Pasandida Aurat – 101

Pasandida Aurat – 101

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

सभी हॉल में जमा थे और जब अवनि ने उनसे किसी के आने के बारे में पूछा तो सभी एक दूसरे को देखने लगे क्योकि पृथ्वी ने सबसे वादा जो लिया था। सबको खमोश देखकर अवनि के चेहरे पर उलझन के भाव झिलमिलाने लगे ये देखकर विश्वास जी ने कहा,”नहीं बेटा यहाँ कौन आएगा ?”
“मेरे कमरे की दिवार पर एक तस्वीर नहीं है पापा”,अवनि ने कहा
“वो शायद दिवाली की सफाई में इधर उधर हो गयी होगी , मिल जाएगी”,विश्वास जी ने कहा

अवनि को हालाँकि उनकी बात पर विश्वास तो नहीं हुआ लेकिन फिर भी उसने मान लिया और अपने कमरे में जाने लगी तभी सुरभि ने कहा,”अवनि रुको ! मैं भी आती हूँ”
सुरभि अवनि के साथ उसके कमरे में चली आयी तो अवनि ने सुरभि को दिवार से गायब अपनी बचपन की तस्वीर के बारे में बताया जो अब वहा नहीं थी। सुरभि ने सुना तो उसका शक सीधा पृथ्वी पर गया क्योकि वही था जो ऐसा कर सकता था। सुरभि ने अपनी बात से अवनि का ध्यान उस तस्वीर से हटाया और अवनि फ्रेश होने चली गयी।

अवनि के जाते ही सुरभि कमरे की बालकनी में आयी और पृथ्वी का नंबर डॉयल किया , आखरी बार जब सुरभि पृथ्वी से मिली थी तब उसने उसका नंबर ले लिया था। एक दो रिंग के बाद पृथ्वी ने फोन उठाया वह अपने ऑफिस में था
पृथ्वी के फोन उठाते ही सुरभि ने ना हेलो कहा ना कुछ और सीधा बोली,”ए पृथ्वी तुमने अवनि के कमरे से उसका फोटो चुराया था ?”

“तुम मुझे चोर कह रही हो ?”,पृथ्वी ने जवाब देने के बजाय सवाल किया
“अह्ह्ह मैं बस पूछ रही हूँ क्या तुमने ऐसा किया है ?”,सुरभि ने कहा
पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और फिर ,मासूमियत भरे स्वर में धीरे से कहा,”हाँ ! मैंने उसकी तस्वीर चुराई है , एक्चुली वो उसकी बचपन की तस्वीर थी और उसमे वो बहुत प्यारी लग रही थी इसलिए मैं उस तस्वीर को अपने साथ ले आया”

“वाह वाह वाह मेरे पूकी आशिक़ , तुम तो अवनि के प्यार में पूरा पागल हो चुके हो,,,,,,,,,,ऐसा क्या दिख गया तुम्हे उस तस्वीर में ?”,सुरभि ने पृथ्वी को ताना मारते हुए कहा
“हाह ! तुम नहीं समझोगी , वैसे तुम्हे ये सब कैसे पता तुम अवनि के घर पर हो क्या ?”,पृथ्वी ने पूछा

“जी हाँ और सिर्फ मैं ही नहीं अवनि भी अपने घर पर है”,सुरभि ने कहा
“क्या ? सच में ?”,पृथ्वी ने जैसे ही सुना ख़ुशी से भरकर ऊँचे स्वर में कहा और कुर्सी से गिरते गिरते बचा , अगले ही पल पृथ्वी ने देखा उसकी टीम के सभी लोग उसे ही देख रहे है तो वह उठा और चुपचाप केबिन से बाहर निकल गया। पृथ्वी केंटीन की तरफ आया और फोन कान से लगाकर कहा,”अवनि अपने घर में है ?”
“हाँ पृथ्वी और इसके लिए मैं तुम्हे जितनी बार थैंक्यू कहू कम होगा , तुम्हारी वजह से ही आज अवनि इतने वक्त बाद अपने घर में है”,सुरभि ने भावुक होकर कहा

