Pasandida Aurat – 106

Pasandida Aurat – 106

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से रवि जी की तरफ देखा , उसने सोचा नहीं था घर में किसी को ये सब पता चलेगा। पृथ्वी को खामोश देखकर रवि जी ने कहा,”तुम उस लड़की से मिलने गए थे शायद,,,,,,,,,,!!!”
ये सुनकर पृथ्वी और ज्यादा हैरान हुआ और थोड़ा परेशान भी कि कही घरवाले फिर से अवनि को गलत ना समझ ले। पृथ्वी को खामोश देखकर रवि जी ने कहा,”पृथ्वी ! क्या सच में वो लड़की तुम्हारे लिए हम सब से ऊपर है ?

तुम्हारी आई से किये वादे से ऊपर है ? मैं समझ सकता हूँ कि तुम और तुम्हारा प्यार गलत नहीं है लेकिन क्या तुम ये बात बाकि सबको समझा पाओगे ? अगर लता को इस बारे में पता चला तो क्या वो तुम्हे कभी माफ़ कर पायेगी ? एक लड़की के लिए तुम खुद को चोट कैसे पहुचा सकते हो पृथ्वी ?”

पृथ्वी ने अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा,”वो सिर्फ एक लड़की नहीं है बाबा,,,,,,,,,,,वो मेरे लिए क्या है ये बात मैं आप सबको नहीं समझा पाऊंगा,,,,,,,मेरी वजह से आपको और आई को जो तकलीफ हुई उसके लिए मैं माफ़ी चाहता हूँ लेकिन मैं उसे नहीं भूल सकता बाबा”

“ह्म्म्मम्म ! रात बहुत हो गयी है आराम करो,,,,,,,,,!!”,कहकर रवि जी वहा से चले गए। पृथ्वी ने दरवाजा बंद किया और अपने कमरे में सोने चला आया। नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी , उसकी आँखों में भरे आँसू कनपटी पर बह गए और आँखों के सामने चलने लगा वो पल जब सिद्धार्थ अवनि के करीब था।

इस रात के बाद सब बदल गया। अवनि पहले से ज्यादा उदास और दुखी रहने लगी ,, हालाँकि घर में सब उसका ख्याल रखते ,उसके इर्द गिर्द रहते लेकिन विश्वास जी के चले जाने का गम कम होने के बजाय बढ़ता ही गया। अवनि की हालत देखते हुए कौशल चाचा ने उसे उदयपुर में रख लिया , वही सुरभि को अपनी जॉब के चलते वापस सिरोही जाना पड़ा काम में व्यस्त होने की वजह से उसकी अवनि से भी कम ही बात हो पाती थी।

अवनि को दुःख था कि सब उस से मिलने आये लेकिन पृथ्वी ने एक बार भी उस से उसके पापा के बारे में नहीं पूछा ,, सिद्धार्थ सिरोही में रहकर अवनि के आने का इंतजार करने लगा। वह हर रोज मंदिर जाता इस उम्मीद में कि अवनि से मुलाकात होगी और बार निराश लौट आता।  

पृथ्वी ने एक बार फिर खुद को अपने काम में व्यस्त कर लिया। वह अवनि को नहीं भूल सकता था लेकिन उसे लेकर अब वह अपने घरवालों का दिल दुखाना नहीं चाहता था। जो हो रहा था उसे अपनी नियति मानकर पृथ्वी ने जीना शुरू कर दिया। वह अब ज्यादा से ज्यादा वक्त रवि जी और लता के साथ बिताता , पहले की तरह खुश रहता या यू कहे खुश रहने का नाटक करता , सुरभि से भी उसने कह दिया कि वह अवनि को उसके बारे में कुछ ना बताये और अवनि को अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने दे।

विश्वास जी पृथ्वी की आखिरी उम्मीद थे जो अवनि के लिए पृथ्वी को चुन सकते थे लेकिन अब वे भी इस दुनिया में नहीं रहे। वक्त बीतने लगा , हफ्ते गुजरे , महीने गुजरे और देखते ही देखते 4 महीने गुजर गए। वक्त के साथ अवनि ने खुद को सम्हाल लिया लेकिन नौकरी छोड़ दी , उसने फैसला किया कि वह अब हमेशा के लिए उदयपुर में ही रहेगी। अवनि के लिए ये फैसला लेना मुश्किल था लेकिन अब वह अकेले रहकर जिंदगी जीना नहीं चाहती थी। कौशल और मयंक ने उसके फैसले का सम्मान किया उसे अपने साथ ही रखा ताकि सबके बीच रहकर अवनि के घाव भर जाए।

