Pasandida Aurat Season 3 – 39
Pasandida Aurat Season 3 – 39

अपनी गाड़ी की ड्राइवर सीट पर बैठा सिद्धार्थ सुरभि के बारे में सोच रहा था। इस वक्त उसे खुद पर शर्म आ रही थी कि उसने कितनी आसानी से बिना सच्चाई जाने सुरभि को गलत समझ लिया। सुरभि का सच जानने के बाद तो सिद्धार्थ को उस से और मोहब्बत होने लगी , वह सुरभि से मिलने के लिए तड़प उठा। एक पल के लिए ख्याल आया कि अभी गाड़ी स्टार्ट करे और निकल जाए सीधा उदयपुर लेकिन अगले ही पल उसे जगदीश जी और गिरिजा जी का ख्याल आया , इन दिनों जगदीश जी का अपने लिए बदला व्यवहार देखकर सिद्धार्थ खुश था।
उसने जल्दी ही सुरभि से मिलने का फैसला किया और अपने दिल पर पत्थर रखकर गाडी घर जाने वाले रास्ते की तरफ बढ़ा दी।
रास्तेभर सिद्धार्थ सुरभि के बारे में सोचता रहा , सुरभि को लेकर अब उसके दिल में कोई भी गलतफहमी नहीं थी बस उसे जल्द से जल्द सुरभि से मिलना था और जानना था कि उस सुबह उसके साथ क्या हुआ ? सिद्धार्थ घर पंहुचा जगदीश जी को उनकी दवा दी और अपने कमरे में चला आया।
उसने अपना फ़ोन देखा और सुरभि का नंबर मिलाने का सोचा लेकिन नंबर डॉयल करके फोन काट दिया क्योकि सिद्धार्थ जान चुका था सुरभि इस बार भी उसका फोन नहीं उठाएगी और ये जानने के बाद भी उसे सुरभि पर गुस्सा नहीं आया बल्कि उसकी और ज्यादा परवाह होने लगी।
देसाई मेंशन्स , मुंबई
“प्राची अभी तक घर नहीं आयी और उसका फोन भी बंद आ रहा है,,,,,,,,,,,,आखिर वो ऐसे बिना बताये कहा चली गयी ?”,घर के हॉल में सोफे पर बैठे मिस्टर देसाई बड़बड़ाये कि तभी उनकी नजर दरवाजे से अंदर आती प्राची पर पड़ी जो कि बारिश की वजह से भीग चुकी थी , उसके बालो और कपडो से पानी चू रहा था।
प्राची को इस हालत में देखकर मिस्टर देसाई अपनी जगह से उठे और हैरानी भरे स्वर में कहा,”प्राची ! तुम इस वक्त कहा से आ रही हो और तुम भीग कैसे गयी ?”
प्राची से कहकर मिस्टर देसाई ने नौकर से प्राची के लिए तौलिया लाने का इशारा किया और खुद प्राची की तरफ चले आये। प्राची ने उनके सवाल का कोई जवाब नहीं दिया उलटा अंदर ही अंदर वह गुस्से और जलन की आग में जल रही थी लेकिन अपने इन भावो को उसने अपने चेहरे पर नहीं आने दिया। मिस्टर देसाई प्राची के सामंने चले आये उन्होंने नौकर के हाथ से तौलिया लेकर प्राची की तरफ बढ़ाया और कहा,”ये क्या हालत बना रखी है तुमने अपनी ? मैंने तुम्हारी दोस्तों को भी फोन किया लेकिन उन्होंने बताया कि तुम उनके साथ नहीं हो,,,,,,,,,,!!!”
