Pasandida Aurat Season 3 – 30
Pasandida Aurat Season 3 – 30

सुरभि ने जैसे ही दरवाजा खोला सामने खड़े लोगो को देखकर उसके चेहरे का रंग उड़ गया और वह हक्की बक्की रह गयी। सामने इस बार अनिकेत नहीं बल्कि सुरभि के मम्मी पापा , चाचा , फूफा और उसका भाई खड़ा था और सभी बहुत गुस्से में थे। अचानक घरवालों को सामने देखकर सुरभि के मुँह से तो कोई बोल ही नहीं फूटे वह बस हक्की बक्की सी सबको देखती रही।
“खड़ी खड़ी देख क्या रही हो ? अंदर जाओ और इसका सामान लेकर आओ”,सुरभि के पापा ने सुरभि की मम्मी से कहा
सुरभि की मम्मी सुरभि को घूरते हुए अंदर चली गयी तो सुरभि ने अपने पापा से कहा,”ये सब क्या है पापा और आप सब लोग यहाँ क्या कर रहे है ? आप आ रहे है आपने बताया भी नही ये मेरा सामान लाने को क्यों कहा आपने ?”
“सुरभि ! तुम्हारी परवरिश में हमसे कोनसी कमी रह गयी जो हमारी पीठ पीछे तुम ये सब कर रही हो ?”,सुरभि के पापा ने कहा
“तुमने एक बार भी भाईसाहब और हमारी इज्जत के बारे में नहीं सोचा ?”,चाचा ने कहा
“मैंने तो पहले ही कहा था लड़की है , इसे घर से दूर नौकरी करने मत भेजो लेकिन मेरी बात किसी ने नहीं सुनी। अब बेटी यहाँ जो गुल खिला रही है वो भी देख लीजिये”,फूफा ने कहा
“जबान सम्हाल कर बात कीजिये फूफाजी ! ऐसा तो मैंने क्या कर दिया जो आप लोग ये सब कह रहे है ?”,सुरभि ने गुस्से से कहा
चाचा ने अपना फोन सुरभि के सामने करके कहा,”ये क्या है ? कौन है ये लड़का जिसके साथ दिन रात घूम रही हो तुम ?”
सुरभि ने चाचा के हाथ से फ़ोन लिया और देखने लगी। चाचा के फोन में उसके और सिद्धार्थ के साथ के कुछ फोटोज थे। हर फोटो के साथ ही सुरभि के चेहरे पर उलझन के भाव झिलमिलाने लगे। सुरभि ने देखा ये वो फोटोज थे जब सुरभि और सिद्धार्थ की बार बार मुलाकात हुई थी। सुरभि ने हैरानी से अपने पापा की तरफ देखा जो कि गुस्से से सुरभि को घूर रहे थे। सुरभि ने घबराहटभरे स्वर में कहा,”पापा , पापा आप जैसा सोच रहे है , वैसा कुछ नहीं है”
सुरभि की मम्मी सुरभि का सामान बैग में भरकर ले आयी ये देखकर सुरभि ने कहा,”आपने मेरा सामान क्यों पैक किया है ?”
“तुम अभी और इसी वक्त हमारे साथ उदयपुर चल रही हो सुरभि”,सुरभि के पापा ने कठोर स्वर में कहा
सुरभि ने सुना तो हैरानी से अपने पापा को देखा और कहा,”पापा , पापा ये क्या कह रहे है आप ? प्लीज आप लोग एक बार मेरी बात सुन लीजिये आप लोग जैसा समझ रहे है वैसा कुछ नहीं है,,,,,!!”