पृथ्वी ने सुना तो उसके होंठो पर प्यारी सी मुस्कान तैर गयी लेकिन साथ ही उसकी आँखों में भी नमी थी। उसने जो सोचा था वही हुआ , अवनि के घरवालों ने अवनि को माफ़ करके वापस अपना लिया था और इस से बड़ी ख़ुशी की बात भला क्या हो सकती थी ?
“और अवनि ? वो खुश है ना ?”,पृथ्वी ने काँपते स्वर में पूछा
“बहुत खुश है , तुमने उसे वो ख़ुशी दी है पृथ्वी जो आज तक कोई नहीं दे पाया”,सुरभि ने कहा
“वो ये ख़ुशी डिजर्व करती है सुरभि , इस से भी ज्यादा डिजर्व करती है”,पृथ्वी ने कहा

“और तुम ? क्या तुम अवनि को डिजर्व नहीं करते ?”,सुरभि ने पृथ्वी का मन टटोलते हुए कहा
सुरभि की बात सुनकर पृथ्वी खामोश हो गया क्योकि वह जानता था उसके और अवनि के बीच में उसकी किस्मत खड़ी है , वह सुरभि के इस सवाल का जवाब देना नहीं चाहता था इसलिए खामोश रहा। सुरभि उसकी ख़ामोशी को बखूबी समझ रही थी इसलिए उसने पृथ्वी को और हर्ट ना करने का सोचकर कहा,”मैं महादेव से प्रार्थना करुँगी कि वो अवनि को सिर्फ तुम्हारी किस्मत में लिखे”

“महादेव ही तो नहीं सुन रहे,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने निराशा भरे स्वर में कहा
“अरे सुनेंगे पृथ्वी बाबू और ऐसा सुनेंगे कि एक दिन आप भी अवनि के “पसंदीदा मर्द” बन जायेंगे”,सुरभि ने इतरा कर कहा
पृथ्वी ने सुना तो हसने लगा सुरभि के पीछे आकर अवनि ने कहा,”किस पसंदीदा मर्द की बात कर रही हो तुम ?”
अवनि को वहा देखकर सुरभि ने जल्दी से फोन काटा जिस से अवनि को पता न चले कि वह पृथ्वी से बात कर रही है , सुरभि अवनि की तरफ पलटी और कहा,”अब मेरी जिंदगी में एक ही तो मर्द है अवनि सोच रही हूँ उसे ही अपना पसंदीदा बना लू”

“हाह ! कुछ भी बोलती हो ना तुम,,,,,,,,आओ चलो मैं सबके लिए कुछ लेकर आयी हूँ , चलकर सबको देते है”,अवनि ने सुरभि की कलाई पकड़कर उसे साथ ले जाते हुए कहा
 ऑफिस केंटीन में खड़े पृथ्वी के कानों में सुरभि के कहे आखरी शब्द गूँज रहे थे “अरे सुनेंगे पृथ्वी बाबू और ऐसा सुनेंगे कि एक दिन आप भी अवनि के “पसंदीदा मर्द” बन जायेंगे”

पृथ्वी मुस्कुराया और खुद में ही बड़बड़ाने लगा,”आह ! कब आएगा वो दिन जब अवनि मुझे अपना “पसंदीदा मर्द” समझेगी , जब वो मेरे सामने बैठी खुलकर अपने दिल का हाल बयां करेगी और मैं अपना हाथ अपने गाल से लगाये उसकी बातें सुना करूंगा ,, वो दिनभर भी बात करेगी तब भी मैं उसकी बातो से बोर नहीं होने वाला बल्कि मैं तो चाहूंगा वो मुझसे बहुत सारी बाते करे। कब आएगा वो दिन जब वो मेरी कही हर बात मानेगी बिना किसी ना नुकर के , हर छोटी छोटी बात के लिए मुझ पर हक़ जतायेगी ,

मेरी पसंद का खाना बनाएगी कभी कभी मुझे अपने हाथ से खिला भी दिया करेगी,,,,,मेरे शर्ट के रंग से मैच करके साड़ी पहनेगी और मेरी शर्ट की कोलर सही करके कहेगी “अच्छे लग रहे हो” अह्ह्ह्ह उस वक्त मैं कितना शरमा रहा होंउंगा,,,,!!”
कहते हुए पृथ्वी पलटा और अपने पीछे खड़े जयदीप से टकरा गया।
जयदीप को देखते ही पृथ्वी के होंठो की मुस्कुराहट गायब हो गयी और वह इधर उधर देखने लगा।

