Pasandida Aurat – 82
Pasandida Aurat – 82

सिटी हॉस्पिटल के 1st फ्लोर पर बने प्राइवेट रूम के बाहर बेंच पर बैठी अवनि रोये जा रही थी। अवनि के सामने बैठी सुरभि उसे चुप करवाने की कोशिश कर रही थी। सुरभि ने अवनि का चेहरा अपने हाथो में लिया और कहा,”अवनि , अवनि शांत हो जाओ और मुझे बताओ हुआ क्या था ? मैं तुम्हे और पृथ्वी को साथ छोड़कर गयी थी फिर ये सब कैसे और कब हुआ ?”
अवनि ने खुद को सम्हाला और सुरभि को सारी बात बता दी , सुरभि ने सुना तो हैरानी से उसकी आँखे फ़ैल गयी सिद्धार्थ इतना घटिया निकलेगा सुरभि ने कभी सोचा नहीं था। सुरभि ने अवनि के आँसू पोछे और पास पड़ी पानी की बोतल उसकी तरफ बढ़ा दी लेकिन अवनि ने पानी नहीं पीया और बोतल साइड में रखकर रोते हुए कहने लगी,”सब मेरी वजह से हुआ है सुरभि , सब मेरी गलती है। ना पृथ्वी यहाँ आता और ना उसके साथ ये सब होता,,,,,,,,तुम सिद्धार्थ को नहीं जानती सुरभि , मेरी वजह से वो पृथ्वी को नुकसान पहुचायेगा,,,,,,,,,
मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी सुरभि , मुझे पृथ्वी को कभी अपनी जिंदगी में आने ही नहीं देना चाहिए था,,,,,,,,,सब मेरी गलती है , आज मेरी वजह से वो इस दर्द इस तकलीफ में है ,, मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगी सुरभि , कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगी”
सुरभि ने सुना तो परेशान हो गयी , अवनि जो कुछ हुआ उसके लिए खुद को जिम्मेदार मान रही थी। वह पहले ही पृथ्वी के प्यार को नहीं स्वीकार कर रही थी और इस हादसे के बाद तो वह कभी नहीं चाहेगी पृथ्वी उसकी जिंदगी में आये और सिद्धार्थ की नफरत का शिकार बने।
सुरभि जानती थी कि इस वक्त अवनि को कुछ भी समझाना मुश्किल है इसलिए उसने अवनि को अपने सीने से लगाया और शांत किया। सुरभि के सीने से लगी अवनि काफी देर तक सिसकती रही , उसकी आँखों के सामने रह रह कर आज पृथ्वी के साथ बिताये पल आ रहे थे , आज अवनि के साथ पृथ्वी कितना खुश था और जैसे ही उसे स्टेशन वाले पल याद आते अवनि सहम जाती और फिर से रो पड़ती। सुरभि ने आज से पहले अवनि को इतना कमजोर कब ही कभी नहीं देखा था। वह घंटो अवनि के साथ वही बैठी रही।
पृथ्वी को होश आया लेकिन इंजेक्शन के असर से वह फिर सो गया , सुरभि ने अंदर जाकर पृथ्वी को देखा लेकिन अवनि में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह जाकर पृथ्वी को उस हाल में देख सके वह बाहर ही बैठी रही। सुरभि बाहर आयी तो उसका उदास चेहरा देखकर अवनि समझ गयी कि पृथ्वी को बहुत ज्यादा चोट लगी है।
अवनि उठी और जाने लगी तो सुरभि ने उसे रोककर कहा,”कहा जा रही हो अवनि ?”
अवनि ने उसी हॉस्पिटल में सामने बने मंदिर की तरफ इशारा किया तो सुरभि ने उसका हाथ छोड़ दिया। अवनि थके कदमो से मंदिर के सामने चली आयी जहा महादेव के साथ माँ पार्वती की मूर्ति थी। अवनि बदहवास हालत में उनके सामने आयी , उसके चेहरे पर उदासी थी और आँखों में आँसू भरे थे। अवनि ने अपने हाथो को जोड़ा और महादेव को देखते हुए मन ही मन पृथ्वी के ठीक होने की प्रार्थना करने लगी।
बेंच पर बैठी सुरभि बस खाली आँखों से अवनि को देख रही थी। अवनि का दर्द वह समझ रही थी और सबसे ज्यादा उसे सिद्धार्थ पर गुस्सा आ रहा था जिसने अवनि और पृथ्वी के साथ ऐसा बर्ताव किया था। अवनि काफी देर तक मंदिर के सामने खड़ी रही तभी अनिकेत वहा पहुंचा। अनिकेत को वहा देखकर सुरभि को थोड़ी राहत मिली। अनिकेत सुरभि के पास आया और उसे गले लगाकर कहा,”तुम ठीक हो न सुरभि अवनि कहा है और वो लड़का , क्या वो अब ठीक है ?”
