Pasandida Aurat Season 3 – 20
Pasandida Aurat Season 3 – 20

नकुल से बात करके पृथ्वी ने अवनि को अपनी बाँहो में समेटा और फिर सो गया।
कपूर ग्रुप एंड कम्पनी , नवी मुंबई
“कम प्राची ! ये मेरा ऑफिस और प्रोडक्शन हॉउस है,,,,,,,अंदर आओ”,विक्रम ने प्राची के साथ अपने ऑफिस में आते हुए कहा और अपने केबिन की तरफ बढ़ते हुए रिसेप्शन पर बैठी स्टाफ से अंदर दो कॉफी भिजवाने का इशारा भी कर दिया।
प्राची विक्रम के साथ अंदर आयी और केबिन का नजारा लेकर कहा,”नाइस ! काफी बढ़िया ऑफिस है तुम्हारा,,,,,,,,,,देखकर तो लग रहा है कि तुम्हारे पास पैसो की कमी नहीं होगी,,,,,,,,,,,,,!!”
प्राची की बात सुनकर विक्रम मुस्कुराया ! प्राची उसकी तरफ पलटी और आगे कहा,”इतना सब होने के बाद भी तुम उस मामूली सी अवनि के पीछे क्यों पड़े हो ?”
विक्रम प्राची के पास आया और उसकी आँखों में देखकर थोड़ा कठोर स्वर में कहा,”वो मेरा पर्सनल मेटर है”
“ओह्ह्ह्ह ओहहके”,प्राची ने अपने दोनो हाथ ऊपर उठाकर कहा
विक्रम प्राची से दूर हटा और कहा,”तुम खड़ी क्यों हो आओ बैठो ?”
प्राची वही केबिन में पड़े सोफे पर आ बैठी और विक्रम बगल में पड़े सोफे पर अकेला आ बैठा क्योकी बीती रात ही प्राची ने उसे ये अहसास दिला दिया था कि उसे विक्रम में ज़रा भी दिलचस्पी नहीं है।
ऑफिस बॉय कॉफी ले आया और टेबल पर रखकर चला गया। विक्रम ने प्राची से कॉफी लेने को कहा और खुद अपना कप उठाते हुए बोला,”सो ! इस वक्त तुम्हे अपने डेड के ऑफिस में होना चाहिए लेकिन तुम यहाँ मेरे साथ हो,,,,,,,देखकर थोड़ा अजीब लग रहा है”
“सच कहू तो मुझे भी,,,,,,,,,,,,,,,एक्चुली मेरी मनमानियों से तंग आकर डेड ने मुझे अपने ही ऑफिस से निकाल दिया”,प्राची ने खुद पर ही एक जोक मारकर कहा और ठहाका लगाकर हंस पड़ी।
विक्रम ने सुना तो हैरानी से कहा,”तो अब तुम्हारे डेड की कम्पनी में MD कौन है ?”
“मिस्टर भरत देशमुख , मेरी जगह अब वो कम्पनी के सभी काम देख रहे है एंड गेस व्हाट ?”,प्राची ने अपनी आँखों में चमक भरकर कहा
“व्हाट ?”,विक्रम ने पूछा
“मिस्टर भरत मेरी साइड है , पृथ्वी को मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी से रिजाइन देने के लिए मिस्टर भरत ने ही तो मजबूर किया है,,,,,,,,,उन्हें MD की पोजीशन चाहिए थी और मुझे पृथ्वी इसलिए मैंने उन से हाथ मिला लिया”,प्राची ने चहककर कहा और कॉफी पीने लगी
भरत से हाथ मिलाकर प्राची खुश थी लेकिन ये बात जानकर विक्रम के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये और उसने कहा,”प्राची ! मिस्टर भरत से हाथ मिलाकर कही तुम कोई भूल तो नहीं कर रही ?”
