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Love You जिंदगी – 59

Love You Zindagi – 59

Love You Zindagi
Love You Zindagi

नैना जैसे तैसे करके वहा से बाहर निकली। अवि ने भी निचे बैठा बैठा सब साइड करने लगा तो नैना ने उसकी और हाथ बढ़ा दिया। नैना का हाथ थामकर अवि उठ खड़ा हुआ और कहा,”थेंक्स।”
“यार नैना क्या है ये सब ? कहा से बुलाये है ऐसे टेंट वाले तुमने ? वो तो अच्छा हुआ की बच्चे या कोई एज्ड नहीं था वहा वरना हालत ख़राब हो जाती उस टेंट में”,सार्थक और शीतल ने नैना के पास आकर कहा


“सॉरी यार ! मेरी ही गलती है जो मैंने इनको बुलाया”,नैना ने झूठ मुठ का अफ़सोस जताते हुए कहा
“लेकिन मैडम आपने ही तो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!”,वहा खड़े टेंट लगाने वाले लड़के ने कहना चाहा लेकिन उस से पहले ही नैना ने उसे चुप कराते हुए कहा,”मैंने क्या ? मैंने कहा था रस्सी यहाँ ठीक से बांधना ,, चलो निकलो और जल्दी जल्दी काम खत्म करो”
नैना की बात सुनकर लड़का वहा से चला गया सार्थक का फोन बजा तो वह भी फोन पर बात करते हुए वहा से चला गया। शीतल ने नैना से चलने का इशारा किया तो चलते चलते नैना फिर लड़खड़ाई।

अवि ने अपना सर पीट लिया और नैना वहा से चली गयी। अवि ने चारो और नजर दौड़ाई आशीर्वाद अपार्टमेंट काफी बदला हुआ नजर आ रहा था उसे भी ये सब देखकर अच्छा लगा। वह ऊपर चला आया आज संडे था और अवि को कही नहीं जाना था इसलिए वह किचन एरिया में चला आया और अपने लिए कॉफी बनाने लगा खिड़की से आते हवा के झोंके ने जब अवि को छुआ तो नैना के परफ्यूम की खुशबु अवि के नाक से होकर गुजरी।

उसे कुछ देर पहले वाला वाक्या याद आ गया जब नैना उसके करीब थी। वह महक उसी पल की थी अवि अपनी टीशर्ट को थोड़ा सा ऊपर उठाकर
नाक के पास लाया और मुस्कुरा उठा। अवि ने अपने लिए कॉफी बनायी और लेकर बालकनी में आकर खड़ा हो गया। कॉफी पीते हुए वह निचे के नज़ारे देख रहा था।
उधर नैना शीतल के साथ ऊपर आयी। नैना नहाने चली गयी और शीतल नाश्ता बनाने किचन की और।

कुछ देर बाद रुचिका भी ऊपर चली आयी तब तक शीतल ने नाश्ता लाकर टेबल पर रख दिया और नैना भी नहाकर आ गयी। कमरे से बाहर आते हुए वह बार बार अपने हाथो को सूंघ रही थी। रुचिका ने देखा तो उसे थोड़ा अजीब लगा और उसने कहा,”क्या हो गया इन हाथो में ?”
“कुछ नहीं ! चलो नाश्ता करते है”,नैना ने बाद पलट दी और रुचिका की बगल में आ बैठी।

नाश्ता करते हुए नैना ने कहा,”कल शाम को माता रानी की प्रतिमा आएगी और उसके बाद होगा धमाका (धमाका शब्द सुनते ही रुचिका और शीतल ने नैना की और हैरानी से देखा तो नैना ने कहां) अरे मतलब पूजा अर्चना , डांस मस्ती वाला धमाका”
“अच्छा वो , तूने तो डरा ही दिया वैसे भी तेरा कोई भरोसा नहीं है तू कब क्या कर दे ?”,शीतल ने खाते हुए कहा
“हम्म्म्म , ट्रस्ट गाईज बहुत मजा आने वाला है , तुम लोग जल्दी जल्दी नाश्ता करो फिर मार्केट भी तो चलना है”,नैना ने कहा


