Pasandida Aurat Season 3 – 47
Pasandida Aurat Season 3 – 47

सिद्धार्थ पर भरोसा करके सुरभि उसके साथ चली आयी और सिद्धार्थ उसे उदयपुर उसके घर ले आया। घर के सामने आकर सिद्धार्थ ने बेल बजायी और जैसे ही दरवाजा खुला अपने पापा को सामने देखकर सुरभि का दिल बैठ गया ! सुरभि के पापा के चेहरे पर कठोर भाव थे और आँखों में सुरभि के लिए गुस्सा तैर रहा था , उस पर सुरभि को सिद्धार्थ के साथ देखकर तो उनकी मुट्ठिया भिंच गयी और उन्होंने दबे स्वर में गुस्से से सुरभि से कहा,”यहाँ क्यों आयी हो ?”
सुरभि डर से काँप रही थी , उसके मुँह से कोई आवाज ही नहीं निकली वह बस सर झुकाये खड़ी रही। सुरभि को खामोश पाकर उसके पापा और गुस्सा हो गए और कहा,”घर से भागने से पहले तुमने एक बार भी अपने बाप की इज्जत के बारे में नहीं सोचा ? इस लड़के के लिए तुम घर छोड़कर चली गयी , क्या यही संस्कार मिले है तुम्हे ? तंग आ चुका हूँ तुम्हारी इन मनमानियों से , दिल तो करता है”
कहते हुए सुरभि के पापा ने गुस्से से जैसे ही सुरभि को मारने के लिए हवा में हाथ उठाया सिद्धार्थ सुरभि के सामने आ गया। सुरभि के पापा का हाथ हवा में ही रह गया और वे जलती आँखों से सिद्धार्थ को घूरने लगे तो सिद्धार्थ ने बहुत ही शांत स्वर में कहा,”अंकल ! अंदर चलकर बात करते है प्लीज”
सुरभि की मम्मी भी वहा चली आयी और जब उन्होंने सुरभि को देखा तो आँखों में आँसू भर आये ,
वे सुरभि के पास आयी और घबराये हुए स्वर में कहा,”तू कहा चली गयी थी सुरभि ? पता है तेरे पापा और मैं कितना परेशान हो गए थे ,, रिश्तेदार कैसी कैसी बातें बना रहे थे ? आखिर तुम बिना बताये कहा चली गयी थी ?”
“अंदर लेकर आओ इसे”,सुरभि के पापा ने कहा और अंदर चले गए। सुरभि की मम्मी सुरभि को लेकर अंदर चली गयी। जाते जाते सुरभि ने पलटकर दरवाजे पर खड़े सिद्धार्थ को देखा जिसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। सुरभि की आँखों में आँसू थे और चेहरे पर उदासी के भाव थे , वह जानना चाहती थी आखिर सिद्धार्थ ने उसके साथ ऐसा क्यों किया
सुरभि के पापा गुस्से से भरे हॉल में खड़े थे , सुरभि अपनी मम्मी के साथ हॉल में आयी , अपने पापा से नजरे मिलाने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। सुरभि के पापा ने सुरभि को देखा और गुस्से से कहा,”खुश हो ? जिस लड़के के लिए तुम हमारी इज्जत को अपने पैरों तले रौंदकर घर से भागी थी , उसी लड़के ने तुम्हे यहाँ लाकर छोड़ दिया,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
“ऐसा नहीं है पापा,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने तकलीफभरे स्वर में कहा जबकि सिद्धार्थ ने जो किया उस से कही न कही सुरभि हर्ट थी।
“ऐसा नहीं है तो फिर क्यों नहीं रखा उस लड़के ने तुम्हे अपने घर में ? क्योकि वह भी जानता है इज्जदार घर की लड़किया ऐसी ओछी हरकते नहीं करती”,सुरभि के पापा ने गुस्से से कहा
सुरभि के पास उनकी इस बात का कोई जवाब नहीं था , जिस सिद्धार्थ के लिए वह अपना घर छोड़कर गयी थी वही सिद्धार्थ उसे वापस उदयपुर ले आया था। सुरभि की आँखों में भरे आँसू उसके गालो पर बह गए और उसने मायूसी से अपना सर झुका लिया !
