Pasandida Aurat Season 2 – 15

Pasandida Aurat Season 2 – 15

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

खाना खाकर अवनि ने अपने और पृथ्वी के जूते बर्तन उठाने चाहे तो पृथ्वी ने कहा,”ये मैं कर दूंगा , आपने खाना बनाया अब ये मेरा काम है,,,,,,,,,,!!!”
“तो फिर मैं क्या करुँगी ?”,अवनि ने पूछा
“आप प्यार से मुझे बर्तन धोते हुए देखना,,,,!!”,पृथ्वी ने शरमाते हुए कहा
“तुम और तुम्हारे ये अजीबो गरीब ख्याल,,,,,,,,,तुम ये धो लो मैं तब तक धुले हुए कपडे सूखा देती हूँ”,अवनि ने उठते हुए कहा और हाथ धोने चली गयी।

“हाह ! मेरे इतने प्यारे प्यारे ख्यालो को आप अजीब कह रही है मैडम जी , अजीब तो आप है रोमांस नहीं समझती , अरे मैं वहा किचन में बर्तन धोता। आप मेरे बगल खड़ी होकर प्यार से मुझे देखती , बर्तन धोते धोते मैं आपको अपने स्कूल के किस्से सुनाता तो आप कभी हंसती कभी हैरान होती और कहती “हाआ पृथ्वी ! तुम तो कितने बहादुर हो” हाह ऐसे ही थोड़े मेरे स्कूल के लड़के मुझसे डरते थे।

बातो बातो में आप देखती बर्तन धोते हुए मुझे पसीना आ रहा है तो फिर आप अपने दुपट्टे से मेरा चेहरा पोछती और पोछते पोछते रुक जाती क्योकि उस वक्त मैं प्यार से आपको ही देख रहा होता। उफ्फ्फ कितना रोमांटिक मोमेंट होता ना
वो,,,,,,,,,,,!!!”
“क्या तुम पूरा दिन यही बैठे रहने वाले हो पृथ्वी ?”,अवनि ने पृथ्वी को खोया देखकर कहा

“अह्ह्ह नहीं मैं बस जा ही रहा था”,पृथ्वी कहते हुए उठा सभी बर्तन उठाये और लेकर किचन में चला आया। पृथ्वी बर्तन धोने लगा और अवनि कमरे में चली आयी। उसने धुले हुए सब कपडे मशीन से निकालकर बाल्टी में डालें और बालकनी में सुखाने चली आयी। अच्छा था इस वक्त बगल वाली बालकनी में कोई नहीं था वरना सुबह की तरह अवनि फिर फंस जाती। उसने कपडे सुखाये और वापस अंदर चली आयी।

पृथ्वी सब बर्तन धो चुका था। घर का कोई काम ना करने वाला पृथ्वी अवनि के लिए अब सब कर रहा था। पृथ्वी हॉल में चला आया उसने देखा अवनि के हाथ में वही लिफाफा है जो कुछ देर पहले नीलम भुआ उसे देकर गयी थी। पृथ्वी अवनि की तरफ आया तो अवनि ने लिफाफा पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया।
“ओह्ह्ह इसे तो मैं भूल ही गया था”,पृथ्वी ने लिफाफा लेकर कहा

पृथ्वी ने लिफाफा खोला , उसमे रखे पेपर्स देखकर पृथ्वी के चेहरे पर पहले उलझन के भाव आये और फिर वह मुस्कुरा उठा। उसने पेपर मोड़कर वापस लिफाफे में डाल दिया और जैसे ही सामने देखा पाया अवनि उसे ही देख रही है तो पृथ्वी ने कहा,”अह्ह्ह कुछ नहीं ये कुछ पुराने कॉलेज डॉक्युमेंट्स है , आप खड़ी क्यों है बैठिये ना ?”
पेपर्स में क्या लिखा था पृथ्वी अवनि को बताना नहीं चाहता था शायद इसलिए उसने अवनि के सामने बहाना बना दिया और लिफाफा लेकर कमरे में चला गया।