“मैं विक्रम के साथ थी डेड”,प्राची ने तौलिये से अपना मुँह पोछते हुए कहा
“विक्रम के साथ , वो भी इस हाल में ?”,मिस्टर देसाई ने हैरानी भरे स्वर में पूछा
“ओह्ह्ह कम ऑन डेड ! मैं विक्रम के साथ विले पार्ले किसी काम से गयी थी लौटते वक्त अचानक से बारिश होने लगी और मैं भीग गयी,,,,,,,,,,,अब क्या मुझे और सफाई देने की जरूरत है ?”,आख़िरकार प्राची का गुस्सा फूट पड़ा
ये देखकर मिस्टर देसाई ने अपने हाथ खड़े कर दिए और कहा,”नहीं , तुम अपने में जाओ और जाकर कपडे बदल लो वरना बीमार पड़ जाओगी”
प्राची ने हाथ में पकड़ा तौलिया वहा पड़ी कुर्सी पर डाला और सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी ! मिस्टर देसाई पलटे , उन्होंने प्राची को जाते देखा और मन ही मन बड़बड़ाये,”घर में 3-3 लग्जरी गाड़िया होने के बाद भी प्राची बारिश में भीगते हुए घर आयी है , ये बात मुझे कुछ हजम नहीं हो रही। विक्रम और प्राची के बीच बढ़ती नजदीकियों को देखकर लगता है मुझे जल्द से जल्द मिस्टर कपूर और उनकी फॅमिली को घर पर बुला लेना चाहिए”
मिस्टर देसाई को अपने ही ख्यालो में खोया देखकर नौकर उनके पास आया और कहा,”सर ! सर ! आप ठीक तो है न ?”
मिस्टर देसाई की तन्द्रा टूटी , उन्होंने हामी में गर्दन हिलाई और वहा से चले गए।
कैब में बैठा पृथ्वी किसी गहरी सोच में डूबा खिड़की से बाहर देख रहा था ! बगल में बैठी अवनि उसके चेहरे पर आये परेशानी के भाव बखूबी समझ रही थी इसलिए उसने धीरे से पृथ्वी के हाथ को अपने हाथ में थाम लिया। अवनि के हाथ की गर्माहट पाकर पृथ्वी की तंद्रा टूटी , उसने अवनि की तरफ देखा तो अवनि ने कहा,”प्राची के बारे में सोचकर परेशान हो रहे है आप ?”
पृथ्वी अवनि की तरफ पलटकर बैठा , उसने दूसरे हाथ से अवनि के हाथ को लगाया और गंभीर स्वर में कहा,”इस लड़की का मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा अवनि ! मैं कितनी बार उसे समझा चुका हु कि मुझे उस से बात करने उस से मिलने में कोई इंट्रेस्ट नहीं है फिर भी वो बार बार ऐसी हरकते करती है जिन्हे देखकर मुझे गुस्सा आता है और मेरा खून खौल उठता है।
अवनि ! मैं सिर्फ तुम्हारा हूँ , मैं खुद को किसी और के साथ नहीं बाँट सकता और इस बात का ख्याल तुम से ज्यादा मुझे रखने की जरूरत है,,,,,,,,,,,,,,,,वो प्राची वो , वो इस बात को क्या समझेगी कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूँ और तुम मेरे लिए क्या हो……..!!!”
