“हाँ ये मोहब्बत है” – 47

Haan Ye Mohabbat Hai – 47

Haan Ye Mohabbat Hai
Haan Ye Mohabbat Hai

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Haan Ye Mohabbat Hai – 47

सोमित जीजू ने अक्षत के हाथ पर अपना हाथ रखा। वे अक्षत को इस हालत में नहीं देख पा रहे थे। उन्होंने सामने देखा तनु खुद ही चाय के कप लिए चली आ रही है।
तनु ने अक्षत और सोमित के लिए चाय का कप रखा और वापस चली गयी। सोमित जीजू ने अक्षत का कंधा थपथपाते हुए कहा,”चल चाय पी ले , तेरी मीरा कही नहीं गयी है हम सब है ना हम सब उसे समझायेंगे और देखना जिस दिन उसे अहसास होगा वो खुद आएगी,,,,,,,,,,,,,,,हम्म्म , चल ये पी ले”


अक्षत का मन नहीं था लेकिन जीजू के बार बार कहने पर उसने वो चाय पी ली। जीजू वही बैठकर देर तक उसे समझाते रहे और इन सब से बाहर निकलने के लिए कहा। अर्जुन अपने कमरे से बाहर आया , अक्षत और जीजू को साथ देखकर वह उनकी तरफ चला आया और जीजू के बगल वाले सोफे पर बैठते हुए अक्षत से कहा,”तू ठीक है ना आशु ?”
“हम्म्म्म”,अक्षत ने कहा


“पापा कह रहे है कि हमे किडनेपर के बारे में पुलिस को जानकारी देनी चाहिए , हो सकता है पुलिस इस बारे में कुछ पता लगा पाए”,अर्जुन ने कहा
“हाँ लेकिन पुलिस से हम कहेंगे क्या की किसी ने अमायरा को किडनेप किया और उसकी कोई जानकारी हमारे पास नहीं”,सोमित जीजू ने कहा


“आपको लगता है पुलिस में कंप्लेंट करने से अमायरा वापस आ जाएगी,,,,,,,,,,,,!!”,अक्षत ने कठोरता से कहा
“मेरा वो मतलब,,,,,,,,,,,,,,,!!”,अर्जुन ने कहना चाहा लेकिन अक्षत ने बीच में ही उसकी बात काटते हुए कहा,”वो जो भी है मैं उसे ढूंढ लूंगा भाई , अमायरा को मुझसे छीनकर उसने बहुत बड़ी गलती की है मैं उसे छोडूंगा नहीं,,,,,,,,,,,,,,और ये काम पुलिस नहीं मैं खुद करूंगा।”,अक्षत ने उठते हुए कहा और वहा से अपने कमरे में चला गया।


“तुझे उसके सामने पुलिस वाली बात नहीं करनी चाहिए थी”,सोमित जीजू ने अर्जुन से कहा
“मैंने जानबूझकर कहा जीजू ताकि वो अपना ध्यान अमायरा के कातिल को ढूंढने में लगाए और मुझे यकीन है वो कर लेगा,,,,,,,,,,,,!!”,अर्जुन ने कहा तो जीजू उठे और हल्का सा मुस्कुराते हुए अर्जुन का कंधा थपथपाकर वहा से चले गए। अर्जुन भी कुछ देर बाद नीचे चला आया।

अमर जी के घर में मीरा अपने कमरे में सो रही थी। उसे एक बुरा सपना आ रहा था जिसका असर उसके चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रहा था। मीरा पसीने से लथपथ हो चुकी थी और फिर एकदम से चिल्लाकर वह उठ बैठी
“अमायरा,,,,,,,,,,,,,,,!!”,मीरा जोर से चिल्लाई। अमर जी और कुछ नौकर तुरंत कमरे में भागकर आये। अमर जी मीरा के पास आये और उसे सम्हालते हुए कहा,”मीरा क्या हुआ आप ठीक है ?”
मीरा ने कुछ नहीं कहा वह बस गहरी सांसे ले रही थी अमर जी ने अपने नौकर से कहा,”पानी दीजिये”


