Pasandida Aurat Season 2 – 53
Pasandida Aurat Season 2 – 53

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी के केबिन में बैठा पृथ्वी अपने सामने बैठी प्राची को एकटक देख रहा था। सुबह से पृथ्वी अपनी शर्ट पर लगे लिपस्टिक के जिस निशान को सबसे छुपाता घूम रहा था उसे उसने एकदम से प्राची के सामने कर दिया जिसे देखकर प्राची अंदर ही अंदर जल उठी। जलन और चिढ की भावना उसके चेहरे पर साफ दिखाई पड़ रही थी और आँखों से गुस्सा छलक रहा था।
वह चोट खायी नागिन की तरफ बस पृथ्वी को देखे जा रही थी। पृथ्वी ने प्राची से नजर हटाई और दूसरी तरफ देखते हुए कहा,”शादी में प्यार भले ही खत्म हो जाये लेकिन एक दूसरे के लिए समर्पण , एक दूसरे के लिए सम्मान और एक दूसरे के लिए परवाह खत्म नहीं होनी चाहिए,,,,,,,,,दो लोगो को एक साथ जोड़े रखने के लिए इतना काफी होता है। जब आप शादी करेंगी तब आपको मेरी बात अच्छे से समझ आएगी”
पृथ्वी की शर्ट पर लिपस्टिक का निशान देखकर प्राची एक तो पहले ही गुस्से में थी ऊपर से पृथ्वी की बातें आग में घी डालने का काम कर रही थी। उसने सामने पड़ा अपना फोन उठाया और गुस्से से कहा,”मैंने तुमसे कॉफी भिजवाने को कहा था , अभी तक आयी क्यों नहीं ?”
पृथ्वी ने सुना तो हल्का सा मुस्कुराया , प्राची ने फोन रखा और पृथ्वी से कहा,”बस आ रही है,,,,,,,!!!”
“हाँ ! इट्स ओके , मुझे कोई जल्दी नहीं है”,पृथ्वी ने कहा
“तुम कल रात पार्टी में क्यों नहीं आये ? आई मीन सच में बिजी थे या फिर तुम्हारी वाइफ ने आने नहीं दिया”,प्राची ने ताना मारते हुए कहा , वह भला इतनी जल्दी हार कैसे मान सकती थी ?
“मैं अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ कभी मिक्स नहीं करता , मैं नहीं आया क्योकि मैं नहीं आना चाहता था। वैसे भी कल की पार्टी उस केंसल हुई डील को फिक्स करने के लिए थी जहा मेरा कोई काम नहीं था”,पृथ्वी ने कहा
“हाह ! सीधा कहो ना तुम्हारी वाइफ ने तुम्हे आने नहीं दिया। She treat you like a जोरू का गुलाम”,प्राची ने पृथ्वी का ईगो हर्ट करने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया हालाँकि अभी वह पृथ्वी की अवनि के लिए भावनाओ को लेकर अनजान थी
