Pasandida Aurat Season 2 – 22

Pasandida Aurat Season 2 – 22

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी की बात सुनकर जयदीप मुस्कुराया और कहा,”वैसे आज तुम्हारी अवनि ने तुम्हे बचा लिया लेकिन आगे से ऐसा नहीं चलेगा समझे,,,!!”
“हाँ मैं ध्यान रखूंगा,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“अच्छा पृथ्वी ! अवनि तुम्हारे साथ खुश है ना ?”,जयदीप ने गंभीर होकर पूछा
“और आप ये किस हक़ से पूछ रहे है ?”,पृथ्वी ने अपनी भँव चढ़ाकर पूछा  

“अवनि का बड़ा भाई होने के हक़ से , अब बताओ तुम्हे कोई प्रॉब्लम है ?”,जयदीप ने कहा
“इस हिसाब से तो मैं आपका जीजा हुआ,,,,,,शर्म नहीं आती अपने जीजा से ऐसे बात करते हुए”,पृथ्वी ने इतरा कर कहा
“अरे अरे जीजाजी आप कल ऑफिस आईये न,,,,,,,,,अच्छे से खातिरदारी करूंगा आपकी”,जयदीप ने पहले बहुत प्यार से और फिर आखरी शब्दों को चबाकर गुस्से से कहा
“ये आपकी बातो में मुझे रिक्वेस्ट कम और धमकी ज्यादा नजर आ रही है,,,,,,,वैसे आपने खुद को अवनि का बड़ा भाई क्यों कहा ?”,पृथ्वी ने पूछा

“उसे जब पहली बार मैरिज रजिस्ट्रार के ऑफिस में देखा तब पता नहीं क्यों उसे देखकर ऐसा महसूस हुआ ? वैसे भी उसका कोई परिवार नहीं है इसलिए मैंने उसे उसी दिन अपनी छोटी बहन मान लिया था और मेरी खुशकिस्मती देखो मैंने उसके लिए गवाह के तौर पर साईन भी किये”,जयदीप ने ख़ुशी भरे स्वर में प्यार से कहा
“ऐसा मत कहिये उसका कोई परिवार नहीं है , मैं उसका परिवार हूँ,,,,,,,,मैं एक पिता की तरह उसकी हर ख्वाहिश पूरी करूंगा और पति की तरह उसका हमेशा ख्याल रखूंगा”,पृथ्वी ने कहा

मुझे पूरा यकींन है तुम ये कर लोग,,,अवनि बहुत ही अच्छी और समझदार लड़की है इसलिए मुझे ये भी यकीन है कि वो तुम्हे भी सुधार देगी”,जयदीप ने कहा
“मैं आपको बिगड़ा हुआ लगता हूँ क्या ?”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“नहीं ना ! तुम बस थोड़े खड़ूस हो , आई हॉप अवनि तुम्हारे अंदर थोड़ी मोहब्बत पैदा करे और तुम थोड़े नरम बन जाओ,,,,,,!!!”, जयदीप ने कहा

“हाह ! वो और मोहब्बत ,, उसे खुद मुझसे मोहब्बत सीखने की जरूरत है। वो बस मोहब्बत वाली कहानिया लिख सकती है लेकिन जब मेरे सामने इजहार करने की बारी आएगी तो खामोश हो जाती है ,, बड़ी बड़ी पलकें झपकाकर मुझे ऐसे देखती है जैसे मैंने कोई अजीब बात कह दी हो,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“अह्ह्ह्हह सही कहा तुमने ? अजीब तो तुम हो”,जयदीप ने कहा
“मैं क्या आपकी गर्लफ्रेंड हूँ ?”,पृथ्वी ने जयदीप की बात का जवाब ना देकर पूछा  

“नहीं ! तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो ?”,जयदीप ने कहा
“तो फिर आप गर्लफ्रेंड की तरह तब से फोन से क्यों चिपके हुए है ? रखिये फोन मुझे और भी बहुत काम है,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने चिल्लाकर कहा
किचन में काम करती अवनि तक आवाज गयी तो उसने दरवाजे से झांककर देखा और पृथ्वी ने उसे सब ठीक है का इशारा किया। अवनि वापस अपने काम में लग गयी और पृथ्वी ने फोन कान से लगा लिया तो जयदीप ने कहा,”ऑफिस से घर तो तुम जा ही चुके हो अब क्या जरुरी काम है तुम्हे ?”

