Pasandida Aurat Season 2 – 24
Pasandida Aurat Season 2 – 24

वड़ा पाव खाने के बाद दोनों घर जाने के लिए निकल गए और सड़क की तरफ जाने लगे। सड़क किनारे बने बड़े से आईस क्रीम पार्लर पर पृथ्वी की नजर पड़ी तो पृथ्वी ने कहा,”आप आइसक्रीम खाना चाहेगी ? यहाँ बहुत अच्छी मिलती है और ये जगह भी मेरी फेवरेट है,,,,,,,,,,,!!!”
“बटर स्कॉच”,अवनि ने अपनी आँखे चमकाकर कहा
“गुड चॉइस”,पृथ्वी ने भी सेम अवनि की तरह बड़ी सी स्माइल होंठो पर लाकर कहा
ख़ुशी ख़ुशी दोनों आईस क्रीम पार्लर की तरफ बढ़ गए। अंदर आकर पृथ्वी ने अवनि से बैठने को कहा और खुद आर्डर देने चला गया। पृथ्वी ने अवनि के लिए बतर स्कॉच और अपने लिए चॉकलेट आइसक्रीम का आर्डर दिया और आकर अवनि के सामने बैठ गया और उसे इस जगह के बारे में बताने लगा। पृथ्वी कॉलेज टाइम में नकुल और अपने बाकि दोस्तों के साथ यहाँ हर वीकेंड आया करता था। आज वह यहाँ अवनि को लेकर आया था जबकि आज से पहले वह यहाँ किसी लड़की के साथ नहीं आया था।
“सर आपका आर्डर तैयार है”,काउंटर से किसी ने पृथ्वी को आवाज दी और पृथ्वी उठकर चला गया।
उसी आइसक्रीम पार्लर के शीशे के बाहर खड़ी तान्या ने अपने साथ खड़े मनीष और कशिश से कहा,”वो वहा पृथ्वी सर है ना ?”
“अरे हाँ ! लगता है वो यहाँ अपनी वाइफ के साथ आये है,,,,,,,,चलो ना चलकर मिलते है”,मनीष ने खुश होकर कहा
तान्या और कशिश ने एक साथ उसे देखा और कशिश ने कहा,”तुम्हे क्या पृथ्वी सर से मार खानी है ?”
“हाह तुम लोग इतना क्यों डर रहे हो ? वैसे भी सर इस वक्त अपनी वाइफ के साथ है तो उनके सामने हमे कुछ नहीं कहेंगे,,,,,,,,चलो ना चलकर उनसे मिलते है”,तान्या ने बहादुरी दिखाते हुए कहा
“हाँ ठीक है , लेकिन हम वहा रुकेंगे नहीं बस उनकी वाइफ को हेलो बोलकर आ जायेंगे,,,,,,,,,,!!!”,कशिश ने कहा
“ठीक है चलो”,तान्या ने कहा
तीनो दरवाजा खोलकर अंदर आये और अवनि की तरफ बढ़ गए। पृथ्वी आइसक्रीम लेने काउंटर की तरफ खड़ा था।
“हेलो मेम”,तान्या ने अवनि के पास आकर धीरे से कहा
अवनि ने देखा तीन अनजान लोग खड़े है और उसे देखकर मुस्कुरा रहे है अवनि उन्हें कुछ कहती या तान्या के हेलो का जवाब देती इस से पहले पृथ्वी की आवाज सबके कानो में पड़ी,”तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो ?”
पृथ्वी को वहा देखकर सबकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी और होंठो से मुस्कराहट तो ऐसे गायब हुई जैसे उन तीनो ने कोई भूत देख लिया हो। पृथ्वी के चेहरे पर कठोर भाव देखकर अवनि भी हैरान थी क्योकि उसके सामने पूकी बनकर रहने वाला पृथ्वी घर से बाहर कुछ और ही था……!”
तीनो डरते डरते पृथ्वी की तरफ पलटे तो पृथ्वी अपने दोनों हाथो को बांधकर उन्हें देखने लगा। तीनो चुप ये देखकर अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! इन्हे डराना बंद करो”
पृथ्वी ने अपने हाथ नीचे किये और कहा,”मैं इन्हे डरा नहीं रहा मैंने बस इनसे पूछा कि ये लोग यहाँ क्या कर रहे है ? दरअसल ये तीनो ऑफिस में मेरे साथ ही काम करते है”
“अह्ह्ह्ह वो आज मनीष का बर्थडे है न तो ये हमे ट्रीट दें के लिए बाहर लाया था”,तान्या ने झूठ कहा तो मनीष ने हैरानी से उसकी तरफ देखा और कहा,”मेरा बर्थडे ?”
