Pasandida Aurat – 83
Pasandida Aurat – 83

लिफ्ट के बाहर व्हील चेयर पर बैठा पृथ्वी एकटक अवनि को देख रहा था और कुछ ही दूर बेंच के पास सुरभि के साथ खड़ी अवनि नम आँखों से पृथ्वी को देख रही थी। वह पृथ्वी से पूछ भी नहीं पायी कि वह कैसा है ? पृथ्वी ने अवनि को उदास और दुखी देखा तो इशारे से ऊँगली साइड में की और फिर अपनी चारो उंगलियों को गर्दन के सामने से निकालकर इशारा किया और अवनि की तरफ इशारा करके आसमान की तरफ देखकर अपने दोनों हाथ उठाये और अवनि की तरफ देखकर अपनी पलकें झपका दी
इन इशारो में पृथ्वी अवनि को समझा रहा था कि आज तो सिद्धार्थ उसे मार ही देता लेकिन अवनि की दुआ ने उसे बचा लिया। अवनि ने देखा इतने दर्द में भी पृथ्वी ऐसे इशारे कर रहा है तो वो नम आँखों के साथ मुस्कुरा दी। अवनि को मुस्कुराते देखकर पृथ्वी ने राहत की साँस ली और अपना हाथ अपने सीने पर रख लिया ये देखकर अवनि फिर उदास हो गयी उसने महसूस किया कि एक उसकी ख़ुशी के लिए पृथ्वी को ये सब देखना और सहना पड़ रहा था। हिमांशु ने फोन जेब में रखा और पृथ्वी के पास चला आया।
लिफ्ट के दरवाजे खुले और हिमांशु वार्ड बॉय के साथ पृथ्वी को लेकर अंदर चला गया। अवनि पृथ्वी को ऐसे जाते नहीं देख पा रही थी इसलिए सुरभि की तरफ पलट गयी और अपना सर सुरभि के कंधे पर रख लिया।
हिमांशु पृथ्वी को लेकर नीचे आया उसने गाडी बुक कर ली थी जिस से सभी घरवालों के साथ पृथ्वी को लेकर मुंबई जा सके। रवि जी ने हॉस्पिटल की सभी फॉर्मेलिटी पूरी की और पृथ्वी को लेकर चले गए। जाते जाते पृथ्वी ने पलटकर देखा लेकिन उसे अवनि कही दिखाई नहीं दी जबकि दिवार के पास खड़ी अवनि उसे जाते हुए देख रही थी। वह जान बूझकर पृथ्वी से छुप रही थी जिस से उसे देखकर पृथ्वी वापस जाने का इरादा ना बदल दे। पृथ्वी को गाडी में बैठाया , बाकि सब घरवाले भी आ बैठे और सभी वहा से निकल गए।
अनिकेत सुरभि और अवनि के पास आया और कहा,”सब ठीक है , मैंने पृथ्वी के पापा से बात की लेकिन पृथ्वी ने पहले ही उन्हें कोई झूठी कहानी सुना दी और कहा कि ये बस एक एक्सीडेंट था जिस से अवनि को प्रॉब्लम ना हो”
“ये लड़का सच में पागल है अनिकेत,,,,,,इतनी मुसीबत में होकर भी उसे अवनि की फ़िक्र हो रही है”,सुरभि ने कहा
“पागल नहीं है बहुत चाहता है अवनि को,,,,,,,,वो खुद परेशान हो जाएगा लेकिन इसे परेशान नहीं देख सकता”,अनिकेत ने अवनि को देखकर बड़े प्यार से कहा
अवनि ने सुना तो उसकी आँखों के सामने पृथ्वी के साथ बिताये पल आने लगे जिनमे सिर्फ प्यार और परवाह थी। अवनि को खामोश देखकर अनिकेत ने कहा,”हमे घर चलना चाहिए , तुम दोनों कल रात से यहाँ हो और अवनि भी काफी थक चुकी है,,,,,,,,मैं कैब बुक कर देता हु तुम अवनि को लेकर नीचे आ जाओ”
“हम्म्म,,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने कहा तो अनिकेत अपने फ़ोन से कैब बुक करते हुए आगे बढ़ गया और सुरभि अवनि की तरफ पलटी।
सुरभि ने देखा अवनि का दुपट्टा कही नजर नहीं आ रहा और फिर उसे याद आया कि वो तो पृथ्वी के हाथ में था। सुरभि कमरे में गयी लेकिन अवनि का दुपट्टा कही नहीं मिला तो सुरभि उसे लेकर ऐसे ही नीचे चली आयी। कैब आ चुकी थी , अनिकेत आगे बैठा और सुरभि अवनि पीछे आ बैठी। तीनो अवनि के घर निकल गए। रास्तेभर अवनि खामोश थी। अनिकेत ने भी कैब ड्राइवर के सामने बात करना ठीक नहीं समझा और घर पहुँचने का इंतजार करने लगा।
तीनो अवनि के फ्लेट पहुंचे। सुरभि ने अवनि से नहाने को कहा और खुद उसके लिए कबर्ड से कपडे निकालने लगी। सुरभि ने अवनि के लिए कपडे निकालकर बिस्तर पर रखे और कमरे का दरवाजा बंद कर बाहर चली आयी। अनिकेत बालकनी में खड़ा किसी से फोन पर बात कर रहा था।
