Pasandida Aurat – 93

Pasandida Aurat – 93

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

अवनि को लेकर पृथ्वी अपने मन में कोई फैसला कर चुका था और इसके लिए उसे एक बार फिर राजस्थान जाना था लेकिन इस बार अवनि से मिलने नहीं बल्कि किसी और से मिलने। ऑफिस के बाद पृथ्वी घर चला आया , खाना खाकर फ्लेट पर आया और राजस्थान जाने का प्लान बनाने लगा। पृथ्वी ये तो जानता था कि अवनि की फॅमिली में कौन कौन है लेकिन उसने उन लोगो को कभी देखा नहीं था , ना ही वह उदयपुर वाले घर का एड्रेस जानता था।

अवनि के हर सोशल मिडिया प्रोफाइल पर पृथ्वी ब्लॉक था इसलिए वह चाहकर भी कोई जानकारी हासिल नहीं कर सकता था लेकिन पृथ्वी तो पृथ्वी है उसने हार नहीं मानी और रात भर अवनि की पुरानी चैट को स्क्रॉल करता रहा जहा अवनि ने एक बार पृथ्वी को अपने पापा का नाम बताया था। पृथ्वी चाहता तो सुरभि की मदद ले सकता था लेकिन इस से अवनि को पता चल जाता और पृथ्वी अब अवनि को किसी भी बात के लिए परेशान करना नहीं चाहता था।

लगभग तीन घंटे तक चैट स्क्रोल करने के बाद पृथ्वी को अवनि का वह मैसेज मिला जिसमे उसने अपने पापा का नाम मेंशन किया था।
“विश्वास मलिक” लेकिन उदयपुर में इस नाम से तो और भी लोग होंगे उनमे से अवनि के पापा को कैसे पहचानूंगा ?”,पृथ्वी बड़बड़ाया तभी उसके दिमाग में एक बात कौंधी और उसने अपने फोन से “जयदीप” का नंबर डॉयल किया।

जैसे जैसे रिंग जा रही थी पृथ्वी का दिल धड़क रहा था। कुछ देर बाद जयदीप ने फोन उठाया और नींद भरे स्वर में कहा,”हेलो ! हाँ पृथ्वी क्या हुआ तुमने इतनी रात में फोन क्यों किया है ?”
“सर ! क्या आप मेरे लिए एक फेवर करेंगे ? उदयपुर , राजस्थान में एक आदमी है “विश्वास मलिक” क्या आप कम्पनी के लीगल लॉयर को बोलकर मुझे उसका एड्रेस दिलवा सकते है ?”,पृथ्वी ने कहा
“पृथ्वी ! तुमने टाइम देखा है इस वक्त सारे लॉयर सो रहे है , तुम भी सो जाओ और कल सुबह मुझे ऑफिस में मिलो”,जयदीप ने नींद भरे स्वर में कहा और फोन काट दिया

पृथ्वी ने फोन की स्क्रीन पर टाइम देखा , रात का डेढ़ बज रहा था और पृथ्वी ने इस वक्त जयदीप को फोन लगा दिया। ये देखकर उसे खुद पर ही खीज हुई उसने फोन साइड में रखा और किचन में चला आया। फ्रीज से दूध निकाला और चाय बनाने लगा। चाय बनाते हुए पृथ्वी के दिमाग में कई ख्याल एक साथ चल रहे थे। वह जो करने जा रहा था कैसे करेगा ये नहीं जानता था बस उसे अवनि के लिए ये करना था। उसे अवनि को उस हर दर्द हर तकलीफ से आजाद करना था जिसके चलते अवनि उसे अपनाने से डर रही थी।

चाय लेकर पृथ्वी बालकनी में चला आया और पीते हुए अवनि के बारे में सोचने लगा। अब तक उसे देर रात जागने की आदत जो हो चुकी थी।