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”पसंदीदा औरत के लिए जोरू का गुलाम बनने में भी कोई बुराई नहीं है वैसी,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने एक बार फिर प्राची को चोट पहुंचाई , प्राची पृथ्वी की किसी बात का जवाब देती इस से पहले केबिन का दरवाजा खुला और ऑफिस बॉय कॉफी लेकर अंदर आया। प्राची ने उस से कॉफी टेबल पर रखने का इशारा किया। लड़के ने एक कप प्राची के सामने रखा और दूसरा पृथ्वी के सामने रखकर चला गया। पृथ्वी ने कप उठाया और कॉफी पीने लगा। प्राची का मूड पृथ्वी की बातो से पहले ही बहुत खराब हो चुका था उसका कॉफी पीने का बिल्कुल मन नहीं था। वह जबरदस्ती खुद को नार्मल दिखाते हुए पृथ्वी के सामने बैठी रही।
पृथ्वी ने कॉफी खत्म की और कलाई पर बंधी घडी में समय देखकर उठते हुए कहा,”कॉफी के लिए थैंक्यू , अब मुझे चलना चाहिए आई होप की आपने कल के लिए मुझे माफ़ कर दिया है। Have a nice day”
प्राची उठी और हाथ मिलाने के लिए मुस्कुराते हुए अपना हाथ पृथ्वी की तरफ बढ़ाया लेकिन पृथ्वी तो पृथ्वी है प्राची के इरादे जानने के बाद भला वह उस से हाथ कैसे मिला सकता था ? उसने अपने हाथ जोड़े और प्राची की आँखों में देखकर कहा,”Nice Coffee Ma’am”
पृथ्वी वहा से चला गया। प्राची एक बार फिर अपमान की आग में जल उठी और सोफे पर आ बैठी। उसने सामने खाली पड़े सोफे को देखा जहा कुछ देर पहले पृथ्वी बैठा था। सहसा ही प्राची को पृथ्वी का हाथ सोफे के हत्थे पर रखना याद आया और साथ ही याद आया पृथ्वी के शर्ट पर लगी लिपस्टिक का निशान जो अवनि के होंठो का था।
वो पल याद आते ही प्राची का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने सामने टेबल पर रखे कप को जोर से हाथ मारकर साइड गिरा दिया। कप नीचे गिरकर टूट गया साथ में कप में रखी गर्म कॉफी भी प्राची के हाथ पर गिर गयी और बची कॉफी टेबल और नीचे फर्श पर फ़ैल गयी।
पृथ्वी के जाने के बाद नीलेश केबिन में आया उसने जब टूटे कप को देखा तो प्राची के पास आया। प्राची के हाथ पर गिरी कॉफी देखकर नीलेश ने जल्दी से टिस्शु उठाया और प्राची का हाथ पोछते हुए कहा,”मेम ! ये क्या किया आपने ? आपके हाथ पर कॉफी गिर गयी है बहुत जल रहा होगा , आप आप उठिये यहाँ से और चलिए”
नीलेश ने प्राची को उठाया और वाशबेसिन की तरफ लाकर उसका हाथ धुलाते हुए कहा,”मेम क्या है ये सब , आप किसी और की वजह से खुद को तकलीफ क्यों दे रही है ? कितना जल गया है ये , मैं मैं डॉक्टर को बुला देता हूँ”
प्राची ने अपना हाथ झटका और अपनी टेबल की तरफ जाते हुए कहा,”इसकी कोई जरूरत नहीं है , मैं ठीक हूँ”
नीलेश ने सुना तो हाथ में पकडे गीले टिश्यू को डस्टबिन में फेंक दिया और प्राची की तरफ आकर कहा,”मेम ! आप ठीक है न ?”
प्राची अपनी कुर्सी पर बैठी थी , उसने आँखे मूंदकर अपना सर पीछे झुका लिया और कहा,”I am fine तुम जाओ यहाँ से , मुझे थोड़ी देर के लिए अकेला छोड़ दो,,,,,,,,,,!!!”
