Pasandida Aurat Season 3 – 51
Pasandida Aurat Season 3 – 51

सुरभि ने अवनि को अपने और सिद्धार्थ के रिश्ते के बारे में बताया तो ना चाहते हुए भी अवनि उदास हो गयी ! अवनि सिद्धार्थ और सुरभि के रिश्ते से नाराजगी नहीं थी बल्कि वह इसलिए उदास थी कि सुरभि ने अब तक उस से ये सब छुपाया। अवनि का सुरभि से आगे बात करने का मन नहीं हुआ तो उसने फोन काट दिया और फ़ोन सोफे पर रखकर अपने कमरे में चली आयी। शादी के बाद आज पहली बार अवनि को पृथ्वी पर गुस्सा आ रहा था और वह उस से नाराज भी थी।
अवनि की नजर कमरे में रखे सूटकेस पर पड़ी तो उसे याद आया कि गोआ से आने के बाद उसने बैग से सामान निकाला ही नहीं। अवनि अपना मन बहलाने के लिए दोनों सूटकेस खाली करने लगी और सामान कबर्ड में जमाने लगी। सब काम खत्म करके अवनि बिस्तर पर आ लेटी और पृथ्वी के बारे में सोचते
हुए सो गयी !
नीलेश को अच्छे से समझाकर पृथ्वी मिस्टर देसाई के ऑफिस चला आया। दिनभर पृथ्वी मिस्टर देसाई के साथ नयी नयी मीटिंग्स में बिजी रहा। वह अवनि से बात करना चाहता था लेकिन उसे वक्त ही नहीं मिला और देखते ही देखते शाम हो गयी ! प्राची ने भी दिनभर प्रोफेशनली काम को फॉलो किया। जैसा कि मिस्टर देसाई ने कहा था वह पृथ्वी से दूर ही थी , ना उसने दिनभर पृथ्वी से कोई बात की ना ही उसके करीब आने की कोशिश की।
पृथ्वी के होते भरत भी दिनभर शांत ही रहा , उसे वैसे भी एक हफ्ते तक इंतजार करना था ताकि वह तय तारीख पर प्राची का साइन किया हुआ पेपर मिस्टर देसाई के मुँह पर मार सके और कम्पनी और हक़ जमा सके।
शाम में मिस्टर देसाई ने प्राची को अपने केबिन में बुलाया। भरत और पृथ्वी भी वहा मौजूद थे। बात थोड़ी निजी थी इसलिए मिस्टर देसाई ने पृथ्वी और भरत को केबिन से बाहर जाने को कहा। जब दोनों बाहर चले गए तो मिस्टर देसाई प्राची की तरफ पलटे और कहा,”क्या अब तुम खुश हो प्राची ?”
“खुश फॉर व्हाट डेड ?”,प्राची ने हैरानी से कहा क्योकि उसे नहीं पता था मिस्टर देसाई किस बारे में बात कर रहे है
“तुमने विक्रम को शादी के लिए मना कर दिया ?”,मिस्टर देसाई ने फिर गुस्से से कहा
“मैंने ? लेकिन मैंने उस से कुछ नहीं कहा डेड , इन्फेक्ट कल रात के बाद मेरी उस से बात तक नहीं हुयी है”,प्राची ने कहा
“तुमने उस से कहा कि पृथ्वी ने देसाई ग्रुप तुम्हारे लिए ज्वाइन किया है और अब पृथ्वी को तुम्हारा होने से कोई नहीं रोक सकता,,,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने अपने दाँत पीसकर कहा
“ये आपसे विक्रम ने कहा ?”,प्राची ने पूछा
“नहीं ये बात खुद मिस्टर कपूर ने अपने कानो से सुनी है जब तुम विक्रम से ये सब कह रही थी ! प्राची हेव यू लोस्टेड ? आखिर तुम चाहती क्या हो ? अब भी तुम पृथ्वी के सपने देख रही हो,,,,,,,,,,,,तुम जानती भी हो वो इस कम्पनी में क्यों आया है ?”,मिस्टर देसाई ने गुस्से से उबलकर कहा
प्राची ने टेबल पर रखा पानी का गिलास उठाया और एक घूंठ भरकर गिलास को वापस टेबल पर रखकर कहा,”डेड ! मुझे ये सब जानने में कोई इंट्रेस्ट नहीं है , और मैं पृथ्वी को मुझ से प्यार करने के लिए फ़ोर्स नहीं कर रही , मैं बस उसका वेट कर रही हूँ एंड आई नो एक दिन वो मेरे पास जरूर आएगा”