“मैं ठीक हूँ , पृथ्वी भी ठीक है लेकिन , लेकिन अवनि ठीक नहीं है”,सुरभि ने उदासी भरे स्वर में कहा और मंदिर की तरफ इशारा कर दिया जहा अवनि खड़ी ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी।
अनिकेत ने अवनि को इस हाल में देखा तो उसे बहुत दुःख हुआ , अनिकेत से अवनि के हालात छुपे नहीं थे और वह भी सुरभि की तरह अवनि का अच्छा दोस्त था। अनिकेत ने सुरभि से वही रुकने को कहा और खुद अवनि के पास चला आया। अवनि के पास आकर उसने उसके कंधे पर हाथ रखा और धीरे से कहा,”अवनि,,,,,,,,,,,तुम ठीक हो ?”
अवनि ने बगल में खड़े अनिकेत को देखा तो उसकी आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये ये देखकर अनिकेत ने आगे बढ़कर उसे गले लगाया और उसका सर सहलाते हुए कहा,”सब ठीक हो जाओ , मैं और सुरभि है ना तुम्हारे साथ घबराओ मत”
अनिकेत ने अवनि को बहुत समझाया और शांत करके उसे बेंच की तरफ ले आया। उसने अवनि को बैठाया और कलाई पर बंधी घडी में समय देखकर कहा,”सुरभि ! रात बहुत हो गयी है , तुम अवनि को लेकर घर जाओ पृथ्वी के पास मैं रुक जाता हूँ”
“नहीं मैं कही नहीं जाउंगी , जब तक उसे होश नहीं आ जाता , मैं उस से बात नहीं कर लेती मैं कही नहीं जाउंगी,,,,,,,,,!!”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा
“अवनि पागल मत बनो ! पृथ्वी की फॅमिली किसी भी वक्त यहाँ आती होगी उन्होंने अगर तुम्हे यहाँ देखा तो प्रॉब्लम बढ़ जाएगी,,,,,,,सुरभि के साथ घर जाओ , जैसे ही पृथ्वी को होश आएगा मैं उस से बात करूंगा और तुम्हे बुला लूंगा”,अनिकेत ने अवनि के सामने बैठकर उसे समझाते हुए कहा लें अवनि ने अनिकेत की एक नहीं सुनी और आख़िरकार सुरभि बोल पड़ी,”अनिकेत ! इसे यही रुकने दो , ये नहीं जा पायेगी,,,,,,,,,!!”
“हम्म्म्म लेकिन पृथ्वी की फॅमिली से क्या कहेंगे ? वो लोग कही अवनि को गलत ना समझ ले”,अनिकेत ने कहा
“मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा अनिकेत सब कितना सही था और एकदम से ये सब,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने उदास होकर कहा
“ये सब छोडो और ये बताओ तुम दोनों ने कुछ खाया या नहीं , मैं नीचे जाकर तुम दोनों के लिए कुछ ले आता हूँ”,अनिकेत ने कहा और वहा से चला गया।
सुरभि वापस बेंच पर आ बैठी , बगल में बैठी अवनि का सर उसने अपने कंधे पर रख लिया और उसका सर थपथपाने लगी।
अनिकेत खाना लेकर आया लेकिन अवनि ने एक निवाला तक नहीं खाया , सुरभि ने मुश्किल से उसे चाय पिलाई और फिर अपनी ने अपना सर दिवार से लगाकर अपनी आँखे मूँद ली। आँखों में भरे आँसू बहकर कनपटी से होकर रिसने लगे। सुरभि अवनि को इस हाल में नहीं देख पा रही थी इसलिए दुखी होकर वहा से खिड़की की तरफ चली आयी। अनिकेत भी सुरभि की तरफ आया तो सुरभि ने उदास होकर उसे सारी बाते बता दी।
अनिकेत ने सुना तो उसे भी अवनि के लिए बहुत दुःख हुआ और उसने कहा,”ईश्वर ने क्या सारे दुःख अकेली अवनि की जिंदगी में लिख दिए है ? मतलब वो इतनी अच्छी है फिर भी उसके साथ ये सब,,,,,,,,,,,सोचकर ही कितना अजीब लग रहा है”