“मुझे कुछ नहीं सुनना सुरभि , जो बाते होगी उदयपुर चलकर होगी”,सुरभि के पापा ने अपना फैसला सुना दिया उन्होंने सुरभि को अपनी सफाई देने का मौका भी नहीं दिया और सब मिलकर जबरदस्ती उसे वहा से ले गए।
सुरभि का फोन कमरे में बिस्तर पर ही पड़ा रह गया। सुरभि के चाचा ने फ्लेट को ताला लगाया और सब वहा से निकल गए। आस पास के फ्लेट वालो ने सुरभि और उसके साथ कुछ लोगो को देखा और सब में खुसर फुसर चालू हो गयी।
सभी नीचे खड़ी गाड़ी में आ बैठे और सुरभि को भी जबरदस्ती गाडी में बैठाकर वहा से निकल गए।
सिद्धार्थ का घर , सिरोही
सुबह सुबह सिद्धार्थ अपने ऑफिस जाने के लिए तैयार हो ही रहा था कि उसके फोन पर सुरभि का मैसेज आया। सिद्धार्थ ने देखा सुरभि ने आज पहली बार उसे अपनी फोटो भेजी है तो वह खुश हो गया। उसने देखा सुरभि इस तस्वीर में कुछ ज्यादा ही प्यारी लग रही थी। कानों में झुमके , ललाट पर बिंदी , आँखों में काजल , माथे पर टीका और दुपट्टा ये सब देखकर एक पल के लिए तो सिद्धार्थ उसे अपनी दुल्हन के रूप में ही इमेजिन कर बैठा।
सिद्धार्थ मुस्कुराते हुए सुरभि की तस्वीर को देख ही रहा था कि हॉल में टेबल पर सिद्धार्थ के लिए नाश्ता रखते हुए गिरिजा ने उसे आवाज लगाईं। सिद्धार्थ ने जल्दी जल्दी सुरभि को कुछ लिखकर भेजा और अपना फोन बिस्तर पर रखकर बाहर चला आया। जगदीश जी सुबह सुबह नाश्ता करके अपने किसी रिश्तेदार से मिलने चले गए। सिद्धार्थ भी सुरभि के बारे में सोचते हुए नाश्ता करने लगा।
नाश्ता करके सिद्धार्थ ने अपना बैग और अपना फोन लिया और ऑफिस के लिए निकल गया।
“सिद्धू ! टिफिन लेकर जा बेटा”,गिरिजा जी ने पीछे से आवाज दी
“आज बाहर का काम है मम्मी लंच टाइम तक घर आ जाऊंगा मैं”,सिद्धार्थ ने कहा और वहा से चला गया
घर से बाहर आकर सिद्धार्थ ने अपना बैग गाडी में रखा और खुद ड्राइवर सीट पर आ बैठा। उसने गाडी स्टार्ट की और वहा से निकल गया। आज सिद्धार्थ का मन बहुत शांत और ख़ुशी से भरा हुआ था होता भी क्यों नहीं उसकी जिंदगी में जो उथल पुथल मची थी वो अब कम जो होने लगी थी। गाडी चलाते हुए वह गुनगुनाने लगा , गाडी ट्रेफिक में आकर रुकी तो सिद्धार्थ खुद में ही बड़बड़ाया,”आज मुझे ऑफिस नहीं जाना और सुरभि की भी छुट्टी है , क्यों ना शहर से बाहर जो आज की मीटिंग में है उसमे सुरभि को भी लेकर चलू ?
उसके साथ थोड़ा वक्त बिताने का मौका भी मिल जाएगा और मैं ये भी जान पाऊंगा कि उसके दिल में मेरे लिए क्या है ? पर क्या वो बाहर जाने के लिए हाँ करेगी ? आई थिंक थोड़े नखरे करेगी लेकिन फिर मान जाएगी,,,,,,,!!!”
सिद्धार्त ये सब सोच ही रहा था कि ट्रेफिक खुला और उसने अपनी गाडी आगे बढ़ा दी। उसने गाडी सुरभि के अपार्टमेंट जाने वाले रोड की तरफ मोड़ दी। रास्ते में उसे एक ताजा फूलो की दूकान नजर आयी।
सिद्धार्थ ने गाडी रोकी और नीचे उतरकर दुकान पर चला आया। उसने सुरभि के लिए कुछ ताजा प्यारे फूल खरीदे , पास ही एक दूकान थी वहा से कुछ चॉकलेट्स भी लिए और गाडी में आ बैठा उसने फूल और चॉकलेट्स अपने बगल वाली सीट पर रखे और मुस्कुराते हुए गाडी आगे बढ़ा दी। वो सिद्धार्थ जो अवनि के साथ होता था तो एक एक पैसे का हिसाब रखता था अब सुरभि के लिए दिल खोलकर खर्चा कर रहा था।
गाड़ी अपार्टमेंट के बाहर साइड में लगाकर सिद्धार्थ फूल और चॉकलेट्स लिए अंदर आया और लिफ्ट में आकर सुरभि के फ्लेट वाले फ्लोर का बटन दबा दिया। आज कितनी ही बार सुरभि से मिला था , टकराया था लेकिन आज जैसे जैसे लिफ्ट ऊपर जा रही थी उसके दिल की धड़कने बढ़ रही थी और ऐसा क्यों था ये सिद्धार्थ को नहीं पता था। वह लिफ्ट से बाहर आया एक दो गहरी सांसे ली और सुरभि के फ्लेट के सामने चला आया।
मुस्कराहट उसके होंठो से जाने का नाम नहीं ले रही थी। उसने दरवाजे पर लगे ताले को देखा ही नहीं और बेल बजा दी। सुरभि ने दरवाजा नहीं खोला , वो वहा होती तो दरवाजा खोलती ना। सिद्धार्थ ने कुछ देर इंतजार किया और फिर बेल बजा दी लेकिन इस बार भी किसी ने दरवाजा नहीं खोला।
सिद्धार्थ को हैरानी हुई उसने अपना फोन निकाला और सुरभि का नंबर डायल किया। रिंग जाती रही लेकिन सुरभि ने फोन भी नहीं उठाया। अब तो सिद्धार्थ को चिंता होने लगी कि आखिर क्या हुआ होगा ?
