Manmarjiyan Season 4 – 31

Manmarjiyan Season 4 – 31

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

नवरत्न ने गोलू का फटा टेंट सिलने से मना कर दिया और उसे साइड में फेंक दिया ये देखकर रवि ने दबी आवाज में कहा,”गोलू भैया ! इन्होने तो टेंट सिलने से मना कर दिया , अब का होगा ?”
“अभी तुमहू हमे जानते नाही हो रविवा , हमहू भी बहुते कमीने आदमी है। रुको ! अभी बताते है जे हमाओ टेंट भी सिले है और हमको चाय समोसा भी खिलाएंगे”,गोलू ने भी उसी दबे स्वर में कहा
“हाह ! का गोलू भैया सुबह सुबह हमही मिले,,,,,हम नाही मानते”,रवि ने गोलू का मजाक उड़ाकर कहा

“नहीं मानते , दिखाए ट्रेलर दिखाए”,गोलू भी तेश में आ गया।
“हाँ हाँ दिखाओ”,रवि ने कहा
गोलू नवरत्न के बगल में पड़ी बेंच पर आ बैठा और अपने गाल से हाथ लगाकर ऐसे मुँह बनाया जैसे बेचारा कोई बहुत बड़ी टेंशन में हो। नवरत्न अपना सूट सिलने में बिजी था उसने गोलू पर ध्यान ही नहीं दिया। गोलू ने रवि की तरफ देखा तो रवि दबी सी हंसी हंसा और इस से गोलू चिढ गया। गोलू ने नवरत्न के कंधे पर हाथ मारकर कहा,”लगता है बेचारी हीरा का ब्याह कबो ना होई है”

“कौन हीरा ? और ओह्ह्ह के ब्याह की चिंता तुमको काहे है बे ?”,नवरत्न ने गोलू की तरफ देखकर कहा  
गोलू मन ही मन खुश हुआ लेकिन चेहरे पर गंभीर उदासी लाकर कहने लगा,”अब तुमहू तो जानते ही हो चचा , जे बेडिंग प्लानर के काम के चलते बड़े बड़े लोगो मा उठना बैठना है हमरा और गुड्डू भैया का तो अभी कुछ दिन पहिले एक ठो आर्डर लिए थे बस वही जे हीरा से हमायी मुलाकात हुई , का गजब दिखती है ,

का सूरत है और का ही सीरत है साला देख के ऐसा लगे जैसे बनाने वाले ने इतवार की छुट्टी लेकर फुर्सत से बनाया हो उनको,,,,गोरा रंग , काली आँखे अरे चलती फिरती माधुरी दीक्षित है चचा पर बेचारी,,,,,,,,,,,!!!”
“पर बेचारी का गोलू ?”,नवरत्न ने मशीन पर रखे सूट को साइड कर गोलू की बातों में दिलचस्पी दिखाकर पूछा
“अरे जाहि दयो चचा तुमहू जान कर का करोगे ?”,गोलू ने कहा
“अरे बताओ तो सही गोलू,,,,,,,,!!!”,नवरत्न ने बेसब्री से कहा

“अरे छोडो न चचा तुमहू जान कर का करोगे ?”,गोलू ने खीजकर कहा
“अरे यार मतलब इतनी खूबी है फिर भी तुमहू ओह्ह का बेचारी कह रहे हो , कुछो हुआ है का ओह्ह्ह के साथ ?”,नवरत्न ने हमदर्दी दिखाकर पूछा
गोलू ने रवि की तरफ देखकर अपनी बांयी आँख दबायी और फिर नवरत्न की तरफ पलटकर बोला,”अरे बेचारी की सादी नाही हुई है , 40 की हो गयी है फंक्शन मा ओह्ह्ह के पिताजी मिले रहे हमसे तो कहा कि कोनो अच्छा लड़का हो तो बताये ओह्ह के लिए”