पृथ्वी ने लिफाफे को अपने कबर्ड में रखा और एक गहरी साँस लेकर पलट गया। पृथ्वी ने अपने कमरे को देखा आज से पहले ये कमरा इतना साफ सुथरा और रहने लायक कभी नहीं लगा था। पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”थैंक्यू मैडम जी ! इस मकान को घर बनाने के लिए”
पृथ्वी बाहर चला आया। अभी तक उसने बैठकर अवनि से ठीक से बात भी नहीं की थी ये सोचकर पृथ्वी बाहर आया तो देखा सोफे पर बैठी अवनि अपने हाथ में पकड़ी किताब के पन्ने पलट रही है।

पृथ्वी बगल वाले सोफे पर आ बैठा लेकिन अवनि पन्ने पलटने में इतना खोयी हुई थी कि उसे पृथ्वी के आने का अहसास भी नहीं हुआ। पृथ्वी कुछ देर प्यार से अवनि को देखता रहा और फिर मुस्कुरा कर अवनि के हाथो में पकड़ी किताब को सीधा करके कहा,”आपने किताब उलटी पकड़ी है,,,,,,,,,!!”

अवनि की चोरी पकड़ी गयी और वह झेंप गयी , उसने पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने कहा,”क्या अवनि ! मुझे इग्नोर करने के लिए आप पढ़ने का नाटक कर रही है ना,,,,,,,,,,लेकिन आप भूल रही है कि अब आप और मैं इस घर में साथ साथ रहते है और आप इस घर के किसी भी कोने में जाए घूम फिरकर मुझसे ही टकराने वाली है,,,,,,,,,तो क्यों न इन खामोशियो को साइड कर कुछ बात की जाए”

अवनि ने सुना तो किताब को बंद किया और धीरे से टेबल पर रख दिया। अब जैसा की अवनि खामोश थी तो पृथ्वी ने ही बात की शुरुआत करके कहा,”वैसे आपने कभी सोचा था कि हमारी शादी होगी ?”
अवनि ने पृथ्वी को देखा और ना में गर्दन हिला दी। पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”लेकिन मैंने सोचा था जब मैंने आपको पहली बार विडिओ कॉल पर देखा था उसी पल मैंने ये फैसला कर लिया था कि मैं आपसे शादी करूंगा”
 “किसी को एक बार देखने से तुम ये कैसे डिसाइड कर सकते हो ?”,अवनि ने पूछा

“जैसे अरेंज मैरिज में करते है , एक बार मिले और शादी पक्की,,,,,,,ये समझ लीजिये ये हमारी लव मैरिज नहीं बल्कि अरेंज मैरिज थी जिसे खुद मैंने अरेंज किया था। वैसे भी मैडम जी किसी से प्यार करने के लिए एक पल काफी होता है,,,,,,और वो वही पल था”,पृथ्वी ने कहा
“तुम बहुत ज्यादा सोचते हो पृथ्वी,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा

“मैं बिल्कुल नहीं सोचता अवनि , मैं बहुत ही प्रेक्टिकल इंसान हूँ जो मेरा दिल कहता है मैं फॉलो करता है हूँ,,,,,,,,हाँ बस आपके मामले में थोड़ा इमोशनल हो जाता हूँ,,,,,,,,,मैं इमोशनल भी हूँ ये बात मुझे आपसे मिलकर पता चली”,पृथ्वी ने कहा
“हाँ क्योकि मैं बहुत इमोशनल इंसान हूँ,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“आप इमोशनल , मैं प्रेक्टिकल क्या परफेक्ट कॉम्बिनेशन है ना मेडम जी,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा

“परफेक्ट नहीं पृथ्वी हम दोनों एक दूसरे से अलग है,,,,,,,,जैसे दिन और रात , जैसे धुप और छाँव , जैसे पानी और आग , जैसे,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,कहते कहते अवनि रुक गयी क्योकि पृथ्वी सोफे के हत्थे पर अपना सर लगाए एकटक अवनि को देख रहा था। उसका देखना ऐसा था कि किसी के भी दिल की धड़कने बढ़ा दे। उन आँखों में कोई गलत भावना नहीं थी , ना ही कोई शरारत बस थी तो बेइंतहा मोहब्बत,,,,,,,,,,,अवनि बोलते बोलते रुक गयी तो पृथ्वी ने उसकी बात पूरी करके कहा,”जैसे पानी और मछली , जैसे अँधेरा और रौशनी , जैसे आँखे और काजल , जैसे बारिश और बादल”