“वो मुझे अवनि को मंदिर लेकर जाना है”,पृथ्वी ने कहा
“मंदिर क्यों ? क्या अब तुम मंदिर में भी शादी करने का सोच रहे हो ?”,जयदीप ने पूछा
“अह्ह्ह्ह मेरा बस चले तो मैं हर महीने उस से शादी करू लेकिन फ़िलहाल के लिए मैं उसे मंदिर इसलिए लेकर जा रहा हूँ क्योकि उसे महादेव का शुक्रिया अदा करना है”
“स्ट्रेंज ! उसे ऐसा क्यों करना है ?”,जयदीप ने कहा

पृथ्वी पहले शरमाया और फिर कहा,”हो सकता है महादेव का शुक्रिया अदा इसलिए कर रही हो कि महादेव ने उसे मेरे जैसा स्मार्ट , हेंडसम लड़का दिया जो उसे इतना पसंद करता है”
जयदीप ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”मैंने सोचा नहीं था तुम ऐसी बाते भी करते हो,,,,,,,,,!!!”
“अह्ह्ह्ह ठीक है मैं रखता हूँ”,पृथ्वी ने हड़बड़ाकर कहा क्योकि अनजाने में ही उसने जयदीप के सामने अवनि के लिए प्यार जो दिखा दिया था।

“हाहाहाहा ठीक है,,,,,,,,,,अच्छा सुनो”,जयदीप ने कहा
“अब क्या है ?”,पृथ्वी फिर चिढ़ा
“तुम लोग किस मंदिर जाने वाले हो ?”,जयदीप ने पूछा
“किंग रोड के पास वाले शिव मंदिर में,,,,,,,क्या आप भी वहा आ रहे है ?”,पृथ्वी ने पूछा

“नहीं मुझे तुम दोनों की प्रायवेसी स्पोइल नहीं करनी मैं बस इतना कह रहा हूँ कि उसी मंदिर के बाँयी साइड एक दूकान है जहा बहुत ही गजरा मिलता है,,,,,,,,तुम अवनि के लिए वो जरूर खरीदना और हो सके तो खुद उसे पहना भी देना , उसे अच्छा लगेगा”,जयदीप ने बड़े प्यार से कहा
“आपको ये सब कैसे पता ?”,पृथ्वी ने कहा

“बेटा ! जिस उम्र से तुम गुजर रहे हो उस से मैं 10 साल पहले ही गुजर चुका हूँ , मंदिर मैं भी गया हूँ और गजरा मैंने भी किसी के लिए खरीदा था बस इसलिए,,,,,,,,,अब जाओ”,जयदीप ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”थैंक्स”
जयदीप ने फोन काट दिया और पृथ्वी भी अपना फोन टेबल पर रखकर कपडे बदलने चला गया।  

पृथ्वी कपडे बदलकर हॉल में चला आया। घर के कुछ जरुरी काम खत्म होने के बाद अवनि ने कपडे बदले और पृथ्वी के सामने आकर कहा,”चले ?”
“हम्म्म,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा और अवनि के साथ फ्लेट से बाहर निकल गया। जैसे ही दोनों बाहर आये सामने वाले फ्लेट में रहने वाली रीना भाभी मिल गयी और पृथ्वी से कहा,”अरे पृथ्वी ! कभी अपनी बायको को लेकर हमारे घर आओ”

“जी जरूर”,पृथ्वी ने कहा और अवनि को साथ लेकर लिफ्ट की तरफ बढ़ गया। जाते जाते उसने पलटकर देखा तो रीना भाभी ने अवनि और पृथ्वी की तरफ इशारा करके हाथ की पहली ऊँगली और अंगूठे से निशान बनाकर इशारा किया। ये देखकर पृथ्वी मुस्कुरा उठा और ये सच ही था जब से अवनि उसके साथ मुंबई आयी थी तब से मुस्कुराहट उसके होंठो से जाने का नाम नहीं ले रही थी। पृथ्वी अवनि के साथ लिफ्ट में आया और लिफ्ट के दरवाजे बंद हो गए। लिफ्ट नीचे आकर रुकी और दोनों अपार्टमेंट से बाहर चले आये।