अगली सुबह पृथ्वी जयदीप के केबिन में उसके सामने खड़ा था और जयदीप ख़ामोशी से उसे देख रहा था। पृथ्वी ने पलकें उठाकर जयदीप को देखा और फिर पलकें झुका ली तो जयदीप ने कहा,”पृथ्वी ! क्या तुम्हे इतनी भी समझ नहीं है कि आधी रात में किसी को इस तरह फोन नहीं किया जाता , मेरी वाइफ मेरी बगल में सो रही थी। अचानक आधी रात को ऐसे फोन आते देखकर क्या उसे मुझ पर शक नहीं होगा,,,,,,,ओह्ह्ह तुम्हे ये बात कैसे पता होगी तुम्हारी तो अभी तक शादी भी नहीं हुई है , लेकिन तुम्हे किसी को आधी रात को ऐसे फोन नहीं करना चाहिए,,,,,!!”

“आई ऍम सॉरी ! मैं थोड़ा परेशान था इसलिए मैंने टाइम नहीं देखा,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने धीरे से कहा
“इट्स ओके ! वैसे मुझे अच्छा लगा तुमने परेशान होने पर मुझे फोन किया। तुम्हे उदयपुर में रहने वाले किसी आदमी का एड्रेस क्यों चाहिए ?”,जयदीप ने कहा
“अह्ह्ह्हह वो मेरा निजी मामला है , आपने एक बार मुझसे कहा था कि कभी अगर जरूरत पड़े तो मैं आपसे कहू ,, क्या आप अपनी कम्पनी के लॉयर को बोलकर ये करवा सकते है ?”,पृथ्वी ने गंभीरता से कहा

“हाह ! एक तो तुम्हारे ये निजी मामले पता नहीं तुम कब मुझे अपना समझोगे,,,,,,,,ठीक है मैं बात करके देखता हूँ बट हॉप सो कि तुम कोई इललीगल काम ना करो”,जयदीप ने अपने फ़ोन से लॉयर का नंबर डॉयल करके कहा
“आपको क्या मैं गुंडा मवाली लगता हूँ ?”,पृथ्वी ने आज कितने दिनों बाद जयदीप से चिढ़कर कहा
“हाँ एक लड़की के प्यार में देवदास तो बन ही चुके हो , गुंडे मवाली भी बन ही जाओगे”,जयदीप अपनी दाढ़ी खुजाते हुए बड़बड़ाया जिसे पृथ्वी साफ साफ नहीं सुन पाया और कहा,”कुछ कहा आपने ?”

“अह्ह्ह नहीं मैं बस कह रहा था कि मैंने आज तक इतना हैंडसम गुंडा नहीं देखा”,जयदीप ने मुस्कुरा कर कहा
पृथ्वी ने अफ़सोस में अपना सर हिलाया और वहा से चला गया।

दिनभर पृथ्वी काम में बिजी रहा और लंच के बाद जयदीप उसके केबिन में आया। जयदीप ने एक पेपर पृथ्वी के सामने उसकी टेबल पर रखा और कहा,”मैं नहीं जानता तुम क्या करने जा रहे हो लेकिन इतना भरोसा है तुम पर कि तुम कुछ गलत नहीं करोगे,,,,,,आल द बेस्ट”

जयदीप पृथ्वी को विश्वास जी का एड्रेस देकर वहा से चला गया और पृथ्वी ने उस कागज को उठाकर देखा जिस पर लिखा था
“सुख विलास भवन , सेक्टर 14 , हिरन मगरी , उदयपुर , राजस्थान”
पृथ्वी मुस्कुरा उठा और कागज को मोड़कर अपनी जेब में रख लिया।

सिरोही , राजस्थान
पृथ्वी कैसा है ? किन हालातों में है ? उसकी जिंदगी में क्या चल रहा है ? अवनि को कुछ नहीं पता था वह बस बीतते वक्त के साथ खुद को मजबूत बनाने में लगी थी और अब तक खुद को इतना मजबूत बना चुकी थी अब कोई उसका दिल दुखाने की हिमाकत नहीं करता था। जिस शाम पृथ्वी को अवनि के उदयपुर वाले घर का एड्रेस मिला उसी शाम अवनि जब बैंक से घर आयी तो सुरभि हाथ में पकड़ा अख़बार लहराते हुए उसके सामने आयी और कहा,”सब छोडो पहले ये देखो”

