Pasandida Aurat Season 2 – 78
Pasandida Aurat Season 2 – 78

अवनि ने पृथ्वी के लिए खाना भेजा और साथ में एक लेटर भी लेकिन पृथ्वी में इतना सब्र कहा कि वह आराम से बैठकर उसे पढ़े। उसके एक हाथ में टिफिन था और दूसरे से उसने झटककर लेटर खोला और पहला शब्द पढ़ते ही उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी।
“प्रिय पृथ्वी !
जानती हूँ मेरे रिक्वेस्ट करने पर तुम आई बाबा के पास गए थे लेकिन जितना मैं तुम्हे जानती हूँ मैं पुरे यकीन से कह सकती हूँ कि तुमने वहा खाना नहीं खाया होगा। तुम्हारा गुस्सा तुम्हारी नाराजगी अपनी जगह सही है लेकिन तुम्हे उनका दिल नहीं दुखाना चाहिए। तुम्हारी आई अच्छी इंसान है बस वो हमारे शादी के फैसले से आहत है।
मैं जानती हूँ आज उन्होंने तुम्हारे लिए खाना लगाया होगा और तुम्हे वहा ना देखकर वो उदास भी हुई होंगी। यहाँ सब ठीक है ,सब अच्छे है , बस तुम्हारी कमी है और सच बताऊ तो तुम से दूर जाकर समझ आया कि तुम्हारा मेरी जिंदगी में होना कितना जरुरी है,,,,,,,,,,,खाना ठंडा हो रहा है उसे खा लो और टाइम से सो जाना,,,,,,,,,,,,,हम जल्दी मिलेंगे !
तुम्हारी अवनि”
पृथ्वी ने लेटर पढ़ा और जैसे ही लेटर खत्म हुआ उसने महसूस किया कि उसकी आँखों में भरे आँसुओ की कुछ बुँदे उस लेटर पर आ गिरी है और स्याही फ़ैल गयी है। पृथ्वी की आँखों में ये आँसू अवनि के दूर होने की वजह से नहीं थे बल्कि दूर होकर भी अवनि को ये अहसास था कि पृथ्वी ने खाना नहीं खाया होगा। अवनि की लिखे कागज को पृथ्वी 4-5 पढता था लेकिन आज इस लेटर को उसने सिर्फ एक बार पढ़ा और मोड़कर जेब में डाल लिया। पृथ्वी का मन भारी हो गया था। आई बाबा के घर से बिना खाना खाये चले आना अब उसे खल रहा था।
लता का उदास चेहरा उसकी आँखों के सामने आ रहा था और पृथ्वी के मन को और भारी कर रहा था। उसने टेबल पर रहे टिफिन को देखा और फिर उठकर वाशबेसिन के सामने चला आया। पृथ्वी ने मुँह धोया और तौलिये से पोछते हुए शीशे में देखा। पृथ्वी की आँखों में अवनि के लिए बेइंतहा मोहब्बत नजर आ रही थी।
पृथ्वी शीशे में खुद को देखते हुए बड़बड़ाया,”अवनि भी मुझसे प्यार करती है , बहुत प्यार करती है। उसने कभी खुलकर कहा नहीं लेकिन उसकी बातें , उसका मेरी परवाह करना ,उसका मेरे लिए खुद को बदलना ये सब बया कर रहा है कि हाँ वो मुझसे प्यार करती है। मैं अपना प्यार जाहिर कर देता हूँ लेकिन अवनि की परवाह में ही उसका प्यार है ये समझने में मुझे इतना वक्त लग गया।
मुझसे दूर होकर भी उसे ये अहसास है कि मैं उदास हूँ ये प्यार नहीं तो और क्या है अवनि ? हाह ! बस तुम घर आ जाओ फिर मैं कभी तुम्हे खुद से दूर नहीं जाने दूंगा,,,,,,,,,,कभी नहीं”
पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया और किचन में चला आया। उसने प्लेट चम्मच और कटोरी ली और बाहर चला आया। पृथ्वी ने प्लेट टेबल पर रखी और सोफे पर आ बैठा। उसने टिफिन खोलने के लिए जैसे ही हाथ बढ़ाया डोरबेल बजी। अब कौन आया होगा ?
सोचते हुए पृथ्वी उठा और आकर दरवाजा खोला तो सामने खड़े लक्षित को देखकर हैरान रह गया। पृथ्वी को चुप देखकर लक्षित ने हाथ में पकड़ा टिफिन आगे करके कहा,”आई ने आपने लिए खाना भेजा है ?”