सुरभि के पापा ने सुरभि को देखा और कहने लगे,”आज तक मैंने तुम्हारी हर बात मानी सुरभि , तुम में और तुम्हारे भाई में कभी कोई भेद भाव नहीं किया हमेशा तुम्हे फ्रीडम दी , अनिकेत को भी अपने लिए तुमने खुद चुना था जबकि मैंने तुम से कहा था कि वह कभी तुम्हारे सपनो को नहीं समझेगा लेकिन तुम्हारी जिद के आगे झुकना पड़ा। तुम्हे आगे पढ़ाने और नौकरी के लिए सबसे लड़ा मैं और तुमने ये सब का मुझे ये सिला दिया,,,,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि रो पड़ी और रोते हुए कहा,”मैंने कुछ गलत नहीं किया है पापा , मैं सिद्धार्थ को पसंद करती हूँ , हम बस अच्छे दोस्त थे लेकिन वो मुझसे शादी करना चाहता है ये बात मुझे आज पता चली,,,,,,,,,,,,वो बहुत अच्छा लड़का है पापा , मेरी खातिर एक बार उस से मिल लीजिये प्लीज , प्लीज पापा”
सुरभि के पापा ने सुना तो ख़ामोशी से सुरभि को देखने लगे। सुरभि को ऐसे रोते देखकर सुरभि की मम्मी को भी अच्छा नहीं लगा वे उसके पास आयी और कहा,”सुरभि ! तुझे कोई लड़का पसंद है ये बात तू मुझे और अपने पापा को बताती तो क्या हम लोग नहीं समझते , तुमने घर से भागने का कैसे सोच लिया ? जानती हो तुम्हारे इस फैसले से तुम्हारे पापा को कितनी तकलीफ हुई है,,,,,,,,,,,,,!!!!”
सुरभि आँसू बहाती रही , सुरभि को रोते देखकर उसके पापा का दिल भी पिघल गया लेकिन सख्ती अभी भी उनके चेहरे पर थी और उन्होंने थोड़ा गुस्से से कहा,”जिसके लिए तुम आँसू बहा रही हो वो भी तुम्हे छोड़कर चला गया”
“मैं यही हूँ , कही नहीं गया”,सिद्धार्थ की सधी आवाज सबके कानो में पड़ी। सुरभि ने पलटकर देखा तो पाया कि सिद्धार्थ हाथ बांधे घर के दरवाजे पर खड़ा है। सुरभि की आँखों में फिर आँसू भर आये।
सिद्धार्थ हॉल में आया और सुरभि के पापा से कहा,”सुरभि ने कुछ गलत नहीं किया है अंकल , हां जानता हूँ जल्दबाजी में वो चीजे थोड़ी गड़बड़ कर देती है लेकिन वो आप लोगो को कभी हर्ट करना नहीं चाहती थी। मैं अपने मम्मी-पापा से बहुत प्यार करता हूँ और जानता हूँ कि पापा लोग अपनी इज्जत को लेकर बहुत सीरियस होते है इसलिए मैं सुरभि को लेकर वापस आया हूँ। मुझे तो पता भी नहीं था कि ये घर से भागकर गयी है। मैं इसे बहुत पसंद करता हूँ और मेरे मम्मी पापा भी,,,,,,,,,,,,,,
मैं सुरभि से शादी करना चाहता हूँ लेकिन ये कभी नहीं चाहूंगा कि वो अपने घरवालों के खिलाफ जाकर मुझसे शादी करे,,,,,,,,,,,,,,,इसलिए आपकी इज्जत , आपकी अमानत वापस लौटाने आया था”
सिद्धार्थ की बात सुनकर सुरभि मायुस हो गयी। सिद्धार्थ की बात सुनकर सुरभि के पापा ख़ामोशी से उसे देखने लगे और बहुत सोचने के बाद उन्हें याद आया कि उनके सामने खड़ा शख्स बल्कि वही लड़का है जिस से अवनि की शादी होने वाली थी और आखरी पल में इस लड़के ने अवनि का हाथ पृथ्वी के हाथ में सौंप दिया था।
