Pasandida Aurat Season 2 – 96

Pasandida Aurat Season 2 – 96

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

जयदीप ने पृथ्वी से कहा कि उसके पास पृथ्वी को सुनाने के लिए एक बुरी खबर है और पृथ्वी ने कहा कि उसके पास एक अच्छी खबर है। जयदीप ने सुना तो ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगा। आज जयदीप की ये ख़ामोशी पृथ्वी को कुछ ज्यादा ही परेशान कर रही थी इसलिए उसने कहा,”अच्छा ठीक है पहले आप सुनाईये बुरी खबर क्या है ? उसके बाद मैं आपको अच्छी खबर सुनाऊंगा”
जयदीप की हिम्मत नहीं हो रही थी उसने पृथ्वी का ख़ुशी से भरा चेहरा देखा और कहा,”क्या तुम सच में सुनना चाहते हो पृथ्वी ?”

“हाँ ! और ये बुरी खबर है ये तो मैं सुनने के बाद ही  तय करूंगा और अगर बुरी हुई भी तो मेरे पास अच्छी खबर है न उसे सुनाकर मैं सब बेलेंस कर लूंगा। जैसे कड़वी दवा खाने के बाद अक्सर हम मीठा खाकर उसकी कड़वाहट कम करते है ठीक वैसे ही,,,,,,,,,,,,अब बताईये क्या खबर है जो आपको इतना परेशान किये हुए है ?”,पृथ्वी ने बड़े प्यार से कहा

जयदीप ने एक गहरी साँस ली और फिर पृथ्वी को वो सब बता दिया जो बीते कल मे मिस्टर देसाई के ऑफिस में हुआ था और फिर कुछ देर रुककर कहा,”अगर मुझे इन प्रोजेक्ट्स को बचाना है तो मुझे , मुझे तुम्हे नौकरी से निकालना होगा”

जयदीप ने भारी मन के साथ ये बात कही लेकिन पृथ्वी के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वह खामोश था और जयदीप को देख रहा था जैसे उसे पहले से पता हो कि ऐसा कुछ होने वाला है। पृथ्वी को खामोश देखकर जयदीप उसके सामने से हटा। वह गुस्से और तकलीफ भरे स्वर में कहने लगा,”वो भरत इतना गिर सकता है मैंने कभी सोचा नहीं था पृथ्वी ,,

जिन प्रोजेक्स को मिस्टर देसाई और प्राची ने एक्स्पेट किया था भरत ने उन्ही प्रोजेक्स्टस को रोक दिया है और शर्त ये कि अगर मुझे अपनी कम्पनी और अपनी डील बचानी है तो तुम्हे नौकरी से निकालना होगा,,,,,,,,,,,,,,,ये मैंने कैसे कर सकता हूँ ? मैं ,मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता पृथ्वी,,,,,,,,,,,!!!!”

कहते हुए जयदीप पृथ्वी की तरफ पलट गया और देखा अभी भी पृथ्वी के चेहरे पर शांत भाव थे और वह अपने दोनों हाथो को आपस में बाँधे खड़ा था उसने जयदीप को देखा और कहा”,अगर आप दिल के बजाय दिमाग से सोचे तो आप ऐसा कर सकते है”
जयदीप ने सुना तो हैरानी और गुस्से के भाव से पृथ्वी को देखा और उसके सामने आकर कहा,”तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है पृथ्वी , तुम चाहते हो मैं उस भरत के सामने झुक जाऊ और इन प्रोजेक्स्ट्स के लिए तुम्हारे साथ नाइंसाफी कर दू तो आई ऍम सॉरी  मुझसे ये बिल्कुल नहीं होगा।

जबसे मैंने ये कम्पनी शुरू की थी तब से तुम मेरे साथ हो , आज मैं और मेरी कम्पनी जो कुछ भी है उसमे सबसे ज्यादा मेहनत तुम्हारी है पृथ्वी और तुम चाहते हो मैं अपने स्वार्थ के लिए उस भरत की बात मान लू और तुम्हे नौकरी से निकाल दू ,मैं इतना भी सेल्फिश नहीं हूँ समझे तुम,,,,,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने सुना तो धीरे से मुस्कुराया और कहा,”सच में यार बड़े सेंटी आदमी हो आप,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी की बात सुनकर जयदीप उस देखने लगा तो पृथ्वी ने आगे बड़े ही सधे हुए स्वर में कहा,”मिस्टर जयदीप ! बिजेनस में दिल नहीं दिमाग इस्तेमाल करना चाहिए। इस वक्त आपकी कम्पनी को मेरी नहीं बल्कि उन 6 प्रोजेक्ट्स की ज्यादा जरूरत है क्योकि उनके लिए आपने दिन रात मेहनत की है और थोड़ी सी मैंने भी और मैं बिल्कुल नहीं चाहूंगा कि मेरी वजह से या मेरे लिए आप इस नुकसान की भरपाई करे।