जयदीप पूरी बात तो नहीं सुन पाया लेकिन आखरी कुछ शब्द सुने और समझ गया कि हमेशा की तरह पृथ्वी आज भी अवनि के बारे में सोचते हुए खुद से बात कर रहा है तो उसने पृथ्वी को छेड़ते हुए कहा,”तुम्हे देखकर लगता तो नहीं कि तुम कभी शरमाते भी होंगे,,,,,,,,और शरमाओगे तो तब न जब तुम्हारे शर्ट की कोलर सही करने वाली तुम्हारी जिंदगी में आएगी , तुम्हारी स्पीड देखकर तो लग रहा है बुढ़ापे में तुम उसे शादी के लिए प्रपोज करोगे और उसके बाद,,,,,,,,,,,!!”

“उसके बाद ?”,पृथ्वी ने हैरानी से पूछा
“उसके बाद दोनों बैठकर एक दूसरे की पेंशन के पैसे गिनना,,,,,,,,,!!”,जयदीप ने उखड़े स्वर में कहा  
पृथ्वी ने सुना तो जयदीप को घूरने लगा और कहा,”मैं 70 साल का हो जाऊंगा तब भी वो मुझे उतनी ही पसंद होगी जितनी आज है”
“वही तो मैं कह रहा हूँ पृथ्वी जो आज पसंद है उसे अपनी जिंदगी में कब शामिल करोगे 70 साल बाद ? तब न जिंदगी में रोमांस रहेगा ना ही,,,,,,,,,!!”,जयदीप ने कहा लेकिन अपनी बात पूरी नहीं की

“देखिये सर आप मुझसे इस तरह की बातें मत कीजिये समझे आप”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“मैंने क्या गलत कहा शादी के बाद प्यार होता है , रोमांस होता है , बच्चे होते है , जिंदगी स्वर्ग बन जाती है,,,,,,,,,,क्या तुम्हे ये सब नहीं चाहिए ?”,जयदीप ने पृथ्वी को घूरकर कहा
बेचारा पृथ्वी ये सब बाते सुनकर ही शरमा गया और कहा,”मैंने अभी ये सब के बारे में नहीं सोचा है और आप , आप मुझसे ये सब बाते मत कीजिये”

“क्या होगा तुम्हारा ? तुम्हे तो रोमांस का R भी नहीं पता ,, वैसे चिंता मत करो मैं तुम्हे सब सीखा दूंगा”,जयदीप ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा क्योकि आज के मॉर्डन ज़माने में भी पृथ्वी बहुत पीछे था
“No Thankyou ! मुझे कुछ नहीं सीखना,,मेरे लिए रोमांस का मीनिंग कुछ और है”,पृथ्वी ने कहा और जाने लगा तो जयदीप ने कहा,”अच्छा जरा मैं भी तो सुनु”
पृथ्वी पलटा और कहा,”वक्त आने पर दिखा दूंगा”

“हाहाहा मैं इंतजार करूंगा बिकॉज आई लव योर लव स्टोरी,,,,,,,,!!”,जयदीप ने हँसते हुए कहा और पृथ्वी वहा से चला गया
जयदीप पृथ्वी को जाते देखकर कहा,”क्या अजीब लड़का है ये , आज के ज़माने में जहा लड़के एक दो मीटिंग में ही लड़की के बैडरूम तक पहुँच जाते है ये रोमांस का नाम सुनकर ही भाग गया , हाह ! मुझे नहीं लगता ये आज तक किसी लड़की के करीब भी गया हो,,,,,,,,,,ओह्ह्ह पृथ्वी तुम ग्रीन फ्लेग नहीं पूरा का पूरा ग्रीन फारेस्ट हो,,,,,,,,,मैं अगर लड़की होता न तो मैं भी तुम्हे हाँ बोल देता”

“सर मैडम आयी है आपको बुलाया है”,रीमा ने आकर कहा
“ओह्ह्ह्ह मैं अपनी वाली को कैसे भूल गया ? चलो मैं आता हूँ”,कहकर जयदीप ने किसी क्लाइंट को फोन कर शाम की मीटिंग के बारे में बताया और अपने केबिन की तरफ चला गया  

