Pasandida Aurat Season 3 – 46

Pasandida Aurat Season 3 – 46

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

विक्रम ने जब सुना कि प्राची अभी भी पृथ्वी के लिए पागल है तो उसका दिल टूट गया ! उसे अहसास हुआ कि मिस्टर देसाई ने उसके और प्राची के रिश्ते के बारे में जो बात की है उसके बारे में प्राची को कुछ पता नहीं है शायद। विक्रम को खोया हुआ देखकर प्राची ने उसकी बांह को छुआ और कहा,”विक्रम , विक्रम , कहा खो गए ?”

विक्रम की तंद्रा टूटी , उसने उदास नजरो से सामने खड़ी प्राची को देखा तो प्राची ने कहा,”क्या हुआ , तुम खुश नहीं हो क्या ? यही तो हम दोनों चाहते थे ना विक्रम कि पृथ्वी खुद मेरे पास चला आये और वो चला आया,,,,,,,,,आज जब मैंने उसे देसाई ग्रुप में देखा तो मुझे तो अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ था , मैं उसे देखकर इतना खुश थी इतना खुश कि मैं तुम्हे बता नहीं सकती और ये सब तुम्हारी वजह से हुआ,,,,,,,,,,,,थैंक्यू सो मच”

विक्रम जानता था कि उसने कुछ नहीं किया फिर पृथ्वी का अचानक से देसाई ग्रुप ज्वाइन करना विक्रम को समझ नहीं आ रहा था। उसने सामने खड़ी प्राची को देखा और कहा,”लेकिन कल रात जो मैंने एयरपोर्ट पर देखा वो सब क्या था ?”

“ओह्ह्ह विक्रम ! तुमने देखा ना एयरपोर्ट पर उसके साथ वो अवनि थी , अब उसके सामने वो मेरे रोजेज कैसे एक्सेप्ट कर सकता था लेकिन आज डेड के ऑफिस आकर उसने ये प्रूव कर दिया कि वह भी मुझे पसंद करता है,,,,,,डेड ने आज ही मेरे शेयर्स मेरे लाइफ पार्टनर के नाम करने की बात कही थी और हो ना हो वो इंसान पृथ्वी ही है,,,,,,,,,,,,,ओह्ह्ह विक्रम आज तो मैं बहुत खुश हूँ,,,,,,,,,इसी बात पर क्यों ना एक एक ड्रिंक हो जाए ?”,प्राची ने ख़ुशी से चहककर कहा

विक्रम ने कोई जवाब नहीं दिया वह तो अभी तक प्राची की कही बातो में ही उलझा हुआ था। विक्रम को खोया देखकर प्राची ने कहा,”विक्रम , विक्रम”
“हाँ,,,,,,,,,,,!!!”,विक्रम ने कहा
“ड्रिंक ?”,प्राची ने पूछा
“हम्म्म्म,,,,,,,,!!!!”,विक्रम ने हामी में गर्दन हिलाकर कहा क्योकि इस वक्त उसे एक ड्रिंक की बहुत ज्यादा जरूरत थी ताकि वह प्राची की बातो को हजम कर सके
“मैं अभी लेकर आयी”,प्राची ने कहा और वहा से चली गयी

विक्रम ने अपनी शर्ट के बाजु फोल्ड किये और शर्ट के ऊपरी दो बटन भी खोल लिए। हलकी ठण्ड थी लेकिन सहसा ही उसे गर्मी लगने लगी , प्राची की बातो से विक्रम अंदर ही अंदर परेशान हो गया ! प्राची के साथ वक्त बिताते-बिताते विक्रम कब उसे पसंद करने लगा खुद ही नहीं समझ पाया और आज जब मिस्टर देसाई ने उसके और प्राची के रिश्ते की बात कही तो विक्रम मन ही मन ख़ुशी से फुला नहीं समाया लेकिन प्राची ने तो उसका दिल ही तोड़ दिया , वह अभी भी पृथ्वी को पाने के ख्वाब देख रही थी।

विक्रम अपनी ही सोच में डूबा रहा और कुछ देर बाद प्राची दो ड्रिंक लेकर उसके सामने चली आयी ! उसने एक गिलास  विक्रम की तरफ बढ़ाया और दूसरा खुद लेकर चियर्स करने लगी। विक्रम ने चियर्स किया और फीका सा मुस्कुरा दिया। ड्रिंक खत्म कर दोनों अंदर चले आये। मिस्टर देसाई के नौकर ने डायनिंग पर सबके लिए लजीज खाना लगा दिया और सब साथ बैठकर खाना खाने लगे।  सभी खाना खाते हुए बाते कर रहे थे बस विक्रम नजरे झुकाये बैठा था ! वह जल्द से जल्द यहाँ से निकलना चाहता था।