“ओह्ह्ह कम ऑन विक्रम ! अगर रिजल्ट पृथ्वी है तो फिर मैं अपना सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हूँ”,प्राची ने विश्वास से भरकर कहा
विक्रम ने सुना तो ख़ामोशी से प्राची को देखने लगा , वह इस वक्त प्राची की आँखों में पृथ्वी को हासिल करने की जूनून साफ देख पा रहा था। विक्रम जानता था कि प्राची को इस वक्त कुछ भी समझाना बेकार है इसलिए उसने कहा,”ठीक है लेकिन मैं फिर भी कहूंगा भरत देशमुख से थोड़ा सम्हलकर रहना , मुझे उसकी नियत कुछ ठीक नहीं लग रही”
“विक्रम ! भरत जब से कम्पनी शुरू हुई है तब से डेड के साथ है और डेड उस पर बहुत भरोसा भी करते है,,,,,,,,,,इसलिए तो जब डेड ने उसे MD की पोस्ट दी तो मुझे बुरा नहीं लगा,,,,,,,,डेड ने मेरी फीलिंग्स को नहीं समझा लेकिन भरत ने समझा और इसलिए तो वह मेरी मदद कर रहा है”,प्राची ने खाली कप टेबल पर रखते हुए कहा
“ओहके देट्स फाइन,,,,,,,,,,,,,सो आज शाम का प्लान है , मेरे साथ डिनर पर चलोगी ?”,विक्रम ने सधे हुए स्वर में पूछा
“अह्ह्ह ! एक्चुली , आज रात मैं अपनी दोस्तों के साथ क्लब जा रही हूँ सो डिनर भी उनके साथ ही है तो फिर कभी,,,,,,,,,,,,,,अभी मैं चलती हूँ मेरा अपॉइंटमेंट है”,प्राची ने कहा
“बताओ कहा जाना है ? मैं छोड़ देता हूँ”,विक्रम ने प्राची के साथ उठते हुए कहा
“थैंक्यू बट मैंने अपने ड्राइवर को फोन कर दिया है वह बस आता ही होगा,,,,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने कहा
“हम्म्म ठीक है,,,,,,,,,,!!!”,विक्रम ने बुझे स्वर में कहा वह प्राची के साथ थोड़ा और वक्त बिताना चाहता था लेकिन प्राची ने उसे भाव नहीं दिया और बाय बोलकर केबिन से बाहर निकल गयी।
विक्रम अपनी कुर्सी पर आ बैठा और सर पीछे झुकाकर खुद में ही बड़बड़ाया,”ओह्ह्ह प्राची ! तुम खामखां उस पृथ्वी के पीछे पड़ी हो जरा उस से नजरे हटाकर देखो तुम्हे चाहने वालों की कमी नहीं है,,,,,,,,,,,!!!”
विक्रम अपनी आँखे मूंदे प्राची के बारे में सोचता रहा।
प्राची विक्रम के ऑफिस से बाहर आयी और अपने ड्राइवर को फोन लगाया जो कि बस 2 मिनिट में पहुंचने वाला था। प्राची ने अपनी आँखों पर धुप वाला चश्मा लगाया और वही विक्रम के ऑफिस के बाहर खड़ी रही !
पृथ्वी के जाने के बाद अब उसकी कुछ कुछ जिम्मेदारी अंकित पर पड़ी थी इसलिए एक मीटिंग के लिए वह जयदीप के साथ ऑफिस से बाहर आया। विक्रम और जयदीप का ऑफिस पास पास ही थे बस दोनों ऑफिस के बीच एक बड़ी ऊँची बिल्डिंग थी जिसके ग्राउंड फ्लोर पर बने रेस्त्रो का जिक्र कहानी में कई बार हो चुका है। उस एरिया का पार्किंग विक्रम की बिल्डिंग के बगल में ही बना था इसलिए जयदीप और अंकित आज की मीटिंग पर डिस्कस करते हुए उस तरफ चले आये। चलते चलते जयदीप की नजर विक्रम के ऑफिस के बाहर खड़ी प्राची पर पड़ी और उसे थोड़ी हैरानी हुयी।
जयदीप विक्रम और प्राची दोनों को बहुत अच्छे से जानता था। प्राची के साथ उसने कई बिजनेस डील की थी और विक्रम की पृथ्वी से हुई झड़प भी उसे याद थी लेकिन प्राची को यहाँ देखकर उसे गड़बड़ लगी। उसने अंकित से कहा,”ये मिस प्राची ही है ना ?”
