Pasandida Aurat Season 3 – 58

Pasandida Aurat Season 3 – 58

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

प्राची ने जैसे ही सुना हैरानी से पृथ्वी की तरफ देखा , वह सोचा में पड़ गयी पृथ्वी ये सच कैसे जानता है ? लेकिन चुप रही
पृथ्वी ने आगे कहा,”तुम्हे लगा विक्रम तुम्हारी मदद करेगा,,,,,,,नहीं बल्कि वो तो खुद मुझसे बदला लेना चाहता था , तुम से मिलने से पहले वो मुझसे मार जो खा चुका है। दरअसल उसे तुम में कोई इंट्रेस्ट नहीं है , वो लड़किया जो खुद सामने से चलकर मर्दो के पास जाती है मर्द उन्हें कम ही पसंद करते है ,

तुम्हारी मदद करने का बहाना करके वह मुझे बर्बाद करना चाहता था और तुम से शादी करके देसाई ग्रुप हासिल करना चाहता था लेकिन जब तुमने शादी से इंकार कर दिया तो उसका मेल ईगो हर्ट हो गया। तुम उस से माफ़ी मांगने उसके फार्म हॉउस गयी और वहा उसने जो किया,,,,,,,,,,,,तुम्हारे डेड ने मुझसे फार्म हॉउस जाकर तुम्हे घर लाने को कहा था लेकिन मैंने अपनी जगह नीलेश को भेजा,,,,,,,,कल रात अगर मैं वहा आता तो तुम्हारी मुझे हासिल करने की जिद और गहरी हो जाती , और ये मैं नहीं चाहता,,,,,,,,

सच कहू तो तुम एक बहुत ही बेवकूफ लड़की हो , तुम किसी अनजान आदमी पर भरोसा करके उसके फार्म हॉउस पर अकेले कैसे जा सकती हो ? कुछ हासिल करने के लिए अपना सबकुछ तबाह कर देना कहा कि समझदारी है ? तुम्हारी एक जिद के चलते जानती हो तुमने कितने लोगो को मुसीबत में डाल दिया है,,,,,,,,,,!!!!”

बोलते बोलते पृथ्वी का गला सूख गया तो वह कुछ देर रुका और फिर आगे कहा,”किसी को पसंद करना गलत नहीं है प्राची , हम इस दुनिया में बहुत से लोगो को पसंद करते है उनकी किसी ना किसी खूबी की वजह से लेकिन किसी को पाने की जिद करना ये जानते हुए भी कि सामने वाले की दुनिया अलग है ,, ये तो सरासर बेवकूफी है,,,,,,,,,,,,,,और इस बेवकूफी के चलते हम वो भी खो देते है जो असल में हमारा है।

अवनि सिर्फ मेरी पत्नी ही नहीं मेरा सबकुछ है , तुम तो क्या दुनिया की किसी भी लड़की के लिए मैं उसे खुद से दूर नहीं कर सकता,,,,,,,,,,,,,वो मेरे लिए बनी है और मैं सिर्फ उसके लिए,,,,,,!! जानती हो मैं तुम्हे इस वक्त ये बाते इतनी शांति से क्यों समझा रहा हूँ क्योकि इस वक्त तुम जिन भावनाओ से गुजर रही हो उनसे मै भी गुजर चूका हूँ,,,,,,,,,,,,,हर रिजेक्शन बुरा नहीं होता प्राची , कुछ रिजेक्शन इसलिए भी होते है क्योकि कुछ बेहतरीन आगे हमारा इंतजार कर रहा होता है”

पृथ्वी की बाते सुनकर प्राची को अपनी गलतियों का अहसास होने लगा , उसे अहसास हुआ कि अब तक वह जो कर रही थी सब गलत था , उसने नम आँखों से पृथ्वी को देखा तो पाया कि आज पहली बार पृथ्वी की आँखों में भी नमी थी

पृथ्वी की नम आँखे देखकर प्राची उदास हो गयी। आज से पहले उसने हमेशा पृथ्वी को मजबूत इंसान के रूप में देखा था लेकिन आज वह उसे थोड़ा कमजोर पड़ते नजर आया , उसने बुझे स्वर में कहा,”मैं जानती हूँ मैं जो कुछ भी किया वो माफ़ी के लायक नहीं है , फिर भी मैं तुमसे माफ़ी मांगती हूँ पृथ्वी ,, अपने घमंड और अपने ईगो के चलते मैं प्यार और जिद में फर्क ही नहीं कर पायी,,,,,,,,मैंने तुम्हे बहुत परेशान किया है ,

मेरी वजह से तुम्हे मौर्या ग्रुप छोड़ना पड़ा,,,,,अपनी जिद के चलते मैं अंधी हो गयी थी पृथ्वी , मैं देख ही नहीं पायी कि तुम्हारी ख़ुशी अवनि में है। मैं अवनि से भी माफ़ी मांगना चाहती हूँ , मैंने उसे भी बहुत तंग किया है,,,,,,,,,,,,आई होप वो मुझे माफ कर दे”

पृथ्वी ने सुना तो अपनी आँख के किनारे साफ़ किये और कहा,”अगर तुम्हे सच में अपने किये का पछतावा है और तुम किसी रोज दिल से उस से माफ़ी मांगोगी तो वो तुम्हे सच में माफ़ कर देगी,,,,,,,,,एक्चुली वो बहुत अच्छी लड़की है , वो बस अपने आस पास सबको खुश देखना चाहती है”

पृथ्वी के शब्दों में अवनि के लिए मोहब्बत देखकर प्राची ने कहा,”तुम उसे बहुत पसंद करते हो न ?”
पृथ्वी ने सुना तो आँखों में चमक भरकर कहा,”हम्म्म बहुत , बहुत ज्यादा,,,,,,,!!!”

“अवनि बहुत लकी है , तुम उसका साथ कभी नहीं छोड़ना,,,,,,हमेशा उसके साथ खड़े रहना”,प्राची ने अपनी आँखों के किनारे साफ़ करके कहा
पृथ्वी ने प्राची की तरफ देखा और आज वह पहली बार प्राची को देखकर मुस्कुराया , वह कुछ देर ख़ामोशी से प्राची को देखता रहा और फिर धीरे से कहा,”तुम भी बहुत लकी हो”

प्राची ने सुना तो उदास होकर बुझे स्वर में कहा,”मैं कैसे लकी हो सकती हूँ ? मैंने जो चाहा वो कभी मुझे मिला ही नहीं और जो मिला वो मैंने अपने ही हाथो बर्बाद कर कर दिया”
“किसने कहा तुम लकी नहीं हो ? क्या पता आज भी किसी को सिर्फ तुम्हारा इंतजार हो और तुम उसकी पसंदीदा औरत हो,,,,,,,,ये जिंदगी है इसमें कुछ भी हो सकता है मिस प्राची”,पृथ्वी ने हल्का सा मुस्कुरा कर कहा

प्राची ने कुछ नहीं कहा बस फीका सा मुस्कुरा दी। दोनों कुछ देर खामोश वही खड़े रहे और फिर पृथ्वी ने प्राची से चलने को कहा। इस बार प्राची पृथ्वी के बगल वाली सीट पर आ बैठी। उसके मन में पृथ्वी को लेकर अब कोई भावनाये नहीं थी , जो थोड़ा बहुत कुछ बचा था वो भी आज पृथ्वी ने हटा दिया। प्राची के लिए पृथ्वी बस अब देसाई ग्रुप में काम करने वाला एक मैनेजर था।

पृथ्वी ने गाडी स्टार्ट की , प्राची ने सीट बेल्ट लगाया और खिड़की से बाहर देखते हुए अपनी ही सोच में डूब गयी। उसके जहन में पृथ्वी के कहे शब्द घूमने लगे
“किसने कहा तुम लकी नहीं हो ? क्या पता आज भी किसी को सिर्फ तुम्हारा इंतजार हो और तुम उसकी पसंदीदा औरत हो,,,,,,,,ये जिंदगी है इसमें कुछ भी हो सकता है मिस प्राची”

प्राची की आँखों के सामने नीलेश का चेहरा आने लगा , नीलेश के देसाई ग्रुप ज्वाइन करने से लेकर बीती रात प्राची को घर छोड़ने तक के सारे पल प्राची की आँखों के सामने घूमने लगे और आज पहली बार प्राची को महसूस हुआ कि नीलेश हमेशा से उसे चाहता था , उसकी केयर करता था , उसे समझाता था , उसके साथ वक्त बिताता था और बीती रात जिस तरह से उसने विक्रम को मारा था इसके बाद तो प्राची को ये पूरा यकीन हो गया कि नीलेश के लिए वह इम्पोर्टेन्ट है।