नीलेश ने सुना तो हामी में गर्दन हिलायी और वहा से चला गया। दरवाजे के पास पहुंचकर वह रुका और पलटकर प्राची को देखा। ना जाने क्यों नीलेश को प्राची का उदास चेहरा अच्छा नहीं लगा। उसने दरवाजा खोला और वहा से बाहर चला गया।
आँखे मूंदे , अपना सर कुर्सी पर पीछे झुकाये प्राची ने धीरे धीरे खुद में बड़बड़ाना शुरू कर दिया,”आखिर वह खुद को समझता क्या है ? लड़के मुझपर मरते है , मुझसे बात करने के लिए , मेरे साथ बैठकर कॉफी पीने के लिए तरसते है , महीनो इंतजार करते है और तुम , तुम पृथ्वी उपाध्याय , तुम्हे खुद पर इतना घमंड है कि तुम अपने सामने किसी को कुछ समझना ही नहीं चाहते मैं चाहू तो रातोंरात मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकती हूँ ,
उस कम्पनी को रातोरात खरीदकर तुम्हे अपने सामने लाकर खड़ा कर सकती हूँ और तुम मुझे , मुझे ऐटिटूड दिखा रहे हो,,,,,,,हाह ! अभी तुमने मुझे ठीक से जाना नहीं है पृथ्वी मुझे एक बार जो पसंद आ जाए उसे मैं हासिल करके छोड़ती हूँ,,,,,,,,,,,वैसे तुम कितना भी कठोर बन जाओ एक दिन तो तुम्हे मेरे सामने पिघलना ही पडेगा और वो दिन बहुत जल्दी आएगा मिस्टर पृथ्वी उपाध्याय”
प्राची के चेहरे पर कठोर भाव उभर आये और उसने अपने हाथ से टेबल पर पड़े पेपर को मुट्ठी में भींचकर नोच डाला
मिस्टर देसाई के ऑफिस से बाहर आकर पृथ्वी ने राहत की साँस ली और आसमान की तरफ देखकर कहा,”हाह ! ये सब उलझनों में फ़साने के लिए आपको क्या मैं ही मिलता हूँ ? अब तो मैंने अवनि के कहने पर आपके मंदिर आना भी शुरू कर दिया है फिर भी आपको मुझे परेशान करना है। मैं अपनी अवनि के साथ खुश हूँ ना तो फिर बार बार इस नकचढ़ी प्राची को मेरे सामने क्यों ले आते है आप ?
देखो मैं लेडीज की बहुत रिस्पेक्ट करता हूँ लेकिन वो प्राची , वो सच में बहुत अजीब है नकचढ़ी तो है ही मुझे घूरकर ऐसे देखती है जैसे खा जाएगी,,,,,,,,,,,हाह ! लड़का होकर भी मैं उसके साथ कितना अनकम्फर्टेबल फील कर रहा था आपको क्या पता ? आप तो बस ऊपर बैठकर मेरी कहानी लिखो , इस कहानी में सब लिखना लड़ाई , झगड़े , स्ट्रगल , बस अवनि का प्यार मत लिखना , एक ही छत के नीचे रहकर भी हम दोनों कितना दूर है पता भी है आपको,,,,,हाह मैं भी किस से बात कर रहा हूँ , आपने पहले कभी मेरी सुनी है जो अब सुनोगे”
पृथ्वी ने प्राची को लेकर अपना सारा शब्दों में उतारकर आसमान में देखते हुए महादेव को सुना दिया और फिर वहा से चला गया।
पृथ्वी ऑफिस चला आया , उसने सबके साथ बैठकर खाना खाया और हैरानी की बात ये थी कि आज पृथ्वी उलटे हाथ से खाना खा रहा था क्योकि उसका सीधा हाथ तो सीने पर था जिस से वह अवनि का प्यार छुपा सके। अंकित , तान्या , कशिश और मनीष आपस में एक दूसरे को इशारा कर रहे थे लेकिन पृथ्वी से कुछ भी पूछने की हिम्मत वहा बैठे चारो में से किसी में नहीं थी।
