Pasandida Aurat Season 2 – 33

Pasandida Aurat Season 2 – 33

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी ने सबके सामने रुषाली को थप्पड़ मार दिया ये देखकर सब हैरान थे। रुषाली का चेहरा गुस्से से लाल हो उठा। नकुल भी हैरान था कि आखिर पृथ्वी ने ऐसा क्यों किया ? वह पृथ्वी के पास आया और उसे पीछे करके कहा,”पृथ्वी क्या कर रहा है ? पागल हो गया है क्या ?”
“इसे पूछ ये क्या करने आयी थी घर ?”,पृथ्वी ने चिल्लाकर गुस्से से कहा
“How dare you पृथ्वी ? तुमने मुझपे हाथ उठाया”,रुषाली ने गुस्से में आकर कहा

रुषाली के साथ बैठे लोग भी अपनी कुर्सियों से उठकर दोनों की तरफ चले आये और उनसे में एक लड़के ने पृथ्वी के पास आकर कहा,”ए पृथ्वी ! क्या कर रहे हो ? तुम्हे लड़की पर हाथ नहीं उठाना चाहिए यार,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने सुना तो गुस्से से पहले लड़के को देखा और फिर रुषाली से कहा,”अवनि मेरी पत्नी है और आज के बाद अगर तुमने उसे नुकसान पहुंचाने का सोचा भी तो मैं भूल जाऊंगा तुम एक लड़की हो,,,,,,,,Stay away from her”

पृथ्वी ने रुषाली से बस इतना कहा और वहा से चला गया। नकुल भी उसके साथ वहा से निकल गया और रुषाली पृथ्वी को जाते देखती रही। पृथ्वी की बात सुनकर सभी रुषाली को देखने लगे और फिर एक एक करके बाकि सब भी वहा से चले गए।

“पृथ्वी , पृथ्वी , रुको”,पृथ्वी के पीछे आते हुए नकुल ने कहा
पृथ्वी बाइक के पास आकर रुक गया तो नकुल उसके सामने आया और कहा,”अभी तुमने जो किया वो सब क्या था , क्या रुषाली तुम्हारे फ्लेट पर आयी थी ?”
पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और फिर उसने नकुल को सब बताया तो नकुल को भी बुरा लगा और साथ ही रुषाली पर गुस्सा भी आया कि आखिर वो ऐसा कैसे कर सकती है ?

“मैं हर गुजरने वाले दिन के साथ अवनि को खुद पर विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा हूँ ऐसे में अगर रुषाली उसके सामने जाकर ऐसा कुछ करेगी तो क्या वो हर्ट नहीं होगी ? मुझे समझ नहीं आता जब मैं उसके साथ था तब उसने मुझे छोड़कर किसी और को चुना और अब जब मैं उस से सारे रिश्ते खत्म कर चुका हूँ तो वह क्यों बार बार मेरी जिंदगी में चली आती है ?”,पृथ्वी ने दुखी स्वर में कहा

“पृथ्वी जहा तक मैंने अवनि को समझा है मुझे नहीं लगता वो इतनी जल्दी तुझे जज करेगी और रही बात रुषाली की तो हो सकता है उसने जेलेसी की वजह से ऐसा किया हो,,,,,,,,,देख तू इन सब में मत उलझ और अवनि पर ध्यान दे , वैसे भी उसे तुम्हारी जरूरत है और तुम्हे उसकी ,, दोनों का विश्वास एक दूसरे पर बना रहा तो फिर चाहे कितनी भी रुषाली आये कोई फर्क नहीं पडेगा,,,,,,,,,तू समझ रहा है मैं क्या कह रहा हूँ ?”,नकुल ने पृथ्वी को समझाते हुए कहा

पृथ्वी ने खुद को शांत किया और हामी में गर्दन हिलाई तो नकुल ने उसकी बाँह छूकर कहा,”अवनि बहुत अच्छी लड़की है यार वो तुझे समझती भी है और तेरी परवाह भी करती है ये देखा मैंने ,,,,,,,,,और ये गुस्सा थोड़ा कम किया कर किसी दिन अवनि ने तुझे ऐसे देखा तो पता नहीं उस पर क्या बीतेगी ?”
“आई ऍम सॉरी,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने धीरे से कहा