“40 की हो गयी और सादी नाही हुई ऐसा काहे ?”,नवरत्न ने कहा
“अरे पहिले उन्होंने लड़को को रिजेक्ट किया अब लड़के उन्हें रिजेक्ट कर रहे है , थोड़ा मुटिया गयी है ना पर अब कहती है जो मिलेगा जैसा मिलेगा कर लेंगी पर नाही हमहू कहे ऐसे कैसे किसी से भी कर लेंगी अरे हमायी नजर मा बहुते अच्छे लड़के है ओह्ह्ह के लिए,,,,,,,एक तो हमाये सामने बैठे है”,गोलू ने कहा
“सामने बैठे है,,,,,,,,,,मतलब हम ?”,नवरत्न ने हैरानी और ख़ुशी भरे स्वर में कहा

“अरे तुमहू तो पहली पसंद थे हमायी चाचा पर जान दयो”,गोलू ने मुँह बनाकर साइड में देखते हुए कहा
नवरत्न ने अपनी कुर्सी गोलू के पास खिसकाई और उसकी बांह दबाते हुए कहा,”थे , अरे हमहू है गोलू , हमायी भी तो सादी नाही हुई है , ओह्ह्ह के साथ हमरी बात चलाओ ना”
नवरत्न को अपनी बातो में आते देखकर गोलू ने बाहर देखते हुए कहा,”सुबह से कुछो खाये नाही है , पानी की एक ठो बून्द तक गले से नीचे नाही उतरी है,,,,,,,!!!”

“अरे तो चिंता काहे करते हो गोलू , हम है ना ! ए लड़का का नाम तुम्हरा ? जे पईसा पकड़ो और बगल वाली दुकान से चार समोसा और चाय लेकर आओ”,कहते हुए नवरत्न ने अपनी जेब से 100-100 के दो नोट निकाले और रवि की तरफ बढ़ा दिए। रवि ने भी ख़ुशी ख़ुशी पैसे लिए और चला गया  

नवरत्न एक बार फिर गोलू के पास चला आया और उसकी बांह दबाते हुए कहा,”ए गोलू ! ओह्ह्ह हीरा जी के पिताजी से बात करके हमाये बारे मा बताओ ना ओह्ह का,,,,,,,,देखो हमाये यहाँ कोनो चीज की कमी भी नाही है,,,,,,महीने के 30-35 हजार कमा लेते है। कोनो बुरी आदत भी नाही है हमाये अंदर,,,,,,ए गोलू , हमायी बात चलाओ ना ओह्ह्ह के साथ,,,,,,,,,!!!”

“अरे अरे रुको चलाते है चचा ! यार तुमहू तो मतलब मरे जा रहे हो मंडप मा बैठने के लिए,,,,,,,,वैसे कल जाने वाले थे ओह्ह के हिया पर,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने जानबूझकर बात अधूरी छोड़ दी
“पर , पर का गोलू ?”,नवरत्न ने कहा
“गोलू भैया समोसे और चाय”,रवि ने आकर कहा
रवि के आने की वजह से नवरत्न की शादी की बात बीच में ही रुक गयी साथ ही नवरत्न को रवि पर गुस्सा भी आया।

“अरे लाओ लाओ रवि बहुते भूख लगी थी,,,,,,,,लाल चटनी नाही लाये ?”,गोलू ने दोनों हाथो में एक एक समोसा उठाकर कहा
“अरे भैया भूल गए , अभी ले आते है तब तक आप हरी चटनी से खाइये”,रवि ने चाय के गिलास रखते हुए कहा और वहा से चला गया
गोलू ने आधा समोसा एक ही निवाले में खाया और नवरत्न से कहा,”हाँ तो तुमहू का कह रहे थे चचा ?”
“हमहू जे कह रहे गोलू कि तुमहू कल जाने वाले हो ना ओह्ह्ह के घर तो हमाये बारे में बताओ ओह्ह्ह का या हमहू साथ ही चलते है”,नवरत्न ने बेसब्री से कहा

