Manmarjiyan Season 5 – 15
Manmarjiyan Season 5 – 15

मिश्रा जी की बात सुनकर गोलू ख़ुशी ख़ुशी बाहर चला आया और इस बार भी रूपा उसके साथ नहीं थी ये देखकर मंगल फूफा गुस्से से आग बबूला हो उठे और सीढिया चढ़ते हुए कहा,”ए साला ! तुमको रूपा की जिम्मेदारी देकर ही गलती किये रे हमहू गोलुआ,,,,,,,,,,हम खुद जाकर अपनी रूपा को लेकर आते है”
मंगल फूफा अंदर जा पाते इस से पहले गोलू ने उन्हें रोका और कहा,”अरे फूफा अंदर कहा जा रहे हो ? ऐसी खबर लेकर आये है ना कि सुनोगे तो ख़ुशी से झूम जाओगे”
“ऐसी तो का खबर सुनकर आये हो तुमहू अंदर से , उह्ह्ह मिश्रा जी अपनी जायदाद तुम्हरे नाम कर दिए है ?”,मंगल फूफा ने कहा
“अरे नाही ! आज शाम मा गुड्डू भैया के घर मा पिरोगराम है , नाच गाना , जलेबी पूड़ी रसमलाई और डीजे भी है,,,,,,,,,,लगता है मिश्रा जी इह बार के काण्ड से बहुते खुस है”,गोलू ने ख़ुशी से झूमकर कहा
“अबे गोलू ! हिया हमाये पिरेम की नैया डूब रही है और तुमको पिरोगराम की पड़ी है। अभी के अभी अंदर जाओ और रूपा को लेकर आओ”,मंगल फूफा ने कहा
गोलू ने सुना तो बुरा सा मुँह बनाया और कहा,”बुद्धि नाम की चीज नाही है तुम्हरे अंदर फूफा , अरे अभी अगर रूपा को अपने साथ लेकर गए तो कौन देखी है मिश्रा जी और ओह्ह्ह के घर के चार लोग बस लेकिन अगर साम मा रूपा से अपने प्रेम का इजहार करेंगे तो मिश्रा जी , गुप्ता जी , पूरा कानपूर देखी है,,,,,,,,,,,तब का धाक जमेगी तुम्हायी फूफा,,,,,,,,तब न कहलाओगे जे कहानी के असली हीरो”
मंगल फूफा हर बार गोलू की बातो में आ जाया करते थे इस बार भी आ गए और दाँत दिखाने लगे ये देखकर गोलू ने कहा,”और मिश्रा जी खुद कहे रहे हमसे कि आज शाम मा मंगल फूफा को भी लेकर आना,,,,,,,,,,थोड़ा जलपान उनको भी कराएँगे”
“हमे काहे ?”,मंगल फूफा ने हैरानी से पूछा
“अरे फूफा ! तुमहू भी बहुते बुद्धिहीन हो मतलब,,,,,,,,,,,अरे तुमहू हो फूफा , वैसे ही जैसे आदर्श फूफा है और का पता मिश्रा जी रूपा को अपनी बिटिया मान लिए हो जैसे लवली को बिटवा माना है तो उह्ह्ह हिसाब से आप हुए जे घर के दामाद , तो इह हिसाब से जलपान नहीं ना कीजियेगा”,गोलू ने अपनी तरफ से कहानी बनाकर कहा जिसका ना कोई सर था ना पैर फिर भी मंगल फूफा का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा और उन्होंने कहा,”इह बात है तो फिर हम तुम हिया का कर रहे है चलो घर चलकर कुरता पजामा पे प्रेस मारते है”
“लो यही तो हम आपको समझा रहे थे , चलो चलते है हमको भी अपना कोट पेंट प्रेस करना है”,गोलू ने कहा और जैसे मंगल फूफा को लेकर आया था वैसे ही लेकर वापस चला गया
“ए फूफा ! पहिले सब्जी मंडी चलेंगे”,गोलू स्कूटी चलाते हुए कहा
“मंडी मा कौनसा कोट पेंट प्रेस होता है रे गोलुआ ?”,पीछे बैठे मंगल फूफा ने कहा
“अरे याद है ना गज्जू गुप्ता का कहे थे ?”,गोलू ने कहा
” उह्ह कहे रहय ‘जियादा परवाह है ना अपने जे मंगल फूफा की तो तुमहू भी जे के साथ बीहड़ निकल जाओ,,,,,,,,,,,,!!’ तो का तुम चलोगे हमाये साथ ?”,मंगल फूफा ने मासूमियत से कहा
गोलू ने ब्रेक मारकर स्कूटी रोकी और गर्दन घुमाकर मंगल फूफा से कहा,”भगवान को सारे नमूने हमायी जिंदगी मा भेजने थे , अरे हमहू धनिया की बात कर रहे है। उह्ह कहे नाही थे बाजार से धनिया ले आना आज चटनी खाने का मन है हमाओ,,,,,,,,,,,,,,का गुंडे बने हो तुमहू फूफा एक ठो धनिया तो तुमसे याद रखा नाही जाता”
“अरे भूल गए गोलू ! चलो पहिले धनिया ही ले लेते है”,मंगल फूफा ने खिंसियाकर कहा तो गोलू ने स्कूटी स्टार्ट की और आगे बढ़ा दी
मिश्रा जी का घर , कानपूर
गोलू और मंगल फूफा जब प्रोग्राम की बात कर रहे थे उसी वक्त लवली नहाकर नीचे आया था। गोलू और मंगल फूफा की बातें उसके पल्ले नहीं पड़ी तो वह हॉल की तरफ चला आया। मिश्रा जी और गुड्डू पहले से वहा मौजूद थे ये देखकर लवली गुड्डू के पास आया और कहा,”गोलू काहे आया था ?”
