Love You Zindagi – 81

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नैना शादी के लिए हां कर चुकी थी , शीतल के लिए रिश्ता देखने की बात की जा रही थी और रुचिका मोंटी के सगाई के दिन नजदीक आते जा रहे थे। वही अवि अपने काम के साथ साथ नैना को भी बहुत मिस कर रहा था , सार्थक को अब भी शीतल के लौटने का इंतजार था। इन सबकी जिंदगी एक जगह आकर रुक चुकी थी जहा से इन्हे भी नहीं पता था की आगे क्या होने वाला है ? खैर वक्त अपने हिसाब से चल रहा था कोई खुश था तो किसी की आँखों में आंसू थे , किसी को कोई उम्मीद नहीं थी कोई इंतजार में बैठा था , किसी को आस थी की सब ठीक हो जायेगा और कोई इस सोच में था की सब बिगड़ने वाला है। दिन गुजरे और रुचिका मोंटी की सगाई का दिन आ पहुंचा नैना और उसके मम्मी पापा सगाई के पहले दिन ही शर्मा जी के घर पहुँच गए , मोंटी भी ऑफिस से छुट्टी लेकर घर आ चुका था उसने नैना की पसंद का सूट खरीदा। सगाई की सभी तैयारियां हो चुकी थी , सगाई में जाने वाले लोगो की लिस्ट भी बनाई जा चुकी थी सगाई के पहले दिन शाम को सभी को घर से निकलना था एक मिनी बस किराये पर बुलाई गयी जिसमे सवार होकर सभी जयपुर के लिए निकल पड़े। रुचिका और मोंटी लास्ट की सीट पर बैठे थे जो की पूरी खाली थी। नैना खिड़की के पास आलथी पालथी मारकर बैठी थी और मोंटी उसकी बगल में लेटा रुचिका को मेसेज कर रहा था , कुछ देर बाद वह उठा और नैना से कहा,”ए नैना तुमने बताया नहीं तुम मेरी सगाई में क्या पहनने वाली हो ?”
“उममममम क्यों बताऊ ? वैसे भी सरप्राइज है”,नैना ने कहा
“कही ऐसा ना हो रुचि को छोड़कर मैं तेरे पीछे पड़ जाऊ”,मोंटी ने नैना को छेड़ते हुए कहा
“हां हां हां हां वैरी फनी ,, ऐसा हुआ ना तो मैं रूचि को लेकर भाग जाउंगी”,नैना ने कहा
“व्हाट ? तू लड़की है बेटा !”,मोंटी ने कहा
“आई नो लेकिन तेरे जैसे ठरकी दोस्त से उसे बचाना भी मेरा फर्ज है ,, तेरी सगाई होने वाली है और तू अपनी ही बेस्ट फ्रेंड से फ्लर्टिंग कर रहा है ,,, कमीना साला”,नैना ने कहा
“ओह्ह हेलो थोड़ी देर बाद ना तू मेरी साली बनने वाली है ,,, साली मतलब आधी घरवाली,,,,,,,,,,,,,,,,,,थोड़ी लाइन तो मार सकता हूँ ना”,मोंटी ने नैना के कंधे को अपने कंधे से टकराकर कहा
“आह्ह !”,नैना ने एकदम से अपना सर पकड़कर कहा
“क्या हुआ ? तू ठीक है ?”,मोंटी ने चिंता जताते हुए कहा
“हां बस अचानक से सर में दर्द हो रहा है”,नैना ने अपना सर दबाते हुए कहा
“एक काम कर इधर आ अपना सर रख मेरी गोद में मैं दबा देता हूँ ,, सुबह से तैयारियों में लगी है ठीक से खाया पीया नहीं होगा”,मोंटी ने कहा और साइड खिसक गया तो नैना सीट पर लेट गयी और अपना सर मोंटी की गोद में रख लिया , मोंटी हल्के हाथो से नैना का सर दबाने लगा। नैना को थोड़ा सुकून मिला तो उसने अपनी आँखे बंद कर ली और कहा,”मोंटी !”
“हम्म्म !”,मोंटी ने सर दबाते हुए कहा
“जब तेरी शादी हो जाएगी तब भी क्या तू मेरे लिए ये सब करेगा ?”,नैना ने पूछा
“हां बिल्कुल करूंगा ये भी भला कोई पूछने की बात है ,,, जब तेरे मेरे बच्चे हो जायेंगे ना तब भी मैं ऐसे ही तेरा सर दबाया करूंगा , तेरी टांग खींचा करूंगा”,मोंटी ने मुस्कुराते हुए कहा
“और अगर रूचि को अच्छा नहीं लगा ये सब तो,,,,,,,,,,,,,,,,,!”,नैना ने बात अधूरी छोड़ दी !
