Manmarjiyan Season 4 – 43
Manmarjiyan Season 4 – 43

राजकुमारी भुआ और आदर्श फूफा को सुबह सुबह अपने घर में देखकर मिश्रा जी हैरान थे। वे उन के सामने चले आये और कहा,”अरे आप दोनों सबेरे सबेरे हिया , सब ठीक है ना ?”
“का साले साहब हमको हिया देखकर आपके चेहरे का रंग काहे उड़ गवा , हमे हिया देखकर खुश नाही है का आप ?”,आदर्श फूफा ने गुस्से से कहा
मिश्रा जी ने सुना तो समझ गए दाल में कुछ काला है। गुड्डू को देर हो रही थी इसलिए उसने मिश्रा जी से कहा,”अच्छा पिताजी ! हमहू निकलते है हमे देर हो जाएगी”
“कहा निकलते है ? हिय रुको और ज़रा तुमहू भी तो देखो अपने पिताजी की मनमानी”,आदर्श फूफा ने गुड्डू की बाँह पकड़कर उसे रोकते हुए कहा
गुड्डू को रुकना पड़ा उसने हैरानी से मिश्रा जी की तरफ देखा तो मिश्रा जी ने हैरानी भरे स्वर में कहा,”आदर्श बाबू ! अब कौनसी मनमानी किये रहय हमहू ?”
आदर्श फूफा ने सुना तो भुआ की तरफ देखा और उछल कर कहा,”ल्यो ! तुम्हाये भैया को तो मालूम ही नाही है कि जे का मनमानी किये रहय ,राजकुमारी जरा बताओ जे का”
“का भैया ! हम का आपके और जे घर के लिए इत्ते पराये हो गए कि बिटिया की सादी तय किये रहय और हमे बुलाया तक नाही , का अब इत्ते बुरे हो गए का हम या फिर हमरी अम्मा के गुजर जाने के बाद हमाओ जे घर से कोनो रिश्ता नाही रहो ?”.कहते कहते भुआ साड़ी का पल्लू मुँह में दबा के रो पड़ी
मिश्रा जी ने सुना तो उन्हें हैरानी हुई क्योकि उन्होंने राजकुमारी क्या बल्कि अपने किसी भी रिश्तेदार को नहीं बुलाया था और अभी उन्होंने सिर्फ रिश्ता पक्का किया था ना कोई बड़ी सगाई की न ही कोई फंक्शन लेकिन राजकुमारी भुआ के मुँह से ये सब बाते सुनकर मिश्रा जी हैरान थे।
“क्यों का हुआ ,बोलते काहे नाही ? का मुँह मा दही जमाय लिए हो ?”,आदर्श फूफा ने मिश्रा जी से कहा
गुड्डू ने सुना तो आदर्श फूफा से अपनी बाँह छुड़ाकर कहा,”ए फूफा ! बहुते जियादा हो रहा है आपका ?”
“अरे ज्यादती तो तुम्हाये बाप किये है बिचारी हमरी राजकुमारी के साथ ,इनकी अम्मा का गुजरी भैया भाभी ने तो जे से रिश्तो ही तोड़ देओ”,आदर्श फूफा ने कहा
“फिजूल की बात मत कीजिये आदर्श बाबू ! हमने राजकुमारी को जे घर मा आने से कब रोका ? जित्ता इह घर मा बाकि सबका हक़ उत्ता ही इनका भी है जे जब चाहे तब जे घर मा आ सकती है और रही वेदी बिटिया की शादी तय करने की बात तो अभी सिर्फ रिश्ता पक्का हुआ है शादी मा का बुलाएँगे नाही आप दोनों को”
आदर्श फूफा ने सुना और मुँह बनाकर कहा,”अरे हमें तो आपकी नियत मा पहिले से खोट लग रहो , जैसे रिश्ता तय करते बख्त बुलाये शादी मा भी वैसे ही बुलाओगे”
आदर्श फूफा की बात सुनकर लवली को गुस्सा आया वह जैसे ही फूफा को कुछ बोलने को हुआ गुड्डू ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और धीरे से कहा,”जाने दो लवली भैया ! जे फूफा का हमेशा का यही ड्रामा है ,कोई न कोई टॉपिक ले आएंगे 2-4 महीने मा”
“अरे लेकिन गुड्डू जे कुछ भी बोले जा रहे है”,लवली ने भी गुस्से से लेकिन धीमे स्वर में कहा
“लवली भैया ! हमको तो बस जे जानना है कि जे तोता मैना की जोड़ी को जे बात बताकर आग लगाई किसने है ? एक बार ओह्ह का पता चल जाए कसम से चप्पल चप्पल से मार के भरता बना देंगे ओह्ह्ह ससुरे का , साला जे ही घर मिला था आग लगाने को”,गुड्डू ने गुस्से से भुनभुनाकर कहा
राजकुमारी भुआ तब तक रोना धोना करके अपना कोटा पूरा कर चुकी थी इसलिए आदर्श फूफा को साइड कर मिश्रा जी से कहा,”अरे उह्ह्ह तो भला हो
बेचारे उह्ह्ह गोलू का जो हमरे साथ बातसप्प ग्रुप बनाये और हमका सारी खबर दिए रहय”
गोलू का नाम सुनते ही मिश्रा जी की भँवे तन गयी और गुड्डू का मुँह भी खुला का खुला रह गया। लवली को कुछ समझ नहीं आया तो उसने कहा,”जे बातसपप ग्रुप का है ?”
