Pasandida Aurat Season 2 – 44
Pasandida Aurat Season 2 – 44

मौर्या Pvt. Ltd. पनवेल , मुंबई
अवनि के जाने के बाद पृथ्वी अपने ऑफिस में चला आया। केबिन में आकर पृथ्वी ने अपना बैग और टिफिन रखा तो अंकित ने कहा,”मिस देसाई ! पिछले आधे घंटे से तुम्हारा इंतजार कर रही है,,,,,,,,,!!!”
“उसे और कोई काम नहीं है क्या ? मैंने सुबह ही उनकी कम्पनी में फोन करके बताया था कि मीटिंग 11 बजे है फिर वो मीटिंग से एक घंटा पहले यहाँ कर क्या कर रही है ?”,पृथ्वी ने सामने पड़ी फाइल उठाकर देखते हुए कहा
“क्या पता तुम से मिलने आयी हो ? आजकल कुछ ज्यादा मेहरबान है देसाई ग्रुप तुम पर तभी तो बिना मीटिंग के ही उन्होंने नए प्रोजेक्ट को अप्रूव कर दिया,,,,,,,कुछ भी कहो पृथ्वी कभी कभी तुम्हारी पर्सोनलिटी ऑफिस के बहुत काम आती है”,अंकित ने पृथ्वी को छेड़ते हुए कहा
पृथ्वी फाइल के पन्ने पलट रहा था लेकिन जैसे ही अंकित की बात सुनी उसके हाथ रुक गए। उसने अंकित की तरफ देखा और थोड़ा कठोरता से कहा,”हो गया तुम्हारा , अब आज की मीटिंग की सभी रिपोर्ट्स तैयार करो और मुझसे मीटिंग रूम में मिलो”
“यस बॉस,,,,,,,,,,!!”,अंकित ने मुस्कुराकर कहा और अपने लेपटॉप पर काम करने लगा
पृथ्वी ने हाथ में पकड़ी फाइल के पन्ने पलटे उसमे कुछ गलतियों को नोटिस किया और लेकर केबिन से बाहर निकल गया।
केबिन में बैठी तान्या , कशिश और मनीष एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे। अंकित की नजर जब उन तीनो पर पड़ी तो उसने कहा,”क्या हुआ तुम तीनो को किस बात है ?”
मनीष अपनी कुर्सी खिसकाकर अंकित की तरफ आया और दबे स्वर में कहा,”सर ! अपने पृथ्वी सर तो शादी के बाद सच में पूकी बन गए है,,,,,,आपने उनके शर्ट की कोलर पर लगा क्लिप देखा ?”
“ओह्ह्ह्ह तो तुम लोग इसलिए हंस रहे हो,,,,,,,!!!”,अंकित ने कहा और फिर सबके साथ मिलकर हंस पड़ा।
पृथ्वी को इस बात का अहसास तक नहीं था कि उसकी शर्ट की कोलर पर अवनि का कलेचर लगा है। ऑफिस आने के बाद पृथ्वी वैसे भी प्रोफेशनल हो जाता था इसलिए उसे कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। वह फाइल हाथ में लिए अपने केबिन से निकला और जयदीप के केबिन की तरफ बढ़ गया और इसके बीच ऑफिस में जितना भी स्टाफ अपनी डेस्क पर बैठा उन सबकी नजर थी पृथ्वी के कोलर पर , क्योकि एक जन ऐसा कुछ देखे और दूसरे को ना बताये ऐसा भला कैसे हो सकता था ?
पृथ्वी ने जयदीप के केबिन का दरवाजा खटखटाया और कहा,”क्या मैं अंदर आ सकता हूँ ?”