खाना खाने के बाद पृथ्वी उठा और हाथ धोने चला गया। पृथ्वी वापस आया तब तक बाकि सब भी खाना खाकर अपनी अपनी डेस्क पर आ बैठे थे। पृथ्वी ने अंकित से कपूर ग्रुप्स की फाइल लेकर वहा से चला गया आखिर प्राची के बाद उसे विक्रम कपूर से भी तो सामना करना था।
रवि जी का घर , पनवेल
“वहिनी ! मैंने बड़े दादा के घर पर बात कर ली है , होली पर दो दिन वो लड़की उनके घर रुक सकती है। आज सुबह सभी उनके घर में ही जमा थे और दादा ने कहा कि अब जब पृथ्वी ने उसके साथ घर बसा ही लिया है तो क्यों न उस लड़की को एक मौका दिया जाए,,,,,,,,!!!”,रवि जी के घर में बैठी नीलम भुआ ने चाय की चुस्की लेकर कहा
ताई ! मैं क्या कह रही हूँ ये सब करना जरुरी है क्या ? मेरा मतलब अपना पृथ्वी उसके साथ खुश है ना तो फिर जाने देते है रहने देते है उन दोनों को खुश,,,,,,,!!!”,लता ने बुझे स्वर में कहा इन दिनों अवनि के लिए उनका गुस्सा और नफरत फीकी पड़ने लगी थी
“और आपकी ख़ुशी का क्या वहिनी ? उस लड़की के लिए ही तो पृथ्वी ने ये सब किया ना। क्या आप उसके इस फैसले से खुश है , क्या दादा खुश है ? अरे उस लड़के ने तो ऐसा मुंह मोड़ा सबसे कि आकर देखा तक नहीं आप लोगो को,,,,,,,,,,और हम सब कौनसा उसे पृथ्वी से दूर कर रहे है ? हम सब भी तो यही चाहते है ना कि दोनों साथ रहे लेकिन अपनी तसल्ली के लिए हम सबको एक बार तो उस लड़की को परखना होगा ना वहिनी”,नीलम ने कहा
“लेकिन ताई,,,,,,!!!”,लता ने कहना चाहा लेकिन नीलम ने उनकी बात बीच में ही काटकर कहा,”वहिनी ! आप खामखा परेशान हो रही है , अरे पृथ्वी हमारा बेटा नहीं है क्या ? सब चाहते है वो घर वापस आ जाये लेकिन उस से पहले कम से कम आप और दादा को ये तसल्ली तो होनी चाहिए ना कि वह लड़की इस घर के लिए आपके पृथ्वी के लायक है,,,,,,,,,ज्यादा मत सोचिये हम सब है न,,,,,,,वैसे भी आप बड़े दादा के घर नहीं आ पाएंगी”
“क्यों ?”,लता ने हैरानी से कहा
“क्या वहिनी ! आप भूल गयी आपने भले उसे बहू स्वीकार ना किया हो लेकिन आप है तो उसकी सास ही न और होली के बख्त सास अपनी बहू के साथ नहीं रहती है,,,,,,,!!!”,नीलम ने अपनी बात पर जोर देकर कहा
“हम्म लेकिन पृथ्वी से बात कौन करेगा ?”, लता ने पूछा
नीलम भुआ ने सुना तो सोच में पड़ गयी और कुछ देर बाद कहा,”उसकी चिंता आप मत कीजिये हिमांशु है न , पृथ्वी उसकी बात जरूर सुनेगा”
“हम्म्म,,,,,बस वो लड़की उसके लिए सही हो,,,,,,,!!”,लता ने अवनि के बारे में सोचते हुए कहा
नीलम भुआ कुछ देर वहा रुकी और लता से इधर उधर की बात करके चली गयी।
आनंदा निलय अपार्टमेंट , पनवेल