तान्या ने अपने पैर से उसके पैर पर मारा तो मनीष को समझ आया कि उसे तान्या की हाँ में हाँ मिलाना है तो उसने हड़बड़ाकर कहा,”हाँ हाँ ! मेरा बर्थडे , मेरा बर्थडे है आज इसलिए हम लोग यहाँ चले आये और,,,,,,,,,,!!!”
“और इत्तेफाक से आप और मैम मिल गए”,कशिश ने कहा
पृथ्वी को उन लोगो की बातो पर विश्वास तो नहीं हो रहा था लेकिन वह कुछ कहता इस से पहले अवनि ने अपना हाथ मनीष की तरफ बढ़ाया और कहा,”हैप्पी बर्थडे,,,,,,,,,,!!”
मनीष ने सुना तो खुश होकर अवनि से हाथ मिलाने के लिए जैसे ही अपना हाथ बढ़ाया पृथ्वी ने बीच में ही उसका हाथ थामकर कहा,”हैप्पी बर्थडे मनीष”
“अह्ह्ह्हह हहहहह थैंक्यू सर”,मनीष ने झेंपते हुए कहा।
अवनि ने मुस्कुरा कर अपना हाथ नीचे कर लिया क्योकि पृथ्वी की इस मीठी सी जलन से वह अच्छी तरह से वाकिफ जो थी। पृथ्वी ने तीनो को देखा और कहा,”चलो अब जाओ यहाँ से,,,,,,,,!!!”
“पृथ्वी ! तुम इन लोगो के साथ इतना कठोर कैसे हो सकते हो ? आप लोग ! आप लोग भी बैठिये ना प्लीज”,अवनि ने पहले पृथ्वी से कहा और फिर तीनो
अवनि के सामने भला पृथ्वी अब क्या कहता इसलिए उसने तीनो से बैठने का इशारा कर दिया। तान्या , कशिश और मनीष ख़ुशी ख़ुशी कुर्सियों पर आ बैठे।
“आप लोग कुछ खाएंगे ?”,अवनि ने बहुत ही प्यार से पूछा
“अह्ह्ह नहीं नहीं मैम इट्स ओके,,,,,,,!!!”,कशिश ने कहा
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने कहा,”मैं लेकर आता हूँ,,,,,,,,,!!!”
“सर मैं लाता हूँ आप बैठिये ना,,,,,,,,!!”,मनीष ने उठते हुए कहा और काउंटर की तरफ चला गया। पृथ्वी अवनि के बगल में पड़ी कुर्सी पर आ बैठा। उसने तान्या और कशिश का परिचय अवनि को दिया और फिर दोनों को अवनि से मिलवाया तो दोनों खुश हो गयी।
“मेम ! आप बहुत प्यारी है और बहुत सुन्दर भी है,,,,,,,,,!!”,कशिश ने कहा
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा उठी तभी तान्या ने कहा,”मेम ! आपकी और सर की लव मैरिज है ना ? ये सब कैसे शुरू हुआ बताईये न ?”
पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखा और एकदम से खाँसने लगा। अवनि ने पास पड़ा पानी का गिलास पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया
पृथ्वी ने पानी पीया और अपनी खाँसी को कंट्रोल किया। तान्या के इस सवाल पर उसे सहसा ही अवनि को किया वो मैसेज याद आ गया जहा से उसकी और अवनि की बातचीत शुरू हुई थी। “marry me”
अवनि कुछ देर शांत रही और फिर कहा,”इन्होने सीधा मुझे शादी के लिए प्रपोज किया था”
“ओह्ह्ह्ह वाओ मेम ! सर को देखकर लगता नहीं सर इतने स्ट्रेट फॉरवर्ड होंगे,,,,,,,,,!!”,कशिश ने कहा
“हाँ मेम ! सर बहुत लकी है,,,,,,,,!!!”,तान्या ने कहा
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”नहीं ! मैं बहुत लकी हु”
पृथ्वी ने सुना तो उसका दिल धड़कने लगा , अवनि खुद को लकी समझ रही थी क्योकि वह पृथ्वी के साथ थी इस से खूबसूरत बात पृथ्वी के लिए और क्या हो सकती थी ? अवनि को अपनी ओर देखते पाकर पृथ्वी शर्माने लगा , उसके कान लाल हो गए और वह उस से नजरे चुराने लगा। पृथ्वी ने देखा मनीष अभी तक नहीं आया है तो उसने उठकर कहा,”मैं उसे देखकर आता हूँ , आप लोग बाते कीजिये”
पृथ्वी चला गया और टेबल के इर्द गिर्द तान्या , कशिश और अवनि बैठी थी। तान्या और कशिश को अवनि बहुत पसंद आयी , उसकी सादगी , उसका सधे हुए लहजे में बात करना और बात करते हुए मुस्कुराना उसे वहा मौजूद सभी लोगो से अलग बना रहा था।
“मेम आप सच में बहुत अच्छी है , आपसे मिलकर , बातें करके लग नहीं रहा कि हम लोग आपसे पहली बार मिले है,,,,,,,,,,वरना सर तो बहुत खड़ूस और गुस्से वाले है,,,,,,,,,,ज़रा सी गलती हो जाये तो कितना लंबा लेक्चर सुनने को मिल जाता है”,तान्या ने अवनि से पृथ्वी की शिकायत करते हुए कहा
अवनि ने गर्दन घुमाकर शीशे के पास खड़े फोन पर बात करते पृथ्वी को देखा और कहा,”नहीं ! खड़ूस नहीं है वो बस हर किसी के साथ सहज नहीं हो पाते और हर कोई उन्हें समझ पाए वो इतने सरल भी नहीं है ,, वैसे मैं उनसे कहूँगी आप लोगो के साथ थोड़ा नरमी से पेश आये,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ मेम ! हमे पूरा यकीन है आप के साथ रह के सर सुधर जायेंगे,,,,,,,,,!!”,तान्या ने कहा और फिर दबी सी हंसी हसने लगी। अवनि को बुरा नहीं लगा क्योकि उसके सामने बैठी दोनों लड़किया उस से और पृथ्वी से 7-8 साल छोटी थी और इस उम्र में अल्हड़पन और बचपने का होना आम बात थी।
मनीष सबके लिए आइसक्रीम ले आया और सभी बैठकर बाते करते हुए खाने लगे। पृथ्वी भी सबकी तरफ चला आया और एक बार फिर अवनि के बगल में आ बैठा। पृथ्वी के सामने तान्या , कशिश ज्यादा नहीं बोल पायी और मनीष उस बेचारे ने तो अपने होंठो को ही सिल लिया। तीनो को अवनि से मिलकर बहुत अच्छा लगा और ख़ुशी भी हुई। पृथ्वी उन्हें छोड़ने दरवाजे तक आया और ध्यान से घर जाने को कहा।
तीनो जाने के लिए आगे बढ़ गए , तान्या पलटकर वापस आयी और पृथ्वी के कान के पास आकर धीरे से कहा,”सर ! आप दोनों साथ में बहुत अच्छे लग रहे है , आप सच में बहुत लकी है”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और तान्या के सर पर हलकी सी चपत मारकर कहा,”चलो अब जाओ”
बाय सर ! गुड नाईट”,तान्या ने कहा और हाथ हिलाते हुए वहा से चली गयी। पृथ्वी मुस्कुराते हुए जाने के लिए पलटा तो देखा अवनि उसकी तरफ ही चली आ रही है। अवनि पृथ्वी के पास आयी और पृथ्वी ने कहा,”चले ?”
अवनि ने हामी में गर्दन हिला दी। पृथ्वी ने अवनि के हाथ से बैग लिया और उसके साथ घर के लिए निकल गया।
दोनों फ्लेट पर चले आये। अवनि ने पृथ्वी से बैग लिए और उन्हें अंदर रख दिया। वह किचन में गयी और पानी ले आयी। उसने पानी का गिलास पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी सोफे पर आ बैठा और पानी पीने लगा सहसा ही अवनि को कुछ याद आया तो वह कमरे में चली गयी और जब वापस आयी तो उसके हाथ में तकिया और कम्बल था ये देखकर पृथ्वी ने कहा,”आप ये तकिया और कम्बल लेकर कहा जा रही है ?”
