Pasandida Aurat Season 2 – 37

Pasandida Aurat Season 2 – 37

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

सिरोही , राजस्थान
सुरभि ने इतनी ज्यादा पी ली थी कि अब वह चाहकर भी खुद को सम्हाल नहीं पा रही थी। सिद्धार्थ ने उसके बिखरे बालों को सम्हाला हुआ था और सुरभि उल्टियां कर रही थी। उलटी करने के बाद सुरभि सीधी खड़ी हुई तो सिद्धार्थ ने उसे पास पड़ी बेंच पर बैठाया और गाड़ी में रखी पानी की बोतल लेकर आया। उसने बोतल का ढक्कन खोला और सुरभि की तरफ बढाकर कहा,”थोड़ा पानी पि लो और अपना मुँह साफ कर लो”

सुरभि ने बोतल लिया और जैसे तैसे करके पानी तो पी लिया लेकिन मुँह धोना उसके बस की बात नहीं थी ये देखकर सिद्धार्थ उसके पास आया। उसने उसके हाथ से बोतल ली और हाथ में पानी लेकर खुद ही उसका मुँह साफ करने लगा। ऐसा करते हुए सिद्धार्थ के मन में सुरभि को लेकर कोई भावनाये नहीं थी वह बस ऐसी हालत में सुरभि को अकेले छोड़कर जाना नहीं चाहता था। सुरभि का मुँह धोकर उसने जेब से रुमाल निकाला और सुरभि का मुँह साफ कर दिया।

थककर सिद्धार्थ वही बैठ गया और बोतल में बचा आखरी घूंठ खुद पीकर बोतल को पास ही के डस्टबिन में फेंक दिया। सुरभि की आँखे भारी हो रही थी और वह ठीक से ना बैठ पा रही थी ना ही सिद्धार्थ से बात करने की हालत में थी।
“मैंने कहा था तुमसे , तुम्हे इतनी नहीं पीनी चाहिए थी,,,,,,अब अपनी हालत देखो ऐसे घर कैसे जा पाओगी तुम ?”,सिद्धार्थ ने सुरभि से कहा

सुरभि जिसे कोई होश नहीं था उसने सिद्धार्थ की बाँह अपने दोनों हाथो से थामी और अपनी ठुड्डी सिद्धार्थ की बाँह से लगाकर कहा,”किसने कहा मैंने पी रखी है ? मैं तो बिल्कुल होश में हूँ”
“हाँ सही कहा , तुमने नहीं मैंने पी रखी है”,सिद्धार्थ ने खीजकर कहा और सामने देखने लगा क्योकि सुरभि इस तरह प्यार से देखना उसे अजीब लग रहा था।

सुरभि ने सिद्धार्थ की बाँह से ठुड्डी हटाई और सीधे बैठकर कहा,”तुम टेंशन मत लो अगर तुम्हे घर जाने में प्रॉब्लम हो तो मुझसे कहना मैं तुम्हे घर तक छोड़ दूंगी , वैसे तो मैं तुम्हे बिल्कुल पसंद नहीं करती लेकिन तुम नशे में हो , घर जाते वक्त रास्ते में कही गिर गए तो तुम्हे कौन सम्हालेगा ?”
“अच्छा तो तुम मुझे सम्हालोगी ?”,सिद्धार्थ ने ताना मारकर कहा
सुरभि ने सिद्धार्थ की बांह को अपने दोनों हाथो से थामे रखा और अपना सर उसके कंधे पर टिका दिया।

सिद्धार्थ ने अपने कंधे पर सुरभि का सर देखा और अगले ही पल सुरभि ने उदासी भरे स्वर में कहा,”लेकिन मुझे सम्हालने वाला कोई नहीं है,,,,,,,,,,,इस वक्त मैं कितनी उलझनों में हूँ सिर्फ मैं जानती हूँ,,,,,,,,,,जिस से मैंने प्यार किया , जिसके साथ शादी के सपने देखे वही इंसान मुझे समझ नहीं पाया और 4 साल के रिश्ते को एक सेकेण्ड में खत्म कर दिया। हाह ! कोई इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता है ?”

