Pasandida Aurat Season 2 – 99
Pasandida Aurat Season 2 – 99

सुरभि और सिद्धार्थ के बीच कुछ तो पक रहा था जिसका अहसास दोनों को था। सुरभि ने जब सिद्धार्थ से इंतजार के बारे में पूछा तो सिद्धार्थ ने कहा कि वह पूरी जिंदगी उसका इंतजार कर सकता है और सिद्धार्थ की इसी बात ने सुरभि के मन के तार झनझना दिए। सुरभि उदयपुर के लिए निकल गयी और पीछे छोड़ गयी मुस्कुराते सिद्धार्थ को क्योकि वह जानती थी यहाँ से एक नयी कहानी शुरू होने वाली है।
अवनि ने सुरभि को अपनी शादी में मुंबई आने को कहा लेकिन सुरभि मुंबई ना जाकर पहले उदयपुर जा रही थी ताकि अवनि की अमानत उस तक पहुंचा सके। शाम होते होते सुरभि उदयपुर पहुंची और घर न जाकर सीधा सुख विलास भवन चली आयी। अवनि के घरवालों ने सुरभि को देखा तो सब हैरान हो गए क्योकि जब से अवनि इस घर से गयी थी तब से सुरभि भी दोबारा कभी इस घर में नहीं आयी। सुरभि को आज अचानक आया देखकर कौशल चाचा ने कहा,”तुम यहाँ क्यों आयी हो ?”
सुरभि ने एक नजर सबको देखा और सहजता से कहा,”अवनि का कुछ जरुरी सामान है जिसे वह अपने साथ ले जाना भूल गयी थी , मैं वही लेने आयी हूँ”
“अब ये कौनसा नया नाटक है उसका ? उसे अपना सामान ही चाहिए था तो उसने तुम्हे क्यों भेजा खुद क्यों नहीं आयी ? तुम्हारे बहाने से क्या वह इस घर में और घर के लोगो के दिलो में फिर से अपनी जगह बनाना चाहती है ?”,मयंक चाचा ने गुस्से से कहा
सुरभि मुस्कुराई और कहा,”इस घर में उसके लिए जगह रही भी तो वह कभी यहाँ रहने नहीं आएगी और रही आप सबके दिलो में रहने की बात तो आप लोगो के दिल इतने छोटे है कि वहा कोई इंसान नहीं बल्कि सिर्फ उनकी गलतिया रह सकती है”
सुरभि की बात सुनकर मयंक चाचा के चेहरे पर गुस्से के भाव झिलमिलाने लगे और कौशल चाचा भी ख़ामोशी से उसे घूरने लगे। सीमा और मीनाक्षी ने सुना तो सीमा ने तो कुछ नहीं कहा लेकिन मीनाक्षी ने आगे आकर कहा,”जबान तो देखो कैसे कैंची की तरह चलती है तुम्हारी,,,,,,,,,,,जरूर अवनि ने तुम्हे यहाँ अपना कीमती सामान और अपनी माँ के गहने लेने भेजा होगा”
सुरभि मीनाक्षी की बदतमीजियों से अच्छे से वाकिफ थी इसलिए हंसकर कहा,”क्या चाची आप भी ! ये भी भला कोई ले जाने की चीज है ? अरे मैं तो यहाँ उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी अमानत लेने आयी हूँ,,,,,,,,,,,,!!!”
“सबसे बड़ी अमानत ? गहने और कीमती सामान नहीं तो फिर और कौन सी अमानत है ?”,मीनाक्षी चाची धीरे से खुद में ही बड़बड़ाई
“रहने दीजिये चाची वो कीमती चीज क्या है आप नहीं समझ पायेगी ,आपने कभी किसी से प्रेम जो नहीं किया”,मीनाक्षी से कहकर सुरभि कौशल चाचा के पास आयी और कहा,”चाचाजी ! आप इस घर के बड़े है , मैं आपसे इजाजत लेना चाहूंगी। क्या मैं अवनि के कमरे से उसकी अमानत ले सकती हूँ ?”