“अच्छे लोगो के साथ ही सबसे ज्यादा बुरा होता है अनिकेत , अब तक अपनी जिंदगी में कितने दुःख देखे है उसने और अब जब उसकी जिंदगी में ख़ुशी का एक पल आया तो किस्मत ने उस से वो भी छीन लिया,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने कहा
“लेकिन अवनि पृथ्वी का प्यार एक्सेप्ट क्यों नहीं कर रही है ? उसे सिद्धार्थ को भूलकर पृथ्वी के साथ अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाना चाहिए,,,,,,,,!!!”,अनिकेत ने कहा तो सुरभि अवनि की तरफ देखने लगी और दुखी स्वर में कहा,”वो पृथ्वी को स्वीकार नहीं करेगी अनिकेत , अब तक इतना झेल चुकी है अपनी जिंदगी में कि एक पृथ्वी तो क्या 10 पृथ्वी भी उसके दिल में फिर से मोहब्बत नहीं जगा पाएंगे,,,,,,,,,उसने मोहब्बत में धोखा खाया है अनिकेत , रिश्तो का सबसे बदसूरत चेहरा देखा है वो इतनी आसानी से किसी को अपनी जिंदगी में नहीं आने देगी,,,,,,
मैं जानती हूँ उसे भी पृथ्वी से मोहब्बत है लेकिन वो उसे कभी कहेगी नहीं , तड़पती रहेगी उसे दर्द में देखकर लेकिन कभी मानेगी नहीं कि वो उसे चाहती है,,,,मोहब्बत का एक नया ही रूप देख रही हूँ मैं जिसमे एक बेइंतहा मोहब्बत कर रहा है और दुसरा उस से दूर भाग रहा है क्योकि वो फिर से मोहब्बत में टूटना नहीं चाहता,,,हाह ! पता नहीं ये दोनों कभी साथ होंगे भी या नहीं”
कहते कहते सुरभि भावुक हो गयी उसे अपने गले में कुछ चुभता हुआ सा महसूस हो रहा था , वह आगे नहीं बोल पायी और नम आँखों से बाहर देखने लगी। अनिकेत अवनि को लेकर सुरभि की भावनाये समझ रहा था इसलिए उसके कंधो पर अपनी बाँह रखी और कहा,”चिंता मत करो सुरभि अवनि के महादेव ने अगर इन्हे मिलाया है तो उन्होंने इन दोनों की किस्मत में इनका साथ होना भी लिखा ही होगा , देखना एक दिन सब ठीक हो जायेगा”
अनिकेत की बातो ने सुरभि को थोड़ी हिम्मत दी , उसने अपनी आँखे पोछी और अपना सर अनिकेत के कंधे पर टिका दिया।
रातभर अवनि , सुरभि और अनिकेत जागते रहे। सुबह होते होते अवनि की आँख लग गयी , रोने से उसकी आँखे सूजकर लाल हो चुकी थी। सुरभि और अनिकेत जाग रहे थे। अनिकेत चाय लेने चला गया। पृथ्वी दवाओं और इंजेक्शन के असर से रातभर सोता रहा सुबह उसकी आँख खुली तो उसने खुद को हॉस्पिटल के बिस्तर पर पाया ,
पृथ्वी को सहसा ही अवनि का ख्याल आया और उसके चेहरे के भाव बदल गए वह गुस्से से जैसे ही उठने को हुआ उसे महसूस हुआ कि उसके पैर और एक हाथ की कलाई में प्लास्टर है , दूसरे हाथ में ड्रिप लगी है और ऊँगली में मॉनिटर लगा है। पृथ्वी चाहकर भी उठ नहीं पाया , उसे अभी भी दर्द महसूस हो रहा था मजबूर होकर वह वापस लेट गया।
अवनि की आँख लगी ही थी कि तभी शोरगुल हुआ और वह नींद से जाग उठी , सामने से कुछ लोग घबराये हुए से चले आ रहे थे जिन्हे अवनि नहीं जानती थी।
2 आदमी , 2 औरते , एक अवनि का हमउम्र लड़का अवनि के सामने से होकर उस कमरे में चले गए जिसमे पृथ्वी था। अवनि कुछ समझ नहीं पायी तभी सुरभि ने उसके पास आकर कहा,”ये लोग शायद पृथ्वी के घरवाले है,,,,,,!!”
