Pasandida Aurat – 61

Pasandida Aurat – 61

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी ने अपने दिल की बात नकुल के सामने जाहीर कर दी। नकुल ने सुना तो उसके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये क्योकि इस से पहले भी नकुल पृथ्वी  का दिल टूटते देख चुका था। नकुल पृथ्वी के पास आया और कहा,”पृथ्वी ! 40 सेकेण्ड में तू किसी के साथ 40 साल जिंदगी बिताने का फैसला कैसे कर सकता है ? और वैसे भी वो राजस्थान से है और तू मुंबई से दोनों का कोई कॉम्बिनेशन ही नहीं है।”


पृथ्वी नकुल की तरफ पलटा और कहा,”उसकी सबसे खूबसूरत बात यही तो है कि वो राजस्थान से है , तूने कभी सोचा था मुझे राजस्थान की लड़की से प्यार होगा,,,,,,,,and don’t worry मैं राजस्थान का कल्चर सीख लूँगा”
“और ये सब किसलिए ? सिर्फ एक लड़की के लिए”,नकुल ने हैरानी भरे स्वर में कहा
“मर्द अपनी जिंदगी में खुद को सिर्फ दो बार बदलता है। एक जब उसका दिल टूटता है और दूसरा अपनी पसंदीदा औरत के लिए”,पृथ्वी ने कहा


“मतलब अब एक लड़की के लिए तुम खुद को बदल लोगे , क्या पागलपन है ?”,नकुल ने बेचैनी भरे स्वर में कहा
पृथ्वी नकुल को देखकर मुस्कुराया और कहा,”मोहब्बत समझदारो का काम नहीं है और फिर वो मोहब्बत ही क्या जिसमे पागलपन ना हो”
पृथ्वी की बात सुनकर नकुल खामोश हो गया , आज से पहले उसने पृथ्वी को किसी लड़की को लेकर ऐसी बाते करते नहीं देखा था। नकुल फीका सा मुस्कुराया और कहा,”तो कब जा रहे हो राजस्थान ?”


“बस एक बार वो हाँ कह दे उसके हाँ कहने के बाद अगली फ्लाइट से ही चला जाऊंगा”,पृथ्वी ने टपरी के काउंटर से चाय का कप उठाकर कहा
“हाँ कह दे मतलब ? उसे तुम्हारी फीलिंग्स के बारे में नहीं पता ?”,नकुल ने हैरानी से कहा
“मैंने अभी तक उसे बताया ही नहीं तो कैसे पता चलेगा ?”,पृथ्वी ने कहा


“ओह्ह्ह्ह पृथ्वी लगता है तुम सच में पागल हो गए हो,,,,,,,,तुमने उसे अपनी फीलिंग्स के बारे में बताया ही नहीं और उसके साथ जिंदगी बिताने का फैसला भी कर लिया। अगर उसकी जिंदगी में पहले से कोई और हुआ तो ?”,नकुल ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो चाय का कप होंठो के पास आकर रुक गया और पृथ्वी के चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये। पृथ्वी ने अभी तक अवनि को अपनी फीलिंग्स के बारे में नहीं बताया था लेकिन उसने ये जानने की कोशिश भी नहीं कि के अवनि की जिंदगी में कोई है या नहीं।

पृथ्वी को परेशान और खामोश देखकर नकुल ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा,”देख पृथ्वी मैं ये नहीं कह रहा तू जो कर रहा है वो गलत है लेकिन किसी के लिए एकतरफा फीलिंग्स रखना मुझे नहीं लगता ये सही है,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने कुछ नहीं कहा उसने अपनी चाय खत्म की और नकुल के साथ वहा से घर के लिए निकल गया।

नकुल पृथ्वी को उसके अपार्टमेंट के सामने छोड़कर चला गया और पृथ्वी अपने फ्लेट में चला आया। सुबह वह जितना खुश था अब उतना ही उदास नजर आ रहा था। नकुल की उस एक बात ने उसे उलझन में डाल दिया। पृथ्वी ने किचन प्लेटफॉर्म पर रखी पानी की बोतल उठाई और बालकनी में चला आया। आसमान में बड़ा सा चाँद चमक रहा था और उसे देखते हुए पृथ्वी को अवनि का हँसता मुस्कुराता चेहरा याद आने लगा। आज वह पृथ्वी से बात करते हुए कितना कम्फर्टेबल थी और खुश भी थी।

