Pasandida Aurat Season 2 – 52

Pasandida Aurat Season 2 – 52

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

आनंदा निलय अपार्टमेंट , पनवेल
सुरभि ने मुँह धोया ब्रश किया और वापस सोफे पर चली आयी। अवनि सुरभि और अपने लिए नाश्ता ले आयी और टेबल पर रखते हुए कहा,”सिरोही में तुमने पक्का मेरे हाथो से बने खाने को मिस किया होगा”
सुरभि ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”सिर्फ खाने को ही नहीं मैंने तुम्हे भी बहुत मिस किया था अवनि , वहा कोई है ही नहीं जिस से मैं बात कर सकू,,,,,,!!!”

“समझ सकती हूँ , वैसे तुम्हे वहा नए दोस्त बनाने चाहिए जिस से तुम्हारा मन भी लगा रहेगा और तुम बोर भी नहीं होगी”,अवनि ने खाते हुए कहा
“अवनि तुम्हे लगता है मुझे नए दोस्त बनाने की जरूरत है ?”,सुरभि ने कहा
“जरूरत तो नहीं है , अच्छा छोडो ये बताओ तुम्हारी जॉब कैसी चल रही है ?”,अवनि ने पूछा
“बस ये समझ लो कि वो लोग मुझे काम से नहीं निकाल रहे बाकि हरकते तो मेरी मार खाने वाली है”,सुरभि ने खाते हुए कहा

“अनिकेत ने तुम्हे कुछ ज्यादा ही परेशान कर दिया न”,अवनि ने उदास होकर कहा
“भाड़ में जाए वो तुम मुझे ये बताओ तुम पृथ्वी को परेशान क्यों कर रही हो ?”,सुरभि ने एकदम से कहा
“मैंने क्या किया ?”,अवनि ने नजरे झुकाकर कहा  

“ज्यादा बनो मत अवनि , वो बेचारा तुम से प्यार करता है और तुम दोनों की शादी हो चुकी है इसके बाद भी तुम उस से दूर हो,,,,,,,,दिमाग तो ठीक है ना तुम्हारा , अरे उसके भी कुछ अरमान होंगे , सपने होंगे जो उसने अपनी वाइफ को लेकर देखे होंगे लेकिन तुम तुम तो उसके अरमानो पर पानी फेरने का काम कर रही हो,,,,,,,तुमने तो उसे ये तक नहीं कहा होगा कि तुम उस से प्यार करती हो”,सुरभि ने अपने गुस्से को मुश्किल से काबू में रखकर कहा

“ऐसा नहीं है सुरभि ! पृथ्वी ने मेरे लिए जो किया है उसे देखकर किसी भी लड़की को उस से प्यार हो जाएगा , उसे लेकर बहुत सी भावनाये है जिन्हे मैं कोई नाम नहीं दे पा रही,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने उदासी भरे स्वर में कहा
“वो भावनाये प्यार ही है अवनि और ये आज से नहीं है उस दिन से है जिस दिन तुमने पृथ्वी के लिए पहला खत लिखा था,,,,,,,आज से पहले कितने लड़को के लिए खत लिखे है तुमने बताना ज़रा,,,,!!”,सुरभि ने कहा

अवनि ने सुना तो सुरभि की तरफ देखने लगी। सुरभि ने अवनि की बेचैनी को भांप लिया और कहा,”अवनि ! मैं ये नहीं कह रही कि तुम आज ही पृथ्वी को सारे हक़ दे दो लेकिन कम से कम तुम खुद से पहल तो कर सकती हो ना,,,,,,,,और क्या पता पृथ्वी तुम्हारे भरोसे बैठा हो , एक तो वो बेचारा वैसे ही तुम से इतना डरता है कि अनजाने में कही तुम्हे हर्ट ना कर दे , मुझे नहीं लगता वो कभी तुम पर पति होने का हक़ भी जतायेगा”

अवनि ने सुना तो उसे पहली शाम पृथ्वी की कही बात याद आ गयी “जिंदगीभर हाथ लगाने भी नहीं दिया तब भी मेरी मोहब्बत आपके लिए कम नहीं होगी मैडम जी,,,,,,,मेरे लिए आपका होना ही काफी है”
अवनि की आँखों में उदासी के भाव तैर गए क्योकि उस शाम के बाद पृथ्वी उसके साथ जरूर रहा लेकिन अवनि पर कभी अपने पति होने का हक़ नहीं जताया। अवनि को खोया देखकर सुरभि ने कहा,”पृथ्वी जैसे लड़का किस्मतवालो को मिलता है अवनि , तुम्हे उसे समझना चाहिए”

