Pasandida Aurat Season 3 – 65

Pasandida Aurat Season 3 – 65

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

प्राची ने अवनि को स्टेशन छोड़ा और खुद वापस होटल चली आयी जहा मिस्टर शर्मा के साथ आज उसकी मीटिंग थी। गाड़ी पार्किंग में लगाकर प्राची जैसे ही अंदर आयी सामने से आते मिस्टर शर्मा और नीलेश परफ नीलेश पर उसकी नजर पड़ी ,  प्राची आगे ना बढ़कर वही रुक गयी।

नीलेश और मिस्टर शर्मा प्राची के पास आये और मिस्टर शर्मा ने कहा,”मिस प्राची ! आज की मीटिंग बहुत इम्पोर्टेन्ट थी लेकिन आप मौजूद नहीं थी फिर भी मैंने कॉन्ट्रेक्ट साइन कर दिया क्योकि मुझे आप पर और आपकी कम्पनी के नए MD की काबिलियत पर पूरा भरोसा है”

कहते हुए मिस्टर शर्मा ने पास खड़े नीलेश की तरफ देखा , प्राची ने नीलेश की तरफ देखा और कहा,”भरोसा तो मुझे भी है मिस्टर शर्मा , मिस्टर नीलेश बहुत ही होनहार और इंटेलिजेंट है , मुझे उम्मीद है इन्होने आपको निराश नहीं किया होगा”

“बिल्कुल नहीं ! बल्कि मैं तो इन से काफी इम्प्रेस हूँ , MD होकर भी इनको कम्पनी के बारे में इतनी नॉलेज है कि मुझे आज की मीटिंग में आपकी कमी महसूस ही नहीं हुई”,मिस्टर शर्मा ने हँसते हुए कहा
जवाब में प्राची भी मुस्कुरा दी और कहा,”थैंक्यू मिस्टर शर्मा”
“योर वेलकम ! अब मैं चलता हूँ , मिस्टर देसाई से कहना जल्द ही लंच पर मिलेंगे”,मिस्टर शर्मा ने एक बार फिर प्राची से हाथ मिलाते हुए कहा और वहा से चले गए।

मिस्टर शर्मा के जाने के बाद प्राची नीलेश की तरफ पलटी तो देखा नीलेश प्यारभरी नजरो से प्राची को ही देख रहा है। प्राची को अपनी ओर देखते पाकर नीलेश ने कहा,”जब आप ऑफिस और काम को लेकर बाते करती है तब कितनी स्ट्रांग और कॉन्फिडेंट लगती है”
“नीलेश ! हम ऑफिस में नहीं है , तुम मुझे तुम कहकर बुला सकते हो ! ये आप वाली फॉर्मेलिटी प्लीज ऑफिस के लिए रहने दो”,प्राची ने प्यार से कहा तो नीलेश ने मुस्कुराते हुए हामी में गर्दन हिला दी।

“चले ?”,प्राची ने कहा तो नीलेश उसके साथ होटल से बाहर निकल गया।
अपने ही ख्यालो में गुम प्राची चली जा रही थी और नीलेश साथ चलते हुए बीच बीच में प्राची को देख लेता , प्राची इतना बदल जाएगी नीलेश ने कभी सोचा नहीं था लेकिन वह खुश था , वह खुश था क्योकि उसकी पसंदीदा औरत उसके साथ थी !

बाहर आकर प्राची ने गाड़ी की चाबी नीलेश की तरफ बढ़ा दी , नीलेश चाबी लेकर पार्किंग की तरफ बढ़ गया और कुछ देर बाद गाड़ी आकर प्राची के सामने रुकी। प्राची ने दरवाजा खोला और नीलेश के बगल में आ बैठी। उसने सीट बेल्ट लगाया और दोनों वाशी के लिए निकल गए।