“हाँ सर ! लेकिन ये यहाँ मिस्टर कपूर के ऑफिस के बाहर क्या कर रही है ? विक्रम कपूर तो प्रोड्यूसर है”,अंकित ने भी हैरानी से कहा
“वही तो मुझे नहीं समझ आ रहा , कही इस लोमड़ी ने गीदड़ से हाथ तो नहीं मिला लिया ?”,जयदीप ने बहुत ही सस्पेंस भरे स्वर में कहा
“गीदड़ , लोमड़ी ये आप क्या कह रहे है ? जल्दी चलिए हमे देर हो रही है”,अंकित ने कहा तो जयदीप की तन्द्रा टूटी और उसने कहा,”हाँ हाँ ! तुम चलो चलकर गाडी निकालो मैं एक फोन करके आता हूँ”
अंकित जयदीप से गाड़ी की चाबी लेकर पार्किंग की तरफ चला गया और जयदीप अपने फोन से किसी का नंबर डॉयल करने लगा।
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
मीटिंग रूम में जो कुछ भी हुआ उसके बाद वह मौजूद सभी लोग अब ऑफिस के हॉल में जमा थे और साथ ही बाकी स्टाफ भी वहा जमा हो गया। प्रवीण डर और घबराहट से काँप रहा था। लीगल टीम के हेड को वह अपना दोस्त मानता था और उसने भी रातों रात भरत से हाथ मिला लिया ये जानकर उसका गला सूख रहा था।
भरत के खिलाफ उसके पास एक ही मजबूत सबूत था लेकिन उसे भी उसने अनजाने में हेड को दे दिया और अब बाजी भरत के हाथ में थी।
प्रवीण अपने केबिन की तरफ जाने लगा तो भरत ने उसे रोककर कहा,”ठहरो ! सच क्या है ये अभी सामने आ जाएगा,,,,,,,,,,,,!!
प्रवीण से कहकर भरत चेतन की तरफ पलटा और कहा,”चेतन प्रवीण के केबिन की तलाशी लो”
प्रवीण ने सुना तो उसके चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिला उठे , भरत सबके सामने उसके केबिन की तलाशी लेने के लिए कह रहा था। उसने नम आँखों से मिस्टर देसाई को देखा क्योकि आज तक इस कम्पनी में उसने हमेशा ईमानदारी से काम किया और आज सबके सामने उस पर इल्जाम लगाया जा रहा था। मिस्टर देसाई ने प्रवीण की आँखों में आँसू देखे और कठोर स्वर में कहा,”ठहरो,,,,,,कोई भी प्रवीण के केबिन की तलाशी नहीं लेगा”
प्रवीण ने सुना एक उम्मीद की किरण उसे नजर आयी लेकिन अगले ही पल मिस्टर देसाई के शब्दों ने उसे भी तोड़ दिया जब उन्होंने आगे कहा,”प्रवीण के केबिन की तलाशी मैं खुद लूंगा”
भरत ने सुना तो हल्का सा मुस्कुराया और बेचारा प्रवीण सर झुकाकर खड़ा हो गया। वह अब हिम्मत हार चुका था उसने सब भगवान् पर छोड़ दिया। मिस्टर देसाई अंदर गए और कुछ देर बाद बाहर आये तो उनके हाथ में एक सूटकेस था।
ये वही सूटकेस था जो बीती रात भरत ने चेतन से प्रवीण के केबिन में रखने को कहा था। प्रवीण सर झुकाये खड़ा था और बाकी सबकी नजरे मिस्टर देसाई के हाथ में पकडे सूटकेस पर थी।
देसाई ने वह सूटकेस भरत की तरफ बढ़ाया और खोलने का इशारा किया। भरत ने सूटकेस खोला , सूटकेस के अंदर नोटों से भरी गड्डिया रखी थी जिन्हे देखकर सब दंग रह गए और मिस्टर देसाई के चेहरे पर गुस्से के भाव झिलमिलाने लगे।
प्रवीण ने सर उठाकर सूटकेस की तरफ देखा तो उसकी आँखे खुली की खुली रह गयी और दिल धड़कने लगा। वह समझ गया कि भरत ने उसके खिलाफ चाल चली है और उसे फ़साने के लिए ये बैग उसके केबिन में रखा होगा। वह घबराया हुआ सा मिस्टर देसाई के सामने आया और कहा,”सर सर ये बैग मेरा नहीं है , सर मैं नहीं जानता ये मेरे केबिन में कैसे आया ? सर मैं सच कह रहा हूँ मेरी बात का यकीन कीजिये,,,,,,,,,ये सब मिलकर मुझे फ़साना चाहते है,,,,,,,,,!!!”