“और विक्रम का क्या ? क्या तुम्हे नहीं लगता तुमने उसके साथ कितनी नाइंसाफी की है ? वो लड़का तुम्हे बहुत पसंद करता है , तुम पृथ्वी के पीछे पागल हो ये जानने के बाद भी वह तुम से शादी करना चाहता है , ज़रा सोचो वो लड़का तुम्हे कितना चाहता होगा और तुमने उसे हर्ट कर दिया”
“डेड ! आई सो सॉरी , मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था ! मैं उसे सिर्फ अपना अच्छा दोस्त मानती हूँ मुझे नहीं पता था वो ये सब,,,,,,,,,,,,,आई ऍम सॉरी”,प्राची ने धीमे स्वर में कहा
“सॉरी मुझसे नहीं विक्रम से कहो , अनजाने में ही सही तुमने उसका दिल तोडा है प्राची”,मिस्टर देसाई ने कहा
“हम्म्म ठीक है मैं उस से माफ़ी मांग लुंगी”,प्राची ने कहा
प्राची के मुँह से माफ़ी मांगने की बात सुनकर मिस्टर देसाई का गुस्सा कुछ शांत हुआ और उन्होंने कहा,”ठीक है तुम जाओ और पृथ्वी को मेरे पास भेज दो”
“वो आपका मैनेजर है , आप खुद बुला लीजिये”,प्राची ने कहा और वहा से चली गयी
“उफ़ ये लड़की , समझ नहीं आता क्या चाहती है ये ?”,मिस्टर देसाई झल्ला उठे और अपनी कुर्सी पर आ बैठे। उन्होंने पृथ्वी को फोन करके अपने केबिन में आने को कहा !
शाम के 5 बज रहे थे और अवनि अपने कमरे में बिस्तर पर गहरी नींद में सो रही थी। नींद में वह पल दिखाई दिए जब वह ख़ुशी ख़ुशी पृथ्वी के लिए लंच लेकर उसके ऑफिस गयी थी और पृथ्वी वहा नहीं था। ये एक हकीकत थी जो अवनि सपने में देख रही थी और फिर सहसा ही उसे सपने में दिखा जैसे पृथ्वी उसका हाथ छोड़कर सामने खड़ी प्राची के पास जा रहा है। अवनि नम आँखों से उसे खुद से दूर जाते देख रही है और पृथ्वी प्राची का हाथ थामकर मुस्कुरा रहा है।
खिड़की से आती तेज हवा से खिड़की पर लगा विंड चेम्प बजा तो अवनि की नींद टूटी और वह एकदम से उठकर बैठ गयी। अवनि पसीने से लथपथ थी और उसका दिल जोरो से धड़क रहा था। उसने इधर उधर देखा तो पाया कि पृथ्वी और प्राची वहा नहीं है , वह अपने कमरे में है और शायद कोई बुरा सपना देख रही थी। अवनि ने महसूस किया कि प्यास से उसका गला सूखा जा रहा है। अवनि ने टेबल की तरफ हाथ बढ़ता जग खाली था ! वह उठी और अपने बालों को समेटते हुए किचन की तरफ चली आयी।
किचन में आकर अवनि ने पानी पीया और बाहर चली आयी। हॉल में लगी घडी पर नजर पड़ी , पृथ्वी के घर आने में अभी टाइम था। अवनि ने बालकनी से कपडे उठाये और हॉल में बैठकर उन्हें तह करने लगी। उसने बेमन से सभी कपडे तह किये और वही सोफे पर रख दिए।उसके दिमाग में अभी भी बस पृथ्वी चल रहा था। आज उसका किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था , एक उदासी उसके चेहरे पर जैसे चिपक सी गयी थी।
अवनि ने सोफे पर रखा अपना फोन उठाकर देखा। कुछ नोटिफिकेशन और सुरभि के चंद मैसेज के अलावा कुछ भी नहीं था ! पृथ्वी का ना कोई कॉल आया था ना ही कोई मैसेज और इस से अवनि और चिढ गयी कि आखिर पृथ्वी इतना शांत कैसे है ?
