Pasandida Aurat Season 3 – 67

Pasandida Aurat Season 3 – 67

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी और अवनि ने घरवालों के साथ वक्त बिताया , रात के खाने पर नीलम भुआ , चाचा और हिमांशु भैया भी चले आये और सबने साथ बैठ के खाना खाया ! देर रात सभी अपने अपने घर चले गए और पृथ्वी अवनि को साथ लेकर अपार्टमेंट की तरफ चल पड़ा। पृथ्वी ने साथ चलती अवनि को देखा , अवनि ख़ामोशी से चल रही थी ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”क्या सोच रही हो ?”

अवनि रुकी और पृथ्वी की तरफ पलटकर कहा,”पृथ्वी ! क्या हम दोनों हमेशा के लिए आई बाबा के साथ नहीं रह सकते ? आप मैं आई बाबा और लक्षित सब एक घर में नहीं रह सकते ?”

पृथ्वी ने अवनि का हाथ अपने दोनों हाथो में थामा और प्यार से कहा,”अवनि ! आई बाबा जिस घर में रहते है वो घर छोटा है और हम जिस घर में रहते है वो घर दादी का है,,,,,,मैंने तुम्हारे साथ दादी के घर में रहना इसलिए चुना ताकि तुम बिना किसी परेशानी के वहा अपनी किताबे लिख सको और अपना सपना पूरा कर सको,,,,,,,,,,!!!”

“लेकिन सपना तो मैं आई बाबा के साथ रह के भी पूरा कर सकती हूँ ना , आज वहा सबके साथ कितना अच्छा लग रहा था। बाबा कितने प्यार से मुझसे बात कर रहे थे , आई अपने हाथ से खाना खिला रही थी और लक्षित वो तो बिल्कुल कार्तिक जैसा है,,,,,,,,,,,पृथ्वी क्या हम सब साथ नहीं रह सकते ?”,अवनि ने पृथ्वी की बांह थामकर चमकती आँखों से कहा

“साथ रहने के लिए हमे एक बड़े घर की जरूरत होगी , जिसमे कम से कम 3 कमरे तो हो,,,,,,और मुंबई में सब मिल सकता है लेकिन घर मिलना मुश्किल है”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो उदास हो गयी ये देखकर पृथ्वी ने उसका गाल छुआ और प्यार से कहा,”लेकिन मैं पूरी कोशिश करूँगा कि हम सब साथ रहे”

“सच ?”,अवनि ने ख़ुशी से आँखे चमकाकर कहा
“हम्म्म सच”,पृथ्वी ने कहा और अपने होंठो से अवनि के ललाट को चुम लिया क्योकि अवनि ने उसके सामने इतनी प्यारी ख्वाहिश जो रखी थी  

“क्या कर रहे है आप ? कोई देख लेगा”,अवनि ने पृथ्वी से दूर होकर कहा तो पृथ्वी ने उसे फिर अपने पास किया और कहा,”हाँ तो देखने दो , मेरी बायको है मैं उस से सबके सामने भी प्यार जाता सकता हूँ”
पृथ्वी की यही बाते अक्सर अवनि का दिल धड़का दिया करती थी। अवनि पृथ्वी से दूर हटी और उसका हाथ थामकर कहा,”घर चलिए देर हो रही है”

“तुम सच में अनरोमांटिक हो अवनि , तुम्हे मुझसे बहुत कुछ सीखने की जरूरत है”,पृथ्वी ने अवनि के साथ चलते हुए कहा
“हाँ हाँ सीख लूंगी , अभी बहुत जिंदगी है अपने पास,,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए अवनि पृथ्वी को साथ लेकर चली गयी।

अगली सुबह अवनि और पृथ्वी की जिंदगी में नयी सुबह थी। अवनि ने घर से ही अपनी रायटिंग पर काम करना शुरू कर दिया और पृथ्वी उसके दिमाग में अवनि को लेकर कुछ और ही प्लान था। वह अब लंच टाइम में बिना किसी को कुछ बताये ऑफिस से निकल जाता और शाम में वापस आ जाता। देखते ही देखते एक हफ्ता गुजर गया !

