Pasandida Aurat – 66

Pasandida Aurat – 66

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी के सामने बैठी विशाखा ख़ामोशी से एकटक उसे देख रही थी। पृथ्वी चाहकर भी अवनि को अपने दिल से नहीं निकाल पा रहा था। लता के कहने पर वह विशाखा से मिलने तो आ गया लेकिन यहाँ आकर भी उसे अवनि की ही याद आ रही थी। पृथ्वी का जवाब सुनकर विशाखा ने कहा,”अगर आप पहले से किसी को पसंद करते है तो फिर आपने यहाँ आने के लिए हाँ क्यों की ?”

“क्योकि मैं आपका दिल नहीं तोड़ना चाहता था , सोचा मिलकर आपको सच बता दूंगा और आपसे माफ़ी भी माँग लूंगा। ये फूल मैं इसीलिए लेकर आया था ताकि आप इन्हे लेकर इस फूल को माफ़ कर दे,,,,,,,,,,आई ऍम सो सॉरी बट मैं उसके अलावा किसी और साथ खुश नहीं रह पाऊंगा”,पृथ्वी ने अपनी तरफ इशारा करके कहा
पृथ्वी की बात सुनकर विशाखा मुस्कुराई और कहा,”सच कहू तो आप मुझे बहुत अच्छे लगे और वो लड़की भी बहुत लकी है जिस आप पसंद करते है। इन फूलों
के लिए थैंक्यू , मैं घरवालों से कहकर ये रिश्ता केंसल कर दूंगी”

पृथ्वी ने सुना तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा उसने आँखों में चमक भरकर कहा,”आप सच कह रही है ?”
“हाँ , मैं कह दूंगी लड़का मुझे पसंद नहीं आया”,विशाखा ने कहा और हंस पड़ी तो पृथ्वी भी हसने लगा। दोनों कुछ देर वही रुके बातें की और फिर साथ साथ कैफे से बाहर चले आये। पृथ्वी ने उस से हाथ मिलाया और उसे अलविदा कहा तो विशाखा जाते जाते रुकी और पृथ्वी की तरफ पलटकर कहा,”पृथ्वी ! अगर अभी मन बदले तो मुझे जरूर बताना”

पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”मैं कभी नहीं चाहूंगा आप मेरा इंतजार करे , मैं अपनी पूरी जिंदगी उसके नाम कर चुका हूँ वो नहीं भी मिली तब भी मैं सिर्फ उसका ही होकर रहूंगा”
विशाखा मुस्कुराई और वहा से चली गयी। पृथ्वी ने अपने बालों में से दोनों हाथो को घुमाया और आसमान की तरफ देखकर कहा,”थैंक्यू ! बहुत सही टाइम पर बचा लिया आपने मुझे , बट इसका मतलब ये नहीं है कि हमारी आपस में बनने लगी है”

पृथ्वी को बहुत ही हल्का महसूस हो रहा था। वह सड़क पार कर ऑफिस चला आया। पृथ्वी सभी जरुरी काम भी निपटा चूका इसलिए अपना बैग उठाया और घर जाने के लिए निकल गया। स्टेशन पर आकर उसने अपनी ट्रेन पकड़ी और हमेशा की तरह गेट के पास खड़ा हो गया। पिछले 36 घंटो में वह खुद को बहुत रोक चुका था इसलिए अपना फोन निकाला और अवनि को मैसेज करने लगा लेकिन जैसे ही चैट खोली अवनि दिखाई नहीं दी। पृथ्वी उलझन में पड़ गया और कुछ वक्त बाद उसे समझ आया कि अवनि ने उसे ब्लॉक कर दिया है।  

पृथ्वी मायूस हो गया हालाँकि गलती उसी की थी उसने आखरी बार अवनि को जो मैसेज किया था उसके बाद भला अवनि उस से बात करना क्यों चाहेगी ? पृथ्वी को कैसे भी करके अवनि से बात करनी थी इसलिए उसने गूगल पर अवनि से कॉन्टेक्ट करने के लिए उसका नंबर , अड्रेस , दूसरे सोशल साइट देखे लेकिन इनमे से उसे कुछ नहीं मिला। काफी देर बाद उसे अवनि की Gmail Id दिखाई दी और पृथ्वी को उम्मीद की एक किरण नजर आयी। उसने अवनि के लिए मेल लिखा और भेज दिया और फोन जेब में रख लिया।

