Pasandida Aurat Season 2 – 21

Pasandida Aurat Season 2 – 21

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी ने अपनी टीम को अपनी और अवनि की लव स्टोरी के बारे में तो नहीं बताया बस कुछ बातें बताकर उठा और हाथ धोने चला गया। वाशबेसिन के सामने खड़ा पृथ्वी अवनि के लिखे पेपर के बारे में सोच रहा था। अवनि के लिखे अल्फाज बार बार उसकी आँखों के सामने आ रहे थे और पृथ्वी मुस्कुरा रहा था। उसने हाथ धोये और रुमाल से पोछते हुए बाहर चला आया। मुस्कराहट उसके होंठो पर अभी भी कायम थी और उसे यू बेवजह मुस्कुराते देखकर ऑफिस के सभी लोगो की नजर उसी पर थी।

आज से पहले शायद ही किसी ने उसे ऐसे मुस्कुराते देखा होगा। पृथ्वी अपने केबिन में चला आया उसने अपनी डेस्क की दराज में पड़ी डायरी को खोला और अपनी के लिखे पेपर को बहुत ही सम्हाल रख दिया। पृथ्वी ने लेपटॉप ऑन किया और अपना काम करने लगा। काम करते हुए भी पृथ्वी को बार बार अवनि का ही ख्याल आ रहा था तभी उसकी नजर अपने फोन पर पड़ी और उसने मन ही मन खुद से कहा,”अब तो मैं जब चाहू तब अवनि को फोन कर सकता हूँ,,,,,उसे फोन करके पूछता हूँ क्या कर रही है ?

वैसे उसे मुझे फोन करके मुझसे पूछना चाहिए कि मैंने खाना खाया या नहीं ? आज का खाना कैसा था ? मैं क्या कर रहा हूँ ? मुझे उसकी याद आ रही है या नहीं ? ऑफकोर्स आ रही है,,,,,,,,,!!
पृथ्वी ने अपना फोन उठाया और अवनि का नंबर डॉयल किया। जैसे जैसे रिंग जा रही थी पृथ्वी का दिल धड़क रहा था। वह ख़ामोशी से बस अवनि के फोन उठाने का इंतजार कर रहा था

लेकिन रिंग जाती रही और अवनि ने फोन नहीं उठाया। पृथ्वी ने एक बार फिर अवनि को फोन किया लेकिन अवनि ने नहीं उठाया , उसके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये। उसने अवनि को मैसेज किया लेकिन अवनि ने नहीं देखा। पृथ्वी ने मायूस होकर फोन साइड में रख दिया और अवनि के जवाब का इंतजार करने लगा। काफी देर तक अवनि का जवाब नहीं आया लेकिन वार्ड बॉय पृथ्वी के लिए एक फाइल लेकर आया और पृथ्वी को देकर कहा,”जयदीप सर ने कहा है कि उन्हें आज शाम तक इसकी रिपोर्ट चाहिए”

“अह्ह्ह्ह ठीक है मैं कर दूंगा”,पृथ्वी ने फाइल लेकर कहा और फिर अपने लेपटॉप पर काम करने लगा। कुछ ही वक्त गुजरा की फोन की मैसेज रिंग बजी। पृथ्वी ने जल्दी से अपना फोन देखा लेकिन अगले ही पल मायूस हो गया मैसेज किसी और का था। पृथ्वी ने अवनि की चैट खोली और उसे फिर एक मैसेज लिखकर भेजा लेकिन अवनि ने वो भी नहीं देखा तो पृथ्वी ने चिढ़कर कहा,”हाह ! ये लड़की भी ना इसे अपना फोन अपने पास रखना चाहिए,,,,,,,,,!!!’