जयदीप के केबिन में बैठी प्राची देसाई ने जैसे ही पृथ्वी की आवाज सुनी उसका दिल धड़क उठा। वह पिछले आधे घंटे से पृथ्वी का ही तो इंतजार कर रही थी और कितने दिन से उसने पृथ्वी को देखा तक नहीं था। उसने अपने बालों को सही किया और सीधे होकर बैठ गयी।
“यस कम इन”,जयदीप ने कहा जो कि प्राची के साथ बैठकर आज की मीटिंग के बारे में डिस्कस कर रहा था।
पृथ्वी दरवाजा खोलकर अंदर आया , प्राची की नजर पृथ्वी पर ही थी लेकिन पृथ्वी ने प्राची को देखा तक नहीं और सीधा जयदीप की तरफ आकर हाथ में पकड़ी फाइल उनकी तरफ बढाकर कहा,”सर ! ये क्या है ? क्या आपने इस फाइल को ठीक से चेक किया , इसमें कितने ही करेक्शन की जरूरत थी और आपने बिना उन्हें सही किया अप्रूव भी कर दिया। क्लाइंट ने अगर ये फाइल देखी तो हमारे मुँह पर डील केंसल कर देगा”
जयदीप ने फाइल लेकर नीचे रखी और कहा,”पृथ्वी मिस देसाई यहाँ है आज की मीटिंग यही अटेंड करने वाली है”
पृथ्वी ने सुना तो प्राची की तरफ देखा और बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा,”हेलो मेम”
“हेलो मिस्टर उपाध्याय,,,,,,,लगता है मुझे यहाँ देखकर आपको ज्यादा ख़ुशी नहीं हुई”,प्राची ने पृथ्वी को ताना मारकर कहा
“नहीं ऐसी कोई बात नहीं है , मुझे ख़ुशी है कि आज की जेनेरेशन बिजनेस में इतना इंट्रेस्टेड है”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
“बिजनेस में किसे इंट्रेस्ट है पृथ्वी मेरा इंट्रेस्ट तो तुम में बढ़ता जा रहा है”,प्राची ने पृथ्वी की तरफ देखते हुए मन ही मन खुद से कहा
प्राची को अपनी ओर देखते पाकर पृथ्वी ने जयदीप की तरफ देखा और कहा,”सर आप इसे रीचेक करके फिर से अप्रूव कीजिये ताकि आज शाम मैं क्लाइंट से मिल सकू,,,,,,,,,,,,,!!!”
प्राची ने देखा पृथ्वी वहा से जाना चाह रहा है तो उसने हड़बड़ाकर कर कहा,”अह्ह्ह्ह मिस्टर उपाध्याय ! वो आज की मीटिंग को लेकर मेरे कुछ डॉट्स है तो क्या हम क्लियर कर सकते है”
पृथ्वी वहा रुकना नहीं चाहता था इसलिए जयदीप की तरफ देखा लेकिन इतनी बड़ी कम्पनी की होने वाली CEO की बात जयदीप टालना नहीं चाहता था इसलिए उसने पृथ्वी को देखकर अपनी पलकें झपका दी।
“जी बिल्कुल”,पृथ्वी ने कहा और प्राची के बगल वाले सोफे पर आ बैठा। जयदीप उठा और अपनी टेबल की तरफ चला आया और पृथ्वी की दी फाइल देखने लगा।
प्राची ने जान बूझकर पृथ्वी को उलझाए रखने के लिए फाइल में करेक्शन करने को कहा। पृथ्वी ने अपनी शर्ट की बाजु समेटे और फाइल अपनी तरफ करके प्राची को एक एक पोइट्स समझाते हुए उसमे करेक्शन करने लगा। पृथ्वी का पूरा ध्यान फाइल में था और प्राची का पृथ्वी के मजबूत हाथो पर , थोड़े सांवले लेकिन साफ हाथ जिनकी उभरी नसे देखकर ये समझ आ रहा था कि पृथ्वी जिम जाने का शौक़ीन रहा है। जयदीप के सामने प्राची पृथ्वी से ज्यादा बात भी नहीं कर सकती थी या यू कहे अपने दिल की बात नहीं कर सकती थी इसलिए एकदम से अपने ललाट को हाथ लगाया।
सहसा ही जयदीप की नजर प्राची पर पड़ी तो उसने कहा,”मिस देसाई ! Are you ok ?”
पृथ्वी ने सुना तो अपना सर उठाया और प्राची की तरफ देखा
पृथ्वी ने अपना हाथ ललाट से हटाया और मासूमियत भरे स्वर में कहा,”अह्ह्ह ! मिस्टर मौर्या , एक्चुली वो मैंने सुबह से कुछ खाया नहीं है तो बस थोड़ा हेडेक फील हो रहा है,,,,,,,,,!!”
