Manmarjiyan Season 4 – 26

Manmarjiyan Season 4 – 26

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

गुड्डू गोलू की बातो में आकर लवली अपनी जिंदगी का पहला कांड करने जा रहा था और इसके बाद क्या होने वाला था इसकी खबर उसे नहीं थी। चाय खत्म करने के बाद गुड्डू ने गोलू को पैसे दिए और दुकानवाले को देकर आने को कहा। गोलू चला गया तो गुड्डू और लवली उठे और गुड्डू ने कहा,”लवली भैया ! चिन्तियाओ नाही हम है ना हम सब ठीक कर देंगे,,,,,,,,,आज सोनू भैया के जे ऑफिस वाला फंक्शन सुलट जाए ओह्ह के बाद कल सुबह ही निकल जायेंगे चकिया के लिए,,,,,,,बाकि कानपूर मा सब आप सम्हाल लेना”

“लेकिन पिताजी से का कहेंगे गुड्डू और आज साम मा तुम्हाये ससुराल वाले भी आ रहे है,,,,,,उह्ह्ह सब तुमको हिया नाही देखे तो जियादा परेशानी हो जाएगी”,लवली ने उलझनभरे स्वर में कहा
“हम्म्म्म बात तो आपकी सही है , गोलू ने जो आर्डर लिया है ओह्ह के लिए चंदौली परसो जाना है न तो हम परसो गोलू के साथ ही निकल जायेंगे,,,,,,,इस से हम शगुन के घरवालों से भी मिल लेंगे और पिताजी को हम पर सक भी नहीं होगा”,गुड्डू ने कहा

“हाँ आपके पिताजी तो कानपूर के सबसे सीधे आदमी है , गुड्डू भैया भूलो मत उह्ह आपके बाप है,,,,,,,उड़ती चिड़िया के पर गिन लेते है उह्ह्ह आपको लगता है आपकी चालबाजी नाही पकड़ेंगे”,गोलू ने गुड्डू के बगल में आकर अपना दाँत कुरेदते हुए कहा  
लवली ने सुना तो गोलू को देखा और फिर गुड्डू से कहा,”गुड्डू हमको तो लगता है जे तुम्हरा दोस्त ही कुछो न कुछो गड़बड़ करेगा,,,,,,,!!”

“अरे का गुड्डू भैया के दोस्त , आप भी हमको अपना दोस्त समझ सकते है”,गोलू ने चिढ़कर कहा
लवली ने गोलू को घूरकर देखा और अपनी उंगलिया अपने ललाट पर घुमाकर कहा,”माथा ख़राब नहीं है हमारा जो तुमको अपना दोस्त बनाएंगे,,,,,,उह्ह तो गुड्डू की वजह से झेल रहे है तुमको वरना अब तक यही पटक के पेल देते”

 गोलू ने सुना तो बेचारे का मुँह उतर गया। लवली वहा से चला गया तो गोलू ने मायूस होकर कहा,”का गुड्डू भैया ! हमहू कुछो गलत कहे का ? अरे हम तो आपकी तरह उनको भी अपना भाई अपना दोस्त मानते है पर लवली भैया ने तो हमाओ दिल ही तोड़ देही,,,,,,,,,का कबो ऐसा होगा जब उह्ह हमको आप जितना पियार करेंगे”

गोलू को मायूस देखकर गुड्डू ने उसके कंधो पर अपनी बाँह डालकर कहा,”अरे करेंगे करेंगे गोलू , उदास काहे होते हो ? अभी लवली भैया बिंदिया भाभी को लेकर टेंशन मा है , हम एक ठो काम करेंगे बिंदिया भाभी को कानपूर लाने का क्रेडिट तुमको दिलवा देंगे फिर देखना लवली भैया कैसे खुश होते है तुमसे,,,,,,,!!!”
“का सच कह रहे है गुड्डू भैया ?”,गोलू ने खुश होकर कहा
“हाँ गोलू ! हमने किया तुमने किया एक ही बात है,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने कहा