 इन चार महीनो में सिद्धार्थ अवनि से नहीं मिला ना बस कभी कभार उसकी फ़ोन पर अवनि से बात हो जाया करती थी। वह सिर्फ अवनि से उसके हाल चाल पूछता और उसे अपना ख्याल रखने को कहता , सिद्धार्थ पूरी तरह से बदल चुका था वह अब पहले की तरह अवनि पर अपने विचार नहीं थोपता था वह बस ख़ामोशी से अवनि के लौटने का इंतजार कर रहा था। वही पृथ्वी भी ना दोबारा उदयपुर आया और ना ही अवनि से कभी उसकी बात हुई। बस सुरभि हर महीने अवनि से मिलने आती रही।

एक सुबह अवनि घर में बने मंदिर में पूजा करके उठी ही थी कि तभी डोरबेल बजी। अवनि दरवाजे की तरफ आयी और दरवाजा खोला तो सामने खड़े लोगो को देखकर हैरान रह गयी। दरवाजे के उस पार , अवनि के सामने , सिद्धार्थ के मम्मी पापा और सिद्धार्थ खड़ा था। सिद्धार्थ के मम्मी पापा को देखकर अवनि ने हाथ जोड़कर उन्हें नमस्ते कहा तो सिद्धार्थ की मम्मी ने आगे बढ़कर अवनि के गाल को छुआ और प्यार से कहा,”कैसी हो अवनि ?”

“मैं ठीक हूँ , अंदर आईये”,अवनि ने साइड होकर कहा। सिद्धार्थ के मम्मी पापा अंदर चले गए सिद्धार्थ अवनि के सामने आया और कहा,”थैंक्यू अवनि ! मुझे एक मौका देने के लिए,,,,,,,,,,,,,!!”
अवनि ने बुझी आँखों से सिद्धार्थ को देखा और फिर उसके साथ अंदर चली गयी।

सिद्धार्थ के मम्मी पापा हॉल में आ बैठे , अवनि भी सिद्धार्थ के साथ अंदर चली आयी। कौशल चाचा , मयंक चाचा , सीमा चाची , मीनाक्षी , कार्तिक और दीपिका हॉल में मौजूद थे। पिछले एक महीने से कौशल चाचा अवनि की शादी को लेकर लड़के देख रहे थे और यही वजह थी कि अवनि ने विश्वास जी के कहे आखरी शब्दों को याद रखा और सिद्धार्थ को चुना क्योकि सिरोही में पहली बार अवनि सिद्धार्थ से ही मिली थी और सिद्धार्थ उसे प्यार करता था और शादी भी करना चाहता था।  

विश्वास जी ने अपने आखरी वक्त में जिस शख्स की बात की वो पृथ्वी था लेकिन अवनि समझ नहीं पायी , यहाँ अवनि की गलती नहीं है उसे पता ही नहीं था कि पृथ्वी उसके पापा और घरवालों से मिल चुका है और पृथ्वी के सिरोही आने के बारे में विश्वास जी जानते थे। पृथ्वी अवनि की जिंदगी से एक साल पहले ही जा चुका था और उसके बाद अवनि की उस से कोई बात नहीं हुई , विश्वास जी भी अवनि को छोड़कर दुनिया से चले गए और इन दोनों बातो ने अवनि को तोड़कर रख दिया।

अब उसे जिंदगी जीने के लिए बस एक सहारे की जरूरत थी और अब वह सहारा सिद्धार्थ था जिसे अवनि के हिसाब से विश्वास जी ने चुना था और यही वजह थी कि अवनि ने सिद्धार्थ को एक मौका दिया और आज सिद्धार्थ अपने माँ-बाप के साथ अवनि के घर में था।

“भाईसाहब ! आप सब तो सिद्धार्थ से पहले भी मिल चुके है और अवनि बिटिया को तो हम पिछले 2 साल से जानते है। बहुत ही प्यारी बच्ची है। आप सब तो जानते ही है कि सिद्धार्थ और अवनि एक दूसरे को पसंद करते है तो क्यों न इस पसंद को रिश्ते में बदल लिया जाए। मैं अपनी पत्नी के साथ अवनि के लिए सिद्धार्थ का रिश्ता लेकर आया हूँ , अगर आप सबको कोई ऐतराज न हो तो हम अवनि को अपने घर की बहू बनाना चाहते है”,जगदीश जी ने कहा
अपने पापा की बात सुनकर सिद्धार्थ धीरे से मुस्कुराया