गाड़ी में फैली ख़ामोशी को तोड़ते हुए नीलेश ने कहा,”प्राची ! मैंने देखा तुम अवनि के साथ कही जा रही थी ? क्या तुम फिर उसे नुकसान,,,,,,,,,,,,!!!”
कहते कहते नीलेश रुक गया क्योकि उसे सच नहीं पता था , उसे लगता था प्राची अभी भी पृथ्वी और अवनि से नफरत करती है।

प्राची ने सुना तो नीलेश की तरफ देखा और कहा,”नुकसान ? मैं अवनि को नुकसान क्यों पहुचाउंगी ? हाँ मैं मानती हूँ कि पहले पृथ्वी की वजह से मैं उस से नफ़रत करती थी लेकिन अब ऐसा नहीं है ! वो बहुत अच्छी लड़की है और मैंने उसके साथ जो किया उसके लिए मैं शर्मिंदा भी हूँ”
“तो फिर तुम अवनि के साथ कहा गयी थी ?”,नीलेश ने हैरानी से पूछा

प्राची ने नीलेश को सारी बात बता दी जिसे सुनकर नीलेश को विक्रम पर बहुत गुस्सा आया लेकिन अगले ही पल उसे याद आया कि प्राची को अवनि के साथ देखकर उसने तो पृथ्वी को मैसेज कर दिया था और उस मैसेज को देखकर कही पृथ्वी फिर से प्राची को गलत ना समझ ले। नीलेश को परेशान देखकर प्राची ने कहा,”क्या हुआ ! तुम इतने परेशान क्यों हो ?”

“अह्ह्ह्ह वो दरअसल मुझे लगा कि तुम अवनि को परेशान करना चाहती हो और फिर मैंने पृथ्वी को मैसेज कर दिया,,,,,,,,!!”,नीलेश ने डरते डरते कहा
प्राची ने सुना तो अपना सर पीट लिया , पृथ्वी अवनि को लेकर कितना प्रोटेक्टिव है ये बात प्राची अच्छे से जानती थी इसलिए उसने नीलेश की तरफ देखा और कहा,”ये तुमने क्या किया नीलेश ?”

“अब हम क्या करेंगे ?”,नीलेश ने घबराहट भरे स्वर में कहा
“ऑफिस चलकर मिस्टर रोमियो का सामना”,प्राची ने कहा और मुस्कुराते हुए खिड़की के बाहर देखने लगी। नीलेश ने भी गाडी की स्पीड बढ़ा दी और सामने देखते हुए पृथ्वी से सामना करने के बारे में सोचने लगा।

मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी , मुंबई
नीलेश ने जिस वक्त पृथ्वी को मैसेज किया उस वक्त पृथ्वी मीटिंग रूम कुछ क्लाइंट्स के साथ बिजी था उसका फोन बजा लेकिन उसने मैसेज पर ध्यान नहीं दिया ! मीटिंग खत्म होने के बाद पृथ्वी जयदीप के केबिन में आया। उसने अपना फोन देखा नीलेश का मैसेज देखकर पृथ्वी के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये हालाँकि प्राची के बदल जाने के बाद पृथ्वी को ये कम ही उम्मीद थी कि वह अवनि से कभी मिलेगी लेकिन फिर भी उसे अवनि की चिंता होने लगी।

उसने अवनि का नंबर डायल किया लेकिन वह उसे फोन कर पाता इस से पहले ही जयदीप उसके सामने आया और कहा,”वेल डन पृथ्वी ! तुमने तो आते ही मेरी कम्पनी की काया पलट कर दी। एक के बाद एक बड़ी कम्पनी हमारी कम्पनी से डील करना चाहती है,,,,,,मैं क्या कह रहा था कि,,,,,,,,,,,,!!!”