सिद्धार्थ ने सुना तो उसे समझ आया कि आज सुरभि का ब्रेकअप हुआ है और इसलिए वह इतना दुखी है। कुछ देर पहले जिस सुरभि पर सिद्धार्थ को गुस्सा आ रहा था अब उसी सुरभि पर उसे तरस आने लगा। उसने सुरभि को अपने कंधे से सर हटाने को नहीं कहा और वहा बैठकर उसकी बाते सुनता रहा जो कि थोड़ी अजीब थी लेकिन सुरभि का मन खाली करने के लिए काफी थी।

वहा बैठे बैठे रात के 11 बज चुके थे सिद्धार्थ ने देखा काफी रात हो गयी है तो उसने सुरभि को उठाया और और सम्हालकर गाडी के पास ले आया। सुरभि ड्राइवर के बगल वाली सीट पर जैसे ही बैठी उसके पैर का एक सेंडल खुलकर गिर गया। सिद्धार्थ ने देखा तो झुककर सेंडल उठाया और अपने हाथ से सुरभि के पैर में पहना दिया। ऐसा करते हुए उसके चेहरे पर घमंड या अकड़ का नामोनिशान तक नहीं था। उसने सुरभि के दोनों पैरो को अंदर किया और दरवाजा बंद कर खुद ड्राइवर सीट पर चला आया।

सिद्धार्थ ने गाडी स्टार्ट की और सुरभि को लेकर वहा से निकल पड़ा। गाडी के डेशबोर्ड पर सुरभि का पर्स रखा था , नशे के कारण सुरभि सो चुकी थी। सिद्धार्थ आराम से गाड़ी चला रहा था कि सुरभि के बैग में रखा उसका फोन बजा। सिद्धार्थ ने एक बार इग्नोर किया , अगली बार फोन फिर बजा तो सिद्धार्थ ने गाड़ी की स्पीड धीरे की और पर्स से फोन निकालकर देखा। स्क्रीन पर अनिकेत का नाम देखकर सिद्धार्थ ने एक नजर सोई हुयी सुरभि को देखा और फिर अनिकेत का कॉल कट कर फ़ोन को स्विच ऑफ कर दिया। उसने फोन वापस पर्स में रखा और पर्स को डेशबोर्ड पर,,,,,,,,,,,,!!!”

सिद्धार्थ ने एक नजर सोई हुई सुरभि को देखा और फिर अपना ध्यान सामने लगा लिया। सोई हुई सुरभि कितनी शांत और मासूम लग रही थी जबकि जागते हुए तो वह हमेशा सिद्धार्थ का खून कर देने के मूड में ही रहती थी। सिद्धार्थ सुरभि से हुई मुलाकातों को याद करके मुस्कुरा उठा।

सुरभि के घर का एड्रेस तो सिद्धार्थ को पता नहीं था इसलिए वह उसे लेकर अपने घर चला आया। गनीमत था आज जगदीश जी और गिरिजा घर में नहीं थे बल्कि शहर से बाहर किसी रिश्तेदार की शादी में गए हुए थे और अगले दिन शाम तक आने वाले थे। सिद्धार्थ सुरभि को गोद में उठाकर लेकर अंदर चला आया। वह सुरभि को लेकर अपने कमरे में आया और उसे बिस्तर पर लेटाकर कहा,”अह्ह्ह्हह ! कितनी भारी हो तुम”

सुरभि नींद में कुनमुनाई और करवट बदलकर सो गयी। सिद्धार्थ उसके पैरों के पास आया उसके सेंडिल निकालकर साइड रखे और बिस्तर पर पड़ा कंबल उसे ओढ़ाकर कमरे की लाइट बंद कर दी। सिद्धार्थ ने दरवाजा आधा बंद किया और हॉल में चला आया। उसने अपनी शर्ट के बाजू के बटन खोलकर स्लीवस को फोल्ड किया और किचन में चला आया। उसने पानी का बोतल उठाया और एक साँस में आधा बोतल खाली कर दी। रात के खाने में कुछ नहीं बना था और सिद्धार्थ को अब भूख लगने लगी थी।

सिद्धार्थ किचन से बाहर आकर हॉल में चला आया और सोफे पर आ बैठा। उसने अपना फोन निकाला और अपने लिए ऑनलाइन खाना आर्डर करने लगा।