हैरानी की बात ये थी कि मिस्टर देसाई ने प्राची के सामने उसके और विक्रम के रिश्ते की कोई बात नहीं की , वही प्राची को खुश देखकर सबको लगा कि वह इस रिश्ते से खुश है।

खाना खाने के बाद सब हॉल में आ बैठे और फिर मिस्टर देसाई सबको छोड़ने बाहर चले गए। प्राची वही सोफे पर बैठी अपना फोन चलाती रही। उसने वही से सबको बाय बोल दिया। जाते जाते विक्रम ने पलटकर प्राची को देखा , उसकी मुस्कान आज विक्रम के सीने में चुभन का अहसास दे रही थी।
सबको भेजने के बाद मिस्टर देसाई मुस्कुराते हुए अंदर आये और प्राची की तरफ आकर कहा,”प्राची ! तुम्हे उन्हें बाहर तक छोड़ने आना चाहिए था”

“डेड ! वो आपके बिजनेस पार्टनर है , मुझे उन्हें बाहर छोड़ने आने की क्या जरूरत है ?”,प्राची ने अपने फ़ोन मे नजरे गड़ाए हुए कहा
“वो सिर्फ मेरे बिजनेस पार्टनर ही नहीं है प्राची बल्कि जल्दी ही तुम उनकी फॅमिली का हिस्सा बनने वाली हो”,मिस्टर देसाई ने मुस्कुरा कर कहा
प्राची ने सुना तो हैरानी से मिस्टर देसाई की तरफ देखा और कहा,”क्या मतलब डेड ?”

“ओह्ह्ह्ह प्राची ! तुम कब बड़ी होगी ? आज मैंने मिस्टर कपूर को डिनर पर तुम्हारे और विक्रम के रिश्ते के लिए बुलाया था। तुम उन्हें बहुत पसंद आयी वो तुम्हे अपने घर की बहू बनाना चाहते है,,,,,,,,,,,,,,,मैं सोच रहा हूँ अगले महीने एक छोटी सी रिंग सेरेमनी कर ली जाए , तुम क्या कहती हो ?”,मिस्टर देसाई ने कहा , ख़ुशी उनकी आँखों से साफ़ झलक रही थी  

प्राची ने जैसे ही सुना उसे एक धक्का लगा , उसने अपने फोन साइड में रखा और सोफे से उठकर कहा,”ये आप क्या कह रहे है डेड ? आपने मुझसे पूछा भी नहीं और विक्रम से मेरा रिश्ता फिक्स कर दिया,,,,,,,,,मुझे ये शादी नहीं करनी डेड”
“इसमें पूछना क्या है प्राची ? बहुत कम दिनों में तुम विक्रम से इतना क्लोज हो गयी हो , दिनभर उसके साथ घूमती रहती हो मुझे लगा तुम दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे हो,,,,,,,,,,,,!!!!”,मिस्टर देसाई ने कहा

“ओह्ह्ह कम ऑन डेड ! साथ घूमने का मतलब डेट करना नहीं होता और विक्रम भी मेरे बारे में ऐसा कुछ नहीं सोचता,,,,,,,,,,,,,,,हम दोनों साथ इसलिए घूमते है क्योकि,,,,,,,,,,,,,,क्योकि मुझे उसके साथ अच्छी कम्पनी मिल जाती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम एक दूसरे से शादी कर ले”,प्राची ने गुस्से से कहा
“अगर ऐसी बात है तो फिर विक्रम ने उस वक्त मना क्यों नहीं किया जब उसके सामने मैं और मिस्टर कपूर तुम दोनों के रिश्ते की बात कर रहे थे ?”,मिस्टर देसाई ने भी थोड़ा गुस्से से कहा

“व्हाट ? क्या विक्रम वहा मौजूद था और उसने ये सब मुझे क्यों नहीं बताया ?”,प्राची ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“प्राची हो सकता है वो तुम्हे पसंद करता हो और तुम्हारे साथ जिंदगी बिताना चाहता हो,,,,,,,,,,,,,,तुम्हे एक बार ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए”,मिस्टर देसाई ने प्राची को समझाते हुए कहा
“नो डेड ! मुझे कुछ भी सोचने की जरूरत नहीं है , मैं पृथ्वी को चाहती हूँ और यही सच है”,प्राची ने गुस्से से कहा

प्राची के मुँह से पृथ्वी का नाम सुनकर मिस्टर देसाई की आँखे गुस्से से लाल हो गयी , उन्होंने आगे बढ़कर प्राची की बांह पकड़ी और उसकी आँखों में देखकर गुस्से से कहा,”तुम्हारे सर से ये पागलपन अभी उतरा नहीं प्राची ? पृथ्वी शादीशुदा है वो तुम्हारा कभी नहीं हो सकता,,,,,,,भूल जाओ उसे”

“मैं उसे नहीं भूल सकती डेड लेकिन हाँ मैं ये जरूर भूल सकती हूँ कि आपने मिस्टर कपूर से कोई वादा भी किया है,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए प्राची ने अपनी बाँह छुड़ाई और वहा से चली गयी
“प्राची , प्राची , प्राची तुम जो कर रही हो वो सही नहीं है , प्राची”,मिस्टर देसाई ने गुस्से से कहा लेकिन प्राची ने पलटकर नहीं देखा और वहा से चली गयी ! मिस्टर देसाई गुस्से से प्राची को देखते रह गए।

रात के खाने के बाद अवनि और पृथ्वी अपने सामान के साथ अपने अपार्टमेंट चले आये। अंदर जाते हुए नकुल उन्हें दरवाजे पर ही मिल गया !
“नमस्ते भाभी,,,,,,,,,!!!”,नकुल ने अवनि से कहा तो जवाब में अवनि ने भी मुस्कुराकर नमस्ते कहा
“तुम इस वक्त यहाँ क्या कर रहे हो , क्या तुम्हे कोई काम नहीं है ?”,पृथ्वी ने कहा

“अह्ह्ह्ह ! अब मेरी तुम्हारी तरह शादी नहीं हुई है ना तो कौनसा घर पर कोई मेरा इन्तजार करने वाली होगी,,,,,,,,,,,,लेकिन तुम मुझे ये बताओ कि तुम इस वक्त कहा से आ रहे हो ? तुम्हरी फ्लाइट तो कल शाम की थी ना ?”,नकुल ने कहा
“मैं कल शाम ही मुंबई आ गया था , एयरपोर्ट से सीधा बाबा के घर चला गया। दादी को आज सुबह निकलना था इसलिए रात में वही रुक गया और फिर सुबह वही से ऑफिस चला गया,,,,,,,,,,,,!!!!”,पृथ्वी ने कहा

“ऑफिस ? लेकिन तुमने तो मुझे बताया था कि तुम्हारी नौकरी,,,,,,,,,,,,,,!!!!”,नकुल ने इतना ही कहा कि पृथ्वी ने उसकी बात बीच में ही काटकर कहा,”मेरी नौकरी बहुत अच्छी चल रही है,,,,,,,,,,और अगर तुम डिस्टर्ब नहीं करोगे तो शादीशुदा जिंदगी भी बहुत अच्छी चलेगी,,,,,,,,,,,,,साइड हटो”
नकुल की आधी अधूरी बात सुनकर अवनि के चेहरे पर परेशानी के भाव उभरे ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”चले अवनि”
“हम्म्म,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी

“तुम भी घर जाओ रात बहुत हो गयी है”,पृथ्वी ने नकुल की तरफ पलटकर कहा
“हाँ ! अच्छा सुनो मैं यहाँ इसलिए आया था क्योकि मुझे तुम्हे बताना था , इस संडे सोसायटी में मैच है और टीम के कैप्टन तुम हो इसलिए मिस मत करना प्लीज”,नकुल ने कहा
“ये बात तुम मुझे फोन पर भी बता सकते थे”,पृथ्वी ने नकुल को घूरकर कहा

“हाह ! तुम आजकल मेरा फोन उठाते ही कहा हो ? मैं जाता हूँ बाय गुड नाईट , गुड नाईट भाभी,,,,,,,,,,,,!!!”,नकुल ने कहा और वहा से चला गया
पृथ्वी अवनि के साथ लिफ्ट में चला आया और अपने फ्लोर का बटन दबा दिया।

दोनों अपने फ्लेट में आये। अवनि ने लाइट चालू की पृथ्वी ने नजर भरकर अपने घर को देखा और एक गहरी साँस लेकर कहा,”अपने घर में लौटकर आना कितना सुकूनभरा होता है ना अवनि”
अवनि पृथ्वी के सामने आयी और कहा,”पृथ्वी ! नकुल जी आपकी नौकरी के बारे में क्या कह रहे थे ?”
अवनि के मुँह से नौकरी का नाम सुनकर पृथ्वी मन ही मन उलझन में पड़ गया ! जिन हालातो से वह गुजर रहा था उस बारे में अवनि को बताना उसे ठीक नहीं  लग रहा था !