“मैं समझ रही हूँ सुरभि लेकिन पृथ्वी के घरवाले अभी तक उस से नाराज है,,,,,,,,,,,,कोई उस से बात तक नहीं करता”,अवनि ने उदासी भरे स्वर में कहा
“अरे तो वो घरवालों की प्रॉब्लम है तुम दोनों उनके चक्कर में अपना रिश्ता क्यों कॉम्प्लिकेटेड बना रहे हो ? देखो अवनि वो पृथ्वी के माँ-बाप है और कोई भी माँ-बाप अपने बच्चो से ज्यादा दिन नाराज नहीं रह सकते लेकिन उनके लिए अगर तुम पृथ्वी को खुद से दूर रखोगी तो उसे कितना बुरा लगेगा,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने अवनि को समझाया

सुरभि की बातें सुनकर अवनि अपने ही विचारो में उलझने लगी ये देखकर सुरभि ने मन ही मन खुद से कहा,”ओह्ह्ह्ह अवनि ! मैं जानती हूँ उस गधे सिद्धार्थ की कड़वी यादें अब भी तुम्हारे जहन में है , अपना प्यार तुम पहले भी एक गलत इंसान पर खर्च कर चुकी हो बस इसलिए पृथ्वी के लिए अपनी भावनाये जाहिर करने में तुम्हे देर लग रही है,,,,,,,,,,,लेकिन तुम चिंता क्यों करती हो ? मैं हूँ न मैं तुम्हारे दिल में पृथ्वी के लिए प्यार जगाकर रहूंगी”
मन ही मन खुद से ये सब कहकर सुरभि मुस्कुराने लगी। अवनि ने सुरभि को मुस्कुराते देखा तो कहा,”क्या हुआ , तुम मुस्कुरा क्यों रही हो ?”

“बस ऐसे ही मुझे पृथ्वी के साथ अपनी पहली मुलाकात याद आ गयी”,सुरभि ने कहा और फिर अवनि से बाते करने लगी। बातें क्या दोनों साथ बैठकर बीते वक्त को याद करने लगी और हसने मुस्कुराने लगी। अवनि का साथ पाकर सुरभि अपनी परेशानियों को कुछ देर के लिए भूल चुकी थी।

मौर्या Pvt Ltd कम्पनी , नवी मुंबई
लीगल टीम के साथ मीटिंग रूम में बैठा पृथ्वी पिछले आधे घंटे से अपना हाथ अपने सीने पर रखे हुए था। लीगल टीम के सीनियर ने जब ये देखा तो पृथ्वी से कहा,”मिस्टर पृथ्वी ! आर यू ओके ?”
“यस सर ! आई ऍम फाइन,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा उसका हाथ अभी भी उसके सीने पर ही था
“तो फिर आपने अपना हाथ अपनी चेस्ट पर क्यों रखा है , सब ठीक है ना ?”,सीनियर ने कहा

बेचारा पृथ्वी फंस गया कैसे बताये सबको कि वह जो छुपा रहा है वह उसे सुबह सुबह अपनी पत्नी से मिला प्यार है। पृथ्वी ने सीनियर की तरफ देखा और धीरे से अपना सीना थपथपाकर कहा,”नथिंग सीरियस सर बस हल्का सा मीठा दर्द है”
सीनियर ने सुना तो हैरानी से बाकि सबको देखा और फिर पृथ्वी से किसी लीगल टॉपिक पर बात करने लगा। मीटिंग खत्म होने के बाद सीनियर उठा और साथ ही पृथ्वी भी उठ खड़ा हुआ।

सीनियर ने जैसे ही पृथ्वी से हाथ मिलाने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया पृथ्वी ने अपना बांया हाथ बढ़ा दिया ये देखकर सीनियर ने कहा,”मिस्टर पृथ्वी ! हाथ हमेशा राइट हेंड से मिलाते है”
“ओह्ह्ह्ह सॉरी”,कहकर पृथ्वी ने सीने से दांया हाथ हटाकर तुरंत बांया हाथ रख लिया और अपने दाहिने हाथ को सीनियर की तरफ बढ़ा दिया ये देखकर सीनियर मुस्कुराये और पृथ्वी से हाथ मिलाकर कहा,”माफ़ करना लेकिन आजकल आप थोड़े बदले बदले नजर आ रहे है,,,,,,,,ख्याल रखिये”

सीनियर अपनी टीम के साथ वहा से चला गया और पृथ्वी ने अपना हाथ अपने ललाट पर दे मारा। अपने काम में हमेशा अनुशासन में रहने वाला पृथ्वी इन दिनों बहुत ही अजीब हरकते कर रहा था लेकिन इसमें उसकी गलती नहीं थी वह अपनी पसंदीदा औरत के प्यार में जो था।  

पृथ्वी ने टेबल पर रखा पानी का गिलास उठाया और एक साँस में पीकर गिलास नीचे रख दिया। वह मीटिंग रूम से बाहर आया और जयदीप को सब डिटेल्स देकर अपने केबिन में चला आया। सुबह जल्दी के चक्कर में उसने नाश्ता नहीं किया था इसलिए केबिन में आकर केंटीन में फोन किया और अपने लिए कॉफी और सेंडविच का आर्डर दिया।

तान्या और मनीष भी ऑफिस आ चुके थे और सभी पृथ्वी के केबिन में बैठकर अपना काम कर रहे थे। कशिश ने तान्या और मनीष को भी बता दिया कि आज पृथ्वी की शर्ट पर कुछ लगा है और बस तब से दोनों बार बार पृथ्वी को देख रहे थे लेकिन उन्हें वो देखने को नहीं मिला जो वे लोग चाहते थे। केंटीन बॉय पृथ्वी के लिए कॉफी और सेंडविच ले आया। पृथ्वी का सीधा हाथ उसके सीने पर था और आज वह उलटे हाथ से खा रहा था ये देखकर अंकित ने उसे छेड़ते हुए कहा,”ओह्ह तो तुम्हे पता चल गया , अब छुपाने से क्या फायदा पृथ्वी सब जानते है आजकल कुछ ज्यादा ही रोमांटिक हो गए हो तुम”

पृथ्वी ने सुना तो अंकित को घुरा और कहा,”इतनी भी समझ नहीं है कहा क्या बात बोलनी होती है और भूलो मत मैं तुम्हारा सीनियर हूँ,,,!”
अंकित ने सुना तो मुँह घुमाकर हसने लगा और बाकि तीनो भी दबी सी हंसी हसने लगे। बेचारा पृथ्वी उसे अब शर्म आ रही थी इसलिए उसने जल्दी जल्दी कॉफी पी सेंडविच ख़त्म किया और ट्रे उठाते हुए कहा,”आज के सभी रिपोर्ट्स तैयार करके जयदीप सर को मेल कर देना”

“तुम कही जा रहे हो ?”,अंकित ने पूछा
“हाँ एक जरुरी काम से बाहर जाना है”,पृथ्वी ने कहा और जैसे ही आगे बढ़ा अंकित ने कहा,”क्या वो जरुरी काम पर्सनल है ?”
अंकित आज पृथ्वी को छेड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा था। पृथ्वी पलटा और कहा,”जी नहीं प्रोफेशनल है , देसाई ग्रुप के साथ एक मीटिंग है उसी के लिए जा रहा हूँ,,,,,,,,,!!”

“फिर तो तुम्हे और सम्हलने की जरूरत है कोई आजकल तुम्हे लेकर मिस देसाई के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे मुझे”,इस बार अंकित ने अपने लेपटॉप पर नजरे गड़ाए धीमे स्वर में कहा जिसे सिर्फ पृथ्वी सुन पाया
“मुझे अपने काम से मतलब है किसी के इरादों से नहीं,,,,,,,चलता हूँ लंच के बाद मुझे कपूर ग्रुप की फाइल चाहिए”,कहकर पृथ्वी वहा से चला गया
पृथ्वी ने ट्रे केंटीन में दिया और फिर हाथ धोकर वहा से निकल गया। उसके शर्ट पर अवनि के होंठो का निशान अभी भी था।

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
अपने केबिन में बैठे देसाई सर भरत से कुछ जरुरी डिस्कशन कर रहे थे कि तभी केबिन का दरवाजा खोलकर प्राची दनदनाते हुए अंदर आयी और कहा,”डेड ! आपने मेरा लॉग-इन एक्सेस क्यों बंद कर दिया ?”
“क्योकि आज से तुम्हे कम्पनी के मीटिंग्स अटेंड करने और उनकी डिटेल्स जानने की जरूरत नहीं है”,देसाई सर ने बहुत ही शांत लहजे में कहा

“बट व्हाई ? डेड ये बहुत गलत है एक इंसिडेंट की वजह से आप मुझसे एक्सेस छीन रहे है। यू नो ना डेड आगे जाकर मुझे आपकी कम्पनी को सम्हालना है”,प्राची ने कहा
“प्राची ! बेटा बिजनेस के लिए दिल और दिमाग का एक जगह पर होना बहुत जरुरी है और मैं देख रहा हूँ तुम्हारा दिमाग तो मेरे बिजनेस में है लेकिन दिल,,,,,,,,,,दिल आजकल तुम कही और लगाने की कोशिश कर रही हो”,देसाई सर ने अपनी कुर्सी से उठते हुए कहा

डेड,,,,,,,,!!”,प्राची ने हैरानी से कहा क्योकि भरत भी उसी कमरे में मौजूद था और प्राची नहीं चाहती थी वह उसकी निजी जिंदगी के बारे में जाने इसलिए उसने भरत से कहा,”तुम बाहर जाओ,,,,,,,,,,,!!!”
“सर मैं मिस्टर पटेल के साथ मीटिंग फिक्स करता हूँ”,भरत ने सर झुकाकर देसाई सर से कहा और वहा से चला गया

भरत के जाने के बाद प्राची ने कहा,”डेड ! क्या हो गया है आपको , आप ऐसी बाते क्यों कर रहे है ?”
“वही मैं जानना चाहता हूँ कि तुम्हे क्या हुआ है ? इतनी बड़ी कम्पनी के मालिक की इकलौती बेटी होकर तुम एक मामूली से मैनेजर को पसंद करती हो,,,,,,,,उसकी और तुम्हारी कोई बराबरी नहीं है प्राची,,,,,,,,,!!!”,देसाई सर ने कहा

प्राची हैरान थी कि देसाई सर को ये कैसे पता कि वह पृथ्वी को पसंद करती है जबकि बीती रात उसने नशे की हालत में खुद ही ये कहा था कि वह पृथ्वी को पसंद करती है। प्राची ख़ामोशी से देसाई सर को देखने लगी और फिर एकदम से कहा,”मेरी माँ ने अगर आपका स्टेटस देखकर आपसे प्यार किया होता तो आज आप इतनी बड़ी कम्पनी के मालिक नहीं होते डेड,,,,,,,!!!”

प्राची की बात सुनकर देसाई सर मुस्कुराये और कहा,”हाह ! बिल्कुल अपनी माँ पर गयी हो,,,,,,,,लेकिन भूलो मत प्राची वो शादीशुदा है”
“Everything is fare in love and war डेड ! वो शादीशुदा है मुझे इस से कोई फर्क नहीं पड़ता,,,,,,बस वो मेरे पास होना चाहिए,,,,,,,,,,,i want him”,प्राची ने   सधे हुए स्वर में कहा उसकी आँखों में एक जूनून था एक जिद थी जिसे देखकर देसाई सर ने अपने हाथ खड़े कर दिए।

वे प्राची से कुछ और कहते इस से पहले प्राची का मैनेजर नीलेश वहा आया और कहा,”मेम ! मिस्टर उपाध्याय आये है”
प्राची ने जैसे ही सुना उसका चेहरा ख़ुशी से खिल उठा और आँखे चमक उठी , वह जल्दी से वहा से चली गयी और देसाई सर भी अपना फोन जेब में रख वहा से बाहर निकल गए

प्राची के केबिन में सोफे पर बैठा पृथ्वी उसके आने का इंतजार कर रहा था। एक बार फिर उसका दाहिना हाथ अपने सीने पर था और चेहरे पर कोई भाव नहीं थे बल्कि वह बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से यहाँ आया था। पृथ्वी का जरा भी मन नहीं था कि वह प्राची जैसी घमंडी औरत से माफ़ी मांगे लेकिन जयदीप की डील बचाने और अवनि के कहे शब्दों का मान रखते हुए वह यहाँ चला आया। खामोश बैठा पृथ्वी केबिन को देख रहा था तभी केबिन का दरवाजा खुला और प्राची अंदर आयी।

प्राची को देखकर पृथ्वी अपनी जगह पर खड़ा हुआ और कहा,”हेलो मेम”   
“हेलो पृथ्वी ! जिस ऐटिटूड के साथ तुम कल की मीटिंग छोड़कर गए थे , मुझे लगा नहीं था तुम आओगे ?”,प्राची ने पृथ्वी के सामने पड़े सोफे पर बैठते हुए कहा और साथ ही पृथ्वी से भी बैठने का इशारा किया। पृथ्वी प्राची के सामने पड़े सोफे पर बैठा और कहा,”कल जो कुछ भी हुआ उसके लिए मैं आपसे माफ़ी चाहता हूँ,,,,हालाँकि देसाई सर ने डील कन्फर्म कर दी है फिर भी मुझे आपसे माफ़ी मांगनी चाहिए सो आई ऍम सॉरी”

प्राची तो बस सोफे के हत्थे पर कोहनी टिकाये , अपना हाथ सर से लगाए एकटक पृथ्वी को देख रही थी। प्राची का यू देखना पृथ्वी को अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन फ़िलहाल वह मजबूर था। पृथ्वी के मुँह से सॉरी सुनकर प्राची ने कहा,”ओह्ह्ह पृथ्वी ! तुम्हे मुझसे माफ़ी मांगने की जरूरत नहीं है तुम यहाँ आये वही काफी है। वैसे ऐटिटूड सूट करता है तुम पर,,,,,,,!!