दोपहर के खाने के बाद सुरभि और अवनि कमरे में बिस्तर पर लेटी बाते कर रही थी। बातो ही बातो में सुरभि ने अवनि के मुँह से उसके और पृथ्वी के रिश्ते का सच भी उगलवा लिया। सुरभि ने महसूस किया कि अवनि आज भी पृथ्वी के घरवालों की नफरत का जिम्मेदार खुद को मानती है और इसी वजह से वह पृथ्वी के साथ ठीक से अपनी शादीशुदा जिंदगी शुरू भी नहीं कर पायी थी।
“सुरभि ! क्या तुम मेरे घर गयी थी , चाचा चाची और बच्चे कैसे है ? वो लोग ठीक तो है ना , मैंने उनका बहुत दिल दुखाया है”,अवनि ने उदासी भरे स्वर में पूछा
“तुम्हारे मुंबई आने के बाद अगले ही दिन मैं सिरोही चली आयी थी अवनि,,,,,,हाँ लेकिन पापा बता रहे थे कि ठीक है वे लोग , वैसे भी तुम्हारे यहाँ आ जाने से कौनसा उन्हें फर्क पड़ता है ?”, सुरभि ने मुँह बनाकर कहा
“नहीं सुरभि ! ऐसा नहीं है , मैंने दो बार उन्हें शर्मिन्दा किया है। अपनी ख़ुशी के लिए मैंने उन्हें तकलीफ दी , उनके मन को ठेस पहुंचाई है। पता नहीं वो सब मुझे कभी माफ़ करेंगे भी नहीं , मैं कभी उदयपुर जा पाऊँगी भी या नहीं,,,,,,,,,!!”,अवनि कहते कहते उदास हो गयी।
सुरभि ने अवनि के हाथ पर अपना हाथ रखा और कहा,”अवनि ! तुमने जो फैसला किया उसमे किसी न किसी का दिल तो टूटना ही था , हाँ लेकिन इन सब में पृथ्वी का दिल टूटता तो सबसे ज्यादा बुरा होता,,,,,,,,,इसलिए तुम ज्यादा मत सोचो तुमने कुछ गलत नहीं किया और रही बात उदयपुर आने की तो देखना बहुत जल्दी चाचा चाची तुम्हे उदयपुर भी बुलाएँगे और तुम्हे फिर से उन सबका प्यार भी मिलेगा”
सुरभि की बात सुनकर अवनि को थोड़ी तसल्ली मिली वह मुस्कुराई और कहा,”हम्म्म ! मैं महादेव से प्रार्थना करुँगी सब ठीक हो जाये”
सुरभि अवनि के बगल में लेट गयी और फिर थोड़ी देर बाद ही उसे नींद आ गयी। अवनि ने देखा सुरभि सो चुकी है तो उसने भी अपनी आँखे बंद कर ली।
कपूर प्रोडक्शन हॉउस , नवी मुंबई
विक्रम कपूर के ऑफिस के बाहर खड़ा पृथ्वी सोच रहा था कि अंदर जाकर वह विक्रम से क्या कहेगा ? वह काफी देर बाहर ही खड़ा रहा , उसने एक गहरी साँस ली और दरवाजा खोलकर ऑफिस के अंदर चला आया। पृथ्वी सीधा रिसेप्शन पर आया और मिस दिव्या से कहा,”हेलो ! मेरा नाम पृथ्वी उपाध्याय है और मैं मौर्या Pvt. Ltd. कम्पनी से आया हूँ। मिस्टर कपूर के साथ एक फायनेंस मीटिंग थी क्या आप उन्हें इन्फॉर्म कर देंगी ?”
दिव्या ने पृथ्वी को ध्यान से देखा और कहा,”आप तो वही है ना जो कल भी आये थे,,,,,,,देखिये मिस्टर उपाध्याय ! विक्रम सर के साथ आपके जो भी पर्सनल इश्यूज है प्लीज आप उन्हें बाहर ही सॉल्व करे , यहाँ ऑफिस में आकर रोज रोज तमाशा करना सही नहीं है”
पृथ्वी ने सुना तो दिव्या को एक नजर देखा और कहा,”देखिये मैं यहाँ कोई तमाशा करने नहीं आया हूँ मेरी उनके साथ मीटिंग है उनसे बात कीजिये और बताईये मुझे,,,,,,,,,,!!”
