Manmarjiyan Season 5 – 36
Manmarjiyan Season 5 – 36

गुप्ता जी से थप्पड़ खाकर गोलू आँगन में खड़ी फुलवारी के पैरो में आ गिरा। मंगल फूफा अभी भी आँगन में खड़ी गोलू की स्कूटी के पीछे बैठे रूपा के लिए आँसू बहा रहे थे। फुलवारी को घर में देखकर गुप्ता जी ने उसकी तरफ आये , नीचे गिरे गोलू की गुद्दी पकड़कर उसे उठाया और साइड में फेंककर कहा,”तुमहू सुबह सुबह हिया का कर रही हो ?”
“हम तो गोलू की अम्मा से अचार लेने आये थे लेकिन आप बाप बेटा सुबह सुबह काहे लड़ रहे है ?”,फुलवारी ने पूछा
नीचे गिरा गोलू उठकर फुलवारी की तरफ आया और कहा,”जे से आपको का मतलब ? और हमको इक ठो बात बताओ चाची , इह मोहल्ला मा 40 ठो घर और भी है फिर तुमहू घूम फिर के हमाये घर काहे चली आती हो ?”
फुलवारी ने सुना तो गोलू को देखकर मुँह बनाया और कहा,”हुंह ! भलाई का तो कोनो जमाना ही नाही है , अरे तुम्हरी अम्मा खुद बुलाय रही हमका हिया , कहत रही इह बार दूध के पैसो के बदले मा हमको 5 किलो अमिया का अचार दे देंगी , यादव जी नाश्ता करने बैठे है तो सोचा ले आते है लेकिन तुम लोगन को
देखकर तो लग रहो कि जे घर मा तुम्हरे लिए भी दाना पानी नाही है,,,,,,,,,,,,,!!!!”
गोलू और गुप्ता जी को सुनाकर फुलवारी जाने के लिए मुड़ गयी , जाते जाते उसकी नजर स्कूटी के पीछे बैठे मंगल फूफा पर पड़ी जो कि सुबक सुबक कर रो रहे थे तो फुलवारी उनकी तरफ चली आयी और कहा,”अरे मंगल जी ! का हुआ , रो काहे रहे है आप ?”
कोई महिला मंगल फूफा से इतने प्यार से कुछ पूछे और मंगल फूफा जवाब ना दे ऐसा भरा कैसे हो सकता है ? मंगल फूफा ने रोते हुए फुलवारी की तरफ देखा और कहा,”हमायी रूपा हमे छोड़कर चली गयी फूल,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
फुलवारी ने सुना तो हैरानी भरे स्वर में कहा,”लेकिन उह्ह्ह तो आपसे प्रेम करती थी ना ?”
“प्रेम नाही गेम , गेम खेल गयी उह्ह्ह हमाये मंगल फूफा के साथ”,गोलू मंगल फूफा और फुलवारी की तरफ आते हुए कहा
फुलवारी को कुछ समझ नहीं आया वह गोलु का मुँह ताकने लगी तो गोलू ने कहा,”अरे धोखा दे गयी हमाये मंगल फूफा को , पियार का नाटक किया इनके साथ और अपने आशिक के साथ भाग गयी,,,,,,,,,,,,,!!!”
“कौन आशिक़ ?”,फुलवारी ने कहा
“जानू,,,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने रोआँसा होकर कहा तो फुलवारी की भँवे तन गयी और उसने गुस्से से उबलकर कहा,”मुँह खोंच देंगे आपका जो हमे इह सब कहा तो , अरे हमहू हिया खड़े होकर आपको सिम्पथी दे रहे है और आप हम पर ही ट्राय मार रहे है। 8 नंबर की चप्पल पहने है दोबारा बोला ना तो मुँह पर छाप देंगे,,,,,,बेशर्म कही के”
मंगल फूफा हक्के बक्के से फुलवारी को देखते रहे और फिर कहा,”अरे हमहू रूपा के आशिक़ का नाम बताय रहे थे , जानू उर्फ़ जानकीनाथ,,,,,,,,,,!!”