“आज मैं यहाँ सोफे पर सोने वाली हूँ और तुम वहा अंदर सोओगे”,अवनि ने तकिया और कम्बल सोफे पर रखकर कहा
पृथ्वी ने सुना तो उस हैरानी हुई और उसने कहा,”अरे मैडम जी ! आप यहाँ क्यों सोयेंगी ? मैं सो जाऊंगा आप अंदर सोईये”
“क्योकि मेरा यहाँ सोने का मन है,,,,,,,,तुम आज अंदर सोने वाले हो बस”,अवनि ने कहा
“नहीं आप अंदर सोयेंगी मैं यहाँ ठीक हूँ,,,,,,,,चलिए जाईये अपने कमरे में”,पृथ्वी ने कहा
“पृथ्वी ! मैंने कहा न तुम अंदर सोओगे ,, मुझे यहाँ सोना है इसलिए चुपचाप उठो और जाओ अपने कमरे में,,,,,,,,!!”,अवनि ने पृथ्वी को डाँटकर कहा
“अरे लेकिन मैं यहाँ ठीक हूँ ना मैडम जी और आज ये अचानक आपको क्या हो गया है ? आप यहाँ सोने की जिद क्यों कर रही है ?”,पृथ्वी ने कहा
“मैं जिद नहीं कर रही , मेरा यहाँ सोने का मन है इसलिए मैं तुमसे जाने को कह रही हूँ और वैसे भी तुम्हे मेरी बात माननी चाहिए , मैं तुम से बड़ी हु”,अवनि ने
मुँह बनाकर कहा
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”आप सिर्फ उम्र में बड़ी है बाकि हरकते सारी आपकी बच्चो वाली है मैडम जी,,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो कुछ नहीं कहा बस चुपचाप पृथ्वी को देखने लगी।
पृथ्वी ने हार मान ली और टेबल पर रखा अपना फोन उठाकर कमरे की तरफ जाते हुए धीमे स्वर में कहा,”पता नही आप बड़ी होंगी मैडम जी”
“मैं बड़ी ही हूँ पृथ्वी”,अवनि ने उसे जाते देखकर ऊँचे स्वर में कहा
“हाँ लेकिन सिर्फ उम्र में,,,,,,,,गुड नाईट”,पृथ्वी ने कहा और कमरे में चला गया हालाँकि दरवाजा उसने खुला रखा।
अवनि सोफे के पास खड़ी कमरे की तरफ देखती रही और फिर धीरे से बड़बड़ाई,”मैं जानती हूँ पृथ्वी यहाँ सोफे पर सोना तुम्हारे लिए कितना मुश्किल है लेकिन तुम कहोगे नहीं क्योकि तुम मुझे परेशान करना नहीं चाहते,,,,,,,,,लेकिन तुम्हारे साथ रहते हुए तुम्हारे कहे बिना मैं तुम्हारी परेशानी ना समझू तो फिर मेरा यहाँ होना बेकार है,,,,,,,,,,मेरी बातें और मेरी जिद बेशक तुम्हे बचकानी लग रही है पर कम से कम आज की रात तुम सुकून से तो सोने वाले हो,,,,,,,,गुड नाईट”
अवनि सोफे पर आकर लेट गयी , अवनि की हाईट पृथ्वी से कम थी इसलिए वह आसानी से सोफे पर सो गयी ना उसके पैर बाहर गए ना ही उसे वहा सोना अजीब लगा।
कमरे में आकर पृथ्वी ने लाइट बंद की और बिस्तर पर आकर लेट गया। उसने दरवाजा खुला रखा जिस से हॉल में जलती छोटी लाइट की माध्यम रौशनी कमरे के अंदर तक आ रही थी। पृथ्वी ने तकिया रखा और बिस्तर पर आ लेटा। पुरे तीन दिन बाद पृथ्वी अपने बिस्तर पर सो रहा था और जैसे ही लेटा उसे एक सुकून महसूस हुआ। उसने अवनि से कभी कहा नहीं लेकिन सोफे पर सोना सच में उसके लिए मुश्किल था। सोफे पर लेटे लेटे कितनी ही बार उसे करवट बदलनी पड़ती थी और ना ही वह ठीक से सो पाता था।
आज पृथ्वी अपने कमरे में था , अपने बिस्तर पर था लेकिन अब उसे नींद नहीं आ रही थी। वह पेट के बल लेट गया और गाल तकिये से लगाकर बिस्तर के आधे खाली हिस्से को देखने लगा। पृथ्वी ने बड़े प्यार से उस खाली जगह को छूकर देखा। ऐसा नहीं था कि पृथ्वी अवनि पर अपने पति होने का हक़ जताना चाहता था या जल्द से जल्द उसके साथ रिश्ते में आगे बढ़ना चाहता था। वह बस चाहता था अवनि उसके सामने रहे , उसके आस पास रहे , वह उस से ढेर सारी बाते करे और उसे प्यार से बस यू ही देखता रहे लेकिन अवनि पास होकर भी पृथ्वी से बहुत दूर थी।