“मार्किट क्यों ?”,रुचिका ने पूछा
“अरे दादा ! ऐसे कपड़ो में डांडिया करेंगे क्या कुछ तो होना चाहिए वैसा , कपडे लेने जा रहे है मोटी”,नैना ने कहा
“वॉव मुझे भी दिलवा देना ना नैना प्लीज प्लीज”,रुचिका ने कहा
“हम्म्म ठीक है नाश्ता करके जल्दी से तैयार हो जाना फिर चलेंगे”,नैना ने कहा।
नाश्ता करने के बाद शीतल रुचिका तैयार होने चली गयी। उनके जाते ही नैना फ्लैट से बाहर आयी और अवि के फ्लैट की बेल बजा दी।

अवि उस वक्त नहाकर ही आया था उसने ऊपर कुछ नहीं पहना था बालो को हाथ से झटकते हुए आकर उसने दरवाजा खोला सामने नैना को देखकर थोड़ा चौंका भी और खुश भी हुआ लेकिन अवि को इस हाल में देखकर नैना तुरंत पलट गयी और कहा,”अबे ओये लाज शर्म नहीं है जरा भी , लड़की के सामने ऐसे चले आये”
“मुझे क्या पता दरवाजे पर तुम हो ? अच्छा बताओ क्या हुआ ?”,अवि ने पूछा
“बाइक की चाबी दो”,नैना ने हाथ पीछे करके कहा


अवि अंदर गया अपनी बाइक की चाबी लेकर आया और नैना के हाथ में रख दी नैना चली गयी और अवि भी अंदर चला गया। नैना निचे आयी और पार्किंग से अवि की बाइक निकाली और गेट से कुछ दूर पहले आकर खड़ी हो गयी। उसने जेब से फोन निकाला और सार्थक को फोन किया। सार्थक बाहर आया और नैना के पास आकर कहा,”हां बोल !”
“तेरी बाइक कहा है ?”,नैना ने पूछा
“यही है क्यों तुझे चाहिए ?”,सार्थक ने कहा


“अबे नहीं ! हम सब मार्किट जा रहे है तू भी चल”,नैना ने कहा
“लेकिन लड़कियों की शॉपिंग में मैं क्या करुगा ?”,सार्थक ने कहा
“बैग उठाने वाला भी तो कोई चाहिए ना”,नैना ने कहा तो सार्थक ने उसे घुरा नैना मुस्कुराई और कहा,”अबे यार बाइक पर ट्रिपलिंग नहीं कर सकती न मैं इसलिए रुचिका को मैं ले जाउंगी , शीतल को तू ले आ। वैसे भी मार्किट में बाइक सही रहती है ऑटो से परेशान हो जाते है सब”


“अच्छा ठीक है कहा है वो दोनों ?”,सार्थक ने कहा
“तू बाइक लेकर आ तब तक मैं उन्हें फोन करती हूँ”,नैना ने कहा और रुचिका को फोन लगा दिया। दोनों निचे आयी तब तक सार्थक भी अपनी बाइक लेकर आ गया ! शीतल ने सार्थक को वहा देखा और नैना से कहा,”बाइक से जाना है।”


“हां वो सार्थक को भी मार्किट में कुछ काम था मैंने कहा हम लोगो के साथ ही चल”,नैना ने झूठ कहा तो सार्थक ने उसकी और देखा नैना ने बड़ी सी स्माइल देकर सार्थक को बात रखने का इशारा किया। रुचिका नैना के पीछे आ बैठी तो नैना ने शीतल को सार्थक के साथ आने को कहा और बाइक लेकर निकल गयी।
“बैठो !”,सार्थक ने शीतल से कहा