“अरे जहा पल में बात सप्प से एक जन से दूसरे जन के पास पहुँच जाती है, बाट्सअप का कहते है उसे अंग्रेजी मा ?”,भुआ ने सोचते हुए कहा
“व्हाट्सप्प भुआ”,गुड्डू ने मिमियाकर कहा
“हाँ वही जो गुड्डू कहे रहे , गोलुआ हिया की हर खबर हमे देत रहा ओह्ह्ह के जरिये और ओह्ह से ही हमे पता चला कि ल्यो हिया तो हमाये भैया और भाभी बिटिया को ब्याह तय करे रहे और हमे खबर तक नाही,,,,,,!!”,कहते हुए भुआ ने फिर मिश्रा जी की तरफ देखा और गुस्से से कहा,”राशन कार्ड मा हमाओ नाम बचो है कि उह्ह्ह भी काट दिए रहे भैया ?”
“अरे का कुछ भी कह रही हो राजकुमारी तुमहू ? अरे तुम का गैर हो जो तुमको नाही बताएँगे वेदिया के ब्याह के बारे मा ? अरे रिश्ता पक्का करने आये थे शगुन के घरवाले और पक्का करके चले गए अब का जे के लिए तुमको इत्ती दूर बुलाते,,,,,,,और उह्ह्ह साला भंड गोलू उह्ह्ह तुमको बताय रहा और तुमहू अपने भरतार की पूँछ पकडे पकडे चली आयी और लगी टेसू बहाने”,मिश्रा जी ने राजकुमारी भुआ को फटकार लगाकर कहा
भुआ ने जैसे ही सुना एक बार फिर साड़ी का पल्लू मुँह में खोंसकर सुबकने लगी
ये सब रायता गोलू की वजह से फैला है जानकर लवली गुड्डू के पास आया और दबे स्वर में कहा,”चप्पल लेकर आये का ? जे सब रायता ना तुम्हाये उह्ह जिगर के टुकड़े गोलू महाराज ने फैलाया है ,अरे हमको तो सोचकर ही हैरानी होय रही है भुआ के साथ व्हाट्सप्प ग्रुप ,, जे मोहल्ला की औरतन और तुम्हाये गोलू मा बस 19-20 का फर्क है गुड्डू,,,,,,,,,,,,,,तुम्हाये दोस्त है तुम सम्हालो हम जाते है”
“लवली भैया ! लवली भैया”,गुड्डू कहता ही रह गया और लवली वहा से चला गया। गुड्डू ने घडी में वक्त देखा गोलू अब तक चौक पहुँच चुका होगा लेकिन अब यहाँ से निकले भी तो कैसे ?