सिरोही , राजस्थान
रात का खाना बनाने के लिए अवनि किचन में आयी और सब्जिया निकालने के लिए फ्रीज खोला तो नजर सामने रखी गंवार फली पर चली गयी और सहसा ही अवनि को पृथ्वी की याद आ गयी। अवनि के कहने पर उसने वो भी खाया जो वह कभी खाना पसंद नहीं करता था। अवनि का मन उदास हो गया कोई आज दूसरा दिन था और अवनि की उस से कोई बात नहीं हुई थी। अवनि ने बुझे मन से फली को निकाला और धोकर उन्हें साफ करके उबलने के लिए गैस पर चढ़ा दिया।

अवनि ने अपने लिए खाना बनाया और हाथ धोकर जैसे ही हॉल की तरफ आयी उसका फोन बजा। ना जाने क्यों अवनि के मन में एक उम्मीद जगी कि फोन पृथ्वी का होगा और वह जल्दी जल्दी अपने हाथ पोछते हुए टेबल की तरफ आयी। स्क्रीन पर सुरभि का नाम देखकर अवनि का मन फिर उदास हो गया। अवनि ने फोन उठाया और कान से लगाया तो दूसरी तरफ से सुरभि की खुशी भरी आवाज उभरी,”हेलो हेलो हेलो साहिबान कद्रदान मेहरबान मेरी जान ज़रा ध्यान से सुने,,,,,,,,,,आपकी उदासी हमेशा के लिए दूर होने वाली है क्योकि,,,,,,,,,,,,!!”

“क्योकि ?”,अवनि ने हैरानी से कहा
“क्योकि उदयपुर की शान मिस सुरभि शर्मा अपनी नौकरी के लिए आपके शहर आ रही है”,सुरभि ने कहा
अवनि ने सुना तो ख़ुशी से उसका चेहरा खिल उठा और उसने कहा,”क्या तुम सच कह रही हो ? तुम तुम सच में सिरोही आ रही हो ?”

“हाँ अवनि मैं अगले महीने मैं सच में वहा आ रही हूँ , मैंने पोस्ट ऑफिस की वैकेंसी के लिए 6 महीने पहले जो एग्जाम दी थी उसमे मैं पास हो गयी हूँ एंड देखो मुझे नौकरी मिली भी तो कहा तुम्हारे शहर में,,,,,,,,,,,,,अब तुम अकेली नहीं हो तुम्हारी ये दोस्त तुम्हारे साथ रहेगी,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह्हह मैं तो बहुत एक्साइटेड हूँ और मैंने पापा से कह दिया है कि मैं तुम्हारे साथ रहूंगी”,सुरभि ने अवनि को खुशखबरी सुनाते हुए कहा

पुरे दो दिन बाद आज अवनि खुश थी और मुस्कुरा रही थी। उसने सुरभि को बधाई दी और कहा,”मैं तुम्हारे लिए बहुत खुश हूँ सुरभि , तुम यहाँ आ जाओगी तो मुझे खुद को सम्हालने की हिम्मत मिल जाएगी”
 “अवनि तुम अभी तक उस चिलगोजे की याद में खुद को उदास कर रही हो , मुझे लगा तुम उसे भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी होंगी।”,सुरभि ने कहा

“ये सब इतना आसान नहीं है सुरभि , मेरी अब उस से बात नहीं होती ना मैं कभी उस से मिलना चाहती हूँ लेकिन वो यादें मुझे बार बार तकलीफ देती है,,,,,,,,,,और इसके साथ अकेले खुद को सम्हालना बहुत मुश्किल हो जाता है”,अवनि ने उदासी भरे स्वर में कहा  
सुरभि ने सुना तो उसके चेहरे पर उदासी के भाव तैर गए। वह अवनि का दर्द समझ सकती थी , पहले अवनि घरवालों की तरफ से ठुकराई गयी और फिर जब उसने सिद्धार्थ पर भरोसा किया तो उसने भी उसे हर्ट किया।

