Love You Zindagi – 75

Love You Zindagi – 75

Love you Zindagi
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शीतल और रुचिका दोनों ही नैना को मिस कर रही थी और उधर नैना घोड़े बेच कर सो रही थी दोपहर में जब उसकी आँखे खुली तो वह उबासियाँ लेते हुए उठी और कमरे से बाहर आई लेकिन घरसही में कोई दिखाई नहीं दिया। नैना बरामदे में चली आयी देखा स्कूबी कोने में बैठा ऊंघ रहा है और दयाल काका बगीचे में पौधे सही कर रहे थे नैना उनके पास आयी और कहा,”काका सब कहा है ?”
“बिटिया भाईसाहब तो गाड़ी लेकर चले गए और भाभी जी पड़ोस में गयी है , तुम्हारे लिए खाना रखा है खा लेना”,दयाल काका ने कहा तो नैना वापस अंदर चली आई स्कूबी भी नैना के पीछे पीछे चला आया और घर में घूमने लगा। नैना ने हाथ मुंह धोया और अपने लिए खाना ले आयी और सोफे पर आ बैठी कुछ खुद खाया नैना ने कुछ खुद खाया कुछ स्कूबी को खिलाया। दोपहर के 3 बज रहे थे ऐसे में नैना अकेले करे तो क्या करे ? अचानक उसे उस लिफाफे की याद आयी जो पंडित जी ने भेजा था , नैना सोफे से उठी और खुद से ही कहा,”जरा देखु तू सही क्या भेजा है पंडित जी ने ?”
नैना अपने रूम में आयी टेबल से वो लिफाफा उठाया और उसे खोला , लिफाफे में एक कुंडली , एक बॉयोडाटा और एक लड़की का फोटो था नैना ने फोटो देखा दुबली पतली , सुन्दर सी लड़की का फोटो था। नैना ने फोटो साइड में रखा और बॉयोडाटा उठाकर देखा – मीनाक्षी शर्मा , उम्र 23 साल , कद 5 फुट 4 इंच , रंग गोरा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ओह्ह्ह तो मोंटी के लिए ये रिश्ता आया है,,,,,,,,,,,,,,,,उम्म्म लेकिन कुछ जम नहीं रहा है,,,,,,,,,,,,,,,बट नैना इज द बेस्ट”
कहते हुए नैना उठी और निचे अपने पापा के कमरे में आयी और कम्प्यूटर के सामने बैठकर कुछ काम करने लगी कुछ देर बाद एक प्रिंट निकाला और उसे देखकर मुस्कुरा उठी , उसके बाद एक पेन ड्राइव लेकर बाहर आयी और दयाल काका की और बढाकर कहा,”काका ये पेन ड्राइव लेकर मुकुल की शॉप पर जाना और मेरी बात करवा देना वो आपको लिफाफा देगा उसे लेकर आना है , थोड़ा अर्जेन्ट है अभी चले जायेंगे प्लीज”
“ठीक है बिटिया।”,काका ने कहा और वहा से चले गए
नैना अंदर आयी उसने जो प्रिंट निकाला था उसे लेकर वापस अपने कमरे में आयी। मीनक्षी की फोटो और बायोडाटा उसने फाड़कर फेंक दिया और खिड़की के पास आकर खड़ी होकर खुद से ही कहने लगी,”सूना है जोड़ी ऊपरवाला बनाता है लेकिन कुछ जोडिया तो मेरे हाथो ही बननी है , प्लीज भगवान सम्हाल लेना वैसे भी मेरी जिंदगी में कम भसड़ नहीं मचाई है आपने,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,सॉरी मैंने खुद ने लेकिन इस बार सम्हाल लेना प्लीज”
नैना वही खड़े खड़े खुद से बातें करती रही फोन बजा तो बात की और मुकुल को समझाया। फोन रखकर नैना निचे चली आयी तब तक आराधना भी आ चुकी थी नैना ने उनसे चाय पिने की इच्छा जाहिर की तो आराधना ने कहा,”खाना खाया तुमने ?”