शीतल ने सार्थक के कंधे पर हाथ रखा और उसके पीछे बैठ गयी सार्थक भी बाइक लेकर निकल गया। कुछ ही दूर खड़ी मिसेज मेहता और मिसेज गुप्ता उन्हें देख रही थी उनके जाते ही मिसेज मेहता ने कहा,”मिसेज गुप्ता हो ना हो शर्मा जी के लड़के का और इस लड़की का कुछ तो चल रहा है ,, ये तो बड़ी चटपटी न्यूज है चलो चलकर मिसेज शर्मा से पूछते है”
दोनों सार्थक की मम्मी के पास आयी। ऊपर आकर उन्होंने मिस्टर शर्मा के घर की बेल बजायी।दरवाजा सार्थक की मम्मी ने ही खोला।

दोनों को सुबह सुबह वहा देखकर उन्होंने कहा,”अरे आप दोनों आज सुबह सुबह वो भी एक साथ ? सब खैरियत तो है”
“अरे हां हां मिसेज शर्मा सब ठीक है , लेकिन हम लोग जो आपको बताने वाली है वो सुनकर आपकी तबियत जरूर बिगड़ सकती है”,मिसेज गुप्ता ने चटखारे लेकर कहा
“ऐसा क्या हुआ है ?”,सार्थक की मम्मी ने घबराकर कहा


“आपका लड़का वो जो ऊपर वाली नैना है ना आजकल उसके साथ घूमने फिरने लगा है , आप तो जानती ही है वो लड़की जबसे यहाँ आयी है तबसे कैसे सबको परेशान कर रखा है ?”,मिसेज मेहता ने कहा
“हां बहन जी अभी अभी बाइक लेकर उन लड़कियों के साथ गया है। सोचा आपको बता दे बाकि आप जाने आपका लड़का आपके घर का मामला , हम कौन होते है कुछ बोलने वाले”,मिसेज मेहता ने कहा


“देखिये बहन जी जहा तक मुझे पता है सार्थक की सिर्फ उनसे अच्छी दोस्ती है। और शीतल तो मुझे बहुत पसंद है कितनी सीधी साधी लड़की है हां नैना थोड़ी बद्तमीज है लेकिन दिल की बुरी नहीं है”,मिसेज शर्मा ने कहा तो दोनों औरते मुंह बना कर वहा से चली गयी मिसेज शर्मा ने दरवाजा वापस बंद कर लिया

नैना , शीतल , रुचिका और सार्थक मार्किट पहुंचे। शीतल रुचिका और नैना तीनो शॉपिंग कर रहे थे और सार्थक काऊंटर के पास खड़ा कोई मैगजीन देख रहा था। नैना ने अपने लिए बोट नेक व्हाइट कुर्ता पसंद किया और बाकि शीतल रुचिका के लिए देखने लगी। कुछ देर बाद वह उठकर दूसरी और चली गयी। उसने एक टाई ली और उसे लेकर शीतल के पास आकर कहा,”देख ना यार शीतू मैंने इतने प्यार से सार्थक के लिए टाई लिया और वो लेने से मना कर रहा है”


“क्यों ?”,शीतल ने कहा
“पता नहीं , मुझे लगा उसके बर्थडे पर मैंने उस दिन कोई गिफ्ट नहीं दिया था सोचा आज दे देती हूँ लेकिन उसने तो लेने से ही मना कर दिया। शायद उसे हम लोगो की दोस्ती पसंद नहीं”,नैना ने मुंह बनाकर कहा
“ऐसा कुछ नहीं है लाओ मैं देकर आती हूँ वो जरूर लेगा”,शीतल ने नैना के हाथ से टाई लेकर कहा और सार्थक की और चली गयी। रुचिका भी उठकर उसके पीछे जाने लगी तो नैना ने रोककर कहा,”तुम कहा चली कबाब में हड्डी बनने ?”