वह फोन अपने होंठो से लगाये सोचते हुए जैसे ही पलटा उसकी नजर दरवाजे पर लगे ताले पर पड़ी। दरवाजे पर ताला लगा देखकर सिद्धार्थ को और ज्यादा हैरानी हुई और वह खुद में ही बड़बड़ाया,”यहाँ तो ताला लगा है आखिर वो कहा गयी होगी ? मेरा फोन भी नहीं उठा रही,,,,,,,,,,,,,हो सकता है अपने ऑफिस गयी हूँ , वही जाकर देखता हूँ”
सिद्धार्थ उदास मन से वापस लिफ्ट की तरफ बढ़ गया।
पृथ्वी ने अवनि के लिए क्रूज पर डेट के लिए एक स्पेशल टेबल बुक की थी। वह अवनि को साथ लेकर क्रूज पर चला आया जहा और भी कई लोग और कपल्स थे। गोआ आकर पृथ्वी तो यहाँ के रंग में रंग चुका था। उसने क्रीम कलर की लेनिन पेंट पहनी थी और उस पर हाफ स्लीव्स का एक बहुत ही प्यारा सा मस्टर्ड शर्ट पहना था और आँखों पर धुप वाला चश्मा लगा रखा था जिसमे वह बहुत ही कूल लग रहा था। वही अवनि ने उसके लिए एक बहुत ही प्यारा सा गाउन खरीदा था और अवनि भी पृथ्वी के लिए उसे पहनकर आयी थी।
ना बहुत ज्यादा मेकअप और ना बहुत ज्यादा गहने बस गले में मंगलसूत्र और माँग में सिंदूर के अलावा ललाट पर छोटी लाल बिंदी और होंठो पर हलकी लिपस्टिक थी। अवनि उस ड्रेस में बहुत ही प्यारी लग रही थी इतनी की पृथ्वी अवनि से अपनी नजरे ही नहीं हटा पा रहा था और उस पर अवनि के चेहरे पर एक अलग ही नूर और ताजगी थी।
पृथ्वी अवनि को लेकर अपनी बुक की टेबल के पास आया। उसने आँखों से चश्मा हटाकर शर्ट में टांग लिया और अवनि के बैठने के लिए कुर्सी खिसकाई। अवनि कुर्सी पर आ बैठी।
“मैं अभी आया”,पृथ्वी ने अवनि का कंधा थपथपा कर कहा और वहा से चला गया। अवनि को तो यहाँ बैठकर बहुत अच्छा लग रहा था। वह पहले भी बनारस में कई बार नाव और क्रूज पर बैठी थी लेकिन समंदर पर चलने वाले क्रूज में पहली बार बैठी थी वो इतने बड़े जहाज पर जहा सेंकडो लोग जमा थे।
क्रूज धीमी रफ्तार में आगे बढ़ रहा था। अवनि कुर्सी से उठी और जहाज की दिवार के पास खड़े होकर समंदर के पानी को देखने लगी। पृथ्वी के साथ उसकी जिंदगी इतनी आसान और खूबसूरत हो जायेगी ये उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। हवा से अवनि के बालों की कुछ लटें उड़कर उसके चेहरे पर आ रही थी लेकिन अवनि ने उन्हें नहीं हटाया वह एक सुकून में थी और उसकी आँखों में थे उसके आने वाले कल के सपने,,,,,,,,,,,!!