कौशल चाचा कुछ देर खामोश रहे और फिर कहा,”हम्म्म ! जाओ ले लो”
सुरभि मुस्कुराई और ख़ुशी ख़ुशी सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी।
“ये आपने क्या किया भाईसाहब ! आपने उसे अवनि के कमरे से सामान लेने को क्यों कहा ?”,मयंक ने अपनी नाराजगी जाहिर की
“हाँ भाईसाहब ! पता नहीं वो क्या क्या ले जाएगी ?”,मीनाक्षी ने कहा
“मयंक , मीनाक्षी अवनि पहले ही अपना सबकुछ यहाँ छोड़कर जा चुकी है अब भला वो यहाँ से क्या ही लेकर जाना चाहेगी ? सुरभि को मैंने नहीं रोका , क्या पता अवनि ने जो कभी हमे नहीं कहा वो उसे कहा हो,,,,,,,,,वह जो लेकर जाना चाहती है उसे ले जाने दो आखिर उसका भी इस घर पर हक़ है”,कौशल चाचा ने बुझे स्वर में कहा जिसे सुनकर मीनाक्षी और मयंक दोनों खामोश हो गए।
दीपिका सलोनी कार्तिक अंशु और नितिन वही मौजूद थे लेकिन सब खामोश , जब भी घर में अवनि का नाम आता इन सबके चेहरे उदासी से घिर जाते लेकिन अवनि के जाने के बाद किसी में इतनी हिम्मत नहीं हुई कि उस से मिल सके या बात कर सके। दीपिका अवनि को बहुत मानती थी और शुरू ही वह पृथ्वी की भावनाये जानती थी इसलिए जब सुरभि ऊपर अवनि के कमरे में गयी तो वह खुद को रोक नहीं पायी और सुरभि के पीछे चली आयी क्योकि सुरभि ने सबके सामने जिस अमानत की बात की थी उसके बारे में दीपिका भी जानती थी।
अवनि के कमरे के दरवाजे पर आकर दीपिका रुक गयी। सुरभि कमरे में आकर सीधा अवनि की स्टडी टेबल की तरफ आयी लेकिन जैसे ही ड्रॉवर खोलने की कोशिश की तो पाया कि ड्रॉवर लॉक है। सुरभि पलटी देखा दीपिका दरवाजे पर खड़ी है तो उसने दीपिका की तरफ आते हुए कहा,”ये ड्रॉवर शायद लॉक है ?”
“इसे मैंने ही लॉक किया था , रुकिए मैं चाबी लेकर आती हूँ”,कहकर दीपिका वहा से चली गयी और कुछ देर बाद अवनि के ड्रॉवर की चाबी लाकर सुरभि की तरफ बढ़ा दी।
सुरभि ने चाबी ली और दीपिका की तरफ देखकर हैरानी से पूछा,”तुमने इसे लॉक क्यों किया ?”