उस वक्त सिद्धार्थ की समझदारी और दरियादिली सुरभि के पापा को बहुत पसंद आयी थी फिर उन्होंने सिद्धार्थ को पहचानने में भूल कैसे कर दी ? सुरभि के पापा को खामोश देखकर सिद्धार्थ को लगा कि वे अब भी सुरभि से नाराज है तो उसने धीरे से कहा,”आप कहेंगे तो मैं हमेशा के लिए सुरभि की जिंदगी से दूर चला जाऊंगा और उस से कभी नहीं मिलूंगा,,,,,,,,,,,बस आप लोग उसे रुलाना बंद कीजिये”
“तुम तो चले जाओगे पर क्या सुरभि तुम से दूर जा पायेगी ?”,सुरभि के पापा सिद्धार्थ की तरफ देखकर कहा
सिद्धार्थ के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था , सुरभि उसे पसंद करती है , उस से प्यार करती है ये बात तो सिद्धार्थ जानता था लेकिन चाहकर भी वह सुरभि पर हक़ नहीं जता सकता था। सिद्धार्थ को खामोश देखकर सुरभि के पापा ने कहा,”इसे गुस्सा बहुत आता है”
सिद्धार्थ ने सुरभि के पापा की तरफ देखा और विश्वास भरे स्वर में कहा,”मैं सह लूंगा”
“बहुत नासमझ है , सही गलत देर से समझती है”,सुरभि के पापा ने सधे हुए स्वर में कहा
“मैं प्यार से समझा दिया करूंगा”,सिद्धार्थ ने कहा
“छोटी छोटी बातो पर चिढ जाती है,,,,,,,,,,,पेशेंस बिल्कुल नहीं है”,सुरभि के पापा ने कहा
सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखा और कहा,”मैं ख्याल रखूंगा,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“इसे खाना बनाना भी नहीं आता”,सुरभि के पापा ने कहा
सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखा और प्यार से कहा,”मैं बनाकर खिला दिया करूंगा,,,,,,,,!!!”
सुरभि के पापा इस बार हल्का सा मुस्कुराये और कहा,”इसे अपनी नौकरी से बहुत प्यार है”
“और मुझे इस से,,,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने कहा
सुरभि के पापा मुस्कुराये और सिद्धार्थ की तरफ आकर कहा,”यार तुम बड़े कमाल के लड़के हो,,,,,,,,,,,,,इतनी कमिया है इस लड़की में फिर भी कह रहे हो इस से प्यार है,,,,,,,,,!!!”
“मुझे इसकी कमियों से भी प्यार है,,,,,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने कहा
सुरभि के पापा सुरभि के सामने आये और कहा,”क्या कहती हो सुरभि , शादी करोगी इस से ?”
सुरभि ने सुना तो उसका दिल धड़क उठा , उसे तो अपने कानो पर यकीन ही नहीं हुआ कि उसके पापा खुद उसे सिद्धार्थ से शादी करने का पूछ रहे है। वह कुछ बोल ही नहीं पायी बस मुँह फाड़े अपने पापा को देखती रही तो उसके पापा ने कहा,”देखो अगर तुम्हारी ना है तो,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि के पापा अपनी बात पूरी करते इस से पहले ही सुरभि ने कहा,”मुझे करनी है,,,,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने सुना तो मुस्कुरा उठा , उसे लगा सुरभि के पापा को मनाना मुश्किल होगा लेकिन वो तो इतनी आसानी से मान गए।
सिद्धार्थ का दिल किया अभी आगे बढ़कर सुरभि को गले लगा ले लेकिन सुरभि के मम्मी पापा खड़े थे इसलिए खुद को रोक लिया !
सुरभि के पापा ने सुरभि का सर सहलाया तो सुरभि रोते हुए उनके सीने से आ लगी और कहा,”मुझे माफ कर दीजिये पापा,,,,,,,,,,,!!!”
