Pasandida Aurat – 65

Pasandida Aurat – 65

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि खामोश हो गयी। पृथ्वी कितनी आसानी से वो बात कह गया जो अवनि आज तक नहीं समझ पायी। वह एक Writer है , हजारो लोग उसे चाहते है , लाखो लोग उसकी लिखी कहानिया पढ़ते है , कितने ही लोग उस से मिलना चाहते है और कितने ही लोग उसके जवाब का इंतजार करते है फिर भी एक आम इंसान सिद्धार्थ के लिए उसने अपनी अहमियत अपनी ही नजरो में कम कर दी।

हाँ सिद्धार्थ एक आम इंसान था उसे ख़ास बनाया था अवनि ने , अवनि के प्यार ने , उसके सम्मान ने और सिद्धार्थ के साथ रहते रहते कब अवनि खुद को मामूली समझने लगी उसे खुद पता नहीं चला। सिद्धार्थ ने उसे मानसिक रूप से इतना कमजोर बना दिया कि अवनि को खुद में अब कोई खूबी नजर ही नहीं आती थी पर आज पृथ्वी ने अवनि को ये अहसास दिलाया कि वह आज भी खास है , उसकी अपनी पहचान है अपना नाम है।
“क्या हुआ कहा खो गयी ?”

– अह्ह्ह्हह कुछ नहीं ! मैंने कभी सोचा नहीं था तुम ऐसी बाते भी करते हो
“ऐसी बाते मतलब ?”
– इतनी गहरी बातें जो तुमने इतनी आसानी से कह दी
“चीजों को जितना मुश्किल मानोगे वो उतनी ही मुश्किल लगेगी , वैसे भी इंसान हो या चीज तकलीफ दे तो उसे जिंदगी से निकालकर फेंक देना चाहिए क्या पता आगे उस से बेहतर कुछ आपका इंतजार कर रहा हो”
“ये कहना आसान है पृथ्वी लेकिन करना उतना ही मुश्किल”

“Ma’am मैं ये तो नहीं कहूंगा कि मैं आपकी इन मुश्किलों को खत्म कर सकता हूँ लेकिन हाँ मैं कभी आपकी मुश्किलें बढ़ाऊंगा नहीं , बस आप एक बार भरोसा करके तो देखिये
– नहीं कर सकती , नहीं कर सकती पृथ्वी , पहले भी मैंने किसी पर भरोसा किया है , पहले भी मेरा दिल टूट चुका है , जो सपने तुम मेरे साथ देख रहे हो वो सपने मैं पहले भी किसी और के साथ देख चुकी हूँ। किसी को छोड़कर किसी को अपनाना इतना भी आसान नहीं होता है। इस जिंदगी में मैं कभी दोबारा प्यार नहीं कर पाऊँगी”,अवनि ने उदासी भरे स्वर में कहा

पृथ्वी ने सुना तो उसे अपने सीने में कुछ चुभता हुआ सा महसूस हुआ और उसने कहा,”आपको मुझसे प्यार करने की जरूरत नहीं है ma’am , मेरा प्यार हम दोनों के लिए काफी है,,,,,,मैं नहीं जानता आपने किसी के साथ क्या सपने देखे है लेकिन मैं अपनी पूरी जिंदगी आपके नाम कर चूका हूँ , मैं मेरा आने वाला हर कल आपके साथ देखता हूँ। कितनी ही सपने खुली आँखों से आपके साथ देख चुका हूँ , उन सपनो में आपके साथ हसना , बाते करना , साथ मिलकर खाना पकाना , आपके बाल संवारना ,

साथ में क्रिकेट खेलना , मार्किट जाना , समंदर किनारे घूमना , छत की दिवार पर बैठकर आसमान में चमकते सितारे गिनना , साल में एक बार किसी खूबसूरत जगह पर घूमने जाना , नींद ना आने पर आपको कहानिया सुनाना , ऑफिस से लौटकर दिनभर ऑफिस में क्या हुआ आपको बताना , ऐसे हजारो सपने है जो मैंने देखे है,,,,,,,,,,,,और मैं इन्हे पूरा करना चाहता हूँ

