“हाँ ये मोहब्बत है” – 46

Haan Ye Mohabbat Hai – 46

Haan Ye Mohabbat Hai – 46

अक्षत का दिल जोरो से धड़क रहा था और बेचैनी उसकी आँखों में साफ़ नजर आ रही थी। पहली बार अक्षत खुद को बेबस और लाचार महसूस कर रहा था। वो मीरा जो उसकी ख़ामोशी को भी समझ जाती थी आज उसकी बात तक नहीं सुनना चाहती थी। वो मीरा जिसके बिना जीने की अक्षत कल्पना भी नहीं कर सकता था आज उसे छोड़कर जा रही थी। वो मीरा जिसने हमेशा हर मुश्किल घडी में अक्षत का साथ दिया आज उसे इस दर्द में अकेले छोड़कर जा रही थी।

अक्षत की आँखों में नमी तैर गयी और कानों में गूंजने लगे मीरा के कहे शब्द
“,”आप जानना चाहेंगे आखरी बार आपकी बेटी ने क्या कहा था ? वो यहां इस मंदिर में इन भगवान के सामने खड़ी थी और इनसे कह रही थी की उसके पापा उस से बात नहीं करते , उसके साथ खेलते नहीं है , उसे वक्त नहीं देते , लेकिन उसके पापा फिर भी बहुत अच्छे है। ये सब कहते हुए पहली बार उसके चेहरे पर हमने दर्द देखा था , वो आपके साथ के लिए , आपके प्यार के लिए तरसती रही लेकिन आपने ध्यान ही नहीं दिया अक्षत जी,,,,,,,,,,,,,,,,

उसने कहा की हमारी तरह वो भी प्रार्थना में विश्वास करती है लेकिन इनसे प्रार्थना करते हुए पहली बार उसकी आँखों में आँसू थे,,,,,,,,,,,,,वो अपने पापा को बहुत मानती थी लेकिन उसके पापा ने क्या किया ? उसके पापा ने उसे खो दिया,,,,,,,,,,,,,,,,वो चली गयी , हमेशा हमेशा के लिए चली गयी। आप पिता है आपने सिर्फ उसका मुस्कुराता चेहरा देखा था,,,,,,,,,,,,,,,लेकिन हम उसकी माँ थे हमने उसकी आँखों में आँसू देखे थे , उसके चेहरे पर दर्द देखा था , उसकी आवाज में आपसे दूर होने की तकलीफ देखी थी।

हमने इस घर ने तो अमायरा को कुछ दिन पहले खोया है लेकिन आपने तो उसे उसी दिन खो दिया था अक्षत जी जिस दिन वो आपसे बात करने के लिए दिनभर आपका इंतजार करती थी और थककर सो जाती थी लेकिन आपको अहसास ही नहीं हुआ और अहसास होता भी क्यों क्योकि वो जब भी आपसे मिली मुस्कुरा कर मिली।”
अक्षत के दिल में चुभन का अहसास होने लगा , उसने महसूस किया उसका गला रुँध चुका है और आँखों के आँसू गालों पर लुढ़क आये है। अक्षत ने महसूस किया की मीरा अपनी जगह सही थी ,

बीते दिनों छवि दीक्षित केस में वह इतना उलझ चुका था की उसे अपना और अपनों का ख्याल भी नहीं रहा। एक एक करके उसे वो पल याद आने लगे जब अमायरा ने उसके पास आने की कोशिश की , उस से बात करने की कोशिश की और अक्षत ने बिजी होने की बात कहकर उसे टाल दिया। धीरे धीरे अक्षत को वो सब महसूस हो रहा था जब अमायरा बार बार उसका ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश करती थी। वो सब याद आते ही अक्षत को महसूस होने लगा की कही ना कही गलती उसकी थी।

अगले ही पल उसकी आँखों के सामने छवि का चेहरा आया जब आखरी सुनवाई में वो अक्षत के सामने खड़ी थी , उसे वो सारे पल याद आये जब कटघरे में खड़े होकर हर बार छवि उम्मीदभरी नजरो से अक्षत को देखते रहती थी , अगले ही पल उसे याद आया वो थप्पड़ जो छवि की माँ ने उसे मारा था और कहा था,”तुमने एक माँ का भरोसा तोड़ा है तुम कभी खुश नहीं रहोगे”


ये सब चीजे एक साथ अक्षत के दिमाग में घूमने लगी , अमायरा , मीरा , छवि , माधवी , उनकी बातें , उनका रोना , उनके आँसू,,,,,,,,,,,,,,,,!! अक्षत ने अपना सर पकड़ लिया , उसका सर चकराने लगा था और फिर अक्षत पीठ के बल बिस्तर पर जा गिरा , जो कुछ दिमाग में चल रहा था वो सब एकदम से गायब हो गया और रह गयी बस मीरा , मीरा का हँसता मुस्कुराता चेहरा , उसकी बातें अक्षत के कानों में गूंजने लगी
“आपके बिना जीने की हम कल्पना भी नहीं कर सकते,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,हम हमेशा आपसे इतना ही प्यार करेंगे शायद इस से भी ज्यादा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हमे आपकी परवाह करना बहुत पसंद है यू मान लीजिये हमारा पसंदीदा काम है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,कैसी भी परिस्तिथि हो , कितनी भी मुश्किलें आये हम हमेशा साथ रहेंगे,,,,,,,,,,,,,,आप मुस्कुराते रहा कीजिये क्योकि जब आप तकलीफ में होते है तब हमे आपसे ज्यादा तकलीफ महसूस होती है”
मीरा के कही ये खूबसूरत बाते अक्षत को आज भी याद थी और ये याद आते ही उसकी आँखों में आँसू भर आये और कनपटी से होकर बिस्तर को भिगाने लगे।  

अमर जी नीचे आये उन्होंने राधा से मीरा का जरुरी सामान देने को कहा। राधा भारी मन से मीरा की दवाईया और बाकी जरुरी सामान एक बैग में रखकर ले आयी। उसे मीरा का ऐसे जाना बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन इस वक्त हालात ऐसे थे की कुछ भी कहना सही नहीं था। मीरा सबसे मिली और अमर जी के साथ जाने लगी , राधा ने उसका हाथ थामा हुआ था और उसे अपना ध्यान रखने और जल्दी वापस आने की बातें कही जा रही थी लेकिन मीरा ने कोई जवाब नहीं दिया उसके मन में इस वक्त बहुत सी उलझने थी।

सब घर से बाहर अमर जी की गाड़ी के पास चले आये सब वहा मौजूद थे बस अक्षत और नीता नहीं थे। मीरा ने खाली आँखों से पलटकर इस उम्मीद में देखा की जाने से पहले एक बार अक्षत को देख ले लेकिन अक्षत वहा नहीं था। उसका मन भारी हो गया। मीरा की आँखों के सामने सालों पहले गुजरे वो पल आ गए जब अमर जी उसे इस घर से लेकर जा रहे थे तब अक्षत उसे रोकने के लिए कितना परेशान हुआ था लेकिन आज अक्षत यहाँ नहीं था। मीरा के दिल में एक टीस उठी। उसने गाड़ी का दरवाजा खोला और अंदर बैठ गयी।

सभी घरवाले बाहर खड़े बुझी आँखों से उसे देखते रहे। चीकू का चेहरा उतर गया वह अंदर भाग गया। अमर जी विजय जी और दादू के पास आये और उनसे सबका ख्याल रखने को कहकर मीरा के बगल में जा बैठे और ड्राइवर से चलने को कहा।


अमर जी की गाड़ी व्यास हॉउस से निकल गयी , जैसे ही गाड़ी घर से बाहर निकली मीरा की आँखों में ठहरे आँसू बह गए उसे इस घर से इस तरह जाने का दुःख था। उसने पलटकर देखा तो पाया सभी घरवाले दरवाजे पर ही खड़े है और उनके चेहरे उदासी से घिरे हुए है। मीरा उन्हें इस तरफ देखकर पहले से ज्यादा दुखी हो गयी और गर्दन घुमा ली। वह फफक कर रो पड़ी और अपना सर विजय जी के कंधे पर टिका दिया।

विजय जी ने सबको अंदर चलने को कहा और खुद बाहर ही रुककर रघु को कुछ जरुरी काम बताने लगे। राधा अपने आँसू पोछते हुए अंदर आयी। दादू ने राधा से पानी के लिए कहा तो राधा किचन की तरफ चली आयी। मीरा के जाने से चीकू बहुत उदास था वह किचन में काम कर रही नीता के पास आया और रोते हुए कहा,”मम्मा मीरु चाची चली गयी , वो क्यों चली गयी मम्मा ? किसी ने उन्हें रोका क्यों नहीं ?”


“तुम्हारी मीरु चाची को किसी की फ़िक्र ही कहा है ?”,नीता ने उखड़े स्वर में कहा जिसे राधा ने किचन में आते हुए सुन लिया और कहा,”नीता ये क्या तरिका है बच्चो से बात करने का ?”
“मैंने क्या गलत कहा माँ ? क्या आप सब नहीं जानते मीरा कितनी स्वार्थी हो गयी है ,, उसे सिर्फ अपना दर्द अपनी तकलीफ दिखाई दे रही है लेकिन देवर जी का क्या ? मीरा ने उनकी बात तक नहीं सुनी वो तो बस देवर जी को इन सबका जिम्मेदार मानती है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

क्या उसे ऐसे यहाँ से जाना चाहिए था। हाँ समझ सकती हूँ वो अमायरा की माँ थी इसलिए उसका दुःख हम सबसे ज्यादा है पर क्या उसके इस तरह चले जाने से अमायरा वापस आ जाएगी। इस घर से जाकर मीरा ने देवर जी का दुःख बढ़ा दिया है,,,,,,,,,,,,,,मीरा के इस फैसले से आप सब सहमत होंगे मैं नहीं,,,,,,,,,,,,इस बार उसने सही नहीं किया माँ,,,,,,,,,,,,!!”,नीता ने कहा और किचन से बाहर चली गयी। दरवाजे पर खड़ी तनु भी सब सुन रही थी। नीता की बातें चुभने वाली थी लेकिन सच थी। उसकी बातें सुनकर राधा का मन भारी हो गया।

तनु अंदर आयी और राधा के कंधे पर हाथ रखा तो राधा ने जल्दी से अपने आँसू पीछे और पलटकर कहा,”तनु , तुम्हारे मौसाजी को एक कप चाय की जरूरत है क्या तुम बना दोगी , मैं तब तक पिताजी को पानी देकर आती हूँ”
“मौसी मैंने नीता की बातें सुन ली थी , आप उसकी बातों का बुरा मत मानियेगा वो बस थोड़ा गुस्से में है इसलिए ये सब,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,तनु ने कहा


“नहीं तनु बुरा किस बात का लगेगा ? तुम सब मेरे बच्चे हो और बच्चे अपनी माँ से अपने दिल की बात बेझिझक कह सकते है। इस घर की खुशियों को नजर लग चुकी है कुछ सही नहीं हो रहा मेरे दोनों बच्चे तकलीफ में है और मैं कुछ नहीं कर पा रही। मैंने मीरा की माँ को वचन दिया था की मैं उसका हमेशा ख्याल रखूंगी ,

उसे अपने पास रखूंगी , कभी उसे माँ की कमी महसूस होने नहीं दूंगी,,,,,,,,,,,,,,!!”,कहते कहते राधा का गला रुंधने लगा तो तनु ने उन्हें समझाते हुए कहा,”मौसी आप दिल छोटा मत कीजिये हमारी मीरा जल्दी वापस आ जाएगी , वो इस घर के लोगो से बहुत प्यार करती है हम से दूर नहीं रह पायेगी।”
“उनसे जाने से पहले आशु से बात भी नहीं की,,,,,,,,,,,!!”,कहते हुए राधा रो पड़ी


तनु ने उन्हें गले लगाया और कहा,”सब ठीक हो जाएगा मौसी , आप चलिए मैं सबके लिए चाय लेकर आती हूँ”
राधा वहा से चली गयी , हॉल में चीकू उदास सा बैठा था उसके हाथ में अमायरा की वही गुड़िया थी जो उसने उसे पहली बार तोहफे में दी थी। ये गुड़िया अमायरा की फेवरेट थी। दादू ने देखा तो वे चीकू के पास आकर बैठ गए और उसे बहलाने लगे।

शाम में अर्जुन और सोमित जीजू ऑफिस से घर आये उन्हें मीरा के जाने के बारे में कुछ नहीं पता था। अर्जुन को आते देखकर चीकू सोफे से उठा , दौड़कर उसके पास आया और कहा,”पापा मीरु चाची चली गयी”
“क्या ? लेकिन कहा ? माँ-पापा , दादू मीरा कहा गयी ?”,अर्जुन ने धड़कते दिल के साथ हैरानी से कहा
“मीरा चली गयी किसी ने मुझे और अर्जुन को बताया क्यों नहीं ? और आशु , आशु कहा है ? उसने मीरा को कैसे जाने दिया ?”,जीजू को भी मीरा के जाने की बात सुनकर अजीब लगा


“आज शाम अमर जी घर आये थे , वे चाहते थे मीरा कुछ दिन उनके साथ रहे ताकि घर और माहौल चेंज होने से वो अमायरा की मौत के सदमे से बाहर निकल सके”,विजय जी ने धीमी आवाज में कहा
“ये क्या बात हुई ? पापा इस घर में मीरा का ख्याल रखने के लिए हम सब है और फिर आशु,,,,,,,,,,,,,उसने कुछ नहीं कहा , उसने मीरा को रोका नहीं , वो ऐसे कैसे जा सकती है ?”,अर्जुन ने कहा
“आप सबको मीरा को समझाना चाहिए था”,सोमित जीजू ने परेशानी भरे स्वर में कहा


“अर्जुन सोमित जी इसमें इतना परेशान होने वाली क्या बात है ? मीरा कुछ दिन के लिए अपने घर गयी है कुछ दिनों में वापस आ जाएगी”,दादू ने उन्हें परेशान देखकर कहा
“पापा सही कह रहे है अर्जुन ,  अगर इस से चीजे बेहतर होती है तो मैं चाहूंगा मीरा कुछ दिन अपने पापा के साथ रहे।”,विजय जी ने कहा तो अर्जुन ने आगे इस बारे में बात नहीं की लेकीन मीरा का फैसला इस बार उसे जरा बचकाना लगा।

अपना बैग लिए वह वहा से सीढ़ियों की तरफ बढ़ गया। जीजू सोफे पर आ बैठे। तनु सबके लिए चाय ले आयी चाय पीते हुए सोमित जीजू को अक्षत का ख्याल आया तो उन्होंने राधा से कहा,”मौसी जी अक्षत कहा है ?”
“वो अपने कमरे में है”,राधा ने बुझे मन से कहा
“मैं उस से मिलकर आता हूँ”,जीजू ने उठते हुए कहा


“रुकिए दामाद जी , मुझे लगता है हमे उसे कुछ देर के लिए अकेले छोड़ देना चाहिए। बार बार उसके सामने जाकर उस से इन सबके बारे में बात करके हम सब सिर्फ उसकी तकलीफे बढ़ा रहे है”,दादू ने कहा तो सोमित जीजू वापस बैठ गए लेकिन मन ही मन अक्षत के लिए परेशान हो उठे।


रात के खाने के समय अक्षत नीचे नहीं आया। खाना खाने के बाद सोमित जीजू अक्षत से मिलने ऊपर उसके कमरे में आये दरवाजा बंद देखकर उन्होंने जैसे ही खटखटाने के लिए हाथ बढ़ाया सहसा ही उनका हाथ रुक गया और उन्होंने कहा,”मुझे उसे परेशान नहीं करना चाहिए” सोमित जीजू वापस नीचे चले गए

देर रात अक्षत अपने कमरे में सो रहा था , इन दिनों वह काफी थक चुका था। ना वक्त से खा रहा था ना सो रहा था जिस वजह से काफी कमजोर हो गया था। देर रात अक्षत गहरी नींद में सोया हुआ था वह कोई सपना देख रहा था जिसका असर उसके चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रहा था।
“पापा,,,,,,,,,,,,,,पापा,,,,,,,,,,!!”,अक्षत के कानों में अमायरा की प्यारी सी आवाज पड़ी। उसने अपनी आँखे खोली , एक दो बार अपनी पलकों को खोला और बंद किया , उसके बाल उसके माथे पर बिखरे हुए थे।

अक्षत की नजर खिड़की के पास लगे परदे पर पड़ी जो की हिल रहा था। अक्षत को लगा जैसे वहा कोई है,,,,,,,,,,अक्षत बिस्तर से नीचे उतरा अगले ही पल उसे लगा जैसे वहा अमायरा छुपी हो , पुरे दो हफ्ते बाद अक्षत मुस्कुराया , वह मुस्कुराते हुए उस परदे की तरफ आया लेकिन जैसे ही उसने उसे हटाया वहा कोई नहीं था अक्षत का चेहरा फिर उदासी से घिर गया और आँखों में आँसू झिलमिलाने लगे


अक्षत ने कमरे की खिड़की खोल दी और आसमान में चमकते चाँद को देखने लगा। इस वक्त वह मीरा और अमायरा को याद कर रहा था और दोनों ही उसके पास नहीं थी। नींद आँखों से एक बार उडी तो फिर बाकि की रात उसने जागकर ही गुजार दी। वह रात भर खिड़की के पास बैठा रहा और सुबह होते होते नींद की वजह से उसका सर खिड़की से जा लगा। सोमित जीजू रात भर अक्षत के बारे में सोचते रहे वे उस से बात करना चाहते थे , सुबह होते ही वे अपने कमरे से बाहर आये और सीधा अक्षत के कमरे के सामने चले आये।

दरवाजा अभी भी बंद था पर लॉक नहीं। सोमित जीजू दरवाजा खोलकर अंदर आये देखा खिड़की के पास कुर्सी पर बैठा अक्षत खिड़की से सर लगाये सो रहा है। जीजू उसके पास आये और उसे देखने लगे , बीते दो हफ्तों में वो क्या से क्या हो गया था ? उसके चेहरे पर कोई रौनक नहीं थी , वह काफी मुरझा चुका था , आँखों के नीचे डार्क सर्कल हो चुके थे। सोमित जीजू ने धीरे से अक्षत के कंधे पर हाथ रखा अक्षत डरकर नींद से जागा , उसकी सांसे तेज थी और चेहरे पर एक बेचैनी थी।


“आशु क्या हुआ ? तू ठीक है ना ? तूने कोई बुरा सपना देखा क्या ? चल उठ यहाँ से,,,,,,,,,,,,,!”,कहते हुए सोमित जीजू ने अक्षत को वहा से उठाया। अक्षत ने जीजू से रुकने को कहा और बाथरूम की तरफ चला आया। कुछ देर बाद अक्षत अपना मुंह पोछते हुए बाहर आया। उसने अपना मुँह पोछा और तौलिया रेंक पर रख दिया। सोमित जीजू उसके पास आये और कहा,”तू ठीक है ना ?”
“हम्म्म्म”,अक्षत ने बुझे मन से कहा जबकि वो जानता था वो ठीक नहीं है। उसका दिल और दिमाग अभी भी अमायरा और मीरा में उलझा हुआ था।


सोमित जीजू उसे लेकर बाहर हॉल में पड़े सोफे की तरफ लेकर आये और बैठने को कहा। अक्षत सोफे पर आ बैठा तो सोमित जीजू भी उसकी बगल में आ बैठे और अपना फोन जेब से निकालकर तनु का नंबर डॉयल किया।
“हेलो तनु रघु के हाथ ज़रा दो कप चाय ऊपर भिजवाना”,सोमित जीजू ने कहा और फिर फोन काट दिया। वे अक्षत की तरफ पलटे और कहा,”मैं ये नहीं कहूंगा की मैं तुम्हारा दर्द समझ सकता हूँ क्योकि मैं जानता हूँ इस वक्त तुम पर जो बीत रही है वो कोई और नहीं समझ सकता लेकिन तुम्हे इस दर्द से निकलने की जरूरत है

आशु,,,,,,,,,,,,,,,,,ऐसे कब तक तुम खुद को इस कमरे में बंद रखोगे ? अमायरा के जाने का गम हम सबको है लेकिन उसके जाने से तुम जीना छोड़ दो ये तो वो भी नहीं चाहेगी ना। बुरा वक्त जब आता है तो कुछ तकलीफे साथ लेकर आता है लेकिन हमे उनसे फेस करने की ताकत भी वही बुरा वक्त देता है। और तुम अकेले नहीं हो सब तुम्हारे साथ है”
सोमित जीजू की बात सुनकर अक्षत ने कहा,”क्या है मेरे पास ? अमायरा सिर्फ मेरी बेटी ही नहीं बल्कि मेरी पूरी दुनिया थी वो,,,,,,,,,मैं जब सुबह उठता था तो सबसे पहले उसका चेहरा देखता था ,

उसकी मुस्कुराहट देखकर मैं अपनी बड़ी से बड़ी परेशानी भूल जाता था , जब वो मेरी परवाह करती थी तब लगता था मैं दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान हूँ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,लेकिन अब वो नहीं है  (कहते हुए अक्षत की आँखे भर आती है लेकिन अपने आँसुओ को वो अपनी आँखों में ही रोक लेता है और आगे कहता है ) क्या है मेरे पास ? मैं छवि को इंसाफ नहीं दिला पाया , उसकी माँ से किया वादा नहीं निभा पाया , पापा और अर्जुन को लगता है मुझे बाहर के हालातो के बारे में पता नहीं है इसलिए वो हर रोज घर का पेपर मुझसे दूर रखते है

पर मैं जानता हूँ बाहर लोग मेरे लिए कैसी कैसी बातें कर रहे है। कोर्ट का वो केबिन जहा बैठने के लिए मैंने दिन रात मेहनत की आज मैं उस जगह से दूर हूँ , अपने सपनो से दूर हूँ,,,,,,,,,,,,कुछ नहीं है जीजू , मेरे पास कुछ नहीं है , मुस्कुराने की वजह नहीं रही , जीने की वजह नहीं रही , अमायरा नहीं रही और,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,और मीरा नहीं है”
आखरी शब्द कहने के साथ ही अक्षत की आँखों में ठहरे आँसू एकदम से बह गए। उसका गला रुंधने लगा। उसने अपना सर पीछे लगा लिया और कहने लगा,”अमायरा के बाद मीरा भी मुझे छोड़कर चली गयी

जीजू,,,,,,,,,,,,,,,,,,उसने मेरी बात तक नहीं सुनी , क्या अमायरा सिर्फ उसकी बेटी थी ? क्या उसके चले जाने का दुःख मुझे नहीं है ? उसे लगता है मेरी वजह से अमायरा,,,,,,,,,,,,,मेरी वजह से कैसे जीजू ? मैं उसे कैसे जाने दे सकता था ? मैंने हर कोशिश की लेकिन मैं उसे नहीं ढूंढ पाया और जब वो मिली,,,,,,,,,,,,मैं ये बात शायद मीरा को कभी नहीं समझा पाऊंगा”

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संजना किरोड़ीवाल  

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