अवनि उठी और बुक रेंक की तरफ चली आयी। अपना ध्यान भटकाने के लिए उसने बुक रेंक से एक किताब निकाली और पढ़ने लगी। यही एक जरिया था जिस से अवनि अपने दिमाग में चल रही उलझनों को कुछ देर के लिए शांत कर सकती थी और ऐसा हुआ भी,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
मिस्टर देसाई के समझाने पर प्राची विक्रम से माफ़ी मांगने उसके ऑफिस चली आयी लेकिन ऑफिस आकर पता चला कि विक्रम मुंबई से 45 किलोमीटर बाहर अपने फार्म हॉउस पर है। प्राची ऑफिस से बाहर चली आयी , विक्रम उसका अच्छा दोस्त था और उसकी दोस्ती वह खोना नहीं चाहती थी इसलिए उसने विक्रम के फार्म हॉउस जाने मन बनाया और मिस्टर देसाई को फोन लगा दिया।
“हेलो प्राची ! कहा हो तुम ? आज शाम क्लाइंट के साथ मीटिंग है और मुझे उसकी फाइल चाहिए”,मिस्टर देसाई ने कहा
“आज की मीटिंग की सभी फाइल्स मैंने आपकी टेबल पर रख दी है डेड , अच्छा लिस्टन आई रियलाइज कि मैंने विक्रम को हर्ट किया है सो मैं उस मिलने उसके फार्म हॉउस जा रही हूँ ! आप मेरा इंतजार मत करना मैं वहा से सीधा घर आ जाउंगी”,प्राची ने कहा
“अह्ह्ह मैं ड्राइवर को साथ भेज दू ?”,मिस्टर देसाई ने कहा
“नहीं डेड मैं खुद ड्राइव कर लूंगी , ओके बाय घर पर मिलती हूँ”,प्राची ने कहा और फोन काट दिया
“प्राची , प्रा,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई कुछ कहना चाहते थे लेकिन प्राची ने पहले ही फोन काट दिया। मिस्टर देसाई ने फोन साइड में रखा लेकिन प्राची के
फार्म हॉउस जाने की बात जानकर मिस्टर देसाई थोड़े से परेशान हो गए।
पृथ्वी सामने बैठा अपने लेपटॉप पर कुछ काम कर रहा था उसने मिस्टर देसाई को परेशान देखकर कहा,”क्या हुआ सर ! आप कुछ परेशान नजर आ रहे है ?”
