Sanjana Kirodiwal

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मनमर्जियाँ – 23

Manmarjiyan – 23

Manmarjiyan - 23

Manmarjiyan – 23

मनोहर गुड्डू को सलाह देकर जैसे ही जाने लगा , गुड्डू के दिमाग में आइडिआ आया और उसने मनोहर को रोकते हुए कहा,”मिल गया लड़का”
“कौन ?”,मनोहर ने हैरानी से कहा
“कौन क्या भाई तू ?”,गुड्डू ने खुश होकर कहा
“पागल है क्या मैं कैसे शादी कर सकता हूँ ?”,मनोहर ने कहा इतने में गोलू भी वहा चला आया और मनोहर के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा,”और मनोहर भैया तुम कब आये ?”
“अरे गोलू हम जब आये तब आये पहले अपने इस दोस्त को समझाओ यार”,मनोहर ने कहा
“भाई मान जा ना”,गुड्डू ने मनोहर से मनुहार करते हुए कहा
“मनोहर भैया वो सामने दिवार देख रहे हो ना ?”,गोलू ने कहा
“हां ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,लेकिन ये काहे पूछ रहे हो ?”,मनोहर ने कहा
“गुड्डू भैया को समझानें से अच्छा है तुमहू इस दिवार पर सर दे मारो , इह ना समझेगा”,गोलू ने गुड्डू को घूरते हुए कहा
“अरे यार गोलू तुमहू हटो साइड”,कहते हुए गुड्डू ने गोलू को साइड किया और खुद मनोहर का हाथ पकड़ कर बोला,”मनोहर देख यार दोस्त कहते हो ना तुमहू हमे तो बस दोस्ती का फर्ज निभा दयो ! रौशनी बहुते अच्छी लड़की है बचपन से देखते आये है उसे ,, सुन्दर है , घर के कामो में परफेक्ट है , सिलाई कढ़ाई सब आता है उसे ,, और खाना , खाना तो इतना अच्छा बनाती है की तुमहू ऊँगली चाटते रह जाओ”
“लेकिन गुड्डू ऐसे कैसे मैं उस से शादी कर सकता हूँ ?”,मनोहर ने कहा
“वैसे ही जैसे शाम को लड़की देखने जा रहे हो उसके बजाय रौशनी को देखने आ जाओ ना , पसंद आये तो शादी के लिए हां कह दो। वैसे भी घरवाले तुम्हायी शादी तो कर ही रहे है”,गुड्डू ने कहा
गुड्डू के जिद करने पर मनोहर ने कहा,”अच्छा ठीक है लेकिन अगर लड़की पसंद नहीं आयी तो हम नहीं करेंगे शादी”
“डन ! लड़की पसंद करवाने की जिम्मेदारी हमारी बस तुम शाम को घरवालों के साथ आ जाओ”,गुड्डू ने कहा
“चल ठीक है लेकिन सिर्फ तेरी दोस्ती के लिए आऊंगा ठीक है”,कह कर मनोहर चला गया तो गुड्डू ने कहा,”किसी के लिए भी आओ बस आ जाओ”
मनोहर के जाने के बाद गोलू गुड्डू के पास आया और कहा,”भैया का चल रहा है इह सब ? फिर से कुछो कांड तो नहीं ना करने वाले तुम ?”
“अरे नहीं गोलू इस बार कर्म करेंगे काण्ड नहीं ,, तुम बताओ तुम हिया का कर रहे हो ?”,गुड्डू ने हेंगर से तौलिया लेते हुए कहा
“अरे वो बताया था आदर्श नगर वाला मेटर उसी के लिए आये थे , चलो ना यार भैया तुम्हारी जान पहचान है मिश्रा जी के नाम पर मोहर लगा देंगे वो कागज पर”,गोलू ने कहा
“अभी नहीं अभी हमे बहुत काम है”,गुड्डू ने कहा
“ऐसा का काम है ?”,गोलू ने सवाल किया
“ब्यूटी पार्लर जाना है चलोगे ?”,गुड्डू ने कहा
“ब्यूटी पार्लर काहे जाना है अब तुमको ? पहिले से इतने गोर चिट्टे हो”,गोलू ने कहा
“चलोगे या नहीं ?”,गुड्डू ने पूछा तो गोलू ने कहा,”उसके बाद शाम में हमारा काम करवा दोगे ?”
“हां हां पक्का करवा देंगे , तुम बैठो हम नहाकर आते है”,गुड्डू ने कहा और वहा से चला गया
गोलू वही बैठकर गुड्डू के आने का इंतजार करने लगा। कमरे की हालत देखकर गुड्डू बुदबुदाने लगा,”कैसे जानवरो जैसा कमरा बना रखा है गुड्डू भैया ने ? भाभी आएगी तो क्या सोचेगी ? बस अब तो उन्ही से उम्मीद है की वो गुड्डू भैया को थोड़ा सुधार दे बाकि दिल तो सोना है ही गुड्डू भैया का ! भाभी की बहनिया मान गयी होती तो गुड्डू भैया के साथ साथ एक आध फेरा हम भी खा लेते पर छोडो किस्मत ही खराब है हमारी तो ,, कोई न कोई तो मिल ही जाएगी”

