Pasandida Aurat Season 3 – 35
Pasandida Aurat Season 3 – 35

शीशे के सामने खड़ी अवनि ने अपने कंधे पर साड़ी का पल्लू रखा और उसे पिन अप करने लगी। आज रात अवनि ने साड़ी पहनी थी ताकि वह पृथ्वी के साथ बॉर्नफायर के लिए रिसोर्ट के गार्डन में जा सके। पृथ्वी ने लाइट ब्लू जींस और उस पर सफ़ेद शर्ट पहन लिया। सफ़ेद रंग पृथ्वी पर हमेशा ही अच्छा लगता था। वह अपने शर्ट की बाजू फोल्ड करते हुए अवनि के पास आया तो देखा अवनि हाथ में सिंदूर की डिब्बी उठाये अपनी माँग भरने जा रही है तो पृथ्वी ने अवनि को अपनी तरफ किया और एक चुटकी सिंदूर उठाकर बड़े प्यार से अवनि की मांग में लगाकर कहा,”ये हक़ तुम मुझे दे सकती हो”
“सोच लीजिये मिस्टर उपाध्याय फिर जिंदगीभर ये करना पड़ेगा”,अवनि ने मुस्कुराकर कहा
पृथ्वी ने अपनी बाँहो को अवनि की कमर के चारो और लपेटा और उसे अपने करीब करके उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”मैं तैयार हूँ”
अवनि पृथ्वी की सब शरारत समझ रही थी फिर भी उसके अरमानो पर पानी फेरकर उसे पीछे किया और कहा,”जी नहीं ! आप बिल्कुल तैयार नहीं है , ऐसे बाहर जायेंगे”
“क्या खराबी है ? ठीक ही तो लग रहा हूँ”,पृथ्वी ने शीशे में देखकर अपने बालों में से हाथ घुमाकर कहा
अवनि ने पृथ्वी को बिस्तर पर बैठाया और रुकने का इशारा कर शीशे की तरफ चली आयी ! वहा रखा अपना मॉइस्चराइज़र उठाया और हथेली पर लेकर पृथ्वी की तरफ चली आयी। उसने टेप टेप करके पृथ्वी के चेहरे पर लगाया और प्यार से उसे ब्लेंड करने लगी। पृथ्वी ने ये सब कभी नहीं किया था लेकिन अवनि को ना भी नहीं बोल सकता था वह इतना प्यार से जो लगा रही थी। अवनि ने पृथ्वी के बाल बनाये , उसे लिप केयर लगाया और फिर उसकी बलाये लेकर कहा,”परफेक्ट,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया क्योकि ये करते हुए अवनि बिल्कुल छोटी बच्ची लग रही थी। वह उठा और शीशे के सामने आकर खुद को देखा तो पाया की वह पहले से काफी अच्छा लग रहा है। वह खुद को ही देखकर मुस्कुराया और फिर अवनि के साथ कमरे से बाहर निकल गया।
दोनों गार्डन में आये जहा और भी कुछ कपल्स और लोग जमा थे। गार्डन में बहुत ही सुन्दर सेटअप था। अवनि और पृथ्वी को देखते ही एंथनी उनके पास चला आया और उन्हें बैठने की जगह बताई। अवनि और पृथ्वी सबके साथ वहा आ बैठे और कुछ देर बाद सब एन्जॉय करने लगे। सब लोग एक दूसरे से अनजान थे और अलग अलग शहरो से थे लेकिन साथ बैठकर ऐसे लग रहा था जैसे सब पहले से एक दूसरे को जानते हो। अवनि को तो बहुत अच्छा लग रहा था और अवनि को खुश देखकर पृथ्वी भी खुश था।