“ये क्या है ?”,अवनि ने अख़बार के पहले पन्ने पर छपे ऐड को देखते हुए कहा
“मुंबई की एक बड़े प्रोडक्शन हॉउस को अपने प्रोडक्शन हॉउस के लिए राइटर चाहिए और इसके लिए उन्होंने एक राइटिंग कॉम्पिटिशन रखा है जो कि दो दिन बाद जयपुर में है , अवनि तुम्हे इसमें जरूर भाग लेना चाहिए क्या पता तुम्हारी किस्मत यहाँ तुम्हारा साथ दे दे और तुम इसमें सेलेक्ट हो जाओ,,,,,,,,,,वैसे भी तुम्हारी ड्रीम डेस्टिनेशन मुंबई ही है”,सुरभि ने ख़ुशी से भरकर कहा

सुरभि की बात सुनकर अवनि को पृथ्वी की बात याद आ गयी “मैडम जी ! आप मानों या ना मानों आना आपको एक दिन मेरे पास ही है , क्योकि आपकी फाइनल डेस्टिनेशन मुंबई है”
“अवनि , अवनि कहा खो गयी ?”,सुरभि ने अवनि की बाँह थपथपाकर कहा
“अह्ह्ह हाँ हाँ कही नहीं,,,,,,,,मैं इसे जरूर ट्राय करुँगी”,अवनि ने चौंककर कहा

“ओह्ह्ह थैंक्यू अवनि ! आई ऍम सो हैप्पी फॉर यू , देखना तुम इसमें जरूर सेलेक्ट होगी और फिर तुम्हे मुंबई जाने को मिलेगा और वहा तुम पर,,,,,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने ख़ुशी से अवनि को साइड हग करके कहा लेकिन कहते कहते रुक गयी और जब देखा कि अवनि उसे ही देख रही है तो उसने अपनी जबान सम्हालते हुए कहा,”और वहा , वहा तुम ज्यादा परेशान नहीं होना , खूब मेहनत करना और अपने सपनो को पूरा करना,,,,,,,!!”
अवनि मुस्कुराई और सुरभि को अपनी बाँहो में भरकर कहा,”जी मैडम जी”

पृथ्वी के पास अब एक नया मकसद था और अवनि के पास नया सफर और दोनों ही अपनी अपनी मंजिल की तरफ निकल पड़े। दो दिन बाद अवनि जयपुर में थी  और पृथ्वी उदयपुर एयरपोर्ट के बाहर।  पृथ्वी ने कैब बुक की और विश्वास जी के घर के लिए निकल गया। पृथ्वी नहीं जानता था कि वह विश्वास जी के घर जाकर क्या कहेगा ? उसे देखकर विश्वास जी का क्या रिएक्शन होगा ? वह बस जा रहा था क्योकि उसके दिल ने उसे ऐसा करने को कहा।

पिछली बार जब पृथ्वी उदयपुर आया था तब एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन के अलावा कुछ देख नहीं पाया था लेकिन आज वह इस शहर को बहुत ध्यान से देख रहा था। ये वही शहर था जहा अवनि का जन्म हुआ , वह पली बढ़ी , स्कूल कॉलेज गयी थी और इन्ही रास्तों से सेंकडो बार गुजरी होगी। इस शहर की हवा भी पृथ्वी को एक अलग ही सुकून दे रही थी।

उसने खिड़की का शीशा नीचे किया , अपनी बांहो को खिड़की पर रखा और अपना सर उस पर टिकाकर आँखे मूँद ली , गाडी में बजता मधुर संगीत पृथ्वी के मन में उत्साह और ख़ुशी का भाव जगा रहा था। बंद आँखों के साथ वह मुस्कुरा रहा था। उसके चेहरे पर ऐसी ख़ुशी थी जैसे कोई एक लम्बे इंतजार के बाद अपने चाहने वाले से मिलने जाता है।