गोलू गुड्डू से चिपक गया और कहा,”सच्ची आप बहुते अच्छे है गुड्डू भैया ! अरे हम तो कहते है आप आदमी ही नहीं,,,,,,,,,,!!”
“तो हम का तुमको औरत दिखते है”,गुड्डू ने गोलू को खुद से दूर करके कहा तो गोलू ने झेंपते हुए कहा,”अरे हमरा मतलब देवता है आप देवता,,,,,,,!!”
“हाँ हाँ ठीक है जियादा मक्खन ना लगाओ हमको समझे , अब चलो चलकर देखते है सोनू भैया के हिया कोनो चीज की कमी तो नाही सब ठीक है कि नहीं”,गुड्डू ने कहा और अपनी बाइक की तरफ बढ़ गया
गुड्डू ने बाइक स्टार्ट की और गोलू उसके पीछे आ बैठा। दोनों बाते करते हुए वहा से निकल गए

शाम का समय , मिश्रा जी का घर
मिश्रा जी लवली को गाड़ी की चाबी दी और कहा,”बिटवा ! गुप्ता जी और उनका पूरा परिवार स्टेशन पर आ गवा है तुमहू जाकर ओह्ह्ह का लेइ आओ हम बाकी का बंदोबस्त देखते है,,,,,,,,,!!!”
“ठीक है पिताजी लेकिन हम उन्हें पहचानेंगे कैसे ?”,लवली ने कहा

“वे लोग स्टेशन के बाहर ही मिल जायेंगे 6 लोग है और कुछो नाही समझ आये तो हमे फोन मिलाय लेओ,,,,,,,,,हम गुडडुआ को भेज देते पर का है ना उह्ह्ह भी सोनुआ के हिया व्यस्त रहा,,,,,,,,,जाओ बेटा जल्दी जाओ वे लोग पहुंचने वाले ही होंगे”,मिश्रा जी ने लवली की बाँह थपथपाकर कहा और वहा से चले गए।
लवली चाबी लेकर घर से बाहर चला आया और गाड़ी लेकर स्टेशन के लिए निकल गया।

मिश्रा जी के घर , परिवार और मोहल्ले वाले जानते थे कि मिश्रा जी के घर में गुड्डू का जुड़वा भाई भी रहता है जो बिल्कुल उसके जैसा दिखता है लेकिन शगुन के घरवालों को अभी तक इसकी खबर नहीं थी ऊपर से मिश्रा जी ने लवली को स्टेशन भेज दिया उन्हें घर लेकर आने के लिए,,,,,,,,,,!!!

लवली स्टेशन पहुंचा और गाड़ी साइड में लगाकर अंदर आया। स्टेशन पर ज्यादा भीड़ तो नहीं थी फिर गुड्डू के ससुराल वालो को ढूंढना उसके लिए मुश्किल ही था वह इधर उधर देखने लगा लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आया तभी उसका फोन बजा। लवली ने अपना फोन निकालकर देखा तो स्क्रीन पर गुड्डू का नाम देखकर फोन उठाकर कहा,”हाँ गुड्डू”
“लवली भैया कहा हो आप ?”,गुड्डू ने कहा
“स्टेशन आये है”,लवली ने कहा
“स्टेशन काहे ?”,गुड्डू ने पूछा

“अरे यार गुड्डू ! पिताजी भी ना कभी कभी हद करते है , नइ मतलब तुम्हाये ससुराल वालो के लेने के लिए हमे स्टेशन भेज दिया बताओ , एक तो हम कबो तुम्हाये ससुराल वालो से मिले नाही ऊपर से हमको जे समझ नहीं आ रहा उन्हें ढूंढे कहा ?”,लवली ने गुड्डू को अपनी परेशानी बताई !
गुड्डू ने सुना तो हसने लगा और फिर कहा,”परेशान मत होईये हम आपको अमन का नंबर भेजते है”
“अब जे अमन कौन है ?”,लवली ने कहा

“अरे हमाओ साला , वही तो आ रहे है वेदिया को देखने,,,,,,और सुनो लवली भैया”,गुड्डू ने कहा
“का ?”,लवली ने कहा
“शगुन के पिताजी और चाचा चाची होंगे तो उनके पैर छू लेना,,,,,,और जरा मुस्कुराकर बात करना , का है कि अभी आपको जानते नहीं है ना उह्ह लोग तो आपको गुड्डू ही समझेंगे”,गुड्डू ने कहा
“हम उनके पैर काहे छुए बे ?”,लवली ने चिढ़कर कहा