“जाने वाले थे पर अब नाही जा पाएंगे , नहीं तुमहू बताओ किस मुँह से जायेंगे”,गोलू ने कहा
“किस मुँह से जायेंगे मतलब ? का परेशानी है ?”,नवरत्न ने कहा
“अरे कल ओह्ह्ह के घर मा कोनो पिरोगराम है , ओह्ह्ह मा हमको जे टेंट लगना था पर तुमहू सिलने से मना कर दिए तो अब कैसे जायेंगे ? कह देंगे कोनो और टेंटवाले से बात कर ले,,,,,,,,तुमहू छोडो जे समोसा खाओ”,गोलू ने मायूस होकर कहा और समोसा उठाकर नवरत्न की तरफ बढ़ा दिया।

नवरत्न ने सुना तो कहा,”जे तुमहू खाओ गोलू हमको बताओ का सिलना है हमहू अभी सिल देते है , एक ठो टेंट के चलते पिरोगराम खराब नाही होना चाहिए”
“अरे पर तुमहू अपना सूट सिलने वाले थे ना चचा”,गोलू ने कहा रवि लाल चटनी ले आया और गोलू के सामने रख दी। उसने भी एक समोसा लिया और वही साइड में बैठकर खाने लगा।
“अरे भाड़ मा गओ हमाओ सूट तुमहू बताओ का सिलना है तुम्हरे टेंट मा ?”,नवरत्न ने कहा अब तो उसे बस अपनी शादी के सिवा कुछ और दिखाई नहीं दे रहा था और सामने बैठा गोलू भगवान का भेजा कोई दूत दिख रहा था।

“समोसा खा ले पहिले ?”,गोलू ने पूछा
“हाँ हाँ खाय ल्यो , कहो तो कुछो और मंगवा दे ?”,नवरत्न ने बड़े प्यार से कहा
“चार पिलेट समोसा पैक करवाय दयो हमहू बाद मा खा लेंगे”,गोलू ने तीसरा समोसा चटनी में लपेटते हुए कहा
नवरत्न ने अपनी जेब टटोली एक आखरी 100 का नोट था लेकिन गोलू के लिए उसे भी कुर्बान कर दिया और रवि की तरफ बढाकर समोसे पैक करवाने को कहा

समोसे खाकर गोलू ने बड़ी सी डकार ली और हाथ धोकर अपना फटा हुआ टेंट उठा लाया। अब टेंट जब तक टेंट सिलना था तब तक गोलू को नवरत्न के सामने हीरा की तारीफों के पूल बांधने थे। गोलू के दिमाग में जो आया वह सब नवरत्न के सामने बकता चला गया और बेचारा नवरत्न शादी के ख्यालो में खोया टेंट का कपड़ा सिलता रहा। पुरे एक घंटे की मेहनत के बाद आख़िरकार टेंट सिलकर तैयार था। गोलू ने उसे समेटा और कहा,”हाँ चचा बताओ कित्ता पइसा हुआ ?”

“अरे गोलू पागल हो का ? तुमसे पइसा थोड़े लेंगे तुमहू तो बस हीरा जी के सामने हमायी अच्छी अच्छी तारीफ कर देना,,,,,,,,और कल याद से हमाये बारे मा बता देना बस ओह्ह्ह का”,नवरत्न ने खिंसियाते हुए कहा
“बताएँगे तो तब ना जब कोनो हीरा होगी ?”,गोलू धीरे से बड़बड़ाया
“का कुछो कहे का ?”,नवरत्न ने कहा
“हमहू तो जे कह रहे चचा दुसरा का सूट सिलना छोडो और अपनी शेरवानी सिलने की तैयारी करो”,गोलू ने नवरत्न का गाल खींचकर कहा तो शर्म के मारे नवरत्न को झुरझुरी सी होने लगी।