“हां मॉम कबका खा लिया था”,नैना ने कहा
“बेटा इतनी चाय मत पिया करो , प्रॉब्लम हो जाएगी।”,आराधना ने कहा
“मम्मा वो मोहब्बत ही क्या जो तकलीफ ही ना दे , प्लीज बना दीजिये ना”,नैना ने नौटंकी करते हुए कहा तो आराधना हसने लगी और किचन की और जाते हुए कहा,”यही हाल रहा ना तो एक दिन किसी चायवाले से ही शादी करा देनी है मैंने तेरी , फिर बैठ के दोनों पीते रहना चाय”
“हां हां हां हां वेरी फनी मॉम , अगर ऐसा हुआ तो उसकी दुकान डूब जाएगी ,, क्योकि कस्टमर से पहले तो हम लोग ही पी जायेंगे उस चाय को”,नैना ने सोफे पर बैठते हुए कहा। स्कूबी उसके पास चला आया तो नैना उसके बालो में अपनी उंगलिया घुमाने लगी। स्कूबी भी बड़े आराम से निचे बैठा था कभी नैना तो कभी सामने पड़ी टेबल को देखता। आराधना चाय ले आयी और नैना के सामने रखते हुए कहा,”अच्छा नैना तुम्हारे वो मैनेजर क्या नाम है उनका अनुराग,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,हां अनुराग ,,, वो कैसा है ?”
“अच्छा है !”,नैना ने चाय का कप उठाकर उसका एक घूंठ भरते हुए कहा
“हम्म्म्म ! अच्छा तो है और संस्कारी भी है”,आराधना ने कहा
“आप क्यों पूछ रही है ?”,नैना ने कहा
“नहीं बस ऐसे ही , दिल्ली गए थे तब मिले थे ना मित्तल भाईसाहब से तो वही अनुराग से भी मिलना हो गया।”,आराधना ने कहा
“व्हाट ? आप और डेड उनके घर गए थे ?”,नैना ने एकदम से कहा
“हां उन्होंने बुलाया था , फिर अनुराग के मामा तुम्हारे डेड के दोस्त भी तो है ,,, मिलने में क्या हर्ज है ?”,आराधना ने कहा
“ये आप और डेड मिलकर जो खिचड़ी पका रहे हो ना मैं उसमे बिल्कुल तड़का लगाने वाली नहीं हूँ मॉम !”,कहते हुए नैना उठी और जाने लगी तो आराधना ने कहा,”अच्छा तो ऐसे कब तक अकेले रहने का इरादा है ?”
“मॉम प्लीज अभी मुझे कोई शादी वादी नहीं करनी है , इन्फेक्ट कभी नहीं करनी है सो प्लीज डोंट डू दिस अगेन”,नैना ने कहा और जाने लगी तो बाहर से दयाल काका आते दिखाई दिए नैना भागकर उनके पास गयी उनसे पेन ड्राइव और लिफाफा लिया और अपने कमरे में चली आयी।
“पता नहीं कब अक्ल आएगी इस लड़की को ?”,कहते हुए आराधना भी वहा से चली गयी। अपने कमरे में आकर नैना ने प्रिंट किया हुआ पेपर और वो फोटो एक नए लिफाफे में डालकर रख दिया। जो कुंडली पहले लिफाफे में आयी थी वो उसने अपने ड्रावर में रख दी और बिस्तर पर लेट गयी। कुछ देर फोन चलाया और वापस नींद के आगोश में चली गयी। रात के खाने के बाद नैना ने मोंटी को फोन लगाया और कहा,”मोंटी बेटा कब आ रहे हो चित्रकूट ?”