“ओह्ह्ह आई ऍम सो सॉरी , आप सुबह से यहाँ है और मैंने आपसे चाय कॉफी भी नहीं पूछा,,,,,,,मैं आपके लिए केंटीन से कुछ मंगवा दू ? बताईये क्या खाना पसंद करेंगी आप ?”,जयदीप ने हाथ में पकड़ी फाइल टेबल पर रख प्राची की तरफ आते हुए कहा।
“ब्रेड ऑमलेट एंड वन कॉफी प्लीज”,प्राची ने मासूमियत छोड़ एकदम से बड़े ही बेफिक्र अंदाज में कहा जैसे किसी रेस्त्रो में वेटर को आर्डर दे रही हो। पृथ्वी ने एक नजर जयदीप को देखा और अफ़सोस में अपना सर हिलाकर नजरे फाइल के पन्नों पर गड़ा ली।
“येह स्योर ! मैं अभी ऑफिस केंटीन से भिजवाता हूँ,,,,,,,,,अह्ह्ह पृथ्वी ! इनके ब्रेकफास्ट के बाद मैं तुमसे सीधा मीटिंग रूम में मिलूंगा”,कहते हुए जयदीप ने अपना फोन अपने कान से लगाया और केबिन से बाहर निकल गया।
प्राची ने राहत की साँस ली , उसने अपनी कोहनी सोफे के हत्थे पर टिकाई और अपना सर अपने हाथ से लगाकर इत्मीनान से पृथ्वी को देखने लगी। पृथ्वी ने सभी करेक्शन किये और जैसे ही उठने को हुआ प्राची ने उसकी बाँह पर हाथ रखकर कहा,”बैठो ना पृथ्वी ! वैसे भी मीटिंग शुरू होने में अभी टाइम है,,,,,,,,!!”
पृथ्वी को प्राची के शब्द जैसे सुनाई ही नहीं दिए उसका ध्यान तो अपनी बाँह पर रखे प्राची के हाथ पर था।
पृथ्वी का केबिन
“मनीष ! ये कुछ डाक्यूमेंट्स है जिनमे से आधे पेपर्स पर ‘मिस्टर विक्रम कपूर’ के साईंन नहीं है। अपने ऑफिस से कुछ आगे ‘हाई स्किल्स बिल्डिंग’ में उनका प्रोडकशन हॉउस का ऑफिस है। वो तुम्हे वहा मिल जायेंगे इसलिए ये पेपर्स लेकर जाओ। रिसेपशन पर तुम्हे मिस दिव्या मिलेंगी तो उनसे बात कर लेना वो तुम्हे मिस्टर कपूर से मिलवा देंगी,,,,,,,,,,!!”,अंकित ने एक फाइल मनीष की तरफ बढाकर कहा
“सर लंच के बाद जाऊ तो चलेगा , अभी मैं एक जरुरी रिपोर्ट तैयार कर रहा हूँ”,मनीष ने लेपटॉप पर काम करते हुए कहा
“इस फाइल से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट कुछ नहीं है मनीष इसलिए तुम्हे अभी जाना होगा,,,,,,और अगर पृथ्वी ने देखा ये फाइल अभी तक इन्कम्प्लीट है तो फिर उसका गुस्सा सहने के लिए तैयार रहना क्योकि इसकी रिपोर्ट तुमने तैयार की है,,,,,,,,,!!”,अंकित ने सहजता से कहा
मनीष ने जैसे ही सुना जल्दी से अपना लेपटॉप बंद किया और अंकित के हाथ से फाइल लेकर कहा,”जा रहा हूँ,,,,,,,,!!!”
मनीष के जाने के बाद अंकित अपना काम करने लगा तो कशिश ने कहा,”अंकित सर ! कल रात पृथ्वी सर से मिलने के बाद तो नहीं लगता वो इतने स्ट्रिक्ट होंगे , कल डिनर के टाइम हम सब के साथ कितने स्वीट थे वो”
“कशिश ! पृथ्वी सर स्वीट बस अपनी पर्सनल लाइफ में है प्रोफेशनल लाइफ में नहीं,,,,,,,ऑफिस में वो आदमी कुछ और ही होता है”, अंकित ने अपने लेपटॉप पर उंगलिया चलाते हुए कहा
कशिश ने सुना तो तान्या को देखा और तान्या ने दबे स्वर में कहा,”पृथ्वी सर बस अपनी मैडम जी के सामने पूकी है बाकि सबके सामने खड़ूस”
कशिश ने सुना तो दबी सी हंसी हसने लगी।
विक्रम का केबिन अवनि को खामोश देखकर विक्रम ने कहा,”क्या हुआ , आपने मेरी बात का जवाब नहीं दिया ?”
