साक़ीनामा – 5

Sakinama – 5 Sakinama – 5 मैं अपना फोन लेकर छत पर चली आयी। मैंने फ़ोन उठाया तो दूसरी तरफ से राघव ने कहा,”हेलो !!”“जी कहिये”,मैंने कहा“क्या कर रही हो ?”,राघव ने बहुत ही अपनेपन से पूछा“कुछ नहीं बस अभी थोड़ी...

पाकीजा – एक नापाक जिंदगी 48

Pakizah – 48 Pakizah – 48 “आज पता चला सर , इस मुस्कराहट के पीछे कितना दर्द छुपा है !”,पाकीजा ने रूद्र की आँखों में देखते हुए कहा l रूद्र की आँखों में नमी तैर गयी वह पाकीजा को देखने लगा...

साक़ीनामा – 4

Sakinama – 4 Sakinama – 4 अगले दिन शाम में ऑफिस से आने के बाद मैं बार बार अपना फोन चैक कर रही थी। ऐसा मेरे साथ पहले कभी नहीं हुआ था , एटलीस्ट किसी के फोन का इंतजार मैंने कभी...

पाकीजा – एक नापाक जिंदगी 47

Pakizah – 47 Pakizah – 47 लिफ्ट निचे आकर रुकी l एक एक कर सभी बाहर जाने लगे l“पाकीजा !!”,रूद्र के मुंह से मुश्किल से एक शब्द निकलापाकीजा तेजी से रूद्र से दूर हुई l रूद्र उसे लेकर लिफ्ट से बाहर...

साक़ीनामा – 3

Sakinama – 3 Sakinama – 3 कुछ देर बाद  मौसाजी ने आकर मुझसे बैठक में आने को कहा। मैं जैसे ही जाने लगी राघव की मम्मी ने कहा,”सर ढककर जाओ”मुझे थोड़ा अजीब लगा लेकिन बड़ो की बात मानने के अलावा मेरे...
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