Pasandida Aurat – 62

Pasandida Aurat – 62

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

अवनि ने पृथ्वी को धर्मसंकट में डाल दिया। हरी सब्जियों को वह घास फूस समझता था और अवनि ने तो उसे वही खाने को कह दिया। ऑफिस से घर जाते हुए पृथ्वी अवनि से हुई बातो के बारे में ही सोच रहा था। पनवेल स्टेशन से बाहर आया और पैदल ही घर के लिए चल पड़ा। सब्जी मार्किट से गुजरते हुए पृथ्वी की नजरे गंवार फली को ढूढ़ने लगी। पृथ्वी को सब्जी खरीदना नहीं आता था लेकिन अवनि के कहने पर बेचारे को क्या क्या करना पड़ रहा था। पृथ्वी सब्जीवाले के पास आया और उसे गंवार फली देने को कहा। जैसे जैसे सब्जी वाला फलियां तराजू में रख रहा था पृथ्वी का मुँह बन रहा था।

उसने पैसे दिए और सब्जी लेकर घर चला आया। फ्लेट पर ना जाकर पृथ्वी सीधा लता के घर चला आया। उसने थैली लता की तरफ बढाकर कहा,”आई ! कल टिफिन में मेरे लिए ये बनाना”
लता ने थैली खोलकर देखी तो उसे चक्कर आते आते बचा , पृथ्वी गंवार फली की सब्जी खाने की बात कर रहा था। उन्होंने हैरानी से पृथ्वी को देखा और कहा,”तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना पृथ्वी ? तुम और ये खाओगे , कही मैं सपना तो नहीं देख रही ?”


पृथ्वी ने सुना तो मन ही मन खुद को कोसा और कहा,”इसमें इतना हैरान होने वाली कौनसी बात है ? मेरा मन है इसलिए मुझे खानी है , कल आप टिफिन मुझे यही देना”
कहकर पृथ्वी अपने कमरे की तरफ चला गया। लता ने एक बार फिर थैली में रखी सब्जी को देखा और किचन में चली गयी। उन्हें अभी भी यकीन नहीं हो रहा  पृथ्वी ये सब खाने वाला है।

रात के खाने के बाद पृथ्वी अपने फ्लेट पर चला आया। अवनि से उसकी बाते होने लगी थी और दोनों के बीच दोस्ती वाला रिश्ता भी था लेकिन एक सवाल पृथ्वी  
के मन में अभी भी खटक रहा था और आज पृथ्वी अवनि से पूछने ही वाला था कि उसकी जिंदगी में कोई है या नहीं ? पृथ्वी अपना फोन लेकर बालकनी में चला आया और अवनि को लिखकर भेजा
“मैंने जब आपसे Marry Me कहा तो आपने उसे मजाक में क्यों लिया ? मैं मजाक नहीं कर रहा था”

– पृथ्वी ! तुम मुझे जानते तक नहीं और तुमने मुझसे शादी के लिए कहा , शादी कोई मजाक नहीं है
“मैं आपको बहुत पहले से जानता हूँ बस हमारी पहले कभी बात नहीं हुई और शादी करने में क्या परेशानी है ?”
– क्योकि मैं तुम से बड़ी हूँ
“लेकिन हाइट में मैं आपसे बड़ा हूँ और आप सिर्फ मुझसे 2 साल बड़ी है इतना ऐज गेप तो चलता है”
अवनि को लगा हमेशा की तरह पृथ्वी मजाक कर रहा है इसलिए उसने इसे भी मजाक समझा और कहा,”यहा नहीं चलेगा , और वैसे भी मुझे शादी नहीं करनी,,,,,,मैं ऐस ही ठीक हू”