ख्यालो में खोयी प्राची धीरे से मुस्कुराई , उसका मन काफी हल्का था और वह काफी अच्छा महसूस कर रही थी। भरत के केबिन में जो बाते हुए थी प्राची कुछ देर के लिए भूल चुकी थी और उसे भूलना भी चाहिए था क्योकि इस बार खुद पृथ्वी उसके साथ खड़ा था।

प्राची की तन्द्रा टूटी उसने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”थैंक्यू”
“थैंक्यू किसलिए ?”,पृथ्वी ने सामने देखकर गाडी चलाते हुए कहा
“बस थैंक्यू”,प्राची ने कहा वह वजह बताकर अपने उस थैंक्यू की अहमियत को कम करना नहीं चाहती थी।
“इट्स ओके,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा और गाडी की स्पीड बढ़ा दी ताकि जल्दी से जल्दी प्राची को उसके घर छोड़कर नीलेश से मिल सके।

पृथ्वी ने प्राची को घर छोड़ा और खुद गाडी लेकर नवी मुंबई के लिए निकल गया। पृथ्वी सीधा मोर्या ग्रुप चला आया। उसने गाडी पार्किंग में लगाईं और ऑफिस के अंदर चला आया। जयदीप के केबिन में बैठा नीलेश पृथ्वी का ही इन्तजार कर रहा था। जयदीप मीटिंग रूम में कुछ क्लाइंट्स के साथ था। पृथ्वी को देखते ही नीलेश उठा और उसके सामने आकर कहा,”क्या प्राची ठीक है , क्या उसने मिस्टर देसाई को कल के बारे में बताया ?”

“नहीं वो ठीक नहीं है , उस कमीने विक्रम ने जो किया उस से वह बहुत ज्यादा अपसेट है एंड मुझे नहीं लगता उसे कल के बारे में अभी मिस्टर देसाई को बताना चाहिए,,,,,,लेकिन हाँ उस हादसे के बाद एक चीज अच्छी हुई”,पृथ्वी ने शांत लहजे में कहा
“क्या ?”,नीलेश ने पूछा
“प्राची अपने किये पर शर्मिंदा है”,पृथ्वी ने कहा

नीलेश ने सुना तो उसे ख़ुशी भी हुई लेकिन साथ ही वह प्राची के बारे में सोचकर उदास भी हो गया। वह पृथ्वी के सामने से हटा और खिड़की की तरफ जाते हुए कहा,”एक ना एक दिन तो ये होना ही था पृथ्वी बस उसे समझने में थोड़ा वक्त लगा कि वो जो कर रही है वो गलत है,,,,,,,,,,,,,उसका इंटेंशन भले ही गलत ना हो लेकिन उसने जिन लोगो पर भरोसा किया वो लोग उसके लायक नहीं थे”

नीलेश को उदास देखकर पृथ्वी उसके पास चला आया और खिड़की के दूसरे किनारे आ खड़ा हुआ। नीलेश ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”वो ऐसी बिल्कुल नहीं थी पृथ्वी , मैंने हमेशा उसे एक स्ट्रांग इंडिपेंडेंट वुमन के रूप में देखा है और इस बात पर मैं हमेशा प्राउड फील करता हूँ। तुम्हारे लिए उसकी जो भी भावनाये रही हो लेकिन वो प्यार तो नहीं था।

उस विक्रम की बातो में आकर उसने तुम्हे और अवनि को दूर करने जैसी हरकत की , मेरे डेड की बातो में आकर मिस्टर देसाई को मुसीबत में डाल दिया , सबकी नजरो में अपना सम्मान खो दिया और,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
कहते कहते नीलेश रुक गया , उसके चेहरे पर दर्द के भाव थे , लग रहा था जैसे दुःख से उसका गला  भर आया हो
“और ?”,पृथ्वी ने नीलेश के जख्मो को कुरेद कर कहा