कैब सुख विलास भवन के सामने आकर रुकी। पृथ्वी की तंद्रा टूटी उसने ड्राइवर की तरफ देखा और समझ गया कि वह अपनी मंजिल पर पहुँच चुका है। पृथ्वी ने किराया दिया और अपना बैग पीठ पर टाँगे नीचे उतर गया। कैब वहा से चली गयी। सुबह के करीब 10 बज रहे थे और पृथ्वी सुख विलास भवन के बंद दरवाजो के सामने खड़ा था।

पृथ्वी का दिल धड़क रहा था और चेहरे पर बेचैनी के भाव थे। वह पहली बार कुछ ऐसा करने जा रहा था जो उसने कभी नहीं किया था। धड़कते दिल के साथ पृथ्वी ने बेल बजा दी और दरवाजा खुलने का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद दरवाजा खुला और पृथ्वी की किस्मत इस वक्त शायद अच्छी थी कि दरवाजा भी विश्वास जी ने ही खोला था। पृथ्वी ने जैसे ही विश्वास जी को अपने सामने देखा हैरान रह गया इनसे वह उदयपुर रेलवे स्टेशन पर पहले भी मिल चुका था। पृथ्वी हैरान भी था और मन ही मन खुश भी कि वह पहले भी अवनि के पापा से मिल चुका है।

विश्वास जी पृथ्वी से 7 महीने पहले मिले थे वो भी कुछ मिनिट के लिए इसलिए पहली नजर में उसे पहचान नहीं पाए थे और पहचानते भी कैसे तब पृथ्वी क्लीन शेव था और अब उसने हलकी दाढ़ी रखना शुरू कर दिया था।
“जी कहिये,,,,,,,,,!!”,विश्वास जी ने कहा
पृथ्वी समझ गया कि विश्वास जी ने उसे नहीं पहचाना लेकिन उसे अब कुछ न कुछ तो बोलना ही था तभी उसकी नजर बगल वाले घर पर पड़ी जिसके दरवाजे पर ताला लगा था। उसे देखकर पृथ्वी ने कहा,”जी वो मैं इनसे मिलने आया था लेकिन ये,,,,,,,,ये शायद कही बाहर गए है तो मैं बस पूछने आया था कि क्या आप बता सकते है ये कहा गए है ?”

“अच्छा नवीन भाई ! ये तो बेटा दो साल से यहाँ नहीं है , इनका लड़का विदेश में सेटल हो गया तो नवीन भाई और उनकी पत्नी को भी वही बुला लिया,,,,,,,,!!”,विश्वास जी ने अपने पडोसी के घर की तरफ देखकर कहा
“ओह्ह्ह ! मुझे लगा अंकल आंटी यही होंगे तो मैं चला आया,,,,,,,,,,मैं चलता हूँ , शुक्रिया”,पृथ्वी ने कहा और वापस जाने लगा। विश्वास जी को पृथ्वी की आवाज और चेहरा जाना पहचाना लगा वे उसे याद करने की कोशिश करने लगे। चलते चलते पृथ्वी खुद में ही बड़बड़ाया,”क्या कर रहा है पृथ्वी ? वापस क्यों जा रहा है ? कुछ तो ऐसा कर जिस से अंकल तुम्हे रोक ले,,,,,,,,,,!!!”

“अह्ह्ह सुनो बेटा”,विश्वास जी ने पृथ्वी को आवाज दी तो पृथ्वी रुक गया लेकिन डर और घबराहट के भाव उसकी आँखों में तैर गए कही विश्वास जी उसे गलत ना समझ ले सोचकर पृथ्वी धीरे से पलटा तो विश्वास जी मुस्कुराते हुए उसके पास आये और कहा,”मुझे पहचाना ?”
“अह्ह्ह आप,,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अनजान बनते हुए कहा
“अरे हम पहले मिल चुके है , आपको याद होगा स्टेशन पर मैं आपसे टकरा गया था और मेरी वजह से आपकी सफेद टीशर्ट पर चाय गिर गयी थी,,,,,,,!!”,विश्वास जी ने पृथ्वी को याद दिलाते हुए कहा