“वैसे तुझे रुषाली को इतनी जोर से भी थप्पड़ नहीं मारना चाहिए था”,नकुल ने कहा
पृथ्वी ने नकुल की तरफ देखा और कहा,”अगर किसी ने भी अवनि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो मैं उसे नहीं छोडूंगा”
“अच्छा छोड़ चल घर चलते है,,,,,,,,,!!”,नकुल ने पृथ्वी की बाँह थपथपाकर कहा और दोनों घर के लिए निकल गए

पृथ्वी को अपार्टमेंट के बाहर छोड़कर नकुल अपने घर चला गया। पृथ्वी ऊपर आया और दरवाजा खोलकर अंदर आया। फ्लेट में अँधेरा देखकर पृथ्वी को अजीब लगा। अब तक तो अवनि को उठ जाना चाहिए था फिर फ्लेट में अँधेरा क्यों है ? सोचते हुए पृथ्वी ने हॉल की लाइट जलाई और कमरे की तरफ आया। कमरे में आकर पृथ्वी ने लाइट जलाई तो देखा अवनि अभी तक सो रही थी। पृथ्वी अवनि के पास आया और धीरे से उसका कंधा छूकर कहा,”अवनि , अवनि उठो शाम हो चुकी है”

दवा का असर था जिस से अवनि इतनी देर सोती रही। उसने अपनी आँखे खोली और नींद से भरी अपनी पलकों को दो चार बार धीरे धीरे झपकाया , उसने जब
सामने खड़े पृथ्वी को देखा तो उठकर बैठी और  कहा,”तुम इतनी जल्दी उठ गए ?”
“मैं सोया ही कब ?”,पृथ्वी ने सवाल किया
“तुम सोये क्यों नहीं , क्या तुम मेरी वजह से पूरी रात जाग रहे थे ?”,अवनि ने मासूमियत से पूछा

पृथ्वी मुस्कुराया और बड़े ही प्यार से कहा,”बेटा ! शाम हो रही है ,, रात होनी अभी बाकि है”
अवनि ने सुना तो कमरे में चारों तरफ देखा और फिर नजर कमरे की दिवार पर लगी घड़ी पर पड़ी जो कि शाम के 7 बजा रही थी। अवनि को समझ आया कि वह दोपहर में सोई थी और शाम में उठी है जिस से उसे लग रहा है कि वह सुबह उठी है। अवनि ने हामी में सर हिलाया तो पृथ्वी ने कहा,”आप उठ जाईये , आई कहती है घर की लक्ष्मी को इस समय नहीं सोना चाहिए”

पृथ्वी कमरे से बाहर चला आया। अवनि भी बाहर आयी और वाशबेसिन के सामने आकर मुँह धोने लगी। मुँह धोकर अवनि जैसे ही पलटी पृथ्वी को देखकर हैरान रह गयी। हॉल के मंदिर के सामने खड़ा पृथ्वी बहुत ही श्रद्धा से दीपक जला रहा था। अवनि ने देखा तो उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ कि पृथ्वी और ये सब , वह अपना मुँह पोछते हुए पृथ्वी की तरफ चली आयी और अपलक पृथ्वी को देखती रही।

पृथ्वी ने दोनों हथेलियों से दीपक से आरती ली और अवनि की तरफ आकर उसके सर से लगा दिया। अब तो अवनि और ज्यादा हैरान थी , वह पृथ्वी जो मंदिर जाने के नाम पर बहाने बनाता था , महादेव से हर छोटी छोटी बात की शिकायत करता था , उनसे झगड़ा करता था , आज वही पृथ्वी ये सब कर रहा था वो भी इतने विश्वास और यकीन के साथ कि कोई देखकर ये कह नहीं सकता था कि ये पृथ्वी है,,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि को हैरान परेशान देखकर पृथ्वी ने कहा,”क्या हुआ ?”
“तुम पूजा कर रहे हो ?”,अवनि ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“हाँ आपको रोज देखता हूँ तो सीख गया  , वैसे मैंने उनसे कहा है कि वो आपको जल्दी ठीक कर दे”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में नमी तैर गयी। एक इंसान के दिल में दिल में किसी के लिए आखिर इतनी मोहब्बत कैसे हो सकती है ? अवनि की नम आँखे देखकर पृथ्वी ने कहा,”आपकी आँखे क्यों नम है , क्या मैंने कुछ गलत किया ?”
अवनि ने ना में गर्दन हिला दी। पृथ्वी मुस्कुराया और अवनि का सर छूकर प्यार से कहा,”आप जल्दी ही ठीक हो जाएँगी”