गुड्डू नहाकर आया और कपडे पहने और शीशे के सामने खड़े होकर बाल बनाने लगा। उसने लाइट ब्लू शर्ट और जींस पहना और जूते पहनते हुए गोलू से कहा,”देखो गोलू पहले जायेंगे ब्यूटी पार्लर फिर जायेंगे बाजार उसके बाद घर ,, ठीक है”
“ठीक है भैया हमहू तो कुछो समझ नहीं आ रहा की तुम कर का रहे हो ?”,गोलू ने कहा
तभी गुड्डू का फोन बजा स्क्रीन पर पिंकी नाम देखते ही गोलू का मुंह बन गया और उसने गुड्डू की और फोन बढाकर कहा,”इह लो लुटेरी मोहब्बत फोन आ गवा”
गुड्डू ने देखा पिंकी का फ़ोन है तो उसने फोन काट दिया और फोन जेब में रखते हुए कहा,”भाड़ में गयी मोहब्बत , चलो चलते है”
गोलू ने सूना तो उसको अपने कानो पर यकीन नहीं हुआ और उसने कहा,”का कह रहे हो भैया ? इह सब कब हुआ ? कब छोडो कैसे हुआ ? तुम्हारी आँखों पर
बंधी मोहब्बत की पट्टी इतनी जल्दी खुल गयी”
“गोलू यार बहुत काम है बकैती ना करो , चलो”,गुड्डू ने कहा
गोलू ख़ुशी ख़ुशी गुड्डू के साथ चल पड़ा। गुड्डू निचे आया बाइक निकाली और गोलू को साथ लेकर घर से निकल गया। रौशनी के घर के सामने बाइक रोककर गुड्डू ने पूछा,”चच्चा रौशनी कहा है ?”
“मंदिर गयी है बेटा”,रौशनी के पापा ने कहा और नजर फिर अख़बार में जमा ली। गुड्डू ने बाइक आगे बढ़ा दी और मंदिर के सामने लाकर रोक दी। आज सोमवार था और मोहल्ले की सभी लड़किया मंदिर में आयी हुई थी। गुड्डू बाहर खड़े होकर रौशनी का इंतजार करने लगा। ये देखकर गोलू ने कहा,”अब रौशनी से का काम है तुमको ? और यहाँ ऐसे खड़े रहे तो लोगो को लगेगा हम लड़की छेड़ रहे है”
“गोलू कुछ देर मुंह बंद करके बईठो तुम”,गुड्डू ने कहा तो गोलू चुपचाप बैठ गया। कुछ देर बाद ही रौशनी आयी तो गुड्डू ने उसे अपने पीछे बैठने को कहा। गुड्डू की बात सुनकर रौशनी भड़क गयी और कहा,”काहे ? कल जो किये रहय उस से पेट नहीं भरा तुम्हारा ?”
“गोलू बैठा इसको पकड़ के”,कहते हुए गुड्डू ने जबरदस्ती रौशनी को अपने पीछे बैठाया और गोलू से कहा,”पकड़ के रखना इसे”
गुड्डू रौशनी को लेकर ब्यूटी पार्लर पहुंचा , वहा उतरकर रौशनी ने कहा,”हिया काहे लाये हो हमे ?”
“अपनी गलती सुधारने , तुमको हम पर थोड़ा सा भी भरोसा है तो हमारे साथ चलो , वरना यही से घर चली जाओ”,गुड्डू ने रौशनी की आँखों में देखते हुए कहा
रौशनी कुछ देर सोच में डूबी रही और फिर कहा,”क्या करना होगा ?”
गुड्डू मुस्कुराया और उसे लेकर अंदर चला आया। गुड्डू को देखते ही रिसेप्शन वाली लड़की मुस्कुरा दी तो गुड्डू उसके पास आया और कहा,”इह है रौशनी ,हमायी दोस्त इनको ना एकदम चौचक बनाना है ,, का समझी ?”
“अरे गुड्डू तुम्हारे लिए तो जान भी हाजिर है”,लड़की ने गुड्डू की और देखते हुए बड़े ही कातिलाना अंदाज में कहा तो गोलू ने आगे होकर कहा,”जान वान अपने पास रखो भैया जो बताये उह करो”
“ये कौन है चिलगोजा इसे बाहर निकालो ?”,लड़की ने गुस्सा होते हुए कहा
“अरे अरे स्वीटी ये भी दोस्त है हमारा , गुस्सा मत हो रौशनी का मेकओवर शुरू करो”,गुड्डू ने लगभग लड़की का हाथ पकड़कर कहा तो लड़की पिघल गयी और रौशनी को अपने साथ लेकर चली गयी। गोलू और गुड्डू वही खड़े रहे। कुछ देर बाद रौशनी आयी और शीशे के सामने बैठी उसके चेहरे पर एक एक करके क्रीम थोपी जाने लगी। आँखों पर दो खीरा के टुकड़े रखकर लड़की दूसरे कस्टमर देखने लगी तो गोलू और गुड्डू रौशनी के अगल बगल खड़े होकर बाते करने लगे
“भैया रौशनी का इह मेकओवर किसलिए ?”,गोलू ने सवाल किया
“अरे का है की गिफ्ट कैसा भी हो उसकी पैकिंग ना हमेशा बढ़िया होनी चाहिए”,गुड्डू ने कहा