उसके पास रेलवे की फुटेज भी आ चुकी थी उसने CCTV वीडियो और फुटेज सुरभि को दिखाए तो गुस्से से सुरभि की भँवे तन गयी और उसने कहा,”इस सिद्धार्थ को तो मैं छोडूंगी नहीं अनिकेत , आखिर वो अवनि और पृथ्वी के साथ ऐसा कैसे कर सकता है ? अवनि को उसके खिलाफ पुलिस कंप्लेंट करनी चाहिए तभी उसकी अकल ठिकाने आएगी।”
“पागल मत बनो सुरभि ! सिद्धार्थ एक साइको पर्सन है वो अवनि के लिए कुछ भी कर सकता है और मैं तुम्हे और अवनि दोनों को फिर से किसी मुसीबत में नहीं डाल सकता। अवनि को यहाँ आये 6 महीने हुए है और तुम अभी अभी यहाँ शिफ्ट हुयी हो लेकिन सिद्धार्थ से हमेशा से यही रहा है उसकी पहुँच ज्यादा है और अगर जल्दबाजी में तुम लोगो ने कोई फैसला लिया तो हो सकता है इस से तुम सबको नुकसान हो,,,,,,,,!!!”,अनिकेत ने सुरभि को समझाते हुए कहा
“तो तुम क्या चाहते हो अनिकेत अवनि हाथ पर हाथ धरी बैठी रहे , कुछ ना कहे और वो घटिया सिद्धार्थ उसे ऐसे ही टॉर्चर करता रहे,,,,,,,,पृथ्वी के साथ उसने जो किया वो देखा न तुमने अगर उसे कुछ हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता ? अवनि तो ये सब की वजह अब तक खुद को ही मान रही है,,,,,,,,!!”,सुरभि ने परेशानी भरे स्वर में कहा
सुरभि जितनी चंचल थी अनिकेत उतना ही शांत और समझदार लड़का था इसलिए कहा,”तुम्हारी बात ठीक है सुरभि लेकिन एक बार हमे अवनि से बात करनी चाहिए वो इस बारे में क्या सोचती है ? उसके बाद ही हमे कोई फैसला करना चाहिए। मैं तो कहूंगा कि तुम लोगो को ये पुलिस कंप्लेंट के चक्कर में नहीं पढ़ना चाहिए,,,,,अवनि की जिंदगी में पहले ही इतनी परेशानिया है और बढ़ जाएगी और यहाँ उसे देखने वाला कोई नहीं है,,,,,,,,,,,,तुम समझ रही हो ना सुरभि मैं क्या कह रहा हु
रही सिद्धार्थ की बात तो मैं उस से मिलकर समझाऊंगा कि अवनि से दूर रहे और इसके बाद भी वह नहीं माना तो मैं खुद उसके खिलाफ कंप्लेंट कर दूंगा,,,,,,,,,,लेकिन तुम्हे और अवनि को इसमें नहीं पड़ना है”
सुरभि को धीरे धीरे अनिकेत की बात समझ आ रही थी इसलिए उसने हामी में गर्दन हिलायी और कहा,”मैं समझ रही हूँ अनिकेत लेकिन अवनि को कैसे समझाऊ ? पृथ्वी उस से इतना प्यार करता है लेकिन वह पृथ्वी को कभी एक्सेप्ट नहीं करेगी और इस हादसे के बाद तो बिल्कुल नहीं करेगी”
सुरभि को उदास देखकर अनिकेत ने उसके चेहरे को अपने हाथो में थामा और उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”चिंता मत करो सुरभि , अगर अवनि के लिए पृथ्वी का प्यार सच्चा है तो देखना अवनि का दिल जरूर पिघलेगा”
हाह ! तब तक कही उस बेचारे पृथ्वी का दिल और हौंसला ही ना टूट जाए”,सुरभि ने दुखी स्वर में कहा
अनिकेत सुरभि से आगे कुछ कहता इस से पहले अवनि के कमरे का दरवाजा खुला और वह बाहर आयी। सुरभि ने उसके लिए जो कुर्ती निकाली थी वो स्लीवलेस थी। उदास सी अवनि कमरे से बाहर चली आयी तो सुरभि उसके पास आयी और जैसे ही उसकी बाँहो को थामा अवनि की आह निकल गयी
सुरभि ने देखा अवनि की एक बाँह पर नाखुनो के निशान है और घाव है तो उसने हैरानी से कहा,”ये कैसे हुआ ? तुम आओ यहाँ बैठो , मैं दवा लेकर आती हूँ”
सुरभि ने अवनि को सोफे पर बैठाया और खुद कमरे में चली गयी उसने ड्रावर से ऑइंटमेंट निकाली और लेकर हॉल में आयी , वह अवनि के बगल में आकर बैठी और उसके जख्मो पर दवा लगाते हुए कहा,”ये जरूर उस कमीने सिद्धार्थ ने किया है , हाह वो इतना बुरा कैसे हो सकता है ?”