“और वो हमेशा हमेशा के लिए मुझसे दूर हो गयी , मैं कभी उसे बता ही नहीं पाया कि वो मेरे लिए कितनी अनमोल है,,,,,,,,,ना मैं कभी उसके सामने अपनी भावनाये जहीर कर पाया और ना ही उसका ख्याल रख पाया,,,,,,,,अगर मैं उसे छोड़कर नहीं जाता तो आज वह इस हाल में नहीं होती”,कहते कहते नीलेश की आँखों में नमी उभर आयी और वह पृथ्वी से नजरे बचाकर खिड़की से बाहर देखने लगा

नीलेश की बाते सुनकर पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”तुमने उसे नहीं खोया है नीलेश वो आज भी तुम्हारे दिल में है और मुझे पूरा यकीन है एक दिन प्राची को तुम्हारे प्यार का अहसास जरूर होगा”
नीलेश ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”तुम ये बात इतने यकीन के साथ कैसे कह सकते हो ? वो तो तुम्हे चाहती है”

पृथ्वी धीरे से फिर मुस्कुराया और कहा,”वो इस बात पर भी शर्मिंदा है कि उसने मुझे चाहा,,,,,,,!!”
पृथ्वी की बात सुनकर नीलेश के मन को एक तसल्ली मिली कि आख़िरकार प्राची को ये समझ आया कि जिसे वह प्यार समझ रही थी वह बस एक जिद थी ! नीलेश को खामोश देखकर पृथ्वी ने नीलेश के कंधे पर हाथ रखा और कहा,”इस वक्त उसे किसी अपने की बहुत सख्त जरूरत है , वो पूरी तरह बिखरे इस से पहले उसे सम्हाल लो”

नीलेश ने नम आँखों के साथ हामी में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने सोफे की तरफ जाते हुए कहा,”सब ठीक है , तो क्यों ना कल के धमाके को लेकर बात कर ली जाए”
नीलेश के चेहरे के भाव एकदम से बदलकर कठोर हो गए  , उसने हामी में गर्दन हिलायी और पृथ्वी की तरफ चला आया।

कल मिस्टर देसाई के सामने भरत का असली चेहरा आने वाला था और ये करने वाले थे पृथ्वी और नीलेश , काफी लम्बे डिस्कशन के बाद पृथ्वी ने कठोर स्वर मे कहा,”कल का दिन मिस्टर भरत के लिए देसाई ग्रुप में आखरी दिन होगा”
“मुझे तुम पर पूरा भरोसा है”,नीलेश ने विश्वास भरे स्वर में कहा

पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलाई और फिर केंटीन में फोन करके दो कप कॉफी भिजवाने को कहा। जयदीप भी अपनी मीटिंग खत्म कर केबिन में चला आया , उसने जब पृथ्वी को अपने केबिन में नीलेश के साथ देखा तो थोड़ा हैरान भी हुआ और साथ ही खुश भी क्योकि इन दिनों उसे पृथ्वी से बात करने का मौका कम ही मिलता था।
“सो मिस्टर उपाध्याय ! धर्मपत्नी जी ने आपको माफ़ी दी या नहीं ?”,जयदीप ने पृथ्वी और नीलेश की तरफ आते हुए कहा

“वो मेरी बायको है , उसे मनाना मेरे लिए बहुत आसान है आप अपनी मिसेज का सोचिये , आपके रेस्टोरेंट के बिल्स हाथ लगने के बाद आप उन्हें कैसे मनाने वाले है ?”,पृथ्वी ने अपने फ़ोन में स्क्रोल करते हुए कहा
जयदीप ने सुना तो घबराकर कहा,”हाह ! क्या उसे फिर से मेरे कोई बिल्स मिले है ?”
“रिलेक्स ! मजाक कर रहा हूँ”,पृथ्वी ने अपना फोन साइड में रखकर जयदीप की तरफ देखकर कहा

जयदीप ने सुना तो चिढ़कर पृथ्वी को घूरने लगा , ये देखकर नीलेश ने कहा,”पृथ्वी ! तुम इन्हे इतना परेशान क्यों करते हो ? आफ्टर ऑल ये तुम्हारे बॉस है”
नीलेश की बात सुनकर जयदीप को थोड़ा अच्छा लगा और जैसे ही उन्होंने मुस्कुरा कर नीलेश की तरफ देखा नीलेश ने जयदीप से कहा,”वैसे आप अपनी वाइफ से इतना डरते क्यों है ?”