“उसे हमारे रिश्ते को समझना होगा अगर वो हमारा रिश्ता नहीं समझ पाई तो आगे जाकर शायद मुझे भी नहीं समझ पायेगी ,,, मैं रुचिका को समझा लूंगा”,मोंटी ने पुरे विश्वास के साथ कहा
“डेड मेरे लिए लड़का देख रहे है और इस बार ना कहने की कोई वजह नहीं है मेरे पास”,नैना ने एकदम से उठ कर बैठी और मोंटी से कहा तो मोंटी ने कहा,”अच्छा अच्छा तो ये बात है , इसलिए सर दुःख रहा है मैडम का !”
“आई ऍम सीरियस यार , तू बता ऐसे कैसे किसी लड़के को पहली मीटिंग में ही हां बोल दू मैं ? पहली बार तो सब अच्छा ही बिहेब करते है ना यार”,नैना ने कहा
“हां लेकिन तुझे लव मैरिज भी तो नहीं करनी अंकल आंटी तो उसमे भी खुश है , ना तू खुद किसी को पसंद करती है ना किसी को करने देती है अब बता कैसे सॉल्व होगा ये मामला ?”,मॉन्टी ने नैना को सच से रूबरू करवाते हुए कहा
“आई नो तेरी बात सही है लेकिन इस बार डेड मेरी नहीं सुनेंगे ,,,, आई हॉप सब अच्छा हो !”,नैना ने कहा
“टेंशन मत ले हम सब लोग है ना तेरे साथ ऐसे थोड़े तुझे किसी से भी शादी करने को कह देंगे , मुझे भरोसा है अंकल जरूर अपने जैसा लड़का ढूंढेंगे तेरे लिए जो तुझे सम्हाल सके”,मोंटी ने कहा
“अच्छा सगाई में तू अकेला जा रहा है तेरे दोस्त लोग नहीं आये ?”,नैना ने फिर से उसकी गोद में सर रखकर लेटते हुए कहा
“अरे आएंगे ना , चित्रकूट वाले सारे दोस्त तो बिजी है इसलिए जो बीकानेर में है वो डायरेक्ट कल शाम को सगाई में”,मोंटी ने कहा
“हॉट है क्या ?”,नैना ने शरारत से आँखे चमकाते हुए कहा
“शट अप , अंकल जो लड़का देख रहे है उस पर कॉन्सट्रेट करो”,मोंटी ने नैना के सर पर हल्की सी चपत लगाते हुए कहा और उसके बाद दोनों की तू तू मैं मैं शुरू हो गयी

रुचिका के पापा ने सगाई के लिए वही जयपुर में एक अच्छा हॉल और ओपन गार्डन बुक करवा दिया। उन्होंने भी सगाई में बस सिर्फ खास मेहमानो को ही बुलाया था रुचिका ने तीन खास लोगो को बुलाया था और जयपुर वाले दोस्तों को भी इन्वाइट किया था। उसने सगाई में पहनने के लिए डार्क मेरून वेलवेट का गाउन मंगवाया साथ में हिल्स भी। रुचिका ने जब ट्राय किया तो वह उस पर बहुत जच रहा था। सगाई वाले दिन सुबह से ही उसके घर पर मेहमानो का आना शुरू हो गया सभी रुचिका को सगाई की बधाईया दे रहे थे। कुछ रिश्तेदारों ने मुंह फुला लिया था क्योकि रुचिका का रिश्ता उन्हें कहे ना करके , इतनी दूर किया था। खैर रुचिका ने उन्हें इग्नोर किया और अपने दोस्तों को अटेंड किया लेकिन रुचिका को तो ना जाने किसका इंतजार था ? वह बार बार मेन गेट के पास जाती , कभी फोन मिलाती तो कभी झुंझलाकर वापस अंदर आ जाती। उसे ये करता देखकर कुकू उसके पास आयी और कहा,”अरे आ जायेंगे जीजू इतनी भी क्या जल्दी है ?”