पृथ्वी के शब्दों से बेचैनी साफ झलक रही थी ये देखकर अवनि ने अपना दुसरा हाथ पृथ्वी के होंठो पर रखा और प्यार से कहा,”बस ! इतना काफी है , आप खामखा परेशान हो रहे है पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,कोई लड़की आपको पसंद करती है तो वो उसकी चॉइस है , इसके लिए आपको इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है और रही मेरी बात तो मैं ऐसे सरफिरे लोगो और ऐसी बातो का मुझ पर या मेरे विश्वास पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मैं आप पर बहुत भरोसा करती हूँ पृथ्वी इसलिए आपको हर बार मेरे सामने अपना प्यार साबित करने की जरूरत नहीं है।”
अवनि की बात सुनकर पृथ्वी ख़ामोशी से उसे देखने लगा , अवनि की जगह कोई और लड़की होती तो एयरपोर्ट पर जो हुआ उसे देखकर जरूर परेशान हो जाती लेकिन अवनि शांत थी , उसकी बातो में पृथ्वी के लिए विश्वास था और आँखों में उतनी ही मोहब्बत,,,,,,,,,,,,,पृथ्वी ने अपने हाथो में थामे अवनि के हाथ को अपने होंठो से छुआ और कहा,”थैंक्यू ! थैंक्यू सो मच”
अवनि ने मुस्कुराते हुए बड़े प्यार से पृथ्वी के हाथो से अपने हाथ को छुड़ाया और कहा,”थैंक्यू से काम नहीं चलेगा मिस्टर उपाध्याय”
“तो फिर क्या चाहिए तुम्हे ?”,पृथ्वी ने पूछा
“कल ऑफिस से आते वक्त आप मेरे लिए फूल और बहुत सारे चॉकलेट्स लेकर आएंगे”,अवनि बच्चो की तरह मुस्कुराई और आँखे मिचमिचाकर कहा
पृथ्वी मुस्कुरा उठा और हामी में गर्दन हिला दी। अवनि ने अपना सर पृथ्वी के कंधे पर टिका दिया। अवनि के मुँह से ऑफिस का नाम सुनकर पृथ्वी एक बार फिर उदास हो गया। उसने अभी तक अवनि को ये बताया ही नहीं था उसने नौकरी छोड़ दी है।
रवि जी का घर , पनवेल
रवि जी बार बार घर के दरवाजे पर जाते और अंदर आ जाते। हॉल में बैठा लक्षित अपना विडिओ गेम खेल रहा था , वह रवि को आते जाते देखता और मुस्कुरा उठता जैसे वह जानता हो कि रवि जी को किसका इंतजार है ? हॉल में बैठी दादी चाय पी रही थी और लता किचन में खड़ी खाना बना रही थी आज लता ने रोजाना के सादे खाने के बजाय बढ़िया खाना बनाया क्योकि आज पृथ्वी और अवनि घर जो आ रहे थे। किचन का काम ख़त्म करके लता साड़ी के पल्लू से अपने हाथ पोछते हुए बाहर आयी तो देखा रवि जी कभी हॉल तो कभी दरवाजे के चक्कर लगा रहे थे !
लता दादी के पास आयी तो दादी ने कहा,”इसे देख ! बेटा बहू के आने के इंतजार में इतना पागल हो गया है कि पिछले आधे घंटे से ऐसे ही चक्कर लगा रहा है”
लता ने सुना तो मुस्कुरा उठी लेकिन रवि जी ने दादी की तरफ आकर कहा,”अरे एक घंटे पहले उसने फोन करके बताया था मुझे कि एयरपोर्ट से बाहर आ चुका
अब तक तो उसे आ जाना चाहिए था , पता नहीं कहा रह गया ?”
“तू गांव से आया है क्या ? तुझे मालुम नहीं मुंबई में इस वक्त कितना ट्रेफिक होता है,,,,,,,,,,,,,,!!!”,दादी ने रवि जो फटकार लगाई तो उन्होंने चक्कर काटना बंद किया और दादी के बगल में आ बैठे। दादी को चिढ़ा हुआ देखकर रवि जी ने कहा,”अरे गुस्सा क्यों होती हो आई ? आपका भी तो आज ट्रेन का टिकट था ना फिर आप भी तो रुकी ना उन दोनों से मिलने के लिए , इसलिए उन्होंने जल्दी आना चाहिए”
“आ जायेंगे क्यों इतना परेशान हो रहा है ? तूने घर आने को बोला है न तो सीधा घर ही आएंगे”,दादी ने कहा
रवि जी ने लता से एक गिलास पानी देने को कहा तो लता पानी लेने किचन में चली गयी। लता पानी लेकर आयी तभी किसी ने बेल बजायी। लक्षित उठा और दरवाजे की तरफ भागते हुए कहा,”मैं खोलता हूँ,,,,,,,,,,,!!!”