अवनि ने सुना तो नम आँखों से पृथ्वी को देखने लगी और तड़पकर कहा,”तुम समझ नहीं रहे हो पृथ्वी , ये सब इतना आसान नहीं है। क्या तुम एक ऐसे इंसान के साथ अपनी पूरी जिंदगी बिता पाओगे जिसने ये सारे सपने किसी और के साथ देखे है , जो तुम से कभी प्यार नहीं कर पायेगी , जो तुम्हे कभी उसकी जगह नहीं दे पाएगी,,,,,,,जो तुम्हारे साथ एक पत्नी की तरह,,,,,,,,हाह तुम समझ नहीं रहे हो पृथ्वी”

अवनि का एक एक शब्द पृथ्वी के सीने में तीर की तरफ चुभ रहा था लेकिन फिर भी उसने खुद को मजबूत करके कहा,”जिंदगीभर अगर भी अगर खुद को छूने नहीं दिया तब भी आपके लिए मेरा प्यार और सम्मान कम नहीं होगा ma’am , आप मुझे अभी तक समझ नहीं पायी है , मैं दूर हूँ इसलिए अपनी भावनाये नहीं दिखा सकता , वो सब नहीं कर सकता जिस से आपको यकीन हो जाए लेकिन मुझे खुद पर इतना यकीन तो है कि मैं कभी आपको मुझे चुनने के आपके फैसले पर अफ़सोस करने नहीं दूंगा”

आज पहली बार पृथ्वी ने अवनि के सामने अपनी भावनाये व्यक्त कर दी , वह अवनि को बहुत पसंद करता था और कब उसकी ये पसंद प्यार में बदल गयी पृथ्वी खुद नहीं समझ पाया लेकिन हर गुजरते दिन के साथ उसने ये महसूस किया कि वह अवनि के बिना नहीं रह पायेगा। पृथ्वी ने अवनि की सुंदरता से पहले उसकी लिखी किताबो से प्यार किया था , उसके होने के अहसास से प्यार किया था और यही वहज थी कि अवनि के बार बार ना बोलने के बाद भी वह हर बार अवनि भावनाये उसके सामने जाहीर कर देता। पृथ्वी ने अवनि की बात सुनकर कहा,”मेरा जवाब फिर भी ना ही होगा पृथ्वी”

“लेकिन क्यों ? क्या कमी है मुझमे ?”,पृथ्वी ने इस बार तड़पकर कहा वह भी जानना चाहता था आखिर अवनि के ना बोलने की वजह क्या है ?
“क्योकि मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ पृथ्वी , कोई भी लड़का मुझ जैसी लड़की से शादी करना नहीं चाहेगा , कोई भी फॅमिली मुझे एक्सेप्ट नहीं करेगी , कोई भी रिश्ता मैं नहीं निभा पाऊँगी,,,,,,,,,तुम जो चाहते हो वो कोई स्वीकार नहीं करेगा , तुम्हारी फॅमिली भी नहीं”,अवनि ने गुस्से से लेकिन तकलीफ भरे स्वर में कहा

“मेरी फॅमिली को मना लूँगा वो लोग मान जायेंगे लेकिन आपने ये क्यों कहा कि आप मेरे लायक नहीं , एक सिर्फ सिद्धार्थ की वजह,,,,,,,,,,तो मुझे आपके पास्ट से फर्क नहीं पड़ता अवनि,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“पर मुझे फर्क पड़ता है , बहुत फर्क पड़ता है और मैं कभी नहीं चाहूंगी मेरी परेशानिया तुम्हारे हिस्से में आये”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा
“मैं आपसे कोई परेशान नहीं हूँ और मैं वादा करता हूँ मैं सब ठीक कर दूंगा”,पृथ्वी ने कहा
“मेरी हर परेशानियों को दूर करने की जिम्मेदारी तुम्हारी नहीं है पृथ्वी”,अवनि ने तड़पकर कहा