सुख विलास भवन , उदयपुर
अवनि सबके लिए कुछ न कुछ लेकर आयी थी और हॉल में सबके बीच बैठकर उन्हें देने लगी। सभी बहुत खुश थे और सबसे ज्यादा खुश थी अवनि कि उसे सब घरवालों का इतना प्यार जो मिल रहा था। दोपहर के खाने के बाद सुरभि अपने घर चली गयी और अवनि भी आराम करने अपने कमरे में चली आयी। अवनि बिस्तर पर बैठी , उसका फोन उसके बगल में पड़ा था। उसने फोन उठाया और व्हाट्सप्प खोलकर कॉन्टेक्ट लिस्ट निकाली और स्क्रोल करने लगी।

पृथ्वी का नाम देखकर अवनि की उंगलिया रुक गयी उसने पृथ्वी की प्रोफाइल पिक्चर पर क्लिक किया आज तक पृथ्वी ने अपना प्रोफाइल पिक्चर नहीं बदला था। काले रंग की टीशर्ट पहने पृथ्वी आज भी उतना ही मासूम और प्यारा लग रहा था जिस पर लिखा था “Never Give Up” अवनि उस तस्वीर को देखकर मुस्कुराई और कहने लगी,”आज मैं बहुत खुश हूँ पृथ्वी , तुम साथ नहीं हो काश तुम साथ होते तो मैं तुम्हे अपनी ख़ुशी की वजह बताती , मैं उदयपुर में हूँ , अपने पापा के घर में , हाँ पृथ्वी पापा ने मुझे माफ़ कर दिया

सबसे मुझे इतना लाड-प्यार मिल रहा है , सब मेरे साथ खुश है बस तुम नहीं हो,,,,,,,,,तुम होते तो मैं तुम्हे दिखाती सब मुझसे कितना प्यार करते है,,,,,,,,,तुमने सही कहा था पृथ्वी एक दिन सब ठीक हो जाएगा,,,,,,,,,,सब ठीक हो गया है पृथ्वी और इसके लिए कही न कही तुम भी जिम्मेदार हो क्योकि तुमने ही मेरे मन में ये विश्वास जगाया है , तुमने ही मुझे ये अहसास दिलाया कि मैं एक बेहतर जिंदगी डिजर्व करती हूँ ,, सच कहू तो तुम्हारे साथ ने मुझे बहुत मजबूत बनाया है पृथ्वी लेकिन मैं इतनी मजबूर हूँ कि इन सबके लिए तुम्हे Thankyou भी नहीं कह सकती

चाहकर भी तुमसे बात नहीं कर सकती , डरती हूँ कही फिर से तुम्हारा दिल ना टूट जाये,,,,,,,,,,तुम हमेशा मेरे लिए ख़ास रहोगे पृथ्वी क्योकि तुमने मुझे मुझसे मिलाया हैम,,,,,,,,,,ऐसा कोई दिन नहीं गया जब मैंने तुम्हारे बारे में ना सोचा हो पर क्या तुम भी मुझे याद करते हो ? शायद नहीं अगर तुम्हे मेरी याद आती तो तुम अब तक लौट आते,,,,,,,हाह ! तुम मुझे भूल जाओ तो ही बेहतर है मुझे याद रख के सिर्फ तुम्हे तकलीफ होगी,,,,,,,,,,तकलीफ मुझे ना पाने की”

कहते कहते अवनि की आँखों में आँसू भर आये। उसने फोन साइड में रख दिया और बिस्तर पर लेट गयी। पृथ्वी का ख्याल उसके जहन में था जिसे अवनि चाहकर भी अपने जहन से निकाल नहीं सकती थी। उसने अपनी आँखे मूँद ली और सोने की कोशिश करने लगी।
नवी मुंबई , पृथ्वी का ऑफिस
“आहहहहहछी”,लेपटॉप के सामने बैठा पृथ्वी एकदम से छींका और इसके बाद उसे दो चार छींके लगातार आयी
“गॉड ब्लेस यू सर”,तान्या ने कहा

