Pasandida Aurat Season 3 – 40

Pasandida Aurat Season 3 – 40

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

देसाई मेंशन्स , मुंबई

मिस्टर देसाई सुबह सुबह तैयार होकर हॉल में चले आये आज ऑफिस में उनकी जरुरी मीटिंग थी और वे किसी भी कीमत पर देर से पहुंचना नहीं चाहते थे। उन्होंने हाथ में पकड़ा बैग और फाइल ड्राइवर को पकड़ाए और खुद डायनिंग टेबल पर आ बैठे। नौकर उनके लिए टेबल पर नाश्ता लगाने लगा। मिस्टर देसाई ने देखा प्राची अभी तक नीचे नहीं आयी है तो उन्होंने नौकर से प्राची को बुलाकर लाने को कहा और खुद नाश्ता करने लगे।

कुछ देर बाद अपनी कलाई पर घडी बांधते हुए प्राची नीचे आयी और कुर्सी खिसकाकर मिस्टर देसाई के सामने बैठते हुए कहा,”डेड ! आपने इतनी सुबह सुबह मुझे तैयार होने को क्यों कहा , क्या हम कही बाहर जा रहे है ?”
“देसाई ग्रुप एंड कम्पनी आज एक बहुत बड़ा फैसला करने जा रही है इसलिए तुम्हारा वहा होना बहुत जरुरी है। आई नो कि तुम अब वहा काम करना नहीं चाहती लेकिन मेरी इकलौती वारिस होने के नाते तुम्हे कम्पनी के हर छोटे बड़े फैसले की खबर होनी जरुरी है ! आखिर मेरे बाद तुम्हे ही तो इस बिजनेस को बनाये रखना है।”,मिस्टर देसाई ने नाश्ता करते हुए बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा

प्राची ने सुना तो खमोशी से मिस्टर देसाई के चेहरे की तरफ देखने लगी , आज उनके चेहरे पर एक पिता वाले नहीं बल्कि किसी कम्पनी के सीनियर बॉस वाले भाव थे। प्राची पृथ्वी के पीछे ऐसी पागल हुई कि उसने मिस्टर देसाई की कम्पनी को भी ठोकर मार दी या यू कहे प्राची की मनमानियों के चलते मिस्टर देसाई ने खुद उसे अपनी कम्पनी से दूर कर दिया था लेकिन आज वे खुद चाहते थे कि प्राची कम्पनी के बड़े फैसले के समय वहा मौजूद हो।
“तुम आ रही हो ना ?”,प्राची को खामोश पाकर मिस्टर देसाई ने कहा

“मैं आपके साथ ही चलूंगी डेड ! रास्ते में इस नयी डील पर बात करने का मौका भी मिल जाएगा”,प्राची ने सधे हुए स्वर में कहा
“गुड ! मैंने नाश्ता कर लिया है , तुम नाश्ता करके बाहर आ जाना मैं गाड़ी में तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ”,मिस्टर देसाई ने अपनी ख़ाली प्लेट आगे खिसकाकर कहा और उठकर हाथ धोने चले गए

प्राची ने खाना जारी रखा , अगले ही पल उसका फोन वाइब्रेट हुआ। प्राची ने जल्दी से अपना फ़ोन उठाकर देखा लेकिन स्क्रीन पर स्पैम मेसेज देखकर वह मायूस हो गयी ! उसे लगा मैसेज शायद विक्रम का होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ , बीती रात प्राची ने विक्रम के साथ जो किया वह विक्रम को पसंद नहीं आया , उसके बाद प्राची ने विक्रम को कितने फोन और मैसेज किये लेकिन विक्रम ने एक का भी जवाब नहीं दिया।

बचा हुआ नाश्ता प्राची ने बेमन से किया और उठकर हाथ धोने चली गयी ! उसने अपना बैग लिया और घर से बाहर चली आयी , मिस्टर देसाई बाहर गाड़ी के पास खड़े फोन पर किसी से बात कर रहे थे। प्राची ने अपना मूड सही किया एक झूठी मुस्कान होंठो पर चिपकाई और मिस्टर देसाई की तरफ कदम बढ़ा दिए। सामने से आते विक्रम पर सहसा ही प्राची की नजर पड़ी तो प्राची ठिठकी और साथ ही उसके होंठो पर बड़ी सी मुस्कान तैर गयी ! विक्रम प्राची के सामने आ खड़ा हुआ तो प्राची ने मुस्कुराकर कहा,”मैं जानती थी तुम मुझसे मिलने जरूर आओगे”