अवनि ने सुना तो उसके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये और वह अपनी उंगलियों को तोड़ने मरोड़ने लगी ये देखकर सुरभि ने कहा,”घबराओ मत कुछ नहीं होगा,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी को होश आ चुका था और उसने जब अपने घरवालों को देखा तो हैरानी से कहा,”आप लोग यहाँ क्या कर रहे है ?”
पृथ्वी ने देखा उसके बड़े पापा , रवि जी , लता , नीलम भुआ और हिमांशु भैया कमरे में खड़े है। लता ने जब पृथ्वी को इस हाल में देखा तो फफक कर रो पड़ी। नीलम भुआ ने उन्हें सम्हाला।
“मेरे पास यहाँ से फोन गया था कि तुम्हारे साथ कोई हादसा हुआ है , हम सब तो घबरा ही गये थे,,,,,,,,,ये सब कैसे हुआ और तुम , तुम राजस्थान में क्या कर रहे हो तुमने तो अपनी आई से कहा था कि तुम ऑफिस की मीटिंग के लिए पुणे जा रहे हो फिर यहाँ और ये सब,,,,,,,,,,,पृथ्वी तुम हम सबसे कुछ छुपा रहे हो क्या ? तुम्हे पता है घर में सब कितना घबरा गए थे,,,,,,,,!!”,रवि जी ने पूछा
“शांत हो जाओ रवि , तुम देख रहे हो न वो पहले से तकलीफ में है,,,,,,,,ये सब बाते घर चलकर करेंगे,,,,,,,!!”,बड़े पापा ने रवि जी को शांत करके कहा और हिमांशु की तरफ पलटकर बोले,”हिमांशु ! डॉक्टर से मिलकर पृथ्वी के डिस्चार्ज पेपर बनवाओ और फिर गाडी का इंतजार करो ,, हम इसे लेकर मुंबई जायेंगे”
“जी पापा”,कहकर हिमांशु कमरे से बाहर निकल गया। उसने एक नजर कमरे के बाहर बैठी अवनि और सुरभि को देखा और आगे बढ़ गया। पृथ्वी के अलावा उसके घर में कोई नहीं जानता था कि पृथ्वी की जिंदगी में कोई लड़की भी है जिसके लिए वह इतनी दूर चला आया।
अपने बड़े पापा के मुँह से मुंबई का नाम सुनकर पृथ्वी को अवनि का ख्याल आया , बीती शाम के बाद उसने अवनि को नहीं देखा था ना ही वह जानता था कि अवनि कहा है और किस हाल में है इसलिए उसने कहा,”मुझे मुंबई नहीं जाना,,,,,,,,,,,!!!”
“मुंबई नहीं जाना मतलब ? तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है पृथ्वी ?”,इस बार नीलम भुआ ने पृथ्वी की तरफ आकर कहा जिन्हे काफी दिनों से पृथ्वी पर थोड़ा थोड़ा शक था।
“मुझे आप लोगो से कुछ बात करनी है,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा तो लता उसके पास आयी और कहा,”चुप , बिल्कुल चुप कुछो नहीं बोलोगे तुम ,, चुपचाप घर चलो और जो बात करनी है वहा करना,,,,,तुम्हे इस हाल में देखकर मेरा तो दिल बैठा जा रहा है। अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो,,,,,,,,,!!”
कहते हुए लता ने उंगलियों को अपने होंठो से लगा लिया और फिर रो पड़ी।
“लता सम्हालो अपने आप को , भगवान की दया से पृथ्वी ठीक है उसे ज्यादा गंभीर चोट नहीं आयी है”,बड़े पापा ने कहा
पृथ्वी के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये उसे समझ नहीं आ रहा था वह अपने घरवालों को अवनि के बारे में कैसे बताये और क्या बताये ? उसे इस वक्त अवनि की फ़िक्र हो रही थी वह बस एक बार उसे देखना चाहता था , वह जानना चाहता था कि अवनि ठीक है या नहीं ?