आनंदा निलय अपार्टमेंट , मुंबई
संडे होने की वजह से पृथ्वी सुबह देर तक सोता रहा , अवनि ने भी उसे नहीं जगाया और चुपचाप अपना काम करती रही। अवनि ने घर की सफाई की , नहाकर पूजा की और कपडे धुलने के लिए मशीन में डाल दिए।  नाश्ता बनाने के लिए अवनि किचन में चली आयी। वह नाश्ते की तैयारी कर ही रही थी कि तभी बेल बजी। अवनि किचन से बाहर आयी तक बेल फिर बज चुकी थी और पृथ्वी की नींद भी टूट चुकी थी। पृथ्वी आँखे मसलते हुए उठकर बैठ गया और अवनि दरवाजे की तरफ बढ़ गयी। अवनि ने दरवाजा खोला तो देखा सामने नकुल खड़ा था।

“गुड मॉर्निंग भाभी !!”,नकुल ने मुस्कुरा कर कहा
सुबह सुबह नकुल को आया देखकर अवनि मुस्कुराई और कहा,”गुड मॉर्निंग ! अंदर आइए”
नकुल अंदर चला आया उसके हाथ में एक गोल डिब्बा था जिसे उसने अवनि की तरफ बढाकर कहा,”ये मेरी आई ने आपके लिए भेजा है , इसमें थालीपीठ है”

“और मेरे लिए ?”,सोफे पर बैठे पृथ्वी ने अंगड़ाई लेकर कहा
“तुम्हारे लिए मैं हूँ ना,,,,,,,,,,!!”,नकुल ने पृथ्वी के बगल में बैठते हुए कहा
“थालीपीठ” ये नाम अवनि पहली बार सुन रही थी। थालीपीठ महाराष्ट्र में बनने वाला सुबह का नाश्ता है जिसे यहाँ के लोग बड़े चाव से खाते है। अवनि डिब्बा लेकर किचन में चली आयी। उसने अपने और पृथ्वी  

के साथ साथ नकुल के लिए भी नाश्ता लगाया और लेकर बाहर चली आयी। पृथ्वी हाथ मुँह धोकर आ चुका था। अवनि ने नाश्ते में पोहा और चाय बनायीं थी उसने जब प्लेट नकुल की तरफ बढ़ाई तो नकुल ने खुश होकर कहा,”अरे वाह भाभी ! पोहा,,,,,,ये तो  मेरा फेवरेट है”
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा दी और अपनी प्लेट लेकर सिंगल सोफे पर आ बैठी। पृथ्वी ने अपनी चाय उठायी और एक घूंठ भरकर नकुल से कहा,”तुम सुबह सुबह यहाँ क्या कर रहे हो ?”

“भाभी के लिए नाश्ता लेकर आया था,,,,,,,,!!!”,नकुल ने खाते हुए कहा
“ये तो हुआ बहाना अब असल वजह बताओ”,पृथ्वी ने कहा
नकुल ने एक नजर पृथ्वी की तरफ देखा और फिर अपना ध्यान खाने में लगाकर कहा,”आज शाम सोसायटी के ग्राउंड में  मैच है,,,,,,,!!!”
“तो,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा

“तो मैं चाहता हूँ कि तुम खेलो और आज का मैच हम जीत जाये”,नकुल ने खाते हुए कहा
“हाँ आज का मैच तो मैं वैसे भी खेलने वाला हूँ , मैंने किसी से जीतने का वादा जो किया है,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा और अवनि की तरफ देखा तो पाया कि अवनि उसी की तरफ देख रही है।
नकुल ने सुना तो ख़ुशी से पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”हाँ ! क्या तुम सच कह रहे हो ? ओह्ह्ह थैंक गॉड पृथ्वी तुम खेल रहे हो ,, आज फिर सामने वाली टीम बुरी तरह से हारने वाली है,,,,,,,,!!”

“सामने वाली टीम का कैप्टन कौन है ?”,पृथ्वी ने खाते हुए पूछा
“अरे अपना लक्षित , उसी की टीम के साथ तो आज का मैच है,,,,,,,,,लेकिन देखो तुम ये मत सोचना कि सामने वाली टीम में तुम्हारा भाई है ,, तुम्हे उन्हें हराना ही है समझे,,,,,,,,,,!!!”,नकुल ने कहा
अवनि ने सुना तो नकुल और पृथ्वी की तरफ देखने लगी दोनों भाई इस मैच में आमने सामने होंगे ये सोचकर अवनि के चेहरे पर परेशानी के भाव तैर गये।