मिस्टर देसाई ने सुना तो सबके सामने खींचकर एक थप्पड़ प्रवीण को मारा जिस से पूरा स्टाफ हैरान रह गया , खुद प्रवीण भी,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
भरत मन ही मन अपनी चाल पर खुश हो रहा था लेकिन चेहरे पर नहीं आने दिया और ख़ामोशी से वहा खड़ा रहा। मिस्टर देसाई के चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये और उन्होंने अपने दोनों हाथो से प्रवीण की कोलर पकड़कर कहा,”कमीने ! मैंने तुम पर भरोसा किया और तुमने मुझे ही धोखा दिया।
तुम्हारा सच भरत मुझे कल रात ही बता चुका था लेकिन मैंने फिर भी तुम्हे एक मौका देने का सोचा और आज तुम्हारी सच्चाई सबके सामने है। इस से पहले कि मैं पुलिस को फोन करू और वो यहाँ आकर तुम्हे ले जाये , निकल जाओ मेरे ऑफिस से और आज के बाद मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना”
मिस्टर देसाई ने प्रवीण को अपनी सफाई में कुछ कहने का मौका ही नहीं दिया , उनकी आँखों पर भरत के विश्वास की पट्टी जो बंधी थी। उन्होंने प्रवीण का कोलर छोड़ा और उसे पीछे धकियाकर वहा से चले गए। प्रवीण ना कुछ बोलने की हालत में था ना ही कुछ करने के वह हक्का बक्का सा बस वहा खड़े स्टाफ को देखता रहा। इतने साल सबके बीच रहकर ईमानदारी से काम करने के बाद आखिरकर आज उसे ये शाबासी मिली।
प्रवीण अंदर ही अंदर टूट गया उसके कानो में बस मिस्टर देसाई के कहे शब्द गूँज रहे थे। वह थके कदमो से अपने केबिन की तरफ बढ़ गया। भरत ने लीगल हेड की तरफ देखा और मुस्कुरा उठा। भरत ने देखा ऑफिस के बाकी लोग वही खड़े होकर आपस में खुसर फुसर कर रहे है तो उसने गुस्से से कहा,”तुम सब यहाँ खड़े खड़े क्या कर रहे हो ? यहाँ कोई तमाशा हो रहा है ? जाओ जाकर अपना काम करो,,,,,,,,,,,!!!”
भरत की फटकार सुनकर सब वहा से चले गए। लीगल हेड भरत के साथ वही खड़ा रहा कुछ देर बाद प्रवीण हाथो में एक बॉक्स उठाये बाहर आया जिसमे उसका सामान था। उसकी आँखों में आँसू और चेहरे पर गुस्से के भाव थे। वह भरत की तरफ आया तो भरत ने मुस्कुरा कर उसे देखा और कहा,”देसाई के सामने मुझे एक्सपोज करने चले थे देखो अब तुम ही इस कम्पनी से आउट हो गए,,,,,,,,,,,,,!!!”
“सच्चाई को कितना भी छुपा लो वो एक न एक दिन सामने जरूर आएगी,,,,,,,,मैं तो यहाँ से जा रहा हूँ लेकिन याद रखना बहुत जल्द तुम दोनों की उलटी गिनती शुरू होगी,,,,,,,,,,!!!”,प्रवीण ने गुस्से से कहा और वहा से चला गया
हेड उसे जाते देखकर मुस्कुराया और कहा,”उलटी गिनती और वो भी हमारी,,,,,,,,,,!!!”
हेड की बात सुनकर भरत ने कहा,”उलटी गिनती आज से हमारी नहीं बल्कि देसाई की होगी,,,,,,,,हाह ! बेवकूफ आदमी”
भरत वहा से चला गया और हेड भी अपने केबिन की तरफ बढ़ गया।
नकुल से बात करने के बाद पृथ्वी अवनि को बाँहो में भरकर सोया ही था कि अगले ही पल उसका फोन फिर बजा। पृथ्वी ने फोन उठाया और देखा इस बार फोन जयदीप ने किया। पृथ्वी ने पहले तो फोन बजने दिया लेकिन जब दूसरी बार फिर जयदीप का फ़ोन आया तो उसने फोन उठाकर कान से लगाया और कहा,”हेलो,,,,,,,,,,,,!!!”
“हेलो पृथ्वी ! कहा हो तुम ? मुझे तुम्हे कुछ बताना है”,जयदीप ने जल्दबाजी भरे स्वर में कहा
“मैं दादर स्टेशन पर वडा पाव बेच रहा हूँ,,,,,,,,,,,क्या मतलब कहा हो ? आपने ही टिकट और रिसोर्ट बुक किया था तो फिर गोआ के अलावा कहा हो सकता हूँ मैं ?”,पृथ्वी ने पहले प्यार से कहा और फिर एकदम से झल्ला उठा
“ओह्ह्ह सॉरी ! मेरा मतलब था कि इस वक्त तुम अकेले हो ना ?”,जयदीप ने पूछा
पृथ्वी ने सुना तो चिढ गया और कहा,”कौनसा मर्द शादी के बाद अकेले हनीमून पर जाता है ?”
“अरे यार ! मेरा मतलब मुझे तुम्हे कुछ बताना है , अवनि तुम्हारे आस पास तो नहीं है ना वो पूछा मैंने”,जयदीप भी चिढ गया
“एक मिनिट”,पृथ्वी ने जयदीप से कहा , अवनि के सर के नीचे से अपना हाथ धीरे से निकाला और बिस्तर से निकलकर कमरे से बाहर चला आया और फोन कान से लगाकर कहा,”हाँ कहिये क्या बात है ?”
“मैंने प्राची देसाई को देखा”,जयदीप ने कहा
“आप क्यों उसे देख रहे है ? भूल गए आप शादीशुदा है”,पृथ्वी ने जयदीप को फटकार लगाई
“अरे ! मैंने उसे विक्रम कपूर के ऑफिस के बाहर देखा,,,,,,,,!!!”, जयदीप ने दबे स्वर में कहा क्योकि इस वक्त प्राची के सामने से ही गुजर रहा था
“तो आप ये मुझे क्यों बता रहे है ? वो विक्रम कपूर के ऑफिस के बाहर खड़ी रहे चाहे आपके ऑफिस के मुझे इस बात से कोई मतलब नहीं है ना ही मुझे उस लड़की से कोई मतलब है,,,,,,,,और आप ! आप ऑफिस काम करने जाते है या लड़कियों को देखने ,, ऐसा ही रहा तो ये कम्पनी जल्दी ही बंद हो जाएगी,,,,,,,,,,अब मैं रखता हूँ आप देखिये मिस प्राची को”,कहकर पृथ्वी ने फोन काट दिया।
“पृथ्वी ! पृथ्वी , हेलो,,,,,,,,,,,, हाह अजीब लड़का है मेरी बात तक नहीं सुनी”,जयदीप फोन देखकर बड़बड़ाया तभी उसके कानों में गाडी के हॉर्न की आवाज पड़ी। गाड़ी में बैठा अंकित उसका इंतजार कर रहा था। जयदीप ने फोन जेब में रखा और गाडी में आ बैठा और दोनों वहा से निकल गए।
जयदीप से बात करने के बाद पृथ्वी की नींद उड़ चुकी थी उसने फोन की स्क्रीन पर टाइम देखा। सुबह के 11 बज रहे थे। पृथ्वी को कमरे के बाहर देखकर एंथनी ने वेटर के हाथ उसके और अवनि के लिए कॉफी भिजवा दी।
वेटर कॉफी लेकर आया और पृथ्वी को ट्रे थमाकर चला गया। पृथ्वी अंदर आया। ट्रे टेबल पर रखा और अवनि की तरफ आकर उसे उठाने लगा लेकिन अवनि गहरी नींद में थी ! वह एक दो बार कुनमुनाई और मुँह फेरकर वापस सो गयी। पृथ्वी ने उसे जगाने की हर कोशिश की लेकिन अवनि तो जैसे उठना ही नहीं चाहती थी। पृथ्वी ने देखा कॉफी ठंडी हो रही है तो वह टेबल की तरफ आया अवनि को कॉफी को ढककर रखा और अपनी कॉफी लेकर खिड़की की तरफ चला आया। खिड़की के पास खड़ा पृथ्वी बाहर देखने लगा।
आज गोआ का मौसम काफी अच्छा था धूप बिल्कुल नहीं थी और आसमान में बादल मंडराए हुए थे जिस से बीच और भी खूबसूरत लग रहा था। कॉफी पीते हुए पृथ्वी की नजर बीच पर हाथ पकडे घूमते एक कपल पर पड़ी। दोनों साथ में बहुत ही प्यारे लग रहे थे और हँसते मुस्कुराते टहल रहे थे। लड़की ने लड़के से कुछ कहा और फिर लड़के के आगे भागने लगी , उसके पीछे भागते लड़के ने उसे पकड़ा और फिर गोद में उठाकर हसँते हुए गोल घूमने लगा।
ये नजारा बहुत ही रोमांटिक और खूबसूरत था जिसे देखकर पृथ्वी के होंठो पर भी मुस्कुराहट फ़ैल गयी। उसने गर्दन घुमाकर बिस्तर पर सोई अवनि को देखा और मुस्कराहट उसके चेहरे से गायब हो गयी क्योकि अवनि के साथ ऐसा कोई पल जीना तो दूर यहाँ आने के बाद वह उस से ठीक से बात तक नहीं कर पाया था।
( क्या विक्रम से हाथ मिलाकर प्राची ने सच में कर दी है कोई बड़ी भूल ? प्रवीण को ऑफिस से निकालकर मिस्टर देसाई के खिलाफ अब कौनसी नयी चाल चलने वाला है भरत ? क्या पृथ्वी जी पायेगा अवनि के साथ खूबसूरत पल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 5” मेरे साथ )
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Continue With Pasandida Aurat Season 3 – 21
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संजना किरोड़ीवाल


yaha par season 3 hoga season 5 ni do baar se episode me season 5 likh kar aata hai last me….
Yeh Avni sokar kab uthegi…itne time se so rhi hai..=bechra Prithvi honeymoon pe Avni k sath time spent Krna chahata hai, but Avni umeed hai ki wo jaldi neend se jagegi…tab tak Prithvi coffee ka mazaaa lo…aaj Praveen k liye dukh hua… bewajah usko Mr.Desai ne usko job se to nikal diya, ab Bhart se kaise bachoge…badhiya hai yeh Bharat Mr. Desai aur Prachi ko sabak sikhayega…