पृथ्वी ने एक बार फिर अवनि का नंबर डायल किया और इस बार भी सिर्फ रिंग जाती रही लेकिन अवनि ने फोन नहीं उठाया। अवनि कभी ऐसा नहीं करती थी भले वह पृथ्वी का फोन ना उठाये लेकिन उसके मैसेज का जवाब दे दिया करती थी।
मायूस होकर पृथ्वी ने अपना फोन टेबल पर रखने के लिए जैसे ही हाथ बढ़ाया उसे ख्याल आया और वह खुद में ही बड़बड़ाया,”अवनि मेरा फोन क्यों नहीं उठा रही ? वो घर पर अकेली है क्या मेरे पीछे से घर पर कोई आया होगा ?

कही घर से किसी ने आकर उसे परेशान,,,,,,,,,,,,उसे अब भी लगता है कि मेरी जिंदगी में जो कुछ भी हो रहा है वो उसकी वजह से हो रहा है कही वो मुझे छोड़कर वापस अपने घर,,,,,,,,,,,हाह ! मुझे उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए था , उसे इस शहर में आये अभी सिर्फ 3 दिन हुए है और मैं उसे छोड़कर ऑफिस चला आया लेकिन किसके भरोसे ? मैं इतनी बड़ी बेवकूफी कैसे कर सकता हूँ ? वो फोन नहीं उठा रही , मेरे मैसेज का जवाब भी नहीं दे , कही वो किसी मुसीबत में तो नहीं है ?”

इन सब ख्यालो ने पृथ्वी को अंदर ही अंदर बहुत डरा दिया , उसने अपना लेपटॉप बंद करके बैग में रखा और अपना उठाकर केबिन से बाहर जाने लगा तो अंकित ने कहा,”क्या हुआ पृथ्वी तुम इस वक्त कहा जा रहे हो ?”
पृथ्वी ने जाते जाते जयदीप की भेजी फाइल को उठाया और अंकित की तरफ बढाकर कहा,”मुझे कुछ जरुरी काम याद आ गया मुझे जाना होगा , तुम इस फाइल की रिपोर्ट तैयार करके सर को भेज देना,,,,,,,,,,और उनसे कहना मैं निकल गया”
“हाँ ठीक है ! ध्यान से जाना”,अंकित ने कहा और पृथ्वी वहा से निकल गया।

ऑफिस से बाहर आकर पृथ्वी ने रिक्शा लिया और घर के लिए निकला गया ,उसके पास इतना वक्त नहीं था कि वह स्टेशन जाकर ट्रेन का इंतजार करता। रास्तेभर पृथ्वी बस अवनि के बारे में सोचता रहा एक दो बार उसने अवनि को फोन भी किया लेकिन अवनि ने फोन नहीं उठाया।
अवनि के फोन ना उठाने से पृथ्वी का डर बढ़ गया और उसका डर बढ़ना जायज था क्योकि जिन हालातों में उसकी और अवनि की शादी हुई थी

बीती शाम घरवालो से जो बहस हुई थी उसके बाद उसकी जिंदगी में परेशानिया बढ़ सकती थी। पृथ्वी ने रिक्शा वाले से जल्दी चलने को कहा और बेचैनी से बार बार अपने फोन की स्क्रीन देखता रहा। रिक्शा सोसायटी के बाहर आकर रुका , पृथ्वी जल्दी से नीचे उतरा और पैसे देकर अंदर चला आया। वह भागते हुए अपार्टमेंट में आया और लिफ्ट के सामने चला आया लेकिन लिफ्ट बंद थी क्योकि उसके मेंटिनेंस का काम चल रहा था।

पृथ्वी सीढ़ियों की तरफ बढ़ गया। वह सातवे माले पर सीढ़ियों से होकर आया , उसकी सांसे बहुत तेज चल रही थी लेकिन उसे परवाह नहीं उसे बस अवनि को सही सलामत देखना था।
गनीमत था आखरी बार जब रवि जी पृथ्वी के फ्लेट पर आये थे तब फ्लेट की दूसरी चाबी यही छोड़कर चले गए थे। पृथ्वी ने बैग से चाबी निकाली और फ्लेट का दरवाजा खोला