अवनि ने अपनी पलकें उठाई और विक्रम की तरफ देखकर कहा,”माफ़ कीजिये सर लेकिन मैं इस तरह का कंटेंट नहीं लिखती , मैं ऐसी कहानिया लिखना पसंद करती हूँ जिनमे प्रेम हो , समर्पण हो , परिवार , भावनाये हो , ऐसी कहानिया जिन्हे 55 साल का इंसान भी उतनी ही सहजता से पढ़ सके जितनी सहजता से 18 साल के लोग पढ़ते है। मैं समाज को ऐसा सिनेमा देना चाहती हूँ जो लोगो को प्रेम में यकीन दिलाये ऐसा नहीं जिसे आज देखा और कल भूल गए”
अवनि की बात सुनकर विक्रम खामोशी से उसे देखने लगा और फिर ठहाका लगाकर हंसा। विक्रम को हँसते देखकर अवनि को अजीब लगा लेकिन उसने अपनी भावनाओ को अपने चेहरे पर आने नहीं दिया।
विक्रम ने खुद को सामान्य किया और कहा,”अवनि ! किस दुनिया में जी रही है आप ? ये मुंबई है और यहाँ की लाइफ बहुत फ़ास्ट है। जिन घिसी-पीटी कहानियो की आप बात कर रही है वो 20 साल पहले चलती थी अब तो ऑडियंस उन्हें देखना तक पसंद नहीं करती है।
पहले ही एपिसोड में लोग बोर होकर अपना टीवी बंद कर देंगे,,,,,, आजकल लोगो को मसाला चाहिए , रोमांस चाहिए , इंटिमेसी चाहिए और इसी की मार्किट में डिमांड है। कुछ ऐसा जिसे देखकर लोग एक्साइटेड हो जाये , आप जवान है खूबसूरत है आप तो इसे और अच्छे से लिख पाएंगी”
विक्रम की बातें अवनि को बिल्कुल पसंद नहीं आयी इसलिए उसने सधे हुए स्वर में कहा,”मैं ऐसे बेहूदा कंटेंट नहीं लिखती , ना ही कभी लिखना पसंद करुँगी,,,,,,आप अपनी सीरीज के लिए किसी और राइटर को हायर कर लीजिये”
विक्रम ने सुना तो अपना हाथ सामने बैठी अवनि के हाथ पर रखा और बड़े ही प्यार से कहा,”अरे आप तो बुरा मान गयी , इंडस्ट्री में काम करने के लिए आपको थोड़ा बहुत सेक्रिफाइज तो करना ही पडेगा”
किसी गैर मर्द का छूना अवनि को नागवार गुजरा , उसके चेहरे के भाव एकदम से बदल गए और आँखों में गुस्से के भाव तैरने लगे। उसने विक्रम की तरफ देखा और कठोर स्वर में कहा,”हाथ हटाइए”
“क्या ?”,विक्रम ने कहा उसका हाथ अभी भी अवनि के हाथ पर ही था और चेहरे पर बेशर्मी के भाव थे।
अवनि ने अपने हाथ से विक्रम का हाथ झटका और गुस्से से कहा,”मैंने कहा अपना हाथ हटाइये,,,,,,!!!”
अवनि को विरोध करते देखकर विक्रम का चेहरा गुस्से से लाल हो उठा। अवनि अपनी कुर्सी से उठी और कठोरता से कहा,”आपने मुझे समझ क्या रखा है ? मुझे काम की जरूरत है इसका मतलब ये नहीं है कि मैं सेक्रिफाइज के नाम पर आपके सामने खुद को परोस दू , खबरदार जो मुझे छूने की कोशिश भी की,,,,,,एक राइटर किसी कहानी को लिखने के लिए कितनी मेहनत करता है इसका अंदाजा भी है आपको ,
किसी की मेहनत को आप ऐसे बेहूदा और घटिया कंटेंट से कम्पेयर कर रहे है। बेशक मेरे कंटेंट जैसा लिखा कंटेंट लोग 20 साल पहले देखना पसंद करते होंगे लेकिन आज मैं कहती हूँ आने वाले 20 सालों में भी लोग वही कंटेंट फिर से देखना पसंद करेंगे,,,,,!!!!”