रवि भी समोसे लेकर तैयार खड़ा था इसलिए गोलू ने वहा से निकलना ही ठीक समझा। गोलू टेंट लेकर लूना पर आ बैठा और वहा से निकल गया।
नवरत्न अपनी शादी के ख्यालो में खोया मुस्कुराते हुए कुर्सी पर आ बैठा और सूट सिलते हुए गुनगुनाने लगा
“मैं सेहरा बांध के आऊंगा , मेरा वादा है”

“वाह वाह गोलू भैया मान गए आपके दिमाग को , वैसे जे हीरा कौन है और ओह्ह्ह का बाप आपको ओह्ह के ब्याह की जिम्मेदारी काहे दिए रहय ?”,रवि ने लूना चलाते हुये पूछा
 गोलू मुस्कुराया और इतरा कर कहा,”अरे जे ही तो हमाये दिमाग का कमाल है रविवा , तुमको समझ आता तो का आज तुमहू हमायी जगह ना होते”
“मतलब कोई हीरा नाही है , आपने उनको झूठ बोला ?”,रवि ने हैरानी से कहा 

गोलू ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”अपना काम  निकलवाने के लिए आटे मा नमक जितना झूठ चलता है रविवा”
“गोलू भैया आटे में नमक जितना झूठ चलता है लेकिन नमक मा आटे जितना नाही , उह्ह्ह नवरतन को पता चला ना तो लेने के देने पड़ जाएंगे”,रवि ने कहा
“अरे यार रवि ! तुमहू साला डरते बहुते हो यार,,,,,,,कुछो नाही होगा हम है न”,गोलू ने इतरा कर कहा तभी उसकी नजर सामने से आते शर्मा जी पर पड़ी जो कि हाथ में थैला लेकर पैदल ही चले जा रहे थे।

“ए रवि रोको जरा”,गोलू ने रवि का कन्धा थपथपाकर कहा। रवि ने शर्मा जी के बगल में लूना रोकी तो शर्मा जी ठिठके और जैसे ही नजर गोलू पर पड़ी उनके  चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये। वे गोलू से कुछ कहते इस से पहले गोलू ही बोल पड़ा,”जे थैला उठाकर कहा चले जा रहे है ?”
“आपसे मतलब ?”,शर्मा जी ने चिढ़े हुए स्वर में कहा
“हाँ बिल्कुल मतलब है का पता किसी को हमाये नाम की सुपारी देने जा रहे हो , बताओ बताओ का है ?”,गोलू ने कहा

“कफ़न सिलवाने जा रहे है , कहो तो आपके लिए भी सिलवा दे”,शर्मा जी ने गुस्से से कहा
गोलू ने रवि का कंधा थपथपाकर उसे चलने का इशारा किया और शर्मा जी से कहा,”एक काम कीजिये अपने लिए सिलवा लीजिये हमे जाने में अभी बख्त है”
शर्मा जी ने सुना तो झुककर अपनी चप्पल निकाला और गोलू के पीछे फेंककर कहा,”उह्ह्ह तो हम उसी दिन सिलवा लिए थे जिस से आपसे रिश्ता जोड़ा था”
गोलू को चप्पल तो नहीं लगा उलटा शर्मा का चप्पल जरूर उनसे दूर हो गया। वे खिंसियाये हुए से चप्पल लेने गए और पहनकर वहा से आगे बढ़ गए।

मिश्रा जी का घर , कानपूर
खाने के बाद घर के सभी आदमी हॉल में बैठकर बातचीत में लगे थे और महिलाये सब अंदर अपनी अलग मण्डली जमाये बैठी थी। लवली ने अपने पडोसी मनोज को बिंदिया की खबर देने को कहा था लेकिन मनोज का कोई फोन नहीं आया। सबके बीच बैठा लवली बार बार अपना फोन देख रहा था। जब से उसे बिंदिया के बारे में पता चला था तब से बस उसी की चिंता हो रही थी। लवली को परेशान देखकर गुड्डू ने अपने फोन से एक मैसेज लवली को भेजा।