अवनि खोयी हुई थी कि पृथ्वी ने उसके पीछे आकर उसके गालों पर लहराते बालों को अपनी उंगलियों से बड़े प्यार से साइड करके कहा,”इन्हे कोई हक़ नहीं है तुम्हारे गालों को छूने का”
पृथ्वी की आवाज से अवनि की तंद्रा टूटी और उसने कहा,”क्यों ?”
अवनि के पीछे खड़े पृथ्वी ने अपने होंठो से अवनि के गाल को अपने होंठो से छुआ और कहा,”क्योकि इन पर सिर्फ मेरा हक़ है”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई , अब वह पहले की तरह घबराती नहीं थी ना ही पृथ्वी से दूर जाती थी बल्कि अब वह चाहती थी पृथ्वी उसके आस पास ही रहे।
अवनि मुस्कुराते हुए पृथ्वी की तरफ पलटी तो पृथ्वी ने अपने दूसरे हाथ में छुपाय फूलों के एक बुके को अवनि के सामने करके कहा,”ये आपके लिए मिसेज उपाध्याय”
पृथ्वी के हाथ में इतने प्यारे प्यारे फूल देखकर अवनि का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा और उसने कहा,”ये मेरे लिए है,,,,,,,!!!!”
“जी मैडम ! आप ही के लिए है,,,,,,,,,वैसे भी तुम्हे फूल बहुत पसंद है ना इसलिये”,पृथ्वी ने प्यार से कहा
अवनि मुस्कुराते हुए प्यार से उन फूलों को छूने लगी ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”याद है अवनि ! जब मैं पहली बार तुमसे मिलने सिरोही आया था और मैंने तुम्हे फूल दिए थे तो उन्हें देखकर रोने लगी तुम,,,,,,,,,,हाह ! कितनी जान जली थी मेरी उस दिन तुम्हारी आँखो में आँसू देखकर,,,,,,,,,,,!!!!”
“वो दिन मैं कैसे भूल सकती हूँ पृथ्वी”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा और ये कहते हुए सहसा ही उसके चेहरे पर उदासी के भाव तैर गए क्योकि उस दिन के बाद से ही तो अवनि और पृथ्वी की जिंदगी में मुश्किलें आयी थी। पृथ्वी ने अवनि का उदास चेहरा देखा और कहा,”हाँ भुला तो मैं भी नहीं हूँ , तुम्हारे लिए उस दिन सिद्धार्थ से मार भी तो खाई थी मैंने,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी की बात सुनकर अवनि ने उसकी तरफ देखा तो पृथ्वी ने कहा,”उस दिन पहली बार मैंने तुम्हारी आँखों में अपने लिए प्यार देखा था और ये ठान लिया चाहे कुछ भी हो जाये तुम्हारे नाम के आगे तो मैं अपना नाम लगाकर ही रहूंगा एंड सी नाउ यू आर अवनि पृथ्वी उपाध्याय”
पृथ्वी की बात सुनकर अवनि उसके सीने से आ लगी। उसकी आँखों में आँसू देखकर पृथ्वी ने कहा,”अरे तुम्हारी आँखों में ये आँसू किसलिए ? अवनि वो वक्त गुजर चुका है बेटा हमारे आज में हम साथ है और हमेशा साथ रहेंगे,,,,,,,,,पागल लड़की”
अवनि पृथ्वी से दूर हटी और कहा,”आप नहीं जानते पृथ्वी आपने मुझे एक नयी जिंदगी दी है और इस नयी जिंदगी के लिए मैं आपकी हमेशा शुक्रगुजार रहूंगी”
“बेटा ! तुम्हारा पेट ये सब बातो से भर जाता है क्या ?”,पृथ्वी ने बड़े प्यार से पूछा
अवनि ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने उसे कुर्सी पर बैठाया और कहा,”अरे तो फिर बैठो ना कुछ खाते है,,,,,,,,,सुबह से मैंने कुछ नहीं खाया है”
अवनि ने सुना तो अपनी आँख के किनारे को साफ़ किया और पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने कहा,”कुछ आर्डर करे ?”