“तेरी इतनी जुर्रत की मेरे ही ऑफिस में मेरे ही सामने खड़ी होकर तू मुझसे ऐसे बात कर रही है,,,,,,,!!!”,विक्रम ने अवनि के सामने आकर उसकी बाँह पकड़कर गुस्से में उसे घूरते हुए कहा
अवनि ने सुना तो खींचकर एक तमाचा विक्रम के गाल पर रसीद किया और कहा,”अपनी हद में रहिये मिस्टर विक्रम कपूर”
अवनि के हाथ से थप्पड़ खाकर विक्रम लड़खड़ाया और पीछे हटा , अवनि को अपने खिलाफ देखकर तो विक्रम जैसे बोखला ही गया।
जयदीप का केबिन
पृथ्वी की नजर अपनी बाँह पर रखे प्राची के हाथ पर थी और सहसा ही उसे वो पल याद आ गया जब रेलवे स्टेशन पर भीड़ को देखकर अवनि ने उसकी बाँह अपने दोनों हाथो से थामी थी। पृथ्वी ने बहुत ही शालीनता से अपने दूसरे हाथ से प्राची के हाथ को अपनी बाँह से हटाकर साइड किया और कहा,”आपको मुझे इस तरह छूने की परमिशन नहीं है , ये हक़ किसी और का है और मैं शादीशुदा हूँ”
प्राची ने सुना तो उसके कलेजे पर जैसे साँप लोट गए लेकिन चेहरे के भाव ज्योँ के त्यों रहे लेकिन वह हैरानी से पृथ्वी को देखने लगी तो पृथ्वी ने कहा,”अह्ह्ह्ह हाँ ! आप मीटिंग के बारे में कुछ कह रही थी”
प्राची कुछ कहती इस से पहले केंटीन बॉय ट्रे लेकर अंदर दाखिल हुआ। पृथ्वी ने टेबल पर रखे लेपटॉप को बंद किया और फाइल्स को समेटकर एक तरफ रखकर लड़के से ट्रे प्राची के सामने रखने का इशारा किया। लड़के ने ट्रे टेबल पर रखी और वहा से चला गया। पृथ्वी उठा और कहा,”आप ब्रेकफास्ट कीजिये मैं आपसे मीटिंग रूम में मिलता हूँ”
“पृथ्वी ! जब तक मैं ब्रेकफास्ट करू क्या तुम यहाँ नहीं बैठ सकते ? प्लीज !! एक्चुली अकेले बैठकर खाने में मुझे थोड़ा अजीब लगेगा”,प्राची ने फिर एक कोशिश की जिस से पृथ्वी को अपने पास रोक सके
पृथ्वी रुकना नहीं चाहता था लेकिन उसे रुकना पड़ा। वह वापस बैठ गया और प्राची ख़ुशी ख़ुशी नाश्ता करने लगी। इस बार प्राची ने पृथ्वी से ऑफिस और काम की बातें की जिनका जवाब देने में पृथ्वी भी काफी सहज था। पृथ्वी का फोन बजा उसने देखा आज शाम आज जिस क्लाइंट से मिलने वाला है उसका मेल आया है तो पृथ्वी उसे देखने लगा। उसकी नजरें अपने फोन पर थी।
“पृथ्वी ! तुम भी कुछ लो न ?”,प्राची ने कहा
“अह्ह्ह थैंक्यू ! मैं आलरेडी नाश्ता कर चुका हूँ , आप खाइये”,पृथ्वी ने बिना प्राची की तरफ देखे कहा तो प्राची के चेहरे से ख़ुशी गायब हो गयी लेकिन फिर भी प्राची ने एक कोशिश की और ऑमलेट का एक टुकड़ा काँटे में फंसाकर पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”टेस्ट तो कर ही सकते हो”
पृथ्वी ने प्राची की तरफ देखा , वह उसे अपने हाथ से खिलाना चाह रही थी और एक बार फिर पृथ्वी को अवनि की याद आ गयी जब आज सुबह वह अपने हाथ से पृथ्वी को खाना खिला रही थी।
पृथ्वी कुछ देर तक ख़ामोशी से प्राची को देखता रहा और फिर उसके हाथ से काँटा लेकर नीचे रखते हुए कहा,”11 बज चुके है , अब हमे चलना चाहिए टीम मीटिंग रूम में मेरा इंतजार कर रही है”
प्राची ने सुना तो बस पृथ्वी को देखती ही रह गयी। आखिर क्या था ये लड़का ? पृथ्वी की जगह अगर कोई और मर्द होता तो अब तक मोके का फायदा उठाकर प्राची का दिल जीत चुका होता लेकिन पृथ्वी ने ऐसा कुछ नहीं किया अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी जीत तो वह अवनि के रूप में पहले ही देख चुका था , उसके सामने बाकि हर जीत उसे छोटी ही नजर आती थी।
पृथ्वी उठा और वहा से चला गया , प्राची ने सामने रखे टिश्यू में से एक उठाया और अपने हाथ को साफ करते हुए कहा,”हाह ! आखिर किस बात का घमंड है तुम में पृथ्वी ? मैंने अगर तुम्हे अपना दीवाना बनाकर अपने कदमों में नहीं गिराया तो मेरा भी नाम “प्राची देसाई” नहीं”
मनीष फाइल लेकर विक्रम कपूर के ऑफिस चला आया लेकिन दिव्या उसे नहीं मिली तो वह वेटिंग एरिया में रखे सोफे पर आ बैठा और उसके आने का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद विक्रम कपूर के केबिन से चिल्लाने की आवाजे मनीष के कानो में पड़ी। उसने केबिन की तरफ देखा तो खिड़की के शीशे से उसे विक्रम कपूर नजर आया और साथ ही कोई लड़की मनीष की तरफ पीठ किये खड़ी थी जिस से मनीष उसका चेहरा नहीं देख पाया।
मनीष ने देखा गुस्से में विक्रम ने लड़की की बाँह पकड़ी और लड़की ने खींचकर एक थप्पड़ विक्रम को दे मारा।
मनीष हैरानी से सब देख रहा था हालाँकि उसे साफ कुछ सुनाई नहीं दे रहा था वह बस ये समझ पाया कि विक्रम अंदर किसी लड़की पर चिल्ला रहा है।
“मनीष कश्यप,,,,,,,,,,,!!!”,रिसेप्शन पर खड़ी लड़की ने आवाज दी तो मनीष की तन्द्रा टूटी और वह उठकर लड़की की तरफ आया
“आपको अंकित जी ने भेजा है ?”,लड़की ने कहा जिसका नाम दिव्या था
“हाँ ! इस फाइल में कुछ डाक्यूमेंट्स है जिस पर विक्रम कपूर के साईंन चाहिए,,,,,,!!!”,मनीष ने कहा लेकिन उसकी नजरें अभी भी विक्रम के केबिन की तरफ थी। दिव्या ने देखा तो फाइल साइड में रखी और कहा,”मैं ये फाइल आपके ऑफिस में भिजवा दूंगी , आप जा सकते है”
मनीष की तंद्रा टूटी और जैसे ही वह जाने के लिए पलटा विक्रम के केबिन का दरवाजा खुला और उसमे से अवनि बाहर आयी। अवनि के चेहरे पर गुस्से और तकलीफ के भाव थे उसने वहा मौजूद किसी को नहीं देखा और मनीष के सामने से निकल गयी।
“ये तो पृथ्वी सर की वाइफ है”,मनीष हैरानी से बड़बड़ाया तभी विक्रम के गुस्से भरे शब्द उसके कानो में पड़े,”अरे जाओ ! खुद को समझती क्या हो हां ? तुम जैसी बहुत सी Writers का घमंड तोडा है इस विक्रम कपूर ने , इंडस्ट्री में कोई काम नहीं देगा तुम्हे समझी तुम,,,,,,,,,,,,,!!!!”
मनीष ने सुना तो उसे अवनि के लिए बहुत बुरा लगा और वह तुरंत वहा से निकल गया।
( क्या अवनि को लेकर हो पाएंगे विक्रम कपूर के गलत इरादे मुकम्मल ? क्या प्राची देसाई बना पायेगी पृथ्वी को अपना दीवाना और पृथ्वी को टेकने पड़ेंगे उसके सामने अपने घुटने ? क्या मनीष बताएगा ऑफिस जाकर पृथ्वी को विक्रम कपूर की अवनि के साथ की बदतमीजी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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Sanjana Kirodiwal