अवनि अपनी नयी किताब पर काम करने लगी और साथ ही फ़ोन मेल के जरिये डायरेक्टर्स और प्रोडूसर्स के कॉन्टेक्ट में भी रहने लगी जिस से इस शहर में अपने लिए जगह खुद बना सके जबकि पृथ्वी को इसकी खबर तक नहीं थी , होती भी कैसे पिछले एक हफ्ते से पृथ्वी सुबह जल्दी ऑफिस चला जाता और रात में देर से घर आता , कभी कभी तो इतना थका होता कि खाना खाकर सीधा सो जाता ! अवनि भी उसकी मेहनत समझ रही थी इसलिए उस से कोई शिकायत नहीं करती थी।

एक रात अवनि हॉल के सोफे पर बैठी अपने लेपटॉप में कुछ टाइप कर रही थी। रात काफी हो चुकी थी लेकिन अवनि फिर भी जाग रही थी। लेपटॉप की रौशनी से उसकी आँखे हलकी जलने लगी तो उसने अपनी आँखों को मसला। अवनि को बिस्तर पर ना पाकर पृथ्वी कमरे से बाहर आया। दरवाजे पर खड़ा वह कुछ देर ख़ामोशी से अवनि को देखता रहा और फिर उसके पास चला आया।

पृथ्वी को देखकर अवनि ने लेपटॉप बंद किया और साइड में रखकर कहा,”आप सोये नहीं ?”
“तुम ऐसे जागोगी तो मैं कैसे सो पाऊंगा ? चलो उठो बाकि काम कल कर लेना”,पृथ्वी ने कहा
“बस थोड़ा ही,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी झुका और अवनि को अपनी बाँहो में उठाकर कमरे की तरफ बढ़ते हुए कहा,”बस थोड़ा ही आराम करना है तुम्हे , चलो”

अवनि मुस्कुरा उठी वह कब पृथ्वी की हर बात मानने लगी उसे खुद पता नहीं चला ! उस रात अवनि एक छोटी बच्ची की तरह पृथ्वी की मजबूत बाँहो में सिमटकर सो गयी।  

अगली सुबह फिर वही भागदौड़ शुरू हो गयी। अवनि सब काम खत्म कर अपने लेपटॉप के सामने आ बैठी और पृथ्वी अपने ऑफिस , दोनों ही अपना अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे थे। ना दोनों को एक दूसरे से शिकायत थी ना ही कोई गिला , हां दोनों को एक दूसरे के लिए वक्त अब थोड़ा कम मिलता था लेकिन थोड़े में भी खुश रहना दोनों बखूबी जानते थे। 

हफ्ते भर व्यस्त रहने के बाद छुट्टी का दिन आया लेकिन छुट्टी के दिन भी पृथ्वी फोन पर व्यस्त रहा , अवनि भी सुबह सुबह ये सब देखकर हैरान थी कि छुट्टी के दिन भी पृथ्वी काम क्यों कर रहा है ? कुछ देर बाद बेल बजी पृथ्वी ने अवनि से दरवाजा खोलने का इशारा किया और खुद फोन पर किसी से बात करते हुए साइड में चला गया। अवनि ने आकर दरवाजा खोला तो देखा सामने नकुल खड़ा था और नकुल के पीछे दो लड़के और जिनके हाथो में भारी भरकम सामान और कार्टून थे।

अवनि कुछ समझ पाती इस से पहले पृथ्वी वहा चला आया और नकुल को देखकर कहा,”इतना वक्त क्यों लगा दिया तुमने ?”
“अरे यार ट्रेफिक कितना है बाहर और फिर तुझे जो चाहिए था वो ढूंढने में भी वक्त लग गया,,,,,,,अब तू कहे तो मैं अंदर आ जाऊ ?”,नकुल ने कहा

पृथ्वी ने अवनि के कंधो पर बाँह रखकर उसे साइड किया और नकुल को अंदर आने दिया। नकुल के पीछे पीछे लड़के भी चले आये और ये देखकर अवनि ने पृथ्वी से कहा,”पृथ्वी ये सब क्या है ?”
“सब बताता हूँ लेकिन क्या तुम पहले सबके लिए एक एक चाय बनाओगी प्लीज”,पृथ्वी ने प्यार से कहा
“हम्म्म मैं अभी लेकर आयी”,अवनि ने कहा और किचन की तरफ चली गयी।

पृथ्वी नकुल की तरफ चला आया , फ्लेट में जो छोटा स्टोर रूम था उसे पृथ्वी ने अवनि से कहकर दो दिन पहले ही खाली करवाया था। पृथ्वी ने लड़को से सब सामान उसी स्टोर रूम में सेट करने को कहा। पृथ्वी ने जैसे जैसे बताया दोनों लड़को ने सब सामान सेट कर दिया। नकुल ने पृथ्वी की तरफ देखा और मुस्कुरा दिया , जवाब में पृथ्वी भी मुस्कुरा दिया और सब बाहर चले आये।