अवनि का ख्याल आते ही पृथ्वी मुस्कुरा उठा और खुद से ही कहने लगा,”सादगी में भी कोई इतना खूबसूरत कैसे लग सकता है ? सोचा नहीं था तुम से ऐसे बात होगी , सच कहू तो आज का दिन मेरी जिंदगी का दूसरा सबसे खूबसूरत दिन था , पहला वो दिन रहा होगा जब तुम इस दुनिया में आयी होगी और तब किसने सोचा होगा कि मुंबई में रहने वाले मुझ जैसे लड़के को राजस्थान में रहने वाली लड़की से प्यार हो जाएगा,,,,,,,,हाँ ये प्यार ही है अवनि वरना इतनी लड़कियों से मिलकर जो अहसास आज तक नहीं हुआ वो चंद मिनटों की बातचीत में तुम्हारे साथ क्यों हुआ ?

अब तक लगता था बनारस में तुम्हारी वो एक झलक इत्तेफाक थी पर अब लगता है वो इत्तेफाक नहीं शुरुआत थी , शुरुआत तुम्हारी मेरी जिंदगी में आने की वरना किताबों से हमेशा दूर भागने वाला मैं दिन रात तुम्हारी किताबे क्यों पढता ? एक पल के लिए भी तुम्हारा ख्याल मेरे जहन से दूर नहीं हुआ ,, तुम्हे सोचना हर गुजरते दिन का सबसे खूसबूरत हिस्सा होता था और आज भी है,,आज तुम से बात करते हुए मेरे पैर ख़ुशी के मारे हवा में थे और धड़कने सामान्य से तेज , मुस्कुराहट चेहरे पर जम सी गयी और निगाहें तुम्हारे चेहरे से हटने का नाम नहीं ले रही थी।

आज पूरा दिन मैं बहुत खुश था इतना जितना आज तक कभी नहीं हुआ लेकिन आज शाम नकुल की बात सुनकर मेरी ख़ुशी उदासी में बदल गयी। अगर सच में तुम्हारी जिंदगी कोई हुआ तो मैं कैसे देख पाऊंगा ? हाह ! नहीं नहीं आई विश कि ऐसा कुछ ना हो,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने पीठ रेलिंग से लगाई और बोतल खोलकर मुंह से लगा ली। पानी पीते हुए पृथ्वी ने महसुस किया कि उसका गला सूख गया था और पानी का पहला घूंठ पीकर ही उसे राहत महसूस हुई।

अगला दिन , पृथ्वी का ऑफिस
सुबह के 11 बज रहे थे और पृथ्वी अपने लेपटॉप के सामने बैठा बार बार अपना फ़ोन चेक करता और नीचे रख देता। जयदीप ने ऑफिस के बाहर दूसरे ऑफिस म क्लाइंट के साथ मीटिंग रखी थी और पृथ्वी को उसके साथ जाना था इसलिए पृथ्वी ने लेपटॉप बंद किया। अपना फोन और जरुरी फाइल्स लेकर अपने केबिन से बाहर निकल गया। जयदीप ने पृथ्वी को हाथ में पकड़ी फाइल दी और आगे बढ़ गया। पृथ्वी उसके पीछे पीछे चल पड़ा। जयदीप पृथ्वी के साथ ऑफिस से बाहर आया तो ड्राइवर गाडी लेकर पहले ही ऑफिस के सामने खड़ा था।