बातो बातो में गोलू ने रौशनी की आँख पर लगी खीरा उठायी और खाते हुए कहा,”तुम का कह रहे कुछो समझ नहीं आ रहा है हमे , जबसे रिश्ता लगा है तुम्हारा पगला गये हो”
गुड्डू ने भी रोशनी की आँख पर लगा दुसरा खीरा उठाया और खाते हुए कहा,”सब्र रखो शाम में डेमो दिखा देंगे ,, और इह रिश्ता बीच में कहा से आ गया याद ना दिलाओ उह मनहूस घडी जब पिताजी को शादी के लिए हाँ कहे रहय”
“अरे ठीक है भैया , गर्माते बड़ा हो आजकल यार ! इह सब हो रहा है तब तक आदर्श नगर वाला मेटर देख ले का ?”,गोलू ने कहा
“नहीं पहिले इह सब बाकि काम बाद में”,गुड्डू ने कहा तो रौशनी ने आँखे खोली और गुस्से से कहा,”चुप नहीं रह सकते तुम लोग , सारी राम कथा यही हमाये सर पर गानी जरुरी है का ? निकलो यहाँ से”
रौशनी का गुस्सा देखकर दोनों साइड में आ गए . रौशनी के मेकओवर में 3 घंटे लग गए। तब तक गुड्डू और गोलू वही बैठे ऊंघते रहे। जैसे ही रौशनी उन दोनों के सामने आयी दोनों ही उसे देखकर हैरान रह गए। रौशनी बहुत सुन्दर लग रही थी। गुड्डू ने पैसे चुकाए और रौशनी गोलू को साथ लेकर मार्किट आया वहा उसने रौशनी को उसकी पंसद का ड्रेस दिलवाया , ये सब करने में गुड्डू ने वही पैसे खर्च किये जिन्हे पिंकी के कहने पर वह उसके दोस्त को देने वाला था। इन्हे खर्च करके गुड्डू को अच्छा लग रहा था। शाम के 4 बज चुके थे। गुड्डू को मनोहर की याद आयी तो उसने रौशनी और गोलू से घर चलने को कहा।
“पहले कुछ खिलाओ हमे बहुत भूख लगी है”,रौशनी ने कहा गुड्डू ने देखा आस पास में खाने की कोई दुकान नहीं थी। बस कुछ दूर गोलगप्पे वाला खड़ा था इसलिए गुड्डू उसे लेकर उसी के पास चला आया और गोलगप्पे खिलाने को कहा। तीनो ने खाना शुरू किया तभी कही से पिंकी अपनी सहेलियों के साथ उधर से निकली ये देखकर गुड्डू ने जान बूझकर अपने हाथ में पकड़ा गोलगप्पा रौशनी को अपने हाथ से खिलाया ,, रौशनी तो इतने में ही खुश हो गयी लेकिन पिंकी ने देखा तो पैर पटकते हुए वहा से चली गयी। गुड्डू रौशनी और गोलू को लेकर घर चला आया। मोहल्ले वाले रौशनी का नया अवतार देखकर हैरान थे , जैसे ही रौशनी अपने घर आयी तो उसे देखकर घरवाले भी हैरान हो गए। गुड्डू ने रौशनी के पापा से बात की ,, शाम में मनोहर अपने घरवालों के साथ रौशनी के घर रिश्ता लेकर आया। मनोहर सबको पसंद भी आ गया और सब अचानक आये इस रिश्ते से खुश भी थे। जब मनोहर ने रौशनी को देखा तो देखते