जयदीप अपनी बात पूरी कर पाता इस से पहले ही पृथ्वी ने उसकी बात काटकर कहा,”मुझे जाना है”
“हाँ चले जाना लेकिन मेरी बात तो सुन लो”,जयदीप ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“मुझे अभी जाना है , मैं आपसे बाद में मिलता हूँ”,कहते हुए पृथ्वी ने अपना फोन अपने जेब में रखा और वहा से निकल गया
“पृथ्वी , पृथ्वी , अरे मेरी बात तो सुनो,,,,,,,,!!!”, जयदीप ने आवाज दी लेकिन तब तक पृथ्वी वहा से जा चुका था

प्राची ने अवनि को स्टेशन छोड़ा तो वह सीधा पनवेल चली आयी। आज जो हुआ उस से अवनि बहुत उदास थी , उसे खुद पर ही गुस्सा आ रहा था कि कैसे वह हर बार किसी पर भी भरोसा करके परेशानी में पड़ जाती है। अवनि को पृथ्वी के बारे में सोचकर भी चिंता होने लगी अगर उसे ये सब के बारे में पता चला तो कही वह और परेशान ना हो जाये। अवनि ने पृथ्वी को ये सब ना बताने का फैसला किया और सोसायटी में चली आयी।

आज अवनि का घर जाने का बिल्कुल मन नहीं था वह उदास थी और इस वक्त उसे किसी अपने की जरुरत थी इसलिए अवनि अपने फ्लेट ना जाकर रवि जी के घर चली आयी।
दरवाजे के सामने आकर अवनि ने बेल बजायी , दरवाजा लक्षित ने खोला जो कि अभी अभी कॉलेज से आया था। अवनि को दरवाजे पर देखकर लक्षित पलटा और अंदर बैठी लता को देखकर ख़ुशी भरे स्वर में कहा,”आई ! वहिनी आयी है”

लक्षित के मुँह से अपने लिए वहिनी सुनना अवनि को बहुत अच्छा लगता था वह मुस्कुरा उठी तो लक्षित ने कहा,”आप बाहर क्यों खड़ी है ? अंदर आईये ना”
अवनि अंदर चली आयी और आकर सबसे पहले लता के पैर छुए तो लता ने कहा,”सदा सौभाग्यवती भव , खूब खुश रहो”
“कैसी है आप ?”,अवनि ने पूछा

“मेरी छोडो ये बताओ तुम इतने दिन से घर क्यों नहीं आयी ? मेरे बेटे के साथ रहकर तुम भी उसके जैसी हो गयी हो,,,,,,,,मैं तुम से बहुत नाराज हूँ”,लता ने झूठ  मुठ की नाराजगी जाहिर की
“ऐसी बात नहीं है आई ! वापस आने के बाद वो अपने ऑफिस में बिजी हो गए और मैं भी कुछ दिनों से अपने ऑनलाइन काम में बिजी हो गयी। आज आपकी  याद आयी तो यहाँ चली आयी,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने प्यार से कहा

“हुंह झूठ ! मेरी याद ही तो नहीं आती तुम दोनों को , एक तो घर से दूर रहते हो दोनों यहाँ रहते तो कम से कम रोज देखना तो नसीब होता”,लता ने उदास  होकर कहा
लता की बात सुनकर अवनि भी उदास हो गयी , ये देखकर लक्षित उन दोनों के पास आया और लता से कहा,”क्या आई ! वहिनी इतने दिन बाद आयी है और आप आते ही उनसे शिकायत करने लगी , शिकायत करनी ही है तो अपने लाडले बेटे से कीजिये ना , उनके पास ही टाइम नहीं है घर आने का,,,,,,,,,,,,!!!”

लता ने सुना तो लक्षित के सर पर धीरे से चपत लगाई और कहा,”तू भी मेरा लाडला ही है समझा , ज्यादा आग मत लगा”
कहकर लता अवनि की तरफ पलटी और कहा,”तुम कही बाहर से आ रही हो क्या अवनि ? काफी थकी थकी नजर आ रही हो और चेहरा भी बुझा बुझा लग रहा है”
“हाँ आई ! आज मेरा एक इंटरव्यू था उसी के लिए बाहर गयी थी , आप लोगो से मिलने का मन किया इसलिए यहाँ चली आयी”,अवनि ने कहा