“आप बुरा न माने तो आपसे एक बात पुछ सकता हूँ ?”
– हम्म्म पूछो
“क्या किसी ने आपका दिल तोडा है ?”
पृथ्वी का सवाल सुनकर अवनि खामोश हो गयी , उसकी आँखों के सामने सिद्धार्थ का चेहरा आ गया  
साथ ही सिद्धार्थ का बुरा बर्ताव भी जो प्यार के नाम पर उसने अवनि के साथ किया था। अवनि का मन एकदम से भारी हो गया और उसकी आँखों में नमी उभर आयी। अवनि का जवाब ना पाकर पृथ्वी ने लिखकर भेजा “अगर आपको नहीं बताना तो इट्स ओके”

– हाँ टुटा है
“और इसलिए आपको सबसे से नफरत हो गयी , राइट ?”
– ऐसा होता तो हमारी कभी बात नहीं होती , तुम मुझे जेनुअन लगे बस इसलिए मैं तुम्हारे मैसेज का जवाब दे देती हूँ लेकिन इसे तुम मेरी तरफ से कुछ और मत समझना , मेरे दिल में तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं है।
“उफ्फ्फ,,,,,,,,,!!”,अवनि का मैसेज देखकर पृथ्वी के मुँह से निकला। अवनि का भरोसा जीतने और उसके दिल में अपने लिए प्यार जगाने के लिए पृथ्वी को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी ये सोचकर उसने लिखकर भेजा “आपको खुद को एक और मौका देना चाहिए , हर लड़का एक जैसा नहीं होता”

– हाँ जानती हूँ सब मर्द एक जैसे नहीं होते पर अब मन नहीं है,,,,,,,,मैं अकेले ज्यादा खुश हूँ मुझे नहीं लगता मैं किसी के लायक हूँ”
“आप लायक है Ma’am ! बस सही वक्त पर गलत लोग आपकी जिंदगी में आ गए। आप तो इस दुनिया की हर ख़ुशी डिजर्व करती है , वो लोग ही आपके लायक नहीं थे जिन्होंने आपकी कदर नहीं की पर इसका मतलब ये नहीं है आप खुद को दूसरा मौका ना दे”
– कभी कभी हम गलत लोगो पर खुद को इतना खर्च कर देते है कि सही इंसान को देने के लिए हमारे पास कुछ नहीं बचता

अवनि का जवाब पढ़कर पृथ्वी के दिल में मीठा सा दर्द हुआ , सही तो कह रही थी अवनि वह खुद को सिद्धार्थ के लिए इतना बदल चुकी थी कि अब बदलने के लिए कुछ बचा ही नहीं था , इतना विश्वास दिखा चुकी थी उस पर कि अब हर रिश्ता उसे झूठा और स्वार्थी लगने लगा था , इतनी मोहब्बत जता चुकी थी उस से कि अब किसी और से प्यार से बात करना भी उसे तकलीफ का अहसास करा जाता था। पृथ्वी अवनि के भरे जख्मो को कुरेदना नहीं चाहता था इसलिए उस से इधर उधर की बाते करने लगा। देर रात पृथ्वी सोने की बात कहकर ऑफलाइन हो गया लेकिन नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी ,

बिस्तर पर लेटे हुए वह अवनि के बारे में सोचते हुए खुद से ही कहने लगा,”कोई उसका दिल कैसे तोड़ सकता है ? वो ये सब डिजर्व नहीं करती वो तो वो तो दुनिया की  डिजर्व करती है , सबका प्यार , सबकी केयर डिजर्व करती है फिर उसके हिस्से में ये दर्द ये तकलीफ क्यों ? अवनि समझ ही नहीं पायी कि उस लड़के ने बस उसे यूज़ किया है , उसकी भावनाओ से खेला है लेकिन अब मैं उसकी जिंदगी में आ गया हूँ और अब मैं उसका दिल नहीं टूटने दूंगा , उसके लिए हर वो चीज करूंगा जो उसके चेहरे पर ख़ुशी ले आये जो उसे खुश रखे”
अवनि के बारे में सोचते हुए पृथ्वी नींद के आगोश में चला गया।