“हाँ तो पूरा नाम बोलना था ना , अभी तो छप जाती चप्पल तुम्हाये जे डोरमेट जैसे मुँह पे,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने मंगल फूफा की तरफ देखा और मुँह बनाकर कहा।
कुछ ही दूर खड़े गुप्ता जी ख़ामोशी से ये पूरा ड्रामा देख रहे थे वे उन तीनो की तरफ आये और फुलवारी से कहा,”तुम्हरा उह्ह्ह सनकी पति तुमको हिया देखे जे से पहिले चली जाओ हिया से , मंगलू का दुःख हम सुन लेंगे ठीक है , तुमहू जाओ”
फुलवारी ने मुँह बनाया और वहा से चली गयी। फुलवारी को जाते देखकर मंगल फूफा ने रोआँसा होकर गोलू से कहा,”जे तुम्हाये बाप से हमायी थोड़ी सी ख़ुशी भी नाही देखी जाती,,,,,,,,,उह्ह्ह बेचारी फूल हमका ज़रा सी सहानुभूति दे रही थी कि इन्होने उसको भी भगा दिया और रूपा तो हमें छोड़कर पहिले ही चली गयी,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गुप्ता जी ने सुना तो मंगल फूफा को घुरा और चिढ़कर कहा,”अबे मंगलू ! अबे तुमहू आदमी हो के फ़ुटबाल ? है साला , कबो रूपा तो कबो फुलवारी , अबे चाहते का हो ?”
“हम मरना चाहते है,,,,,,,,,,,,हम हमायी रूपा के बिना ना जी पाये है”,मंगल फूफा ने कहा
“हाँ तो बाहिर जाकर मरो , हमाओ घर कोनो समसान नाहीं है,,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर गुप्ता जी सीढ़ियों की तरफ बढ़ गए और सीढ़ी पर बैठते हुए गोलू को आवाज दी,”ओह्ह्ह बंडलबाज ! तनिक हिया आवा ज़रा”
गोलू गुप्ता जी की तरफ बढ़ा लेकिन चार कदम चलकर रुका और सहसा ही उसे याद आया कि बीती रात मिश्रा जी ने भी उसे ऐसे ही प्यार से अपने पास बुलाया था और फिर जो हुआ वो तो सबको पता ही है।
“हम नाही आएंगे , जो कहना वही से कहो”,गोलू ने कहा
“काहे , पाँव मा मेहँदी लगी है जो नहीं आ पाओगे , जल्दी हिया आओ और इह पकड़ो 200 रुपिया”,गुप्ता जी ने कुर्ते की जेब से 100-100 के दो नोट निकालकर कहा। पैसे देखकर गोलू गुप्ता जी के पास चला आया तो गुप्ता जी ने पैसे गोलू की तरफ बढाकर कहा,”इह पईसा पकड़ो और सीधा जाओ कानपूर चौक , वहा से पूड़ी सब्जी और जलेबी पैक करा लाओ”
“काहे आज घर मा नाश्ता नहीं बना का ?”,गोलू ने पूछा
“बनो है पर हमे नाही मिलेगो”,गुप्ता जी ने कहा
“उह्ह्ह काहे ?”,गोलू ने फिर पूछा
गुप्ता जी को गोलू के सवाल सुनकर चिढ तो हुयी लेकिन अभी अगर उन्होंने गोलू से कुछ कह दिया तो उन्हें घर के साथ साथ बाहर के नाश्ते से भी हाथ धोना पड़ेगा इसलिए उन्होंने गुस्से का घूंठ निगला और कहा,”सुबह सुबह तुम्हायी अम्मा की जबान को लंबा बोल दिए तो दरवाजा हमाये मुँह पर मार दी और कहा कि नाश्ता बाहर ही करना”
“अरे तो एक ठो सॉरी बोल देना था”,गोलू ने कहा
बेटा बाप को नसीहत दे और बाप चुपचाप सुन ले ये तो कभी नहीं हो सकता वो भी गोलू जैसा बेटा , गुप्ता जी ने अब तक खुद को रोक रखा था लेकिन अब उनका गुस्सा फूट पड़ा , उन्होंने गोलू के हाथ से पैसे छीनकर कहा,”जाना है तो जाओ , हमाये बाप नाही बनो समझे,,,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ हाँ जा रहे है भड़कते काहे है ? पइसा दो”,गोलू ने कहा
गुप्ता जी ने नोट गोलू के हाथ में थमाए और स्कूटी की तरफ चला आया ! मंगल फूफा अभी तक स्कूटी की पिछली सीट पर बैठे थे ये देखकर गोलू ने कहा,”अरे अब का रूपा की याद मा हिया अपनी समाधी बनाय दोगे ? हटो हिया से हमे बाजार जाना है”
मंगल फूफा स्कूटी से नीचे उतरे और उदास होकर कहा,”बाजार जाय रहे हो तो हमाये लिए दुइ मुट्ठी जहर भी ले आना गोलू , रूपा जी के बिना जीकर अब का ही करेंगे हम”
“तो मरने के बाद कौनसा रूपा तुमको मैडल पहिनाने आ जाएगी , हटो हिया से जियादा आसिक नाय बनो समझे”,गोलू ने कहा और मंगल फूफा को साइड कर स्कूटी पर आ बैठा और स्कूटी स्टार्ट की तो मंगल फूफा रोने लगे।
एक तरफ गोलू को मंगल फूफा पर गुस्सा आ रहा था तो दूसरी तरफ मंगल फूफा का रोना देखकर दया भी आ रही थी , रूपा ने जो किया उसमे भला मंगल फूफा की क्या गलती थी ?