पृथ्वी ने सुना तो उसे अपने कानो पर यकीन नहीं हुआ , लता ने खुद उसके लिए खाना भेजा है ये सुनकर उसी आँखों में ख़ुशी के आँसू झिलमिलाने लगे। आज तो वह और ज्यादा खुश हो गया। उसकी जिंदगी में सबसे ज्यादा अहमियत रखने वाली दो औरतो ने उसके लिए खाना जो भेजा था।
पृथ्वी ने जल्दी से लक्षित के हाथ से टिफिन लिया और अंदर आकर सोफे पर आ बैठा। लक्षित भी दरवाजा बंद कर अंदर चला आया और पृथ्वी के बगल में पड़े सोफे पर आ बैठा।
पृथ्वी ने जल्दी जल्दी लता के भेजे टिफिन को खोला और उसमे रखा दाल चावल प्लेट में निकाल लिया। बाकि तीन डिब्बों में सब्जी , पूड़ी और मिठाई भी थी लेकिन पृथ्वी ने उन पर ध्यान नहीं दिया और प्लेट उठाकर दाल चावल मिक्स करके एक निवाला अपने मुँह में रखा और आँखे मूँद ली।
उसके चेहरे पर सुकून के भाव थे ये देखकर लक्षित मुस्कुरा उठा। पृथ्वी की आँख में रुका आँसू कनपटी से होकर बह गया। उसने आँखे खोली और जल्दी जल्दी दो-चार निवाले और खाये ये देखकर लक्षित ने कहा,”जब आई के बने खाने को इतना मिस करते हो तो फिर घर क्यों नहीं आते ?”
पृथ्वी ने सुना तो खाते खाते रुक गया और लक्षित की तरफ देखकर कहा,”नहीं आ सकता”
“दादा ! आप अब भी आई बाबा से नाराज हो ?”,लक्षित ने पूछा
“वो मेरे आई बाबा है मैं उनसे नाराज कैसे हो सकता हूँ ? बस मेरी कुछ मजबूरिया है जिनके चलते मैं घर नहीं आ सकता”,पृथ्वी ने उदास होकर कहा
लक्षित पृथ्वी को और उदास करना नहीं चाहता था इसलिए सामने रखे टिफिन को देखकर कहा,”ये टिफिन कहा से आया ? आपने बाहर से खाना आर्डर किया है क्या ?”
पृथ्वी ने सुना तो उसे याद आया कि अवनि ने भी उसके लिए खाना भेजा है तो उसने प्लेट साइड में रखा और लक्षित से अवनि का भेजा टिफिन खोलने को कहा। लक्षित ने टिफिन खोला तो खाने की खुशबु ने उसकी भूख फिर से जगा दी और उसने कहा,”वाह दादा ! इसमें तो बहुत अच्छी खुशबु आ रही है ,थोड़ा सा मैं भी टेस्ट करू क्या ?” हाँ कर ना , वैसे भी ये अवनि ने भेजा है”,पृथ्वी ने अपनी प्लेट में जगह बनायीं और अवनि के भेजे खाने में से थोड़ा खाना लेकर कहा।
“क्या वहिनी ने ? लेकिन वो तो बड़े पापा के घर है न , कमाल है ना दादा आपसे दूर होकर भी वहिनी को आपकी कितनी फ़िक्र है। अभी आई ने अगर ये देखा होता ना तो पक्का उन्हें माफ़ कर देती और आप दोनों सबके साथ घर में होते”,लक्षित ने एक निवाला खाकर कहा
“वो दिन भी जल्दी आएगा”,पृथ्वी ने कहा
“सच दादा ! आई अगर ये देखे कि वहिनी को आपकी कितनी परवाह है और वो आपका कितना ख्याल रखती है तो आई को कभी उनसे कोई शिकायत नहीं होगी”,लक्षित ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो खाते खाते रुक गया। लक्षित सही कह रहा था लता ने अभी अवनि को ठीक से जाना ही कहा था जो उनकी शिकायते दूर होती। पृथ्वी और लक्षित ने मिलकर सारा खाना खत्म किया और फिर पृथ्वी ने सब बर्तन धो दिए। बर्तन धोकर जब वह वापस आया तो देखा लक्षित मस्त सोफे पर पसरा हुआ था ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”तुम अभी तक यही हो ?”