“वो टाई देने !”,रुचिका ने मासूमियत से कहा
“अरे मेरा भोला पांडा , जिसको जो देना है वो दे देगा , चल आजा तुझे यहाँ का फेमस चीज बर्गर खिलाती हूँ”,नैना ने रुचिका के कंधे पर हाथ रखकर उसे उन दोनों से दूर ले जाते हुए कहा। शीतल सार्थक के पास आयी और उसकी और टाई बढाकर कहा,”तुमने इसे लेने से मना क्यों किया ? नैना ने इतने प्यार से तुम्हारे लिए इसे खरीदा और तुमने ना बोल दिया”


“मैंने ना बोला,,,,,,,,,,,,,,!”,सार्थक आगे बोलता इस से पहले ही शीतल ने उसके हाथ में टाई वाला बॉक्स देकर कहा,”बिल्कुल चुप और रखो इसे दोस्त हो इतना तो हक़ बनता है।”
“लेकिन मैं,,,,,!”,इस बार भी सार्थक इतना ही बोल पाया की शीतल ने उसके हाथ को छूकर कहा,”सार्थक रख लो ना , हम सब दोस्तों की तरफ से , ये तुम पर बहुत अच्छी लगेगी”


“लेकिन जिस तोहफे को काम में ही न लेना हो उसे लेने का क्या फायदा ?”,सार्थक ने शीतल की और देखकर कहा
“मतलब ?”,शीतल ने कहा
“मतलब की तुम्हे भी किसी ने तोहफा दिया लेकिन मैंने तो आज तक तुम्हारे हाथो में उन चूड़ियों को नहीं देखा”,सार्थक ने कहा तो शीतल को याद आया की शीतल ने कभी वो चुड़िया पहनी ही नहीं थी। उसने सार्थक की और देखा और कहा,”तुम इसे जरूर पहनना , हम सबको अच्छा लगेगा।”


कहकर शीतल वहा से चली गयी ! कुछ देर बाद नैना रुचिका भी आ गयी। शॉपिंग ख़त्म होने के बाद नैना ने सबको चलने को कहा और खुद कुछ देर के लिए गायब हो गयी और कुछ देर बाद एक छोटा सा बैग लेकर आयी और बाइक के हेंडल में टाँग दिया। चारो घर चले आये। शीतल रुचिका और नैना ऊपर चली आयी नैना ने दोनों को अपने बैग्स भी दे दिए और चलने को कहा।

शीतल रुचिका के जाने के बाद नैना एक बार फिर अवि के फ्लैट के सामने आयी और बेल बजा दी। अवि ने दरवाजा खोला तो नैना ने चाबी उसकी और बढ़ा दी। अवि ने चाबी ली और जाने लगा तो नैना ने कहा,”सुनो !”
“हम्म्म !”,अवि ने कहा
नैना ने वो छोटा सा बैग उसकी और बढ़ा दिया अवि ने उसे लेकर कहा,”इसमें क्या है ? फिर से कोई शरारत करने के मूड में तो नहीं हो ना तुम”


“एक्स्ट्रा चीज बर्गर है , तुम्हारी बाइक यूज की उसके बदले में ये”,नैना ने कहा और चली गयी। अवि मुस्कुरा दिया और अंदर चला आया उसने बर्गर निकाला और पहले एक छोटा सा बाईट लिया क्योकि नैना का कोई भरोसा नहीं था वह इसमें भी एक्स्ट्रा मिर्ची मिला दे लेकिन नहीं इसमें ऐसा कुछ नहीं था उलटा वो इतना टेस्टी था की अवि ने पूरा खा लिया।
मार्किट जाकर नैना थक गयी थी वह सोफे पर लेटे लेटे ही सो गयी और रुचिका शीतल को नए कपडे पहन कर दिखा रही थी !

संडे की शाम अच्छी गुजरी। अगले दिन तीनो दिनभर ऑफिस में काम करती रही और अगले दिन की छुट्टी होने की वजह से आज देर तक ऑफिस में ही रुकी ताकि पेंडिंग काम खत्म कर सके। रात में जब तीनो लौटी तब तक अपार्टमेंट में सारी तैयारियां हो चुकी थी। पूरा अपार्टमेंट और गार्डन लाइटिंग से जगमगा रहा था नैना को ये सब देखकर एक अलग ही सुकून मिल रहा था। रात का खाना खाने के बाद नैना अपने बेड पर बैठे बैठे किसी सोच में गुम थी शीतल ने देखा तो पूछ लिया,”क्या हुआ सोना नहीं है आज ?”