अवनि सबके लिए चाय ले आयी , सबने चाय पी और फिर पृथ्वी ने लड़को को कुछ पैसे देकर वहा से भेज दिया। नकुल वही रुक गया क्योकि वह बहुत दिनों बाद अवनि से मिला था और आज छुट्टी का दिन भी था। उसने तो रुकने के साथ ही अवनि से दाल ढोकली बनाने की फरमाईश भी कर दी। लक्षित की तरह नकुल भी पृथ्वी के भाई जैसा था इसलिए अवनि उसे मना नहीं कर पायी।

पृथ्वी ने देखा नकुल अवनि से खाने की नयी नयी फरमाईशें करके उसे परेशान कर रहा है तो उसने अवनि के पीछे आकर उसके कंधो पर अपने हाथ रखे और स्टोर रूम की तरफ ले जाते हुए कहा,”मेरे साथ आओ मुझे तुम्हे कुछ दिखाना है”

 पृथ्वी अवनि को लेकर स्टोर रूम में आया , अवनि ने देखा तो उसकी आँखे ख़ुशी से चमक उठी। पृथ्वी ने स्टोर रूम का नक्शा ही बदल दिया था। दिवार से लगकर टेबल पर एक बढ़िया शानदार कंप्युटर सेटअप था , एक बढ़िया आरामदायक कुर्सी रखी थी। ये सब देखकर अवनि को याद आया पिछले कितने ही सालों से वह अपना एक छोटा सा सेटअप चाहती थी जहा बैठकर वह इत्मीनान से बैठकर अपना काम कर सके। अवनि पृथ्वी की तरफ पलटी तो पृथ्वी ने बड़े प्यार से कहा,”पसंद आया ?”

अवनि ने पृथ्वी के हाथो को थामा और प्यार से कहा,”ये सब , आपको ये सब याद था ?”
पृथ्वी ने अवनि के चेहरे को अपने हाथो में थामा और उतने ही प्यार से कहा,”तुम से जुडी हर बात मुझे याद है अवनि , ये तुम्हारा सपना था। तुम हमेशा से अपने घर में एक ऐसा कोना चाहती थी जो सिर्फ तुम्हारा हो,,,,,,जहा बैठकर तुम इत्मीनान से अपनी कहानिया लिख सको , जहा बैठकर तुम खुद को जी सको , जहा बैठकर तुम सपने देख सको,,,,,,,,,,,आज ये कोना मैंने तुम्हारे नाम कर दिया।

आज से तुम्हे देर रात अपने लेपटॉप के सामने बैठकर आँखे खराब करने की जरूरत नहीं है , तुम यहाँ बैठकर आराम से जितना चाहे उतना लिख सकती हो , जब तक चाहे तब तक लिख सकती हो ,, ये कमरा तुम्हारा रहेगा और यहाँ तुम्हारी परमिशन के बिना कोई नहीं आएगा , मैं भी नहीं”

पृथ्वी की बाते सुनकर अवनि का दिल भर आया वह पृथ्वी के सीने से आ लगी और उसकी आँखो से आँसू बहने लगे। पृथ्वी धीरे धीरे उसका सर सहलाता रहा क्योकि वह जानता था अवनि की आँखों में ये आँसू दुःख के नहीं बल्कि ख़ुशी के आँसू थे। पृथ्वी खुश था कि वह अवनि के लिए ये सब कर पाया। पृथ्वी के सीने में मुँह छुपाये अवनि सिसक रही थी तभी नकुल वहा आया और अवनि पृथ्वी को साथ देखकर एकदम से पलटकर कहा,”ऊप्स सॉरी ! लगता है मैं गलत टाइम पर आ गया”

नकुल की आवाज सुनकर अवनि जल्दी से पृथ्वी से दूर हटी तो पृथ्वी नकुल की तरफ आया और उसके सर पर चपत लगाकर उसे अपने साथ बाहर ले जाते हुए कहा,”तुम हमेशा गलत टाइम पर ही आते हो,,,,,,,,,,!!!!”

नकुल और पृथ्वी के जाने के बाद अवनि स्टोर रूम में लगे सेटअप की तरफ चली आयी। वह एक एक करके सब चीजों को छूकर देखने लगी। उसका मन ख़ुशी से भरा जा रहा था और दिल धड़क रहा था। जब बरसो से देखा कोई सपना पूरा होता है तो ऐसा ही महसूस होता है। उसने मुलायम मखमली कुर्सी को छूकर देखा और उस पर आ बैठी। उसने स्क्रीन ऑन किया और कीबोर्ड को छूकर देखा।

उसकी काँपती उंगलियों ने एक एक करके बटनों को छुआ और अवनि ने स्क्रीन पर सबसे पहले जो शब्द लिखे वो थे “P R A T H V I”
उसने सबसे पहले पृथ्वी का नाम लिखा और फिर उसके ठीक नीचे दाहिनी तरफ छोटे छोटे अक्षरों मे लिखा “a v n i”