अवनि ने हामी में सर हिलाया और फिर खुद भी मंदिर के सामने चली आयी। अवनि नहायी नहीं थी इसलिए मंदिर की किसी भी चीज को नहीं छुआ बस दूर खड़ी होकर हाथ जोड़े और मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगी। कुछ ही दूर खड़ा पृथ्वी प्यार से अवनि को देखने लगा और फिर ऊपर देखकर मन ही मन कहा,”आपके सामने खड़े होकर प्रार्थना करते हुए कितनी सुन्दर लगती है ना वो , बस आप उसे जल्दी से ठीक कर देना। मैं उसे ऐसे नहीं देख सकता प्लीज,,,,,,,!!!”

अवनि की तबियत पहले से बेहतर थी लेकिन पृथ्वी ने फिर भी उसे किचन में घुसने नहीं दिया और खुद ही दोनों के लिए खाना बनाने लगा। रात के खाने के बाद पृथ्वी ने अवनि को दवा दी और आराम करने को कहा। अवनि कमरे में चली आयी और बिस्तर पर आकर लेट गयी उसका फोन बाहर टेबल पर रखा था।
पृथ्वी अपना लेपटॉप लेकर सोफे पर आ बैठा और काम करने लगा। घंटा भर बीता और अवनि का फोन वायब्रेट हुआ। पृथ्वी ने फोन की तरफ देखा और फिर वापस अपने काम में लग गया।

कुछ देर बाद फोन फिर वायब्रेट हुआ और पृथ्वी का ध्यान अपनी तरफ खींचा लेकिन इस बार भी पृथ्वी ने इग्नोर कर दिया। पृथ्वी ने अपना ध्यान काम में लगा लिया और इस बार फोन बार बार वाइब्रेट हुआ तो पृथ्वी को उसे उठाना ही पड़ा। पृथ्वी ने फोन उठाया और ऑन किया तो स्क्रीन पर नोटिफिकेशन की बाढ़ थी।
“अवनि की परमिशन के बिना उसका फोन देखना गलत होगा,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी बड़बड़ाया

“क्या गलत होगा ? वो तुम्हारी वाइफ है तुम्हे उसका फोन चेक करने का पूरा हक़ है”,एक आवाज पृथ्वी के कानो में पड़ी तो उसने अपने दांयी तरफ देखा उसका दिमाग था
“वाइफ है इसका मतलब ये नहीं कि तुम उसकी पर्सनल चीजों में खुद को इन्वॉल्व करो , फोन नीचे रखो”,इस बार बाँयी तरफ से आवाज आयी और पृथ्वी ने देखा अपने पंखो को फड़फड़ाता उसका दिल था
“पति पत्नी में क्या पर्सनल ? जो उसका है वो तुम्हारा है और जो तुम्हारा है वो उसका है,,,,,,,,,तुम्हे देखना चाहिए आखिर इतनी रात में अवनि को कौन मैसेज कर रहा है ?”,दिमाग ने कहा

“ये तुम्हारे दिमाग में शक पैदा कर रहा है तुम्हे इसकी बातो में नहीं आना है”,दिल ने कहा
“क्या बातों में नहीं आना है ? अबे मैं ही दिमाग हूँ,,,,,,और पृथ्वी तुम ! तुमने अब तक अपने इस दिल की बात सुनी ना मैंने कभी बोला बीच में ? नहीं ना तो बस आज तुम मेरी सुनोगे,,,,,,,,चेक करो अवनि का फोन और देखो कौन है जो उसे इतने मैसेज कर रहा है ?”,दिल ने कहा

“अगर अवनि को पता चला तो उसे कितना बुरा लगेगा”,दिल ने इमोशनल होकर कहा
“बुरा तो तब लगेगा न जब उसे पता चलेगा , तुम उसकी मत सुनो चेक करो”,दिमाग ने कहा
“रुक जाओ पृथ्वी,,,,,,,,,,ऐसा मत करो”,दिल ने कहा
“ए तू कर ना रे बाबा , इसका मत सुन , चेक कर देख देख देख फिर एक मैसेज आया”,दिमाग ने कहा और तब तक पृथ्वी के हाथ में पकड़ा अवनि का फोन फिर वायब्रेट हुआ