पृथ्वी अवनि के साथ सोसायटी से बाहर जाने वाले रास्ते की तरफ बढ़ गया। जिस रास्ते से पृथ्वी जा रहा था उसी रास्ते पर सामने से अपने हाथो में बेट थामे लक्षित चला आ रहा था। आज पृथ्वी की सोसायटी में क्रिकेट मैच था और लक्षित के कुछ दोस्त इस सोसायटी में भी रहते थे इसलिए वह उनके साथ खेलने आया था। पृथ्वी ने लक्षित को सामने से आते देखा तो रुक गया। जैसे ही वह पृथ्वी के सामने आया अवनि उसे देखकर मुस्कुराई लेकिन लक्षित ने नजरे घुमा ली।

“क्या तुम्हारा मैच है ?”,पृथ्वी ने कहा
“इस से आपको क्या मतलब ? मेरे रास्ते से हटिये”,लक्षित ने कहा
पृथ्वी साइड हट गया लक्षित जैसे ही आगे बढ़ा पृथ्वी ने उसके सर पर एक चपत लगायी और कहा,”मैं अभी भी तुम्हारा बड़ा भाई हूँ समझे,,,,,,,,!!!”

लक्षित ने सुना तो पृथ्वी को घूरकर देखा और अपना सर सहलाते हुए आगे बढ़ गया।
पृथ्वी अवनि की तरफ पलटा तो अवनि ने कहा,”तुम्हे उसे ऐसे मारना नहीं चाहिए था वो तुम्हारा छोटा भाई है,,,,,,,,,,,!!!”
“छोटा भाई है तो छोटा बन के रहे ना , तेवर देखे आपने उसके,,,,,,,अगली बार ऐसा करेगा तो बहुत मार खायेगा मुझसे”,पृथ्वी ने कहा

“क्यों तुम गुंडे हो ?”,अवनि ने पूछा
“नहीं ! आपने कभी इतना हेंडसम गुंडा देखा है ?”,पृथ्वी ने अपनी तारीफ में इतराकर कहा
“तुम प्यार से भी किसी को समझा सकते हो,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“कितनी बार तो समझाया प्यार से कहा समझ रही है आप,,,,!!”,पृथ्वी ने धीमे स्वर में बड़बड़ाकर कहा जिसे अवनि ने सुन लिया लेकिन वह पृथ्वी की इस बात का जवाब देना नहीं चाहती थी इसलिए कहा,”आओ चलते है,,,,,,,,,!!!”

“देखा फिर मेरी बात को नजरअंदाज कर दिया आपने,,,,,,,,,कब मैडम जी आखिर कब समझेंगी आप कि मैं आपसे,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने बच्चो की तरह मचलकर कहा
“मैं आपसे क्या ?”,अवनि ने कहा
“कि मैं हाइट में आपसे बड़ा हूँ , आपको मेरी रिस्पेक्ट करनी चाहिए”,पृथ्वी ने कहा
अवनि पृथ्वी की तरफ पलटी और कहा,”तुम हाइट में चाहे जितने बड़े हो मुझसे बात करने के लिए तुम्हे झुकना ही पडेगा”

पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”आप कहकर तो देखिये मैडम जी , आपके सामने जिंदगीभर झुकने को तैयार हूँ,,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी की इन्ही बातो का अवनि के पास जवाब अक्सर कोई जवाब नहीं होता था। अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए अवनि से चलने का इशारा किया।

दोनों शिव मंदिर चले आये। पृथ्वी मंदिर की सीढ़ियों पर ही रुक गया क्योकि अंदर जाने में तो उसे शर्म आ रही थी आखरी बार महादेव से झगड़ा जो किया था उसने। अवनि आगे बढ़ी उसने पलटकर देखा पृथ्वी सीढ़ियों पर खड़ा है तो उसने पृथ्वी से आने का इशारा किया। पृथ्वी ने आसमान की तरफ देखकर गहरी साँस ली और आगे बढ़ गया। अवनि पृथ्वी के साथ मंदिर चली आयी।