“आती रहा करो ये भी तुम्हारा अपना घर है , अच्छा ये बताओ तुमने कुछ खाया ?”,लता ने अवनि का गाल छूकर प्यार से पूछा
“हाँ सुबह नाश्ता किया था”,अवनि ने धीरे से कहा
“सुबह , अभी वक्त देखो दोपहर हो गयी है , तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए खाना लेकर आती हूँ”,लता ने कहा
“आप बैठिये मैं ले लेती हूँ”,अवनि ने कहा

“नहीं तुम जाकर हाथ मुँह धो लो मैं खाना लगाती हूँ , लक्षित भी अभी कॉलेज से आया है दोनों साथ बैठकर खा लेना”,कहते हुए लता किचन में चली गयी और अवनि अपना बैग रखकर बाथरूम की तरफ चली गयी
अवनि हाथ मुँह धोकर आयी तब तक लता उसके लिए खाना लगा चुकी थी। लक्षित डायनिंग पर आ बैठा , लता ने अवनि से भी बैठने को कहा और खुद दोनों के लिए खाना परोसने लगी। लता का ये प्यार देखकर अवनि को आज अपनी माँ की याद आने लगी।

आज उसकी माँ ज़िंदा होती तो वो भी इतने ही प्यार से अवनि  के लिए खाना परोसती और उसे खिलाती,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
लक्षित ने खाना शुरू किया लेकिन अवनि अपने ही ख्यालो में कही खोयी हुयी थी।
“अवनि ! कहा खो गयी ?  खाना खाओ”,लता ने कहा
लता की आवाज से अवनि की तन्द्रा टूटी उसने उनकी तरफ देखा और प्यार से कहा,”आप अपने हाथ से खिलाईये ना”

अवनि की आँखों में नमी देखकर लता समझ गयी कि जरूर कुछ बात है जो अवनि छुपा रही है। उन्होंने कुर्सी खिसकाई और अवनि के बगल में आ बैठी। दाल चावल का एक निवाला बनाया और अवनि की तरफ बढ़ा दिया। अवनि ने जैसे ही निवाला खाया उसने महसूस किया जैसे उसकी अपनी माँ उसे खिला रही है और ना चाहते हुए भी आँख में ठहरा आँसू उसके गाल पर लुढ़क आया। अवनि ने गर्दन घुमा ली , अपने आँसू पोछकर जबरदति मुस्कुराई और लता की तरफ पलटकर कहा,”बहुत अच्छा है और खिलाईये ना”

लता मुस्कुरा उठी , इस वक्त अवनि में उसे अपनी बहू नहीं बल्कि एक छोटी बच्ची नजर आ रही थी जो माँ को अपने हाथ से खाना खिलाने की जिद करती है।

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
नीलेश का  मैसेज मिलने और ये जानने के बाद कि अवनि प्राची के साथ है पृथ्वी परेशान हो गया। प्राची अवनि को कोई नुकसान ना पहुंचा दे सोचकर पृथ्वी ऑफिस से निकलकर सीधा देसाई ग्रुप चला आया। पृथ्वी अंदर आया और सीधा मिस्टर देसाई के केबिन में चला आया लेकिन प्राची वहा नहीं थी , ना नीलेश वहा था। पृथ्वी ने नीलेश को फोन लगाया तो नीलेश ने कहा कि वह ऑफिस ही आ रहा है। मिस्टर देसाई मीटिंग में थे और पृथ्वी परेशान होकर उनके केबिन में यहाँ वहा चक्कर लगाने लगा।

कुछ देर बाद मिस्टर देसाई के केबिन का दरवाजा खुला , नीलेश और प्राची अंदर आये। प्राची को देखते ही पृथ्वी उसके सामने आया और कहा,”अवनि कहा है ?”
“अवनि सही सलामत घर पहुंच चुकी है”,प्राची ने बहुत ही शांत लहजे में कहा
“ये सब क्या है प्राची , तुमने कहा था तुम अवनि से दूर रहोगी उसे कोई नुकसान नहीं पहुचाओगी तो फिर तुम अवनि के साथ क्या कर रही थी ?”,पृथ्वी ने कठोर स्वर में कहा