आपको एम्प्लॉय और मिल जायेंगे लेकिन सालों की मेहनत का मलाल एक बार रहा तो फिर वो जिंदगीभर नहीं जाएगा,,,,,,,,,,,आप मुझे नौकरी से निकाल दीजिये मैं ख़ुशी ख़ुशी जाने के लिए तैयार हूँ”

जयदीप ने सुना तो गुस्से से कहा,”ये तुम क्या कह रहे हो पृथ्वी ? उस भरत का दिमाग खराब हो चुका है इसलिए वह ये सब कर रहा है लेकिन तुम तुम तो समझदार हो ना फिर तुम ऐसी बाते कैसे कर सकते हो ? मैं तुम्हे कैसे निकाल सकता हूँ यार ? क्या मैं नहीं जानता तुमने इस ऑफिस में कितनी मेहनत है,,,,,,,,,,,हाँ मानता हूँ डील हाथ से गयी तो मुझे नुकसान होगा लेकिन अगर तुम चले गए तो वो नुकसान इस से भी बड़ा होगा और मैं ये नुकसान नहीं चाहता,,,,,,,,,,,,आई ऍम सॉरी मैं उस भरत की कोई बात नहीं मानूंगा,,,,,,,,,,,,उस से जो बन पड़ता है वो कर ले”

पृथ्वी ने देखा जयदीप उसकी कोई बात सुनने को  तैयार ही नहीं है तो उसने अपना सर पकड़ लिया और जयदीप के पास आकर कहा,”सर ! भरत वही कर रहा है जो वह करना चाहता है,,,,,,,,,,,,,,आपने मुझसे कहा था न कि देसाई ग्रुप में कुछ तो गड़बड़ है , वो गड़बड़ मिस्टर भरत ही है सर और वो बहुत अच्छे से जानता है कि आपकी कम्पनी में रहते हुए अगर मैंने देसाई ग्रुप से कॉन्टेक्ट रखा तो वह कभी भी अपने मंसूबो में सफल नहीं हो पायेगा बस इसलिए उसने प्रोजेक्ट्स के बदले में मुझे नौकरी से निकाल देने की बात कही ,और इसके लिए इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है।

आपको इस वक्त सिर्फ अपनी कम्पनी की फ़िक्र करनी चाहिए और उसे बचाने के लिए आपसे जो हो सके वो करना चाहिए”
जयदीप ने सुना तो उसे समझ आया कि भरत की दुश्मनी जयदीप या मौर्या ग्रुप से नहीं बल्कि पृथ्वी से थी इसलिए उसने जयदीप के सामने ऐसी शर्त रखी। जयदीप को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे क्योकि वह किसी भी हाल में पृथ्वी को जाने देना नहीं चाहता था।  

जयदीप को सोच में डूबा देखकर पृथ्वी ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा,”इतना मत सोचिये ,मैं जो कह रहा हूँ वो कीजिये , इस भरत का भरता कैसे बनाना है ये मैं खुद देख लूंगा”
“लेकिन मैं ऑफिस में सबको तुम्हे निकालने की वजह क्या दूंगा ?”,जयदीप ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“आपको किसी को कोई वजह देने की जरूरत नहीं है , मैं खुद सामने से रिजाइन दूंगा। इतने साल आपका नमक खाया है आपका सर शर्म से झुकने तो बिल्कुल नहीं दूंगा,,,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा

जयदीप ने सुना तो उसकी आँखों में नमी तैरने लगी वह आगे बढ़कर पृथ्वी के गले लगा और उदासी भरे स्वर में कहा,”मुझे माफ़ कर देना पृथ्वी , आई ऍम रियली सॉरी,,,,,,,,,,,मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर पा रहा हूँ”
जयदीप से हमेशा चिढ़ने वाले ,उस दे दूर भागने वाले ,उस से बहस करने वाले पृथ्वी ने भी आज जयदीप को नहीं रोका क्योकि वह समझ रहा था जयदीप इस वक्त किन हालातों से गुजर रहा है।