“अवनि उसने तुम्हारे साथ कुछ गलत तो नहीं किया ना ?”,सामने बैठे अनिकेत ने कहा तो अवनि ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी। अवनि की बाँह पर लगे जख्मो को देखकर सुरभि का गुस्सा सिद्धार्थ के लिए और बढ़ गया उसने अनिकेत की तरफ देखा और गुस्से से कहा,”तो हम लोगो को अवनि के साथ गलत होने का इंतजार करना चाहिए , हमे उस कमीने के खिलाफ पुलिस कंप्लेंट कर देनी चाहिए अनिकेत”
“नहीं सुरभि ! ऐसा कुछ भी नहीं करना है”,इस बार अवनि ने कहा
“तुम पागल हो गयी हो क्या अवनि ? सिद्धार्थ ने पृथ्वी को इतनी बुरी तरह से मारा है , तुम्हारे साथ इतना बुरा बर्ताव किया और तुम कह रही हो कुछ ना करो,,,,,,,,,,वो तुम्हारे साथ कुछ भी कर सकता है समझ आ रहा है तुम्हे”,सुरभि ने गुस्से से कहा
“मैं यहाँ से चली जाउंगी,,,,,,,,,बहुत दूर चली जाउंगी , इतना दूर कि वह मुझे कभी ढूंढ ही ना पाए”,अवनि ने नम आँखों से सुरभि को देखकर कहा
अच्छा ! और कहा जाओगी तुम ? अवनि कब तक ऐसे इन सब से भागती रहोगी तुम ? हर बार खुद को दोषी मानकर कब तक खुद को तकलीफ देती रहोगी। सिद्धार्थ ने जो किया वो बहुत गलत है और अब तुम उस से डरकर ये शहर छोड़ना चाहती हो तो छोड़ दो बस मुझे इतना बता दो कि क्या ये शहर छोड़ने से तुम अपने अंदर के उस डर को निकाल पाओगी , तुम कही भी चली जाओ तुम्हारा अतीत तुम्हारे साथ जाएगा और उस अतीत के साथ जी नहीं पाओगी,,,,,,!!”,सुरभि ने गुस्से से अवनि को फटकार लगाकर कहा
“तो मैं और क्या करू सुरभि ? मेरी वजह से पृथ्वी इस हालत में है , मेरी वजह से तुम लोग परेशान हो,,,,,,,,,,,,मैं क्या करू ?”,अवनि ने कहा और उसकी आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये
अवनि के आँसू देखकर सुरभि ने उसके दोनों हाथो को थामा और कहा,”पृथ्वी से शादी कर लो अवनि,,,,,,,,सिर्फ वही है जो तुम्हे इन सारी मुश्किलों से बाहर निकाल सकता है”
अवनि ने सुना तो सुरभि की तरफ देखा और रोआँसा होकर कहा,”नहीं कर सकती सुरभि,,,,,,,,नहीं कर सकती”
“पर आखिर क्यों ! क्या कमी है उस लड़के में अवनि ? वो तुम्हे इतना चाहता है , तुम से प्यार करता है , तुम्हारे लिए इतनी दूर चला आया , पिछले 2 महीने से वो तुम्हे अपने प्यार पर यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा है , तुम्हारे लिए कुछ भी करने को तैयार है फिर तुमने क्यों अपने दिल को पत्थर बना लिया है अवनि , क्यों तुम उस से शादी करना नहीं चाहती ?”,सुरभि ने तड़पकर कहा क्योंकि अवनि के पृथ्वी का प्यार वह समझ चुकी थी।