आखिर इतने इंतजार के बाद आज अवनि उसकी जिंदगी में शामिल जो होने जा रही थी। कौशल चाचा और मयंक ने सुना तो ख़ुशी से मुस्कुराये उन्हें भला क्या ऐतराज हो सकता था।  मीनाक्षी और सीमा भी खुश हो गयी , विश्वास जी के जाने के बाद आज पहली बार इस घर के लोग मुस्कुराये थे।

सब खुश थे बस दीपिका के चेहरे पर उलझन और परेशानी के भाव थे। दीपिका ने जैसे ही अवनि के रिश्ते की बात सुनी उसकी आँखों के सामने पृथ्वी का चेहरा आ गया। वो लड़का जो बिना किसी स्वार्थ के इस घर में आया था और अवनि के लिए परवाह जताई वो यू ही तो नहीं थी। लेकिन दीपिका बड़ो के बीच कुछ नहीं बोल पायी।

अवनि को खामोश देखकर कौशल चाचा ने कहा,”अवनि ! तुम बताओ बेटा तुम क्या कहती हो ? देखो कोई जोर जबरदस्ती नहीं है तुम्हारी हाँ हो तो ही इस रिश्ते को आगे बढ़ाएंगे”
अवनि ने एक नजर सबको देखा और अपना दिल कठोर करके कहा,”जैसा आप सबको ठीक लगे चाचाजी”
अवनि की हाँ सुनकर सबके चेहरे ख़ुशी से खिल उठे , गिरिजा उठी और अवनि के पास चली आयी।

उन्होंने अपनी कलाई से कंगन निकाला और अवनि की कलाई में पहना दिया ये देखकर ना जाने क्यों अवनि को घुटन और तकलीफ का अहसास हुआ उसकी आँखों में आँसू भर आये लेकिन उसने अपने आँसुओ को आँखों में ही रोक लिया।

गिरिजा ने अवनि को सोफे पर अपने बगल में बैठा लिया। दूसरी तरफ बैठा सिद्धार्थ प्यार भरी नजरो से अवनि को देख रहा था। अवनि को लेकर उसका प्यार और सम्मान बढ़ चुका था और इसमें कोई शक नहीं था कि सिद्धार्थ में ये बदलाव अवनि की वजह से ही था। मीनाक्षी और सीमा किचन में चली गयी और सबके लिए चाय नाश्ता ले आयी। कौशल ने अवनि से सबको चाय देने को कहा। अवनि उठी उसने सिद्धार्थ के मम्मी पापा को चाय दी और इस दौरान उसकी पलकें झुकी हुई थी। अवनि ने चाय का कप उठाया और सिद्धार्थ की तरफ बढ़ा दिया।  

सिद्धार्थ ने जैसे ही कप लेने के लिए हाथ बढ़ाया अवनि की आँख से छलक कर आँसू सिद्धार्थ के हाथ पर आ गिरा। सिद्धार्थ ने देखा अवनि की आँखों में आँसू है तो उसका मन बैचैन हो गया। उसने मुश्किल से चाय खत्म की और कप रखकर कौशल से कहा,”अंकल ! अगर आप परमिशन दे तो मैं एक बार अवनि से अकेले में बात करना चाहता हूँ”

अवनि ने सुना तो हैरानी से सिद्धार्थ को देखने लगी।
“हाँ हाँ क्यों नहीं , अवनि बेटा सिद्धार्थ को घर दिखा दो”,कौशल चाचा ने कहा तो अवनि सिद्धार्थ के साथ सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी।

अवनि सिद्धार्थ के साथ घर की छत पर चली आयी। सिद्धार्थ छत की दिवार से पीठ लगाकर खड़ा हो गया और अपने हाथो को बांधकर अवनि की तरफ देखने लगा। अवनि खामोश थी और सिद्धार्थ की तरफ ना देखकर दूसरी तरफ देख रही थी। सिद्धार्थ ने महसूस किया नीचे हुई सभी बातो के दौरान एक बार भी अवनि के होंठो पर मुस्कान नहीं थी ना ही चेहरे पर ख़ुशी थी। कुछ देर खामोश रहने के बाद सिद्धार्थ ने कहा,”अवनि ! अगर बुरा ना मानो तो एक बात पुछु ?”