“हाँ ! मैंने सोचा आज वहिनी नहीं है तो क्यों ना आपको कम्पनी दे दू”,लक्षित ने अपने फोन में विडिओ गेम खेलते हुए कहा
“गरज नाही , उठा आणि इथून निघून जा” ( कोई जरूरत नहीं है )”,पृथ्वी ने कहा
लक्षित ने सुना तो उठा और मुँह बनाकर कहा,”हाह ! लग्नानंतरही तुमच्यात काहीच सुधारणा झालेली नाही ( शादी के बाद भी आप में कोई सुधार नहीं है )
“आपण तुमच्या लग्नानंतर बोलू, आता तुम्ही येथून जा ( तेरी शादी होगी तब बात करेंगे ,अब निकलो यहाँ से )”,पृथ्वी ने लक्षित को फ्लेट से बाहर करते हुए कहा और दरवाजा बंद कर लिया।
हिमांशु का घर , पनवेल
नीलम भुआ ने अवनि को नीचा दिखाने की हर कोशिश की लेकिन अवनि ने कोई प्रतिक्रया ना देकर उन्हें उनकी हर चाल में असफल कर दिया। साक्षी मीशू के साथ व्यस्त रही और चाची को नीलम भुआ ने जानबूझकर व्यस्त रखा वही चाचा ने हिमानी को जब अवनि की मदद करने भेजा तो उसे भी बड़ी मम्मी ने बुला लिया और अवनि को अकेले ही किचन में सब काम करना पड़ा।
अवनि को खाना बनाने की आदत थी और शौक भी इसलिए 15-20 लोगो का खाना बनाना उसके लिए मुश्किल काम नहीं था। उसने जल्दी जल्दी सब खाना अकेले ही बनाया। हिमांशु ने जब अवनि को अकेले काम करते देखा तो उसने साक्षी को किचन में भेजा और खुद मीशू को बहलाने लगा।
किचन में आकर साक्षी ने जब देखा अवनि लगभग सब काम कर चुकी है तो उसने हैरानी से कहा,”ये सब तुमने अकेले किया ?”
“जी ! मुझे आदत है , उदयपुर में सब लोग एक ही घर में रहते थे तब रात का खाना अक्सर मैं ही बनाया करती थी,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने धीरे से कहा
“माफ़ करना अवनि तुम पहली बार घर आयी हो और तुम्हे ये सब अकेले करना पड़ा , मैं आ ही रही थी लेकिन तभी ना जाने मीशू को क्या हुआ और वह जोर जोर से रोने लगी। किसी के पास आ ही नहीं रही थी,,,,,,,,,,,,,!!!”,साक्षी ने उदासी भरे स्वर में कहा
अवनि साक्षी के पास आयी और अपना हाथ साक्षी के हाथ से लगाकर कहा,”भाभी ! आपको माफ़ी मांगने की जरूरत नहीं है और अब आप सब भी मेरा परिवार है तो आप सबके लिए खाना बना कर मुझे ख़ुशी है बस ये सबको पसंद आ जाये”
साक्षी ने सुना तो मुस्कुराई और अवनि का गाल छूकर प्यार से कहा,”जरूर पसंद आएगा अवनि तुमने सब इतने दिल से जो बनाया है , चलो मैं ये सब खाना टेबल पर लगा देती हूँ तुम जाकर हाथ मुँह धो लो”
“हम्म्म”,अवनि ने कहा और किचन से बाहर चली आयी। बाथरूम में आकर उसने हाथ मुँह धोया और खुद की हालत ठीक की। अवनि फ्रेश होकर वापस आयी तब तक साक्षी सारा खाना टेबल पर लगा चुकी थी। सभी खाना खाने के लिए आ बैठे और अवनि एक तरफ आ खड़ी हुई।
सबको खाना साक्षी परोस रही थी और हिमानी भी उसकी मदद कर रही थी। नीलम भुआ भी चाची के साथ सबके बीच चली आयी और जब उन्होंने देखा कि सब खाना अवनि ने अकेले बनाया है तो हैरान रह गयी। टेबल पर सजा खाना देखकर नीलम भुआ की भूख बढ़ गयी वे कुछ देर के लिए अवनि को परेशान करना भूल गयी और खाना खाने आ बैठी
जैसे जैसे सबने खाना खाया हर किसी के होंठो पर बस अवनि के बनाये खाने की तारीफ थी। अवनि मुस्कुराते हुए सब सुनती रही। बड़े पापा ,चाचा और हिमांशु तो अवनि के घर आने पर पहले से खुश थे उसके हाथ का बना खाना खाकर तो और खुश हो गए। बड़ी मम्मी को भी अवनि से जो शिकायत थी वो खाना खाकर दूर हो गयी। नीलम भुआ ने अवनि की तारीफ तो नहीं की लेकिन मन ही मन इतना अच्छा खाना खाकर खुश भी बहुत थी।
बाकि चाची को तो अवनि से पहले भी कोई शिकायत नहीं थी और सबकी तारीफे सुनने के बाद तो उन्हें अवनि पर और फक्र महसूस होने लगा। अवनि ने देखा सबको उसका बनाया खाना पसंद आया तो उसने मन ही मन महादेव का शुक्रिया अदा किया।
खाना खाने के बाद सभी वही हॉल में आ बैठे और एक बार फिर सबने अवनि की तारीफों के पूल बांधने शुरू कर दिए। नीलम भुआ ने सुना तो वे उठी और कहा,”मैं जरा रवि और घर के लिए खाना पैक करवा देती हूँ , सुनो मेरे साथ आओ,,,,,,,,,,,,,!!!”