“अरे क्योकि उनके लिए आप गुड्डू है,,,,,,,,,हम अमन का नंबर भेजते है आप फोन करके पूछ लो कहा पहुंचे उह्ह लोग”,गुड्डू ने कहा
“हम्म्म ठीक है”,लवली ने कहा और गुड्डू के मैसेज का इंतजार करने लगा
गुड्डू ने लवली को अमन का नंबर भेजा , लवली अमन का नंबर देख ही रहा था कि तभी कुछ ही दूर खड़ी प्रीति की नजर लवली पर और उसने लवली को गुड्डू समझकर साथ खड़े गुप्ता जी से कहा,”पापा ! वो रहे गुड्डू जीजू”

गुप्ता जी और बाकि सबने भी लवली को गुड्डू समझा और अपना सामान उठाकर उसकी तरफ बढ़ गए लेकिन उनसे पहले प्रीति लवली के पास पहुंची और चहकर कहा,”आप मुझे ही ढूंढ रहे थे ना ?’
“कौन है आप ?”,लवली ने चौंककर कहा क्योकि वह तो प्रीति से पहली बार मिल रहा था
प्रीति ने सुना तो हैरानी से कहा,”क्या जीजू ! अपनी इकलौती साली को भूल गए ? आप मुझसे इसलिए नाराज है ना क्योकि मैंने इतने दिनों से आपको कोई फोन नहीं किया था , पर मैं क्या करती आप तो जानते है ना शादी के बाद लाइफ कितनी चेंज हो जाती है,,,,,,,,,,!!!”

प्रीति ने एक बार जो बोलना शुरू किया तो बस बोलती ही चली गयी। उसकी बातो से लवली ने अंदाजा लगा लिया और मन ही मन खुद से कहा,”ये शायद शगुन की बहन है और हमे गुड्डू समझ रही है,,,,,,,!!!”
लवली को सोच में डूबा देखकर प्रीति ने कहा,”अब मान भी जाईये ना जीजू,,,,,,,,,आप ऐसे अच्छे नहीं लगते”
“हाँ हाँ ठीक है,,,,,,,,!!”,लवली ने कहा

लवली का इतना कहना था कि प्रीति खुश होकर आगे बढ़ी और लवली के गले लगते हुए कहा,”ओह्ह्ह गुड्डू जीजू थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू आप सच में बहुत स्वीट है”
बेचारा लवली घबरा गया , आज से पहले बस एक बिंदिया उसकी दोस्त थी जिसका उसने कभी हाथ तक नहीं पकड़ा था और यहाँ प्रीति उसे गले लगा रही थी।

प्रीति लवली से दूर हटी तब तक बाकी सब भी वहा चले आये। अमन ने आते ही लवली को गुड्डू समझ कर उस के पैर छुए और रोहन ने उस से हाथ मिलाया तो लवली को गुड्डू की बात याद आयी और उसने आगे बढ़कर चाचा , चाची छुए और जैसे ही गुप्ता जी के पैर छूने लगा उन्होंने उसे बीच में ही रोक लिया और गले लगाकर कहा,”अरे दामाद हमारे पैर छूकर हमे शर्मिंदा क्यों कर रहे है आप ?”
लवली उनसे दूर हुआ तो गुप्ता जी ने कहा,”घर में सब ठीक है , शगुन नहीं आयी ?”

“जी वो घर पर आप सबका इंतजार कर रही है , चले ?”,लवली ने पूछा क्योकि वह ज्यादा देर गुड्डू बनने का नाटक नहीं कर सकता था।
“हाँ हाँ चलिये,,,,,!!”,गुप्ता जी ने अपना बैग सम्हाले आगे बढ़ते हुए कहा
“लाईये ये मुझे दीजिये , आप चलिए”,गुड्डू ने गुप्ता जी के हाथ से बैग ले लिया और चलने को कहा।
रोहन और अमन बाते करते हुए आगे निकल गए , गुप्ता जी चाचा और चाची उनके पीछे , लवली ने गुप्ता का बैग उठाया और जैसे ही आगे बढ़ा प्रीति ने अपना छोटा सा बैग लवली की तरफ बढाकर कहा,”जीजू मेरा भी बैग उठा लो ना”