“क्योकि मैं नहीं चाहती थी उस ड्रॉवर का सच घरवालों के सामने आये और मुझे यकीन था कि उनकी ये अमानत एक दिन उन तक जरूर पहुचेंगी”,दीपिका ने प्यार से कहा
“तुमने ऐसा क्यों किया दीपिका ?”,सुरभि ने भावुक होकर कहा क्योकि अब तक उसे लगता था इस घर में सब अवनि से नफरत करते है उस से नाराज है जबकि दीपिका की बातो में आज भी अवनि के लिए अपनापन और सम्मान था।
दीपिका फीका सा मुस्कुराई और कहा,”इस घर के लोग कभी उनकी आँखों में उस शख्स के लिए मोहब्बत नहीं देख पाए वो दराज में रखे उन खतों की अहमियत क्या समझते ? मैंने उन्हें सिर्फ इसलिए सम्हाल कर रखा ताकि वो एक दिन उस इंसान तक पहुंच जाए जिनके लिए वो लिखे गए है”
सुरभि ने सुना तो नम आँखों से मुस्कुराई और दीपिका का गाल छूकर कहा,”जरूर पहुंचेंगे ! तुम बहुत अच्छी हो दीपिका”
दीपिका ने सुना तो मुस्कुराई और सुरभि से ड्रॉवर खोलने का इशारा किया। सुरभि ने अपनी आँखों के किनारे साफ़ किये और चाबी लेकर टेबल की तरफ चली आयी। उसने ड्रॉवर खोला और देखा सफ़ेद लिफाफे में बंद कुछ खत बहुत ही प्यार से सहेजकर रखे गए है और साथ ही बगल में रखा था एक छोटा सा डिब्बा।
सुरभि ने उन खतों को बाहर निकालकर रखा और फिर उस डिब्बे को खोलकर देखा जिसमे काले धागे में पिरोया “ॐ” बहुत ही प्यारा लग रहा था। सुरभि मुस्कुराई और डिब्बा बंद करके अपने पर्स में रख लिया और खतों को लेकर दीपिका की तरफ चली आयी। दीपिका को खामोश और उदास देखकर सुरभि ने अपना हाथ उसके गाल से लगाया और कहा,”उदास मत हो दीपिका ! तुम्हारी अवनि दीदी वहा मुंबई में बहुत खुश है और जिसे उसने अपना हमसफ़र चुना है वो उस से बहुत प्यार करता है। वो हमेशा उसका ख्याल रखेगा”
दीपिका मुस्कुराई और कहा,”जानती हूँ ! वो दीदी से कितना प्यार करते है ये तो मुझे कल ही पता चल गया था”
“मतलब ?”,सुरभि ने चौंककर कहा
“अह्ह्ह्ह कुछ नहीं ! कल से बस ऐसे ही अहसास हो रहा था कि अब अवनि दीदी की जिंदगी में जैसे खुशिया ही खुशिया होगी”,दीपिका ने तुरंत बात सम्हालकर कहा
“हम्म्म ! आओ चलते है”,सुरभि ने कहा और खतों को हाथ में उठाये दीपिका के साथ नीचे चली आयी।
सभी घरवाले हॉल में ही जमा थे। सुरभि आयी और अपने हाथ में पकडे उन खतों को दिखाकर कहा,”मैं यहाँ से सिर्फ ये कुछ खत लेकर जा रही हूँ जिन्हे अवनि ने लिखा है , इसके अलावा उसका खरीदा एक छोटा सा तोहफा बस इस से ज्यादा मैंने कुछ नहीं लिया है ! कल उसकी शादी है , इस शुभ अवसर पर अगर मैं उसे कुछ अनमोल चीज दे सकती हूँ तो वो है ये खत,,,,,,,,,,,,,!!!”