नीलेश का सवाल सुनकर पृथ्वी की दबी सी हंसी निकल गयी और जयदीप ने चिढ़े हुए स्वर में कहा,”तुम दोनों एक जैसे हो,,,,,,,अपना काम खत्म करो और दफा हो जाओ मेरे केबिन से”
नीलेश और पृथ्वी ने सुना तो गंभीर होकर एक दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों दबी सी हंसी हसने लगे। जयदीप ने पृथ्वी के लिए आयी कॉफी उठायी और  अपनी टेबल की तरफ चला गया।

आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
अवनि आज बहुत खुश थी और उसके पास खुश होने की एक नहीं बल्कि दो दो वजह थी। पहली वजह थी सुरभि और सिद्धार्थ का रिश्ता तय हो गया वो भी सब घरवालों की रजामंदी और ख़ुशी के साथ और दूसरी वजह थी कि आज ही अवनि को एक बड़ा ऑफर मिला जिसके लिए दो दिन बाद उसे एक बड़े डायरेक्टर से मिलना था। अवनि ये दोनों ही खुशखबरी पृथ्वी को बताने के लिए बेताब थी।

अवनि को खाना बनाने का शौक था और पृथ्वी को अच्छा खाना खाने का इसलिए शाम में पृथ्वी के घर आने से पहले अवनि ने आज उसकी पसंद का खाना बनाया और उसे डायनिंग टेबल पर सजा दिया ताकि दोनों साथ बैठकर बाते करते हुए खा सके।
खाना बनाते बनाते गर्मी और पसीने से अवनि की हालत खराब हो चुकी थी इसलिए वह नहाने चली गयी। उसने सिंपल कुरता पजामा पहना , शाम का समय था लेकिन अपने बाल भी धो लिए , मेकअप के नाम पर बस बिंदी और मांग में सिंदूर,,,,,,,,,,,,!!!

अवनि अपने गीले बालों को पोछते हुए हॉल में चली आयी तभी बेल बजी ! अवनि मुस्कुराई और दरवाजे की तरफ बढ़ गयी , उसने दरवाजा खोला सामने पृथ्वी खड़ा था। आज पृथ्वी भी काफी खुश नजर आ रहा था। वह अंदर आया , अवनि ने दरवाजा बंद किया और पृथ्वी के पास चली आयी। अवनि पृथ्वी से उसकी ख़ुशी की वजह पूछती या उसे अपनी ख़ुशी की वजह बताती इस से पहले पृथ्वी की नजर अवनि के गीले बालों पर पड़ी और उसने कहा,”अवनि ! तुमने इस वक्त अपने बाल क्यों धोये ?”

“गर्मी की वजह से बहुत पसीना हो रहा था इसलिए”,अवनि ने कहा
“लेकिन इस वक्त बाल धोने से तुम बीमार पड़ सकती हो ना बेटा , मेरे साथ आओ”,कहते हुए पृथ्वी ने अपना बैग सोफे पर रखा और अवनि का हाथ पकड़कर उसे कमरे में ले गया। उसने अवनि को ड्रेसिंग के सामने बैठाया और खुद ड्रॉवर से हेयर ड्रायर निकाल लाया , उसने अपने शर्ट की बाजू फोल्ड की और अवनि के बगल में खड़े होकर उसके गीले लम्बे बालों को सुखाने लगा। अवनि प्यार से शीशे में नजर आते पृथ्वी को देखती रही और मुस्कुराती रही।

अवनि जानती थी कि दिन भर का थका हारा पृथ्वी घर आया है लेकिन आते ही अवनि के लिए ये सब कर रहा है और इसके बदले में उसके चेहरे पर एक शिकन तक नहीं है , उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि इस जिंदगी में कोई उस से इतनी मोहब्बत करेगा। अवनि ने अपने दोनों हाथो से शीशे में नजर आते पृथ्वी की बलाये ली और मुस्कुरा दी।

( क्या प्राची भी है किसी की पसंदीदा औरत या पृथ्वी ने दिया सिर्फ उसे दिलासा ? भरत का सच सामने लाने के लिए कल क्या करेंगे पृथ्वी और नीलेश ? क्या अवनि की ख़ुशी में खुश होगा पृथ्वी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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