अगर वह अवनि को मौर्या ग्रुप छोड़ने के बारे में बताये तो अवनि परेशान हो जाएगी और अगर वह ये कहे कि मौर्या ग्रुप छोड़कर उसने मिस्टर देसाई की कम्पनी ज्वाइन कर ली है तो प्राची देसाई के बारे में सोचकर अवनि और ज्यादा परेशान हो जाएगी,,,,,,,,,,,,,,,बेशक अवनि एक समझदार और शांत स्वाभाव की लड़की है लेकिन पत्नी तो आखिर पत्नी होती है। एक पत्नी अपने पति का साया तक दूसरी औरत पर नहीं पड़ने देना चाहती और फिर अवनि तो प्राची की नियत और इरादे दोनों जानती थी।

पृथ्वी को सोच में डूबा देखकर अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! पृथ्वी ! आप ठीक तो है ना ?”
पृथ्वी मुस्कुराया और अवनि के चेहरे को अपने हाथो में लेकर प्यार से कहा,”नकुल गधा है। कुछ भी बोलता है तुम उसकी बात पर ध्यान मत दो,,,,,,,,,,,,,तुम चेंज कर लो मैं नहाकर आता हूँ,,,,,,,,,,,,,!!!”
“आप इस वक्त नहाएंगे”,अवनि ने पूछा
“हाँ दिनभर ऑफिस और बाहर घूमने की वजह से थोड़ा थक गया हूँ , सोच रहा हूँ एक गर्म शॉवर ले लू”,पृथ्वी ने कहा

“ठीक है आप नहा लीजिये मैं आपके लिए दूध गर्म कर देती हूँ , उस से आपकी थकान दूर हो जाएगी और नींद भी अच्छी आएगी”,अवनि ने कहा और जाने के लिये पलटी तो पृथ्वी ने उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ किया और कहा,”हाह ! तुम चाहती हो मैं जल्दी सो जाऊ,,,,,,,,,,,,!!”
“जागकर क्या करेंगे आप ?”,अवनि ने कहा

“अरे ! मैं जागकर तुमसे प्यार भी तो कर सकता हूँ”,पृथ्वी ने बच्चो की तरह कुनमुनाते हुए कहा
अवनि पृथ्वी के करीब आयी और उसका गाल थपथपाकर कहा,”डियर हस्बेंड ! हनीमून पीरियड खत्म हो चुका है , अब आप गोआ में नहीं है अपने घर में है”
“हुंह ! तुम बहुत पत्थरदिल हो”,पृथ्वी ने मुँह बनाकर कहा और नहाने चला गया
“थैंक्यू,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा और फिर खुद भी कपडे बदलने कमरे में चली गयी।

देर रात सिद्धार्थ की गाडी सोसायटी की गली में आकर रुकी। चारो तरफ अन्धेरा था बस स्ट्रीट लाइट जल रही थी। सिद्धार्थ के बगल वाली सीट पर बैठी सुरभि बेपरवाह सो रही थी। बालों की कुछ लटें हवा की वजह से उसके गाल पर झूल रही थी। सिद्धार्थ ने अपना सीट बेल्ट हटाया और सुरभि की तरफ देखा। सोइ हुई सुरभि कितनी शांत और मासूम लग रही थी। ना उसके चेहरे पर गुस्से के भाव थे ना ही कोई शिकायत , सिद्धार्थ सुरभि की तरफ झुका और उसके गाल पर आये बालों को आहिस्ता से साइड कर दिया।

सिद्धार्थ वापस अपनी सीट पर आया और सुरभि की तरफ देखते हुए मन ही मन खुद से कहने लगा,”तुमसे हुई पहली मुलाकात के बाद मैंने कभी सोचा नहीं था कि हम एक दूसरे के इतना करीब आ जायेंगे,,,,,,,,,हाँ ये सच है पहली मुलाकात से ही हम दोनों एक दूसरे को पसंद नहीं करते है लेकिन धीरे धीरे हमारे झगडे , हमारे गुस्से और हमारी नफरत ने ही हमे एक दूसरे के करीब ला दिया ! अवनि तुम्हारी दोस्त है और मैंने उसके साथ जो किया उसका मलाल मुझे जिंदगीभर रहेगा लेकिन उस वक्त मैं नहीं समझ पाया कि असल में प्यार होता क्या है ?