मिस्टर देसाई ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”प्राची विक्रम के फार्म हॉउस जा रही है बस वही सोचकर थोड़ा,,,,,,,,,,,आई हॉप उनके बीच सब सही हो जाये”
विक्रम का नाम सुनकर पृथ्वी की भँवे तन गयी। विक्रम कितना गलत इंसान है ये पृथ्वी बहुत पहले से जानता था , हालाँकि पृथ्वी को प्राची से कोई मतलब नहीं था वह चाहे जहा जाए लेकिन विक्रम के फार्म हॉउस की बात सुनकर पृथ्वी का माथा ठनका और उसने मिस्टर देसाई से कहा,”सर विक्रम,,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी अपनी बात पूरी करता इस से पहले मिस्टर देसाई ने कहा,”ओह्ह्ह हाँ मैं तुम्हे उसके बारे में बताना ही भूल गया , विक्रम कपूर कपूर प्रोडक्शन के मालिक और मेरे बिजनेस पार्टनर मिस्टर कपूर के छोटे भाई है।
मिस्टर कपूर चाहते है प्राची उनके घर की बहू बने इसी सिलसिले में बातचीत करने कर सब लोग घर भी आये थे। मुझे इस रिश्ते से कोई ऐतराज नहीं है लेकिन प्राची को तो तुम जानते ही हो उसके सर पर अभी पागलपन सवार है,,,,,,,,,,,,,विक्रम अच्छा लड़का है , मैं कई बार उस से मिल भी चुका हूँ और वो प्राची को पसंद भी करता है,,,,,,,,,,,बस इसीलिए प्राची उस से मिलने गयी है। तुम परेशान मत हो मैं ठीक हूँ,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो अंदर ही अंदर और परेशान हो गया। मिस्टर देसाई विक्रम का असली रूप नहीं जानते थे शायद इसलिए ये सब कह रहे थे लेकिन पृथ्वी तो उसे बहुत अच्छे से जानता था वरना वह उस दिन उसे उसके ऑफिस जाकर मारता क्यों ?
अब तक पृथ्वी को प्राची पर गुस्सा आता रहा लेकिन अब उसे प्राची पर तरस आ रहा था कही वह विक्रम का शिकार ना हो जाये। पृथ्वी मिस्टर देसाई से कुछ कहता इस से पहले ही मिस्टर देसाई फोन पर बात करते हुए केबिन से बाहर चले गए।
शाम के 7 बज रहे थे सभी मीटिंग्स और काम के बाद पृथ्वी ने अपने सभी पेपर्स और फाइल्स को इकट्ठा किया और बैग में रखने लगा। उसने अपना लेपटॉप भी बैग में रखा और मिस्टर देसाई की तरफ आया तो देखा कि वे परेशान से फोन में कोई नंबर डॉयल करते और कान से लगाकर झुंझलाते।
“सर ! सब ठीक है ?”,पृथ्वी ने पूछा
“पृथ्वी ! प्राची विक्रम के फार्म हॉउस गयी थी अभी मैं उसे फोन कर रहा हूँ लेकिन उसका फोन बंद आ रहा है , मैंने विक्रम का नंबर भी ट्राय किया लेकिन उसका फोन भी आउट ऑफ़ रीच आ रहा है,,,,,,,,,,बाहर बारिश हो रही है और मुझे अब उसकी फ़िक्र हो रही है। आज से पहले उसका फोन कभी बंद नहीं आया”,मिस्टर देसाई ने घबराये हुए स्वर में कहा
“आप घबराईये मत ! फार्म हॉउस के लेड लाइन पर कॉल कीजिये”,पृथ्वी ने कहा
“मैंने सब ट्राय कर लिया है पृथ्वी लेकिन मेरी प्राची से बात नहीं हो पा रही है,,,,,,,,,,,,,पृथ्वी क्या तुम मेरी एक मदद करोगे प्लीज ?”,मिस्टर देसाई ने आसभरे स्वर में पृथ्वी से कहा
“जी सर कहिये”,पृथ्वी ने कहा
“इफ यू डोंट माइंड , क्या तुम विक्रम के फार्म हॉउस जाकर प्राची को लेकर आ सकते हो प्लीज ?”,मिस्टर देसाई ने कहा
“सर मैं,,,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“पृथ्वी इस वक्त मैं तुम्हारे सिवा और किसी पर भरोसा नहीं कर सकता प्लीज मुझ पर ये अहसान कर दो”,मिस्टर देसाई ने अपने हाथ जोड़कर कहा