पृथ्वी ने सुना तो हल्का सा मुस्कुराया लेकिन उसकी मुस्कान में एक कटाक्ष था। उसने प्राची की तरफ देखा और कहा,”तो फिर मैं चलता हूँ”
“इतनी भी क्या जल्दी है ? अभी आये और अभी जाने की बात कर रहे हो,,,,,,,मैंने अभी तुम्हे माफ़ नहीं किया है हाँ अगर तुम यहाँ बैठकर मेरे साथ कॉफी पी लो तो मैं तुम्हारा सॉरी एक्सेप्ट कर सकती हूँ”,प्राची ने कहा
पृथ्वी किसी भी तरह से इस मामले को ख़त्म करना चाहता था ताकि भविष्य में उसे फिर से प्राची का सामना ना करना पड़े इसलिए उसने हामी में सर हिला दिया

प्राची मुस्कुराई और नीलेश को फोन कर दो कॉफी भिजवाने को कहा। पृथ्वी खामोश बैठा था उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वह बस समझने की कोशिश कर रहा था कि आखिर प्राची के दिमाग में चल क्या रहा है ? वही प्राची मोहब्बत भरी आँखों से पृथ्वी को देख रही थी वह ये भूल चुकी थी कि पृथ्वी शादीशुदा है और अपनी पत्नी से बहुत प्यार भी करता है।

“सो मिस्टर पृथ्वी ! बिजनेस के और क्या क्या शौक है तुम्हारे लाइक क्लबिंग , हॉर्स राइडिंग , नाईट आउट,,,,,,,एनीथिंग ?”,प्राची ने आसपास फैली ख़ामोशी को तोड़ते हुए कहा
“मुझे कहानिया सुनना पसंद है,,,,,,,,मेरी वाइफ एक बहुत अच्छी Writer है और उसी आवाज में जादू है”,पृथ्वी ने अपना सीना दो बार थपथपाकर कहा जैसे वह अवनि की मौजूदगी को महसूस करना चाह रहा हो

प्राची ने सुना तो उसे चुभन हुई लेकिन उसने चेहरे पर नहीं आने दी और कहा,”खाने में क्या पसंद है तुम्हे , चायनीज , इटेलियन या फिर सी फ़ूड ?”
पृथ्वी अवनि के बारे में सोचकर मुस्कुराया और कहा,”घर का बना खाना , एक्चुली मेरी वाइफ बहुत अच्छा खाना बनाती है”
कहते हुए पृथ्वी ने फिर अपना सीना दो बार थपथपाया

प्राची ने सुना तो उसका खून ही जल गया यहाँ वह पृथ्वी से बात करना चाहती थी और पृथ्वी हर बार बस अपनी पत्नी का जिक्र करके उसके अरमानो पर पानी फेर देता। चिढ़कर प्राची ने थोड़ा उखड़े स्वर में कहा,”शादी इज सच अ बोरिंग थिंग”
पृथ्वी ने सुना तो प्राची की तरफ देखा और कहा,”शादी इस दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास है”

“लेकिन एक वक्त के बाद शादी में प्यार खत्म हो जाता है”,प्राची ने पृथ्वी की आँखों में देखकर कहा
पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”नहीं , बस आपको हर रोज अपना प्यार जताना आना चाहिए”
और इसी के साथ उसने अपने सीने पर रखे हाथ को उठाकर सोफे के हत्थे पर रख दिया और अपना पैर दूसरे पैर पर रखकर बड़े ऐटिटूड से प्राची को देखने लगा। प्राची ने जैसे ही पृथ्वी के शर्ट पर लगे लिपस्टिक के निशान को देखा उसके चेहरे पर जलन और चिढ के भाव झिलमिलाने लगे और अंदर ही अंदर वह जल उठी।

( अवनि और पृथ्वी को एक दूसरे के करीब लाने के लिए क्या सुरभि चलेगी कोई चाल ? अवनि के प्यार में क्या पृथ्वी बन गया है पूकी पृथ्वी ? क्या पृथ्वी जान पायेगा प्राची के इरादे और दिखायेगा उसे उसकी सही जगह ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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