“शट अप कुकू मैं मोंटी का नहीं अपने दोस्तों का वेट कर रही हूँ”,रुचिका ने झिड़कते हुए कहा
“सब दोस्त आ तो गयी तुम्हारी और कौन बच गया अब ?”,कुकू ने कहा
“अरे है कुछ तू जा ऊपर मेरी दोस्तों को अटेंड कर उन्हें नाश्ता पानी दे मैं आती हूँ थोड़ी देर में”,कहकर रुचिका फिर गेट के बाहर देखने लगी
“जीजू से भी खास कौन हो गया इसके लिए ?”,बड़बड़ाते हुए कुकू वहा से चली गयी रुचिका ने देखा कोई नहीं आया तो वह उदास होकर अंदर चली आयी और मन ही मन कहा,”अगर आज तुम तीनो नहीं आये ना तो मैं समझूंगी तुम तीनो मेरे दोस्त नहीं हो”
अंदर आकर रुचिका मेहमानो के बीच बिजी हो गयी। दोपहर बाद सभी गेस्ट हॉउस पहुंचे ,रुचिका कुकू और अपनी किसी भाभी के साथ पार्लर चली गयी। रुचिका की तरफ के सारे मेहमान आ चुके थे , और सभी आने वाले मेहमानो का वेट कर रहे थे। शाम से पहले ही मोंटी के घरवाले अपनी और के मेहमानो के साथ वहा पहुंचे। आलोक ने उनका स्वागत किया ,गेस्ट हॉउस में ऊपर का फ्लोर मोंटी के घरवालों के लिए ही बुक था सभी फ्रेश होने ऊपर चले गए। मोंटी को तो सबने घेर ही लिया और सबने बेचारे पर सवालों की बौछार कर दी। नैना जैसे तैसे उसे लेकर वहा से निकली और ऊपर जाते हुए कहा,”क्रेजी ससुराल है तेरा मोंटी”
“तुझसे ज्यादा नहीं है , बाय दे वे रूचि कहा है ?”,मोंटी ने इधर उधर देखकर कहा
“ओहो सब्र करो , रात में फंक्शन में मिलेगी वो”,कहते हुए नैना खींचते हुए मोंटी को ऊपर ले आयी। दोनों अभी ऊपर आये ही थे की मोंटी के बीकानेर वाले दोस्त आ धमके , मोंटी उनसे मिला सबने मोंटी को बधाई दी गिफ्ट्स दिए और जैसे तीनो की नजर नैना पर पड़ी तीनो मुस्कुरा उठे। नैना ने उन्हें देखा ही नहीं बल्कि वह अपने फोन को ठीक करने में लगी थी जो की बार बार हैंग हो रहा था। तीनो लड़को को नैना की और देखता पाकर मोंटी ने कहा,”ये नैना है मेरी बेस्ट फ्रेंड”
“हैलो नैना जी”,तीनो ने एक साथ नैना की और हाथ बढाकर कहा
नैना को थोड़ा अजीब लगा तो उसने अपने दोनों हाथ जोड़ दिए और कहा,”नमस्ते भाईसाहब !”
बेचारे तीनो लड़के कभी नैना तो कभी मोंटी को देखते मोंटी ने उनकी हालत देखकर अपने कंधे उचका दिए। नैना मोंटी की और पलटी और कहा,”मोंटी मैं जा रही कुछ खाने मुझे भूख लगी है तू बात कर अपने दोस्तों से ,,, सगाई में मिलते है”
“हां ओके”,मोंटी ने कहा तो नैना वहा से चली गयी मोंटी तीनो लड़को के पास आया और कहा,”कमीनो जैसे तुम दोस्त हो वैसे वो भी है ,, खबरदार उसके साथ फ्लर्टिंग करने की कोशिश की तो,,,,,,,,,,,,,,,,,,रूचि की और बहुत दोस्त है वो सब तुम्हारे लिए ही तो है”
“अच्छा ठीक है भाई !”,तीनो में से एक ने कहा
“चलो चाय कॉफी पिलाता हूँ तुम सबको”,मोंटी ने कहा और उन्हें लेकर चला गया।

शाम को 7 बजे सभी मेहमान लॉन में जमा हो गए और नज़ारे देखने लगे। एक तरफ खाने का बंदोबस्त था , दूसरी और चाय , कॉफी , जूस का , लॉन के एक साइड कुछ ऊपर एक स्टेज बना हुआ था जिसपर एक कपल सोफा रखा हुआ था और वह घूम रहा था , वही पास ही में आर्केस्ट्रा वाले गाने बजा रहे थे। लड़के लड़की वाले सभी मेहमान आपस में बाते कर रहे थे। कोई चाय कॉफी पी रहा था कोई स्टार्टर चखने में बिजी था। नवम्बर की सर्दी थी और ऐसे में आदमियों ने भारी भरकम कोट , ब्लेजर पहने थे लेकिन महिलाये साड़ियों और सलवार सूट में थी किसी को सर्दी नहीं लग रही थी , शॉल भी सिर्फ दिखावे के लिए कंधे के एक साइड डाल रखा था। रुचिका तैयार होकर पार्लर से आ चुकी थी नैना उस से मिली लेकिन नैना अभी तक तैयार नहीं हुई थी और ये देखकर रूचि ने कहा,”नैना व्हाट इज दिस ? तुम अभी तक तैयार नहीं हुई क्या है ये सब ?”