लक्षित ने दरवाजा खोला सामने पृथ्वी और अवनि थे। उन्हें देखकर लक्षित का चेहरा खिल उठा और उसने पलटकर रवि जी से सब से कहा,”बाबा ! आ गए ये लोग”
रवि जी अपनी जगह से उठे और साइड में चले आये। अवनि और पृथ्वी अंदर आये उन्होंने लता और रवि जी के पैर छुए और फिर आकर दोनों ने दादी के पैर छुए। दादी ने अवनि को तो आशीर्वाद दिया लेकिन पृथ्वी का कान मरोड़कर कहा,”वहा जाने के बाद एक बार भी तुझे अपनी दादी की याद नहीं आयी ? मैं तो आज शाम तुम दोनों से मिले बिना ही जाने वाली थी”
“अरे ऐसे कैसे चली जाती ?”,पृथ्वी ने दादी के बगल में बैठते हुए कहा और अपनी बाँह उनके कंधो पर रख दी। अवनि एक तरफ खड़ी हो गयी तो लता उसके पास आयी और कहा,”कैसा रहा सफर ?”
“अच्छा था,,,,,,,!!”,अवनि ने धीरे से कहा
रवि जी खाली पड़े सोफे पर आ बैठे और लक्षित उसी सोफे के हत्थे पर आ बैठा। रवि जी ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”आने में बड़ी देर की तुम लोगो ने”
“अरे बाबा वो ट्रेफिक में फंस गए थे इसलिए लेट हो गया,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
लता किचन की तरफ जाने लगी तो अवनि भी उनकी मदद करके उनके साथ चली आयी। लता ने पृथ्वी और अवनि के लिए पानी लिया और जैसे ही पलटी अवनि को देखकर कहा,”अरे तुम क्यों चली आयी ? सबके साथ बैठो तक गयी होगी”
“मैं ठीक हूँ आंटी”,अवनि के मुँह से लता के लिए हमेशा की तरह आंटी निकला जिसे सुनकर लता मुस्कुराई और कहा,”अवनि ! मैंने तुम्हे अपनी बहू मान लिया है अब भी क्या तुम मुझे आंटी कहकर ही बुलाओगी ? जैसे पृथ्वी बुलाता है वैसे ही तुम भी मुझे आई कहकर बुला सकती हो मुझे अच्छा लगेगा”
“ठीक है मैं आपको आई कहकर बुलाऊंगी लेकिन जैसे आप उन्हें प्यार करते है वैसा ही प्यार मुझसे भी करेंगी ना ?”,अवनि ने कहा
लता एकटक अवनि को देखती रही ! जब उसने पहली बार अवनि के बारे में सुना तो उसे उस पर गुस्सा आया था , जब पहली बार उसे पृथ्वी के साथ देखा तो वह उस से नफरत करने लगी थी लेकिन आज अवनि की बात सुनकर लता को ना जाने क्यों मन ही मन टीस उठी और खुद पर शर्म महसूस हुई , उन्होंने अवनि जैसी लड़की को अपनी ममता और प्यार से दूर रखा।
लता की आँखों में नमी उभर आयी , वह कुछ बोल नहीं पायी लेकिन उसने हामी में गर्दन हिला दी ये देखकर अवनि की आँखे ख़ुशी से चमक उठी और उसका चेहरा भी खिल उठा। उसने लता के हाथ से ट्रे ली और कहा,”लाईये मुझे दीजिये ये मैं लेकर जाती हूँ”
अवनि पानी लेकर बाहर चली आयी और लता भी अपनी आँखों के किनारे साफ करके उसके पीछे पीछे चली आयी
सभी हॉल में आ बैठे। कुछ देर इधर उधर की बाते करने के बाद रवि जी ने लता से सबके लिए खाना लगाने को कहा ! डायनिंग टेबल पर इतनी जगह नहीं थी इसलिए लता ने हॉल में नीचे सबके लिए खाना लगा दिया। सभी खाना खाने आ बैठे। पृथ्वी लता के बगल में बैठा था और अवनि एक तरफ खड़ी थी।
“अरे अवनि बेटा ! तुम वहा क्यों खड़ी हो ? बैठो सबके साथ खाना खाओ”,रवि जी ने कहा
“आप सब खाइये मैं बाद में खा लुंगी”,अवनि ने कहा क्योकि उसने अपने घर में कभी सबको साथ बैठकर खाना खाते नहीं देखा था और घर की बहुओ को घर के मर्दो के साथ बैठकर तो बिल्कुल भी नहीं,,,,,,,,,,,,,,!!!”