“हम्म्म प्लीज”,अवनि ने कहा
पृथ्वी मुस्कुराया और दोनों के लिए खाना आर्डर करने लगा।
मौर्या ग्रुप कम्पनी , नवी मुंबई
जयदीप ने पृथ्वी के कहने पर नीलेश को उसकी जगह दे दी और नीलेश ने भी अपना काम करना शुरू कर दिया। नीलेश इस कम्पनी में क्यों आया था ये बात कोई नहीं जानता था और यही बात जयदीप को भी परेशान कर रही थी लेकिन वह सीधे सीधे नीलेश से पूछ भी नहीं पा रहा था। अब तो जयदीप को पृथ्वी के वापस मुंबई आने का इंतजार था ताकि वह उस से मिलकर जान सके कि ये सब क्या हो रहा है ?
नीलेश के कहने पर जयदीप ने अपनी 6 की 6 डील्स केंसल तो कर दी लेकिन इस से उसकी कम्पनी को बहुत बड़ा नुक्सान होने वाला था और इसी बात की चिंता उसे सताए जा रही थी। वह परेशान सा अपने केबिन में बैठा इसी बारे में सोच रहा था कि तभी अंकित कुछ फाइल्स लेकर आया और जयदीप की टेबल पर रखकर कहा,”सर ये कुछ फाइल्स है नीलेश चाहता है आप एक ले और फिर इन पर साइन भी कर दे”
जयदीप अपने ही ख्यालो में डूबा हुआ था उसने जैसे अंकित की बात को सुना ही ना हो। जयदीप की तरफ से कोई जवाब ना पाकर अंकित उसकी तरफ आया और कहा,”सर , सर , आर यू ओके ?”
अंकित की आवाज से जयदीप की तन्द्रा टूटी और उसने रोआँसा होकर कहा,”तुम्हारे दोस्त के होते मैं ओके कैसे हो सकता हूँ ?”
“आप पृथ्वी की बात कर रहे है ?”,अंकित ने पूछा क्योकि इस ऑफिस में उसका एक ही दोस्त है और वो है पृथ्वी जिस से ऑफिस के साथ साथ वह अपनी हर प्रॉब्लम शेयर किया करता था।
जयदीप ने हामी में गर्दन हिलायी तो अंकित ने कहा,”अब क्या किया उसने ?”
जयदीप ने सुना तो अपनी जगह से उठा और अंकित के सामने आकर थोड़ा ऊँचे स्वर में कहा,”क्या किया ? एक तो वो ये नौकरी छोड़कर चला गया , ऊपर से उसने अपनी जगह एक ऐसे केंडिडेट को भेजा है जो देसाई ग्रुप का एक्स एम्प्लॉय रह चुका है और उस पर सबसे बड़ी टेंशन की बात ये कि वह ऐसे काम कर रहा है जैसे बॉस मैं नहीं वो है। उसने आते ही देसाई ग्रुप से हुई 6 डील्स को केंसल करवा दिया,,,,,,,,,,,,ऐसे तो वो मुझे रोड पर ले आएगा”
अंकित ने सुना तो उसे जयदीप की हालत पर दया आयी और उसने कहा,”सर ! टेंशन वाली बात तो है”
“देखा मैंने कहा न टेंशन है अंकित टेंशन है”,जयदीप ने कहा
“हाँ सर टेंशन है लेकिन टेंशन ये है कि रोड पर आने के बाद आप करेंगे क्या ?”,,अंकित ने जयदीप को छेड़ते हुए कहा और वहा से चला गया
जयदीप ने सुना और खुद में ही बड़बड़ाया,”हाँ सही कहा रोड पर आकर मैं करूंगा क्या ? लेकिन मैं रोड पर आऊंगा क्यों ? ए अंकित,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
जयदीप ने अंकित के कहने के लिए सर उठाया लेकिन तब तक अंकित वहा से जा चुका था।
( क्या सुरभि के घरवाले समझेंगे सुरभि के साथ सिद्धार्थ का रिश्ता और अपनाएंगे उसे ? क्या इस डेट के जरिये पृथ्वी करेगा अवनि के सामने अपने असीम प्यार को जाहिर ? क्या पृथ्वी और नीलेश मिलकर सच में ले आएंगे जयदीप को रोड पर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal
Aery yr yeh kya ho gaya Surbhi k sath…yeh to bilkul bhi nhi socha tha ki Surbhi k ghar wale aayenge aur usko jabran apne le jayenge…yeh sab uss Aniket ka kiya dhara hoga…wahi chida hua hai iss waqt Surbhi aur Siddarth se…aur bechara Siddarth, uska kya hoga ab …i think about to jaldi se Prithvi aur Avni ko wapas mumbai aana chahiye aur Surbhi ka sath dena chahiye…wo akeli pad gai hai isd waqt.