दोनों महादेव की मूर्ति के सामने आ खड़े हुए अवनि ने अपने हाथ जोड़े और बगल में खड़े पृथ्वी को देखा तो पाया वह अपने हाथो को नीचे किये बस एकटक महादेव को देख रहा है। अवनि ने उसके दोनों हाथो को उठाया और उन्हें आपस में मिलाकर कहा,”क्या तुम्हे अब भी इनसे शिकायत है पृथ्वी ?”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और ना में गर्दन हिला दी। अवनि ने महादेव को देखा और हाथ जोड़कर मन ही मन उनसे प्रार्थना करने लगी।

पृथ्वी भी हाथ जोड़कर उनसे उस दिन के लिए माफ़ी मांगने लगा और फिर अवनि के साथ मंदिर से बाहर चला आया। सीढ़ियों से उतरते हुए पृथ्वी की नजर नीचे दूकान पर रखे गजरो पर चली गयी और सहसा ही उसे जयदीप की बात याद आ गयी। अवनि सीढ़ियों पर आ बैठी और मंदिर की तरफ देखकर मन ही मन प्रार्थना करने लगी। पृथ्वी नीचे आया और दुकानवाले से एक गजरा लेकर अवनि की तरफ चल पड़ा। ना जाने क्यों उसे अवनि के सामने ये गजरा ले जाने में शर्म आ रही थी इसलिए जैसे ही अवनि ने उसकी तरफ देखा तो उसने हाथो को पीछे कर लिया।

अवनि सीढ़ियों से उतरकर पृथ्वी के पास आयी और कहा,”क्या छुपा रहे हो ?”
“अह्ह्ह्ह कुछ कुछ नहीं,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“पृथ्वी ! अपने हाथ आगे करो”,अवनि ने गंभीर स्वर में कहा
पृथ्वी ने शर्माते हुए अपने दोनों हाथो को आगे कर दिया। उसकी हथेलियों में रखे गजरे को देखकर अवनि मुस्कुरा उठी और कहा,”ये तुम मेरे लिए लाये हो ?”

“हाँ ! आप इसे अपने बालों में लगाएंगी तो ये अच्छा लगेगा”,पृथ्वी ने संकुचाते हुए कहा आज से पहले उसने ऐसा कभी किया नहीं था और आस पास के लोग उसे ही देख रहे थे तो उसे और ज्यादा शर्म आ रही थी।
अवनि ने सुना तो कुछ देर पृथ्वी को देखती रही और फिर मंदिर की सीढ़ियों पर जाकर बैठ गयी। पृथ्वी ने देखा तो उदास हो गया और अपना सर झुका लिया तभी अवनि ने कहा,”पृथ्वी यहाँ आओ”

पृथ्वी अवनि के पास चला आया तो अवनि घूम गयी और कहा,”तुम लेकर आये तो फिर क्यों ना तुम ही अपने हाथो से लगा दो”
पृथ्वी ने जैसे ही सुना उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी और आँखे चमक उठी। वह इतना खुश हुआ जैसे छोटे बच्चे को उसकी पसंद की चीजे मिलने पर वह होता है। पृथ्वी ने गजरा लिया और अवनि के बालों में लगाने लगा लेकिन ये क्या ख़ुशी के मारे उसके हाथ काँप रहे थे। पृथ्वी ने काँपते हाथो से उसे लगाया और अवनि से दूर हट गया। अवनि पलटी और कहा,”कैसा लग रही हूँ ?”