“अह्ह्ह थैंक्स”,पृथ्वी ने सुड़कते हुए कहा
“लगता है आपको सर्दी हो गयी है”,कशिश ने कहा
“अरे नहीं नहीं सर्दी से पृथ्वी सर का क्या लेना देना , मुझे तो लग रहा है कोई सर को बहुत ही सिद्दत से याद कर रहा है”,मनीष ने शरारत से कहा
पृथ्वी ने मनीष की तरफ देखा तो मनीष तुरंत पलटकर अपने कीबोर्ड पर उंगलिया चलाने लगा। पृथ्वी ने अपना रूमाल निकाला और अपने नाक पर रखकर फिर छींक दिया

“सर वैसे मनीष सर की बात में दम है , हो सकता है मीलों दूर बैठा कोई आपको याद कर रहा हो”,तान्या ने कहा
“मैं देख रहा हूँ तुम सब का प्रोजक्ट के अलावा हर चीज में ध्यान है , काम पर ध्यान दो”,पृथ्वी ने थोड़ा कठोरता से कहा तो तान्या और कशिश भी अपने अपने कम्प्यूटर की तरफ पलटकर काम करने लगी कशिश ने झुककर मनीष से कहा,”ये अचानक इनको क्या हो जाता है ?”

“कुछ नहीं ! लगता है इनको इनकी बीवी ही सुधारेगी”,मनीष ने भी दबी आवाज में कहा जो की पृथ्वी को सुन गया लेकिन पृथ्वी उस पर गुस्सा होने के बजाय अपने लेपटॉप की तरफ पलटा और मुस्कुराने लगा क्योकि मनीष की बात सुनकर उसे सहसा ही वो रात याद आ गयी जब अवनि की दी पनिशमेंट पूरी करने के लिए वह भाग रहा था।

पृथ्वी ने अपना ध्यान अपने काम पर लगा लिया लेकिन दिमाग में अब अवनि चल रही थी और साथ ही याद आ रहे थे उसे अवनि के साथ बिताये पल ,, साथ ही हुआ एक चमत्कार कि अवनि का ख्याल आते ही उसकी छींके भी अपनेआप बंद हो गयी और पृथ्वी समझ गया कि कही न कही वह भी अवनि के जहन में चल रहा है।

दिन गुजरने लगे अवनि अपने घरवालों के साथ खुश थी और उनके साथ रहते हुए वह लगभग अपना हर दुःख भूल चुकी थी। दिनभर वह सबसे घिरी रहती और शाम में विश्वास जी के साथ वाक पर जाती थी जिस से उसे अपने पापा के साथ अकेले में वक्त बिताने का थोड़ा मौका मिले। वही दूसरी तरफ पृथ्वी अपना आधे से ज्यादा समय ऑफिस में बिताता और बाकि घर पर दिवाली की तैयारियों में , इन दिनों पृथ्वी खुश था और धीरे धीरे घरवालों से पहले की तरह बातें भी करने लगा था हालाँकि वह अब इतना हँसता बोलता नहीं था लेकिन लता इसी में खुश थी।

दीपावली की शाम पृथ्वी तैयार होकर फ्लेट पर चला आया आखिर ये घर भी तो उसका अपना था उसने अपने फ्लेट की बालकनी में कुछ लाइटिंग लगाई , कुछ दीपक जलाये और फिर वापस घर चला आया ताकि पूजा में शामिल हो सके। पूजा के बाद पृथ्वी और लक्षित सोसायटी के लॉन में चले आये आखिर सबके साथ मिलकर उन्हें पटाखे जो जलाने थे। पृथ्वी ने सबकी ख़ुशी के लिए एक दो पटाख़े जलाये और फिर साइड में चला आया।

आज पृथ्वी अवनि को बहुत मिस कर रहा था जब उसने देखा सोसायटी मे उसके हमउम्र लड़को के साथ उनकी पत्नी है और सभी मिलकर ख़ुशी मना रहे है , पटाखे जला रहे है , आज अवनि उसके साथ होती तो उसकी ख़ुशी भी दुगुनी होती पर पृथ्वी की किस्मत तो ऐसी थी कि अवनि के साथ होना तो दूर वह तो देख भी नहीं पा रहा था कि आज अवनि लग कैसी रही होगी ?