रात होते होते सबने वही लॉन में खाने का आनंद लिया और उसके बाद सभी फिर जमा होकर अपनी जगह आ बैठे। यहाँ शुरू हुआ कुछ नया जब सब अपना अपना टेलेंट दिखाने लगे। किसी ने गिटार बजाया , किसी ने अपनी लिखी कविता सुनाई , किसी ने चुटकुले सुनाकर सबको
खूब हंसाया तो किसी ने सबके बीच खड़े होकर अपनी गर्लफ्रेंड को शादी के लिए प्रपोज किया। सब कितना अच्छा लग रहा था और फिर आयी अवनि और पृथ्वी की बारी और इन दोनों ने ही बाकी सब से कुछ अलग किया। दोनों ने अपनी अब तक की कहानी को शार्ट में दिखाया।
अवनि का हाथ थामकर पृथ्वी सबके बीच चला आया और शुरुआत की दोनों ने अनजान बनकर एक दूसरे के बगल से गुजरने की , काशी विश्वानाथ में पृथ्वी का प्रार्थना करना और अवनि का उसके बगल से गुजरते हुए उसके हाथो को आपस में मिलाना , पृथ्वी को अवनि को अवनि पायल मिलना।
सब मुस्कुराते हुए पृथ्वी और अवनि की इस कहानी को देख रहे थे और सबके चेहरों पर खुशी थी।
उसके बाद पृथ्वी ने किताब पढ़ने का नाटक किया , अवनि से विडिओ कॉल पर बात करना दिखाया और अवनि को देखकर अपने दिल पर हाथ रखकर ऐसे मुस्कुराया जैसे उसे अवनि को देखते ही उस से प्यार हो गया हो।
ये सब चीजे उस वक्त इतनी रोमांटिक लग लग रही थी कि सबकी नजरे पृथ्वी और अवनि पर ही थी। उसके बाद पृथ्वी ने वहा मौजूद एक लड़के को आने का इशारा किया और स्टेशन पर मार खाने वाला सीन दिखाया जब अवनि की आँखों में उसने प्यार देखा था और आज फिर पृथ्वी के साथ वहा मौजूद सबने अवनि की आँखों में पृथ्वी के लिए प्यार देखा था।
लड़का जिसे पृथ्वी ने बुलाया था वह वह सिद्धार्थ का रोल कर रहा था , अवनि का हाथ थामकर उसे वहा से ले जाने लगा और नीचे गिरा पृथ्वी उसे देखता रहा।
सब अपना दिल थामकर बैठे थे कि आगे क्या होने वाला है ? अवनि ने खुद को उदास और खत लिखते हुए दिखाया और पृथ्वी उसे चोरी छुपे देख रहा था। उसके बाद अवनि ने फोन करके अपनी शादी का जिक्र किया और पृथ्वी टूट गया।
पृथ्वी ने अवनि का पैर अपने घुटने पर रखकर उसे पायल पहनाई और फिर अपना बैग उठाकर उदास होकर जाने लगा। लड़का जो पहले भी आया था उसने अवनि का हाथ थामा और उसे पृथ्वी की तरफ करके जाने का इशारा किया तो अवनि आँखों में आँसू भरकर पृथ्वी की तरफ भागी और उसे आवाज दी। पृथ्वी पलटा और अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! मुझसे शादी करोगे ?”
जवाब में पृथ्वी ने बस मुस्कुराते हुए अपनी गर्दन हिला दी और अवनि पृथ्वी के गले आ लगी।
पूरा लॉन तालियों से गूँज उठा। अवनि और पृथ्वी ने अपनी कहानी को 5 मिनिट में सबके सामने जाहिर कर दिया और आखिर में सबके होंठो पर ख़ुशी और आँखों में आँसू थे। अवनि और पृथ्वी की आँखों में भी आँसू थे। उन्होंने नम आँखों से एक दूसरे की तरफ देखा और अवनि ने कहा,”यहाँ तक पहुंचने के लिए हमे किस्मत से कितना लड़ना पड़ा है पृथ्वी,,,,,,,,,,,!!”