“पृथ्वी,,,,,,,,,,!!!”,नीलेश ने कहा लेकिन वह आगे कुछ कहता इस से पहले ही पृथ्वी ने अपना हाथ उसके सामने करके उसे आगे बोलने से रोक दिया और प्राची  की तरफ देखकर उसी कठोर स्वर में फिर कहा,”प्राची ! जवाब दो आखिर तुम अवनि से क्यों मिली ? आखिर चल क्या रहा है तुम्हारे दिमाग में ?”

पृथ्वी का परेशान होना जायज था , वह पहले भी प्राची की वजह से अवनि को परेशानी में डाल चुका था लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं चाहता था। प्राची कुछ देर खामोश रही और फिर पृथ्वी को सब सच बता दिया। प्राची की बाते सुनकर पृथ्वी के चेहरे पर गुस्से के भाव झिलमिलाने लगे और उसने कहा,”मैं उस कमीने को छोडूंगा नहीं , उसने पहले भी अवनि के साथ बदतमीजी करने की कोशिश की और आज फिर,,,,,,,,,,!!!”

“पृथ्वी पृथ्वी , होश से काम लो,,,,,,,,विक्रम अब जेल में है , आज जिस तरह से अवनि ने अपने लिए स्टेण्ड लेकर उसके गाल पर तमाचा मारा था तुम देखते तो तुम्हे उस पर फक्र होता”,प्राची ने पृथ्वी की बांह पकड़कर उसे रोकते हुए कहा
पृथ्वी एक बार फिर प्राची के सामने आ खड़ा हुआ और हैरानी से कहा,”क्या ? अवनि ने उसे थप्पड़ मारा ?”

“हाँ पृथ्वी ! तुम्हारे प्यार और ओवरकेयर ने अवनि को तुम पर इतना डिपेंडेंट बना दिया कि वह अपने लिए स्टेण्ड लेना ही भूल गयी थी लेकिन आज उसने कमाल कर दिया और एक नहीं बल्कि दो थप्पड़ उस विक्रम के गाल पर रसीद किये ,, आज के बाद अवनि तो क्या बल्कि किसी भी लड़की की तरफ आँख उठाकर नहीं देखेगा”, प्राची ने कॉन्फिडेंस से भरकर कहा

पृथ्वी ने सुना तो उसे ख़ुशी हुई कि अवनि ने खुद के लिए स्टेण्ड लिया। आज प्राची ने अवनि की मदद की और उसे इतनी बड़ी मुसीबत से बचाया ये जानकर पृथ्वी के दिल में प्राची के लिए जो बची खुची चिढ थी वो भी खत्म हो गयी। उसने प्राची के हाथो को थामकर कहा,”थैंक्यू प्राची ! थैंक्यू सो मच , आज अगर तुम वक्त पर नहीं पहुँचती तो अवनि के साथ,,,,,,,,,,,हाह ! मुझे उसे अकेले जाने देना ही नहीं चाहिए था”

“पृथ्वी ! बस यही आकर तुम कमजोर पड़ रहे हो ,, तुम्हे अवनि को इतना कमजोर भी नहीं समझना चाहिए। वो बहुत समझदार और स्ट्रांग लड़की है बस एक बार उसे खुलकर जीने दो , अपने फैसले खुद लेने दो फिर देखना तुम एक नयी अवनि से मिलोगे”,प्राची ने कहा

पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलायी और नीलेश की तरफ पलटकर कहा,”सॉरी,,,,,,,,,,,!!!”
“तुम्हारे मुँह से ये सॉरी अच्छा नहीं लगता”,नीलेश ने मुस्कुरा कर कहा तो जवाब में पृथ्वी भी मुस्कुरा दिया और फिर वहा से निकल गया।

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संजना किरोड़ीवाल

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