अवनि ने पृथ्वी का नाम बड़ी ABCD में लिखा और अपना छोटी में क्योकि आज उसकी नजरो में पृथ्वी और भी ऊंचा उठ चुका था। अवनि उठी और कमरे से बाहर चली आयी देखा पृथ्वी और नकुल हमेशा की तरह किसी बात पर बहस कर रहे थे। अवनि दोनों को अकेले छोड़कर किचन की तरफ चली गयी उसे नकुल के लिए दाल ढोकली जो बनाना था , साथ ही उसने लक्षित को भी आज के खाने पर घर बुला लिया।

सबने साथ मिलकर खाना खाया और खूब बाते की। लक्षित तो खाना खाकर पृथ्वी के घर पर ही सो गया और नकुल दोपहर बाद अपने घर चला गया। अवनि को पृथ्वी से बात करनी थी और उसे आज के लिए बहुत सारा थैंक्यू भी बोलना था लेकिन जैसे ही वह पृथ्वी से बात करने के लिए कमरे में आयी उसने देखा पृथ्वी तैयार हो रहा है ये देखकर अवनि ने कहा,”आप कही जा रहे है ?”

“हाँ ! एक जरुरी काम से मुझे बाहर जाना होगा”,पृथ्वी ने कलाई पर घडी बांधते हुए कहा
“लेकिन आज तो ऑफिस की छुट्टी है ना पृथ्वी,,,,,,,!!!”,अवनि ने मायूस होकर कहा
पृथ्वी अवनि के पास आया उसके गाल को अपने हाथ से छुआ और प्यार से कहा,”जानता हूँ लेकिन काम भी तो इम्पोर्टेन्ट है न,,,,,,,मैं जल्दी वापस आ जाऊंगा”

“हम्म्म ठीक है , मैं इंतजार करुँगी”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने अपना फोन-पर्स लिया और वहा से चला गया। अवनि ने भी दरवाजा बंद किया और नजर हॉल में सोये लक्षित पर पड़ी तो अंदर से चद्दर ले आयी और लक्षित को ओढ़ा दिया और सर के नीचे तकिया लगाकर अपने स्टोर रूम में चली आयी ! अवनि कुर्सी पर आ बैठी और फिर अपने काम से जुडी सभी सेटिंग्स करने लगी।

शाम में लक्षित जगा , उसने देखा वह अपने भाई के घर पर है तो आँखे मसलते हुए उठा और किचन में काम कर रही अवनि से कहा,”वहिनी ! आपने मुझे उठाया क्यों नहीं ?”
“आप बहुत सुकून से सो रहे थे इसलिए नहीं उठाया और फिर ये घर भी तो आपका अपना है,,,,,,,,!!!”,अवनि हाथ में मग उठाये किचन से बाहर चली आयी और लक्षित की तरफ आते हुए कहा

लक्षित ने मग लिया और कहा,”दादा कहा है ?”
“वो किसी काम से बाहर गए है अभी तक आये नहीं”,अवनि ने कहा
“वहिनी ! आपने दादा को कुछ ज्यादा ही छूट दे रखी है , छुट्टी के दिन कौन काम करता है ? वो जरूर नकुल भैया या अपने दोस्तों के साथ कही घूमने गए होंगे”,लक्षित ने सस्पेंस भरे स्वर में कहा
अवनि ने सुना तो हंसी और कहा,”फिर तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी अगर वो काम का बहाना करके अपने दोस्तों के साथ घूमने गए है”

“ख़ुशी क्यों होगी ?”,लक्षित ने हैरानी से पूछा
“क्योकि आजकल वो अपने काम में इतना बिजी हो गए है कि उनके पास खुद के लिए भी वक्त नहीं है , इसी बहाने वो थोड़ा अच्छा वक्त बिता लेंगे”,अवनि ने कहा

लक्षित ने सुना तो प्यार से अवनि को देखने लगा और कहा,”वहिनी ! दादा कितने लकी है जिन्हे आप मिली है , आपको उनकी कितनी फ़िक्र है और आप उनसे नाराज तो बिल्कुल नहीं होती है”
अवनि मुस्कुराई और कहा,”लकी वो नहीं , लकी मैं हूँ जिसे उनका साथ और प्यार मिला,,,,,,,,!!!”

लक्षित तो अवनि की बात का मतलब नहीं समझ पाया लेकिन अगर आप समझ गए है तो मुझे कमेंट सेक्शन में जरूर बताये !!

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संजना किरोड़ीवाल  

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