“पर तुम्हारे महादेव ने हमारी किस्मत बदल दी,,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“मेरे नहीं हमारे महादेव ने,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
“हम्म्म हमारे महादेव ने,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर पृथ्वी ने अपने होंठो से अवनि के ललाट को छू लिया और वहा मौजूद लोगो ने एक साथ हूटिंग किया ! पृथ्वी ने अवनि को अपनी साइड किया उसके कंधो पर अपनी बाँह रखी और उसे अपने करीब करके सबको देखकर अपना हाथ हिलाया और फिर वहा से चला गया।
सिद्धार्थ का घर , सिरोही
गिरिजा जी के पैर में फेक्चर था इसलिए वे अपने कमरे में बिस्तर पर बैठी थी और पीठ दिवार से लगा रखी थी। जगदीश जी वही उनके सामने बैठे उन्हें दवाईयों के बारे में समझा रहे थे। सिद्धार्थ किचन में था और सबके लिए खाना बना रहा था। सिद्धार्थ को ज्यादा कुछ बनाना नहीं आता था लेकिन सिंपल दाल चावल बना लेता था और आज भी उसने वही बनाया था। उसने दाल बनायीं और चावल उबाल दिया।
सबसे पहले उसने गिरिजा के लिए एक प्लेट में थोड़ा चावल और एक कटोरी दाल रखा और उनके कमरे में चला आया।
सिद्धार्थ ने खाने की प्लेट गिरिजा जी के सामने रखी और खुद पास पड़ी कुर्सी खिसकाकर उस पर आ बैठा। खाना देखकर गिरिजा जी ने सिद्धार्थ से कहा,”सिद्दू ! ये सब करके तुम्हे परेशान होना पड़ रहा है ! पहले ऑफिस और फिर घर का काम , तुम ये सब कैसे मैनेज करोगे बेटा ?”
सिद्धार्थ ने खाने की प्लेट उठायी और गिरिजा जी की गोद में रखकर कहा,”उसकी टेंशन आप मत लीजिये मैं कर लूंगा , आप बस खाना खाइये और दवा खाकर आराम कीजिये”
गिरिजा जी ने सुना तो नम आँखों से सिद्धार्थ के सर पर हाथ घुमाया और खाना खाने लगी। सिद्धार्थ ने अपने पापा की तरफ देखा और कहा,”पापा ! चलिए आप भी खाना खा लीजिये मैं निकाल देता हूँ”
सिद्धार्थ उठकर कमरे से बाहर चला गया और जगदीश जी ख़ामोशी से उसे जाते देखते रहे। गिरिजा जी ने देखा तो जगदीश जी की तरफ देखकर कहा,”सुनिए जी ! हमारा सिद्धू बहुत अच्छा है , इस बार उसका दिल मत तोड़िये”
जगदीश जी ने सुना तो एक नजर गिरिजा को देखा और फिर उठकर कमरे से बाहर चले गए। जगदीश जी हाथ धोकर हॉल में आये तब तक सिद्धार्थ उनके लिए खाना लेकर आ चुका था। खाने की प्लेट टेबल पर रख दी जगदीश जी खाने की प्लेट के सामने आ बैठे। सिद्धार्थ वहा से जाने लगा तो जगदीश जी ने कहा,”तुम्हारा खाना कहा है ?”