अवनि उठ चुकी थी और प्यास का अहसास हुआ तो वह सोफे से उठकर पानी लेने किचन की तरफ जाने लगी। तभी दरवाजा खुलने की आवाज उसके कानों में पड़ी और अवनि पलटी। दरवाजा पृथ्वी ने खोला था वह अंदर आया जब उसने अवनि को अपने सामने देखा उसे चैन मिला। पृथ्वी को ऐसे वहा देखकर अवनि हैरान थी वही पृथ्वी भी धीरे धीरे चलकर अवनि के पास आया वह अवनि के सामने आ खड़ा हुआ आज उसने अवनि ने नहीं पूछा ना ही उस से इजाजत मांगी। उसने अपना हाथ अपनी के सर के पीछे लगाया और उसे अपने सीने से लगा लिया।

पृथ्वी का दिल इस वक्त बहुत जोरो से धड़क रहा था जिसे अवनि साफ महसूस कर पा रही थी। पृथ्वी ने कुछ नहीं कहा बस वैसे ही एक हाथ से अवनि को अपने सीने से लगाए रखा।
“तुम्हारा दिल इतनी तेज क्यों धड़क रहा है ? कुछ हुआ है क्या ?”,पृथ्वी के सीने से लगी अवनि ने धीमे स्वर में पूछा
पृथ्वी ने दो बार उसका सर थपथपाया और कहा,”आप ठीक है ना मैडम जी ?”

“हम्म्म्म मैं ठीक हूँ”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी ने एक गहरी साँस ली और कहा,”मुझे माफ़ करना अवनि मुझे आपको यहाँ अकेला छोड़कर नहीं जाना चाहिए था,,,,,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो उसे समझ आया कि पृथ्वी ने जरूर उसे लेकर कुछ सोचा होगा और इसलिए वह इतना घबराया हुआ है। अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी को अहसास हुआ कि वह अवनि के करीब है वह अवनि से दूर हट गया।

अवनि ख़ामोशी से पृथ्वी के चेहरे की तरफ देखने लगी , वह बस समझने की कोशिश कर रही थी कि पृथ्वी इतना परेशान क्यों है ? अवनि कुछ कहती इस से पहले पृथ्वी ने कहा,”आपका फोन कहा है ?”
अवनि ने इधर उधर देखा और टेबल पर उसे अपना फोन नजर आया तो उसने ऊँगली से इशारा कर दिया। पृथ्वी ने अपना बैग सोफे पर रखा और टेबल की तरफ आकर अवनि का फोन उठाया।

पृथ्वी ने देखा अवनि का फोन साइलेंट मोड पर था ये देखकर उसे समझ आया कि अवनि ने उसका फोन क्यों नहीं उठाया फिर भी उसे अवनि पर थोड़ा सा गुस्सा तो आया कि वह इतनी लापरवाह कैसे हो सकती है ? पृथ्वी अवनि के सामने आया और उसके फोन का स्क्रीन उसके सामने कर दिया। अवनि ने देखा 11 मिस्डकॉल और कुछ मैसेज थे जो कि पृथ्वी ने किये थे।

“मैं सो गयी थी,,,,,,,और फोन शायद साइलेंट पर था , इसलिए तुम इतनी जल्दी आये हो ?”,अवनि ने धीरे से मासूमियत भरे स्वर में कहा
पृथ्वी ने अपना सर हामी में हिलाया और मायूस होकर कहा,”मैं डर गया था मैडम जी , मुझे लगा आप किसी मुसीबत में है,,,,,,,,,,,मुझे आपको अकेला नहीं  छोड़ना चाहिए था , मुझे माफ़ कर दीजिये”
 “पृथ्वी,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने उदासीभरे स्वर में कहा क्योकि उसे अहसास था कि गलती उसकी थी फिर भी पृथ्वी उस से माफ़ी मांग रहा था

“और प्लीज आज के बाद फोन साइलेंट मत रखना , मैं आपको बता नहीं सकता मैं कितना डर गया था,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“हम्म्म आई ऍम सॉरी”,अवनि ने उदास आँखों से पृथ्वी की तरफ देखकर कहा
“क्या आप मुझसे एक वादा करेंगी ?”,पृथ्वी ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
“हम्म्म्म,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“चाहे जो भी हो आप कभी मुझे छोड़कर नहीं जाएँगी,,,,,,,,,क्या आप ये वादा मुझसे कर सकती है ?”,कहते हुए ना जाने क्यों पृथ्वी की आँखों में आँसू भर आये।

अवनि ने हामी में सर हिलाया तो पृथ्वी ने अपना हाथ अवनि के सामने करके कहा,”ऐसे नहीं ! मेरे हाथ पर अपना हाथ रखकर वादा कीजिये आप नहीं जाएँगी”
अवनि ने अपना हाथ पृथ्वी के हाथ में रखा और कहा,”मैं वादा करती हूँ”
पृथ्वी अवनि का नाजुक हाथ अपने सख्त हाथ में थामे , अपनी आँखों में नमी लिए अवनि को देखता रहा।

अवनि पृथ्वी की आँखों में बेचैनी और कुछ खो देने का डर साफ़ देख पा रही थी और सहसा ही उसने अपने आप से कहा,”किसी को खो देने के ख्याल से ही तुम्हारी आँखों का नम हो जाना ये बयां कर रहा है पृथ्वी कि तुमने उस इंसान को पाने  कितने दुःख झेले होंगे , कितना कुछ सहा होगा और कितनी ही कोशिशे की होंगी,,,,,,,,,मैं वादा करती हूँ मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी,,,,,,,!!!”

अवनि की आँखों में देखते हुए पृथ्वी मन ही मन खुद से कहने लगा,”मैं सच में डर गया था अवनि , मुझे लगा जैसे हालातो से समझौता करके मेरी ख़ुशी के लिए तुम मुझे छोड़कर वापस चली जाओगी,,,,,,मैं नहीं चाहता कभी ऐसा हो,,,,,,,अगर ऐसा हुआ तो मैं बिखर जाऊंगा अवनि,,,,,,,,,!!!!”
अवनि ने देखा पृथ्वी ने अभी तक उसका हाथ थामा हुआ है तो उसने धीरे से उसके हाथ से अपना हाथ निकाला और कहा,”तुम काफी थक गए हो , बैठो मैं तुम्हारे लिए चाय लेकर आती हूँ,,,,,,,,!!”

अवनि किचन की तरफ चली आयी और पृथ्वी वही खड़े होकर गहरी सांसे लेने लगा , अवनि के दूर चले जाने के ख्याल भर से ही उसे अपनी साँसे उखड़ी हुई महसूस होने लगती। वह सोफे पर आकर बैठ गया। उसने अवनि का फोन उठाया और सबसे पहले फोन का साइलेंट मोड़ हटाया। पृथ्वी ने अवनि का फोन वापस रखा और सोफे से सर लगाकर अपनी आँखे मूँद ली।

पृथ्वी ने कभी खुद को इतना कमजोर महसूस नहीं किया लेकिन आज कर रहा था। अब तक उसके पास डरने की कोई वजह नहीं थी लेकिन अब थी वो भी अवनि के रूप में , वह उसे किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था ना ही उसे किसी तकलीफ में देखना चाहता था। पृथ्वी अपने विचारो में उलझता चला गया और कुछ देर बाद अवनि उसके और अपने लिए चाय ले आयी।

“पृथ्वी,,,,,,,,चाय”,अवनि ने धीरे से कहा तो पृथ्वी ने अपनी आँखे खोली और सीधे होकर बैठ गया। अवनि ने चाय का कप पृथ्वी की तरफ बढ़ाया और दूसरा खुद लेकर दूसरे सोफे पर आ बैठी। पृथ्वी के चेहरे से उलझन अब धीरे धीरे कम होने लगी। उसने चाय का कप होंठो से लगाया और पीने लगा। हॉल में फैली खामोशी को तोड़ते हुए अवनि ने कहा,”कैसा रहा तुम्हारा आज का दिन ?”
“अच्छा था , थोड़ा काम किया एक मीटिंग अटेंड की पता है मीटिंग में आज क्या हुआ ?”,पृथ्वी ने अवनि की तरफ पलटकर कहा

अवनि ने अपनी गर्दन उचकाई तो पृथ्वी ने कहा,”मीटिंग एक बड़े क्लाइंट मिस्टर देसाई के साथ थी लेकिन लास्ट मोमेंट पर उनकी बेटी ने वो मीटिंग अटेंड की ,,,हाह आप यकीन नहीं करेंगी उसका ध्यान प्रोजेक्ट फाइल में कम और मुझपर ज्यादा था और जब मीटिंग खत्म हुई तो उसने मुझे लंच के लिए इन्वाइट किया
अह्ह्ह्हह मुझसे मीठी मीठी बातें करके मुझे फ़साना चाहती थी , मैंने भी कहा मैं शादीशुदा हूँ और मेरी वाइफ ने आज मेरे लिए बहुत अच्छा लंच बनाया है,,,,,,बेचारी उसकी तो शक्ल ही उतर गयी ये सुनकर,,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने सूना तो मुस्कुराने लगी और कहा,”तुमने खाना खाया ?”
“कहा मैडम जी उस टिफिन में रखे खाने में से बस आखरी निवाला मिला मुझे,,,,,,,,बाकि सब मेरा बॉस और मेरी कलीग्स ने खा लिया,,,,,लेकिन मुझे कुछ और भी मिला था और जब मैंने उसे पढ़ा तो वो निवाला भी मेरे लिए काफी था,,,,,,,मेरा मेरा पेट तो उसे पढ़कर ही भर गया था,,,,,,,,,,,मैडम जी”
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने बहुत ही प्यार से कहा,”आपको मेरे लिए खुद को बदलने की कोई जरूरत नहीं है , आप जैसी है वैसी ही बहुत अच्छी है,,,,,,,,मैं कभी नहीं चाहूंगा आप मेरे लिए बदले,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”तुम जो मेरे लिए कर रहे हो पृथ्वी उसका आधा भी मैं तुम्हारे लिए इस जिंदगी में नहीं कर पाऊँगी,,,,,,मैं बस हमारे बीच के इस रिश्ते को निभाने की कोशिश कर रही हूँ,,,,,,,,!!!”
“आप कर लेंगी मैडम जी,,,,,,,,,,,अच्छा एक बात बताईये आपने कोई एग्जाम दिया था मुंबई के लिए उसके रिजल्ट का क्या हुआ , कोई जवाब आया ?”,पृथ्वी ने पूछा तो अवनि हैरानी से उसे देखने लगी क्योकि उसने तो कभी पृथ्वी से इस बात का जिक्र नहीं किया था।

“तुम्हे कैसे पता ?”,अवनि ने हैरानी से पूछा
“अह्ह्ह्ह वो , वो मुझे सुरभि ने बताया था”,पृथ्वी ने झूठ कह दिया
“ये लड़की भी ना इसके पेट में कोई बात नहीं टिकती है”,अवनि धीरे से बड़बड़ाई और फिर पृथ्वी से कहा,”हाँ कुछ महीने पहले दिया था मैंने एक एग्जाम लेकिन अभी तक उसका कोई जवाब नहीं आया है , उम्मीद है इस हफ्ते आ जाए,,,,,,,,,!!!”