विक्रम ने कुछ नहीं कहा उसने बस अपनी जेब से एक क्रेडिट कार्ड निकाला और प्राची की तरफ बढाकर कहा,”मैं यहाँ तुम्हें बस ये लौटाने आया था”
प्राची ने सुना तो मुस्कुराहट उसके होंठो से गायब हो गयी , उसने विक्रम के हाथ से कार्ड लिया और धीरे से कहा,”विक्रम कल रात वो,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
प्राची अपनी बात पूरी करती इस से पहले विक्रम जाने के लिए पलट गया और जैसे ही दो कदम बढ़ाये मिस्टर देसाई ने उसकी तरफ आकर कहा,”अरे विक्रम ! सुबह सुबह तुम यहाँ ?”

“प्राची का क्रेडिट कार्ड लौटाने आया था , कल रात शायद गलती से मेरी गाडी में गिर गया था”,विक्रम ने सधे हुए स्वर में कहा
“तो क्या कल रात प्राची तुम्हारे साथ थी ?”,मिस्टर देसाई ने हैरानी भरे स्वर में पूछा
विक्रम ने गर्दन घुमाकर एक नजर प्राची को देखा और मिस्टर देसाई से कहा,”हाँ लेकिन किसी और लिए,,,,,,,,,,दरअसल वो मेरे साथ होकर भी मेरे साथ नहीं थी,,,,,,,,!!!!”
प्राची ने सुना तो उसका सर झुक गया और मिस्टर देसाई विक्रम की बात समझ पाते इस से पहले विक्रम वहा से चला गया।

मिस्टर देसाई प्राची के पास आया और कहा,”उसके कहने का क्या मतलब था ?”
“छोड़िये डेड ! चलिए चलते है”,प्राची ने गाडी की तरफ बढ़ते हुए कहा और दरवाजा खोलकर गाडी में आ बैठी ! मिस्टर देसाई भी दूसरी तरफ का दरवाजा खोलकर प्राची के बगल में आ बैठे और ड्राइवर ने गाडी आगे बढ़ा दी।  

सिद्धार्थ का घर , सिरोही
रातभर सिद्धार्थ सुरभि के बारे में सोचकर परेशान रहा। उसकी नाईट शिफ्ट थी इसलिए उसे रातभर जागकर काम करना पड़ा। सुबह तीन बजे जाकर उसने लोग आउट किया और सोने चला गया। सुबह 7 बजे सिद्धार्थ उठा और उबासी लेते हुए कमरे से बाहर आया तो देखा जगदीश जी उठ चुके है और नहाकर अपनी पूजा पाठ करके हॉल में बैठे अखबार पढ़ रहे है। गिरिजा जी भी उठ चुकी थी , उनके पैर का दर्द अब काफी ठीक था इसलिए वे भी हॉल में सोफे पर बैठी थी। आराम के लिए उन्होंने अपना फ्रेक्चर पैर टेबल पर रखा हुआ था।

सिद्धार्थ उनके पास आया और फिर घडी देखकर कहा,”आज मुझे उठने में देर हो गयी , मैं आप लोगो के लिए चाय बना देता हूँ”
“आज सुबह की चाय तेरे पापा ने बनाकर पिला दी थी बेटा , तू हाथ मुँह धो ले फ्रेश हो जा,,,,,,,,,,,,,,,,,ताजा दूध आ जाये उसके बाद बनाना”,गिरिजा जी ने कहा
सिद्धार्थ उठा और जाने लगा तभी डोरबेल बजी। दूधवाला होगा सोचकर सिद्धार्थ ने किचन से बर्तन लिया और दूध लेने चला गया। सिद्धार्थ ने दरवाजा खोला और सामने देखे बिना ही बर्तन आगे करके कहा,”2 किलो”

“2 किलो क्यों 5 किलों दे देती हूँ , मैंने अपने घर में भैंस जो बाँध रखी है”,सामने खड़ी सुरभि ने गुस्से से कहा
सुरभि की आवाज सुनकर सिद्धार्थ ने सामने देखा तो उसका मुँह खुला का खुला रह गया और पतीला उसके हाथ से छूटकर नीचे जा गिरा , सुरभि को गुस्से में देखकर उसके प्राण तो पहले ही सूख गए और जैसे ही उसने अपनी गर्दन साइड में घुमाई उसकी नजर अपने घर की दिवार के पास खड़ी पड़ोसन पर पड़ी जो एक बार फिर सिद्धार्थ और सुरभि को साथ देख चुकी थी !