लता ने सुना तो अवनि की तरफ पलटी और उसकी कलाई पकड़कर उसे अपने बगल में बैठाकर कहा,”बाद में क्यों ? सबके साथ बैठकर खाओ,,,,,,,,,,,यहाँ ऐसा कोई रूल नहीं है,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी। अवनि के लिए लता और रवि की परवाह देखकर पृथ्वी मुस्कुरा उठा। जो प्यार जो सम्मान अवनि को वह देना चाहता था धीरे धीरे वो अवनि को सबसे मिल रहा था। लता ने अवनि की प्लेट में भी खाना परोसा और फिर सब खाने लगे। लक्षित अवनि के बगल में ही बैठा था उसने अपनी प्लेट में रखा पनीर का एक बड़ा टुकड़ा चुपचाप अवनि की प्लेट में रख दिया लेकिन अवनि ने देख लिया और लक्षित की तरफ देखा तो लक्षित ने धीरे से कहा,”आप पहले से कमजोर हो गयी हो वहिनी इसे खाकर स्ट्रांग हो जाओगी,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा उठी। लक्षित ने अपना ध्यान खाने पर लगा लिया। अवनि ने एक निवाला तोडा और खाने के लिए मुँह की तरफ बढ़ाया तो नजर पड़ी लता पर जो कि पृथ्वी को अपने हाथ से निवाला खिला रही थी। अवनि उंगलियों में निवाला थामे प्यार से लता को देखती थी। सहसा ही उसे अपनी माँ की याद आ गयी , अवनि को उनके हाथ से खाना कभी नसीब ही नहीं हुआ।
पृथ्वी को खिलाकर लता की नजर अवनि से मिली तो अवनि ने पलकें झुका ली। अवनि को देखकर लता के कानों में सहसा ही कुछ देर पहले अवनि के कहे शब्द गूंजे “ठीक है मैं आपको आई कहकर बुलाऊंगी लेकिन जैसे आप उन्हें प्यार करते है वैसा ही प्यार मुझसे भी करेंगी ना ?”
लता ने एक निवाला बनाया और अवनि की तरफ बढ़ाया तो अवनि की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा साथ ही वह हैरान भी थी। पृथ्वी ये देखकर खाते खाते रुक गया और रवि जी मुस्कुरा उठे , उन्हें बीती बाते याद आ गयी जब लता जी अवनि से इतना नाराज थी कि उसे देखना तक नहीं चाहती थी और आज वही लता अवनि को अपने हाथ से खाना खिला रही थी। एकदम से इतना प्यार देखकर अवनि की आँखों में नमी उभर आयी , उसे खामोश देखकर लता ने प्यार से कहा,”खाओ”
अवनि ने लता के हाथ से वह निवाला खा लिया और जैसे ही वह निवाला अवनि के गले से नीचे उतरा उसे जो सुकून मिला उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
सभी बाते करते हुए हंसी ख़ुशी खाना खाने लगे। दादी पृथ्वी और अवनि के लिए ही रुकी थी इसलिए उन्होंने अवनि और पृथ्वी को फ्लेट नहीं जाने दिया और अपने पास ही रुकने को कहा ताकि वह अवनि से बाते कर सके। दादी की ख़ुशी के लिए पृथ्वी मान गया। देर रात सभी बैठकर बाते करते रहे और इस बीच अवनि ने सबको दो बार अपने हाथो से बनाकर चाय भी पिलाई !
( क्या मिस्टर देसाई पता लगा पाएंगे प्राची की इस बेरुखी की वजह ? क्या पृथ्वी बताएगा अवनि को अपनी नौकरी के बारे में या अगली दिन आने वाला है उसकी जिंदगी में नया मोड़ ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39
Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39Pasandida Aurat Season 3 – 39
Continue With Pasandida Aurat Season 3 – 40
Read pasandida aurat sanjana kirodiwal
Follow Me On https://www.instagram.com/sanjanakirodiwal/
संजना किरोड़ीवाल