अवनि ने सुना तो पृथ्वी को देखने लगी पृथ्वी ऐसी बाते भी करता है अवनि ने कभी सोचा नहीं था उसने तो पृथ्वी को हमेशा हंसी मजाक करते और बहस करते देखा था। अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी सीधा बैठा और कहा,”अवनि हम अलग नहीं है एक ही है बस हमारा एक दूसरे को देखने का नजरिया अलग है आपने कहा दिन और रात यकीनन दोनों अलग है पर दोनों का एक दूसरे के बिना कोई वजूद नहीं , बेशक दोनों अलग हो लेकिन जब मिलते है तो आठ पहर का सबसे खूबसूरत पहर शाम इनके हिस्से में आती है।

आपने कहा धुप और छाँव लेकिन जब जब ये मिलती है तब तब मौसम सबसे खूबसूरत नजर आता है। आपने कहा पानी और आग , आग सब जला सकती है लेकिन पानी के सामने नतमस्तक हो जाती है क्योकि आग जानती है सिर्फ पानी ही है जो उसके गुस्से को अपनी शीतलता से शांत कर सकता है जैसे ये पृथ्वी उपाध्याय आपके सामने नतमस्तक हो जाता है”

अवनि ने सुना तो खोयी हुई सी पृथ्वी को देखने लगी। वह खुद एक राइटर है लेकिन इतनी गहराई से तो आज तक उसने भी नहीं सोचा था जितनी गहराई पृथ्वी के शब्दों में थी। अब तो पृथ्वी अवनि के लिए और भी रहस्य्मय होता जा रहा था। पृथ्वी वो नहीं था जो वो सबके सामने खुद को दिखाता था उसकी चंचलता और अल्हड़पन के पीछे एक बहुत ही गंभीर और समझदार इंसान भी था जो अवनि आज देख रही थी। अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी ने आगे कहा

“जैसे मैंने कहा मछली और पानी , जैसे मछली पानी के बिना नहीं रह सकती वैसे ही मैं आपके बिना आपसे दूर नहीं रह सकता , मछली पानी में तैरती रहती है उसे कभी समंदर , नदियों और तालाबों को हासिल करना नहीं होता उसके लिए बस उनका होना ही जिंदगी होता है वैसे ही मेरे लिए आपका मेरी जिंदगी में होना ही काफी है। मैंने कहा अँधेरा और रौशनी ,, सच कहू तो आपसे पहले मेरी जिंदगी में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी पर जब मैं आपसे मिला तो मैंने मुस्कुराना सीखा ,

अपने दिल को सुनना सीखा , आसान भाषा में कहू तो आप मेरी जिंदगी के उस अँधेरे का उजाला हो मैडम जी जिसे मेरे सिवा कोई देख नहीं सकता,,,,,,,,,,मैंने कहा आँखे और काजल , दुनिया की सारी आँखे खूबसूरत होती है पर काजल लगी आँखों की बात ही कुछ और होती है अब आप खुद को काजल कहिये या आँखे बात एक ही है ,, मैंने कहा बारिश और बादल , बादल नहीं होगा तो बारिश कैसे होगी ? और बारिश नहीं हुई तो बादलो का होना बेकार है,,,,,,,,,क्योकि दोनों एक दूसरे के पूरक है,,,,,,,,,

आप मेरे बिना अधूरी है या नहीं मैं नहीं जानता लेकिन आप जब मेरे साथ होती है तो मैं खुद को पूरा पाता हूँ , आपके बगल में खड़े होकर मुझे खुद में कोई कमी दिखाई नहीं देती,,,,,,,,,,और अब एक आखरी बात क्या आपको अपने नाम का मतलब पता है ?”
“अवनि का मतलब है ‘पृथ्वी'”,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी उसे देखकर मंद मंद मुस्कुराने लगा और अवनि हैरान रह गयी। आज से पहले कभी उसके जहन में ये बात आयी ही नहीं कि उसके नाम का मतलब “पृथ्वी” है।

आप और मैं एक ही है मैडम जी बस हमारे सोचने का नजरिया अलग है ,, आप मुझे इस दुनिया में देखते है और मैं , मैं आप में अपनी पूरी दुनिया,,,,,,,,अब इस से ज्यादा कुछ कहूंगा तो मुझे आपसे फिर से प्यार हो जायेगा,,,,,!!”,पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए कहा लेकिन उसकी मुस्कुराहट में एक दर्द था अवनि ने नम आँखों से उसकी तरफ देखा तो पृथ्वी ने अपनी बात खत्म की,”और आपको नहीं होगा”

“ऐसे बात करोगे तो किसी भी लड़की को तुम से प्यार हो जाएगा पृथ्वी,,,,,,,,तुम अपने अंदर कितनी खुबिया समेटे हुए हो ये बात तुम खुद भी नहीं जानते,,,,,,,तुम्हारे नाम का मतलब बिल्कुल सही है “पृथ्वी” जो अपना सब कुछ लुटाने को तैयार है,,,,,,,लेकिन क्या मैं तुम्हे कभी इतना प्यार दे पाऊँगी ? तुम जितना कर रहे हो क्या उसका एक हिस्सा भी तुम्हारे लिए कर पाऊँगी ? मैं तो अपना प्यार पहले ही किसी और पर लुटा चुकी हूँ पृथ्वी क्या मैं वो अहसास फिर से खुद में जगा पाउंगी”,अवनि ने मन ने मन तड़पकर खुद से कहा।

अवनि की नम आँखे देखकर पृथ्वी ने अपने चेहरे से गंभीर भाव हटाकर कहा,”वैसे कल से मैं आपको इतना परेशान नहीं करूंगा”
“तुम कही जा रहे हो ?”,अवनि ने धड़कते दिल से पूछा
“कल से मुझे ऑफिस जाना पडेगा,,,,,,,जयदीप सर ने एक बहुत इम्पोर्टेन्ट प्रोजक्ट मुझे दिया था लेकिन इन पिछले एक हफ्ते से मैं उस पर ध्यान ही नहीं दे पाया , कल सुबह उसी को लेकर क्लाइंट के साथ मीटिंग है। वैसे आप कहेगी तो मैं कुछ दिन और घर पर रुक जाऊंगा,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा

“नहीं पृथ्वी ! मेरे लिए तुम्हे अपने काम के साथ कोम्प्रोमाईज़ नहीं करना चाहिए,,,,,,,,,तुम्हे ऑफिस जाना चाहिए और काम करना चाहिए,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“थैंक्यू ! वैसे मैं जल्दी आ जाया करूंगा,,,,,,,,आप रह जाएँगी ना अकेले ?”,पृथ्वी ने कहा

“हम्म्म,,,,,,,मैं जल्दी ही कोई जॉब शुरू कर दूंगी ताकि तुम्हे अकेले परेशान ना होना पड़े”,अवनि ने कहा तो पहली बार पृथ्वी के चेहरे पर नाराजगी के भाव उभरे और उसने कहा,”आप जॉब क्यों करेंगी ? मैं हूँ न मैं थोड़ी ज्यादा मेहनत करूंगा और आपको जो चाहिए वो लाकर दूंगा,,,,,,और आप ऐसा मत सोचना कि आप लड़की है इसलिए मैं जॉब के लिए मना कर रहा हूँ , नहीं ऐसा हरगिज नहीं है बल्कि मैं तो लड़कियों को लड़को के बराबर समझता हूँ लेकिन आप , आप जॉब के लिए नहीं बने,,,,,,,,और ना ही मैं आपको ये करने दूंगा”

“तो फिर मैं क्या करुँगी ?”,अवनि ने कहा
“जल्दी ही बता दूंगा,,,,,,,,,,,मैंने आपके लिए बहुत कुछ सोच रखा है बस मुझ पर भरोसा रखना”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि ने हामी में सर हिला दिया लेकिन साथ ही उसे पृथ्वी को लेकर बुरा भी लग रहा था कि अब अवनि की सारी जिम्मेदारी उस पर आ जाएगी और उसे अवनि के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी।

अवनि को सोच में डूबा देखकर पृथ्वी ने कहा,”आपको मुझ पर भरोसा कर सकती है,,,,,,,!!”
अवनि ने सुना और फिर उसके बाद शुरू हुई पृथ्वी की ना खत्म होने वाली बातें , अवनि बस ख़ामोशी से सब सुनते जा रही थी और पृथ्वी उसे अपने बचपन से लेकर जवानी तक के सारे किस्से सुनाये जा रहा था। उसने अवनि को अपने घरवालों के बारे में , अपनी दादी के बारे में , अपनी पढाई , अपनी जॉब , अपने सपनो के बारे में बताया।

पृथ्वी की बातें सुनते हुए अवनि ने महसूस किया कि “किसी को इत्मीनान से सुनना” भी कितना खूबसूरत हो सकता है। पृथ्वी की बाते सुनते सुनते अवनि ने अपनी कोहनी सोफे के हत्थे पर टिकाई और अपना हाथ गाल से लगाकर बड़े प्यार से पृथ्वी को देखने लगी। बातें करता , हँसता मुस्कुराता पृथ्वी कितना प्यारा और मासूम लग रहा था। पृथ्वी की बाते अवनि के लिए जैसे कोई मीठी सी लोरी हो वह उसकी बातें सुनते सुनते सो गयी और पृथ्वी बोलता रहा , जब पृथ्वी की नजर अवनि पर पड़ी तो उसने देखा अवनि सो चुकी है वह मुस्कुराया।

सोते हुए अवनि किसी मासूम बच्ची सी लग रही थी , उसके सुर्ख लाल होंठ , बड़ी बड़ी पलकें , होंठो से कुछ नीचे छोटा सा काला तिल उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा था। गुँथे बालों में से निकली कुछ लटें अवनि के गाल पर पसर गयी। पृथ्वी ने देखा तो बड़े प्यार से बालों की उन लटों को अवनि के गाल से हटाकर साइड कर दिया।

पृथ्वी उठा और अंगड़ाई लेकर किचन की तरफ चला आया। उसने पानी का बोतल उठाया और पीते हुए बाहर चला आया। हॉल में लगी घडी पर जब पृथ्वी की नजर पड़ी तो उसने पाया घडी में शाम के 5 बज रहे थे। सहसा ही पृथ्वी को उस लिफाफे की याद आयी जो आज नीलम उसे देकर गयी थी। पृथ्वी कमरे में गया लिफाफा निकाला और अपनी जींस की पॉकेट में रखकर बाहर चला आया। अवनि सो रही थी और पृथ्वी उसे अकेले छोड़कर जाना नहीं चाहता था लेकिन उसका जाना भी जरुरी था।

वह बुक रेंक की तरफ आया एक पन्ना लिया और अवनि के लिए एक मैसेज लिखकर साथ ही नीचे अपना फोन नंबर भी लिख दिया क्योकि अवनि के पास पृथ्वी का नया नंबर नहीं था।
पृथ्वी ने पेपर टेबल पर रखा और प्यार से अवनि का सर सहला कर कहा,”मैं जल्दी आ जाऊंगा”
पृथ्वी ने अपना जैकेट उठाया और फ्लेट से बाहर निकल गया जाते जाते उसने फ्लेट को बाहर से ही लॉक कर दिया जिस से कोई अवनि को परेशान ना करे।

( क्या अवनि सम्हाल पायेगी पृथ्वी की बेइंतहा मोहब्बत ? आखिर पृथ्वी ने अवनि को जॉब करने से मन क्यों किया ? लिफाफे में रखे पेपर्स में आखिर ऐसा क्या है जो पृथ्वी अवनि से छुपा रहा है ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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