सिरोही , राजस्थान
पृथ्वी से बात करने के बाद अवनि ने अपना फोन साइड में रख दिया। आज पृथ्वी की बातो ने उसे एक बार फिर सिद्धार्थ की याद दिला दी और उसके भरे हुए जख्म हरे हो गए। अवनि रातभर सो नहीं पायी , उसे सिद्धार्थ की हर बात याद आ रही थी और धीरे धीरे समझ भी आ रहा था कि सिद्धार्थ ने उसके साथ जो किया वो सब एक सोची समझी साजिश थी जिसका शिकार अवनि बनी। पृथ्वी को उसकी जिंदगी में आये अभी एक हफ्ता ही हुआ था लेकिन उस से बात करते हुए अवनि काफी सहज थी और खुश भी थी ,

हालाँकि अवनि ने बस इस रिश्ते को दोस्ती का नाम दिया था तो वही पृथ्वी के लिए अवनि धीरे धीरे “उसकी पसंदीदा” औरत बनती जा रही थी जिसकी ख़ुशी के लिए पृथ्वी कुछ भी करने को तैयार था। वह अवनि की जिंदगी में एक देवदूत बनकर आया था और उसकी बातें अवनि के जख्मो पर मरहम की तरह थी। रातभर नींद अवनि की आँखों से गायब रही और सुबह होते होते उसकी आँख लग गयी।

पनवेल , मुंबई
“आई मेरा शर्ट प्रेस नहीं किया ना आपने , आज मेरी मीटिंग थी अब वहा ऐसा शर्ट पहनकर जाऊंगा तो मेरा क्या इम्प्रेशन पडेगा ?”,पृथ्वी ने अपना शर्ट देखकर कहा जो कि आज फिर प्रेस नहीं था
“इसलिए कहती हूँ शादी कर ले”,लता ने किचन में काम करते हुए कहा
“हाँ शादी कर लूंगा तो जैसे वो रोज मेरे कपडे प्रेस कर देगी,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने दूसरी शर्ट पहनी और कमरे से बाहर आते हुए कहा

लता उसका नाश्ता ले आयी और टेबल पर रखकर कहा,”औरत जब प्यार में होती है तो अपने नवरे ( पति ) के लिए सब करती है।”
लता की बात सुनकर पृथ्वी को अवनि का ख्याल आया और वह कुर्सी पर आ बैठा , रवि जी और लक्षित पहले ही अपना नाश्ता करके वहा से जा चुके थे।

लता भी किचन में चली गयी और पृथ्वी नाश्ता करते हुए मन ही मन सोचने लगा “जब वो यहाँ आ जाएगी तो रोज वो मेरे लिए अपने हाथो से कपडे प्रेस करके रखेगी , मेरा ख्याल रखेगी , ऑफिस जाते वक्त मैं जान बूझकर अपना पर्स और रूमाल भूल जाऊंगा तो वो मेरे पीछे पीछे देने के लिए आएगी,,,,,,,,,,मैं उसे थैंक्यू कहूंगा और वो मुझे घर जल्दी आने को कहेगी , फिर मैं कहूंगा मेरा उसे छोड़कर जाने का मन नहीं कर रहा और वो हँसते हुए प्यार से मुझे धक्का देकर ऑफिस जाने को कहेगी,,,,,,,,,,ओह्ह्ह्हह्ह मुझे तो सोचकर ही शर्म आ रही है”


मुस्कुराते हुए पृथ्वी ने अपना सर सहलाते हुए जैसे ही अपनी गर्दन घुमाई बगल में खड़ी लता को देखकर झेंप गया और मुस्कान होंठो से गायब हो गयी

लता उसके लिए दूसरा पराठा लेकर आयी थी लेकिन पृथ्वी ने तो अभी तक पहला भी नहीं खाया था ये देखकर लता ने कहा,”कहा खोये हो तुम ? नाश्ता करो”
“हाँ हाँ कर रहा हूँ,,,,,,,मेरा टिफिन पैक किया ?”,पृथ्वी ने खाते हुए कहा
“हाँ कर दिया और अगर सब्जी टिफिन में वापस आयी तो फिर तू देखना,,,,,,,,,,!”,लता ने कहा
“अरे नहीं आएगी , खा लूंगा मैं”,पृथ्वी ने कहा लेकिन दिल से तो यही आवाज आ रही थी कि “कैसे खायेगा भाई ?”