साथ ही ड्राइवर के बगल में दूसरी ब्रांच का मैनेजर भी मौजूद था। पृथ्वी को जयदीप के साथ पीछे आकर बैठना पड़ा। पृथ्वी खामोश था और उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। गाड़ी आगे बढ़ गयी और वह खिड़की से बाहर देख रहा था। ब्रांच मैनेजर और जयदीप किसी मीटिंग को लेकर आपस में चर्चा कर रहे थे और पृथ्वी अवनि के ख्यालो में खोया था कल दोपहर के बाद से अवनि का कोई मैसेज नहीं आया था , पृथ्वी ने सुबह उसे गुड मॉर्निंग भी विश किया लेकिन अवनि ने शायद देखा ही नहीं। उदास होकर पृथ्वी ने एक बार फिर अपने फोन की स्क्रीन देखी लेकिन अवनि का कोई जवाब नहीं आया।

गाड़ी मीटिंग लोकेशन पहुंची ! पृथ्वी में एक खास गुण था और वो ये कि वह अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को अलग अलग रखना जानता था। पर्सनल लाइफ में चाहे जो चल रहा हो प्रोफेशनल लाइफ में कभी उसका असर देखने को कभी नहीं मिला। पृथ्वी का पूरा ध्यान आज की मीटिंग पर था और उसने काफी अच्छी प्रेजेंटेशन भी दी जिसे देखकर जयदीप काफी खुश हुआ।

मीटिंग के बाद सब टीम मेंबर ने पास ही के एक होटल में साथ लंच किया और उसके बाद फिर एक मीटिंग रखी गयी जिसमे जयदीप का प्रोजेक्ट फाइनल हुआ और कॉन्ट्रेक्ट उसे मिल गया। मीटिंग के बाद जयदीप पृथ्वी और ब्रांच मैनेजर के साथ वहा से निकल गया। पीछे जयदीप के साथ बैठे पृथ्वी ने अपना फोन देखा और सहसा ही उसके होंठो पर मुस्कान तैर गयी। अवनि का जवाब आया था पृथ्वी ने पढ़ा और तुरंत मैसेज किया !
अवनि का इस वक्त लंच टाइम होता था इसलिए उसने जवाब दिया और पृथ्वी ने सवालो की झड़ी लगा दी।


पृथ्वी अवनि से सवाल कर रहा था और अवनि भी उसे जवाब दे रही थी और ये सब करते हुए पृथ्वी का ध्यान बस अपने फोन पर था। ब्रांच मैनेजर और जयदीप काफी देर से उसे देख रहे थे और फिर जयदीप ने कहा,”पृथ्वी ! किस से चेटिंग कर रहे हो जरा हम लोगो को भी बताओ”
“हाँ सर ! मैं भी देख रहा हूँ पृथ्वी आजकल कुछ बदला बदला नजर आने लगा है , क्या बात है कोई लड़की वड़की का चक्कर है क्या ?”,ब्रांच मैनेजर ने शरारती लहजे में कहा तो पृथ्वी झेंप गया और अपना फोन नीचे कर लिया
“कौन लड़की है पृथ्वी ?”,जयदीप ने पूछा


“मैं अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में आप लोगो को क्यों बताऊ ?”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“कोई बात नहीं मैं पता लगा लूंगा,,,,,,,,आफ्टरऑल मैं तुम्हारा बॉस हूँ , तुम्हारी लाइफ में क्या चल रहा है मुझे पता होना चाहिए,,,,,,,,,हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर दू”,जयदीप ने कहा
“नो थैंक्यू ! मुझे आपकी कोई मदद नहीं चाहिए,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और खिड़की के बाहर देखने लगा। कहा बेचारा खुश होकर अवनि से बात कर रहा था और कहा इन दोनों की वजह से उसे अपना फोन जेब में रखना पड़ा।

गाड़ी ऑफिस के बाहर पहुंची। ड्राइवर ब्रांच मैनेजर को लेकर वहा से चला गया और जयदीप पृथ्वी के साथ ऑफिस के अंदर चला आया। जयदीप पृथ्वी से फोन के बारे में कुछ पूछता इस से पहने उसका फोन बजा और जयदीप किसी जरुरी काम से ऑफिस से निकल गया। पृथ्वी अपने केबिन में आया , साथ वाले अपने अपने काम में बिजी थे। पृथ्वी को कुछ मेल्स टाइप करने थे लेकिन अवनि से बात करने का मोह छोड़ नहीं पाया इसलिए उसने मेल लिखते हुए बीच बीच में वह अवनि से बात करने लगा।