“मैंने तुम्हे माफ़ किया और माफ़ी तो मुझे तुमसे मांगनी चाहिए बेटा , तुम्हारा पिता होकर मैं तुम्हारे मन की बात नहीं समझ पाया , दूसरो की बात पर विश्वास करके तुम्हे गलत समझा और इतनी तकलीफ दी। आज सुबह अगर तुम्हारे भाई ने अनिकेत का सब सच नहीं बताया होता तो हमे कभी पता ही नहीं चलता वो लड़का ऐसा भी कर सकता है”,सुरभि के पापा ने कहा
सुरभि ने सुना तो उसे हैरानी हुई लेकिन साथ ही वह खुश भी थी कि उसे लेकर उसके पापा की गलतफहमी दूर हो चुकी थी
सुरभि के कंधे पर अपनी बाँह रखे सुरभि के पापा सिद्धार्थ की तरफ पलटे और कहा,”अपने मम्मी पापा को लेकर यहाँ आओ मुझे उनसे बात करनी है”
सिद्धार्थ ने जैसे ही सुना वह दरवाजे की तरफ जाने के लिए बढ़ा तो सुरभि के पापा ने कहा,”अरे अभी नहीं कल सुबह आराम से ले आना,,,,,,,,,,,,,,,तुम दोनों को देखकर तो लग रहा है कि शादी की बहुत जल्दी है तुम दोनों को,,,,,,,,,,,,!!!!”
सिद्धार्थ ने सुना तो शरमाकर अपना सर खुजाने लगा और सुरभि अपनी मम्मी की तरफ चली गयी। सुरभि की मम्मी को भी सिद्धार्थ बहुत पसंद आया इसलिए उन्होंने भी कोई आपत्ति नहीं जताई। रात बहुत हो चुकी थी इसलिए सुरभि के पापा ने आज रात सिद्धार्थ को यही रुकने को कहा और फिर अपनी पत्नी से सिद्धार्थ और सुरभि के लिए खाना लगाने का कहकर सिद्धार्थ के साथ हॉल में पड़े सोफे पर आ बैठे। सुरभि अपनी मम्मी की मदद करने किचन में चली गयी और सिद्धार्थ सुरभि के पापा को अपने काम और परिवार के बारे में बताने लगा।
भरत का घर , मुंबई
अपने घर के हॉल में बैठा भरत आज अपनी हार के गम में शराब पी रहा था। पृथ्वी ने उसके बने बनाये प्लान पर पानी फेर दिया और उसे एक बार फिर उसके सपने से दूर कर दिया था ! मायूस भरत एक के बाद एक पेग पिए जा रहा था। हॉल में अँधेरा था बस बालकनी में जल रही लाइट की हलकी रौशनी हॉल में आ रही थी। भरत को होश नहीं था , उसके हाथ काँप रहे थे और आँखों में पृथ्वी के लिए गुस्सा था। आज देसाई ग्रुप उसका होता लेकिन पृथ्वी की वजह से सब उसके हाथ से चला गया।
भरत के दिल में पृथ्वी को लेकर नफरत और बढ़ने लगी और उसने बोतल में बचे आखरी दो घूंठ गिलास में डाले और एक साँस में पी गया। अभी उसके सामने एक भरी हुई बोतल और रखी थी लेकिन भरत खाली गिलास को हाथ में थामे किसी सोच में डूबा हुआ था ! उसकी आँखो के सामने वो पल आ गए जब पृथ्वी ने लीगल पेपर फाड़कर भरत के मुँह पर मारा था !
भरत अपनी सोच में डूबा था कि दरवाजा खुला और कोई अंदर आया। अँधेरा होने की वजह से उसका चेहरा नजर नहीं आया। अंदर आकर वह स्विच बोर्ड की तरफ बढ़ा और हॉल की लाइट जला दी जिस से हॉल में रौशनी हो गयी और उसी रौशनी में भरत ने अपने सामने खड़े शख्स को देखा जो कि कोई और नहीं बल्कि भरत का इकलौता बेटा “नीलेश” था। नीलेश को देखकर भरत का नशा एकदम से उतर गया। उसने नीलेश को घूरकर देखा और गुस्से से कहा,”आ गए मेरे जख्मो पर नमक छिड़कने ?”