“क्योकि मैं उसके लायक नहीं हूँ सुरभि ! उसकी फॅमिली मुझे कभी स्वीकार नहीं करेगी , एक ऐसी लड़की को कोई स्वीकार नहीं करेगा जो अपनी शादी के मंडप से उठ चुकी है , जो पहले भी किसी से प्यार कर चुकी है , उसे ना बोलकर मैं उसका दिल तो तोड़ सकती हूँ लेकिन उसे हाँ बोलकर उसके घरवालों की नफरत नहीं सह पाऊँगी , मैं उसकी फॅमिली से उसे दूर नहीं कर सकती सुरभि ,,
मुझसे शादी नहीं भी हुई तो वो बस कुछ साल दुखी रहेगा लेकिन अपने घरवालों के खिलाफ जाकर अगर उसने मुझसे शादी की तो जिंदगी भर उनकी बद्दुआ और नफरत में जियेगा और मैं ये नहीं चाहती,,,,,,,,,,,मेरी वजह से आज वो इन हालातों में है मैं उसके लिए मुसीबत बनना नहीं चाहती सुरभि,,,,,,,,,,,,,,,,प्लीज”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा
सुरभि ने सुना तो उसका दिल टूट गया , उसने अनिकेत की तरफ देखा तो पाया अवनि की बात सुनकर अनिकेत के चेहरे पर भी उदासी के भाव तैर गए है। इस वक्त अवनि का दर्द अगर कोई समझ पा रहा था तो वह थी सिर्फ अवनि , पृथ्वी को ना बोलने के पीछे वजह था अवनि का अतीत जिसे अवनि चाहकर भी भूल नहीं पा रही थी और इसी वजह से उनसे खुद को मन से इतना कमजोर बना लिया कि वह अब खुद को किसी के लायक नहीं समझती थी। सिद्धार्थ के एक धोखे ने अवनि को इतना खौफ में डाल दिया कि वह अब किसी और से मोहब्बत करने से भी डरती थी।
अनिकेत ने सुरभि से चाय बनाने का इशारा किया और खुद अवनि को समझाने लगा। अनिकेत ने पृथ्वी को लेकर कोई बात नहीं की वह अवनि को और दुखी करना नहीं चाहता था।
पैर में मोच आने की वजह से सिद्धार्थ के पैर पर गरम पट्टी बंधी थी और वह अपने कमरे में बिस्तर पर बैठा आराम कर रहा था। गुस्से में आकर सिद्धार्थ ने ऐसा कदम तो उठा लिया लेकिन अब उसे अपने किये पर पछतावा हो रहा था कि उसने अवनि के साथ ऐसा किया , इस घटना के बाद तो अवनि उस से और दूर हो जाएगी और यही सोचकर सिद्धार्थ का दिल अब बैठा जा रहा था।
गुस्से में आकर सिद्धार्थ ने पृथ्वी पर हाथ उठाया और दोस्तों के साथ मिलकर मारा क्योकि वह अवनि के साथ किसी और लड़के को बर्दास्त ही नहीं कर पाया और यही से सिद्धार्थ को समझ आया कि वह अवनि से प्यार करता है। गुस्से में आकर उसने एक बार फिर सब खराब कर दिया। सिद्धार्थ उदास सा बैठा इस बारे में सोच रहा था कि तभी चाय का कप लिए गिरिजा उसके कमरे में आयी और सिद्धार्थ को खोया हुआ देखकर कहा,”सिद्धू कहा खोये हो बेटा ? अब तुम्हारा पैर कैसा है ?”
गिरिजा की आवाज से सिद्धार्थ की तंद्रा टूटी और उसने कहा,”अभी ठीक है,,,,,,!!!”
“लो ये चाय पी लो,,,,,,,!!”,कहते हुए गिरिजा ने है का कप सिद्धार्थ की तरफ बढ़ाया और वही बिस्तर के कोने पर बैठकर उसे देखने लगी। बच्चो के चेहरे की उदासी भला एक माँ से कैसे छुप सकती है ?