पृथ्वी ने धीरे से जयदीप की पीठ थपथपाई और कहा,”आपको इस तरह कमजोर नहीं पड़ना चाहिए भरत जैसे लोग आपको कदम कदम पर मिलेंगे उनका सामना कीजिये,,,,,,,,,,,,,और अब दूर हटिये मुझसे कितना चिपकेंगे , क्या आपने मुझे अपनी गर्लफ्रेंड समझ लिया है ?”
जयदीप ने सुना तो दुःख और उदासी में भी मुस्कुरा उठा और पृथ्वी से कहा,”इस जन्म में तो नहीं पर हा पिछले जन्म में तुम जरूर मेरे कोई बहुत करीबी रहे होंगे जो इस जन्म में मेरे साथ हो”

पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुरा दिया। जयदीप ने अपनी आँखों के किनारे साफ किये और कहा,”अच्छा तुम मुझे कोई अच्छी खबर देने वाले थे ,बताओ वो क्या है ?”
“कॉफी पीते हुए बात करे ?”,पृथ्वी ने आज सामने से जयदीप को कॉफी के लिए पूछा
“तुम मेरे साथ कॉफी पीना चाहते हो ?”,जयदीप ने हैरानी से पूछा

“हाँ ! मैंने सोचा क्यों न जाने से पहले आपके साथ एक आखरी कॉफी हो जाए , इसके बाद पता नहीं फिर कभी मौका मिले या ना मिले”,पृथ्वी ने जानबूझकर जयदीप को छेड़ते हुए कहा  

जयदीप ने सुना तो फिर उदास हो गया और रोआँसा होकर कहा,”देखो अब तुम ऐसी बातें करोगे तो मैं सच में रो दूंगा और क्या मतलब आखरी कॉफी,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी हंस पड़ा और कहा,”अच्छा सॉरी ! बैठिये मैं आर्डर करता हूँ”
कहकर पृथ्वी ने टेबल पर रखे रिसीवर को उठाया और केंटीन में फोन करके दो कप कॉफी भेजने को कहा। जयदीप सोफे पर आ बैठा और उसके बगल में पड़े सोफे पर पृथ्वी आ बैठा।

कुछ देर में केंटीन बॉय कॉफी ले आया और रखकर चला गया। पृथ्वी ने एक कप जयदीप को दिया और दुसरा कप खुद लेकर पीने लगा। जयदीप ने एक घूंठ भरा और कहा,”सो क्या है वो अच्छी खबर ?”
पृथ्वी ने कॉफी का एक घूंठ भरा और चेहरे पर ख़ुशी के भाव और आँखों में चमक लाकर कहा,”दो दिन बाद मेरी और अवनि की शादी है”
जयदीप ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”तुम अवनि से पहले ही शादी कर चुके हो और कितनी बार शादी करोगे ?”

पृथ्वी ने सुना तो थोड़ा और मुस्कुराया और अपने सीने पर बाँयी तरफ हाथ रखकर कहा,”अह्हह्ह्ह्ह मेरा बस चले तो मैं हर महीने उस से शादी करू”
जयदीप ने सुना तो अपना सर झटका और कहा,”लगता है तुम अभी भी अवनि के प्यार में हो”
पृथ्वी ने सुना तो चौंककर कहा,”हो ? मैं जिंदगीभर उसके प्यार में रहना चाहता हूँ,,,,,,,,,अपनी आखरी साँस तक मैं सिर्फ उस से प्यार करना चाहता हूँ,,,,,,,,,!!!”

“अच्छा बताओ अच्छी खबर क्या है ?”,जयदीप ने पूछा
पृथ्वी तक तक अपनी कॉफी खत्म कर चुका था इसलिए खाली कप टेबल पर रखकर आराम से सोफे पर बैठा और कहा,”आई बाबा ने मुझे माफ़ कर दिया है और अवनि को भी अपना लिया है। सब घरवाले मान गए है अवनि को घर लाने से पहले वो सब इस शादी को फिर से पुरे रीती रिवाज से करना चाहता है। दो दिन बाद शादी है और अवनि चाहती है आप भी इस शादी में आये”

पृथ्वी की बात सुनकर जयदीप की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा उसने हाथ में पकड़ा कॉफी से आधा भरा कप नीचे रखा और ख़ुशी के मारे पृथ्वी की तरफ बढ़कर उसे गले लगाकर कहा,”ये कहकर तुमने सच में मेरा दिल खुश कर दिया पृथ्वी,,,,,,,लेकिन ये क्या सिर्फ अवनि चाहती है कि मैं तुम दोनों की शादी में आउ , तुम क्यों नहीं चाहते ?”
पृथ्वी ने खुद को जयदीप से दूर किया और कहा,”आपकी इन हरकतों की वजह से,,,,,,,,,,मुझसे दूर रहिये मैं अब दूसरी बार शादीशुदा होने वाला हूँ”