“मैं बाद में खा लूंगा”,सिद्धार्थ ने कहा
“बाद में कब खाओगे ? जाओ अपना खाना लेकर आओ”,जगदीश जी ने कहा तो सिद्धार्थ किचन में चला आया। उसने बचा हुआ खाना प्लेट में निकाला जिसमे चावल कम थे और इसलिए सिद्धार्थ जगदीश जी से बाद में खाना खाने को कह रहा था। सिद्धार्थ प्लेट लेकर आया और वही जगदीश जी के सामने आ बैठा। सिद्धार्थ की प्लेट में कम चावल देखकर जगदीश जी समझ गए इसलिए अपनी प्लेट से आधे चावल सिद्धार्थ की प्लेट में रखते हुए कहा,”मुझे ज्यादा भूख नहीं है ये तुम खा लो,,,,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने सुना तो उसकी आँखों में नमी उभर आयी क्योकि आज बहुत दिनों बाद उसे जगदीश जी का ये रूप देखने को मिल रहा था। उसने अपनी गर्दन झुका ली और चुपचाप खाना खाने लगा ताकि जगदीश जी उसकी आँखों में आँसू ना देख ले।
“मैं सोच रहा हूँ कल से किसी को एक महीने के लिए काम पर रख लेते है। खाना बनाने और घर के कामो के साथ साथ वो गिरिजा की देख भाल भी कर लेगी”,जगदीश जी ने कहा
“इसकी जरूरत नहीं है पापा , कल से तीन महीने के लिए मेरी नाईट ड्यूटी है तो ये सब मैं मैनेज कर लूंगा , आप परेशान मत होईये”,सिद्धार्थ ने कहा
“हाँ लेकिन तुम अकेले ये सब कैसे करोगे ?”,जगदीश जी ने कहा
“मैं कर लूंगा और फिर आप है ना मेरी छोटी मोटी मदद करने के लिए,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने जगदीश की तरफ की देखकर कहा तो जगदीश जी हल्का सा मुस्कुराये और हामी में गर्दन हिला दी।
सिद्धार्थ ने खाना खाया और फिर सभी बर्तन धोकर गिरिजा जी के पास आ बैठा। उसने उन्हें दवा दी और कुछ देर इधर उधर की बातें करके अपने कमरे में चला आया। सिद्धार्थ ने गिरिजा जी को सुरभि के बारे में कुछ नहीं बताया और बताता भी क्या उसे तो खुद सुरभि के बारे में कुछ नहीं पता था। अपने कमरे में आकर उसने बिस्तर पर पड़ा अपना फोन उठाया और देखा तो मायूस हो गया। सुरभि का ना कोई मैसेज था न ही कोई कॉल
सिद्धार्थ ने भारी मन के साथ एक बार फिर सुरभि का नंबर डॉयल किया लेकिन इस बार भी सिर्फ रिंग गयी सुरभि ने फोन नहीं उठाया ! सिद्धार्थ ने फोन वापस बिस्तर पर फेंक दिया और खुद पीठ के बल बिस्तर पर आ गिरा और उदासी भरे स्वर में कहा,”पता नहीं इस वक्त वो कहा होगी ? बस वो ठीक हो,,,,,,,,,,,,,!!!”
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
भरत रातभर ऑफिस में ही रहा , वह इतना परेशान और टेंशन में था कि बीती रात घर ही नहीं गया और सुबह होते होते उसकी आँख लग गयी और वह सोफे पर बैठे बैठे ही सो गया। ऑफिस में स्टाफ ने आना शुरू कर दिया। मिस्टर देसाई भी आ चुके थे और अपने केबिन में थे। उन्होंने चेतन से भरत को बुलाकर लाने को कहा और अपने काम में लग गए। आज मिस्टर देसाई बहुत व्यस्त थे।
चेतन मिस्टर देसाई के केबिन से निकला और भरत के केबिन की तरफ जाते हुए बड़बड़ाया,”ये भरत सर अभी तक ऑफिस क्यो नहीं आये ? आखिर चल क्या रहा है इनके दिमाग में”
चेतन भरत के केबिन के सामने आया और दरवाजा खोलकर अंदर आया तो देखा भरत सोफे पर बैठे बैठे सो रहा है। भरत को अपने केबिन में देखकर चेतन को हैरानी हुई वह भरत के पास आया और उसे जगाते हुए कहा,”सर , सर , भरत सर,,,,,,,,,,,,,!!!”
भरत हड़बड़ाकर उठा और चेतन को देखकर उखड़े स्वर में कहा,”तुम सुबह सुबह मेरे घर पर क्या कर रहे हो ?”