“अच्छा आज शाम उस लड़की से मिल लेना , नीलम ने उसे तुम्हारे ऑफिस का पता दिया है तो वो वही आ जाएगी”,लता ने किचन में जाते हुए कहा
“कौन लड़की ?”,पृथ्वी ने कहा क्योकि उसे तो अवनि के अलावा कोई और लड़की याद तक नहीं थी।
“जो नीलम भुआ ने बताई थी , भूल गया उस दिन तुमने ही हाँ कहा था मिलने के लिए,,,,,,,आज शाम वो तेरे ऑफिस आएगी तो मिल लेना उस से,,,,,मुझे और बाकी सब को तो लड़की पसंद है बस तुम दोनों एक बार आपस में मिल लो , बातचीत कर लो तो रिश्ता पक्का कर देंगे”,लता ने पृथ्वी पर बम फोड़कर कहा

पृथ्वी ने सुना तो निवाला गले में ही अटक गया , ना निगला गया ना उगला और इस बार तो उसने खुद हाँ बोलकर अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारी थी। वह फंस गया ना भी नहीं बोल सकता था और ना ही लड़की से मिलने के लिए मना कर सकता था उसने मुश्किल से निवाला निगला और हामी में गर्दन हिला दी तो लता मुस्कुरा उठी और पृथ्वी का टिफिन लेने किचन में चली गयी।

पृथ्वी ने नाश्ता किया और टिफिन लेकर ऑफिस के लिए निकल गया। पृथ्वी मैनेजर बन गया था लेकिन उसकी कुछ आदतों में अभी भी कोई सुधार नहीं हुआ था जैसा कि ऑफिस देर से आना , जयदीप की बातो पर बच्चो की तरह चिढ़ना , अकेले रहना और चुपचाप अपना काम करना। मीटिंग के बाद पृथ्वी अपने केबिन में चला आया और अपना लेपटॉप खोलकर उस पर रिपोर्ट तैयार करने लगा। पिछले कुछ दिनों से काम में उसका मन कम ही लग रहा था उसका दिल बस दिनभर अवनि से बात करने को करता रहता था।

पृथ्वी ने खुद को बहुत रोका और आख़िरकार उसके हाथ फोन की तरफ बढ़ गए और उसने अवनि को मैसेज लिखकर भेजा दिया। अवनि ने एक दो मैसेज का जवाब दिया और जब देखा पृथ्वी कुछ ज्यादा ही फ्री है तो उसने लिखकर भेजा
– तुम दिनभर ऑनलाइन ही रहते हो या ऑफिस में कुछ काम भी करते हो ?
पृथ्वी ने अपने लैपटॉप पर चल रही रिपोर्ट की फोटो भेज दी तो अवनि ने फिर लिखकर भेजा  “तुम्हे अपना ध्यान काम पर लगाना चाहिए”

“वही तो कर रहा हूँ” पृथ्वी ने लिख भेजा लेकिन अवनि उसकी भावना नहीं समझ पायी और ऑफलाइन हो गयी क्योकि उसके बैंक में आज बहुत काम था।
मायूस होकर पृथ्वी ने फोन साइड में रख दिया और अपना ध्यान काम पर लगा लिया। उसने कुछ रिपोर्ट्स तैयार की , क्लाइंट्स को कुछ मेल्स भेजे और ये सब करते करते कब दोपहर हो गयी उसे पता ही नहीं चला !