अवनि ने उस शाम पृथ्वी के लिए लक्षित की नाराजगी देखी थी। उसने पृथ्वी को मना करने का सोचा लेकिन उस से पहले ही पृथ्वी बोल पड़ा,”ओह्ह्ह वाओ ! ये तो और भी अच्छा है , अब उसको बताऊंगा बड़ा भाई क्या होता है ? मैं आज का मैच जरूर खेलूंगा और जीतूंगा भी,,,,,,,!!!”
“ये की ना तुमने मर्दो वाली बात , अगर आज का मैच हमने जीता तो मैं तुम्हे ट्रीट दूंगा”,नकुल ने खुश होकर कहा
“नहीं आज अवनि घर पर खाना बनाने वाली है मेरे ऑफिस के लोग अवनि से मिलने डिनर पर आ रहे है,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा

“हाँ तो ठीक है मैं भी आ जाऊंगा,,,,,,,,,,क्यों भाभी ! मैं भी आ सकता हूँ न ?”,नकुल ने अवनि से कहा
“जी,,,,,,,!!”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और उसके कुछ कहने से पहले ही अवनि ने पलकें झपकाकर उसे ये जवाब दिया कि वह कर लेगी।
नाश्ते के बाद अवनि दूसरे कामो में लग गयी और पृथ्वी नकुल के साथ बाते करने लगा। वैसे भी शादी के बाद पृथ्वी नकुल से बहुत कम मिल पाता था और बात कर पाता था।

लक्षित सोसायटी के गार्डन में पड़ी बेंच पर बैठा था और हाथ में पकड़ी बॉल को जमींन पर मारता और कैच करता। उसने अपनी टीम को प्रेक्टिस के लिए बुलाया था लेकिन प्रशांत को छोड़कर कोई भी नहीं आया था। प्रशांत ने जब लक्षित को अकेला देखा तो उसके पास आया और कहा,”तुम अकेले बैठे हो बाकी सब कहा है ?”
“आज सन्डे है ना तो सबने कहा है वो अपना सन्डे एन्जॉय करेंगे और मैच खेलने के लिए शाम में आएंगे”,लक्षित ने बुझे स्वर में कहा

“क्या यार ! एक तो हम लोगो के जीतने के चांस पहले से कम है और ऊपर से वो लोग प्रेक्टिस के लिए नहीं आ रहे”,प्रशांत ने लक्षित के बगल में बैठते हुए कहा
“मुझे तो लगता है आज का मैच भी हम लोग हारने वाले है , फिर इसके बाद हमे बड़े लड़को के सामने सर झुकाकर चलना पडेगा,,,,,,,,,,अह्ह्ह्ह ये कितना बुरा होगा मैं ये नहीं चाहता”,लक्षित ने मायूस होकर कहा  

“नहीं चाहते तो फिर अपने दादा से बात करो ना , उन्हें हमारे साथ खेलने के लिए कहो ,, उनकी बेटिंग अच्छी है वो हमे आज का जीता सकते है”,प्रशांत ने कहा
 लक्षित ने सुना तो उलझन में पड़ गया। पृथ्वी के सामने जाकर वह भला उस से मदद कैसे माँग सकता था ? उस पर आखरी बार जब वह पृथ्वी से मिला था तब उसने पृथ्वी को कैसे लुक दिया था ? इसके बाद तो पृथ्वी शायद ही उसकी मदद करे। उसने प्रशांत की तरफ देखा और कहा,”मैं उन्हें अपने साथ खेलने के लिए नहीं कह सकता,,,,,,,,,,,,!!!”

“क्यों नहीं कह सकते ?”,प्रशांत ने पूछा
“बस नहीं कह सकता,,,,,,,,!!!”,लक्षित ने उदास होकर कहा
“तुम्हारा उनसे झगड़ा हुआ है क्या ?”,प्रशांत ने अंदाजा लगाकर कहा
लक्षित ने हामी में गर्दन हिला दी तो प्रशांत ने कहा,”हा समझ गया , तुम उनसे नहीं कह सकते लेकिन मैं तो कह सकता हूँ ना,,,,,,,,!!”
“वो नहीं मानेंगे”,लक्षित ने कहा
“ये तुम्हे कैसे पता ? वो माने या ना माने हमे एक कोशिश तो करके देखनी चाहिए न,,,,,,,,,,,चलो मेरे साथ”,प्रशांत ने उठकर कहा

“कहा ?”,लक्षित ने हैरानी से पूछा
“पृथ्वी भैया के पास,,,,,,,,तुम बात मत करना मैं उनसे रिक्वेस्ट करूंगा , मैंने सुना है बड़े लड़को की टीम में वो भी है , मैं उनसे रिक्वेस्ट करूंगा वो हमारी साइड से खेले,,,,,,,,,,,!!!”,प्रशांत ने कहा
“नहीं मैं वहा नहीं जाऊंगा,,,,,,,,,,,!!!”,लक्षित ने कहा
“ओह्हफो चलो भी , तुम कुछ मत बोलना सब मैं बोलूंगा”,प्रशांत ने कहा और लक्षित को घसीटते हुए अपने साथ ले गया।

दोनों पृथ्वी के अपार्टमेंट में पहुंचे और लिफ्ट से 7वी मंजिल पर चले आये। इस बीच लक्षित उसे मना करता रहा लेकिन प्रशांत ने उसकी एक नहीं सुनी। दोनों पृथ्वी के फ्लेट के सामने आकर खड़े हो गए। प्रशांत ने अपना बेट लक्षित को दिया और बेल बजा दी। पृथ्वी नहाने गया हुआ था और नकुल हॉल में बैठकर अपना फोन चला रहा था। वह जैसे ही उठने को हुआ अवनि ने हाथ से उसे बैठने का इशारा किया और खुद दरवाजा खोलने चली आयी।

अवनि ने दरवाजा खोला एक अनजान लड़के को सामने देखकर अवनि ने हैरान थी उसने कहा,”जी कहिये”
प्रशांत ने अपने पीछे खड़े लक्षित को देखा तो लक्षित उसके पीछे से निकलकर बगल में चला आया। लक्षित को वहा देखकर अवनि हैरान भी थी और खुश भी उसने मुस्कुरा कर लक्षित को देखा और कहा,”अरे आप यहाँ ?”
“हेलो दीदी। हमे पृथ्वी भैया से मिलना है”,प्रशांत ने कहा

लक्षित ने प्रशांत के मुँह से अवनि के लिए दीदी सुना तो उसकी टीशर्ट की बाँह खींचकर उसे अपनी तरफ किया और दबे स्वर में कहा,”ये दीदी नहीं भाभी है,,,,,,,,!!!”
लक्षित ने धीरे से कहा लेकिन अवनि ने सुन लिया उसने अपने दोनों हाथो को बांधा और लक्षित की तरफ देखकर प्यार से कहा,”मैं आपकी भी भाभी ही लगती हूँ”
लक्षित ने सुना तो ख़ामोशी से अवनि को देखने लगा।  

अंदर बैठे नकुल ने देखा अवनि अभी तक दरवाजे पर ही खड़ी है तो वह उठकर आया और जब उसने प्रशांत और लक्षित को देखा तो हैरान रह गया। नकुल अवनि के बगल में आकर खड़ा हो गया और लक्षित से कहा,”तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो ?”
“हमे पृथ्वी भैया से मिलना है,,,,,,,!!!”,प्रशांत ने कहा
“किसलिए ?”,नकुल ने भंव चढ़ाकर पूछा
”वो हम आपको क्यों बताये ? हमे उनसे ही बात करनी है”,प्रशांत ने भी अकड़कर कहा

नकुल अपने से छोटे किसी लड़के की अकड़ सह ले ऐसा भला कैसे हो सकता था ? उसने प्रशांत का कान पकड़ा और मरोड़कर कहा,”अच्छा बेटा इतनी हिम्मत , चुपचाप बोलो यहाँ क्यों आये हो ?”
“नकुल जी ! छोड़िये उन्हें आप ये क्या कर रहे है ?”,अवनि ने नकुल से कहा तो नकुल ने प्रशांत का कान छोड़ दिया।
“भाभी कितनी अच्छी है और एक आप है खड़ूस कही के,,,,,,,,,!!!”,प्रशांत ने मुँह बनाकर कहा तो नकुल फिर उसकी तरफ बढ़ा लेकिन इस बार लक्षित सामने आ गया और तनकर कहा,”नकुल भैया ! अब आप ज्यादती कर रहे है,,,,,,आप मेरे दोस्त को ऐसे परेशान नहीं कर सकते”

नकुल कुछ कहता इस से पहले पृथ्वी तौलिये से अपने बाल पोछते हुए दरवाजे पर आया और नकुल को पीछे करके कहा,”क्या हो रहा है यहाँ ?”
पृथ्वी को देखकर प्रशांत मुस्कुरा उठा तो वही लक्षित पीछे हट गया और दूसरी तरफ देखने लगा। लक्षित को वहा देखकर पृथ्वी हैरान था और फिर उसने प्रशांत से कहा,”तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो ?”
“पृथ्वी भैया ! आज सोसायटी के ग्राउंड में मैच है और हम चाहते है आप हमारी टीम में खेले , प्लीज भैया हमे दूसरी टीम को हराना है प्लीज प्लीज प्लीज”,प्रशांत ने रिक्वेस्ट करके कहा

पृथ्वी ने सुना तो लक्षित की तरफ देखा और प्रशांत से कहा,”ठीक है लेकिन अपने दोस्त से कहो ये मुझसे रिक्वेस्ट कर तब मैं खेलूंगा”
“ए पृथ्वी ! तू मेरे अगेंस्ट खेलेगा ?”,पास खड़े नकुल ने कहा
“थोड़ी देर के लिए अपना मुँह बंद रखो”,पृथ्वी ने नकुल को घूरकर कहा
 “ए लक्षित बोलो ना अपने दादा से कि आज का मैच ये हमारी टीम से खेले प्लीज्ज”,प्रशांत ने धीरे से कहा

नहीं मैं नहीं बोलूंगा,,,,,मैंने तुमसे पहले ही कहा था”,लक्षित ने नजरे झुकाये धीरे से कहा
“प्लीज ना लक्षित ! तुम नहीं बोलोगे तो पृथ्वी भैया नहीं खेलेंगे , प्लीज आज के मैच के लिए उसके बाद मैं तुमसे कभी कुछ करने को नहीं कहूंगा”,प्रशांत ने कहा
बेचारा लक्षित उलझन में पड़ गया , उस रात कितने ऐटिटूड के साथ उसने पृथ्वी से बात की थी और अब उसे पृथ्वी से रिक्वेस्ट करना पड़ रहा था।

“ए बच्चे लोग ! जल्दी बोलो मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं है,,,,,,!!”,पृथ्वी ने प्रशांत के सामने चुटकी बजाकर कहा
प्रशांत ने मासूम सा मुँह बनाकर आँखों ही आँखों में लक्षित से बोलने का इशारा किया। लक्षित ने अपना दिल मजबूत किया और पृथ्वी की तरफ देखकर कहा,”दादा ! क्या आप आज का मैच हमारी टीम से खेलेंगे प्लीज”
लक्षित के मुँह से आज कितने दिनों बाद पृथ्वी को दादा सुनने को मिला था वह मन ही मन तो बहुत खुश हुआ लेकिन चेहरे पर कठोर भाव लाकर कहा,”हरगिज नहीं ! मैं अपने दोस्त की टीम से खेलूंगा”

लक्षित ने सुना तो पहले पृथ्वी को देखा और फिर गुस्से से प्रशांत को क्योकि उसके कहने पर उसने पृथ्वी से रिक्वेस्ट की और जवाब में ना सुनने को मिला
“ये की ना तूने दोस्तों वाली बात , ए तुम दोनों फुटो यहाँ से और जाकर प्रेक्टिस करो ,, आज का मैच तुम लोग बुरी तरह हारने वाले हो,,,,,,,,,,!!”,नकुल ने प्रशांत और लक्षित दोनों का मजाक उड़ाते हुए कहा
मायूस होकर दोनों चुपचाप वहा से चले गए। अवनि ने ये सब देखा तो पृथ्वी से कहा,”तुम्हे ये नहीं करना चाहिए था पृथ्वी,,,,,,,!!”

पृथ्वी अवनि की तरफ पलटा और बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा,”एवरीथिंग इज फेयर इन लव एंड वार,,,,,,,,,,मैडम जी”

( क्या होगा सुरभि का रिएक्शन जब वह खुद को पायेगी सिद्धार्थ के घर में उसके कमरे में ? क्या आज का मैच जीत पाएंगी लक्षित की टीम या रहना होगा उन्हें दूसरी टीम के सामने हमेशा सर झुकाकर ? क्या अवनि करेगी पृथ्वी से रिक्वेस्ट लक्षित का साथ देने की ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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