“हम्म्म्म क्या नाम बताया आपने उसका ?”,पृथ्वी ने पूछा
“Zee स्टूडियो प्रोडक्शन हॉउस”,अवनि ने कहा
“हम्म्म्म,,,,,,,हो जाएगा”,पृथ्वी ने कुछ सोचते हुए कहा
“कैसे ?”,अवनि ने पूछा
“अह्ह्ह मैं महादेव से आपके लिए प्रार्थना करूंगा न,,,,,,,,,वैसे भी आपने ही कहा है प्रार्थना करने से सब सही हो जाता है”,पृथ्वी ने कहा

“महादेव से याद आया तुम मुझे मंदिर लेकर जाने वाले थे और तुम्हे भी उनसे माफ़ी मांगनी थी ,, आज तुम ऑफिस से भी जल्दी आ गए हो तो शाम में चले ?”,अवनि ने कहा
“देखा ! आपका नाम लिया और आपने मुझे टॉर्चर करना शुरू कर दिया”,पृथ्वी ने ऊपर देखकर मन ही मन कहा
पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि ने कहा,”देखो मैं कोई बहाना सुनने वाली नहीं हूँ हम शाम में मंदिर जायेंगे ठीक है,,,,,,,,,,,!!!”

“ठीक है मैडम जी,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने मज़बूरी में कहा और तभी उसका फोन बजा जो कि जयदीप का था। पृथ्वी समझ गया कि जयदीप से उसे अब अच्छा खासा डोज मिलने वाला है वह फोन उठाने के बारे में सोच ही रहा था कि अवनि ने कहा,”किसका फोन है ?”
“मेरे बॉस का , मैं उन्हें बिना बताये चला आया ना तो अब वो मुझे लेक्चर देने वाले है”,पृथ्वी ने हताश होकर कहा
अवनि ने पृथ्वी की तरफ हाथ बढाकर फोन देने का इशारा किया तो पृथ्वी ने फोन अवनि की तरफ बढ़ा दिया।

अवनि ने कॉल पिक किया और अपने कान से लगाकर कहा,”हेलो सर ! मैं अवनि , दरअसल मैंने ही पृथ्वी से जल्दी घर आने को कहा था और वो आपको बताना भूल गया ,, आप प्लीज उसे डाटियेगा मत और उसे माफ़ कर दीजिये,,,,,,,,,,!!!!”
अपने केबिन में बैठे जयदीप ने सुना तो पृथ्वी के लिए उसका गुस्सा गायब हो गया और उन्होंने कहा,”अवनि ! बेटा तुम्हे माफ़ी मांगने की जरूरत नहीं है अगर वो तुम्हारे लिए आया है तो मुझे उस से कोई शिकायत नहीं। मैं पृथ्वी से कुछ नहीं कहूंगा , ठीक है”

अवनि ने सुना तो मुस्कुराई जिसकी उसके पास दो वजह थी पहली ये कि जयदीप ने उसके कहने पर पृथ्वी को माफ़ कर दिया और दूसरी ये कि जयदीप ने बहुत ही प्यार से अवनि को बेटा कहकर पुकारा जो कि एक पिता या बड़े भाई के होने का अहसास दिलाता है अवनि ने धीरे से कहा,”थैंक्यू सर ! क्या आप पृथ्वी से बात करना चाहेंगे ?”
“हम्म्म ! उसे फोन दो”,जयदीप ने उतने ही प्यार से कहा

अवनि ने फोन पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया और खुद उठकर पृथ्वी का बैग और खाली टिफिन लेकर वहा से चली गयी। पृथ्वी ने फोन कान से लगाया और कहा,”हेलो”
“कहा से मिली तुम्हे इतनी प्यारी लड़की ?”,जयदीप ने पृथ्वी से सीधा सवाल किया
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”किस्मत से,,,,,,,,,!!!!” 

 ( आखिर क्यों आता है बार बार पृथ्वी को अवनि को खो देने का ख्याल ? क्या अवनि निभा पायेगी पृथ्वी से किया वादा या चली जाएगी एक दिन उसे छोड़कर ? क्या सच में पृथ्वी की किस्मत में थी अवनि या पृथ्वी ने खुद लिखा है उसे अपनी किस्मत में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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