ही पसंद कर लिया। दोनों परिवारों के बीच बातचीत और आपसी सहमति से रिश्ता तय हो गया। एक दिन पहले गुड्डू की वजह से जिस घर में मातम था आज उसी गुड्डू ने उस घर को खुशिया वापस दे दी। मनोहर और उसके घरवाले शादी की तारीख पक्की करके चले गए। रौशनी के घरवाले इस रिश्ते से बहुत खुश थे , रौशनी के पापा गुड्डू के पास आये और कहने लगे,”हमने तुम्हे गलत समझा गुड्डू हमे माफ़ कर देना , रौशनी के लिए तुमहू अपने दोस्त का रिश्ता के आये”
“मनोहर बहुते अच्छा लड़का है चच्चा , हमायी रौशनी को बहुत खुश रखेगा और अगर परेशान किया कभी तो पेल ससुरे को”,गुड्डू ने कहा
“अरे नहीं बेटा तुमने इतना कर दिया वही बहुत है हमारे लिए , खुश रहो”,कहकर रौशनी के पापा वहा से चले गए। गुड्डू जाने लगा तो पीछे से रौशनी ने आवाज दी,”गुड्डू”
गुड्डू पलटा तो रौशनी उसके पास आयी और गले लगते हुए कहा,”थैंक्यू गुड्डू आज तुम्हायी वजह से घर में सब इतने खुश है ,, हमने तुमसे जो भी कहा उसके लिए हमे माफ़ कर देना। हमने तुमसे प्यार करने की बात कही थी लेकिन असल में वो तो प्यार था ही नहीं ,, प्यार तो आज तुमने निभाया है निस्वार्थ होकर हमारे लिए इतना अच्छा रिश्ता ले आये। तुम बहुत अच्छे हो गुड्डू हम तो हर जन्म तुम्हे ही अपना दोस्त मांगने वाले है”
“अरे बस बस जियादा सेंटी मत हो रौशनी , रिश्ता का तुम्हायी शादी में काम भी करेंगे”,गुड्डू ने मुस्कुरा के कहा तो रौशनी ने उसे रुकने का कहा और अंदर चली गयी वापस आयी तो उसके हाथ में एक पतीला था जिसे प्लेट से ढक रखा था रौशनी ने वह गुड्डू की और बढाकर कहा,”ये लो भरवा आलू मैंने बनाये है तुम्हे बहुत पसंद है ना खा लेना”
गुड्डू पतीला लेकर अपने घर चला आया। मिश्राइन को पता चल चुका था वह तो बहुत खुश थी आज गुड्डू के कारनामे से आते ही उन्होंने गुड्डू की बलाये लेकर कहा,”आज पहली बार तुमने अच्छा काम किया है बेटा , चलो चलो जल्दी से तुम्हारी पसंद का भरवा आलू बनाया है”
“अरे अम्मा उह तो हम रौशनी के घर से लेकर आये है”,गुड्डू ने पतीला आगे करते हुए कहा
“अरे तो कोई बात नहीं थोड़ा थोड़ा करके दोनों खा लेना”,मिश्राइन ने कहा और गुड्डू को अपने साथ ले गयी। गुड्डू बहुत खुश था और इस ख़ुशी की वजह थी रौशनी !!

Manmarjiyan - 23
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संजना किरोड़ीवाल

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