“सर लंच ?”,केबिन में पृथ्वी के साथ काम करने वाले मनीष ने कहा तो पृथ्वी ने अपना लेपटॉप बंद किया और बैग से टिफिन लेकर सबके साथ आ बैठा। बस ऑफिस में सिर्फ ये 15 मिनिट होते थे जब पृथ्वी ना किसी का बॉस होता था ना किसी का सिनियर , वह अंकित , मनीष , कशिश और तान्या के साथ नार्मल कलीग की तरह पेश आता था। सबने अपना अपना टिफिन खोला लेकिन पृथ्वी आज सबके सामने अपना टिफिन खोलने में झिझक रहा था और झिझकता भी क्यों नहीं बेचारा जी “गंवार फली” को सबके सामने ताने मारा करता था आज वही गंवार फली उसके टिफिन में थी वो भी सिर्फ अवनि की वजह से

“क्या हुआ , आज खाना नहीं खाना , टिफिन खोलो”,पास बैठे अंकित ने कहा
पृथ्वी जबरदस्ती मुस्कुराया और टिफिन खोला तो सब पृथ्वी के टिफिन में गंवार फली देखकर हैरान , अंकित तो कुर्सी से गिरते गिरते बचा और कहा,”ये चमत्कार कैसे हुआ ? गंवार फली कौन खाता है ?”
“इसमें क्या चमत्कार है ? वैसे भी जो गंवार होते है वही गंवार नहीं खाते , अब मेरा मुंह मत देखो खाना खाओ”,पृथ्वी ने थोड़ा सख्ती से कहा और एक निवाला तोड़कर मुंह में रख लिया। उसका दिल जानता है वो ये कैसे खा रहा था लेकिन दिल का हाल उसने अपने चेहरे पर आने नहीं दिया।

“एक मिनिट सर ये तो मोमेंट है इसका तो क्लिप बनता है”,कहते हुए कशिश ने अपने फोन का केमेरा ऑन किया और पृथ्वी का खाना खाते हुए विडिओ बना लिया। पृथ्वी ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई , आखिर उसे अवनि को प्रूफ भी तो भेजना था। खाना खाने के बाद पृथ्वी ने कशिश से अपना विडिओ लिया और अवनि को भेज दिया। खाना खाने के बाद बाकि 4 वही बैठे थे लेकिन पृथ्वी केबिन से बाहर चला गया।
“अंकित सर ! ये पृथ्वी सर आपको कुछ बदले बदले नजर नहीं आ रहे ?”,तान्या ने अंकित से पूछा

“हाँ अंकित सर पिछले कुछ दिनों से पृथ्वी सर कुछ अलग ही नजर आ रहे है , अकेले में मुस्कुराते रहते है , गुनगुनाते रहते है और उनका फोन तो उनके हाथ में ही रहता है,,,,,,,आजकल तो वो किसी पर गुस्सा भी नहीं करते बल्कि प्यार से गलती समझाकर चले जाते है”,मनीष ने कहा
अंकित ने सुना तो मुस्कुराने लगा और कहा,”लगता है उसकी लाइफ का टर्निंग पॉइंट आ चुका है”
“मतलब ?”,कशिश ने पूछा

“तुम लोग नहीं समझोगे , खाना हो गया अब उठो और बैक टू वर्क”,अंकित ने कहा और वहा से चला गया
“पृथ्वी सर तो बदल गए पर लगता है उनकी आत्मा अंकित सर में आ गयी है”,कशिश ने मायूस होकर कहा तो तान्या और मनीष हंस पड़े और उसके बाद तीनो उठकर हाथ धोने चल पड़े।
लंच टाइम में अवनि अपना टिफिन लेकर जैसे ही खाना खाने बैठी उसका फोन बजा। अवनि ने देखा तो पाया कि पृथ्वी ने उसे कोई विडिओ क्लिप भेजा है।