“सुनो मिश्रा ! खबरदार जो हमायी फूल जैसी राजकुमारी को कुछो कहे तो हम बर्दास्त नाही करेंगे। अरे एक तो गलती किये ऊपर से हमे ही जलील कर रहे है ,, अगर आपके मन मा खोट नाही होता तो का आप हमे खबर नाही करते ? पर आप ना हमे बुलाना ही नाही चाहते थे आ है कि आपको लगा बिटिया का फूफा है शादी मा कोई ना कोई नाटक करेगा ही करेगा,,,,,,,,,,,,,ऐसे ही तो बोल के फूफा जात को बदनाम कर रखा है आप सबने”,आदर्श फूफा ने कहा
“फूल बताय रहे है ,अरे बुद्धि पर तो ढाई किलो का पत्थर पड़ा है इनके , उह्ह्ह साला गोलुआ कुछ भी बकत रहा और जे सच मान कर हिया चली आयी”,मिश्रा जी धीरे से बड़बड़ाये।
गुड्डू ने देखा मिश्रा जी और फूफा आपस में उलझे हुए है तो वह चुपचाप वहा से निकल गया।
“क्यों बोलती बंद हो गयी आपकी ? जे घर के इकलौते दामाद है हमहू हमे काहे खबर नाही की आपने ?”,आदर्श फूफा ने गुस्से से कहा
मिश्रा जी कहे तो कहे क्या बोले तो बोले क्या गलती तो उनसे हुई थी और गलती ये कि उन्होंने आज गोलू को ज़िंदा छोड़ दिया। जैसी गोलू की हरकते थी उसको भी अपनी अम्मा के साथ स्वर्ग भेज देना चाहिए था। मिश्रा जी को कुछ नहीं सुझा तो उन्होंने गुस्से में आकर कहा,”हाँ नाही की खबर बताओ का कर लोगे ? हमायी बिटिया है हमाओ मन हम जिसे चाहे बुलाये जिसे चाहे ना बुलाये आप को का ?”
“का मतलब हमहू कुछो नाही है ? का अब हमरा इह घर से कोनो रिश्ता नाही रहा ?”,भुआ ने आकर कहा
शोर शराबा सुनकर मिश्राइन बाहर आयी और जब भुआ-फूफा को घर में देखा तो हैरानी भरे स्वर में कहा,”अरे जिज्जी ,आदर्श बाबू आप लोग हिय ?”
“अरे काहे की जिज्जी और काहे के बाबू ? पहिले पूछिए अपने भरतार से कि जब बिटिया का ब्याह तय किये रहय तो हमे काहे नाही बुलाया ? हम का ब्याह रुकवा देते कि लड़के को भगा देता,,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्राइन ने सुना तो हैरानी से मिश्रा जी को देखने लगी उन्हें तो कुछ समझ नहीं आया हो क्या रहा था ? मिश्रा जी ने आदर्श फूफा को देखा और कहा,”चलिए मान लीजिये हमने नहीं बुलाया आप दोनों को , भूल गए तो अब का आप दोनो मिलकर तांडव करेंगे हमाये सर पर,,,,,,,,,,!!!”
“तांडव नाही करेंगे मिश्रा जी अब जब तक वेदिया का ब्याह नाही हो जाता तब तक हम और राजकुमारी यही रहेंगे आपकी छाती पर,,,,,,,,,,,,,,,जे घर के फूफा है ना हमहू तो अब देखिये हमाओ फूफा रूप,,,,,,,,,,,ए चलो राजकुमारी , अब का रो रोकर पूरी साड़ी भिगा लोगी”,कहकर आदर्श फूफा बिना मिश्रा जी का जवाब सुने राजकुमारी भुआ को लेकर अंदर चले गए।
मिश्रा जी ने गुस्से का घूंठ निगला और आसमान की तरफ देखा
“ए गुड्डू के पिताजी ! इह सब का है ? वेदिया के ब्याह मा तो अभी 5 महीना बाकि है तब तक का जिज्जी और आदर्श बाबू हिया रहे है ?”,मिश्राइन ने मिश्रा जी के पास आकर पूछा
मिश्रा जी ने मिश्राइन की तरफ देखा और थोड़ा गुस्से से कहा,”जे सब उह्ह्ह तिकड़मबाज गोलू की वजह से हुआ है , उह्ह्ह ससुरे को कौन बोला राजकुमारी के साथ व्हाट्सप्प ग्रुप बनाने को , ओह्ह्ह की लगायी आग की लपेटे सबसे पहिले जे घर से निकली है,,,,,,,,,,,,,,,,!!”