“अभी निकलूंगा कल दोपहर तक पहुंच जाऊंगा , तू आ गयी ना लखनऊ ?”,मोंटी ने पूछा
“अरे तुम बुलाओ हम ना आये ऐसे हो ही नहीं सकता”,नैना ने कहा
“तो तू कल आ रही है ना घर ?”,मोंटी ने कहा
“हां , सुबह निकलूंगी ! डेड से बात हो गयी मेरी पहले वो जाने वाले थे फिर मैंने कहा मुझे मोंटी से मिलना है तो उन्होंने आने की परमिशन दे दी”,नैना ने कहा
“बढ़िया है , अच्छा सुन ध्यान से आना ,,, आई नो अकेले ड्राइव करने को मिल रहा है तो ज्यादा स्पीड में मत चलाना”,मोंटी ने कहा
“क्या बात है तुझे मेरी बड़ी परवाह हो रही है ,,,,,,,,,, हम्म्म्म बोलो बोलो क्या बात है ?”,नैना ने कहा
“मिलेगी तब बताऊंगा , वैसे सच बताऊ तो इस बार मैंने तुझे बहुत मिस किया है बीकानेर में”,मोंटी ने कहा
“ओये कही प्यार व्यार तो नहीं हो गया है मुझसे ?”,नैना ने कहा
“शट अप कुछ सोचती है ना तू ,, अच्छा चल मैं अभी पेकिंग कर रहा हूँ बाद में करता हूँ”,कहते हुए मोंटी ने फोन काट दिया
“हेलो हेलो अरे सुन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,काट दिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,बड़ी जल्दी में रहता है ये लड़का”,नैना ने कहा तो पिछे से विपिन जी ने आकर कहा,”अकेले में क्या बड़बड़ा रही हो ?”
“अरे डेड ! कुछ नहीं वो मोंटी आ रहा है कल तो उसी से बात हो रही थी , मैं कल चित्रकूट जा रही हूँ शर्मा जी के घर”,नैना ने कहा।
“हम्म्म्म , नैना मोंटी का रिश्ता होने जा रहा है तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं है ?”,विपिन जी ने थोड़ा गंभीर होकर पूछा
“मुझे क्यों प्रॉब्लम होगी ? मैं तो बहुत खुश हूँ”,नैना ने कहा
“बेटा मोंटी ही एक ऐसा लड़का है जिस से तुम्हारी अच्छी बनती है , तुम दोनों एक दूसरे को समझते हो , एक दूसरे की परवाह भी है तुम्हे तो मैं सोच रहा था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!”,विपिन जी कहते कहते रुक गए
“नो नो नो नो कुछ मत सोचिये आप , ओह्ह डेड कम ऑन यार आज तक मैंने आपसे कोई बात नहीं छुपाई है , अगर ऐसा होता भी तो मैं आपको जरूर बताती ,,,मोंटी मेरा बहुत अच्छा दोस्त है और इस वक्त वो भी मुझे अपना दोस्त ही मानता है ,, आप ये सब बेफिजूल की बातें सोचना बंद कीजिये”,नैना ने कहा
“अच्छा अगर ऐसा है तो अब तक उसने शादी क्यों नहीं की ? शर्मा बता रहा था की हर रिश्ते के लिए ना बोल देता है वो , हो सकता है उसके दिल में कुछ हो और तुम्हारी इस दोस्ती की वजह से वो ना कह पा रहा हो”,विपिन जी ने कहां
“डेड प्लीज यार , आलरेडी इतनी कॉम्प्लिकेटेड है ये मामला इसे और मुश्किल मत बनाइये , मोंटी इस बार रिश्ते के लिए जरूर हां कहेगा”,नैना ने विश्वास से भरकर कहा
“और इस बार भी मना कर दिया तो ?”,विपिन जी भी कहा मानने वाले थे
“तो जैसा आप कहेंगे मैं करने को तैयार हूँ”,नैना ने कहा और वहा से चली गयी। विपिन जी ख़ुशी से मुस्कुरा उठे। घर में तीन लोग थे और तीनो के दिमाग में तीन अलग खिचड़ी पक रही थी और तीनो ही एक दूसरे से अनजान थे। अगली सुबह नैना जल्दी उठी और तैयार होकर निचे चली आयी उसने अपने साथ एक छोटा बैग भी ले लिया और उसमे कुछ कपडे और वो लिफाफा रख लिया जो शर्मा जी को देना था। नाश्ता करने के बाद नैना ने गाड़ी की चाबी ली और अपना बैग गाड़ी में रखकर वहा से निकल गयी। सफर लंबा था और लखनऊ से चित्रकूट 237 किलोमीटर दूर था। गाड़ी हाईवे पर पहुंची तो नैना ने म्यूजिक सिस्टम ऑन कर लिया और स्पीड बढ़ा दी। गाना बजने लगा – फेंका नया फांसा फिर दे गयी झांसा , अनवै मुझे फांसा ,,,,,,,,, तेरी ऐसी की हो तैसी जिंदगी !
नैना गाने को इंजॉय करते हुए गाड़ी आगे बढ़ा रही थी कुछ देर बाद गाना ऑटोमैटिक चेंज हो गया लेकिन इस गाने ने नैना का ध्यान अपनी और खींचा
“तुम हो पास मेरे , साथ मेरे हो तुम यू ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,जितना महसूस करू तुमको उतना ही पा भी लू”
गाना सुनते हुए नैना को अवि का ख्याल आया जबसे वो यहाँ से गया था उसकी कोई खबर नहीं थी , नैना ने वॉल्यूम कम कर दी और बड़बड़ाने लगी,”अजीब बंदा है ऐसे दिनंभर परेशान करेगा लेकिन अभी कोई खबर नहीं उसकी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,सही है मुझे क्यों फोन करेगा ?,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,फोन तो हनी बेबी के अटेंड करता है ना वो,,,,,,,,,,,,,,,तू इतना क्यों सोच रही है नैना ? फोकस ऑन योर प्लान,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,हां हां तेरी तो जिंदगी ही बनने प्लान बनाने के लिए बनी है,,,,,,,,,,,,,,,लेकिन कम से कम एक मेसेज तो कर सकता है बन्दा की हां घर पहुँच गया है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,भाड़ में जाये !!”
कहते हुए नैना ने वॉल्यूम बढ़ा दी और गाना भी चेंज कर दिया।

चंडीगढ़ , अवि का घर !
हिचकियो से बेहाल अवि यहाँ से वहा घूम रहा था। सौंदर्या ने देखा तो कहा,”बेटा पानी पी लो”
“नहीं रुक मॉम , खैर मैं डेड के साथ बाहर जा रहा हूँ ऑफिस की जगह देखने”,अवि ने कहा
“हां ठीक है , अच्छा तुमने फोन करके बताया नैना के पापा को की तुम पहुँच गए चंडीगढ़ ?”,सौंदर्या ने कहा
“हां , थोड़ी देर पहले ही उनसे बात हुयी थी , अच्छा मॉम मुझे देर हो रही है मैं शाम को मिलता हूँ”,कहकर अवि चला गया। बाहर उसके पापा गाड़ी में उसका इंतजार कर रहे थे अवि आकर उनकी बगल में बैठा और मिस्टर चौधरी ने ड्राइवर से चलने को कहा। रास्ते भर अवि और उसके पापा खामोश रहे। अवि अपने पापा से बहुत कम बात किया करता था , वजह थी की वह बचपन से ही उनसे डरता था और साथ ही साथ उनकी रिस्पेक्ट भी करता था। आज भी उनकी बगल में बैठे हुए अवि थोड़ा नर्वस था जब मिस्टर चौधरी ने देखा तो उन्होंने अपना हाथ अवि के हाथ पर रखा और पलके झपकाकर अपने साथ होने का अहसास दिलाया ! 5 घंटे के लम्बे सफर के बाद नैना चित्रकूट पहुंची। मोंटी के घर के सामने गाड़ी रोकी और उतरकर अंदर आयी नैना को देखते ही शर्मा जी और उनकी पत्नी का चेहरा खिल उठा नैना आकर उनके गले लगी। मोंटी भी सुबह ही चित्रकूट पहुंचा था। बाहर आवाज सुनकर वह अपने कमरे से बाहर आया नैना को देखते ही उसके चेहरे पर ख़ुशी आ गयी। नैना ने उसे हाय कहा और फिर लिफाफा शर्मा जी की और बढाकर कहा,”ये पंडित जी ने डेड को दिया था डेड ने भिजवाया है , मौंटी का रिश्ता !”
शर्मा जी ने ख़ुशी ख़ुशी लिफाफा लिया और खोलकर देखने लगे , मोंटी ने सूना तो हक्का बक्का रह गया उसने नैना को साइड में लाकर कहा,”मैंने तुझे अपनी हेल्प के लिए यहाँ बुलाया था और तू मेरे लिए रिश्ता लेकर आयी है। क्यों नैना ?”
नैना ने कुछ नहीं कहा बस एक बड़ी सी स्माइल उसके चेहरे पर आ गयी !!

क्रमश – love-you-zindagi-76

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संजना किरोड़ीवाल !

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