सिद्धार्थ ने रोआँसा होकर अपनी ऊँगली अपने होंठो पर रखी और पड़ोसन से चुप रहने का इशारा किया लेकिन बेचारा उस तूफ़ान को चुप कैसे करेगा जो उसके सामने खड़ा है   

मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी , नवी मुंबई
नीलेश की बातों का जयदीप पर ऐसा असर हुआ कि आज वह पहली बार ऑफिस में सबसे पहले पहुंचा और इस बात की उसे इतनी ख़ुशी थी कि मुस्कराहट उसके होंठो से जाने का नाम नहीं ले रही थी हालाँकि केंटीन और सफाई वाले आ चुके थे। जयदीप ने केंटीन वाले से केबिन में एक कॉफी भिजवाने को कहा और खुद अपने केबिन की तरफ बढ़ गया ! केबिन  की तरफ जाते हुए जयदीप की नजर पृथ्वी के केबिन की तरफ चली गयी जिसका दरवाजा खुला था ये देखकर जयदीप पृथ्वी के केबिन की तरफ चला आया।

अंदर आकर जयदीप ने जब नीलेश को वहा बैठे काम करते देखा तो हैरान हुआ और कहा,”अरे नीलेश ! तुम कब आये ?”
“मैं गया ही कब था ?”,नीलेश ने लेपटॉप के कीबोर्ड पर उंगलिया चलाते हुए कहा
“मतलब ! तुम रातभर यही थे ?”,जयदीप ने और ज्यादा हैरानी भरे स्वर में कहा
नीलेश कुछ जरुरी काम कर रहा था इसलिए हाथ से बाँयी तरफ इशारा कर दिया।

जयदीप ने देखा वहा दर्जनों खाली कप रखे थे। जयदीप को उसके सवाल का जवाब तो मिल चुका था लेकिन अभी उसके दिमाग में एक सवाल और चल रहा था जिसे आख़िरकार उसने पूछ ही लिया
“लेकिन तुम कर क्या रहे हो ?”,जयदीप ने पूछा
“तैयारी”,नीलेश की नजरे इस बार भी लेपटॉप की स्क्रीन पर थी और उसकी उंगलिया लगातार कीबोर्ड पर चल रही थी।

“तैयारी ! कैसी तैयारी ?”,जयदीप ने पूछा
“बर्बादी की”,नीलेश ने फिर एक-डेढ़ शब्द का जवाब दिया जिसे सुनकर जयदीप खिजा और कहा,”किसकी बर्बादी ?”
ये सुनकर नीलेश की उंगलिया कीबोर्ड पर रुक गयी , नजरे जो लेपटॉप की स्क्रीन पर थी उनकी पलकें झपकी उसने एक नजर जयदीप को देखा और विश्वास से भरकर कठोर स्वर में कहा,”भरत देशमुख”

नीलेश के मुँह से भरत का नाम सुनकर जयदीप के चेहरे का रंग उड़ गया। उसके पैरों में हल्का कम्पन्न हुआ और उसने कांपते स्वर में कहा,”आखिर क्यों ?”
नीलेश उठा और जयदीप के सामने आकर उसकी आँखों में देखकर कहा,”क्योकि मैं भरत देशमुख का वो बेटा हूँ जो उसके सारे काले कारनामो के बारे में जानता है”

जयदीप ने जैसे ही सुना नीलेश भरत का बेटा है उसके पैरों तले जमीन खिसक गयी , उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा। पिछले दो दिन से उसके ऑफिस में  था वह कोई और नहीं बल्कि भरत का बेटा था , उस भरत का जिसकी पृथ्वी से दुश्मनी थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
जयदीप का सर चकराया तभी ऑफिस बॉय उसकी कॉफी वही ले आया और कहा,”सर ! आपकी कॉफी , आपके केबिन गया था लेकिन आप वहा नहीं थे तो यहाँ ले आया”