“हम्म्म्म !”,अवनि ने धीरे से कहा
“तुमने मुझे शादी के लिए हाँ क्यों कहा ?”,सिद्धार्थ ने पूछा
अवनि ने एक नजर सिद्धार्थ को देखा और कहा,”घरवाले चाहते थे मैं शादी कर लू , किसी अनजान से शादी करने से अच्छा था मैं तुम्हे हाँ कह दू”
“इसका मतलब तुमने मुझ पर अहसान किया अवनि ये जानते हुए भी कि मैंने तुम्हारे साथ बुरा बर्ताव किया , तुम्हे तकलीफ दी , रुलाया , उसके बाद भी तुमने मुझे माफ़ कर एक मौका और दिया”,सिद्धार्थ ने उदासी भरे स्वर में कहा

“नहीं मैं इसे अहसान नहीं कहुंगी सिद्धार्थ , जिंदगी बिताने के लिए एक सहारे की जरूरत सबको होती है”,अवनि ने दार्शनिक अंदाज में कहा
सिद्धार्थ दिवार से हटकर अवनि के ठीक बगल में आकर खड़ा हो गया और कहने लगा,”अवनि ! मैं नहीं चाहता तुम किसी भी दबाव या मज़बूरी में मुझसे शादी करो , मैं जानता हूँ कि मैंने तुम्हारा दिल तोडा है , तुम्हे ठेस पहुंचाई है लेकिन अब , अब मैं बदल गया हूँ अवनि मुझे सिर्फ तुम्हारी ख़ुशी चाहिए और देखना बहुत जल्द मैं तुम्हारा ये ख्याल भी बदल दूंगा कि तुमने मुझसे शादी करके खुद पर या मुझ पर अहसान किया है”

अवनि ने सुना तो बुझी आँखों से सिद्धार्थ की तरफ देखने लगी। आज वह किसी और ही सिद्धार्थ से मिल रही थी , जिस सिद्धार्थ को अवनि जानती थी वह सिद्धार्थ तो कोई और था लेकिन आज उसके बगल में खड़ा सिद्धार्थ उसकी खुशियों की बात कर रहा था। अवनि कुछ देर खामोश रही और कहा,”मैं इस रिश्ते से खुश हूँ सिद्धार्थ”

सिद्धार्थ ने सुना तो मुस्कुराया और कहा,”अगर ऐसा है तो फिर तुम्हारे चेहरे पर ये उदासी क्यों है ?”
“अब ठीक है”,अवनि ने बड़ी सी मुस्कराहट अपने होंठो पर लाकर कहा तो सिद्धार्थ ने हामी में गर्दन हिला दी।
“चले ?”,सिद्धार्थ ने अपना हाथ अवनि की तरफ बढाकर कहा
अवनि ने काँपते हाथ से सिद्धार्थ का हाथ थामा और आगे बढ़ गयी। उसने सिद्धार्थ को हाँ कह दिया लेकिन ये हाँ उसने कैसे कहा ये बस उसका दिल ही जानता था।

दोनों नीचे चले आये और कुछ देर बाद कौशल और सीमा ने मिलकर सिद्धार्थ का तिलक किया और उसे नारियल देकर रिश्ता पक्का कर दिया। जगदीश और गिरिजा ने भी मिलकर अवनि को तिलक किया नारियल दिया और आशीर्वाद देकर रिश्ता पक्का कर दिया।

दो महीने बाद की शादी और सगाई एक साथ तय हो गयी , सबने एक दूसरे को मिठाई खिलाई और बधाईया दी। दीपिका को ये अवनि का ये फैसला अच्छा नहीं लगा और वह वहा से चली गयी। दोपहर के खाने के बाद शाम में सिद्धार्थ अपने मम्मी पापा के साथ वापस सिरोही के लिए निकल गया।

उसी शाम अपने कमरे में स्टडी टेबल के सामने बैठी अवनि खाली आँखों से सामने पड़े खाली खत और पेन को देखे जा रही थी। हर बार की तरह वह आज भी पृथ्वी के लिए खत लिखने जा रही थी। सिद्धार्थ से शादी करने का फैसला अवनि ने भावनाओ में बहकर नहीं बल्कि सोच समझकर किया था। वह चाहती थी पृथ्वी उसे भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाए और ये तभी मुमकिन था जब पृथ्वी अवनि को किसी और से शादी करते देखे।