लवली ने बिना कुछ कहे दूसरे हाथ से प्रीति का बैग भी ले लिया तो प्रीति ने साथ चलते चलते लवली की बाँह थामी और कहा,”अरे यार आप इतने प्यारे क्यों हो ?”
बेचारा लवली जैसे तैसे खुद को कन्ट्रोल करके चल रहा था साथ ही पहली बार मिश्रा जी पर भी थोड़ा गुस्सा आ रहा था उसे कि आखिर क्यों उन्होंने गुड्डू की जगह उसे स्टेशन भेजा। ऊपर से प्रीति वह तो लवली को गुड्डू समझकर उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले थी। लवली सबके साथ गाड़ी के पास आया और सब सामान पीछे दिग्गी में रखकर सबको अंदर बैठने को कहा

गाड़ी 7 सीटर थी इसलिए सभी आराम से अंदर बैठ गए। अमन और रोहन सबसे पीछे , प्रीति , चाची और चाचाजी बीच में और गुप्ता जी ड्राइवर के बगल वाली सीट पर आ बैठे। लवली बाहर ही था कि तभी उसका फोन बजा और इस बार भी फोन गुड्डू का ही था।
“हेलो ! लवली भैया , मिले उह्ह लोग आपको ?”,गुड्डू ने पूछा
“हाँ मिल गए घर ही लेकर जा रहे है सबको”,लवली ने मायूसी भरे स्वर में कहा
“का हुआ ! आप इतना बुझे बुझे काहे लग रहे है ?”,लवली ने चिंतित स्वर में पूछा

“अरे यार गुड्डू ! यार तुम आ जाओ भाई हमसे जे सब नहीं सम्हाला जाएगा”,लवली ने कहा
“हाँ बस हिया से फ्री होते ही सीधा घर ही आ रहे है तब तक थोड़ा एडजस्ट कर लीजिये हमायी खातिर”,गुड्डू ने प्यार से कहा
“उह्ह्ह तो हम कर लेंगे और जे अपनी साली से कहो हमसे थोड़ा कम चिपके,,,,,,,,,जब से आयी है तब से जीजू जीजू कहके सटी जा रही है हमसे”,लवली ने कहा और गाड़ी का दरवाजा खोलकर अंदर आ बैठा।

“ठीक है आप परेशान मत होईये , सबको लेकर घर पहुँचिये एक बार सबको पता चल जाएगा तो कोनो परेशानी नाही होगी,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने कहा
“हम्म्म ठीक है रखते है”,कहकर लवली ने फोन काट दिया
बगल में बैठे गुप्ता जी ने लवली की तरफ देखा और कहा,”किसका फोन था बेटा जी ?”
“गुड्डू का,,,,,,,,,,,!!!”,लवली के मुँह से निकला

“गुड्डू जी तो आप ही है,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने हैरानी से कहा
लवली ने सुना तो उसने तुरंत बाद बदल दी और कहा,”अरे वो हमारे पड़ोस में भी है एक ठो गुड्डू पांडे तो उसी का फोन था,,,,,,,हिया कानपूर मा हर चौथे लड़के का नाम गुड्डू होता है,,,,,,,,!!!”
“पर कानपूर का हर चौथा लड़का गुड्डू नहीं होता है जीजू,,,,,,,,,,,!!!”,पीछे बैठी प्रीति ने कहा तो लवली ने गाड़ी स्टार्ट की और वहा से निकलने में ही भलाई समझी

शाम का वक्त था और हल्का अँधेरा हो चुका था। लवली से बात कर गुड्डू गोलू को ढूंढते हुए आया तो देखा टेबल के पास कुर्सी डाले गोलू बोतल से गिलास में उड़ेलकर कुछ तो पी रहा है। गुड्डू उसके पास आया , उसने सामने रखे छोटे छोटे गिलास देखे उनमे से एक उठाया और सुंघा तो उसकी आँखे फ़ैल गयी और चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये। उसने गोलू के हाथ से गिलास छीनकर उसे भी सुंघा तो उसमे से और ज्यादा गन्दी बदबू आयी ये देखकर गुड्डू ने कहा,”अबे गोलू जे का पी रहे हो तुम ?”