कहकर सुरभि जाने लगी , कुछ कदम चलकर वह रुकी और पलटकर कहा,”वो कही भी रहे , किसी के भी साथ रहे आप सबकी कमी उसे हमेशा रहेगी , आप सब उसके लिए कुछ ना कर पाए तो बस कल शाम यहाँ बैठकर ही सही उसे अपना आशीर्वाद जरूर देना क्योकि कल से वह एक नयी जिंदगी शुरू करने जा रही है , बस इस से ज्यादा उसे आपसे कुछ नहीं चाहिए”
सुरभि चली गयी और कौशल चाचा खामोश से सोफे पर आ बैठे। मयंक ने देखा तो वह भी उनके बगल में आ बैठा और उनके कंधे पर हाथ रखकर हामी में अपनी गर्दन हिला दी। सीमा और मीनाक्षी भी उनकी तरफ चली आयी और दीपिका को छोड़कर बाकि सब बच्चे भी बस दीपिका वहा से चली गयी क्योकि सुरभि के कहे शब्दों ने भले ही बाकि सबके चेहरे पर उदासी दी हो लेकिन उसकी आँखों में आँसू दे दिए थे।
नीलम भुआ का घर , पनवेल
शाम होते होते अवनि और पृथ्वी के हाथो में मेहन्दी लग चुकी थी। सुबह से भागदौड़ करते करते पृथ्वी थक चुका था इसलिए नीलम भुआ के कमरे में आकर सो गया पर उस बेचारे की किस्मत इतनी खराब की किसी ने उसे ठीक से सोने भी नहीं दिया वही अवनि बाकि घरवालों के साथ दूसरे कमरे में थी। सभी हंसी मजाक कर रहे थे , एक दूसरे की टाँग खींच रहे थे। पृथ्वी अपने भाई और चाचा से परेशान होकर दूसरे कमरे में आया और रोआँसा होकर दादी से बोला,”दादी ! उन लोगो को समझाओ ना वो मुझे सोने नहीं दे रहे है,,,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे कल तुम्हारी शादी है और तुमको सोने की पड़ी है,,,,,,,,बहुत सो लिए जाओ जाकर सबके बीच बैठो बाते करो”,दादी ने पृथ्वी को ही सुना दिया
पृथ्वी ने सुना तो चिढ़कर मुँह बना लिया और वहा बैठे सब लोग हसने लगे लेकिन पृथ्वी की नजर पड़ी अवनि पर जो कि सर झुकाकर उंगलिया होंठो से लगाये मुस्कुरा रही थी। सबके हसने से पृथ्वी को फर्क नहीं पड़ा लेकिन सबके साथ अवनि को हँसते देखकर वह चिढ गया।
उसने जेब से फोन निकाला और एक मैसेज टाइप करके अवनि को भेज दिया। अवनि ने मैसेज देखा तो उसकी हंसी बंद हो गयी उसने हैरानी से पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी मुँह बनाकर वहा से चला गया ! पृथ्वी का ऐसे चिढ़ना अवनि को बहुत प्यारा लग रहा था उसे जाते देखकर वह फिर मुस्कुरा उठी। अवनि की नजर स्क्रीन पर पड़ी और उसने पृथ्वी के भेजे मैसेज को पढ़ा लिखा था “आज का दिन तुम्हारा है बेटा लेकिन कल की शाम मेरी होगी,,,,,,,सता लो जितना सताना है मैं सबका बदला लूंगा”
अवनि ने फोन साइड में रखा और सबकी बाते सुनने लगी लेकिन उसके जहन में चल रहा था पृथ्वी
पृथ्वी चिढ़कर बाहर चला आया और सोफे पर आ बैठा लेकिन यहाँ भी उसे छेड़ने और परेशान करने वालो की कमी नहीं थी। कोई उसे उसकी प्रेम कहानी के बारे में पूछता तो कोई अवनि और उसकी पहली मुलाकात के बारे में , कोई उसे ये कहकर चिढ़ाता कि अवनि जैसी लड़की उसके प्यार में पड़ी कैसे तो कोई उसकी किस्मत पर नाज करता , कुछ देर चिढ़ने के बाद पृथ्वी भी सबके साथ हसने मुस्कुराने लगा।