सिद्धार्थ को उदास देखकर गिरिजा ने कहा,”सिद्धू ! तुम ठीक हो ना , कल शाम तुम अचानक घर से चले गए वापस आये भी तो इस हाल में , आजकल तुम बहुत चिढ़चिढ़े और गुस्से में रहते हो तो मेरी तुम से कुछ पूछने की हिम्मत भी नहीं हुई पर मैं जानना चाहती हूँ बेटा क्या तुम्हारी जिंदगी में कोई परेशानी है क्या हुआ है मुझे बताओ ?”
सिद्धार्थ ने सुना तो उसका मन और ज्यादा भारी हो गया और वह फफक पड़ा
ये देखकर गिरिजा उसके पास आयी उसके हाथ से चाय का कप लेकर साइड में रखा और उसे अपने सीने से लगाकर उसकी पीठ सहलाते हुए कहा,”सिद्धू ! क्या हुआ है बेटा ?”
“मैं उस से बहुत प्यार करता हूँ मम्मी , मैं उसे खोना नहीं चाहता,,,,,,,,मेरी कुछ गलतियों की वजह से वो मुझसे दूर हो गयी लेकिन मैं उसे जाने नहीं दे सकता। मैं अपनी पूरी जिंदगी उसके साथ बिताने के सपने देख चुका हूँ।
आज मैं जो कुछ भी हूँ सब उसकी वजह से हूँ उसके साथ की वजह से हूँ लेकिन आज वो ही मेरे साथ नहीं है,,,,,,,,मैं अवनि से बहुत प्यार करता हूँ , बहुत प्यार करता हूँ उस से”,रोते हुए सिद्धार्थ ने गिरिजा के सामने अपने मन का हाल बया कर दिया। अब तक वह झूठे घमंड और गुस्से में जी रहा था लेकिन अब जाकर उसे समझ आया कि वह अवनि के बिना नहीं रह सकता , अवनि ही उसकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट है और वही उसे बदल सकती है।
गिरिजा और जगदीश जी अवनि को जानते थे क्योकि अवनि सिद्धार्थ के साथ एक बार उनसे मिल चुकी थी और उन्हें अवनि बहुत पसंद भी आयी थी। उसकी सादगी , उसकी मासूमियत , उसका हसमुख चेहरा और भोलापन गिरिजा को भा गया था बस वे ये नहीं जानती थी कि सिद्धार्थ अवनि से प्यार करता है। सिद्धार्थ ने अवनि को अपने माँ-बाप से बस एक दोस्त की तरह मिलवाया था। अवनि के लिए सिद्धार्थ की भावनाये जानकर गिरिजा को एक सुकून मिला और ख़ुशी का अहसास हुआ
लेकिन साथ ही वह सिद्धार्थ के लिए उदास भी थी और उसका सर सहलाते हुए कहा,”शांत हो जाओ सिद्धू ! तुम्हे तुम्हारी गलती का अहसास हो गया देखना अवनि को भी तुम्हारे प्यार का अहसास जरूर होगा और वह तुम्हे माफ़ भी कर देगी,,,,,,,,,वह बहुत अच्छी लड़की है , वो तुम्हारा दिल नहीं तोड़ेगी , मैं बात करुँगी उस से , समझाउंगी उसे , वो मेरी बात कभी नहीं टालेगी,,,,,,,,,अवनि इस घर में बहु बनकर जरूर आएगी,,,,,,,,!!!”