जयदीप ने सुना तो अफ़सोस में अपना सर झटका और कहा,”कुछ नहीं हो सकता तुम्हारा”
पृथ्वी उठा और कहा,”सब हो रहा है मेरी पसंदीदा औरत में मेरी शादी हो रही है वो भी सबकी मंजूरी के साथ,,,,,,,,,,इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए”
जयदीप ने सुना तो वह भी उठा और कहा,”कोन्ग्रेचुलेशन ! मैं तुम दोनों के लिए बहुत खुश हूँ ,मैं और रीना जरूर आएंगे”

“थैंक्यू ! मैं अब चलता हूँ कल से उसे देखा तक नहीं है , एक बार जाकर उस से मिल लेता हूँ,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने जयदीप से हाथ मिलाकर कहा
“पृथ्वी ! एक बार फिर सोच लो क्या तुम सच में ये नौकरी छोड़ना चाहते हो ?”,जयदीप ने बुझे स्वर में कहा

पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”ये नौकरी मैं सिर्फ आपके लिए छोड़ रहा है , मैं पिछले जन्म के बारे में तो नहीं जानता लेकिन हाँ इस जन्म में मेरा आपसे करीबी रिश्ता जरूर है और वो रिश्ता है दोस्ती का,,,,,,,,,,आपने मेरे लिए जो किया है उसके सामने ये नौकरी कुछ भी नहीं है। चलता हूँ”

कहकर पृथ्वी वहा से चला गया लेकिन जाते जाते जयदीप की आँखों में आँसू दे गया। आँसू सिर्फ जयदीप की आँखों में ही नहीं थे बल्कि नमी पृथ्वी की आँखों में भी थी इसलिए तो वह अपनी बात कहकर तुरंत निकल गया ताकि जयदीप उसकी आँखों में ना झाँक ले।

नीलम का घर ,पनवेल
दोपहर तक सभी खरीदारी करके घर चले आये। बड़े पापा अपने घर जा चुके थे लेकिन बड़ी मम्मी , लता जी और रवि जी नीलम के घर पर ही थे। सभी हॉल में आ बैठे ,अवनि भी सबके बीच चली आयी तो दादी ने उसे अपने पास बैठा लिया। लक्षित , हिमानी और मोहित भी कॉलज से आ चुके थे इसलिए सीधा नीलम भुआ के घर ही चले आये।

दादी और घर के बड़ो ने मिलकर ये फैसला किया कि हल्दी और मेहँदी की रस्म नीलम भुआ के घर में होगी क्योकि उनका घर बड़ा था और शादी वाले दिन शाम में सभी गेस्ट हॉउस चले जायेंगे। वही से फिर पृथ्वी और अवनि अपने आई बाबा के घर जायेंगे।

सबको ये आइडिआ पसंद आया और सब इस पर चर्चा करने लगे कि कौन क्या पहनेगा ? कब कौनसी रस्म होगी ? सब बातें कर रहे थे लेकिन अवनि चुपचाप सबको देख रही थी क्योकि सभी घरवाले हिंदी कम और मराठी ज्यादा बोल रहे थे और क्या बोल रहे थे ये अवनि को समझ नहीं आ रहा था क्योकि सब उसके सर के ऊपर से जा रहा था।
“अरे भाई बाकि सब तो ठीक है लेकिन जिसकी शादी है वो कहा है ?”,दादी ने कहा
“हाँ पृथ्वी कल से दिखाई नहीं दिया ,अवनि बेटा तुम्हारी बात हुई पृथ्वी से ?”,रवि जी ने पूछा

“जी ! वो कल किसी काम से बाहर गए थे आज सुबह ही आये है फिर ऑफिस चले गए”,अवनि ने धीरे से कहा
“लो कर लो बात , पहले ये लड़का ‘शादी करा दो , शादी करा दो’ की रट लगाए था और अब जब शादी का वक्त आया तो खुद ही गायब हो गया।”,नीलम भुआ ने कहा तो सभी हंस पड़े और अवनि ने शर्माकर नजरे झुका ली
तभी डोरबेल बजी और हिमानी ने कहा,”जरूर पृथ्वी भैया ही होंगे , वहिनि के बिना उनका मन जो नहीं लग रहा होगा”