ये मैंने तुम्हारे साथ रहकर सीखा , भले हमारी ज्यादा बाते नहीं हुई , कपल्स की तरह हम साथ नहीं घूमे , मैंने कभी तुम्हे प्रपोज नहीं किया लेकिन तुम्हे लेकर एक स्ट्रांग फीलिंग हमेशा से रही मेरे मन में और जब मैंने लगभग खो दिया था तब मुझे ये अहसास हुआ कि मुझे तुमसे कितना प्यार है,,,,,,,,,,,,,,,,तुम नहीं जानती सुरभि तुम्हारे अचानक चले जाने से मैं कितना घबरा गया था , कितनी ही बार तुम्हे फोन किया , तुमसे मिलने तुम्हारे फ्लेट गया,,,,,,,,,,,

मुझे तो ये तक लगने लगा था कि तुम मुझे हमेशा हमेशा के लिए छोड़कर चली गयी हो और जब आज सुबह मैंने तुम्हे दरवाजे पर देखा तो दिल किया आगे बढ़कर तुम्हे सीने से लगा लू और पुछु तुमसे कि तुम क्यों चली गयी लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हुई,,,,,,,,मैंने तुमसे कभी नहीं कहा सुरभि लेकिन ये सच है मैं तुम से प्यार करने लगा हूँ , तुम्हे चाहने लगा और मुझे तुम्हारी जरूरत है”

“मुझे तुम्हारी जरूरत है” ये शब्द मन के साथ साथ सिद्धार्थ के होंठो से भी निकले तो सुरभि नींद में बड़बड़ाई,”हाँ जानती हूँ”
सुरभि की आवाज से सिद्धार्थ की तन्द्रा टूटी उसने देखा सुरभि जाग चुकी है और खोयी हुई सी उसे ही देख रही है तो सिद्धार्थ ने हड़बड़ाकर कहा,”क्या तुमने सब सुन लिया ?”
सुरभि नींद से जगी , अंगड़ाई ली और उबासी लेकर कहा,”नहीं मैंने बस सुना ‘मुझे तुम्हारी जरूरत है’ तुम ऐसा क्यों कह रहे थे ? क्या कोई तुम्हे छोड़कर जा रहा है ?”

सिद्धार्थ ने सुना तो उसके मन में एक टीस उठी और गले में अजीब सा दर्द होना लगा ! वह चाहकर भी सुरभि से अपने मन की बात नहीं कह पा रहा।  वह उदास आँखों से बस सुरभि को देखता रहा तो सुरभि ने कहा,”मुझे ऐसे देखना बंद करो”
सिद्धार्थ ने अपनी नजरे हटा ली और गाड़ी का दरवाजा खोलकर नीचे उतर गया। सुरभि भी सिद्धार्थ के साथ नीचे उतर गयी। अँधेरे में उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह कहा है ?
“ये तुम मुझे कहा लेकर आये हो ?”,सुरभि ने पूछा

सिद्धार्थ ने कुछ नहीं कहा बस सुरभि की कलाई पकड़ी और उसे लेकर सामने बने घर की तरफ बढ़ गया ! जैसे जैसे सुरभि आगे बढ़ी उसने देखा ये तो उसका  अपना घर है , यानि वह उदयपुर में है। सुरभि के गले से कोई आवाज नहीं निकली वह हैरानी से सिद्धार्थ को देखने लगी। सिद्धार्थ सुरभि को लेकर घर के दरवाजे पर आया और डोरबेल बजा दी। सुरभि सिद्धार्थ से बहुत कुछ पूछना चाहती थी लेकिन उसने महसूस किया जैसे आवाज उसके गले में ही अटक गयी है।
कुछ देर बाद दरवाजा खुला और सामने सुरभि के पापा खड़े थे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!

( क्या प्राची कर देगी मना विक्रम और अपने रिश्ते से और क्या विक्रम सह पायेगा ये अपमान ? क्या अवनि से अपनी परेशानिया छुपाकर पृथ्वी सही कर रहा है या आगे होगा उसे बड़ा नुकसान ? आखिर सुरभि को उसके घर वापस क्यों ले आया सिद्धार्थ ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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