“अरे सर प्लीज ! ऐसा मत कीजिये मैं चला जाता हूँ आप इसे अहसान मत कहिये प्लीज”,पृथ्वी ने कहा
पृथ्वी ने हामी भरी तो मिस्टर देसाई की जान में जान आयी उन्होंने अपनी गाडी की चाबी पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”मेरी गाडी ले जाओ”
पृथ्वी ने चाबी ली और केबिन से बाहर से निकल गया। बाहर आकर उसकी नजर दिवार पर लगी घडी पर पड़ी। शाम के 7 बज रहे थे अवनि घर पर उसका
इन्तजार कर रही होगी और आज तो पृथ्वी का घर जाना और भी ज्यादा जरुरी था क्योकि आज अवनि उस से नाराज थी।
पृथ्वी ऑफिस से बाहर चला आया। वह अभी भी कश्मकश में था प्राची को लेने फार्म हॉउस जाए या फिर अवनि को मनाने घर ? पृथ्वी ने अपनी जेब से फोन निकाला और किसी का नंबर डॉयल किया ! कुछ देर बाद किसी ने फोन उठाया और कहा,”हेलो”
“कहा हो तुम ?”,पृथ्वी ने पूछा
“वाशी में”,दूसरी तरफ से आवाज आयी
“गुड , अब मुझे सेक्टर 30 में मिलो”,पृथ्वी ने कहा और फोन काट दिया
उसने मिस्टर देसाई की गाड़ी पार्किंग से निकाली और वहा से निकल गया। कुछ देर बाद पृथ्वी सेक्टर 30 पहुंचा और देखा नीलेश वहा आ चुका है। पृथ्वी ने गाडी उसके बगल में रोक दी। पृथ्वी ने अपना बैग लिया और गाडी से बाहर आया। नीलेश पृथ्वी के पास आया और कहा,”तुमने मुझे यहाँ क्यों बुलाया ?”
पृथ्वी ने गाड़ी की चाबी नीलेश को दी और फार्म हॉउस जाने का कहकर उसे सब समझाया।
नीलेश ने सुना तो उसे समझ आया कि हो ना हो प्राची किसी बड़ी मुसीबत में है। उसने चाबी ली और पृथ्वी से कहा,”लेकिन तुमने मुझे क्यों कहा ? तुम खुद भी तो जा सकते थे ना , मे बी इसके बाद प्राची तुम्हे समझती और जिद छोड़ देती”
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”जिंदगी एक बार सबको हीरो बनने का मौका जरूर देती है , ये तुम्हारा मौका है। मैं जा सकता था लेकिन मैं प्राची की नजर में फिर से हीरो बनना नहीं चाहता,,,,,,,,,,,,,मेरी वाइफ घर पर मेरा इंतजार कर रही होगी , सुबह से एक बार भी उसे देखा नहीं है , देखना तो दूर सुबह से उसकी आवाज तक नहीं सुनी है , मुझे उससे मिलना है”
नीलेश ने सुना तो मुस्कुराया उसे मुस्कुराते देखकर पृथ्वी ने कहा,”क्या हुआ तुम मुस्कुरा क्यों रहे हो ?”
नीलेश ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”तुम्हारी वाइफ बहुत लकी है”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और ना में गर्दन हिलाकर कहा,”नहीं ! मैं लकी हूँ जिसे वो मिली और अब उसे सम्हालकर रखना मेरी जिम्मेदारी है”
नीलेश ने सुना तो निशब्द हो गया , आज उसे समझ आया पृथ्वी अपनी पत्नी से कितना प्यार करता था। अब तक उसे पृथ्वी से मीठी सी जलन थी क्योकि प्राची उसे चाहती थी लेकिन आज वह जलन भी खत्म हो गयी। नीलेश गाडी की तरफ बढ़ गया और पृथ्वी वहा से पैदल ही आगे बढ़ गया क्योकि कुछ दूर वाशी रेलवे स्टेशन था और उसे अपने घर जाना था।
( क्या अवनि का सपना बनेगा कभी हकीकत या रह जायेगा सिर्फ सपना बनकर ? क्या प्राची को सच में है विक्रम का दिल तोड़ने का मलाल और वह मांगना चाहती है उस से माफ़ी ? विक्रम के फार्म हॉउस पर जाकर कही प्राची ने गलती तो नहीं कर दी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल

