था। मिश्रा जी के जाने के बाद लवली उठा और हाथ धोकर साइड में आया और फोन उठाकर दबे स्वर में कहा,”अबे का कर रहे हो मनोज बार बार फोन काहे कर रहे हो हमे ?”
“लवली,,,,,,,,,,,!!!”,एक जानी पहचानी आवाज लवली के कानों में पड़ी और उसका दिल जोरो से धड़कने लगा। उस आवाज को सुनने के बाद लवली कुछ बोल ही नहीं पाया तभी दूसरी तरफ से आवाज आयी,”लवली हम बिंदिया बोल रहे है”
लवली ने जैसे ही सुना दर्द के भाव उसके चेहरे पर उभरे और उसने अपनी आँखे मूँद ली,,,,,,,,,,,,,,!!!”
( क्या गोलू कर पायेगा शनि भैया का सामना या मंगल फूफा बनेंगे बलि का बकरा ? क्या केशव पंडित इस बार सही सलामत मिश्रा जी के घर से जा पाएंगे ? इतने दिनों बाद बिंदिया की आवाज सुनकर क्यों छलक उठे लवली की आँखों से आँसू ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
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- Continue With Manmarjiyan Season 4 – 19
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संजना किरोड़ीवाल


बस क्या गोलू ? कह तो रहे है नहीं करेंगे आगे से कुछो गलती और फूल,,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने जैसे ही फुलवारी का नाम लिया गोलू ने उसका मुँह बंद किया और कहा,”और आज के बाद अगर फुलवारी का नाम भी लिया ना तो तुम्हरी अर्थी के फूल हम खुद अपने हाथो से सजायेंगे,,,,,,,,,,फूल के पास अपना गमला है तुमहू ओह्ह्ह मा खाद नाही बनो समझे,,,,,,,,,,,अब चुपचाप हमाये साथ अंदर चलो , खाना खाओ और सो जाओ क्योकि कल सुबह हमको शनि भैया से भी निपटना है और जे के लिए हमरे दिमाग को चाहिए शांति,,,,,,,,,,,!!!”
बस क्या गोलू ? कह तो रहे है नहीं करेंगे आगे से कुछो गलती और फूल,,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने जैसे ही फुलवारी का नाम लिया गोलू ने उसका मुँह बंद किया और कहा,”और आज के बाद अगर फुलवारी का नाम भी लिया ना तो तुम्हरी अर्थी के फूल हम खुद अपने हाथो से सजायेंगे,,,,,,,,,,फूल के पास अपना गमला है तुमहू ओह्ह्ह मा खाद नाही बनो समझे,,,,,,,,,,,अब चुपचाप हमाये साथ अंदर चलो , खाना खाओ और सो जाओ क्योकि कल सुबह हमको शनि भैया से भी निपटना है और जे के लिए हमरे दिमाग को चाहिए शांति,,,,,,,,,,,!!!”