वह स्कूटी लेकर वहा से चला गया और मंगल फूफा सुबकते हुए गुप्ता जी की तरफ चले आये। मंगल फूफा गुप्ता जी से एक सीढ़ी नीचे उनके बगल में आ बैठे और सुबकने लगे।
“अमा यार मंगलू ! इत्ता पानी तो हमाये घर के नाले मा नाही होगा जित्ता तुमहू अपनी नाक से बहाय दिए हो”,गुप्ता जी ने कहा
“हमाओ नाक का नाला है ?”,मंगल फूफा ने चिढ़कर कहा और फिर रोने लगे
अब गुप्ता जी तो गुप्ता जी है उन्हें मंगल फूफा के दुःख दर्द पीड़ा से क्या मतलब ? उन्होने कहा,”तो तुम्हरे नाक से कोनसा गुलाब का इत्र बह रहा है ? अरे अब बस भी करो और हमको बताओ मिश्रा के घर मा का हुआ ? तुम्हरी हालत देखकर तो लग रहा है रूपा तुमको छोड़कर उह्ह्ह ससुरे नवरतन को हार पहनाय दे रही”,गुप्ता जी ने कहा
गुप्ता जी की बात सुनकर मंगल को रूपा की बेवफाई याद आ गयी।
गुस्से से उनका चेहरा तमतमा उठा और उन्होंने गुप्ता जी को सारी बात बता दी। आखिर में मंगल फूफा फिर रोआँसा हो गए और कहा,”और रूपा हमायी छाती पर पैर धर के उह्ह्ह अपने नए आशिक के साथ चले गयी”
“अरे उह्ह्ह कहा से नवा है नए तो तुम थे , उह्ह्ह तो पुराना आसिक था ओह्ह्ह का”,गुप्ता जी ने कहा
“आपको कैसे पता ?”,मंगल फूफा ने चौंककर कहा
“अरे जे तो हमहू तुम्हरी रूपा रानी के चाल ढाल देखकर ही समझ गए थे। जब उह्ह नवरतन की बाँहो मा मुस्कुराई तबही हमको समझ आ गवा जे रूपा नाम की जलेबी इत्ती सीधी भी नाही है,,,,,,,,,,,,,,पर तुम और ससुरा उह्ह्ह नवरतन , तुम दोनों को चुल रही रूपा का रूपदर्शन करने की,,,,,,,,,,,,,गयी ना उह्ह्ह दोनों का काटकर ,
अब बैठकर भजन करो ओह्ह्ह के नाम पर”,गुप्ता जी ने मंगल फूफा के जले पर नमक छिड़ककर कहा
“नाही ! हमाई रूपा अइसन नाही हो सकती,,,,,,,,,उह्ह्ह जानकीनाथ हमायी मासूम रूपा को फसाया है”,मंगल फूफा ने कहा , जो कि अब भी ये मानने को तैयार नहीं थे कि रूपा उन्हें धोखा देकर चली गयी है।
“ए मंगलू ! ए तुमहू मानो चाहे ना मानो पर मासूम तो किसी भी एंगल से नाही है तुम्हायी रूपा समझे,,,,,,,,,,,और उह्ह्ह जानकीनाथ का फसायेगा ओह्ह्ह का , तुम्हरी , अरे काहे की तुम्हरी,,,,,,,,,,,उह्ह्ह रूपा , उह्ह तो खुदही हर किसी के साथ फसने को तैयार रहती है,,,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ता जी ने मुँह बनाकर कहा
मंगल फूफा को रूपा से बहुत प्यार था और अब भी उन्हें रूपा के वापस लौट आने की उम्मीद थी इसलिए वे उठे और गुस्से से कहा,”रूपा हमायी थी , हमायी है और हमायी रहेगी आप चाहे उसे हमायी कहे या न कहे और हमायी रूपा को फ़साने वाले दलिदर बहुत है,,,,,,,,,,,!!!”