“तो किसकी है अवनि ?”,पृथ्वी ने पहली बार अवनि को उसके नाम से पुकारा तो अवनि नम आँखों से उसे देखने लगी। पृथ्वी के चेहरे पर बेचैनी और उस की आँखों में वह बहुत कुछ देख पा रही थी। अवनि की आँखों में आँसुओ की मोटी मोती बुँदे भर आयी वे किसी भी वक्त गिरने को तैयार थी। अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी ने कहा,”खुद पर तरस खाना बंद करो अवनि , मैं समझ सकता हूँ जिन परेशानियों से आप गुजर रही है वो मेरी सोच से भी बड़ी है लेकिन उनसे बाहर निकलना नामुमकिन तो नहीं है , एक बार सिर्फ एक बार भरोसा जताकर तो देखो”

अवनि ने अपनी आँखे मूँद ली और आँखों में भरे आँसुओ की बुँदे उसके गालों पर लुढ़क गयी। पृथ्वी ने देखा तो उसे फिर अपने सीने में चुभन का अहसास हुआ जैसे कोई लगातार उसके सीने में सैंकड़ो सुइया भोंके जा रहा है। वह पहली बार अवनि को रोते हुए देख रहा था और उसका दिल किया कि वह उस इंसान को
जान से मार दे जिसने अवनि को इतना दर्द दिया कि वह उस दर्द से खुद को आजाद करने से भी डर रही है। पृथ्वी ख़ामोशी से अवनि को देखता रहा , उसके पास इस वक्त वो शब्द ही नहीं थे जो अवनि के दर्द को कम कर सके।

अवनि ने अपनी आँखे खोली और कहा,”ये सब मत करो पृथ्वी ! तुम मेरे बहुत अच्छे दोस्त हो , मैं ये सब कभी स्वीकार नहीं कर कर पाऊँगी”
“सिर्फ इसलिए क्योकि एक लड़के ने पहले आपका दिल तोड़ दिया है , मैं आपसे पहले नहीं मिल पाया इसमें मेरी क्या गलती है अवनि ? काश मैं पहले मिला होता तो ना आपको उस से प्यार होता ना आपका दिल टूटता और ना आज हम दोनों इस तकलीफ में होते ,,

एक एक तकलीफ जिसमे मैं आपसे कहे बिना नहीं रह सकता कि मुझे आपसे प्यार है और आप उसे स्वीकार नहीं कर सकती क्योकि आपको किसी से प्यार था,,,,,,,,,,,पर इन सब में मेरा क्या कसूर है ? मैंने क्या गलत किया है ?”,पृथ्वी ने कहा , उसे देखकर लग रहा था अगर उसने आगे कहा तो शायद वह रो देगा
“क्योकि तुम मेरा अतीत नहीं जानते पृथ्वी,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और फिर उसने पृथ्वी को अपने बारे में सब बता दिया।

मुकुल से सगाई होना , शादी के सपने देखना , शादी के मंडप से उठ जाना , घरवालों की नफरत , नीलेश से फिर शादी का रिश्ता करने का दबाव , विश्वास जी का उसे घर से निकाल देना , सिद्धार्थ का उसकी जिंदगी में आना , उसका विश्वास जीतना , उसका दिल तोडना , उसे हर गुजरते दिन के साथ तकलीफ देना। एक एक करके अवनि ने सब बता दिया और पृथ्वी ख़ामोशी से सब सुनता रहा। अपने बारे में बताते हुए अवनि कितनी ही बार कमजोर पड़ी और पृथ्वी एक एक बात को कड़वे घुठ की तरह निगलता रहा। उसकी आँखे जमकर पत्थर हो चुकी थी।

अब तक उसे लग रहा था कि अवनि बस सिद्धार्थ की वजह से दुखी है लेकिन नहीं अवनि की जिंदगी में तो दुखो का मेला लगा हुआ था। अपनी बात खत्म कर अवनि खामोश ही गयी। पृथ्वी ने महसूस किया कि उसे साँस लेने में तकलीफ हो रही है , गले तक कुछ भर गया है और सीने में अभी भी हजारों खंजर भौंके जाने का अहसास,,,,,,,,,,,!!
पृथ्वी ने एक गहरी साँस ली और कहा,”मैं आपको 5 मिनिट में वापस फोन करता हूँ”