पृथ्वी को भला और क्या चाहिए था ? उसने खुश होकर कहा,”अरे आप ! मैंने कभी सोचा नहीं था आपसे इस तरह दोबारा मुलाक़ात होगी,,,,,,,,,,कैसे है आप ?”
“मैं ठीक हूँ बेटा ! आप बताईये आप कैसे है ? तो आप नवीन भाई के रिश्तेदार है पर मैंने पहले कभी आपको यहाँ आते नहीं देखा,,,,,,,,,,!!”,विश्वास जी ने कहा
“अह्ह्ह्ह वो मैं छोटा था तब आया था , ये हमारे दूर के रिश्तेदार है पापा के , पापा के दोस्त है”,पृथ्वी ने फिर झूठ कहा

“अच्छा अच्छा ! वैसे उस दिन आप किसी दोस्त से मिलने जा रहे थे , मिले की नहीं ?”,विश्वास जी अचानक पूछ लिया तो पृथ्वी की आँखों के सामने अवनि से हुई मुलाकात और उसके बाद की सारी घटनाएं एक साथ आ गयी और इसी के साथ पृथ्वी के चेहरे पर उदासी और दर्द के भाव झिलमिलाने लगे और उसने विश्वास जी की तरफ देखकर मुश्किल से कहा,”जी मिला”
“वैसे आप उदयपुर नवीन भाई से मिलने आये थे या किसी काम से ?”,विश्वास जी ने पूछा

“जी अंकल आंटी से मिलने ही आया था सोचा थोड़ा घूम भी लूंगा , सुना है ये शहर बहुत खूबसूरत है”,पृथ्वी ने कहा
“हाँ खूबसूरत तो है , अब नवीन भाई तो यहाँ है नहीं तो आप कहा रहेंगे ?”,विश्वास जी ने कहा
“मैं यहाँ के बारे में कुछ नहीं जानता सर तो कोई होटल वगैरह देख लूंगा,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“अरे होटल क्यों ? ये मेरा घर है जब तक इस शहर में हो यहाँ रुको,,,,,,,,!!”,विश्वास जी ने अपनेपन से कहा

“अरे नहीं नहीं सर आप परेशान मत होईये , मैं होटल देख लूंगा”,पृथ्वी ने मना किया जबकि वह खुद चाहता था विश्वास जी उसे रोक ले आखिर उनके लिए ही तो वह इतनी दूर आया था।
“इसमें परेशानी की क्या बात है ? वैसे भी मुझे आपका एक अहसान चुकाना है”,विश्वास जी ने गंभीर स्वर में कहा
“अहसान ?”,पृथ्वी ने कहा

“अरे भई मैंने उस दिन आपकी सफ़ेद टीशर्ट पर चाय गिरा दी फिर भी आपने बुरा नहीं माना , अब आप इस शहर में आये है तो आपको मेरे यही रुकना पडेगा,,,,,,,इतना तो कर सकते है न आप , चलिए आईये ये बैग मुझे दीजिये”,विश्वास जी ने कहा
“अरे नहीं नहीं ठीक है”,पृथ्वी ने विश्वास जी को अपना बैग नहीं दिया और उनके साथ चल पड़ा।

विश्वास जी पृथ्वी को अंदर आये और हॉल में आकर सबको आवाज देकर बुलाया। अगले ही पल कौशल चाचा , मयंक चाचा , सीमा , मीनाक्षी , कार्तिक , दीपिका , सलोनी , नितिन और अंशु वहा चले आये। विश्वास जी के साथ एक अनजान लड़के को देखकर सब हैरान थे तभी विश्वास जी ने पृथ्वी की तरफ इशारा करके कहा,”इनसे मिलो ये है मेरे दोस्त,,,,,,,,,!!”

विश्वास जी ने दोनों मुलाकातों में कभी पृथ्वी का नाम पूछा ही नहीं था इसलिए उन्होंने पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने कहा,”जी पृथ्वी , पृथ्वी उपाध्याय”
“हाँ पृथ्वी , ये मुंबई से आये है और कुछ दिन हमारे साथ इसी घर में रहेंगे”,विश्वास जी ने सभी घरवालों से कहा और फिर पृथ्वी की तरफ पलटकर धीरे से कहा,”आपको दोस्त कह सकता हूँ ना ?”
पृथ्वी ने सुना तो हल्का सा मुस्कुराया और धीरे से अपनी पलकें झपका दी।

विश्वास जी ने सबको पृथ्वी का परिचय दिया और फिर पृथ्वी का परिचय सबसे करवाने लगे। पृथ्वी ने हाथ जोड़कर मयंक , कौशल , सीमा और मीनाक्षी को नमस्ते किया। दीपिका और सलोनी को हाथ हिलाकर हाय कहा और कार्तिक से हाथ मिलाकर कहा,”वेट लिफ्टिंग के बजाय चेस्ट पर वर्क करोगे तो बॉडी जल्दी शेप में आएगी”
पृथ्वी की बात सुनकर कार्तिक उस से अच्छा खासा इम्प्रेस हुआ और फिर जैसे ही उसने पृथ्वी को ध्यान से देखा उसे समझ आए गया पृथ्वी ने उसे ये सलाह क्यों दी ?

पृथ्वी खुद जिम जाता था और इसी वजह से उसकी पर्सनालिटी काफी अच्छी थी। कार्तिक ने मुस्कुरा कर हामी में गर्दन हिलायी तो पृथ्वी पीछे हटा और विश्वास जी के बगल में चला आया। नितिन अंशु को भी पृथ्वी ने हाय बोला तो नितिन ने शर्माते हुए जवाब में हाथ हिला दिया लेकिन अंशु पृथ्वी के पास आयी और कहा,”आप मुंबई में रहते है ?”
“हम्म्म,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“वहा तो बहुत बड़ी बड़ी बिल्डिंग होती है न ?”,अंशु ने फिर पूछा
“हाँ बहुत बड़ी ! आपसे भी बड़ी,,,,,,!!”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा

“जब मैं बड़ी हो जाउंगी तब मैं भी मुंबई जाउंगी”,अंशु ने खुश होकर कहा
“तुम कोई हीरोइन थोड़ी हो जो वहा जाओगी”,नितिन ने अंशु की तरफ देखकर कहा
“नहीं हूँ तो बन जाउंगी,,,,,,,,,!!”,अंशु ने नितिन की तरफ देखा और मुँह बनाकर कहा
पृथ्वी ने सुना तो और ज्यादा मुस्कुराया और अपने बैग से एक चॉकलेट निकालकर अंशु की तरफ बढाकर कहा,”बिल्कुल बन सकते हो क्योकि आप बहुत प्रिटी हो,,,,,,,,!!”
“थैंक्यू भैया,,,,,,,,!!”,अंशु ने खुश होकर कहा और नितिन को चिढ़ाते हुए वहा से भाग गयी।

कौशल चाचा को ऑफिस के लिए देर हो रही थी इसलिए वे वहा से चले गए। विश्वास जी ने पृथ्वी से बैठने को कहा और मयंक सीमा मीनाक्षी से चाय नाश्ता लगाने का कहकर खुद पृथ्वी के सामने वाले सोफे पर आ बैठा। विश्वास जी फोन बजने की वजह से अपने कमरे की तरफ चले गए। दीपिका किचन में जाकर मदद करने लगी और सलोनी वहा से चली गयी जबकि कार्तिक भी हॉल में आ बैठा और पृथ्वी से बात करने लगा। पहली मुलाकात में ही कार्तिक को पृथ्वी ना जाने क्यों इतना भा गया ?

पृथ्वी ने एक नजर घर को देखा , फिर घरवालों को और मन ही मन खुद से कहा,”यहाँ सब अच्छा है अवनि बस तुम्हारी कमी है और मैं वादा करता हूँ ये कमी बहुत जल्दी पूरी होगी”

( आखिर पृथ्वी के उदयपुर आने की असल वजह क्या है ? क्या अवनि सिलेक्ट होगी इस कॉम्पिटिशन में और उसकी किस्मत उसे लेकर जाएगी मुंबई ? क्या पृथ्वी जीत पायेगा अवनि के पापा और बाकि घरवालों का दिल ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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