“तुम पी लो”,जयदीप ने बदहवास हालत में कहा
“क्या ?”,वार्ड बॉय ने चौंककर कहा
“मैंने कहा तुम पी लो,,,,,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने थोड़ा ऊँचे स्वर में कहा तो वार्ड बॉय घबरा गया , नीलेश ने जयदीप को परेशान देखकर वार्ड बॉय से वहा से जाने का इशारा किया और जयदीप से कहा,”सर रिलेक्स”

जयदीप ने गले में पड़ी टाई को ढीला करके घबराहटभरे स्वर में कहा,”रिलेक्स ? तुमने और पृथ्वी ने मिलकर ये ऑफिस बंद करवाने की सोच ली है क्या ? जानते भी हो तुम लोग किस से पंगा ले रहे हो ? अरे वो भरत है , भरत देशमुख , उसकी पहुँच ऊपर तक है। ये तुम लोगो ने ठीक नहीं किया”
“सर ! आप खामखा उनसे डर है , आज के बाद वो सबसे डरेंगे”,नीलेश ने विश्वास से भरकर कहा और जयदीप का कंधा थपथपाकर वहा से चला गया।

रवि जा का घर , पनवेल
दादी और सबके कहने पर अवनि और पृथ्वी रात में रवि जी के घर पर ही रुक गए। सुबह 7 बजे दादी की फ्लाइट थी इसलिए सभी घरवाले सुबह सुबह रवि जी के घर आ धमके। सबने वही चाय नाश्ता किया और फिर चाचा , रवि जी और हिमांशु दादी को एयरपोर्ट छोड़ने चले गए। पृथ्वी जाना चाहता था थके होने की वजह से लता ने उसे रोक दिया। दादी के जाने के बाद बाकि घरवाले भी चले गए बस नीलम भुआ रुक गयी ताकि अवनि से हाल चाल पूछ सके और उस से कुछ बाते कर सके।

9 बजे पृथ्वी सोकर उठा और कमरे से बाहर आया तो लता ने कहा,” पृथ्वी ! जाओ जाकर नहा लो मैं नाश्ता लगा देती हूँ”
पृथ्वी को याद आया कि अवनि से ही नहीं बल्कि उसने घरवालों से भी अपनी नौकरी छोड़ने की बात छुपाई है और अब उसे ऑफिस जाने का दिखावा करना होगा या फिर सबको सच बताना होगा लेकिन पृथ्वी के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। लता की बात सुनकर वह नहाने चला गया , तैयार हुआ और बाहर चला आया।

नाश्ता करने के बाद पृथ्वी ने अपना फोन और रुमाल जेब में रखा और लता की तरफ आकर कहा,”आई मैं चलता हूँ,,,,,जाते हुए अवनि को फ्लेट छोड़ दूंगा फिर वही से ऑफिस चला जाऊंगा”
“अवनि को फ्लैट क्यों छोड़ दोगे ? वो यहाँ हमारे साथ भी रह सकती है। शाम में आते हुए ले जाना अपने साथ तब तक अवनि यही रहेगी”,नीलम भुआ ने कहा
“आप सही कह रही है , पृथ्वी तू जा तेरी अवनि का ख्याल रखने के लिए यहाँ हम सब है”,लता ने कहा

“लेकिन आई,,,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“लेकिन क्या ? क्या अवनि हमारी कुछ नहीं लगती और वैसे भी वो अब इस घर की बहू है , सास होने के नाते मैं भी तो उस से कुछ सेवा करवाऊ”,लता ने कहा
अवनि अंदर कमरे में थी , पृथ्वी ने जो कपडे फैलाये थे उन्हें समेटकर रख रही थी उसे पृथ्वी , नीलम भुआ और लता के बीच हो रही बातचीत की कोई खबर नहीं थी।

“हाँ वहिनी ! क्यों ना आज खाने में अवनि से भरवा करेले बनवाये जाए”,नीलम भुआ ने आँखों में चमक भरकर कहा
“ए भुआ ! खबरदार जो मेरी बायको को परेशान किया तो,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने नीलम भुआ को झूठ मुठ का गुस्सा दिखाकर कहा
नीलम भुआ ने पृथ्वी का कान पकड़ा और उसे घर के दरवाजे की तरफ करके कहा,”हाँ ! बड़ा आया बायको का नवरा , हम उसे परेशान भी करेंगे और सास होने का रौब भी जमाएंगे,,,,,,,,,,,चल जा”