“आपका घर ? लगता है आप रातभर से यही है घर नहीं गए,,,,,,,,,,!!!”,चेतन ने कहा तो भरत ने चारो तरफ देखा और उसे समझ आया कि वह बीती रात घर गया ही नहीं। 10 लाख का इंतजाम करते करते वह यही सो गया था। भरत उठा और केबिन में बने वाशबेसिन के सामने आकर अपना मुँह धोने लगा ! उसने रेंक में लगा तौलिया लिया और मुँह पोछते हुए चेतन की तरफ आकर कहा,”तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”
“देसाई सर ने आपको अपने केबिन में बुलाया है बस यही बताने आया था,,,,,,,,,,,,,!!!”,चेतन ने सहजता से कहा
भरत चेतन को लेकर बीती रात वाला गुस्सा भुला नहीं था। उसने चेतन की तरफ देखा और तकलीफभरे स्वर में कहा,”तुम्हारी शक्ल देखता हूँ तो मुझे मेरे वो तीन लाख याद आते है , जाओ यहाँ से और दोबारा मेरे सामने मत आना”
चेतन वहा से चला गया। भरत ने अपने दोनों हाथो को टेबल पर टिकाया और सर झुकाकर खुद में ही बड़बड़ाया,”आज शाम से पहले दस लाख का इंतजाम कैसे करू ? इस जयदीप ने मेरा सारा प्लान खराब कर दिया,,,,,,,,,,,,लेकिन ये जयदीप का दिमाग नहीं हो सकता उसके पीछे जरूर कोई और है,,,,,,,,,,,और ये मैं पता लगाकर रहूंगा”
भरत ने तकलीफ और गुस्से से कसकर अपनी आँखे मीची और फिर केबिन से बाहर निकल गया।
भरत ने मिस्टर देसाई के केबिन का दरवाजा खटखटाया और अंदर चला आया। भरत को देखकर मिस्टर देसाई ने हाथ में पकड़ी फाइल को साइड में रखा और भरत की तरफ देखकर कहा,”भरत ! आओ बैठो मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात डिस्कस करनी है”
भरत कुर्सी खिसकाकर उस पर आ बैठा और कहा,”जी सर बताईये”
“भरत ! बहुत ही अजीब बात है कि आज सुबह सुबह ही शर्मा ग्रुप एंड इंडस्ट्रीज से मिस्टर शर्मा का मेरे पास फोन आया था”,मिस्टर देसाई ने बहुत ही गंभीर स्वर में कहा
मिस्टर देसाई के मुँह से मिस्टर शर्मा का नाम सुनकर भरत का दिल धड़क उठा और माथे पर पसीने की बूंदे उभर आयी। उसने धड़कते दिल के साथ मिस्टर देसाई से पूछा,”मिस्टर शर्मा ने आपसे कुछ कहा ?”
मिस्टर देसाई कुछ देर सोच में डूबे रहे और फिर एकदम से मुस्कुराकर कहा,”अह्ह्ह नहीं ! मिस्टर शर्मा ने आज सुबह ही मुझे कुछ डील्स ऑफर की है जो कि हमारी कम्पनी की ग्रोथ के लिए बहुत अच्छी है , उन डील्स के लिए मुझे कम से कम 2 करोड़ रूपये खर्च करने होंगे,,,,,,,,,,,,,इसलिए मैं सोच रहा हूँ कि कम्पनी के 25% शेयर्स गिरवी रख दू और मिस्टर शर्मा के साथ डील कन्फर्म कर दू,,,,,,,,,,,,,,,,,तुम बताओ तुम्हारा ख्याल है ?”