गिरिजा की बात सुनकर सिद्धार्थ को थोड़ी राहत मिली उसने उनकी गोद में सर रख लिया और अवनि के बारे में सोचने लगा। अवनि के साथ उसने जो भी बुरा बर्ताव किया वह उसे अब रह रह कर याद आ रहा था साथ ही याद आ रहा था अवनि का अच्छा बर्ताव जो उसने हमेशा सिद्धार्थ के साथ किया था और यही से सिद्धार्थ की भावनाये अवनि को लेकर बदलने लगी।
अवनि की तबियत ठीक नहीं थी और सुरभि उसे इस हाल में छोड़कर ऑफिस जाना नहीं चाहती थी लेकिन आज उसका पोस्ट ऑफिस में पहला दिन था और अनिकेत नहीं चाहता था सुरभि पहले ही दिन ऑफिस से छुट्टी ले। वह अवनि के साथ फ्लेट पर रुक गया और सुरभि को ऑफिस भेजा , अवनि के बैंक मैनेजर से बात करके अनिकेत ने उन से भी दो दिन की छुट्टी ले ली और खुद दिनभर अवनि के साथ रहा। दोपहर का खाना अनिकेत ने बाहर से आर्डर कर दिया और मुश्किल से अवनि को खिलाया।
अवनि बार बार अपना फोन देख रही थी लेकिन पृथ्वी का ना कोई मैसेज था ना ही फोन , होता भी कैसे उसका फोन स्विचऑफ करके लता ने अपने पर्स में रख दिया और रास्ते भर पृथ्वी सोता रहा। अनिकेत ने अपने कॉलेज से 2 दिन की छुट्टी ली थी इसलिए उसने 2 दिन सिरोही में ही रुकने का फैलसा किया ताकि हालात सम्हल जाए।
26 घण्टे बाद पृथ्वी मुंबई पहुंचा। लता और रवि जी उसे अपने घर ले आये और घर आकर पृथ्वी ने देखा कि पूरा खानदान वहा जमा है। सभी पृथ्वी से उसकी तबियत के बारे में पूछने लगे और कुछ ने उसे डाँट भी लगाई। पृथ्वी की बड़ी मम्मी ने हिमांशु से कहकर पृथ्वी को उसके कमरे में लेटा दिया। सभी पृथ्वी से मिले और फिर उसे आराम करने का कहकर बाहर चले आये। रवि जी ने बच्चो को घर भेज दिया और हिमांशु से भी घर जाकर आराम करने को कहा। घर के हॉल में रवि जी , लता , पृथ्वी के बड़े पापा-बड़ी मम्मी , चाचा-चाची और नीलम भुआ मौजूद थे
और एक दूसरे से बाते करते हुए सभी यही समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर पृथ्वी राजस्थान क्यों गया ? पृथ्वी से अभी ये सब पूछकर घरवाले उसे परेशान करना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने पृथ्वी के ठीक होने तक इस बार को यही छोड़ने का फैसला किया और फिर सभी अपने अपने घर चले गए। पृथ्वी को खाना खिलाकर लता ने उसे दवाईया दी और पृथ्वी सो गया।
अवनि से उसकी अभी तक कोई बात नहीं हुई थी। पृथ्वी को अवनि का ख्याल था लेकिन वह इस हालत में नहीं था कि उस से बात कर पाए। दवाईयों के असर से पृथ्वी दिन रात नींद में था जिस से जल्दी रिकवर हो सके। नकुल को जब पता चला तो वह उसी शाम घबराया हुआ पृथ्वी से मिलने उसके घर आया लेकिन पृथ्वी सो रहा था। पृथ्वी को इस हाल में देखकर नकुल को बहुत दुःख हुआ
उतरा हुआ चेहरा लेकर जब वह बाहर आया तो रवि जी ने कहा,”नकुल तुम पृथ्वी के अच्छे दोस्त हो , पृथ्वी तुम से कुछ नहीं छुपाता ये बताओ पृथ्वी राजस्थान क्यों गया था ?
रवि जी के मुँह से “राजस्थान” का नाम सुनकर नकुल खामोश हो गया और सर झुका लिया ,उसके पास बोलने को कुछ नहीं था।
( क्या अवनि अपनाएगी पृथ्वी को या हमेशा के लिए पीछे ले लेगी अपने कदम ? क्या अवनि के लिए बदलने लगी है सिद्धार्थ की भावनाये या फिर चल रहा है वो कोई नयी चाल ? क्या नकुल बताएगा रवि जी को पृथ्वी के राजस्थान जाने की सच्चाई ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Aery yr Prithvi to Mumbai bhi pahuch gaya aur uski Avni se bhi koi baat nhi Hui hai, aur ab nikal usko dekhne aaya hai…esa na ho ki Nakul Prithvi k ghar walo k samne apna muh khol de… waise esi umeed to Kam hee hai…aur idhar Avni ko Prithvi ki halat k liye khud ko zimmedar samaj rhi hai…uske liye dukh ho rha hai…wo sach m kitni akele hai…aur kamzor bhi…wo to shukr hai bhagwan ki Avni k pass Surbhi aur Aniket jaise dost hai…aur ab badtameez insaan Siddharth ko apne kiye pe afsos ho rha hai…aur ab usko Avni se pyar ka ehsas hua hai…wha bhiii pitai-cihati k baad yaad aaya ki I love Avni…aur ab wo badlega… aur upar se mata ji bhi Avni ko bahu k roop m sweekar kar rhi hai…but ab der ho chuki hai Siddharth babu… Avni to abhi iss halat m bhi nhi hai… Mahadev jaldi se Avni aur Prithvi ki baat karwaye