आज पहली बार दिमाग ने जीत हासिल की और दिल को ठेंगा दिखाते हुए गायब हो गया। दिल ने भी अपने पंख फड़फड़ाये और हवा हो गया। पृथ्वी ने जैसे ही स्क्रीन स्वाइप किया उसे हैरानी हुई। अवनि के फोन पर कोई लॉक नहीं था। स्क्रीन के नोटिफिकेशन पृथ्वी की आँखों के सामने थे पृथ्वी ने जैसे ही उसे क्लिक किया सुरभि की व्हाट्सप्प चैट खुली , पृथ्वी ने देखा अब तक ये सारे मैसेज सुरभि अवनि को कर रही थी।

पृथ्वी ने सुरभि की चैट ना पढ़ने का इरादा करके जैसे ही बैकस्पेस किया आखिरी मैसेज पर उसकी नजर पड़ी “आज मैं सिद्धार्थ से मिली थी”
सिद्धार्थ का नाम देखते ही पृथ्वी की आँखों के सामने बीते वक्त की सारी यादे किसी फिल्म की तरह चलने लगी। पृथ्वी सिद्धार्थ से गुस्सा नहीं था लेकिन सिद्धार्थ को लेकर एक कसक उसके दिल आज भी थी और वो थी अवनि के साथ किये सिद्धार्थ के बुरे बर्ताव को लेकर,,,,,,,,,!!!”

“तुम सिद्धार्थ से क्यों मिली थी ?” अवनि की जगह पृथ्वी ने लिखकर भेजा
– मैं नहीं मिली वो गधा मुझसे टकराया था
सिद्धार्थ के लिए गधा पढ़कर पृथ्वी मुस्कुराया और फिर अवनि बनकर सुरभि से चैट करने लगा। उसने लिखकर भेजा “हाँ सच में गधा ही है वो , टकराने के लिए भी उसे तुम ही मिली”
– अवनि अगर ये जोक था तो तुम्हे बता दू मुझे बिल्कुल हंसी नहीं आयी है मैं परेशान हूँ और तुम जोक मार रही हो

“क्या हुआ , सिद्धार्थ ने तुम्हे परेशान किया क्या ?”
– नहीं बल्कि मैं अनिकेत की वजह से डिस्टर्ब हूँ
“अब उसने क्या किया ?”
– अवनि तुम्हे सब पता तो है तुम ऐसे अजीब सवाल क्यों कर रही हो ?
“हाँ हाँ मुझे पता है , मैंने पूछा आज उसने क्या किया ?”

– अवनि वो चाहता है मैं सब छोड़कर उदयपुर चली जाओ और उस से शादी कर लू , मैंने उसे कितना समझाया लेकिन वो कुछ सुनने को तैयार ही नहीं है उसे बस अपने मम्मी पापा की ख़ुशी और खानदान की इज्जत पड़ी है। मैंने उस से कहा कि मुझे एक साल का वक्त दे मैं उदयपुर में ट्रांसफर के लिए कोशिश करुँगी लेकिन नहीं , उसे कुछ सुनना ही नहीं है,,,,,,,,,,मुझे तो समझ नहीं आ रहा मैं क्या करू ?

आज सुबह सुबह ही हमारी इतनी बहस हुई है और अभी कुछ देर पहले फिर वही सब बातें,,,,,,,,,,,,,अगर रोज रोज ऐसा हुआ हम दोनों साथ कैसे रह पाएंगे ?
पृथ्वी ने सुरभि का मैसेज ध्यान से पढ़ा और लिखकर भेजा “तो अब तुम क्या सोच रही हो ?”

– मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है अवनि , काश तुम यहाँ होती मैं सच में बहुत परेशान हूँ , बहुत अकेले पड़ गयी हूँ
सुरभि का मैसेज देखकर पृथ्वी को उसके लिए बुरा लगा आखिर कही न कही सुरभि के साथ उसका एक अच्छा बांड था अब चूँकि पृथ्वी सुरभि से अवनि बनकर बात कर रहा था इसलिए उसने लिखकर भेजा “सबसे पहले तो तुम उस गधे अनिकेत से बात करना बंद करो”
– ये तुम क्या कह रही हो अवनि ?