कहा गुप्ता जी मंगल फूफा को समझा रहे थे और कहा मंगल फूफा गुप्ता जी पर ही भड़क गए ,
अब घर गुप्ता जी का , मंगल फूफा जहा खड़े वो जमीन गुप्ता जी की , ऐसे में गुप्ता जी से कोई ऊँची आवाज में बात करे और वो सुन ले , ये तो मुमकिन नहीं है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,गुप्ता जी ने गाहे बगाहे मंगल फूफा को ही पीट दिया। बीती शाम मिश्रा जी से मार खायी थी , सुबह रूपा के आशिक से मार खायी थी और अब गुप्ता जी ने भी मंगल फूफा पर हाथ साफ कर दिया जिस से मंगल फूफा बोखला से उठे और जमीन पर पैर पसार कर बैठ गए और जोर जोर से रोने लगे।
रोये भी इतना बेसुरा कि गुप्ता जी ने अपने कानो पर हाथ रखा और वहा से चले गए , जाते जाते मंगल फूफा को एक लात और मार गए जिस से उनका मुँह सामने मिटटी में जा गिरा , चार बाल जिन पर चमेली का तेल लगाया था अब मिटटी से सने थे और आपस में उलझकर खड़े थे। मुँह पर मिटटी ही मिटटी और कपडे तो कल से मैले ही थे।
गोलू गुप्ता जी का बताया नाश्ता लेकर घर आया। उसने स्कूटी बाहर ही रोक दी और झोला उठाये अंदर आया तो देखा आँगन में बीचों बीच पैर पसारे मंगल फूफा बैठे है और वही कुछ ही दूर झूले पर लेटे गुप्ता जी आराम फरमा रहे है। गोलू गुप्ता जी की तरफ आया , झोला रखा और कहा,”पिताजी ! इह मंगल फूफा काहे भूत बना बैठा है ?”
“खुदही जाकर पूछ ल्यो , हमको भूख लगी है झोला इधर दयो”,गुप्ता जी ने झोला उठाया और सामान देखते हुए कहा
“कैसे इंसान हो पिताजी ? हुआ उह्ह्ह बेचारे मंगल फूफा का दिल टूट गवा और हिया आपको खाने की पड़ी है”,गोलू ने कहा
“दोना कहा है ?”,गुप्ता जी ने पूछा
“लगता है लाना भूल गए”,गोलू ने मासूमियत से कहा तो गुप्ता जी ने उसे घुरा और कहा,”बकैती करना तो नाही भूलते , उह्ह्ह तो टाइम टू टाइम कर लेते हो,,,,,,,,,,,,,अब सब्जी कैसे खाये हाथ मा निकाले के तुम्हाये मुँह मा निकाल दे सब,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने तो चुपचाप वहा से खिसकने में ही अपनी भलाई समझी और गुप्ता जी जैसे तैसे करके पूड़ी सब्जी खाने लगे।
गोलू फूफा के पास आया उन्हें सम्हाला और उठाकर सीढ़ियों के पास ले आया। घर के अंदर जाने की हिम्मत तो गोलू की भी नहीं हो रही थी क्योकि बीती रात हुए गोलू के प्रोग्राम से मिश्राइन भी अनजान नहीं थी। गोलू और मंगल फूफा दोनों मुँह लटकाकर बैठे रहे और झूले पर बैठे मिश्रा जी पूड़ी सब्जी और जलेबी का लुफ्त उठाते रहे , उन्होंने मंगल फूफा और गोलू से खाने का पूछा तक नहीं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी का घर , कानपूर
गोलू से झगड़ा करके गुड्डू अंदर चला आया। चकिया से वापस आने के बाद इतनी भसड़ हो चुकी थी कि अब गुड्डू का दिमाग थकने लगा था। पहले वह और गोलू मिलकर छोटे मोटे कांड किया करते थे लेकिन उनकी जिंदगी में सुकून था , शांति थी , वक्त था लेकिन जबसे गुड्डू की बूढ़ा गुजरी है तब से उसकी जिंदगी में वो भसड़ शुरू हुई कि रुकने का नाम ही नहीं लिया और तो और नए नए लोग जुड़ते चले गए। गुड्डू इसी सोच विचार में चला जा रहा था कि सामने से आते मिश्रा जी से टकरा गया और हड़बड़ाकर रुका तो मिश्रा जी ने कहा,”का बेटा ? दिखाई नाही देता”
“माफ़ करना पिताजी उह्ह आँखों के सामने एकदम से अँधेरा सा छा गवा”,गुड्डू ने कहा
“अँधेरा तो छायेगा ना बेटा , जोन तमाशे पे तमाशे किये जा रहे हो ओह से एक दिन अंधकार ही छा जाना है तुम्हरे और उह्ह्ह गोलुआ की जिंदगी मा , अंदर जाकर नहाय ल्यो ओह्ह्ह के बाद आकर हमसे मिलो कुछो जरुरी बात करनी है”,मिश्रा जी ने कहा और वहा से चले गए
मिश्रा जी के मुँह से जरुरी बात सुनकर गुड्डू फिर डर गया कि अब कौनसा कांड सामने आ गया। नाख़ून चबाते हुए गुड्डू अपने कमरे में चला आया तो यहाँ अलग ही नजारा उसे देखने को मिला। गुस्से से भरी शगुन सामने ही खड़ी थी। गुड्डू का दिल धक् धक् करने लगा , कल ही उसने शगुन से वादा किया था कि वह कोई गड़बड़ नहीं करेगा और फिर से उसकी और गोलू की गलतिया शगुन के सामने थी।
गुड्डू अपना सर खुजाते हुए शगुन के पास आया और कहा,”शगुन हम जानते है,,,,,,,,,,,,!!!”