पृथ्वी के घरवालों के खिलाफ जाकर अवनि उस से शादी नहीं कर सकती थी और जब तक अवनि रहेगी पृथ्वी किसी और से शादी नहीं करेगा यही सब सोचकर अवनि ने एक कठिन फैसला किया और वो था सिद्धार्थ से शादी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!
अवनि ने पेन उठाया और पृथ्वी के लिए खत लिखने लगी , पृथ्वी के लिए खत लिखते हुए अवनि अक्सर अपना दिमाग साइड में रख देती थी और सिर्फ दिल से उसके लिए खत लिखा करती थी।

आज खत लिखते हुए कितनी ही बार उसकी आँखों में भरे आँसू उस खत पर गिरे और शब्दों की स्याही फैली लेकिन अवनि ने उस खत को लिखना जारी रखा। खत लिखकर उसने उसे लिफाफे में बंद किया और दराज में रख दिया। सिरोही में लिखे खत भी अवनि ने इसी दराज में सम्हालकर रखे थे।

रात के खाने के समय सभी अवनि की शादी की तैयारियों को लेकर बाते कर रहे थे बस अवनि ही ख़ामोशी से सब सुन रही थी।

दिन गुजरने लगे। देखते ही देखते दो हफ्ते गुजर गए। शादी में अब बस डेढ़ महीना बचा था अवनि ने कौशल से पहले ही कह दिया कि वह बहुत ही सामान्य शादी चाहती है और किसी तरह का शोर शराबा या ताम झाम नहीं चाहती। विश्वास जी को गुजरे अभी 6 महीने ही हुए थे इसलिए घरवालों ने भी अवनि की बात मान ली। एक सुबह सुरभि घर आयी उसने जब घर में तैयारियां देखी तो सामने से आती सलोनी से पूछा,”अरे सलोनी ! दीपिका की शादी तय हो गयी क्या ? ये घर में इतनी तैयारियां”

“लो आपको नहीं पता , अरे दीपिका दीदी की नहीं बल्कि अगले महीने आपकी बेस्ट की शादी है,,,,,,,,,,उसने आपको भी नहीं बताया न , जाओ अंदर जाकर अच्छे से खबर लो उनकी”,सलोनी ने कहा और अपने बुक्स उठाये वहा से चली गयी

सुरभि ने जैसे ही अवनि की शादी के बारे में सुना हैरान रह गयी। उसे अपने कानो पर यकीन ही नहीं हुआ क्योकि ना अवनि ने उसे फ़ोन करके ये सब बताया ना ही उसने सुरभि से इस बारे में कभी बात की फिर अचानक से शादी,,,,,,,,,,,,,वह अंदर चली आयी और मीनाक्षी से अवनि के बारे में पूछा तो मीनाक्षी ने सुरभि को छत पर जाने को कहा।

सुरभि छत पर चली आयी देखा अवनि अकेले खड़ी है तो वह उसके पास आयी और कहा,”ये सब क्या है अवनि , तुम शादी कर रही हो और तुमने मुझे बताया तक नहीं और ये सब छोडो सबसे पहले ये बताओ तुम किस से शादी कर रही हो कही तुम्हारे चाचा चाची ने फिर तो तुम्हारे साथ कोई जोर जबरदस्ती तो नहीं की ना अवनि,,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि की बात सुनकर अवनि एकटक उसे देखने लगी। अवनि की ख़ामोशी सुरभि की बेचैनी को और बढ़ा रही थी इसलिए उसने कहा,”चुप मत रहो अवनि , बताओ मुझे आखिर तुम किस से शादी करने जा रही हो ?”

“मैं सिद्धार्थ से शादी कर रही हूँ सुरभि”,अवनि ने बिना किसी भाव के सहजता से कहा
सुरभि ने जैसे ही अवनि के मुँह से सिद्धार्थ का नाम सुना उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गयी। अवनि ऐसा कोई फैसला लेगी सुरभि ने सपने में भी नहीं सोचा था। वह फटी आँखों से अवनि को देखने लगी

( क्या पृथ्वी कर लेगा पूरी तरह से खुद को अवनि से दूर ? क्या सिद्धार्थ से शादी का करने का फैसला लेकर अवनि ने कर दी कोई भूल ? क्या सुरभि बताएगी अवनि को पृथ्वी का सच या निभाएगी पृथ्वी से किया वादा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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