“मैं यहाँ बस ये देखने आया हूँ कि आप ठीक है या नहीं ?”,नीलेश ने कहा उसके चेहरे पर दुःख या फिर अहसान के कोई भाव नहीं थे
भरत ने सुना तो उसका गुस्सा और बढ़ गया। उसने सामने पड़ी बोतल का ढक्कन खोलकर गिलास में शराब डाली और लड़खड़ाते हुए पीने लगा तो नीलेश ने आगे बढ़कर उनका हाथ पकड़कर कहा,”और मत पीजिये आपने पहले ही बहुत ज्यादा पी रखी है”
भरत ने नीलेश का हाथ झटक दिया और कहा,”हाह ! तुम कौन होते हो मुझे रोकने वाले ? मैं पी रहा हूँ क्योकि उस पृथ्वी ने सब बर्बाद कर दिया , मेरी सालों की मेहनत बर्बाद कर दी,,,,,,,,,,!!!”
कहते हुए भरत ने हाथ में पकडे गिलास की शराब को एक साँस में गटका और फिर वही सोफे पर निढाल हो गया।
नीलेश ने भरत के हाथ से गिलास लिया और उसे टेबल पर रख दिया। भरत होश में नहीं था इसलिए नीलेश ने उसे उठाया और सहारा देकर कमरे में ले आया। नीलेश ने उन्हें बिस्तर पर लेटाया , सर के नीचे तकिया लगाया और कम्बल ओढ़ाकर उनके पैरो के पास आ बैठा। भरत ने नीलेश को कभी अपना बेटा नहीं माना लेकिन नीलेश के दिल में आज भी भरत के लिए हमदर्दी थी।
वह भरत के पैरों के पास आ बैठा और एकटक उसे देखता रहा। भरत का बुझा चेहरा देखकर नीलेश उदास हो गया और उसके पैरो को हाथ लगाकर कहा,”मुझे माफ़ कर देना पापा लेकिन आपकी इस हालत का जिम्मेदार मैं हूँ,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
नीलेश काफी देर तक वही बैठा रहा और फिर उठकर चला गया।
कपूर मेंशन्स , मुंबई
अपने कमरे में खड़े विक्रम ने हाथ में पकडे शराब के गिलास को दिवार पर फेंककर गुस्से से कहा,”हाह ! आखिर वो खुद को समझती क्या है , वो मेरी फीलिंग्स से ऐसे कैसे खेल सकती है ? मैंने उसके लिए इतना सब किया और वो अब भी उस पृथ्वी उपाध्याय के सपने देख रही है। क्या उसे मेरा प्यार दिखाई नहीं देता ? वो आखिर इतनी सेल्फिश कैसे हो सकती है ? एक शादीशुदा मर्द को हासिल करने के लिए वो इतना गिर गयी कि उसे मेरा प्यार मेरी फीलिंग्स भी नजर नहीं आयी,,,,,,,,,,,,,!!!”
प्राची को लेकर विक्रम की आँखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। उसकी आवाज गुस्से से काँप रही थी और चेहरा लाल हो चुका था। विक्रम आकर बिस्तर पर बैठ गया , सामने शीशे में उसे अपना अक्स दिखाई दिया और उसने गुस्से से अपने दाँत पीसते हुए कहा,”जिस पृथ्वी के लिए तुमने मुझे ठुकराया है उसे मैं बर्बाद कर दूंगा प्राची और उसके बाद तुम्हे , याद रखना मुझसे खेलना तुम्हे बहुत महंगा पड़ने वाला है”
( सुरभि और सिद्धार्थ की जिंदगी में आने वाली है खुशिया या लग जायेगा उनकी खुशियों पर फिर कोई ग्रहण ? क्या सच में नीलेश है भरत की इस हालत का जिम्मेदार ? प्राची की वजह से क्या विक्रम पहुंचाने वाला है पृथ्वी को नुकसान ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Aery wha Surbhi k parents to bahot cool nikle…sach m Siddarth ki tarah mujhe bhi umeed nhi thi ki Surbhi k parents itni jaldi maan jayenge… specially uske papa, wo to bahot Relax wale papa hai…sabke papa ko Surbhi k papa jaisa hona chahiye…aur bachcho ki khushi m he apni khushi dekhni chahiye…chalo Surbhi aur Siddarth ka to mamla fix ho gaya…ab iss Prachi ki akal kaise tikane lagaye aur iske chakkar m ab Vikram Prithvi ko barbad karne ki kasam kaa chuka hai…aur udhar Bhart… bhagwan Rakha kate Prithvi ki inn logo se