अवनि ने कुछ नहीं कहा बस हामी में गर्दन हिला दी। दूसरी तरफ पृथ्वी ने फोन काटा , वह थका हुआ सा बिस्तर पर बैठा और दोनों हाथो से अपना सर पकड़ लिया। अब तक उसे अवनि की जिंदगी बहुत ही खुशहाल और सुखी लग रही थी। सिद्धार्थ से पृथ्वी बनारस में पहले मिल चुका था लेकिन उसे ये नहीं पता था अवनि जिस लड़के से प्यार करती है वो सिद्धार्थ है उसे बस सिद्धार्थ का नाम पता था और नफरत थी लेकिन आज अवनि की बाते सुनकर पृथ्वी को हर उस इंसान से नफरत होने लगी जिसने अवनि का दिल दुखाया , उसे तकलीफ दी ,

उसका मन भारी हो रहा था और आँखों में नमी , पृथ्वी को अब खुद पर ही गुस्सा आने लगा , अब तक वह अपनी भावनाओ को लेकर अवनि के पीछे पड़ा था , उसके सामने बार बार अपनी भावनाये जाहिर करता और अनजाने में उसे ठेस पहुंचाता , लेकिन आज उसे पता चला अवनि किन परिस्तिथियों से गुजर रही थी और क्यों वह प्यार और शादी से दूर भाग रही थी। पृथ्वी उठा वाशबेसिन के पास आया मुंह धोया और फिर किचन से पानी पीकर वापस अपने कमरे में चला आया।

उसने अपना फोन उठाया और इस बार विडिओ कॉल ना करके सीधा फोन लगा दिया लेकिन रिंग जाती उस से पहले ही पृथ्वी ने फोन काट दिया। उसका दिल धड़क रहा था , हाथ काँप रहे थे , समझ नहीं पा रहा था अवनि से क्या कहेगा इसलिए उसने एक मैसेज लिखा और अवनि को भेज दिया।

अपने लेपटॉप के सामने बैठी अवनि का फोन बजा तो अवनि ने फोन उठाकर देखा पृथ्वी का मैसेज था।
“आप गलत नहीं थी Ma’am , वो लोग ही आपके लायक नहीं थे जो आपको सम्हाल नहीं पाए। आप बेहतर डिजर्व करती है , आप तो दुनिया की हर ख़ुशी डिजर्व करती है Ma’am , i am sorry कुछ वक्त के लिए मैं भी बाकि सबकी तरह सेल्फिश हो गया था और अपनी फीलिंग्स आप पर थोपने लगा था। आप अपनी जगह बिल्कुल सही है,,,,,,,,,,,,आज के बाद मैं आपको परेशान नहीं करूंगा”

अवनि ने मैसेज पढ़ा और फोन साइड में रख दिया। वह पृथ्वी को क्या जवाब दे उसे समझ नहीं आया वह बस अपने अतीत में हुए हादसों में उलझी थी और फिर अवनि अपने चेहरे को अपने हाथो में छुपाकर रो पड़ी। अवनि अपने अतीत से जितना दूर भागने की कोशिश कर रही थी उसका अतीत उतनी ही बार उसके सामने आकर उसके मन को कर रहा था। पृथ्वी जब से उसकी जिंदगी में आया था अवनि फिर से हसने मुस्कुराने लगी थी , पृथ्वी की वजह से ही वह अतीत की कड़वी यादो से खुद को दूर रख पायी लेकिन पृथ्वी की भावनाये जानने के बाद अवनि एक बार फिर टूट गयी।

वह नहीं चाहती थी कि पृथ्वी उसे लेकर कोई भावनाये रखे या उसका इंतजार करे , वह नहीं चाहती थी किसी और के दिए जख्मो पर पृथ्वी मरहम बने , वह नहीं चाहती थी उसका दर्द कम करने के लिए पृथ्वी अपनी जिंदगी में दर्द शामिल करे,,,,,,,,,,,और वह नहीं चाहती थी कि एक बार फिर वह किसी से मोहब्बत करे।

अवनि रोती रही , बेतहाशा रोती रही तब तक जब तक उसका रोना सिसकियों में ना बदल गया। उसे चुप करवाने वाला , उसके आँसू पोछने वाला कोई नहीं था। अवनि उठी उसकी आँखे रोने की वजह से सूज चुकी थी और चेहरा लाल हो चुका था। वह बिस्तर पर आ गिरी और आँखे मूँद ली लेकिन आँखों के सामने पृथ्वी का चेहरा आ रहा था और कानों में उसके कहे शब्द गूंज रहे थे। अवनि को नींद नहीं आ रही थी वह बिस्तर पर करवटें बदलती रही।

पृथ्वी ने अवनि को मैसेज लिखकर भेज दिया और बिस्तर पर लेट गया लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसो दूर , उसके कानो में अवनि के कहे शब्द गूंज रहे थे , आँखे बंद करने पर अवनि का रोता हुआ चेहरा आ रहा था। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह ऐसा क्या करे जिस से अवनि का दर्द कम हो जाये ? पृथ्वी को खुद से भी चिढ हो रही थी बिना अवनि के दिल की बात जाने , बिना उसकी तकलीफ जाने वह अब तक उसे शादी और प्यार के नाम पर ठेस पहुंचा रहा था। दोनों सारी रात जागते रहे और सुबह होते होते दोनों को नींद आ गयी ,

अगली सुबह पृथ्वी उठा उसने बड़ी मुश्किल से खुद को अवनि को मैसेज करने से रोका और घर चला आया। तैयार होकर नाश्ता कर पृथ्वी ऑफिस चला गया और दिनभर खुद को काम में व्यस्त रखा। वह जानबूझकर ऐसा कर रहा था जिस से अवनि का ख्याल उसके जहन में ना आये लेकिन जितना वह इस से बच रहा था उतना ही अवनि की बातें उसे याद आ रही थी।

अवनि सुबह उठी अपना फोन देखा आज पृथ्वी का कोई मैसेज नहीं था ये देखकर अवनि थोड़ा उदास हो गयी लेकिन उसे पृथ्वी का आखरी मैसेज याद आया और उसने मान लिया कि वह पीछे हट चुका है और अब पृथ्वी उसे कभी मैसेज नहीं करेगा। अवनि ने फोन रखा और बैंक जाने की तैयारी करने लगी। तैयार होकर नाश्ता कर अवनि बैंक चली आयी। उसने दिनभर खुद को काम में बिजी रखा ताकि वह पृथ्वी के बारे में ना सोचे लेकिन हर 10 मिनिट में वह अपना फोन देखती और नोटिफिकेशन चेक करती लेकिन पृथ्वी का कोई मैसेज नहीं था।

इस बात ने अवनि को और उदास कर दिया , इन दिनों उसे पृथ्वी से बात करने की आदत हो चुकी थी। अवनि फिर काम में व्यस्त हो गयी और शाम में घर चली आयी। पृथ्वी ने कोई मैसेज नहीं किया तो अवनि ने भी उसे मैसेज नहीं किया और आज का दिन दोनों के लिए बहुत ही मुश्किल भरा गुजरा। आज पुरे दिन में दोनों शायद ही मुस्कुराये हो जबकि दिनभर दोनों एक दूसरे के बारे में ही सोचते रहे।

रात में भी पृथ्वी की तरफ से कोई मैसेज नहीं आया अवनि ने देखा वह ऑनलाइन है लेकिन कोई मैसेज नहीं इस से अवनि को ना जाने क्यों बुरा लगा और उसने पृथ्वी को ब्लॉक कर दिया जिस से उसे उसका प्रोफाइल ना दिखे और अवनि को बार बार उसकी याद ना आये हालाँकि पृथ्वी को इस बारे में कोई खबर नहीं थी वह बेचारा तो खुद कितनी मुश्किल से खुद को रोके हुए था। रात भर पृथ्वी अवनि के बारे में सोचता रहा और अवनि भी करवटें बदलती रही

अगली सुबह पृथ्वी तैयार होने घर चला आया। उसने नाश्ता किया और टिफिन लेकर जैसे ही जाने लगा लता ने कहा,”पृथ्वी ! नीलम भुआ ने जो लड़की बताई है वो आज शाम तुमसे मिलने तुम्हारे ऑफिस आ रही है तो तुम उस से मिल लेना , मैंने उसे तुम्हारे ऑफिस का पता और तुम्हारा नंबर दिया है”
पृथ्वी ने सुना तो उदास हो गया और पहला ख्याल उसे अवनि का आया लेकिन पृथ्वी खुद अवनि से खुद को साइड कर चुका था इसलिए लता को हाँ बोलकर वहा से निकल गया।  

ऑफिस में दिनभर काम करने के बाद शाम में पृथ्वी का फोन बजा। अननोन नंबर देखकर पृथ्वी ने फोन उठाया और कहा,”हेलो कौन ?”
“मैं विशाखा बोल रही हूँ , नीलम आंटी से आपसे मिलने को कहा था,,,,,,,,,मैं आपके ऑफिस के सामने वाले कैफे में ही हूँ तो क्या हम मिल सकते है ?”,लड़की ने कहा जो आज शाम पृथ्वी से मिलने वाली थी
पृथ्वी ने सुना तो घबराहट में उसका दिल धड़कने लगा। उसने अवनि को खुद से दूर कर तो दिया लेकिन अब किसी और लड़की से मिलने की उस में हिम्मत नहीं हो रही थी।

पृथ्वी को खामोश देखकर कहा,”हेलो ! आप सुन रहे है न ?”
“हाँ , हाँ मैं 5 मिनिट में आया”,पृथ्वी ने कहा उसकी आवाज में घबराहट और हताशा साफ झलक रही थी
“येह ! नो प्रॉब्लम”,लड़की ने कहा और फोन काट दिया
पृथ्वी ने फोन जेब में रखा और वाशरूम चला आया। उसने मुँह धोया अपने बालों को सही किया और शीशे में खुद को देखा। उदास चेहरा , बुझी आँखे और होंठो की सुर्खी गायब थी।

वह नहीं समझ पा रहा था कि वह क्या कर रहा है लेकिन उसने खुद लता से हाँ कहा था। उसने शीशे में खुद को देखते हुए दो चार बार गहरी साँस ली और ऑफिस से बाहर चला आया। सड़क पार कर वह कैफे की तरफ आया। कैफे के बाहर ही फूलो की दूकान थी। पृथ्वी ने कुछ ताज़ा फूलो का छोटा सा बुके लिया और अंदर चला आया। कैफे में इस वक्त भीड़ कम थी और आखिरी कोने वाली टेबल पर वह लड़की बैठी थी जिस से मिलने पृथ्वी आया था। पृथ्वी लड़की की तरफ बढ़ गया। वह लड़की के सामने आया तो लड़की उठी और मुस्कुरा कर कहा,”हाय ! मैं विशाखा”

“हेलो,,,,,,,,,ये आपके लिए”,पृथ्वी ने जबरदस्ती मुस्कुरा कर कहा
“ओह्ह्ह ! थैंक्यू , बैठिये ना”,लड़की ने कहा और बुके टेबल पर एक तरफ रखकर खुद भी पृथ्वी के सामने आ बैठी।

बातों का सिलसिला लड़की ने ही शुरू किया , पृथ्वी बस हाँ हूँ में जवाब दे रहा था। लड़की ने पृथ्वी से काफी बातें की दोनों ने कॉफी पी और फिर लड़की ने एकदम से कहा,”तो आपका क्या ख्याल है मिस्टर पृथ्वी , क्या आपकी हाँ है ?”


पृथ्वी ने सुना तो उसका दिल धड़कने लगा , उसके कानों में अवनि की बातें , उसकी हंसी गूंजने लगी , आँखों के सामने अवनि का हँसता मुस्कुराता चेहरा आने लगा पृथ्वी ने धीरे से अपनी आँखे मूँद ली और उसे नजर आया गंगा आरती की अग्नि के उस पार खड़ी अवनि का मासूम सा चेहरा ,, पृथ्वी ने सामने बैठी लड़की को देखा और सर्द आवाज में कहा,“i am sorry ! i like someone”
विशाखा ने सुना तो ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी

( क्या अवनि समझ पायेगी पृथ्वी का प्यार या हो जाएगी हमेशा के लिए उस से दूर ? क्या पृथ्वी रोक पायेगा खुद या हो जाएगा मजबूर अवनि से बात करने को मजबूर ? क्या पृथ्वी का “Never Give Up नेचर आएगा एक बार फिर उसके सामने ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
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