नीलम भुआ ने अवनि से कहा और उसे अपने साथ लेकर चली गयी। किचन में आकर नीलम भुआ ने अवनि से एक बाद डिब्बा खाना पैक करने को कहा ताकि रवि जी के घर भिजवा सके जबकि वहा खाना पहले से बना हुआ था ये तो नीलम भुआ की चाल थी अवनि को फिर से परेशान करने की,,,,,,,,,,,,,,,,!!”
अवनि चुपचाप खाना पैक करने लगी तो नीलम भुआ ने दूसरे डिब्बे में चावल भरते हुए कहा,”बाहर सब तुम्हारे खाने की तारीफ कर रहे है ये जानकर ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है , तुम पृथ्वी की पत्नी हो इसलिए तुम्हे ये तारीफ मिली है वरना तो उपाध्याय खानदान इतनी जल्दी किसी को मुँह नहीं लगाता”
अवनि ने सुना तो पलभर में उसकी ख़ुशी गायब हो गयी और चेहरे पर उदासी के भाव तैरने लगे। वह नीलम भुआ की तरफ पलटी और मायूस होकर कहा,”आप मुझसे इतनी नफरत क्यों करती है भुआ जी ?”
“कोई मेरे लाड़ले भतीजे ने मेरा लाया रिश्ता ठुकरा कर तुम से शादी की,,,,,,,,,,,तुम से जिसकी इस ख़ानदान में खड़े होने की औकात तक नहीं है। हाह मेरी माँ को पता चलेगा कि पृथ्वी ने हम सबके खिलाफ जाकर तुम्हे चुना है तो वो तो उसके सामने अफ़सोस भी नहीं जता पायेगी”,नीलम भुआ ने कहा
नीलम भुआ के शब्दों से अवनि का मन छलनी हो गया लेकिन उसने कुछ ना कहना ही बेहतर समझा , अब उसे समझ आ रहा था कि नीलम भुआ को उस से इतनी चिढ और जलन क्यों थी ? उसने अपनी आँखों के किनारे साफ किये और पलटकर खाना पैक करने लगी।
“खाना मैं पैक कर लुंगी तुम जाकर पीछे गैलरी में पड़े बर्तन साफ़ कर दो,,,,,,,,,,,,!!!”,नीलम भुआ ने कहा
अवनि ने सुना तो चुपचाप वहा से चली गयी। वह पृथ्वी को फोन करके पूछना चाहती थी कि उसने खाना खाया या नहीं लेकिन उसे मौका ही नहीं मिला।
अवनि पीछे गैलरी में चली आयी देखा वहा जूठे बर्तनो का ढेर लगा है। आज से पहले उसने कभी इतने बर्तन एक साथ साफ नहीं किये थे फिर भी वह पृथ्वी के घरवालों को शिकायत का कोई मौका देना नहीं चाहती थी इसलिए उसने अपनी साड़ी के पल्लू को कमर में खोंसा और बर्तन धोने के लिए आ बैठी। एक एक करके अवनि बर्तन साफ़ करने लगी। पसीने की बुँदे उसके ललाट पर झिलमिलाती और वह अपने हाथ से पोछ लेती।
उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वह ख़ामोशी से बस अपना काम किये जा रही थी। मोहित फोन पर बात करते हुए गैलरी की तरफ आया उसने जब अवनि को अकेले बर्तन धोते देखा तो उसे बहुत अजीब लगा लेकिन अवनि अभी उसके लिए नयी थी इसलिए उसने कुछ नहीं कहा और वहा से चला गया।
मीशू को सुलाकर साक्षी किचन में आयी और नीलम भुआ से कहा,”अवनि कहा है ?”