सुरभि ने कहा,”अवनि ! तुम्हे इस बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए , जो हुआ उसे बुरा सपना समझकर भूल जाओ ,, वैसे भी महादेव ने तुम्हारी जिंदगी में बेहतर लिखा है और सिद्धार्थ वो बेहतर नहीं था ,, इंतजार करो तुम्हारी जिंदगी में सही इंसान आएगा और जरूर आएगा जो तुम्हे प्यार करेगा , तुम्हारी रिस्पेक्ट करेगा , तुम्हारे लिए एफ्फोर्ट्स करेगा , तुम्हे दुनिया की हर ख़ुशी देगा , बस सही वक्त का इंतजार करो बाकि मैं आ रही हूँ ना मैं सब ठीक कर दूंगी ह्म्म्मम्म”

सुरभि की बातें सुनकर अवनि की आँखों के सामने पृथ्वी का चेहरा आने लगा और उसने कहा,”सुरभि ! मुझे तुम्हे कुछ बताना है”
“वो मैं डायरेक्ट सिरोही आकर सुनूंगी , लास्ट टाइम उस गधे सिद्धार्थ के बारे में फोन पर सुना और तुम्हे गलत एडवाइज दे दी पर इस बार नहीं , दो हफ्ते अवनि उसके बाद मैं सिरोही आ रही हूँ उसके बाद तुम इत्मीनान से मुझे सब सुनाना मैं जरूर सुनूंगी”,सुरभि ने कहा
“हम्म्म्म ठीक है,,,,,,,,,,मैं तुम्हारा इंतजार करुँगी”,अवनि ने प्यार से कहा

“ओह्ह्ह्ह अवनि ऐसे मत कहो , इतने प्यार से कहोगी तो मैं कही अनिकेत को छोड़कर तुम से ही शादी ना कर लू”,सुरभि ने कहा तो अवनि हसने लगी और कहा,”अगर तुमने ऐसा किया तो अनिकेत पुरे उदयपुर को अपने सर पर उठा लेगा”
“हाहाहा फिलहाल तो वो मेरे नखरे उठा रहा है , 2 हफ्ते बाद उसे छोड़कर तुम्हारे पास आ जाउंगी ना इसलिए आजकल कुछ ज्यादा ही प्यार आ रहा है उसे मुझ पर,,,,,,,,!!”,सुरभि ने कहा

“तुम दोनों हमेशा खुश रहो बस मुझे और कुछ नहीं चाहिए”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा
“तुम दोनों भी हमेशा खुश रहो”,सुरभि ने शरारत से कहा
“हम दोनों कौन ?”,अवनि ने पूछा
“अरे तुम और वो जिसने तुम्हे इतना परेशान कर रखा है,,,,,,,,!!”,सुरभि ने उसी शरारत से फिर कहा
“मुझे लगता है तुम्हरा दिमाग खराब हो गया , यहाँ आओ फिर ठिकाने लाती हु उसे”,अवनि ने सुरभि को मीठी सी फटकार लगाकर कहा

सुरभि ने सुना तो हसने लगी और कुछ देर बातें करने के बाद अवनि ने फोन काट दिया। उसने देखा पृथ्वी का कोई मैसेज नहीं है और मेल पर उसका ध्यान नहीं गया क्योकि दिनभर उसे कई Mails आते थे जिन्हे अवनि रात में बैठकर आराम से चेक किया करती थी। अवनि ने अपना फोन रखा और खाना लेने किचन की तरफ चली आयी।

पनवेल , मुंबई
“हाह ! ये तो अजीब बात हो गयी , इतना अच्छा लड़का उसने नापसंद कर दिया , कहती है लड़का सांवला है। अरे सांवले लड़के क्या बुरे होते है ? एक बस रंग देखा और ना बोल दिया ,, बाकि सब नहीं देखा उसने,,,,,,,,,,पता नहीं आजकल की लड़कियों को क्या हो गया है ?”,किचन में काम करती लता बड़बड़ाते जा रही थी और बाहर बैठा पृथ्वी उनकी नकल करते हुए होंठो से बड़बड़ा रहा था।
रवि जी भी घर आ चुके थे उन्होंने जब लता को बड़बड़ाते देखा तो इशारे में पृथ्वी से पूछा और पृथ्वी ने इशारे में ही उन्हें जवाब दिया कि इस बार भी लड़की ने उसे रिजेक्ट कर दिया है।