पृथ्वी जिसके पास कभी कभी अपनी भावनाये जाहिर करने के लिए शब्द नहीं होते थे उसने अपना हाथ अवनि की तरफ किया और आँखे बंद कर करके अपने सीने के बांयी तरफ रख दिया “पागल”,अवनि ने मुस्कुरा कर धीरे से कहा और आगे बढ़ गयी।
“सिर्फ आपके प्यार में मैडम जी”,कहकर पृथ्वी मुस्कुराते हुए अवनि के पीछे चल पड़ा।

शाम का वक्त था और दोनों साथ साथ फुटपाथ पर चल रहे थे। अवनि इस शहर की खूबसूरती को अपनी आँखों में भरते हुए चल रही थी और अवनि के बगल में चलते हुए पृथ्वी अवनि की सादगी को अपनी आँखों में भर रहा था। फुटपाथ से उतरकर दोनों सड़क किनारे चलने लगे। अभी कुछ ही दूर चले थे कि अवनि की सेंडिल टूट गयी और उसे रुकना पड़ा। पृथ्वी ने पलटकर देखा तो अवनि के पास आया और कहा,”क्या हुआ अवनि ?”
“सेंडिल टूट गया है,,,,,मेरे पास बस यही एक जोड़ी थी”,अवनि ने धीरे से कहा

पृथ्वी ने इधर उधर देखा सड़क के उस पार उसे मॉल दिखा लेकिन अवनि बिना चप्पलो के वहा तक जाएगी कैसे ? पृथ्वी कुछ देर सोच में डूबा रहा और फिर अपने पैरो के दोनों जूते निकालकर अवनि के सामने रखे और कहा,”इन्हे पहन लीजिये , वहा सामने ही मॉल है हम लोग वहा से आपके लिए नए सेंडिल ले लेंगे”
“तुमने अपने जूते मुझे क्यों दे दिए ? मैं वहा तक नंगे पाँव चल लुंगी”,अवनि ने कहा

“क्या मैडम जी ! मैं आपको अपनी पूरी जिंदगी दे चुका हूँ ये तो फिर भी मामूली से जूते है और आपको लगता है मैं आपको वहा तक नंगे पैर जाने दूंगा,,,,,,,,बिल्कुल नहीं , आप मेरे जूते पहन लीजिये”,पृथ्वी ने प्यार से कहा
“लेकिन,,,,,,,,,!!”,अवनि ने जैसे ही कहना चाहा पृथ्वी ने थोड़ा गुस्से से अवनि को देखा और कहा,”मैडम जी ! क्या कभी ऐसा होगा आप बिना अगर मगर लेकिन वेकिन किये मेरी बात मानेंगी,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो अपनी नजरे झुका ली और पृथ्वी ने एक बार फिर प्यार से कहा,”पहन लीजिये ना मैडम जी वरना फिर मुझे आपको गोद में उठाकर ले जाना पडेगा,,,,,,,,और इसके लिए मैं आपसे परमिशन भी नहीं मांगने वाला”
कही पृथ्वी सच में उसे गोद में ना उठा ले सोचकर अवनि ने पृथ्वी के जूते अपने पैरो में पहन लिए जो कि अवनि के पैरों से काफी बड़े थे लेकिन अवनि उन्हें पहनकर आराम से मॉल तक जा सकती थी।
पृथ्वी ने आगे बढ़ने का इशारा किया और खुद अवनि की सेंडिल अपने हाथ में उठाकर उसके साथ नंगे पैर सड़क पर चल पड़ा।     

( अवनि का बड़ा भाई बनकर क्या जयदीप निभाने वाला है अवनि की जिंदगी में ख़ास भूमिका ? क्या पृथ्वी के कहे बिना समझने लगी है अवनि पृथ्वी की भावनाये ? क्या धीरे धीरे पृथ्वी बन जाएगा जोरू का गुलाम ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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अवनि ने सुना तो अपनी नजरे झुका ली और पृथ्वी ने एक बार फिर प्यार से कहा,”पहन लीजिये ना मैडम जी वरना फिर मुझे आपको गोद में उठाकर ले जाना पडेगा,,,,,,,,और इसके लिए मैं आपसे परमिशन भी नहीं मांगने वाला”
कही पृथ्वी सच में उसे गोद में ना उठा ले सोचकर अवनि ने पृथ्वी के जूते अपने पैरो में पहन लिए जो कि अवनि के पैरों से काफी बड़े थे लेकिन अवनि उन्हें पहनकर आराम से मॉल तक जा सकती थी।
पृथ्वी ने आगे बढ़ने का इशारा किया और खुद अवनि की सेंडिल अपने हाथ में उठाकर उसके साथ नंगे पैर सड़क पर चल पड़ा।     

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