“आपने खाना खाया ?”,पृथ्वी ने लिखकर भेजा
– हाँ और मुझे एक बात बताओ ?”,अवनि ने भेजा
“जी पूछिए”
– तुम मुझे आप आप क्यों कहते रहते हो ? तुम मुझे तुम कहकर बुला सकते हो
“मैं नहीं बुला सकता , मुझे आपको आप कहना ही अच्छा लगता है Ma’am”
– और एक ये ma’am , मैं कोई ma’am नहीं हूँ तुम मुझे अवनि कहकर बुला सकते हो
“मैं आपको नाम से कैसे बुला सकता हूँ ?”
– क्यों नहीं बुला सकते ? चलो कहो अवनि , रुको एक काम करो 10 बार मेरा नाम पुकारो और मुझे वौइस् मैसेज भेजो


“मैं ऐसा नहीं कर सकता”
– क्यों नहीं कर सकते , मेरा नाम इतना बुरा है क्या ?
“अरे नहीं नहीं Ma’am कैसी बाते कर रही है आप ? आपका नाम तो बहुत सुंदर है लेकिन मैं आपको आपके नाम से नहीं बुला सकता”  
– अब तो तुम मुझे मेरे नाम से ही बुलाओगे वो भी वॉइस मैसेज में और अगर तुमने नहीं बुलाया तो मैं तुम्हे ब्लॉक कर दूंगी
“ऐसा मत कहिये प्लीज , मैं नहीं बोल पाऊंगा”
– मेरा नाम लेने में क्या दिक्कत है तुम्हे ?


“आप नहीं समझेंगी , आप जो कहेंगी मैं सब करूंगा बस ये नहीं”
अवनि को पृथ्वी थोड़ा अजीब लगा। भला उसका नाम लेने में पृथ्वी को क्या हर्ज था अवनि सोच ही रही थी कि तभी पृथ्वी का मैसेज आया “प्लीज ब्लॉक मत करना”
– अगर तुम चाहते हो मैं तुम्हे ब्लॉक ना करू तो फिर भेजो , 10 बार अवनि right now  
अवनि का मैसेज पढ़कर पृथ्वी का दिल धड़कने लगा वह खुद ही नहीं समझ पा रहा था कि उसे ये क्यों हो रहा है ? उसने एक गहरी साँस ली और लिखकर भेजा “ठीक है मैं कोशिश करता हूँ”


अवनि उसके मैसेज का इंतजार करने लगी। कुछ देर बाद उसे पृथ्वी का वौइस् मैसेज मिला , अवनि ने उस पर क्लिक किया और सुनने लगी। पृथ्वी ने एक साँस में 10 बार अवनि का नाम लिया और आखिर में एक गहरी साँस के साथ मैसेज खत्म। अवनि ने सुना और मुस्कुरा उठी , पृथ्वी की आवाज से घबराहट साफ झलक रही थी , अवनि के नाम के साथ उसकी सांसो का भारीपन भी था और आखिर में उसका गहरी साँस लेना। अवनि ने महसूस किया कि पृथ्वी सच में मासूम लड़का था जिसे वह परेशान कर रही थी। पृथ्वी ने 10 बार अवनि का नाम ऐसे लिया जैसे उसे कोई पनिशमेंट मिली हो।  


– तुम इतना घबराये हुए क्यों हो ?
“वो आपका नाम लिया न इसलिए”
– तुम्हे किसी ने बताया कि तुम थोड़े अजीब हो ?
“नहीं , लेकिन मैं आपसे इस तरह बात नहीं कर सकता प्लीज दोबारा ये सब करने के लिए मत कहना”
– ठीक है , वैसे तुम्हारी उम्र कितनी है ?
“इस साल 29 का हो जाऊंगा”


– मतलब मैं तुम से दो साल बड़ी हूँ
“इसीलिए तो मैं आपको तुम नहीं बुलाना चाहता था”
– तुम अजीब के साथ साथ थोड़े पागल भी हो
“शायद हाँ , वैसे आपने लंच में क्या खाया ?”
 – गंवार फली और चपाती
“गंवार फली कौन खाता है ? मुझे ये बिल्कुल पसंद नहीं है। ये भी कोई खाना होता है , खाना तो होता है जैसे चिकन नूडल्स , कबाब , चिकन करी,,,,,,,!!”

