Pasandida Aurat Season 3 – 17

Pasandida Aurat Season 3 – 17

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

सिद्धार्थ ने सुरभि को फोन किया लेकिन सुरभि ने सिद्धार्थ का फोन नहीं उठाया क्योकि वह नशे में थी और सो चुकी थी। जगदीश जी के बुलाने पर सिद्धार्थ उनके साथ चला गया।

देसाई मेंशन , मुंबई
अपने कमरे में ड्रेसिंग के सामने बैठी प्राची अपने हाथो पर लोशन मल थी थी। उसकी मंद मंद मुस्कान और गुनगुनाते होंठ ये बयां कर रहे थे कि वह काफी खुश है। उसने लोशन लगते हुए शीशे में एक नजर खुद को देखा एक बड़ी सी मुस्कान उसके होंठो पर तैर गयी और उसने कहा,”मैं जानती थी पृथ्वी ! एक दिन मैं तुम्हे हासिल कर ही लूंगी और देखो आज मैं अपनी मंजिल की तरफ एक कदम बढ़ा चुकी हूँ। वैसे तुम्हारी नौकरी चली गयी इसका मुझे दुःख है लेकिन जब तुम्हारे पास नौकरी नहीं रहेगी और तुम अपनी प्यारी अवनि की जरूरतो को पूरा नहीं कर पाओगे तो वो तुम्हे छोड़कर चली जाएगी।

आफ्टर आल एक लड़की को पैसे के अलावा और चाहिए भी क्या ? और तब तुम्हे मेरी अहमियत समझ आएगी पृथ्वी , मैं जो तुम अपना तन मन और धन सब लुटाने के लिए तैयार हूँ,,,,,,,,,,वो अवनि तुम्हे क्या ही दे पायेगी ? ये एक हफ्ता तुम्हारी जिंदगी का सबसे हसींन हफ्ता होगा क्योकि इसके बाद तो मैं तुम्हारी और उस अवनि की जिंदगी में बर्बादी के वो काँटे बिछाऊँगी जिनपर ना तुम चल सकोगे ना ही अवनि”

प्राची ने लोशन का ढक्कन बंद किया और आकर बिस्तर पर लेट गयी लेकिन नींद आँखों से कोसो दूर , पृथ्वी के ख्याल उसे सोने नहीं दे रहे थे। वह करवटें बदलते हुए पृथ्वी के बारे में सोचती रही साथ ही अपनी नयी चाल पर खुश भी होती रही।

Fiesta Beach Resort , गोवा
पृथ्वी ने अपने और अवनि के लिए खाना आर्डर किया था। कुछ देर बाद बेल बजी तो पृथ्वी उठा और दरवाजा खोलकर सामने खड़े स्टाफ से खाना ले लिया। वह दरवाजा बंद करता उस से पहले ही अवनि पृथ्वी की तरफ आकर उसे साइड करती है और सामने खड़े लड़के से कहती है,”ये खाना तुमने बनाया है ?”
“नो मेम ! शेफ ने बनाया है”,लड़के ने सहजता से कहा

“इतना सारा खाना कौन खायेगा ? तुम भी हमारे साथ खाने आओ ना,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने लड़के का हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए कहा। वह नशे में कुछ भी बोल रही थी लेकिन वह लड़के का हाथ पकड़ पाती इस से पहले पृथ्वी ने दूसरे हाथ की बाँह को अवनि की कमर से लपेटा और लड़के से कहा,”आई ऍम सॉरी ! इन्होने थोड़ी वाईन पी ली है इसलिए ये होश में नहीं है , आप जाईये”
“इट्स ओके सर”,लड़के ने मुस्कुरा कर कहा और वहा से चला गया

पृथ्वी के एक हाथ में खाना था और दूसरे हाथ में अवनि की कमर उसने अवनि को उठाया और पैर से दरवाजा बंद करके सोफे की तरफ आया। उसने खाना टेबल पर रखा और अवनि को अपनी तरफ घुमाकर कहा,”ये क्या कर रही हो तुम अवनि ?”
“उसे खाने के लिए इन्वाइट कर रही थी”,अवनि ने मासूमियत से कहा
“वो हमारे साथ खाना नहीं खा सकता अवनि”,पृथ्वी ने कहा

“क्यों नहीं खा सकता ? क्या वो इंसान नहीं है , अह्ह्ह्ह तुम इतने पत्थर दिल कैसे हो सकते हो ? बाहर वो बेचारा लड़का भूखा बैठा होगा और यहाँ हम इतना अच्छा खाना अकेले खाएंगे ! मैं अभी उसे बुलाकर लाती हूँ”,नशे में धुत्त अवनि ने कहा और जाने लगी तो पृथ्वी ने उसे रोका और अपने सामने करके कहा,”कोई जरूरत नहीं उसने मुझे बताया कि उसने खाना खा लिया है और अब वो सोने जा रहा है”
“क्या सच में उसने ऐसा कहा ?”,अवनि ने अपनी बड़ी बड़ी पलकों को झपकाकर कहा

“हाँ,,,,,सच में”,पृथ्वी समझ गया कि आज की रात उसे अवनि को बहुत प्यार से हेंडल करना पड़ेगा
“हाह ! गन्दा लड़का , उसे हमारे साथ खाना खाना चाहिए था,,,,,,,,अब ये इतना सारा खाना क्या हम अकेले खाएंगे ?”,अवनि ने फिर मासूमियत से पूछा
“हम्म,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“लेकिन हम तो यहाँ हनीमून मनाने आये है , हम हनीमून कब मनाएंगे ?”,अवनि ने पूछा

बेचारा पृथ्वी , उसके हनीमून पर तो अवनि ने पहले ही वाईन और वोदका फेर दिया था वह बेचारा कहा ये सब सोचता , उसने कहा,”खाना खाने के बाद मनाएंगे”
“पहले क्यों नहीं ?”,अवनि के सवाल तो जैसे खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे थे
“क्योकि खाना ठंडा हो जाएगा,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और अपने ललाट पर हाथ मारकर कहा,”ओह्ह्ह हाँ ! मैं कितनी बड़ी बुद्धू हूँ ना,,,,,!!!”
“हाँ बहुत बड़ी,,,,,,,,,,लेकिन तुम मेरी बुद्धू हो , अब खाना खाये ?”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने 4-5 बार हामी में गर्दन हिलाई और फिर हिलाती ही चली गयी तो पृथ्वी ने फिर उसके सर पर हाथ रखकर उसे ऐसा करने से रोका। इस वक्त अवनि पृथ्वी को मासूम , प्यारी , छोटी बच्ची लग रही थी जिस पर वह चाहकर भी गुस्सा नहीं कर पा रहा था। पृथ्वी ने अवनि को सोफे पर बैठाया और खुद बगल में पड़ी कुर्सी पर आ बैठा। उसने अवनि का सेंडविच उसकी प्लेट में रखा और जूस के गिलास का ढक्कन खोलकर उसके सामने रखकर कहा,”ये तुम्हे अच्छा लगेगा”

अवनि ख़ामोशी से प्लेट में रखे सेंडविच को देखती रही लेकिन उठाकर खाया नहीं , पृथ्वी अपना खाना निकालने में बिजी था उसने अपने लिए चिकेन राइस और सूप आर्डर किया था ! उसने प्लेट में निकाला और देखा कि अवनि नहीं खा रही है तो उसने कहा,”क्या हुआ ! तुम खा क्यों नहीं रही हो ? अभी तो तुमने कहा था कि तुम्हे बहुत भूख लगी है,,,,,,,,,चलो खाओ”

“तुम्हारी प्लेट में इतना अच्छा खाना क्यों है ?”,अवनि ने मुँह बनाकर कहा
पृथ्वी फिर फंस गया अब अवनि को कैसे समझाए कि वह जो खा रहा है उसे खाने का ख्याल भी अवनि अपने दिमाग में नहीं ला सकती। उस बेचारे की भी बुद्धि पर पत्थर पड़ा था जो उसने अवनि के साथ रहते चिकेन आर्डर किया।

पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि ने कहा,”तुम टेस्टी खाना खुद खाना चाहते हो और मुझे ये ब्रेड खिला रहे हो,,,,,,,,,तुम अब मुझसे प्यार नहीं करते पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने सुना तो एक गहरी साँस ली और अवनि की तरफ देखकर कहा,”तुम इसे नहीं खा सकती अवनि क्योकि ये चिकेन है”
“चिकेन ? इसका मतलब तुम मुर्गी का बच्चा खा रहे हो ?”,अवनि ने हैरानी से कहा

“बच्चा नहीं मुर्गी”,पृथ्वी ने कहा और जैसे ही हाथ प्लेट की तरफ बढ़ाया अवनि ने एकदम से सोफे से उठी और कहा,”दुष्ट , पापी , अधर्मी , तुम किसी की मम्मी को कैसे खा सकते हो ?”
पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से अवनि की तरफ देखा , खाना तो दूर बेचारे ने अभी तक चिकेन को छुआ भी नहीं था उस से पहले ही अवनि उस पर बरस पड़ी। पृथ्वी ने हैरानी से कहा,”किसी की मम्मी ! तुम क्या कह रही हो अवनि ?”

“हाँ हाँ हाँ किसी की मम्मी , चिकेन की मम्मी,,,,,,,,,,,,तुम इतने पत्थर दिल कैसे हो सकते हो पृथ्वी ? उस बेचारी मुर्गी के छोटे छोटे बच्चे होंगे वो घर पर उसका इन्तजार कर रहे होंगे ,, उन मासूमो को तो पता भी नहीं कि एक कठोर दिल वाला जालिम आदमी उनकी मम्मी को खाने वाला है,,,,,,,,तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए पृथ्वी ! तुम्हे इसे नहीं खाना चाहिए”,अवनि कहते कहते मायूस हो गयी।
पृथ्वी ने सुना और हताश होकर कहा,”ऐसा कुछ नहीं होता है अवनि”

अवनि पृथ्वी के एकदम से करीब आयी और उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”होता है पृथ्वी ! अगर तुम ये खाओगे तो महादेव तुम्हे पाप देंगे , वो तुम्हे सजा भी देंगे और फिर तुम मरने के बाद भूत बन जाओगे,,,,,,,,,,,,,!!
कहते हुए अवनि एकदम से मुस्कुराई और अपने दोनों हाथो को गाल से लगाकर साइड में देखते हुए कहा,”लेकिन तुम हेंडसम भूत बनोगे फिर बहुत सारी भूतनी तुम्हारे प्यार में पड़ जाएगी,,,,,,,,,लेकिन मैं तो वहा नहीं रहूंगी ,, फिर तो मुझे भी तुम्हारे साथ मरना पड़ेगा न”

अवनि के मुँह से मरने की बात सुनकर पृथ्वी के मन में एक टीस उठी और उसने अवनि के होंठो पर अपना हाथ रखकर कहा,”बिल्कुल चुप ! मैं इसे नहीं खा रहा ठीक है”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी से दूर हटी और कहा,”ठीक है फिर इसे फेंक दो”
“फेंकना क्यों है मैं स्टाफ को बुलाकर इसे वापस दे देता हूँ”,पृथ्वी ने कहा और बिस्तर की तरफ चला गया जहा टेबल पर फोन रखा था उसने रिसीवर उठाया और स्टाफ भेजने को कहा।

कुछ देर बाद लड़का आया तो पृथ्वी ने उसे अपना खाना दिया और कहा कि वह खाना झूठा नहीं है इसलिए किसी जरूरतमंद को दे दे।
“मैं आपके लिए कुछ और ले आउ सर ?”,लड़के ने पूछा क्योकि पहले भी खाना लेकर वही आया था और उसे पृथ्वी की ऐसी हालत पर तरस आ रहा था। पृथ्वी ने मना कर दिया और दरवाजा बंद करके वापस सोफे की तरफ चला आया।  

पृथ्वी कुर्सी पर आ बैठा तो अवनि ने अपने जूस का गिलास उसके सामने रखकर कहा,”ये तुम पी लो”
पृथ्वी मुस्कुराया और गिलास उठाकर पीने लगा लेकिन उसने देखा अवनि अब भी नहीं खा रही है तो उसने जूस से आधा भरा गिलास टेबल पर रखा और अवनि से कहा,”अब क्या हुआ ! अब तुम ये सेंडविच क्यों नहीं खा रही हो ?”
“तुम खिलाओ”,अवनि ने कहा

पृथ्वी ने सुना तो कुर्सी से उठकर अवनि के बगल में आ बैठा और सेंडविच का टुकड़ा उठाकर उसे अपने हाथ से खिलाने लगा। अवनि ने एक दो निवाले खाये। जरा सा चीज अवनि के होंठ के पास लग गया। पृथ्वी ने अपने अंगूठे से उसे हटाया और खुद खा लिया। अवनि ने देखा तो उसने पीछे खिसककर कहा,”तुम्हे  भूख लगी है क्या ?”
पृथ्वी ने सुना अफ़सोस में अपनी गर्दन हामी में हिलायी जैसे कह रहा हो कि “हाँ एक भूखे आदमी से खाना छीनकर तुम उस से पूछ रही हो तुम्हे भूख लगी है क्या ?”

अवनि ने प्लेट में रखा एक सेंडविच का टुकड़ा उठाया और पृथ्वी से अपने पास आने का इशारा किया तो पृथ्वी ख़ुशी ख़ुशी अवनि के थोड़ा करीब आ बैठा उसे लगा अवनि उसे अपने हाथो से खिलाएगी लेकिन अवनि ने ऐसा नहीं किया बल्कि उसने सेंडविच का एक निवाला खाया और कहा,”लेकिन ये तो तुमने मेरे लिए मंगवाया न फिर तुम इसमें से क्यों खा रहे हो ?”

“मुझे नहीं खाना बच्चा ! तुम खाओ”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि ने प्लेट अपनी गोद में रख ली और खाने लगी। पृथ्वी वही सोफे पर गर्दन टिकाकर प्यार से अवनि को देखने लगा। खाते खाते अवनि का पेट भर गया या शायद उसे पृथ्वी पर थोड़ी दया आयी कि उसने प्लेट में बचा एक सेंडविच पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”इसे तुम खा लो मेरा पेट भर गया है,,,,,,,,,,,!!”

पृथ्वी ने चुपचाप प्लेट लिया और चुपचाप खाने लगा ! वह समझ चुका था कि वह अवनि से इस वक्त जितनी कम बात करेगा उसके लिए उतना ही अच्छा होगा और वह अवनि के उटपटांग सवालों से बच जाएगा। नशे में लोग ज्यादा रोमांटिक हो जाते है , अपने दिल में दबी बातो को उजागर करते है , अपने अंदर छुपे गुस्से को बाहर लाते है लेकिन यहाँ तो उलटा ही हो रहा था। पीने के बाद अवनि पृथ्वी के सामने कभी छोटी बच्ची बन जाती तो कभी एकदम से मासूम और उस पर उसके अजीब सवाल,,,,,,,,,,,!!!”

सेंडविच और जूस खत्म कर पृथ्वी उठा और अवनि से कहा,”चलो उठो और अपने दाँत ब्रश करो”
“क्या सुबह हो गयी है ?”,अवनि ने खिड़की के बाहर गर्दन निकालकर कहा जो कि सोफे के बिल्कुल बगल में ही थी। पृथ्वी ने उसे वापस अंदर खींचा और खिड़की बंद करके पर्दा लगाकर कहा,”सुबह नहीं हुई है , अभी तुमने खाना खाया ना इसलिए चलकर ब्रश करो”

अवनि ने सोफे से उठने के बजाय अपनी बाँहे फैला ही पृथ्वी समझ गया कि अवनि उसे उठाकर ले जाने के लिए कह रही है। पृथ्वी अवनि की तरफ आया उसे गोद में उठाया और बाथरूम के अंदर ले आया। उसने पहले खुद अपने हाथ धोये फिर अवनि के हाथ धुलवाये और फिर अवनि के ब्रश पर टूथपेस्ट निकालकर ब्रश उसे थमा दिया और खुद भी ब्रश करने लगा। पृथ्वी ने ब्रश किया , मुँह साफ किया और अवनि की तरफ पलटा तो देखा अवनि ब्रश हाथ में पकडे ही खड़ी है। पृथ्वी ने उसके हाथ से ब्रश लिया और खुद ही अवनि के दाँतो पर घिसकर उसे मुँह साफ़ करने को कहा

अवनि ने मुँह में पानी भरा और वाशबेसिन में थूक दिया लेकिन अगले ही पल उसने मुँह में फिर पानी भर लिया और उसे मुँह में ही रखा तो पृथ्वी ने कहा,”अवनि थूको इसे,,,,,,,,,,!!!!”
मुँह में पानी भरे अपने गालों को फुलाये अवनि ने ना में गर्दन हिलायी तो पृथ्वी ने थोड़ा कठोर स्वर में कहा,”मैंने कहा ना थूको इसे”

अगले ही पल वो हुआ जिसकी उम्मीद पृथ्वी को नहीं थी। अवनि ने मुँह में भरा पानी पृथ्वी पर ही बरसा दिया और पृथ्वी घूरकर अवनि को देखता रहा। पृथ्वी को घूरते पाकर अवनि ने इधर उधर देखा और जल्दी से तौलिया उठाकर उसका मुँह थपथपाने लगी तो पृथ्वी ने अवनि से तौलिया लिया और कहा,”बाहर जाओ मैं आता हूँ”
अवनि चुपचाप वहा से चली गयी लेकिन बाहर जाते जाते उसके होंठो पर शरारत भरी मुस्कान थी।

पृथ्वी ने तौलिया साइड में रखा और वाशबेसिन के सामने आकर अपना मुँह धोने लगा। अवनि की इस हरकत पर पृथ्वी को गुस्सा आना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योकि वह जानता था अवनि जो कुछ भी कर रही है नशे में कर रही है। उसने अच्छे से खुद को साफ किया और मुँह पोछते हुए बाहर चला आया। बाहर आकर पृथ्वी ने तौलिया रेंक पर डाल दिया और देखा अवनि बिस्तर पर बैठी किसी सोच में डूबी है तो पृथ्वी उसके सामने आ बैठा और कहा,”क्या सोच रही हो तुम ?”

“पृथ्वी ! हम यहाँ हनीमून मनाने आये है न ?”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर पूछा
“हम्म्म,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने धीरे से कहा
“हनीमून का मतलब क्या होता है ?”,अवनि ने फिर सवाल किया
पृथ्वी ख़ामोशी से अवनि को देखने लगा और मन ही मन सोचने लगा कि अवनि होश में होती तो वह उसके सवाल का जवाब भी देता लेकिन ऐसी हालत में भला वह क्या ही कहे  ?

पृथ्वी ने देखा अवनि उसे ही देख रही है तो उसने कहा,”हनीमून का मतलब होता है दो लोगो की शादी , शादी के बाद वो साथ वक्त बिताते है , अच्छी बाते करते है , एक दूसरे का ख्याल रखते है बस यही होता है”
अवनि ने सुना तो ताली मारकर हंसी और कहा,”हाह ! तुम एक नंबर के बुद्धू हो ! तुम्हे कुछ पता ही नहीं है,,,,,,,हनीमून का मतलब ये सब नहीं होता है , हनीमून का मतलब होता है एक दूसरे को प्यार करना,,,,,,,,!!”

पृथ्वी ने सुना तो फिर एक गहरी साँस ली और साइड में देखकर कहा,”हाँ ! ये भी होता है”
पृथ्वी को साइड में देखकर अवनि ने कहा,”तो फिर तुम मुझे प्यार क्यों नहीं कर रहे ?”
अवनि के इस सवाल का भला पृथ्वी क्या जवाब देता वह ख़ामोशी से अवनि को देखने लगा तो अवनि ने अपनी आँखों को बड़ा करके हैरानी भरे स्वर में कहा,”क्या तुम मर्द नहीं हो ?”
“ऑफकोर्स मैं हूँ”,पृथ्वी ने चौंककर कहा

“तो फिर तुम्हे मुझसे प्यार करना चाहिए ना”,अवनि ने कहा
“बिल्कुल करना चाहिए लेकिन तुम्हे मैं ये कैसे समझाऊ कि तुम होश में नहीं हो और मैं ऐसे हालातों में तुम्हारे करीब आना नहीं चाहता,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने मन ही मन कहा
पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि पृथ्वी के पास आयी और अपना सर उसकी गोद में रखकर कहा,”पृथ्वी ! मेरा सर बहुत घूम रहा है”

पृथ्वी समझ गया कि शराब अवनि पर हावी हो चुकी है और अब वह सोने वाली है। उसने अवनि को उठाया और खुद बिस्तर की दिवार से पीठ लगाकर बैठा और अवनि से अपने पास आने का इशारा किया। अवनि उसके पास आयी तो उसने अवनि का सर अपने सीने से लगाया और थपथपाने लगा। पृथ्वी के सीने से लगकर अवनि भी एकदम से शांत हो गयी। कुछ देर पहले जो अवनि पृथ्वी की नाक में दम किये हुए थी अब बहुत ही शांति से उसके सीने से लगकर सो रही थी।

पृथ्वी उसका सर थपथपाता रहा , जब अवनि को नींद आ गयी तो उसने बहुत सम्हलकर उसे साइड में लेटाया और तकिया उठाकर उसके सर के नीचे लगा दिया। उसने अवनि को कंबल ओढ़ाया और जैसे ही जाने लगा अवनि ने नींद में उसके हाथ की सबसे छोटी वाली ऊँगली पकड़ ली और नींद में बड़बड़ाई,”मैं यहाँ मौजूद इन सब लोगो से बेहतर हूँ,,,,,,,,,,,,!!”

पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और नीचे उकडू बैठकर धीरे से अवनि के हाथ से अवनि ऊँगली को छुड़ाया और अवनि के गाल पर आये बालों को साइड कर धीरे से कहा,”हाँ ! तुम बहुत अच्छी हो अवनि और तुम्हे खूबसूरत दिखने के लिये ये सब करने की जरूरत नहीं है,,,,,,,,,,,,तुम्हारी असली खूबसूरती तुम्हारी सादगी में है,,,,,,,,,,मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ , हमेशा करता रहूंगा , अपनी आखरी साँस तक”
कहकर पृथ्वी ने अपने होंठो से अवनि के ललाट को छुआ और उठकर सोफे की तरफ चला आया।

( क्या सिद्धार्थ फिर करेगा सुरभि को फोन और बताएगा उसे फोन ना उठाने की वजह ? क्या प्राची कर पायेगी अवनि को पृथ्वी से दूर और कर पायेगी हासिल पृथ्वी का प्यार ? क्या अगली सुबह लगने वाली है पृथ्वी के हाथो अवनि की क्लास ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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