दिव्या ने रिसीवर उठाया और अपने केबिन में बैठे विक्रम कपूर को पृथ्वी के आने के बारे में बताया। विक्रम ने दिव्या से कुछ कहा और दिव्या ने ‘ठीक है सर’ कहकर फोन काट दिया। उसने रिसीवर नीचे रखा और पृथ्वी की तरफ पलटकर कहा,”आप चलकर मीटिंग रूम में बैठिये सर थोड़ी देर में आ रहे है”
“थैंक्यू”,पृथ्वी ने कहा और मीटिंग रूम की तरफ बढ़ गया। पृथ्वी को यहाँ देखकर दिव्या के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये क्योकि पहले भी पृथ्वी यहाँ आ चुका था और जो हुआ उस से कोई अनजान नहीं था।
पृथ्वी मीटिंग रूम में चला आया उसने कुर्सी खिसकाई और उस पर आ बैठा। पृथ्वी ने अपनी कलाई पर बंधी घडी में समय देखा जिसमे 4.30 हो रहे थे। पृथ्वी को ये मीटिंग खत्म करके , डिटेल्स जयदीप को देनी थी और फिर जल्दी घर जाना था ताकि वह अवनि को आज के बारे में सब बता सके। आज पृथ्वी को अवनि की चिंता नहीं थी क्योकि सुरभि उसके साथ थी और यही सोचकर पृथ्वी टेंशन फ्री था लेकिन उस से भी बड़ी टेंशन तो अभी बाकि थी ‘विक्रम कपूर’ के रूप में , पृथ्वी विक्रम का इंतजार करने लगा।
कुछ देर बाद मीटिंग रूम का दरवाजा खुला और मिस्टर विक्रम अंदर आये।
“मैंने सोचा नहीं था तुम से इतनी जल्दी फिर से मुलाकात होगी”,विक्रम ने अंदर आकर कहा
पृथ्वी ने सुना तो अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ और विक्रम की तरफ पलटकर कहा,”मिस्टर विक्रम ! बेहतर होगा हम पर्सनल और प्रोफेशलन मेटर्स को अलग रखे ! मैं यहाँ मौर्या कम्पनी के मैनेजर की हैसियत से यहाँ आया हूँ , आपके बड़े भाई मिस्टर अविनाश कपूर की प्रोजेक्ट पर आप फायनेंस करने वाले है इसीलिए आज की ये मीटिंग रखी गयी है,,,,,,आप ये पेपर्स एक बार देख लीजिये”
विक्रम ने सुना तो उसकी आँखों में चमक और चेहरे पर कठोर भाव उभर आये उसने पृथ्वी के हाथ से पेपर्स लिए और पृथ्वी के सामने ही उन्हें फाड़कर उन्हें हवा में उछालकर कहा,”डील केंसल”
विक्रम की ये हरकत देखकर पृथ्वी को गुस्सा तो बहुत आया लेकिन उसने खुद को रोक लिया और धीरे से मुस्कुरा कर कहा,”अच्छा हुआ तुमने खुद केंसल कर दी वरना ये डील केंसल करवाने के लिए मुझे तुम्हे फिर से मारना पड़ता,,,,,,!!!”
विक्रम ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखा , पृथ्वी ने उसका कंधा थपथपया और कहा,”पेपर्स के पैसे ऑफिस भिजवा देना”
पृथ्वी वहा से चला गया और विक्रम गुस्से से उसे जाते हुए देखता रहा। उसे लगा एक डील के लिए पृथ्वी उसके सामने झुक जायेगा , उस से माफ़ी मांगेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ ,, विक्रम ने टेबल पर रखी फाइल को खोलकर देखा तो उसकी आँखे हैरानी से बड़ी हो गयी। फाइल में डील केंसल का पेपर रखा था जिस पर पृथ्वी के सिग्नेचर थे।
( क्या अपनी जिद पूरी करने के लिए प्राची डालने वाली है अवनि और पृथ्वी के बीच में दरार ? नीलम भुआ के कहने पर क्या हिमांशु करेगा पृथ्वी से बात और अवनि को बुलाएगा अपने घर ? आखिर पृथ्वी ने क्यों की विक्रम के साथ ये फायनेंस डील केंसल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53
Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53Pasandida Aurat Season 2 – 53
- Continue with Pasandida Aurat Season 2 – 54
- Visit https://sanjanakirodiwal.com
- Follow Me On http://instagram.com/sanjanakirodiwal/
संजना किरोड़ीवाल


🤣🤣🤣 Vikram Kapoor ki ho gai…po po po poooooo po…yani Prithvi janta tha ki esa kuch hoga aur usne deal cancel pe signature bhi kiye huye the…o Prithvi kya ho tum…tumne Prachi ko bhi hit kiya apni baato se…bas wo Prachi Neelam bua k sath na mil jaye Avni ko preshan krne k liye…quki Neelam bua ne Holi ko soch kar uske liye koi solid plan banaya hai…tumko bas uss pe pani ferna hoga…baki to Avni apne kaam aur behaviour se sabko impress kar legi.