“इंसान जब बहुत खुश होता है ना तो उसे नींद नहीं आती”,नैना ने कहा
“क्या , क्या , क्या ? ख़ुशी किस बात की है ?”,शीतल ने पूछा !
“अरे कल नवरात्र स्थपना है , मातारानी अपने घर आएगी , कितना मजा आएगा”,नैना ने खुश होकर कहा
“हां लेकिन तुम कबसे इन सब में विश्वास करने लगी , आई मीन दो हफ्ते से देख रही हूँ काफी बदली बदली नजर आ रही हो”,शीतल ने शकभरी नजरो से नैना को देखते हुए कहा


“संगत का असर है जैसे मेरे साथ रहके तुम जवाब देने लगी हो वैसे ही तुम्हारे साथ रहकर मेरे अंदर की भक्ति जाग गयी”,नैना ने कहा
“पागल लड़की , चलो सो जाओ सुबह जल्दी उठना भी तो है ना”,शीतल ने कहा और सो गयी !

अगली सुबह अपार्टमेंट के लोग और बच्चे माता की प्रतिमा लाने के लिए निचे जमा थे। नैना ने अपना नया सफ़ेद कुर्ता और जींस पहनी , रुचिका ने लाइट ग्रीन गाउन और शीतल ने लाल रंग का चूड़ीदार सूट पहना। आज शीतल सबसे प्यारी लग रही थी। तीनो फ्लैट से बाहर आयी। शीतल को अचानक कुछ याद आया और उसने कहा,”तुम लोग चलो मैं आती हूँ।”


“ठीक है जल्दी आना”,कहकर नैना रुचिका के साथ वहा से चली गयी ! शीतल अंदर आयी कबर्ड से एक डिब्बा निकाला और उसे खोलकर देखा उसमे हरी लाल वही चुडिया थी जो सार्थक ने उसके लिए खरीदी थी। वह उन्हें लेकर बिस्तर पर बैठ गयी और एक एक करके पहनने लगी। नैना रुचिका के साथ निचे आयी तो सब उसे हैरानी से देख रहे थे क्योकि आज से पहले नैना को किसी ने कुर्ते में तो बिल्कुल नहीं देखा था।

आज अवि ने भी सफ़ेद शर्ट पहना था जैसे ही नजर नैना पर गयी बस उसे देखता रहा और सोचता रहा,”इन कपड़ो में कितनी अच्छी लगती है ये लड़की , किसी का भी दिल आ जाये इस पर”
नैना ने देखा सब वहा है सार्थक भी आ चुका था लेकिन शीतल अभी तक नहीं आयी उसने सार्थक को मैसेज किया,”शीतल ऊपर है प्लीज उसे बुलाकर ला ना , उसका फोन भी हम लोगो के पास है”


नैना का मेसेज देखकर सार्थक ऊपर चला आया। दरवाजा खुला देखकर वह अंदर चला आया उसने देखा शीतल कमरे में थी तो सार्थक ने कहा,”अरे तुम यहाँ हो निचे सब तुम्हारा वैट कर रहे है”
शीतल ने सार्थक को वहा देखा तो कहा,”हां हां एक मिनिट” कहते हुए उसने जल्दी जल्दी चुडिया पहनी तो एक चूड़ी चटख गयी ! सार्थक अंदर आया और उसे रोकते हुए कहां,”आराम से , कांच की है चुभ जाएगी। लाओ मुझे दो”


सार्थक ने शीतल के हाथ से चुडिया ले ली और एक एक करके उसके हाथो में पहनाने लगा। शीतल बस प्यार से उसे देखे जा रही थी और जैसे ही सार्थक ने उसकी और देखा शीतल ने नजरे घुमा ली। उसके हाथो में वो लाल चुड़िया बहुत सुन्दर लग रही थी।

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