लवली का फोन बजा उसने देखा गुड्डू मैसेज है तो उसने हैरानी से सामने बैठे गुड्डू को देखा और फिर मैसेज खोलकर देखा जिसमे लिखा था
“परेशान मत होईये भैया ! कल सुबह हम चंदौली जा रहे है और बिंदिया भाभी को साथ लेकर ही आएंगे”
गुड्डू का भेजा मैसेज पढ़कर लवली धीरे से मुस्कुराया और गुड्डू को देखकर अपनी पलकें झपका दी।

गोलू टेंट का सब सामान रखकर मिश्रा जी के घर के लिए निकल गया। एक तो सुबह से नहाया नहीं था ऊपर से यहाँ वहा घूमते हुए और गंदा हो गया।
घर जाकर नहाने से पहले उसने गुड्डू को सब बताना जरुरी समझा जिस से गुड्डू की टेंशन थोड़ी कम हो जाये। गुड्डू ने भी गोलू को सीधा घर आने को कह दिया ये भी नहीं सोचा कि गोलू इस वक्त किन हालातों में होगा। अपनी मस्ती में मस्त गोलू गली में पहुंचा तभी सोनू भैया के घर की बालकनी से किसी ने बाल्टी भर कचरा नीचे गली में फेंका।

कचरा आकर गिरा सीधा गोलू के सर पर और पहले से मैला गोलू और ज्यादा मैला हो गया उसने गुस्से से सर उठाकर ऊपर देखा तो बालकनी में खड़ी सोनू भैया की घरवाली ने कहा,”अरे माफ़ करना गोलू जी , हम तो अपने घर का कचरा फेंक रहे थे आपको देखे नहीं”
“देखे नाही फिर भी निशानों पक्को है आपको,,,,,,,और कचरा फेंकना है तो कचरा गाड़ी मा फेंको गली मा काहे फेंक रही हो,,,,,!!!”,गोलू ने चिढ़कर कहा

“सॉरी,,,,,,,!!!”,भाभी ने कहा तो गोलू पिघल गया और अपने ऊपर गिरा कचरा हटाते हुए कहा,”अब इत्ता प्यारा से सॉरी कह रही हो तो दुइ बाल्टी कचरा और डाल दयो हमाये ऊपर”
“काहे , मुंसिपाल्टी का डिब्बा हो तुमहू ?”,गुप्ता जी की कड़कदार आवाज गोलू के कानो में पड़ी
“जे कोयल जैसी आवाज एकदम से कौवे जैसी कैसे हो गयी ?”,गोलू ने गर्दन घुमाकर देखा तो पाया मिश्रा जी के घर के दरवाजे पर गुप्ता जी खड़े है। गोलू जल्दी से मिश्रा जी के घर की तरफ आया और सोनू भैया की घरवाली भी अंदर चली गयी।

“बीच सड़क पर खड़े होकर मोहल्ला की बहू बेटियों से बतियाते लाज-शर्म नाही आती आती है तुमको ?”,गुप्ता जी ने गोलू के सर पर एक चपत लगाकर कहा
“हाँ तो बतिया ही तो रहे थे कौनसा ओह्ह्ह के घर मा घुस गए”,गोलू ने तुनककर कहा
“जबान , जबान बहुते चलने लगी है तुम्हायी गोलू गुप्ता,,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने गोलू का कान मरोड़कर कहा
गोलू मारे दर्द के बिलबिलाया तो गुप्ता जी ने उसका कान छोड़कर कहा,”जे भांड बनकर काहे घूम रहे हो ? घर जाकर नहाय ल्यो”