“कौन कमबख्त ये बताने को पीता है कि उह्ह का पी रहा है ? अरे हम तो इसलिए पी रहे है कि हिया फ़ोकट मा मिल रही है”,गोलू ने लड़खड़ाती जबान में कहा
“अबे जे शराब है गोलू , साले तुमको किसने कहा जे पीने के लिए ?”,गुड्डू ने गुस्से से दबी आवाज में कहा
गोलू जो दो तीन पैग पी चुका था उठा , उसके मुँह में शराब का घूंठ था जिसे निगलने की कोशिश करते हुए उसने कहा,”अरे गुड्डू भैया सोनू भैया आये थे बोले इंजॉय करो तो हमने,,,,,,,,,,!!”

कहकर गोलू लड़खड़ाया और गुड्डू पर जा गिरा मुँह में भरा घूंठ गुड्डू की शर्ट पर गिर गया। गुड्डू ने उसे सम्हाला और सीधा खड़े करके कहा,”पैर तो जमीन पर टिक नाही रहे तुम्हाये और एन्जॉय करेंगे,,,,,,,,,,किसने कहा था इतनी पीकर भंड होने को ?  

“अरे किसने कहा हम होश मा नहीं है ? देखो आप गुड्डू भैया हो हम गोलू गुप्ता उर्फ़ पिंकेश गुप्ता है उह्ह्ह वहा सोनू भैया के ऑफिस की पार्टी चल रही है और हम पिंकिया से बहुते पियार करते है पर साला उह्ह शर्मा को ना जाने हमसे कौनसी जलन है हमसे कहता है गोलू हम अपनी मूछ मुंड देंगे,,,,,,,,,,,अरे तो मुंड दो हमे का हम का तुमको दुर्गेश नाई दिखते जो हमसे सलाह ले रहे हो,,,,,,,,,,,पर एक बात बताये गुड्डू भैया लवली भैया की सादी अगर फुलवारी से हो जाये न तो उनका भी घर बस जाए आपकी तरह ,

घर मा एक और बहू आ जाएगी तो गज्जू गुप्ता भी बाप बनने का सुख देख लेंगे,,,,,,,,अम्मा से कह के लखनऊ की टिकट करवा देते है सबेरे यादव जी को लेकर अस्पताल जाना है,,,,,,,,,भाभी बताय रही थी पांचवा महीना चल रहा ओह्ह का सोचा चेकअप करवाय दे,,,,,,,,,,,,!!!”

गोलू नशे में क्या बड़बड़ा रहा था उसे खुद कुछ पता नहीं था गुड्डू ने सुना तो अपना सर पकड़ लिया। घर पर शगुन के घरवाले पहुंचने वाले थे और इधर गोलू ने नया रायता फैला दिया। गुड्डू ने इधर उधर देखा और सामने से आते रवि को अपने पास बुलाकर कहा,”ए रवि हमायी बात ध्यान से सुनो , पटकापुर मा गोलू का घर जानते हो ना ?
“हाँ भैया जानते है ना,,,,,,,,,बताईये का हुआ ?”,रवि ने कहा
गुड्डू ने गोलू की बाँह पकड़कर उसे सीधा खड़ा किया और कहा,”जे गोलुआ हिया फैले ओह्ह से पहिले जे का घर पहुचाय दयो,,,,,,,,,,,कर पाओगे ?’

“हाँ भैया पहुंचा देंगे आप चिंता नाही कीजिये , वैसे इनको हुआ का है ?”,रवि ने गोलू को सम्हाल कर कहा
“हमायी अच्छी खासी जिंदगी मा चरस बोने का शौक चढ़ा है इनको,,,,,,,,,अपने ही काम मा दारू पीकर भंड हुए पड़े है जे महान इंसान,,,,,,,,हिया किसी ने इसको जे हालत मा देखा तो कित्तो नाम खराब होई है हमाये काम को,,,,,,,,,ए रवि ! ए बाबू हमायी रिक्वेस्ट है तुमसे इसको लेकर जाओ”,गुड्डू ने रोआँसा होकर कहा

रवि ने गोलू को सम्हाला और वहा से लेकर चला गया। परेशान गुड्डू ने टेबल पर रखा वही गोलू वाला गिलास उठाया और उसमे बची शराब का आखरी घूंठ पानी समझ कर पी गया। अगले ही पल गुड्डू को अहसास हुआ और उसने गंदा सा मुँह बनाया

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संजना किरोड़ीवाल  

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