रात के खाने के बाद तय हुआ कि घर में शादी है और कोई शोर शराबा नहीं बस फिर क्या था हिमांशु भैया मोहित और लक्षित स्पीकर्स ले आये और जो शोर शराबा शुरू हुआ सुबह के 2 बजे जाकर बंद हुआ और सभी सोने चले गए क्योकि अगली सुबह सबको गेस्ट हॉउस जाना था और शादी की इतनी सारी तैयारियां भी तो करनी थी।
अवनि की आँखों से नींद गायब थी तो वही पृथ्वी भी जाग रहा था और दोनों अलग अलग कमरों की खिड़कियों पर खड़े आसमान में चमकते चाँद को देख रहे थे।
पृथ्वी ने अपने हाथो को बांधा और पीठ खिड़की की दिवार से लगाकर खाली आसमान को देखते हुए कहने लगा,”तुम सही कहती थी अवनि कि महादेव से माँगो तो वो सब देते है,,,,,,,,,,,,,मैंने तुम्हे ही उनसे मांग लिया और उन्होंने तुम्हे मुझे सौंप दिया क्योकि वो जानते थे तुम्हे सम्हालने के लिए मेरे जैसे ही किसी इंसान का तुम्हारी जिंदगी में होना जरुरी है
सोचो ये सब एक किताब से शुरू हुआ था एक ऐसी किताब जो महादेव के नाम से शुरू होती है , हमारी किस्मत तो एक दूसरे से उसी शहर में जुड़ चुकी थी और हमे एक दूसरे की किस्मत में लिखने वाले है महादेव,,,,,,,,,,,,,,तुम्हारे नहीं नहीं हमारे महादेव,,,,,,,,,हाह ! हैरानी होती है मुझे कि मुझ जैसा इंसान जो ईश्वर में नहीं मानता था उसके होंठो पर अब महादेव का नाम रहता है ,, तुमने मुझे बदल दिया है अवनि लेकिन ये बदलाव अच्छा है बहुत अच्छा है,,,,,,,,,,,,,,बस सिर्फ कुछ घंटे और फिर तुम हमेशा हमेशा के लिए मेरी हो जाओगी,,,,,,,,,,,,
सोचो मुझसे ज्यादा खुशनसीब इंसान कौन होगा जो अपनी ही पसंदीदा औरत से दूसरी बार शादी करने जा रहा है,,,,,,,,,,,,ये सब बाते मैं तुम्हारे सामने बैठकर करना चाहता हूँ लेकिन घरवाले भी कितने जालिम है ना अवनि उन्होंने शादी तक हमे दूर रखा है पर मुझे यकीन है ये दूरिया इस बार हमे एक दूसरे के और करीब ले आएगी,,,,,,,,,सोचता हूँ कैसे सम्हाल पाउँगा उस पल खुद को जिस पल मैं तुम्हे शादी के जोड़े में देखूंगा,,,,,,उफ्फ्फ क्या ही पल होगा वो,,,,,,,,मेरा दिल तो अभी से धड़क रहा है कही तुम्हे देखकर मैं मर ही ना जाऊ”
अपने दिल की बाते खाली आसमान को सुनाते हुए पृथ्वी मुस्कुराने लगा। जिस दिवार से पीठ लगाकर वह खड़ा था उसी दिवार से पीठ लगाकर अवनि खड़ी थी उसने भी खाली आसमान को देखा और फिर चाँद को देखकर कहने लगी ,”सोचा नहीं था प्रेम से दूर भागने वाली मैं एक रोज तुम्हरे प्रेम में पड़ जाउंगी। आपसे प्रेम तो बहुत पहले ही हो गया था पृथ्वी बस समझते समझते थोड़ा वक्त लग गया। बेशक मैं प्रेम कहानिया लिखती हूँ लेकिन असल में प्रेम क्या है ये मैंने आप से सीखा है पृथ्वी !
कहते है कि प्रेम की कोई सूरत नहीं होती पर मैंने देखी है आपके रूप में,,,,,,,,,,पाकसाफ और निश्छल ! इस जीवन में आपने मुझे जो दिया है उसके बदले में अगर मैं अपना सम्पूर्ण जीवन भी आपके नाम कर दू तो कम होगा , अब से मेरी हर साँस पर सिर्फ आपका हक़ होगा। जानती हूँ ये दूरिया आपको परेशान कर रही है पर यकीन है इन दूरियों के बाद का मिलन उन सब जख्मो को भर देगा जो वक्त ने हमे दिए है,,,,,,,,,,,मुझे बस कल का इंताजर है कल मेरी जिंदगी का सबसे खूसबूरत कल होगा,,,,,,,,,,,,,कोई उस कल में आप मेरे साथ होंगे मेरे दाँये भाग में”
अवनि ने अपनी आँखे मूँद ली और पीठ दिवार से लगाए रखी वही पृथ्वी भी मुस्कुराते हुए अवनि के बारे में सोचने लगा उसे तो पता भी नहीं था कि अवनि के दिल में उसके लिए इतनी मोहब्बत है
अगली सुबह सभी तैयार होकर गेस्ट हॉउस के लिए निकल गए। पहले पृथ्वी को अवनि के पास नहीं जाने दिया जा रहा था अब तो उसे अवनि को देखना तक नसीब नहीं हो रहा था। गेस्ट हॉउस पहुंचकर उसे कभी इस रस्म तो कभी उस रस्म के नाम पर परेशान किया जा रहा था और पृथ्वी को सब करना पड़ रहा था।
दोपहर तक वह अच्छा खासा परेशान हो चुका था उस पर सुबह से अवनि से बात तक नहीं की थी ना उसे देखा था। कमरे में बिस्तर पर पेट के बल लेटा पृथ्वी सुस्ता रहा था कि तभी उसका फोन बजा।
पृथ्वी ने स्क्रीन पर जयदीप का नंबर देखा तो फोन उठाया और कान से लगा लिया।
“पृथ्वी ! एक बार फिर सोच लो , क्या तुम सच में ये नौकरी छोड़ना चाहते हो ?”,जयदीप ने गंभीर और उदासीन स्वर में कहा
पृथ्वी ने सुना तो उठकर बैठ गया और कहा,”मैं दो बार नहीं सोचता सर,,,,,,,,,,,आपने मेरे लिए बहुत कुछ किया है अब मेरी बारी , आप मेरा रिजाइन लेटर मिस्टर भरत को भेज दीजिये और उसके बाद सभी डील्स को कन्फर्म कर दीजिये,,,,,,,,,,,!!!”
“लेकिन पृथ्वी मुझे अच्छा नहीं लग रहा”,जयदीप ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो अपना ललाट खुजाया और कहा,”मैं क्या आपकी गर्लफ्रेंड हूँ जो मेरे बिना मन नहीं लगेगा और सिर्फ ऑफिस छोड़ा है मैंने शहर नहीं,,,,,,,,आज मेरी शादी है इसलिए ये सब बेकार बातें मत कीजिये और हाँ शाम को टाइम से पहुंच जाना”
“पृथ्वी ! पृथ्वी ! उफ़ ये लड़का , कब समझेगा मुझे ?”,जयदीप खुद में ही बड़बड़ाया क्योकि पृथ्वी फोन काट चुका था।
जयदीप ने फोन रखा और भारी मन के साथ पृथ्वी का रिजाइन लेटर भरत को भेज दिया। अगले कुछ ही मिनटों में जयदीप को देसाई ग्रुप की तरफ से पेंडिंग डील्स का कन्फर्मेशन मेल मिला जिसे देखकर जयदीप हैरान रह गया और खुद में ही बड़बड़ाया,”आखिर ये भरत पृथ्वी से चाहता क्या है ?”
( क्या सुरभि पंहुचा पायेगी अवनि तक उसकी अमानत ? क्या अवनि करेगी पृथ्वी से अपने प्यार का इजहार ? आखिर भरत क्यों पड़ा है पृथ्वी के पीछे ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” सीजन 2 मेरे साथ )
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Continue With Pasandida Aurat Season 2 – 100
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संजना किरोड़ीवाल


Yeh Bharat nhi Prachi Desai hai inn sabke peeche…khar aaj to Avni aur Prithvi ki shadi hai to Jaideep sir time se pahucheye…bas ab sham ka wait hai jab Avni aur Prithvi ki shadi hogi aur usme Avni k ghar wale bhi shamil honge…lakin yeh dekhna hoga ki Surbhi Avni ki amanat kab usko sopegi.