मिश्राइन ने सुना तो परेशान सी अंदर चली गयी और मिश्रा जी गुस्से से चिल्लाये,”गोलू उउउउउउउऊ,,,,,,,,,,एक बार बस हमाये हाथ लग जाओ इह बार तुमहाओ काम फुल एंड फाइनल कर देंगे हमहू”
चकिया ,चंदौली
“अबे तुम्हरे उह्ह्ह टेंट वाले का हुआ रे बिरजू ? कल शादी है और घर मा अभी तक टेंट नाही लगो , का बिंदिया की बिदाई के बाद लगेगो ?”,मंगेश ने अपने छोटे भाई को घुड़ककर कहा
“अरे भैया काहे चिंता करते हो ? कानपूर के सबसे बेस्ट टेंट वाले को बुक किये है हमहू ,आजायेंगे और आते ही लगवा भी देंगे आप चिंता नाही करो”,हाथो में सामान उठाये बिरजू ने कहा और चला गया
“अरे मंगेशवा ! काहे इत्ता परेशान हो भैया ? टेंट ना भी लगो ना तब भी बिंदिया को ब्याह हमाये साले के लौंडे के साथ ही होगो”,एक जानी पहचानी आवाज मंगेश के कानो में पड़ी , उसने पलटकर देखा तो बड़ी सी मुस्कान उसके होंठो पर फ़ैल गयी और उसने कहा,”अरे आओ लल्लन आओ , जेल से कब छूटे ?”
“बस जैसे ही हमाये साले ने हमे बताया कि ओह्ह्ह के लौंडे ऋतिक को ब्याह तय हो गओ बस हमहू जेल से बाहिर ,का है कि ब्याह शादी मा जब तक फूफा ना हो मजा नहीं ना आता है और फिर जब जे पता चला कि उह्ह्ह ससुरे का ब्याह तुम्हरी बिटिया संग है तो भैया हम खुद को रोक नाही पाए और तुमसे मिलने हिया चले आये,,,,,,,,,,,,,,ए मंगेशवा पिछली बातो को भूलकर क्यों ना अपनों रिश्तो रिश्तेदारी मा बदल ले”
“अरे लल्लन का बात करते हो,,,,आओ गले मिलो अब तो समधी हो गए हमहू”,कहते हुए मंगेश ने लल्लन को गले लगाया और फिर दूर होकर कहा,”लेकिन तुमहू तो लड़के वालो की तरफ से हो तो फिर हिया का कर रहे हो ?”
“अरे तुम्हरी बिटिया हमरी बिटिया ,जब बारात आएगी तो तुम्हरे साथ मिलकर ओह्ह्ह का स्वागत कर देंगे और जब वापस जाएगी तो ओह्ह्ह मा मिलकर वापस चले जायेंगे,,,,,,,,,,,!!!”,लल्लन ने कहा तो मंगेश हंस पड़ा और फिर लल्लन को शादी की तैयारियां दिखाने के लिए अपने साथ ले गया।
बिंदिया अपने कमरे में औंधे मुँह गिरे आँसू बहा रही थी। कल उसकी शादी थी और आज संगीत और मेहँदी लेकिन बिंदिया को तो इन सब से कोई ख़ुशी नहीं मिल रही थी हर गुजरने वाला पल उस पर पहाड़ सा गिर रहा था। न लवली से उसी बात हो पा रही थी और ना ही वह वहा से भाग सकती थी।
कुछ देर बाद बिंदिया की सहेली रूपा आयी और कहा,”ए बिंदिया ! तोह का पता है तुम्हरे होने वाले दूल्हे का नाम ऋतिक है ,अभी अभी बाहिर से सुनकर आये है हम,,,,,,,,,हाये नाम इत्तो पियारो है तो ऋतिक बाबू कैसे होंगे ? ए तुम्हरे पास ओह्ह्ह की कोनो फोटू है तो हमको दिखाओ ना ? ए बिंदिया हम तुमसे बात कर रहे है ,दिखाओ ना ओह्ह्ह का फोटू”
बिंदिया ने सुना तो रूपा की तरफ देखा और गुस्से से कहा,”भाड़ में जाए उह्ह्ह , नाही है हमाये पास ओह्ह्ह की कोनो फोटू और ना ही हमे ओह्ह से ब्याह करना है,,,,,,,,!!!”