काफी देर बाद हिमांशु आया और बताया कि उसकी डॉक्टर से बात हो चुकी है और वे लोग पृथ्वी को घर ले जा सकते है। बड़े पापा के कहने पर रवि जी हिमांशु के साथ हॉस्पिटल का बिल भरने नीचे चले आये। उन्होंने बिल भरा मेडिकल फाइल और जरुरी दवाईया ली और वापस ऊपर चले आये। हॉस्पिटल का स्टाफ पृथ्वी के लिए व्हील चेयर ले आया। अनिकेत को जब पता चला कि पृथ्वी के फॅमिली वाले आये है तो उसने अवनि और सुरभि से चुप रहने को कहा ताकि कोई प्रॉब्लम ना हो , हालाँकि पृथ्वी के परिवार वाले अवनि को जानते भी नहीं थे इसलिए उन्होंने अवनि पर ध्यान नहीं दिया।
हिमांशु ने सहारा देकर पृथ्वी को व्हील चेयर पर बैठाया और वार्ड बॉय उसे लेकर कमरे से बाहर निकल गया। अवनि बगल में खड़ी थी लेकिन पृथ्वी ने उसे देखा ही नहीं , उसने सर झुका रखा था और वह वहा से जाना नहीं चाहता था। अवनि ने पृथ्वी को देखा तो उसका मन भारी हो गया और वह पृथ्वी की इस हालत का जिम्मेदार खुद को मानने लगी। लिफ्ट के सामने आकर वार्ड बॉय रूक गया , रवि जी , लता , नीलम भुआ और बड़े पापा सीढ़ियों से नीचे जाने के लिए आगे बढ़ गए पृथ्वी के साथ हिमांशु खड़ा था।
पृथ्वी उदास आँखों से लिफ्ट के बंद दरवाजो को देख रहा था और हिमांशु फोन पर बाकि घरवालों को पृथ्वी के बारे में बता रहा था। अवनि सुरभि के साथ खड़ी पृथ्वी को देख रही थी और धीरे से रोआँसा होकर कहा,”उसने मुझे देखा तक नहीं सुरभि,,,,,,,क्या वो मुझसे नाराज है , मुझसे नफरत करने लगा है ?”
सुरभि कुछ कहती इस से पहले पृथ्वी ने धीरे से अपने बाँयी तरफ गर्दन घुमाई और अवनि को देखा।
जैसे ही अवनि की नजरे पृथ्वी से मिली अवनि का दिल धड़क उठा और उसकी आँखों में आंसू भर आये जिन्हे देखकर पृथ्वी ने मन ही मन खुद से कहा,”जानता हूँ मैडम जी ! आप सोच रही होंगी कि मैंने आपको देखा क्यों नहीं , कही मैं आपसे नाराज तो नहीं ? मैं खुद से नाराज हो सकता हूँ लेकिन आपसे नहीं,,,,,,,,,,और ये भी जानता हूँ कि आप रातभर यही बैठकर मेरे लिए अपने महादेव से प्रार्थना कर रही थी,,,,,,,,आपके महादेव ने आपकी सुन ली मैडम जी,,,,,,,,,,!!!”
क्या सुरभि सिद्धार्थ के खिलाफ उठाएगी कोई कठोर कदम ? क्या अवनि कर पाएगी खुद को माफ़ या समझती रहेगी खुद को पृथ्वी की हालत का जिम्मेदार ? क्या होगा पृथ्वी के घरवालों का रिएक्शन जब वो जानेंगे पृथ्वी के राजस्थान में होने की असली वजह ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ
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संजना किरोड़ीवाल


Aery yeh to bilkul nhi socha tha ki Prithvi Avni se bina koi baat kiye Mumbai chala jayega…aur ab to Avni khud Prithvi ki iss halat ka zimmedar manene legegi…yeh nhi hona chahiye tha…kam se kam mil to late yeh dono…khar ab kya bole…but Sanjana ji please iss Siddharth ki tagdee wali class kab lagegi…isne itna ganda behave Kiya hai Avni k sath… Avni ko torcher kiya…kuch to Siddharth k liye bhi dawa ka intezaam hona chahiye…taki hum readers ko bhi thodi Shanti mil sake… please ab Avni k sath koi atyachar mat kijiyega…wo bahut gum m hai Sanjana ji….
Next chapter de dijiye pls Mam