“आप मुझे बताईये क्या कमी है हमारे पृथ्वी में ? कहती है रंग सांवला है,,,,,,,,,हाह नैन नक्श नहीं देखे उसने मेरे बेटे के,,,,,,,,,,,!!”,लता ने किचन से बाहर आकर रवि जी से कहा
“आई मुझे तो लगता है दादा ने कोई गड़बड़ की होगी”,सोफे पर बैठे लक्षित ने अपना फोन चलाते हुए कहा
लक्षित की बात सुनकर लता ने पृथ्वी को शकभरी नजरो से देखा तो पृथ्वी ने कहा,”मुझे गड़बड़ करनी होती तो मैं आपको हाँ क्यों कहता ?”
“पॉइंट है”,रवि जी ने कहा

“पर जो भी हो उसे ऐसे मना नहीं करना चाहिए था और तू चिंता मत कर मैं तेरे लिए उस से भी अच्छी लड़की ढूंढकर लाऊंगी”,लता ने कहा
“अरे आई लड़की ढूंढने जरूरत नहीं है”,पृथ्वी के मुँह से एकदम से निकला तो लता , रवि जी और लक्षित ने एक साथ पृथ्वी की तरफ देखा और उसके आगे बोलने का इंतजार करने लगे।
“मेरा मतलब कोई तो होगी न जिसको मैं पसंद आ जाऊंगा”,पृथ्वी ने कहा

“मुझे तो कुछ गड़बड़ लग रही है”,रवि जी ने लता की तरफ देखकर दबे स्वर में कहा
“बाबा ,कोई गड़बड़ नहीं है और आई आप खाना लगाइये ना भूख लगी है फिर मुझे ऑफिस का काम भी करना है”
“हाँ अभी लगाती हूँ , तुम सब हाथ मुंह धोकर बैठो मैं अभी लायी”,लता ने किचन की तरफ जाते हुए कहा

खाना खाने के बाद पृथ्वी अपने फ्लेट पर चला आया। आते ही उसने सबसे पहले अपना फोन चेक किया और देखा कि अवनि ने उसके मेल का जवाब दिया है या नहीं और अगले ही पल वह मायूस हो गया अवनि का कोई जवाब नहीं आया था आता भी कहा से अवनि ने अभी तक उसके मेल को देखा ही नहीं था। पृथ्वी उदास होकर बालकनी में चला आया और आसमान में चमकते चाँद को देखने लगा। वह अवनि को बहुत मिस कर रहा था।

अवनि अपना सब काम खत्म करके अपनी स्टडी टेबल पर आ बैठी और रोजाना की तरह उसने जैसे ही अपना मेल खोला पृथ्वी उपाध्याय नाम की id से उसे कई सारे मेल मिले अवनि हैरान थी। उसने सभी मेल खोलकर देखे तो पता चला कि वे सब पृथ्वी के ही थे , उसके दिल को एक राहत और अजीब सी ख़ुशी हुई कि पृथ्वी उसे भुला नहीं था। अवनि ने एक मेल का जवाब लिखकर भेजा , जवाब क्या उसने सीधा सीधा पृथ्वी को उसकी हरकत के लिए डांट लगाईं।

पृथ्वी को अवनि का मेल मिला तो वह ख़ुशी से उछल पड़ा और लिखकर भेजा “आपने मुझे ब्लॉक क्यों किया ? पता है कितनी मुश्किल से मुझे आपका मेल आई डी मिला है और उस पर आप मुझे अब जवाब दे रही है”
– तुम शादी के लिए लड़की से मिलने गए थे तुमने उसे ना क्यों कहा ?
“क्योकि मैं किसी और को पसंद करता हूँ,,,,,,,,,,,और जब तक वो एक्सेप्ट नहीं करती मैं उसका इंतजार करूंगा”
– ये क्या पागलपन है पृथ्वी ? तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए

“मैंने आपको कुछ कहा , मेरी लाइफ है इसमें क्या होना चाहिए क्या नहीं इसका फैसला तो मैं ले सकता हूँ ना,,,,,,,,,और मैं आपको फ़ोर्स नहीं करूंगा कि आप भी मुझे पसंद करो”
– ok fine ! दो दिन क्या किया तुमने ?
“सच बताऊ तो मैंने आपको बहुत मिस किया , दो दिन आपका फोन नंबर टेलीफोन डायरेक्ट्री में ढूंढ रहा था , आपके घर का एड्रेस गूगल पर देख रहा था , यहाँ तक मैं राजस्थान में अपने लिए दूसरी जॉब भी देख रहा था”
– तुम पागल हो गए हो , तुम मुंबई छोड़कर राजस्थान क्यों आओगे ? ऐसे बेवकूफी मत करना

“मैं आपके लिए वहा आना चाहता हूँ , जो फीलिंग्स मैं यहाँ से फोन पर नहीं समझा पा रहा वो सामने रहकर शायद बेहतर समझा पाऊ”
– तुम फिर शुरू हो गये
“ओह्ह्ह अच्छा सॉरी मैं भूल गया था मुझे आपसे ये सब बाते नहीं करनी है”
– तुम समझ नहीं रहे हो पृथ्वी , तुम जो सोच रहे हो वो सब इतना आसान भी नहीं है
 “अगर इंसान मन बना ले तो कुछ भी मुश्किल नहीं है Ma’am”

– मैं इस जिंदगी में कभी दोबारा मोहब्बत नहीं कर सकती पृथ्वी , कभी कभी हम गलत इंसान पर खुद को इतना खर्च कर देते है कि सही इंसान को देने के लिए हमारे पास कुछ नहीं बचता।
पृथ्वी ने पढ़ा तो उसका मन थोड़ा सा उदास हो गया साथ ही सिद्धार्थ के लिए उसके चेहरे पर गुस्से के भाव झिलमिला उठे उसने लिखकर भेजा “कभी कभी सफ़ेद घोड़े पर सवार राजकुमार भी मीठी बातें करके और बड़े बड़े सपने दिखा कर तुम्हे एक ऐसे भरम में डाल देता है , जिसे तुम मोहब्बत कहती हो। राजकुमार सिर्फ राजकुमारियों के लिए होते है “रानियों” के लिए नही”

पृथ्वी का जवाब पढ़कर अवनि कुछ देर के लिए खामोश हो गयी। सिद्धार्थ उसके सपनो का राजकुमार ही तो था उसने लिखकर भेजा – तुम मेरे साथ फ्लर्ट कर रहे हो ?
“नहीं ! मैं बस खुद को अपनी कहानी का राजा समझ रहा हूँ” पृथ्वी ने लिख भेजा उसके इस जवाब से साफ़ जाहिर हो रहा था कि वह अवनि को अपनी जिंदगी की रानी मान बैठा है चाहे इसके बाद अवनि उसे स्वीकार करे या न करे।

पृथ्वी का जवाब पढ़कर अवनि सोच में पड़ गयी , उसने पृथ्वी जैसा जिद्दी इंसान आज से पहले कभी नहीं देखा था। उसने आगे बात ना करके अपना लेपटॉप बंद कर दिया पर वो पागल ये नहीं समझ पायी कि लेपटॉप बंद कर देने दिल के दरवाजे बंद नहीं हो जाते , उन्हें जिनके लिए खुलना होता है उनके लिए वो खुलकर रहते है और पृथ्वी तो छैनी हथोड़ा लेकर बैठा था।  

 ( क्या सिद्धार्थ की यादो से अवनि खुद को कर पाएगी पूरी तरह से आजाद ? क्या सुरभि का सिरोही आना लेकर आएगा इस कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट ? क्या अवनि देगी पृथ्वी को एक मौका या कर लेगी आने दिल के दरवाजे हमेशा के लिए बंद ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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