सब एक बार फिर हंस पड़े और अवनि शरम से पानी पानी हो गयी क्योकि सबके बीच उसे ये सुनने को मिल रहा था। वह नजरे झुकाये बैठी रही लेकिन उसका दिल कह रहा था कि दरवाजे के उस पार पृथ्वी ही होगा , जैसे ही हिमानी ने दरवाजा खोला अवनि ने कनखियों से देखा और उसका दिल धड़क उठा।

चौखट पर पृथ्वी खड़ा था। पृथ्वी को देखकर हिमानी ख़ुशी से पलटी और कहा,”देखा मैंने कहा था ना अपने पृथ्वी भैया ही होंगे,,,,,,,,,,!!”
कहते हुए हिमानी ने पृथ्वी की बाँह थामी और उसे हॉल की तरफ लाते हुए कहा,”आईये आईये भैया आपका ही इंतजार हो रहा था,,,,,,,,,,,कोई तो आपको देखने के लिए कल से परेशान है”

पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुरा उठा क्योकि हाल में इतने लोगो के बैठे होने के बावजूद भी पृथ्वी की नजरें अवनि पर थी और अवनि शरम से खुद में ही सिमटी जा रही थी। पृथ्वी सबके बीच चला आया उसने अपना बैग हिमानी को दिया ताकि साइड में रख दे और नीचे जमीन पर आ बैठा जहा लक्षित और मोहित भी पसरे पड़े थे  
“हाँ भई ! दो दिन बाद शादी है तुम्हारी और तुम ऑफिस में हो,,,,,,छुट्टी क्यों नहीं ली ?”,रवि जी ने कहा
“हाँ आज से एक हफ्ते की छुट्टी ले ली है बाबा”,पृथ्वी ने कहा

“बहुत सही किया लेकिन बेटा शादी से पहले तुम्हे यहाँ आने और अवनि से मिलने की परमिशन नहीं है”,नीलम भुआ ने कहा
“ए भुआ ! वो मेरी बायको है उस से मिलने के लिए मुझे आप सबकी परमिशन की जरूरत नहीं है,,,,,,,,,,हाँ आप लोग चाहे तो शादी तक उसे अपने साथ रखने की परमिशन ले सकते है मुझसे ,मैं मना नहीं करूंगा”,पृथ्वी ने नीलम भुआ को छेड़ते हुए कहा

नीलम भुआ ने आकर पृथ्वी का कान मरोड़ा और कहा,”नालायक ! अब इतना बड़ा हो गया तू कि मैं तुझसे परमिशन लूंगी , रुक अभी तेरी अकल ठिकाने लगाती हूँ”

पृथ्वी भी नाटक करने लगा जैसे उसे बहुत दर्द हो रहा हो ये देखकर अवनि ने कहा,”छोड़ दीजिये ना भुआजी ! उन्हें दर्द हो रहा होगा”
अवनि की बात सुनकर पृथ्वी के दिल को तो सुकून मिला लेकिन बाकी सब अवनि को पृथ्वी की परवाह करते देखकर मुस्कुरा उठे।    

नीलम भुआ ने सुना तो पृथ्वी का कान छोड़कर अवनि की तरफ आयी और अपना हाथ उसके कान की तरफ बढाकर कहा,”अच्छा ! तुम्हे बड़ी परवाह हो रही है इस नौटंकी की , रुको तुम्हारे भी कान खींचने पड़ेंगे”
नीलम भुआ का अवनि के कान तक पहुँचता इस से पहले पृथ्वी उठा और नीलम भुआ को फिर छेड़ते हुए कहा,”ए नीलम भुआ ! मेरी बायको को हाथ भी लगाया तो देख लेना अच्छा नहीं होगा,,,,,,,,,,,,,,!!!”

नीलम पलटी अपनी साड़ी का पल्लू कमर में खोंसा और पृथ्वी के पीछे भागने लगी। अब पृथ्वी इतना हट्टा कट्टा और लंबा चौड़ा वो कहा नीलम भुआ के हाथ आता। घर के आधे लोग नीलम की तरफ तो आधे पृथ्वी की तरफ और इस भागमभाग में घर का माहौल खुशनुमा हो चला था और अवनि दादी के पीछे से झांककर प्यार से पृथ्वी को देखती रही।  उसने देखा उसके चारो ओर अब सिर्फ खुशिया ही खुशिया थी।

( क्या पृथ्वी की बात मानकर जयदीप चुनेगा पृथ्वी और अपनी कम्पनी में से किसी एक को ? क्या पृथ्वी के नौकरी छोड़ने के बाद भरत बैठेगा शांत या अभी पृथ्वी को बर्बाद करना बाकि है ? क्या पृथ्वी बताएगा अवनि को अपनी नौकरी चले जाने के बारे में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 2” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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