भरत ने सुना तो अंदर ही अंदर परेशान हो गया। जिस कम्पनी को वह अपनी बनाने के सपने देख रहा था वह धीरे धीरे उसके हाथ से निकलती जा रही थी। मिस्टर देसाई भरत को एक के बाद एक झटके दिए जा रहे थे। कम्पनी के 25% शेयर गिरवी रखने का मतलब था कम्पनी पर एक बड़ा कर्जा जिसे आगे जाकर भरत को ही चुकाना पड़ेगा। भरत को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह मिस्टर देसाई से क्या कहे ? उसने सामने रखा पानी का गिलास उठाया और एक साँस में पी गया लेकिन फिर भी उसकी बेचैनी कम नहीं हुयी ये देखकर मिस्टर देसाई ने कहा,”भरत ! आर यू ओके ?”
“सर ! मिस्टर शर्मा की डील अच्छी है लेकीन ये एक बहुत बड़ी डील है इसलिए आपको मिस्टर शर्मा से थोड़ा वक्त लेना चाहिए ताकि आप अच्छे से सोचकर फैसला कर सके,,,,,,,,!!!”,भरत ने कहा
“मिस्टर शर्मा ने कल शाम 7 बजे मीटिंग रखी है उसी में ये सब डिक्शन होगा,,,,,,,,,,,,इतने कम वक्त में तुम स्टडी कर पाओगे ?”,मिस्टर देसाई ने पूछा
“स्योर सर ! मैं अभी जाकर मिस्टर शर्मा से डिटेल्स ले लेता हूँ ! कल सुबह तक मैं आपको सब रिपोर्ट्स दे दूंगा,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,भरत ने उठते हुए कहा
“ओह्ह्ह भरत ! थैंक्यू सो मच ! तुमने तो मेरी सारी टेंशन ही दूर कर दी,,,,,,,,,,,,,,बैठो ना , मैं कॉफी मंगवाता हूँ”,मिस्टर देसाई ने राहत की साँस लेकर कहा
“सर आप पीजिये ! मुझे अभी जाकर बहुत काम करना है,,,,,,,,,,,!!”,कहकर भरत वहा से चला गया और मिस्टर देसाई मुस्कुराते हुए अपनी फाइल देखने लगे।
भरत अपने केबिन में आया , अपने पैर पटके और हाथो को झटककर गुस्से से कहा,”हाह ! मैं इस कम्पनी को हासिल करने के लिए दिन रात मेहनत कर रहा हूँ और ये साला देसाई इसके शेयर्स गिरवी रखना चाहता है। बस बहुत हो गया , अब मुझे अपना आखरी दांव खेलना ही पड़ेगा,,,,,,,,,,,,,!!!”
भरत ने अपना फोन उठाया और किसी का नंबर डॉयल करके कान से लगा लिया। एक दो रिंग जाने के बाद किसी ने फोन उठाया और भरत ने कहा,”पेपर्स तैयार हुए ?”
“कल सुबह 10 बजे आपको पेपर्स मिल जायेंगे,,,,,,,,,,,,!!!!”,दूसरी तरफ से भरत के पर्सनल लॉयर ने कहा
भरत ने फोन काट दिया और मुस्कुराकर खुद में ही बड़बड़ाया,”आज इस कम्पनी में तुम्हारा आखरी दिन है देसाई क्योकि कल से ये कम्पनी मेरी होगी”
( पृथ्वी और अवनि की ये प्रेम कहानी क्या छोड़ पाएगी सबके दिलों में अपनी छाप ? क्या धीरे धीरे जगदीश जी समझ रहे है सिद्धार्थ की भावनाये ? किसका होगा देसाई ग्रुप एंड कम्पनी में आखरी दिन मिस्टर देसाई का या फिर खुद भरत का ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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Continue With Pasandida Aurat Season 3 – 36
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संजना किरोड़ीवाल


Yani next part bahot important hoga…pta nhi iss Bhart ka bhanda footega…aur yeh to seedha jhatka de rha hai Mr Desai ko…aery Prithvi bhaisahab ab to jaldi se wapas aa jao… Bhart ka beda gark kar do…aur idhar Siddarth ko Surbhi ka pta chalega tnbi…