– तुम नॉनवेज खाते हो ?
“हाँ , मुझे चिकन नूडल्स बहुत पसंद है और आपको आपने कभी खाया है ?”
– मैं वेजेटेरियन हूँ ये सब नहीं खाती , तुम भी मत खाया करो पता है जीवो को खाना कितना बड़ा पाप है। तुम्हे ये सब नहीं खाना चाहिए
“तो फिर मुझे क्या खाना चाहिए ?”
– बहुत कुछ है करेला , लौकी , भिंडी , गंवार फली तुम ये सब भी खा सकते हो


“मैं ये सब नहीं खाता और गंवार फली तो बिल्कुल नहीं , मैं कभी अपनी जिंदगी में नहीं खाऊंगा”
– हाँ ! गंवार लोग गंवार फली नहीं खाते
अवनि का जवाब पढ़कर पृथ्वी कुछ देर के लिए खामोश हो गया। अवनि सीधे सीधे उसे गंवार कह रही थी। पृथ्वी कुछ देर रुका और फिर लिखकर भेजा “आप मुझे गँवार कह रही है ?”
– हाँ ! अगर तुम नहीं हो तो फिर तुम्हे गंवार खानी चाहिए
“खा लूंगा किसी दिन”


– अरे वाह ! अभी तो कह रहे थे पसंद नहीं है , इतनी जल्दी खाने को तैयार हो गए
“आप कहेंगी तो खा लूंगा”
– ठीक है फिर मैं कह रही हूँ , आज तुम घर जाकर गंवार की सब्जी खाओगे
“आज तो हमारी घर पर नहीं है”
– कोई बात नहीं ! ऑफिस से घर जाते हुए खरीदकर ले जाना
“मैं फिर कभी खा लूंगा पक्का”
– फिर कभी नहीं आज या कल में ही तुम्हे खाना पड़ेगा , तुमने कहा ना मैं कहूँगी तो खाओगे तो समझ लो ये मेरा आर्डर है


अवनि ने बस मजाक मजाक में ये कहा , उसे पृथ्वी से ऐसी जिद करके अच्छा लग रहा था हालाँकि वह नहीं चाहती थी पृथ्वी उसकी ऐसी कोई बात माने फिर भी उसने मजाक मजाक में ये कह दिया और ऑफलाइन चली गयी ! अपने केबिन में बैठे पृथ्वी ने हाथ में पकड़ा अपना फोन अपने ललाट पर मारा और धीरे से बड़बड़ाया,”तू तो गया काम से,,,,,,!!”

( क्या पृथ्वी को होने लगी है अवनि की आदत ? क्या सच में पृथ्वी की जिंदगी में आएगा ऐसा कोई पल जब उसे लेनी पड़ेगी जयदीप की मदद ? क्या अवनि के कहने पर पृथ्वी खाने वाला है गंवार फली या कर देगा इंकार ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

अरे वाह ! अभी तो कह रहे थे पसंद नहीं है , इतनी जल्दी खाने को तैयार हो गए
“आप कहेंगी तो खा लूंगा”
– ठीक है फिर मैं कह रही हूँ , आज तुम घर जाकर गंवार की सब्जी खाओगे
“आज तो हमारी घर पर नहीं है”
– कोई बात नहीं ! ऑफिस से घर जाते हुए खरीदकर ले जाना
“मैं फिर कभी खा लूंगा पक्का”
– फिर कभी नहीं आज या कल में ही तुम्हे खाना पड़ेगा , तुमने कहा ना मैं कहूँगी तो खाओगे तो समझ लो ये मेरा आर्डर है

Pasandida Aurat
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