हाथ बांधे खड़े नौकर ने टेबल पर रखे जग से ग्लास में पानी डाला और अमर जी की तरफ बढ़ा दिया। अमर जी ने मीरा को पानी पिलाया और उसका सर सहलाते हुए कहा,”आपने जरूर कोई बुरा सपना देखा है , आप आराम कीजिये”
मीरा वापस बिस्तर पर लेट गयी। अमर जी कमरे से बाहर चले आये और सारे नौकर भी।

मीरा की देखभाल के लिए घर के 7-8 नौकर हर वक्त मौजूद थे अमर जी ने सौंदर्या को भी सुचना दे दी ताकि वह आकर मीरा से मिले और कुछ दिन उसके साथ रहे। इस वक्त मीरा को नए माहौल के साथ साथ एक माँ की जरूरत भी थी।
कुछ वक्त बाद अमर जी नाश्ते की टेबल पर मीरा का इंतजार करने लगे लेकिन मीरा नहीं आयी। उनके नौकर वही हाथ बांधे खड़े थे।

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अमर जी रौबदार इंसान थे वे बहुत कम बात करते थे इसलिए घर के नौकर भी हमेशा उनके सामने ज्यादा बात ना करके अदब से पेश आते थे। अमर जी ने एक प्लेट में नाश्ता लिया और मीरा के कमरे की तरफ बढ़ गए। नौकरो को उन्होंने रुकने का इशारा कर दिया और कमरे की तरफ बढ़ गए। अमर जी कमरे में आये देखा मीरा नहा चुकी है और एक साधारण सा सूट पहने खिड़की के पास खड़ी है।

अमर जी ने नाश्ते की प्लेट टेबल पर रखते हुए कहा,”आप नाश्ता करने बाहर नहीं आयी इसलिए हम आपके लिए यही ले आये , आईये थोड़ा कुछ खा लीजिये”
मीरा ने सूना तो पलटकर अमर जी के पास आते हुए उदासीभरे स्वर में कहा,”हमे भूख नहीं है पापा”
“मीरा आपका दुःख हम समझ सकते है अमायरा को गुजरे दो हफ्ते हो चुके है ऐसे में अब आपको खुद को सम्हालने की जरूरत है। आपके खाना ना खाने से या दिन रात आँसू बहाने से वो लौटकर नहीं आएगी बेटा।

आपको अपना ख्याल रखने की जरूरत है अभी अभी आपकी तबियत में कुछ सुधार हुआ है। थोड़ा खा लीजिये ताकि दवा ले सके ,, आईये बैठिये”,अमर जी ने मीरा को प्यार से समझाया तो मीरा आकर बिस्तर पर बैठ गयी। अमर जी ने टेबल मीरा के सामने खिसकाया और खुद भी चेयर लेकर वही बैठ गए। मीरा ख़ामोशी से बैठी नाश्ते को देखे जा रही थी। अमर जी ने देखा तो निवाला तोड़ते हुए कहा,”रुकिए आज हम आपको खिलाते है”


मीरा ने सूना तो उसे यकीन नहीं हुआ , वह मासूमियत से अमर जी को देखने लगी जिनके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। उन्होंने निवाला मीरा की तरफ बढ़ाते हुए कहा,”हमारा बहुत मन था आपको बचपन में अपने हाथो से खाना खिलाने का लेकिन कभी मौका नहीं मिला”
अमर जी की भावनाओ में अपने लिए प्यार और परवाह मीरा को साफ दिखाई दे रहा था। उसने अमर जी के हाथ से दो चार निवाले खाये और फिर कहा,”बस पापा हमारा पेट भर गया”


“ठीक है , मीरा आपसे एक बात कहनी थी”,अमर जी ने कहा
“हां कहिये”,मीरा ने कहा
“मीरा हम जानते है ऐसे हालातों में आपके लिए थोड़ा मुश्किल होगा लेकिन आप एक कमरे तक सिमित मत रहिये। ये घर आपका आप बाहर निकलिए , बाहर घूमिये आपको अच्छा लगेगा। आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो आप बेझिझक कह सकती है।”,अमर जी ने कहा


“शुक्रिया पापा”,मीरा ने कहा तो अमर जी कुछ देर बैठकर उस से बातें करते रहे और फिर बाहर चले गए। अमर जी की कही बातो का मीरा पर कुछ असर हुआ तो वह उठी और घर के बाहर बने लॉन में चली आयी। गर्मियों के दिन थे लेकिन आज मौसम ठीक था , खुली हवा में मीरा को थोड़ा अच्छा महसूस हुआ। मीरा वही घूमने लगी घूमते हुए उसे अक्षत का ख्याल आया और उसके कदम रुक गए। यही वो जगह थी जहा कुछ साल पहले अक्षत आकर उस से मिला था जब वो दिल्ली से अपनी पढाई पूरी करके आया था।

वो पल याद आते ही मीरा की आँखे नम हो गयी और उसकी आँखों के सामने वो पल आ गए जब उसने आखरी बार अक्षत को देखा था। मीरा का मन फिर से उदास हो गया वह जाने के लिए जैसे ही पलटी एक बड़ी सी आलिशान गाडी घर के अंदर आयी जिसे देखकर मीरा रुक गयी। गाड़ी घर के सामने आकर रुकी , मीरा को लगा की अक्षत आया है उसने अपनी नम आँखों को पोछा और गाड़ी की तरफ आयी लेकिन अगले ही पल उसका उदास चेहरा और मुरझा गया जब गाड़ी से अक्षत की जगह सौंदर्या भुआजी और उनके पति राजकमल जी उतरे।


“मीरा कैसी हो मेरी बच्ची ? भाईसाहब ने तुम्हारे बारे में बताया सुनकर बहुत दुःख हुआ,,,,,,,,,,,,ये क्या हाल बना लिया है तुमने अपना ?”,सौंदर्या ने मीरा को गले लगाते हुए कहा तो मीरा रोने लगी
“मीरा , मीरा शांत हो जाओ ,, ऐसे रोते नहीं बेटा,,,,,,,,,,!!”,सौंदर्या ने उसका चेहरा अपने हाथो में लेकर कहा
“सब खत्म हो गया भुआ जी , अमायरा हमे छोड़कर चली गयी,,,,,,सब खत्म हो गया”,मीरा ने सिसकते हुए कहा


“मीरा कुछ खत्म नहीं हुआ है , उस बच्ची के जाने का दुःख हमे भी है लेकिन हम सब तुम्हे नहीं खोना चाहते ,, आओ अंदर चलो यहाँ बाहर अकेले क्या कर रही थी तुम ?,,,,,,,,,,,,,,,!”,कहते हुए सौंदर्या अपने पति की तरफ पलटती है और थोड़ा उखड़े स्वर में कहती है,”आप वो बैग लेकर अंदर आईये”
“हाँ हाँ मैं लेकर आता हूँ”,राजकमल जी ने कहा तो सौंदर्या मीरा के साथ अंदर चली आयी। अंदर अमर जी हॉल मे रखे सोफे पर बैठे थे उन्होंने अपने सामने खड़े मैनेजर से कहा,”कुछ दिनो के लिए हम ऑफिस नहीं आ पाएंगे इसलिए सब आपको ही सम्हालना होगा”


“अरे भाईसाहब इसकी जरूरत नहीं है , हम आ गए है ना मीरा का ध्यान रखने के लिए हम है इस घर में आपको भी अपना काम सम्हाल लेना चाहिए”,सौंदर्या ने हॉल की तरफ आते हुए कहा
“आप जाईये बाकि हम फोन पर बता देंगे”,अमर जी ने मैनेजर से कहा तो वो वहा से चला गया। अमर जी उठे और सौंदर्या से कहा,”हमे ख़ुशी हुई की आप यहाँ आयी और हम चाहेंगे आप कुछ वक्त यही रहे,,,,,,,,,,,,,,!!”


“ये भी कोई कहने की बात है भला , मुश्किल वक्त में अपने ही काम आते है भाईसाहब”,सौंदर्या ने कहा इतने में राजकमल जी भी अंदर चले आये। सभी हॉल में रखे सोफों पर आ बैठे। कुछ देर बाद सौंदर्या ने कहा,”भाईसाहब अमायरा के साथ जो हुआ सही नहीं हुआ , इन सब में उस मासूम सी बच्ची का क्या दोष ?”
“सब किस्मतो की बात है सौंदर्या , उस बच्ची की जिंदगी में बस इतना ही वक्त लिखा था।

पहली बार हमारी नातिन ने हम से कुछ माँगा था जब हम उसके लिए महल के पेपर लेकर गए तो पता चला कि वो अब इस दुनिया में,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,वो बहुत प्यारी थी सौंदर्या , वो हमेशा हमारे दिलों में रहेगी”
अमर जी की बात सुनकर सौंदर्या ने कुछ नहीं कहा लेकिन महल का नाम सुनकर उसकी आँखों में अजीब सा आकर्षण तैरने लगा जिसे मीरा और अमर जी नहीं देख पाए।

सौंदर्या भुआ के आने से मीरा को लेकर अमर जी की चिंता थोड़ी कम हो गयी। राजकमल जी भी चुपचाप वही बैठे थे वे हमेशा से ही कम बोलते थे। नौकर उन सब के लिए चाय रखकर चला गया। सौंदर्या ने चाय का कप उठाते हुए कहा,”मीरा जमाई सा नहीं आये तुम्हारे साथ ? कही दिखाई नहीं दे रहे”
“मीरा अकेले आयी है कुछ दिन दिनों के लिए , घर और माहौल चेंज होगा तो इन्हे थोड़ा अच्छा लगेगा”,अमर जी ने मीरा की तरफ से जवाब दिया लेकिन सौंदर्या के मुंह से अक्षत के लिए सुनकर मीरा के मन में अजीब सी बेचैनी होने लगी।

अमर जी की बात सुनकर सौंदर्या ने एक नजर मीरा को देखा उसके चेहरे पर आये भावो को सौंदर्या अच्छे से समझ गयी और कहा,”ये तो अच्छी बात है भाईसाहब लेकिन मीरा के ससुराल वाले भी थोड़े अजीब है , उन्होंने इसे अकेले कैसे आने दिया ? किसी ने रोका नहीं,,,,,,,,,,,,,और जमाई सा क्या उन्होंने भी,,,,,,,,,,,,!!”
सौंदर्या अपनी बात पूरी करती इस से पहले ही मीरा ने उठते हुए कहा,”पापा हम ज़रा आते है”
“मीरा , मीरा सुनिये,,,,,,,,,,,,,,,!!”,अमर जी ने कहा लेकिन तब तक मीरा वहा से उठकर जा चुकी थी।

अमर जी सौंदर्या की तरफ पलटे और कहा,”ये सब कहने की क्या जरूरत थी सौंदर्या , मीरा बीमार है और वो सिर्फ माहौल बदलने के लिए अपने घर में है , ससुराल छोड़कर नहीं आयी है”
“मैंने ऐसा क्या कह दिया भाईसाहब , अच्छा वो हम ये कह रहे थे कि अजमेर वाले आपके महल को हमने खाली करने का बंदोबस्त कर दिया है। वही अजमेर में ही एक घर मिला है बस उसकी मरम्मत करवाने के बाद जल्द ही वहा शिफ्ट हो जायेंगे उसके बाद बच्चियों की शादी भी करनी है”,सौंदर्या ने कहा


“सौंदर्या कोई जल्दी नहीं है बच्चियों की शादी तुम उसी महल से कर सकती हो उसके बाद शिफ्ट हो जाना”,कहते हुए अमर जी उठे और वहा से चले गए
“तुम्हे ऐसे वक्त में ऐसी बातेँ नहीं करनी चाहिए थी। मीरा बिटिया जिन हालातों से गुजर रही है उसमे उसे सम्हालने के बजाय तुम ये महल और घर की बातें कर रही हो सौंदर्या,,,,,,,,,,,तुम्हे शर्म आनी चाहिए”,राज कमल जी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए धीमी आवाज में कहा


“आप चुप रहिये आप कुछ नहीं जानते,,,,,,,,,,,,,,,,,भाईसाहब तो मीरा के पीछे पागल होकर सब कुछ लुटाने पर तुले है ,, इतना बड़ा महल उस बच्ची के किस काम का ? अब मैं अपनी बेटियों की शादी पूरी शानो शौकत से उस महल में करुँगी,,,,देखना आप”,सौंदर्या ने ख़ुशी से चहकते हुए कहा
“ईश्वर तुम्हे सद्बुध्दि दे”,कहते हुए राजकमल जी वहा से उठकर चले गए।


सौंदर्या ने सूना तो मुँह बनाया और उठते हुए बड़बड़ाते हुए कहा,”मैं जरा जाकर मीरा से बात कर लू मैंने खामखा ही उसका दिल दुखा दिया”
सौंदर्या मीरा के कमरे की तरफ बढ़ गयी।

सोमित जीजू और अर्जुन ऑफिस चले गए। विजय जी ने भी आज कई दिनों बाद ऑफिस का रुख किया। चीकू काव्या भी स्कूल के लिए निकल गए। नीता और तनु किचन में काम कर रही थी। दादू हॉल में बैठे अख़बार पढ़ रहे थे और दादी माँ अपने कमरे में थी आज फिर उनके घुटनो में तेज दर्द था। राधा लहसुन का तेल लिए उनके कमरे में आयी और उनके पैरो के पास बैठते हुए कहा,”माँ लाईये मैं आपके पैरो में तेल लगा देती हूँ इस से आपको थोड़ा आराम मिलेगा और आज शाम आप अर्जुन के साथ डॉक्टर के पास चली जाईयेगा”


“अरे राधा तुम क्यों परेशान हो रही हो ? वैसे जब भी मेरे पैरो में दर्द होता था मीरा ही तेल लगाया करती थी , सच पूछो तो उसके हाथो में जादू था”,दादी माँ ने मीरा को याद करते हुए कहा। दादी माँ की बात सुनकर राधा का चेहरा मुरझा गया उन्होंने उंगलियों पर तेल लगाया और दादी माँ के पैर की मालिश करते हुए धीरे से कहा,”वो जल्दी ही वापस आ जाएगी माँ , उसके बिना ये घर सूना सूना सा लगता है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मुझे उसकी बहुत फ़िक्र होती है ऐसे हालातो में वह खुद को अकेले कैसे सम्हाल पायेगी ?”


“राधा चिंता मत करो हमारी मीरा बहुत मजबूत है और फिर अमर जी है ना उसके साथ वो जरूर उसे सम्हाल लेंगे। इन बच्चो के प्यार और खुशियों को किसी की नजर लग गयी है,,,,,,,,,,,,,,,,ईश्वर से बस यही दुआ है की इनकी जिंदगी में और तकलीफे ना लिखे”,दादी माँ ने कहा
राधा उनके पैरो में तेल लगाते हुए वही बैठी उनसे बातें करती रही। दादी माँ ने राधा को खूब हिम्मत दी , दादी माँ से बात करके राधा का मन भी काफी हल्का हो चुका था।

अक्षत अपने कमरे में था। बिस्तर पर हर तरफ फाइल्स , लेपटॉप और सामान फैला हुआ था। अर्जुन जो एक छोटी सी चिंगारी अक्षत के मन में लगाकर गया था वो आग पकड़ चुकी थी। अक्षत का अब एक ही मकसद था अमायरा के कातिल को ढूंढना। अक्षत ने शुरू से सोचते हुए सब घटनाओ को एक दूसरे से जोड़कर देखने लगा।  
अक्षत ने अपने दिमाग पर जोर डाला तो उसे याद आया की घर के बाहर जो CCTV केमेरा लगा है उसमे जरूर उस दिन का विडिओ होगा।

अक्षत ने अपना फोन उठाया और कॉलोनी के मैनेजर से बात की उन्होंने अक्षत को शाम में आने को कहा।
“बस एक बार कोई क्लू मिल जाए उसके बाद मैं तुम्हे ढूंढ लूंगा , मेरी बेटी को मुझसे छीनकर तुमने बहुत बड़ी गलती की है”,अक्षत ने फोन साइड में रखकर खुद में ही बड़बड़ाते हुए कहा
अक्षत अपने काम में लगा हुआ था की रघु ने बाहर से दरवाजा खटखटाते हुए कहा,”अक्षत बाबा आपके लिए कोई डाक आया है”


अक्षत ने सूना तो उठकर दरवाजा खोला सामने रघु कोई लिफाफा लिए खड़ा था। अक्षत ने उस से लिफाफा लिया और खोलकर उसमे रखा कागज निकालकर पढ़ने लगा। वह कोर्ट की तरफ से अक्षत को नोटिस था , बार एसोसिएशन की तरफ से एक मीटिंग रखी गयी थी जिसमे अक्षत का शामिल होना बहुत जरुरी था। अक्षत ने पेपर और लिफाफा टेबल पर रख दिया। अक्षत बिस्तर पर आ बैठा और सोच में डूब गया वह समझ नहीं पा रहा था

आखिर ये सब अचानक से उसके साथ क्यों होने लगा था ? अक्षत कुछ देर बैठा सोच में डूबा रहा और फिर वापस अपना काम करने लगा।

शाम में अक्षत को याद आया की उसे CCTV फुटेज देखने हैं इसलिए वह उठा और कमरे से बाहर निकल गया। अक्षत इन सब में इतना उलझा हुआ था की उसे याद ही नहीं रहा मीरा घर में नहीं है उसने हॉल में आकर किचन की तरफ देखते हुए आवाज लगाई,”मीरा मेरी चाय”
वही हॉल में बैठे दादू और राधा ने सूना तो एक दूसरे को देखने लगे। नीता चाय लेकर आयी और टेबल पर रखते हुए कहा,”देवर जी आपकी चाय”


मीरा की जगह नीता को देखकर अक्षत को थोड़ा अजीब लगा लेकिन अगले ही पल उसे याद आया की मीरा घर में नहीं है। अक्षत का मन उदास हो गया वह उठा और जाने लगा तो राधा ने कहा,”आशु क्या हुआ बेटा चाय तो पीकर जाओ”
“मन नहीं है माँ”,अक्षत ने कहा और तेज कदमो से वहा से निकल गया। नीता चाय लेकर वापस चली गयी। राधा ने बुझी आँखों से दादू की तरफ देखा तो दादू ने कहा,”कही मीरा के घर जाने का फैसला इन दोनों के रिश्ते में दूरिया ना ले आये”


“नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूंगी,,,,,,,,,,,,,,,ईश्वर इतना निर्दयी नहीं हो सकता वो इन दोनों को अलग नहीं कर सकता”,राधा ने तकलीफ भरे स्वर में कहा
“हाँ बहु पर पता नहीं क्यों मेरा मन बहुत घबरा रहा है,,,,,,,,,,,,,,,,ईश्वर इनकी रक्षा करे और सब पहले जैसा हो जाये”,कहते हुए दादू उठे और वहा से चले गए।

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संजना किरोड़ीवाल   

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