“वो मैं सो गयी थी”,नैना ने धीरे से कहा
“तुम कभी नहीं सुधरोगी , अब जल्दी जाओ और तैयार होकर आओ”,रुचिका ने लगभग आर्डर देते हुए कहा
“ओके बॉस , लेकिन तुम बहुत प्यारी लग रही हो”,नैना ने रुचिका की बलाए लेते हुए कहा और चली गयी अभी दो ही कदम चली की उसका फोन बजा नैना ने फोन उठाया मोंटी का था,”नैना कहा है यार तू ? जल्दी रूम में आ”
“मैं,,,,,,,,,,,,,,,,!”,नैना कुछ कहती इस से पहले ही मोंटी ने फोन काट दिया , नैना ऊपर कमरे में आयी और कहा,”हां बोल क्या हुआ ?”
“ये टाई नहीं बंध रहा , प्लीज बांध दे ना”,मोंटी ने टाई नैना की और बढाकर कहा , नैना को वहा देखकर तीनो लड़को की आँखे फिर चमक उठी नैना मोंटी के पास आयी और टाई बांधते हुए कहा,”तीन तीन मुस्टंडे बैठा रखे है , एक टाई नहीं बांध सकते ये लोग”
“भाई हम लोग नीचे जा रहे है तू भी आ जाना”,एक लड़के ने कहा और तीनो वहा से चले गए नैना ने मोंटी की टाई बाँधी और कहा,”ये कैसे बाल बनाये है ? मैं सही करती हूँ”
कहकर नैना ने कंघा उठाया और मोंटी के बालो को एक अच्छा लुक देकर कहा,”नाउ यू लुक हैंडसम !”
मोंटी ने नैना के दोनों हाथो को अपने हाथो में लेकर प्यार से कहा,”अंकल जिस से भी तेरी शादी करवा रहे है ना सच में वो बहुत लकी होगा , जब तुम उसके लिए ये छोटी छोटी चीजे करोगी ना उसे बहुत ख़ुशी होगी !”
“एक एडवाइज दू”,नैना ने कहा
“हां !”,मोंटी ने कहा
“अभी भी मौका है भाग जा वरना लंका लगेगी तेरी”,नैना ने मुस्कुरा कर कहा
“धत पागल , ऐसा कुछ भी नहीं होगा और अगर हुआ तो तू है ना सब ठीक करने के लिए”,मोंटी ने कहा
“ऑलवेज”,नैना ने मुस्कुरा कर कहा
“अच्छा अब जा और जल्दी से तैयार होकर आ”,मोंटी ने शीशे में खुद को देखते हुए कहा
“मैं यु गयी और यु आयी”,कहकर नैना वहा से चली गयी

रुचिका कमरे उदास सी बैठी थी उसकी सभी दोस्त सेल्फ़िया लेने में बिजी थी। रुचिका ने अपने फोन से किसी को फोन लगाया लेकिन कांट रिचेबल आ रहा था
उसने फोन वापस अपने पर्स में रख दिया और खिड़की के बाहर देखने लगी। जिन तीन लोगो को रुचिका ने बुलाया था वे तीनो ही वहा नहीं आये थे। रुचिका का दिल टूट सा गया तभी किसी ने खांसने की एक्टिंग की। रुचिका ने देखा तो उसके होंठो पर मुस्कराहट तैर गयी और चेहरा खिल उठा सामने सार्थक खड़ा था हाथ में बड़ा सा बुके लेकर। रुचिका उठकर उसके पास आयी और कहा,”ये कोई वक्त है आने का ?”
“अरे यार पूछ मत कैसे पहुंचा हूँ यहाँ तक ? और कैसे नहीं आता तेरी सगाई ? मैं बहुत खुश हूँ की तुझे तेरा प्रिंस चार्मिंग मिल गया”,सार्थक ने उसे गुलाबो से भरा बुके देकर कहा
“थैंक्यू सो मच”,रुचिका ने कहा
“अच्छा बाकी सब कहा है ? नैना कहा है ? उसे तो बुलाया होगा ना तुमने”,सार्थक ने इधर उधर देखकर कहा
“ऑफकोर्स नैना आयी है , ये सब उसी की वजह से तो हुआ है”,रुचिका ने ख़ुशी से भरकर कहा
“उसी की वजह से मतलब ?”,सार्थक ने कहा
“ये सब हम लोग बाद में डिस्कस करेंगे , पहले नींचे चलो सबसे मिलो जुलो और हां कुछ खा पी लो”,रुचिका ने कहा
“अच्छा ठीक है”,कहकर सार्थक जाने लगा और रुककर रुचिका की और पलटा,”रुचिका वो शीतल,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!”
“वो नहीं आयी ओर शायद आएगी भी नहीं”,रुचिका ने मायूस होकर कहां तो सार्थक वहा से चला गया।

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संजना किरोड़ीवाल।

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