रूपा ने सुना तो हैरानी से बिंदिया को देखने लगी उसकी आँखों में भरे आँसू देखकर रूपा ने अपना हाथ बिंदिया के कंधे पर रखा और कहा,”
“जे तुम का कह रही हो बिंदिया ? अरे कल तुम्हरी शादी है और बाहिर तुम्हरी शादी के सब इंतजाम हो चुके है और तुम कह रही हो तुमको ओह्ह्ह से ब्याह नहीं करनो,,,,,,,,,!!!”
“हाँ हाँ नहीं करना हमे ओह्ह्ह से ब्याह ,हम किसी और को चाहते है,,,,,,,,,,हम लवली से प्यार से करते है रूपा और अगर ओह्ह्ह के अलावा किसी और से सादी नाही करेंगे”,बिंदिया ने कहा
“का तुम सच कह रही हो ?”,रूपा ने पूछा तो बिंदिया ने उसे सब बाते बता दी और फिर अपना चेहरा अपने हाथो में छुपाकर फूट फूट कर रोने लगी। बिंदिया को रोते देखकर रूपा को अच्छा नहीं लगा तो उसने प्यार से कहा,”रोओ नाही बिंदिया ! तुम बताओ हम तुम्हरे लिए का कर सकते है ?”
बिंदिया ने सुना तो रोना बंद किया और रूपा के हाथो को थामकर कहा,”रूपा तुम हमाओ एक काम करोगी ?”
“हाँ बिंदिया बोलो”,रूपा ने कहा
बिंदिया ने अपने आँसू पोछे और उठकर कमरे में रखी टेबल के पास चली गयी उसने वहा पड़ी नोटबुक और पेन को उठाया और एक पन्ने पर कुछ लिखने लगी। बिंदिया ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी पर लिखना जानती थी इसलिए उसने कागज पर कुछ लिखा और मोड़कर उसे एक लिफाफे में रखा साथ ही एक छोटी शीशी भी उस लिफाफे में डालकर लिफाफे को बंद किया और रूपा के पास आकर कहा,”रूपा जे कागद कानपूर मा आनंद मिश्रा के घर मा रह रहे लवली तक पहुचाय दयो , बस हमायी इत्ती सी मदद कर दयो हम तुमहाओ जे अहसान जिंदगीभर नाही भूले है”
“का कानपूर ? पर बिंदिया कानपूर तो हिया से बहुते दूर है हुआ पहुंचने मा ही 6-7 घंटे लग जाही है और बापू हमे वहा जाने नाही देंगे”,रूपा ने अपनी मज़बूरी जताई
“रूपा तुम हमायी आखरी उम्मीद हो , हम तुम्हरे आगे हाथ जोड़ते है जे कागद का लवली तक पहुंचना बहुते जरूरी है वरना बहुते देर हो जाएगी,,,,,,,,!!!”, कहते कहते बिंदिया की आँखों में आँसू भर आये
“तुम उसे फोन करके काहे खबर नाही करती ?”,रूपा ने कहा
फोन ,फोन नाही है हमाये पास नाही लवली का नंबर है,,,,,,,,,,जे मिश्रा जी के घर का पता हमे याद था बस इहलिये,,,,,,,,,,तुम कैसे भी करके जे लवली तक पहुचाय दयो रूपा,,,,,,,,,!!!”,बिंदिया ने हाथ जोड़कर कहा
“ठीक है हम कोशिश करते है , अभी एक ठो बस जाएगी चकिया से कानपूर ओह्ह्ह का कंडक्टर हमाओ पहिचान के है हम उन्हें दे देंगे , वही बस रात मा कानपूर से वापस भी आती है,,,,,,,,,,,!!!”,रूपा ने लिफाफा अपने दुपट्टे में छुपाकर का और वहा से चली गयी।
बिंदिया ने गहरी साँस ली और वही दिवार के सहारे नीचे जमीन पर बैठ गयी। उसके पास अब बस सिर्फ 2 दिन बचे थे।
( वेदी की शादी तक क्या मिश्रा खानदान झेल पायेगा आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ को ? मिश्रा जी के घर में अनजाने में लगाई आग में क्या जलने वाले है गोलू के अपने हाथ ? बिंदिया ने क्या लिखा उस कागज में लवली के लिए और शीशी में क्या था ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Yeh bindiya ke liye bohot bura lag raha hai