“वो तो खाना खाकर कब का मेरे कमरे में सोने चली गयी। कह रही थी बहुत थक गयी है,,,,,,,,,,,,,अब काम करने की आदत तो होगी नहीं उसको इसलिए थकना जायज है,,,,,,,,,!!”,नीलम भुआ ने कहा
“अच्छा ! उसने बताया ही नहीं कि उसने खाना खा लिया , मैं तो उसका इंतजार कर रही थी कि साथ में खाएंगे”,साक्षी ने मायूसी से कहा
नीलम भुआ साक्षी की तरफ पलटी और कहा,”साक्षी ! तुमने और घर के सब लोगो ने उसे अपना लिया लेकिन वो अभी तक तुम सबको कहा अपना पायी है। तभी तो खाना खाया और जाकर सो गयी , ये नहीं कि सबके साथ बैठे बतियाये पर कैसे बैठेगी सबके साथ अकेले रहने की आदत जो है उसे,,,,,,,,,,खैर जाने दो मैं तुम्हारे लिए खाना लगाती हूँ तुम अपने कमरे में जाकर आराम से खा लो”
“हाँ लेकिन इतने सारे बर्तन है , पहले मैं ये धो देती हूँ फिर खा लुंगी”,साक्षी ने कहा
“उसकी जरूरत नहीं है सुबह कामवाली आएगी तो उस से धुलवा लेना , लो पकड़ो ये खाना और जाओ अपने कमरे में,,,,,,,,,,,,,,,,जब देखो तब काम काम काम , अरे कभी थोड़ा अपना ख्याल भी रखा करो”,नीलम भुआ ने खाने की थाली साक्षी को थमाकर कहा
साक्षी नीलम भुआ की असलियत नहीं जानती थी और जानती भी कैसे नीलम भुआ हमेशा उसके सामने अच्छी बनकर जो रही थी। साक्षी मुस्कुराई और कहा,”आप बहुत अच्छी है भुआ”
“अरे कहा ! तुम सब अच्छे हो इसलिए मैं अच्छी हूँ,,,,,,,,,,,जाओ खाना खाओ और कुछ चाहिए तो मुझे आवाज लगा देना”,नीलम भुआ ने कहा
साक्षी खाने की थाली लेकर चली गयी। उसने खुद से जानने की कोशिश ही नहीं की कि अवनि ने अकेले खाना क्यों खा लिया ? बस जो नीलम भुआ ने कहा साक्षी ने मान लिया
साक्षी के जाने के बाद नीलम भुआ के होंठो पर मुस्कान तैर गयी और उन्होंने कहा,”बड़ी आयी अवनि के साथ खाना खाने वाली , उसकी औकात है हम सबके साथ बैठकर खाना खाने की और खाना तो वो तब खा पायेगी न जब इस किचन में उसके लिए खाना बचेगा”
( क्या पृथ्वी भुला देगा लता के साथ अपनी सारी नाराजगी और जाएगा फिर से घर ? इतने अपमान के बाद भी क्या अवनि को रहना चाहिए चुप या फिर देना चाहिए नीलम भुआ को जवाब ? क्या आज रात अवनि को खाना मिलेगा या उसे भूखे ही सोना पड़ेगा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Atti kar rhi hai Neelam bua Avni k sath…agar unki yeh sab harkato k bare m Prithvi ko pta chala na…to book jayega ki Neelam uski bua hai… phele Neelam bua ne Avni ko purani Saree dee, fir usko akele dinner banane k liye bhej diya aur ab itne sare bartan bhi wahi saaf kar rhi hai…thank god ki Mohit ne Avni ko bartan saaf krte huye dekh liya, nhi to sab Neelam bua ki baato aa jayenge…jaise yeh Sakshi aa gai…aur to aur Avni k khana bhi nhi hai…ab to Neelam bua ki achchi wali kutai hono chahiye bas.
Yrrr kab pta chlegi sabko bua ki burai aur bua tum bs mahadev se dua kro ki prithvi ko jb ye pta chle wo tumhara khoon na kre, yerr kb hi pta chlega use bhi, jldi se jldi pta chle to behtar haii!!!
Is bua pe itna gussa aa raha hai ki wo samne ho to gala ghot du iis aurat ka