“जाता हूँ,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा और बाहर जाने के बजाय उस कमरे की तरफ बढ़ गया जिसमे अवनि थी।
पृथ्वी को देखकर अवनि ने हाथ में पकडे शर्ट को साइड रखा और उसके पास आकर कहा,”आप कही जा रहे है ?”
“हाँ ऑफिस जा रहा हूँ ! ज्यादा काम नहीं है तो जल्दी ही आ जाऊंगा”,पृथ्वी ने दिल पर पत्थर रखकर कहा  
“कोई बात नहीं ध्यान से जाईये”,अवनि ने मुस्कुराकर कहा

“अवनि ! आई चाहती है कि तुम आज आज यही रहो , शाम को ऑफिस से आने के बाद मैं तुम्हे लेकर चला जाऊंगा , तुम्हे चलेगा ना ?”,पृथ्वी ने झिझकते हुए पूछा
“पृथ्वी ! अब ये सब हमारा परिवार है , मैं इनके साथ रहू चाहे वहा रहू एक ही बात है। आप आराम से जाईये मैं यहाँ खुश हूँ,,,,,,,,,,,,!!!!”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने अवनि के सर पर हाथ रखा , उसे अपनी तरफ किया और उसका सर अपने सीने से लगाकर कहा,”तुम कितनी अच्छी हो यार अवनि,,,,,,,,!!!”

“हाँ वो तो मैं हूँ”,अवनि ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा
पृथ्वी ने अवनि का सर अपने सीने से लगाए रखा और कहा,”अच्छा अवनि ! एक बात बताओ , अगर तुम्हे कभी पता चले मैंने तुमसे कुछ छुपाया है या तुमसे कोई छोटा सा झूठ बोला है तो तुम्हे कैसा लगेगा ?”
अवनि ने पृथ्वी के सीने से अपना सर हटाया और उसकी आँखों में देखकर कहा,”मैं जानती हूँ आप मुझसे कभी कुछ नहीं छुपाते और झूठ बोलना तो बहुत दूर की बात है लेकिन हाँ फिर भी अगर आपने ऐसा किया है तो जरूर इसके पीछे कोई वजह होगी और मैं इंतजार करुँगी कि आप खुद मुझे इसके बारे में बताये”

“तुम्हे मुझ पर गुस्सा नहीं आएगा ?”,पृथ्वी ने हैरानी से पूछा
अपनी ने अपनी बाँहो को पृथ्वी के गले में डाला और उसके करीब आकर कहा,”मुझे बस अब आप पर प्यार आता है गुस्सा नहीं”
अवनि सामने से ऐसी बाते करे और पृथ्वी काबू में रहे ये तो नहीं हो सकता उसने अपनी बाँहो को अवनि की कमर से लपेटा और उसे अपने थोड़ा और करीब करके कहा,”ऐसी बाते करोगी तो फिर मैं ऑफिस नहीं जा पाऊंगा”

पृथ्वी ने कहते हुए जैसे ही अपने होंठो को अवनि की तरफ बढ़ाया लक्षित अचानक कमरे में चला आया और पृथ्वी अवनि को करीब देखकर जल्दी से अपनी आँखों में पर हाथ रखा और पलटकर कहा,”मैंने कुछ नहीं देखा”
लक्षित की आवाज सुनकर अवनि जल्दी से पृथ्वी से दूर हटी और पृथ्वी भी झेंप गया। वह लक्षित की तरफ आया और उसके सर पर चपत लगाकर कहा,”दरवाजा नॉक करके आना होता है इतनी भी समझ नहीं है तुम्हारे अंदर,,,,,,,,,,,,,!!!!”

“मेरी शादी नहीं हुई है तो मुझे कैसे पता होगा ?”,लक्षित ने अपना सर सहलाते हुए कहा और पृथ्वी के साथ कमरे से बाहर निकल गया।  दरवाजे से निकलते हुए पृथ्वी ने पीछे झुककर अवनि को देखा और हवा में एक चुम्मा उसकी तरफ उसकी तरफ उछाल दिया और अवनि हंस पड़ी।

 ( क्या विक्रम करेगा प्राची को माफ़ और देगा उसका साथ ? आखिर क्यों करना चाहता है नीलेश अपने ही पिता को बर्बाद ? क्या पृथ्वी बता पायेगा अवनि को अपनी परेशानियों के बारे में या अकेले ही सुलझा लेगा उन्हें ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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