“हाँ सही कह रही हूँ मैं , उसने तुम्हारी जिंदगी को मजाक बना रखा है ,, अरे हलवा है क्या एक लड़के के लिए जॉब छोड़ देना और उसके साथ चले जाना। उसको तुम्हे समझना चाहिए”
– ये तुम्हे क्या हो गया है तुम ऐसे कैसे बात कर रही हो ? ओह्ह्ह्ह समझी कही पृथ्वी के साथ रहते रहते तुम उसकी तरह तो नहीं हो गयी

“क्या मतलब उसकी तरह , वो और मैं अलग है क्या ? हम दोनों एक ही है,,,,,,,,,,और मेरा पृथ्वी बहुत अच्छा है उसके जैसा लड़का पूरी दुनिया में नहीं है”
सुरभि ने पढ़ा तो गिरते गिरते बची और लिखकर भेजा – अवनि तुम ठीक तो हो न ?
“हाँ मैं ठीक हूँ पर तुम मुझे कुछ ठीक नहीं लग रही , अब सुनो ! जैसा मैं कहती हूँ वैसा करो”
– क्या करना होगा ?

पृथ्वी ने इसके बाद एक लंबा चौड़ा मैसेज लिखकर सुरभि को भेज दिया और कुछ देर बाद सुरभि ने ओके लिखकर भेजा तो पृथ्वी मुस्कुरा उठा
“अब तुम सो जाओ” पृथ्वी ने लिखकर भेजा
“गुड नाईट ! थैंक्यू अवनि लेकिन तुम्हे पहले एक बार पृथ्वी से पूछ लेना चाहिए”,सुरभि ने लिखकर भेजा  
“सुरभि ! पृथ्वी बहुत अंडरस्टेंडिंग है , वो समझ जाएगा”,पृथ्वी ने लिखा
“ठीक है,,,,,,,मैं तुम्हे जल्दी मैसेज करुँगी , बाय”,सुरभि ने लिखकर भेजा

“बाय ! गुड नाईट”,पृथ्वी ने लिखकर भेजा तो जवाब में सुरभि ने उसे किस वाला इमोजी भेज दिया ये देखकर पृथ्वी ने अपना हाथ अपने गाल से लगा लिया और शरमाने का नाटक करके खुद से ही कहा,”हाह ! पागल लड़की मुझे किस दे रही है,,,,मैं शादीशुदा हूँ यार,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी ने अवनि के फोन से सुरभि के साथ हुई चैट डिलीट की और फोन वापस वैसे ही रख दिया। देर रात वह लेपटॉप पर काम करता रहा और फिर उसे नींद आने लगी। उसने सभी फाइल्स और लेपटॉप बंद करके टेबल पर रखा और वही सोफे पर लेट गया।

अगली सुबह अवनि पृथ्वी से पहले उठ गयी। उसने अपना गाल और गर्दन छूकर देखी उसे अब बुखार नहीं था लेकिन बदन दर्द था और साथ ही जिस हाथ का सेम्पल अवनि ने दिया था उसमे दर्द था। अवनि ने कबर्ड से कपडे निकाले और नहाने चली गयी। अवनि नहाकर आयी तब तक पृथ्वी भी उठ चुका था। उसने अपने और अवनि के लिए चाय बनायीं और लेकर कमरे में आया लेकिन अवनि वहा नहीं थी।

कुछ देर बाद अवनि बाथरूम से बाहर आयी तो पृथ्वी के चेहरे पर शिकायत के भाव उभरे और उसने चाय टेबल पर रखकर कहा,”मैडम जी ! जब आपको बुखार है तो फिर आप नहाये क्यों ? ऐसे तो आप और ज्यादा बीमार पड़ जाएँगी”
“पृथ्वी मुझे कल से अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए , अब नहाने के बाद काफी अच्छा लग रहा है और मुझे बुखार भी नहीं है,,,,,,,,,देखो”,अवनि ने अपना हाथ पृथ्वी के सामने करके कहा

पृथ्वी ने धीरे से अवनि की कलाई को छुआ और कहा,”हाँ बुखार तो नहीं है लेकिन आपको फिर भी नहीं नहाना चाहिए था,,,,,,,खैर कोई बात नहीं ये चाय पी लीजिये !!”
अवनि बिस्तर पर आ बैठी और चाय का कप लेकर पीने लगी।

पृथ्वी ने भी अपना कप लिया और वही खड़े होकर पीने लगा तो अवनि ने कहा,”तुम खड़े क्यों हो ? बैठ जाओ”
पृथ्वी अवनि के बगल में उस से कुछ दूरी बनाकर आ बैठा। दोनों पति पत्नी थे लेकिन साथ बैठे ऐसे लग रहे थे जैसे टीचर ने स्कूल में पनिशमेंट देकर दोनों को साथ बैठाया हो

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संजना किरोड़ीवाल 

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