“कुछ नहीं कहेंगे आप गुड्डू जी ! इस दुनिया में सब हो सकता है लेकिन आप और गोलू जी कभी नहीं सुधर सकते ,, आप जानते भी है आप दोनों की हरकतों की वजह से घर में सबको कितना शर्मिंदा होना पड़ता है , पापा जी कितना परेशान होते है और सारे घरवाले किसी ना किसी गलतफहमी में उलझे रहते है।
गोलू जी के एक मैसेज की वजह से भुआ जी फूफा जी यहाँ चले आये , कितनी बाते हुयी कितने तमाशे हुए ,, बिंदिया भाभी को घर उठाने की बात पर गोलू जी को क्यों नहीं रोका आपने बस उन्होंने कहा और आप लोग चल पड़े , और तो और इस बार पापा जी , शर्मा अंकल , गुप्ता अंकल और फूफाजी को भी साथ ले लिया”
“मंगल फूफा यादव जी और गोलू भी था साथ में,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने धीरे से कहा तो शगुन उसे घूरने लगी और थोड़ा रुककर कहा,”गुड्डू जी ! 4 महीने बाद वेदी की शादी है ,, ऐसे करवाएंगे उसकी शादी ? ऐसे कम करेंगे पापा जी के कंधो भार ? बड़े भाई होने के नाते आपको सब सम्हालना चाहिए लेकिन यहाँ तो पापा जी आपको ही सम्हालने में लगे हुए है,,,,,,,,,,!!!
गुड्डू ने सुना तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ , इन दिनों वह कुछ ज्यादा ही उलझ गया था। पहले गोलू गुड्डू से थोड़ा डरता था लेकिन अब तो वह ना गुड्डू से डरता है ना किसी और से बल्कि खुद तो कांड करता ही करता है उसमे अपने साथ साथ गुड्डू को भी शामिल कर लेता है और बेचारा गुड्डू गलती ना होने के बाद भी हर बार मिश्रा जी से मार खाता है और शगुन का गुस्सा झेलता है।
“बस इह लास्ट था आज के बाद हम तुमको शिकायत का मौका नाही देंगे शगुन”,गुड्डू ने शगुन के कंधे पर हाथ रखकर कहा
“आपका ये लास्ट महीने में 4 बार आता है गुड्डू जी , इतना तो जानने लगी हूँ मैं आपको,,,,,,,,,,!!!”,शगुन ने गुड्डू का हाथ झटककर कहा
“बस एक आखरी बार , हम सच कह रहे है अब से कोई गलती नाही करेंगे , अपनी जिम्मेदारी समझेंगे , तुमको शिकायत का मौका नहीं देंगे और उह्ह्ह गोलू को भी समझायेंगे,,,,,,,,,,,,,अब तो मान जाओ यार”,गुड्डू ने प्यार से कहा
“सच कह रहे है ?”, शगुन ने कहा
“तुम्हाये सर की कसम,,,,,,,,,,,!”,गुड्डू ने अपना हाथ शगुन के सर की तरफ बढाकर कहा तो शगुन ने गुड्डू का हाथ सर से हटाकर अपने पेट से लगाया और कहा,”मेरे सर की नहीं , हमारे होने वाले बच्चे की कसम खाकर कहिये इसके इसके इस दुनिया में आने तक आप कोई कांड नहीं करेंगे”
गुड्डू ने सुना तो असमझ में पड़ गया और एकटक शगुन को देखने लगा
( क्या मंगल फूफा भूल पाएंगे रूपा को या ऐसे ही बने रहेंगे देवदास ? मिश्रा जी ने गुड्डू को क्यों बुलाया है क्या फिर आया है उनके सामने कोई नया कांड ? क्या गुड्डू खायेगा कसम अपने होने वाले बच्चे की और करेगा शगुन से वादा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल

