“हाँ ये मोहब्बत है” – 12

Haan Ye Mohabbat Hai – 12

Haan Ye Mohabbat Hai
Haan Ye Mohabbat Hai

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Haan Ye Mohabbat Hai – 12

अक्षत को खामोश देखकर अर्जुन ने कहा,”चुप क्यों है ? मैंने और जीजू ने जस्ट अभी तेरी गाडी से एक लड़की को उतरते देखा है। अब बता कौन थी वो लड़की ?”
“आशु कही तेरा अफेयर तो नहीं चल रहा ?”,जीजू ने भी सीरियस होकर पूछा
“शादी के बाद अफेयर होना आम बात है जीजू , कही तू मीरा को धोखा देने के बारे में तो नहीं सोच रहा ?”,अर्जुन ने अक्षत को बोलने का मौका ही नहीं दिया


“अरे मैं,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”,अक्षत ने कहना चाहा
“साले साहब तुमसे ये उम्मीद तो बिल्कुल नहीं थी , अच्छे दिखते हो इसका मतलब ये नहीं कुछ भी करोगे”,जीजू ने नाराज होकर कहा
“हां जीजू आज लड़की गाडी से उतरी है कल घर भी आ जाएगी”,अर्जुन ने भी जीजू की साइड लेकर कहा
अक्षत ने दोनों की बातें सुनी तो परेशान हो गया। अक्षत का उतरा हुआ चेहरा देखकर अर्जुन और जीजू सीरियस शक्ल बनाकर उसे देखने लगे लेकिन अगले ही पल जीजू को अक्षत की हालत देखकर हंसी आ गयी।

जीजू के हँसते ही अर्जुन भी हंस पड़ा। उन्हें हँसते देखकर अक्षत समझ गया की दोनों मिलकर बस उसकी टाँग खींच रहे थे। अक्षत ने खुद को नार्मल किया और कहा,”हो गया आप दोनों का ?”
जीजू और अर्जुन ने अपनी हंसी रोकी और अर्जुन ने कहा,”क्यों वकील साहब तुम्हे लगता है सिर्फ तुम ही सवाल कर सकते हो , देखा कैसे घबरा गए तुम ?”


“वैरी फनी”,अक्षत ने मुंह बनाकर कहा और टेबल की तरफ चला आया। उसने कुर्सी खिसकाई और बैठते हुए कहा,”वैसे यहाँ आने का आईडिया किसका था ?”
“घर में जो सबसे फ्री आदमी है उसका”,सोमित जीजू ने भी कुर्सी खिसकाकर बैठते हुए कहा
“क्या यार जीजू आप फिर इसकी तरफ हो गए”,अर्जुन ने बैठते हुए कहा


“अरे मैं सब की साइड हूँ बस इस से थोड़ा याराना ज्यादा है मेरा,,,,,,,,,,,,,,!!”,जीजू ने अक्षत को साइड हग करते हुए कहा तो अर्जुन मुस्कुरा दिया और कहा,”ऐसा है क्या तो जरा अपने साले साहब से पूछिए इनके साथ जो लड़की थी वो कौन थी ?”
“मेरी जूनियर है , इंटर्न्स के लिए मेरे साथ काम कर रही है। उसका घर यही आस पास में है इसलिए मैंने उसे लिफ्ट दे दी”,अक्षत ने अपने फोन में देखते हुए कहा


“वैसे दिखती अच्छी है”,जीजू ने कहा
“मेरी दी उस से ज्यादा अच्छी दिखती है और अगर आपने उनके अलावा किसी और को देखा तो मैं आपको देख लूंगा”,अक्षत ने प्यार से सोमित जीजू को धमकाते हुए कहा जीजू ने उसकी तरफ देखा और मासूमियत से कहा,”ए तू क्या मुझे धमकी दे रहा है ? देख मैं बहुत शरीफ लड़का हूँ यार”


सोमित जीजू ने इतनी मासूमियत से कहा की अक्षत भी मुस्कुरा उठा उसने वेटर को बुलाया और तीनो के लिए खाना आर्डर किया। खाना आया और तीनो बातें करते हुए खाने लगे। आज कितने दिनों बाद तीनो साथ साथ थे और उनके पास करने के लिए ढेर सारी बाते थी।  सोमित जीजू और अर्जुन के साथ साथ अक्षत भी खुलने लगा और तीनो हँसते मुस्कुराते बाते करने लगे। खाना खत्म हुआ अक्षत को वहा का खाना बहुत पसंद आया।

अभी तीनो बात कर ही रहे थे की उनके साइड वाली टेबल पर बैठे कपल के सामने आकर एक लड़की खड़ी हो गयी और उन्हें अच्छे से लताड़ने लगी। लड़का साथ बैठी अपनी गर्लफ्रेंड के साथ आया था और जो उन पर गुस्सा कर रही थी वो शायद लड़के की पत्नी थी। रेस्त्रो का मालिक और वेटर उन तीनो को समझाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे अर्जुन और सोमित जीजू ने देखा तो दोनों उनका झगड़ा देखने लगे।


“मैं बिल पे करके आता हूँ”,अक्षत ने उठते हुए कहा। अर्जुन और जीजू का ध्यान तो झगडे में था इसलिए दोनों ने एक साथ हाथ से अक्षत को जाने का इशारा किया
अक्षत ने बिल पे किया साथ ही बच्चो के लिए कुछ वेफर्स और चॉकलेट्स लेकर वापस आया। वापस आकर अक्षत ने देखा अर्जुन और जीजू अभी भी उसी झगड़े को देख रहे है। देखते ही देखते लड़की ने टेबल पर रखा पानी का ग्लास उठाया और लड़के के मुंह पर पानी फेंक कर मारा और चली गयी। सोमित जीजू और अर्जुन ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर चुपचाप अक्षत के साथ रेस्त्रो से बाहर चले आये।


सोमित जीजू और अर्जुन अपनी गाड़ी लेकर आये थे और अक्षत अपनी। अंदर जो कुछ भी हुआ वो देखकर अर्जुन ने कहा,”जीजू देखा आपने वो लड़का कैसे अपनी वाइफ से डर रहा था। अरे हो सकता है वो अपनी किसी दोस्त के साथ आया हो , साथ बैठी हर लड़की गर्लफ्रेंड हो जरुरी तो नहीं”
“देख मैं इस मामले में कुछ नहीं कहूंगा , वैसे डरता तो तू भी है नीता से,,,,,,,,,,,!!”,जीजू ने अर्जुन का मजाक उड़ाते हुए कहा


“हहहहह ये किसने कहा आपसे ? मैं नहीं डरता,,,,,,,,,,,,,,मेरे अपने रूल्स है मैं अपने रूल्स के हिसाब से चलता हूँ,,,,,,,,,,!!”,अर्जुन अपनी तारीफ में बोल ही रहा था कि उसका फोन बजा। अर्जुन ने फोन निकाला देखा नीता का ही था उसने फोन उठाया और कान से लगा लिया। दूसरी तरफ से नीता ने अर्जुन से कुछ कहा होगा जिस से अर्जुन ने झेंपते हुए जीजू को देखा और कहा,”जीजू आप आशु के साथ घर चले जायेंगे , मुझे वो लॉन्ड्री से नीता के कुछ कपडे लेकर आने है तो,,,,,,!!”


“हाँ हाँ मैं समझ गया,,,,,,,,,जाओ तुम,,,,,,,,!!”,जीजू ने कहा तो अर्जुन गाड़ी लेकर चला गया। अर्जुन के जाते ही जीजू को अर्जुन की कही बात याद आ गयी और वे हसने लगे। उन्हें हसते देखकर अक्षत कुछ देर गाड़ी के पास खड़ा प्यार से उन्हें देखता रहा। सोमित जीजू हँसते हुए बड़े प्यारे लग रहे थे और आज काफी दिनों बाद अक्षत ने उन्हें यू खुलकर हँसते देखा था।

सोमित जीजू हँसते हुए अक्षत की तरफ पलटे और कहा,”ए आशु अभी अभी वो बोल रहा था कि वो किसी से नहीं डरता उसके अपने रूल्स है,,,,,,,,,,,,,,,,और नीता का फोन आते ही कैसे भाग गया ये लड़का ? मुझे तो उस रेस्त्रो वाले लड़के और अर्जुन में कोई खास फर्क नजर नहीं आ रहा , मेरा तो पेट फट जाएगा हंस हंस कर”
“आपको मेरे भाई का ऐसे मजाक नहीं उड़ाना चाहिए”,अक्षत ने सोमित जीजू की तरफ आते हुए कहा


“अच्छा सॉरी”,सोमित जीजू ने अपनी हंसी कंट्रोल करते हुए कहा लेकिन जैसे ही अक्षत मुस्कुराया सोमित जीजू अपना पेट पकड़कर जोर जोर से फिर हसने लगे। सोमित जीजू को हँसते देखकर अक्षत भी हसने लगा और कुछ देर बाद कहा,”अब घर चले माँ इन्तजार कर रही होगी ?”
“हाँ हाँ चलो मैं घर जाकर ये बात सबको बताने वाला हूँ , स्पेशली नीता को”,सोमित जीजू ने गाड़ी की तरफ जाते हुए कहा।


अक्षत आकर ड्राइवर सीट पर बैठा , सीट बेल्ट लगाया और वहा से निकल गया। रात के 9 बज रहे थे और ठण्ड भी बढ़ने लगी थी। अक्षत ने हल्का म्यूजिक चला लिया और जीजू से बातें करते हुए घर की तरफ चला जा रहा था।
“अच्छा अक्षत जब वो कपल झगड़ रहे थे तब तू क्यों चुप था ? देखा जाये तो एक वकील होने के नाते तुम्हे उन्हें अच्छी सलाह देनी चाहिए थी”,सोमित जीजू ने बातो बातो में कहा


“जीजू उस लड़की ने सही किया , वह लड़का शादीशुदा होकर भी अपनी गर्लफ्रेंड के साथ आया था , उसकी वाइफ को तो गुस्सा आयेगा ना ऐसे में अगर हम लोग उसे कोई सलाह दे तो वो उनके बीच झगड़ा और बढ़ा सकती है।”,अक्षत ने गाड़ी चलाते हुए कहा
“ये भी सही है वैसे शादी के बाद अफेयर के बारे में तुम क्या सोचते हो ?”,सोमित जीजू ने पूछा


“जीजू मुझे नहीं लगता इस जिंदगी में मुझे मीरा के अलावा कभी किसी और से प्यार होगा,,,,,,,,,,,,अफेयर तो दूर मैं मीरा के अलावा किसी और को देखना तक नहीं चाहता”,अक्षत ने सीरियस होकर कहा
“हाँ भई तुम्हारा प्यार कोई नहीं बाँट सकता , वैसे मैं मजाक कर रहा था और अगर तुमने मीरा के अलावा कभी किसी के बारे में सोचा भी तो फिर मैं तुम्हे देख लूंगा”,सोमित जीजू ने अक्षत को उसी के अंदाज में धमकाते हुए कहा तो अक्षत उनकी तरफ देखने लगा


“वैसे आपको दिल्ली की बड़ी याद आती होगी,,,,,,,,,,,,,!!”,अक्षत ने शरारत से कहा जिसका इशारा सोमित जीजू की पुरानी महिला मित्रो से था। सोमित जीजू ने सूना तो बच्चो की तरह मुंह बनाते हुए कहा,”सही कहते है मौसाजी बड़ो को बड़ो की तरह पेश आना चाहिए वरना घर के छोटे सर चढ़ जाते है”
अक्षत ने सूना तो मुस्कुराने लगा और गाडी की स्पीड बढ़ा दी। कुछ आगे जाकर अक्षत ने एकदम से गाड़ी रोक दी।
“क्या हुआ ?”,सोमित जीजू ने पूछा


“जीजू मैं दो मिनिट में आया”,कहते हुए अक्षत उतरा और सड़क के बगल वाली गली में चला गया
“ये लड़का भी ना पता नहीं कहा चला गया”,सोमित जीजू बड़बड़ाये। कुछ देर बाद अक्षत वापस आया उसके हाथ में दो डिब्बे आइसक्रीम थे। उसने जीजू को गाड़ी से बाहर आने को कहा। सोमित जीजू गाड़ी से बाहर चले आये अक्षत ने एक डिब्बा उनकी तरफ बढ़ा दिया तो जीजू ने कहा,”इतनी ठण्ड में अब तुम्हे आईस क्रीम खानी है ?”


“ये मेरी फेवरेट है , पता है बचपन में जब मैं , अर्जुन भैया और निधि स्कूल जाते थे तब इसी गली से होकर जाते थे और हर फ्राइडे यहाँ से आइसक्रीम खाते थे। आज अचानक यहाँ से गुजरना हुआ तो याद आ गया। मुझे लगा नहीं था ये दुकान अब तक खुली होगी लेकिन मिल गयी,,,,,,,,,,,,,,,,,खाइये ना बहुत अच्छी है”,अक्षत ने बच्चो की तरह खुश होकर कहा
सोमित जीजू मुस्कुराते हुए उसे देखने लगे और कहा,”वैसे तुझे देखकर लगता नहीं तेरी जिंदगी से इतनी खूबसूरत यादें भी जुडी है”


“निधि को आने दीजिये फिर एक दिन सब साथ बैठेंगे तब सुनना आप”,अक्षत ने खाते हुए कहा। सोमित जीजू भी उसके बगल में खड़े होकर आइसक्रीम खाने लगे। अक्षत ने ख़ुशी ख़ुशी में कुछ ज्यादा ही खा ली उसे याद नहीं रहा की उसे जुखाम बहुत जल्दी लगती है।
कुछ देर बाद दोनों घर के लिए निकल गए

अक्षत और सोमित जीजू घर पहुंचे। बच्चे सो चुके थे , दादू-दादी और विजय जी और राधा अपने कमरे में थे। तनु , मीरा और नीता भी अपने अपने कमरों में थी। सोमित जीजू अपने कमरे की ओर चले गए और अक्षत ऊपर चला आया। अक्षत निधि के कमरे में आया जिसमे काव्या और चीकू अपने अपने बेड पर सो रहे थे। अक्षत ने उनके पास आया दोनों का सर सहलाया और फिर उनके लिए लाये चॉकलेट्स और वेफर्स उनके बेड के पास लगे टेबल पर रख , कमरे की लाइट बंद करके बाहर चला आया।


अक्षत अपने कमरे में आया देखा अमायरा सो चुकी थी और मीरा वही पास बैठी कोई फाइल देख रही थी। वह एक हाथ से फाइल पकडे हुयी थी और दूसरे से अमायरा के सर को सहला रही थी। अक्षत धीरे से कमरे में आया ताकि अमायरा ना जाग जाये और मीरा को पता ना चले लेकिन अक्षत जैसे ही अंदर आया मीरा ने फाइल में देखते हुए कहा,”आ गए आप ?”
“तुम्हे कैसे पता चला ?”,अक्षत ने अंदर आते हुए कहा


“आपको तो हम बंद आँखों से भी पहचान सकते है। कैसा रहा आपका आज का दिन ?”,मीरा ने लेपटॉप बंद करके साइड में रख बिस्तर से उठते हुए कहा
“बेस्ट , आज कितने दिनों बाद मुझे बड़ा मजा आया बाहर घूमकर , जीजू और अर्जुन भैया भी साथ में थे”,अक्षत ने अपना कोट निकालते हुए कहा


“हम्म्म इसलिए आपने आने में इतनी देर की , आपकी बेटी आपके बारे में 50 बार पूछ कर आखिर में सो गयी”,मीरा ने सोयी हुई अमायरा को देखकर कहा
अक्षत मीरा के थोड़ा पास आया और अपनी बाँहे उसके गले में डालते हुए पूछा,”और तुमने ? तुमने मुझे मिस नहीं किया ?”
“बिल्कुल भी नहीं , जाकर कपडे बदल लीजिये वरना आपको ठंड लग जाएगी”,मीरा ने अक्षत के हाथो को साइड कर प्यार से कहा


“मीरा शादी के बाद तुम अनरोमांटिक हो गयी हो , शादी से पहले तुम हमेशा मेरे पास आने के बहाने ढूंढती थी और अब देखो मुझसे दूर भागती रहती हो”,अक्षत ने मीरा को पीछे से अपनी बाँहो में भरते हुए कहा
“आपसे किस ने कहा हम आपसे मिलने के बहाने ढूंढते थे”,मीरा ने अक्षत की ओऱ पलटकर पूछा


“बस मुझे पता है , मेरे लिए हर रोज चाय लेकर ऊपर आती थी”,अक्षत ने मीरा के चेहरे की ओर देखते हुए कहा
“अब दो लोग एक ही घर में रहेंगे तो एक दूसरे से टकराएंगे ना”,मीरा ने मासूमियत से कहा
“हम्म्म ये भी है वैसे तुमसे टकराने के लिए तो मैं हमेशा तैयार हु”,कहते हुए अक्षत ने मीरा के होंठो को अपने होंठो से छुआ। उस अहसास के साथ मीरा भी कुछ पल के लिए सब भूल गयी। अक्षत उसे किस करके पीछे हटा और कहा,”देखा मैं आज भी कितना रोमांटिक हूँ”


“और ये अचानक इतना रोमांटिक होने के पीछे की वजह जान सकते है हम”,मीरा ने अक्षत के पास आकर उसके बालों को सही करते हुए कहा
“वो इसलिए मिसेज व्यास की आजकल मुझे अपनी धर्मपत्नी पर कुछ ज्यादा ही प्यार आ रहा है और मैं चाहता हूँ ये बस बढ़ता ही जाये कभी कम ना हो”,अक्षत ने कहा


“आप हमसे थोड़ा प्यार करे या ज्यादा हमे ये यकीन है की आप हमे कभी छोड़कर नहीं जायेंगे। हाँ मानते है आप थोड़े सडु टाइप है लेकिन प्यारे भी बहुत है। आपकी बाते हमे कभी कभी परेशान कर देती है लेकिन आपका ख़ामोशी से हमे देखना एक सुकून भी देता है”,मीरा ने अक्षत के हाथो को थामकर कहा तो अक्षत मुस्कुराने लगा और खिड़की खोलकर बाहर आसमान में चमकते हुए चाँद को देखकर कहा,

“तुमसे मिलने से पहले मुझे लगता था सर्दी की रातों में खिड़की के पास बैठकर इस चाँद को देखना सुकून देता है , लेकिन अब लगता है मैं गलत था”
“ऐसा क्यों ?”,अक्षत की बात सुनकर मीरा ने हैरानी से पूछा। अक्षत ने उसे अपने पास आने का इशारा किया मीरा अक्षत के पास चली आयी तो अक्षत ने उसे अपने सीने से लगाते हुए कहा,”वो इसलिए क्योकि मुझे लगता है इस चाँद को देखने से ज्यादा सुकूनभरा है तुम्हारा मेरी आँखों के सामने होना।

दिनभर घर से बाहर रहकर , सैंकड़ो लोगो से मिलकर जब शाम में घर आता हूँ और तुम्हे मुस्कुराते देखता हूँ तो अपनी सब परेशानिया भूल जाता हूँ। मै जानता हूँ मैं तुम्हे ज्यादा वक्त नहीं दे पाता लेकिन तुम कभी मुझसे शिकायत भी नहीं करती,,,,,,,,,,,,,,,,,मैं चाहकर भी तुम जैसा नहीं बन सकता मीरा”


अक्षत को इमोशनल होते देखकर मीरा ने उसे थोड़ा कसकर गले लगाते हुए कहा,”मिस्टर सडु आप इमोशनल बिल्कुल अच्छे नहीं लगते है”


“वैसे मैं स्ट्रांग हूँ मीरा बस जब भी अपने रिश्ते के बारे में सोचता हूँ तो भावुक हो जाता हूँ , मैं कभी तुमसे दूर नहीं जाना चाहता मीरा,,,,,,,,,,,,,,,चाहता हूँ हमेशा तुम मेरे आस पास रहो , मैं जब भी तुम्हे आवाज दू तुम मेरे पास चली आओ,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,अक्षत ने कहते हुए मीरा के सर को अपने होंठो से छू लिया। कुछ देर वहा खड़े रहने के बाद अक्षत कपडे बदलने चला गया और मीरा बिस्तर लगाने लगी।

अगली सुबह मीरा जल्दी उठकर नीचे चली गयी। सब घरवाले नीचे ही थे लेकिन अक्षत नहीं मीरा उसके लिए चाय लेकर ऊपर चली आयी देखा अक्षत अभी तक सो रहा था। मीरा ने कप टेबल पर रखा और अक्षत के बगल में बैठकर धीरे से कहा,”अक्षत जी , अक्षत जी , उठ जाईये सुबह हो चुकी है”


कहते हुए उसने जैसे ही अक्षत के गाल को छुआ उसे गर्माहट महसूस हुयी। मीरा ने अक्षत का सर छूकर देखा जो की तप रहा था , हाथ गर्दन भी,,,,,,,,,,,मीरा के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये और उसने धीरे से कहा,”अक्षत जी को तो बुखार है , हमने कल रात इन्हे मना भी किया था खिड़की के पास खड़े होने से लेकिन आजकल ये हमारी बिल्कुल नहीं सुनते है। लगता है अभी ये गहरी नींद में है हमे इन्हे उठाना नहीं चाहिए”


मीरा ने अक्षत को अच्छे से कंबल ओढ़ाई और उसका सर छूकर देखने लगी। नींद में अक्षत को महसूस हुआ तो उसने मीरा के हाथ को अपने हाथ में लेकर कहा,”मैं ठीक हूँ बस थोड़ी सी सर्दी लग गयी है , तुम परेशान मत हो”
“आप आराम कीजिये हम आपके लिए दवा ले आते है”,कहते हुए मीरा ने जैसे ही उठना चाहा अक्षत ने उसे वापस बैठा लिया और अपना सर उसकी गोद में रखते हुए कहा,”तुम्हे किसी ने बताया नहीं मेरे हर दर्द की दवा तुम हो”
मीरा ने सूना तो अक्षत का सर दबाते हुए मन ही मन कहा,”आपके इस दर्द की वजह भी हम ही है”

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संजना किरोड़ीवाल 

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