अवनि ने वीडियो प्ले करके देखा तो उसे देखते हुए उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी। पृथ्वी गंवार फली खा रहा था और उसे खाते हुए जान बूझकर मुँह बना रहा था। अवनि को उस वक्त पृथ्वी बहुत प्यारा लगा , उसके कहने पर पृथ्वी वो सब्जी भी खाने को तैयार हो गया जिसे वह बेकार बता रहा था जबकि अवनि ने बस उस से मजाक किया था। अवनि को मुस्कुराते देखकर दिव्या ने कहा,”क्या बात है अवनि जी , ऐसा क्या देख लिया फोन में जो आप इतना मुस्कुरा रही है”

“अह्ह्ह्ह कुछ नहीं ऐसे ही,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और फोन साइड में रख दिया लेकिन उसके होंठो पर मुस्कुराहट बरक़रार थी।

अवनि ने खाना खाया और अपनी कुर्सी पर आ बैठी उसने पृथ्वी को मैसेज किया – very good अब कल करेला खाना
“अरे नहीं नहीं प्लीज ! करेला तो हरगिज नहीं खाऊंगा मैं” पृथ्वी ने लिखकर भेजा
– गंवार खा सकते हो तो करेला क्यों नहीं ? वो भी अच्छा होता है
“आप अपने हाथ से बनाकर खिलाना तब खा लगा लेकिन अभी नहीं प्लीज

– अच्छा ठीक है ! मैं बस मजाक कर रही थी , वैसे तुम्हे अगर पसंद नहीं था तो मेरे कहने पर गंवार भी नहीं खाना चाहिए था। मुझे अब अच्छा नहीं लग रहा”
“अरे Ma’am आप कहेंगी तो मैं सब खा लूंगा और ये सब मत सोचो आप वो इतनी बुरी भी नहीं थी , हाँ मेरे घरवालों और ऑफिस वालो को सदमा जरूर लग गया है मुझे ये सब खाते देखकर,,,,,,,,,,,!!”
अवनि ने पढ़ा तो हसने लगी और लिखकर भेजा – इसका मतलब मैं कुछ भी करने को कहूँगी तो तुम करोगे ?”
“आप कहकर तो देखिये , मेरा बस चले तो पूरी दुनिया की खुशिया मैं आपके कदमो में लाकर रख दू”

पृथ्वी का जवाब पढ़कर अवनि खामोश हो गयी , आज से पहले तो किसी ने उस से इस तरह की बातें नहीं की थी ना ही कभी उसके लिए इतने एफ्फोर्ट्स किये थे। अवनि ने लिखकर भेजा – जरूर रखना पर उस इंसान के लिए जो तुम्हारे लिए बना हो
“आप हमेशा ऐसा क्यों सोचती है ? एक इंसान ने गलत किया इसका मतलब ये नहीं है सब गलत हो”
– लेकिन मैं तुम्हे कोई झूठी उम्मीद देना नहीं चाहती पृथ्वी , मैं नहीं चाहती मुझे लेकर तुम अपने मन में कोई भावनाये रखो

अवनि का जवाब पढ़कर पृथ्वी मुस्कुराया और मन ही मन खुद से कहा,”अब मैं इस लड़की को कैसे समझाऊ मेरे लिए जो बनी है वो यही है”
पृथ्वी का कोई जवाब ना पाकर अवनि ऑफलाइन चली गयी और मन ही मन खुद से कहा,”तुम बहुत अच्छे लड़के हो पृथ्वी , तुम बेहतर इंसान डिजर्व करते हो एक ऐसा इंसान जिसका दिल कभी ना टुटा हो,,,,,,,,,,,जो सिर्फ तुम्हारी बनकर रहे”

( क्या सिद्धार्थ के दिए जख्मो पर पृथ्वी बन पायेगा मरहम ? क्या अवनि सिद्धार्थ को भूलकर पृथ्वी की भावनाओ को समझ पायेगी ? क्या पृथ्वी अब भी कर रहा है अवनि को अपने दिल की बात ना बताकर कोई बड़ी गलती ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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