वह पृथ्वी के साथ अभी इतना सहज नहीं थी कि उसके साथ एक कमरे में , एक बिस्तर पर रहे। पृथ्वी ने करवट बदली और पीठ के बल लेट गया।
उसने अपनी आँखे मूँद ली और धीरे धीरे नींद के आगोश में चला गया। आज रात पृथ्वी को बहुत अच्छी नींद आयी और दूसरी तरफ अवनि भी सोफे पर दुबक कर सोई रही।
सुबह अवनि जल्दी उठ गयी। वह बिना आवाज किये कमरे में आयी , कबर्ड से अपने कपडे लिए और नहाने चली गयी। नहाने के बाद अवनि तैयार हुई और कमरे से बाहर चली आयी। पृथ्वी गहरी नींद में था और बहुत ही सुकून से सोया था इसलिए अवनि ने उसे नहीं जगाया।
हॉल में आकर अवनि ने मंदिर की सफाई की पूजा की और फिर किचन में चली आयी। सिरोही में भी अवनि सुबह सुबह यही किया करती थी। घर की सफाई के बाद नहाना और फिर पूजा करना उसके बाद ही उसके दिन की शुरुआत होती थी। किचन में आकर अवनि ने पृथ्वी और अपने लिए चाय चढ़ा दी और साथ ही पृथ्वी के लिए टिफिन बनाने की तैयारी भी करने लगी।
अवनि ने चाय कप में छानी तब तक पृथ्वी उठकर बाहर आ चुका था। अवनि ने देखा तो चाय लेकर आयी और टेबल पर रखकर पृथ्वी से चाय पीने का इशारा किया। पृथ्वी वाशबेसिन के सामने आया मुँह धोया और चाय का कप उठाकर बालकनी की तरफ चला आया। उसने देखा आज मौसम खराब है और बारिश भी हो सकती है। अवनि ने भी अपनी चाय लेकर बालकनी में चली आयी और पृथ्वी के सामने खड़ी हो गयी।
सुबह सुबह वह कितनी अच्छी लग रही थी , पृथ्वी एकटक उसे देखने लगा तो अवनि ने बाहर की तरफ देखा और कहा,”आज का मौसम काफी अजीब है ना ?”
“अजीब नहीं है मैडम जी , यहाँ मुंबई में बारिश का कोई ठिकाना नहीं कभी भी हो जाती है”,पृथ्वी ने कहा
“बारिश,,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि बस इतना ही कह पायी
उसकी आँखों के सामने वो पल आ गया जब बारिश में भीगते हुए उसने सिद्धार्थ का हाथ थामकर कहा था,”मेरा हमेशा से सपना था कि मैं अपने लाइफ पार्टनर के साथ उसका हाथ थामकर बारिश में भीगूँ” “तुम ना ये बेकार सपने देखना बंद करो , तुम्हारे ऐसे सपनो की वजह से दुसरो को प्रॉब्लम होती है”
वो पल याद आते ही अवनि के चेहरे पर उदासी के भाव तैर गए और आँखों में हलकी नमी तैर गयी।
( क्या अपने टीम मेम्बर्स के साथ बदलेगा पृथ्वी का रवैया या फिर रहने वाला है इतना ही कठोर ? क्या अवनि की ख़ुशी के लिए पृथ्वी मन में ही दबा लेगा अपने जज्बात ? क्या आज भी है अवनि के मन पर लगे जख्म ताजा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 2” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Vartman kitna bhi achcha ho, lakin bita hua kal yaad krne pr aankhe nam ho jati hai…fir chahe aankhe khushi m nam ho ya dukh m…lakin yaha Avni ko fir se Siddharth ki barisha wali baat yaad aa gayi…kya hee kar sakte hai…lakin Prithvi Avni ko ese udaas nhi rahne dega…ek mosam ka suhavna hai aur dusra aaj wo sukoon k sath sokar utha hai… kya pata wo aaj office hee na jaye…aur agar office gaya to manish, Tanya aur kasish unki taang zarur keechengi… Avni ko lekar