सुख विलास भवन , उदयपुर
अपने कमरे में पूजा के लिए तैयार होती अवनि ने कानो में बहुत ही सुन्दर झुमके पहने , सीधी मांग निकालकर बाल बनाये और दुपट्टा कंधे पर डालकर कमरे से बाहर चली आयी। अवनि नीचे आयी सबके साथ मिलकर पूजा की और फिर हॉल में आकर विश्वास जी के पैर छुए तो उन्होंने अवनि को खूब आशीर्वाद दिया।  विश्वास जी एकटक उसे देखने लगे। आज कितने दिनों बाद उन्होंने अवनि को इस तरह सजते सवरते देखा था। वे अवनि के पास आये और उसके कंधो पर बाँह रखकर उसे बाहर ले जाते हुए कहा,”आओ बेटा सब तुम्हारा इंतजार कर रहे है,,,,!!”

अवनि हैरान थी कि अब विश्वास जी क्या करने वाले है ? वह उनके साथ बाहर चली आयी तो हैरान रह गयी। बाहर घर का लॉन बहुत ही सुंदर सजाया हुआ था
सभी घरवालो के साथ , सुरभि , अनिकेत और विश्वास जी के कुछ पडोसी वहा शामिल थे। अवनि के घर आने की ख़ुशी में सभी घऱ घरवालो ने मिलकर ये प्रोग्राम रखा था जिसे देखकर अवनि मुस्कुरा उठी। तभी स्पीकर पर गाना बजा और कौशल चाचा सीमा चाची का हाथ पकड़कर नाचने लगे

“आयी है दिवाली सुनो जी घरवाली , तेरे कँगने ने दिल धड़काया है”
विश्वास जी अपने दोस्तो की तरफ बढ़ गए और अवनि हँसते मुस्कुराते सुरभि की तरफ चली आयी। ख़ुशी उसकी आँखों में साफ दिखाई दे रही थी।

2-3 घण्टे ये प्रोग्राम चला और सबने खूब मस्ती की , डांस किया और मिठाईया खाई। सब था फिर भी अवनि को आज किसी की कमी महसूस हो रही थी , उसने कितनी ही बार अपना फोन चेक किया लेकिन पृथ्वी का कोई मेल नहीं था ना ही अवनि के लिए कोई मैसेज , अवनि उदास हो गयी उसने देखा सुरभि अनिकेत के साथ है , चाचा चाची भी एक दूसरे के साथ है , दीपिका का जिस से रिश्ता हुआ था वह लड़का और उसकी फॅमिली भी आयी थी बस अवनि ही इन सबके बीच अकेली थी।

उसका मन भारी होने लगा वह घरवालों की खुशियों में खलल डालना नहीं चाहती थी इसलिए बिना किसी को बताये अंदर चली आयी। अवनि अपने कमरे की बालकनी में चली आयी , ना चाहते हुए भी उसकी आँखों में आँसू भर आये लेकिन उसने उन्हें बहने नहीं दिय और रोआँसा होकर कहा,”काश मैं तुम्हे देख पाती , काश तुम यहाँ होते पर तुम यहाँ क्यों आओगे पृथ्वी ? तुम्हे तो याद भी नहीं है आज हमारी पहली दिवाली है”

अवनि वही खड़ी आसमान में फूटते रॉकेट देखती रही तभी लाइट चली गयी , बालकनी में अँधेरा हो गया अवनि जाने के लिए जैसे ही मुड़ी सहसा ही उसके दिल की धड़कने बढ़ गयी
उसे लगा जैसे उसके सामने कोई है पर अँधेरे की वजह से अवनि उसे देख नहीं पायी ,, ये वही अहसास था जो अवनि ने पृथ्वी से पहली बार मिलकर महसूस किया था लेकिन पृथ्वी का यहाँ होना मुमकिन नहीं था।

अवनि अँधेरे में एकटक सामने देखे जा रही थी तभी एक रॉकेट आसमान में जाकर फटा और उसकी रौशनी में अवनि को सामने खड़ा शख्स नजर आया। पृथ्वी को अपने सामने देखकर अवनि को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ और उसकी आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये।

( क्या जयदीप सीखा पायेगा पृथ्वी को रोमांस या पृथ्वी का होगा अपना अलग अंदाज ? क्या पृथ्वी को फिर से हो रहा है अवनि से प्यार ? अवनि के सामने सच में खड़ा है पृथ्वी या ये है बस अवनि का वहम ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
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Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

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