“पहिले गुड्डू भैया से मिल ले फिर घर ही आ रहे है सीधा,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
“ऐसे जाओगे ?”,गुप्ता जी ने गोलू की हालत देखकर कहा
“हाँ,,,,,,,,!!!”,गोलू ने बेपरवाही से कहा
“मेहमान आये हुए है ओह्ह्ह के घर मा , तुमको देखकर का सोचेंगे ? अपनी नाही तो कम से हमायी इज्जत का तो ख्याल करो गोलू”,गुप्ता जी ने कहा

“अरे तो हम कौनसा वहा सबसे मिलने जा रहे है गुड्डू भैया को बाहिर बुलाकर मिल लेंगे,,,,,,,,और आप जाओ अम्मा से कहना हमरे नहाने के लिए गर्म पानी रख दे”,गोलू ने कहा और अंदर चला गया
“गर्म पानी के साथ तुमको दुइ चार लठ की भी जरूरत है गोलुआ , तुमहू पहुँचो साले घर आज तुम्हायी बिना साबुन के धुलाई करवाते है गुप्ताइन के हाथो”,बड़बड़ाते हुए गुप्ता जी भी वहा से चले गए।

गोलू अंदर आया और आँगन की सीढ़ियों पर ही रुक गया उसने देखा हॉल में गुड्डू सबके साथ बैठा है तो सबके सामने उसे आवाज देने के बजाय इशारो से बुलाने की कोशिश की। अब गुड्डू की नजर तो गोलू पर पड़ी नहीं लेकिन जैसे ही मिश्रा जी की नजर पड़ी उन्होंने गुड्डू से कहा,”ए गुड्डू ! उह्ह बाहिर कोनो मांगने वाला आया है , जाकर कुछो खाने को देइ दयो ओह्ह्ह का”

गुड्डू उठाए और किचन से कुछ पुड़िया और लड्डू उठाए लाया। वह आँगन की सीढ़ियों पर आया गोलू की हालत देखकर वह भी नहीं समझ पाया कि ये गोलू है या कोई और उसने पूड़ी और लड्डू गोलू की तरफ बढाकर कहा,”शरीर से तो हट्टे कट्टे दिखते हो फिर भीख काहे मांगते हो बे ?”
गोलू ने सुना तो उसके गुस्से का पारा सातवे आसमान पर पहुँच गया और उसने कहा,”गुड्डू भैया ! हम का आपको भिखारी दिखते है,,,,,,,,!!!”

“अरे गोलू तुम ! पर जे का हाल बना रखो है , और ऐसे दलिद्र बनके काहे चले आये हिया पता है ना घर मा मेहमान आये हुए है,,,,,,,,,,,जाओ जाकर नहाकर आओ”,गुड्डू ने अंदर झांकते हुए दबी आवाज में कहा ताकि कोई और गोलू को इस हाल में ना देखे।
गोलू ने सुना और गुड्डू को घूरने लगा तो गुड्डू ने अपनी जेब से पैसे निकालकर गोलू की जेब में रखे और कहा,”किराने की दुकान से साबुन की टिकिया खरीदो और अच्छे से नहाकर आओ,,,,,,,,,,,,चलो भागो हिया से,,,,,,,,!!!”

“वाह गुड्डू भैया वाह !  हम आपके लिए अपने ससुर से लड़कर आये है और आप अपने ससुराल वालो के लिए हमको ही भगा दे रहे है यही है आपकी दोस्ती,,,,,,,,!!!”,गोलू ने ताली पीटते हुए कहा
गुड्डू ने गोलू को घूरकर देखा और कहा,”भाग जाओ हिया से,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू अंदर चला गया और बेचारा गोलू भी चुपचाप वहा से निकल गया हालाँकि गुड्डू अपनी जगह सही था आखिर वह अपने ससुराल वालो के सामने गोलू की वजह से अपनी छीछा लेदर कैसे करवा सकता था  

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संजना किरोड़ीवाल

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Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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