गुड्डू कुछ कहता इस से पहले मिश्रा जी बोल पड़े,”तुमहू उह्ह कहावत नाही सुने लवली ‘आ बैल मुझे मार’ बस जे गोलू महाराज का भी कुछो ऐसा ही हिसाब है। गुड्डू भैया के बिना उनका दाना पानी जो नाही पचता”
बेचारा गुड्डू कुछ बोल नहीं पाया आखिर पिछले 3 सीजन से गोलू ने उसकी और अपनी भर भर के छीछा लेदर जो करवा रखी थी। लवली कुछ कहता इस से पहले मिश्राइन वहा चली आयी और मिश्रा जी को ताना मारकर कहा,”और इह सब की जड़ है आप गुड्डू के पिताजी”
“अरे हम का किये ! जे गोलुआ के कारनामो का परचा तुमहू हमाये नाम काहे लिख रही हो ? हम कहे थे ओह्ह् से और तुम्हाये जे लाडले सपूत से कि चकिया जाओ और बाप को नाम रोशन करो,,,,,,,,,,,,पूछो जरा इनसे का करने गए रहय हुआ इह दोनों ?”,मिश्रा जी ने अपनी गलती गुड्डू और गोलू पर डालकर कहा
“उह्ह्ह तो हम पूछेंगे ही , पहिले बाकी सब भी आ जाये,,,,,,,,,ए गुड्डू ! जाकर अपने भुआ और फूफा को लेकर आओ हिया आज हमहू सबसे हिसाब लेकर रही है,,,,,,,,,,,,,अरे आप सब बोलत रहे और हम सुनत रहे इह का मतलब जे थोड़े है कि हर जगह चरस बोई दयो,,,,,,,,,,,,,,,,,,ए वेदिया जे अपनी नयी भाभी और ओह्ह्ह की सहेली से कहो बाहिर आये,,,,,,,!!”,मिश्राइन आज गुस्से में थी और ये देखकर मिश्रा जी ने भी खामोश रहना ही ठीक समझा ।
गुड्डू ने अम्मा के कमरे में गिरे आदर्श बाबू को उठाया , उनका कुरता निकाला और उन्हें सीधा पहनाकर हॉल में चला आया। भुआ भी चली आयी , वेदी बिंदिया और रूपा के साथ बाहर आ गयी , शगुन भी चली आयी , लवली मिश्रा जी और मिश्राइन पहले से वहा मौजूद थे। मिश्राइन ने सबसे अपने लिए जगह बनाकर बैठने को कहा और खुद खड़ी रही।
गुड्डू हाथ बांधे एक तरफ खड़ा था , मिश्रा जी ख़ामोशी से इधर उधर देख रहे थे क्योकि मिश्राइन कभी जल्दी गुस्सा नहीं करती थी और जब करती थी तो सबको सीधा कर देती थी। बिंदिया ने शगुन के कपडे पहने थे लेकिन रूपा ने गुड्डू की टीशर्ट और पजामा पहना था और वह उस पर जच भी रहा था। गुड्डू को ये देखकर तकलीफ तो हो रही थी लेकिन बेचारा मिश्राइन के डर से चुपचाप खड़ा था। सब खामोश और हॉल में शांति फैली थी बस आदर्श फूफा कभी अपनी कोल सहलाते , कभी अपनी पीठ तो कभी अपनी तशरीफ़ छूकर आह भरते,,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्राइन ने देखा तो आदर्श फूफा को फटकार लगाकर कहा,”आदर्श बाबू ! इह सब का है दिखाई नाही देता हिया बहू बेटी सब मौजूद है और आप इह सब,,,,,,,!!!”
मिश्राइन आगे बोल ही नहीं पायी क्योकि ये नजारा तो वहा मौजूद सब लोग पहले ही देख चुके थे।
“अरे सरिता जी ! इह सब राजकुमारी की वजह से ,, इह मौके का नाजायज फायदा उठाकर हमे इत्ता मारी है इत्ता मारी है कि इह पूरा हफ्ता हाय हाय करके गुजारे है हायययययययय”,कहते हुए आदर्श फूफा एक बार फिर दर्द से कराह उठे
“हम मारे ? अरे आपकी बुद्धि पर पत्थर पड़े है का कोमलिया के पिताजी , हम आपको काहे मारेंगे ?”,राजकुमारी भुआ ने तुनककर कहा
“राजकुमारी ! का अपने संस्कार भुला दी हो का तुमहू ? घर के दामाद से बात करने का इह का तरिका है ?”,मिश्रा जी ने भुआ को फटकार लगायी तो भुआ ने मुँह बनाकर कहा,”अरे लेकिन हम इनको काहे मारेंगे ? उह्ह्ह गोलुआ हमे अंदर जाने का इशारा किये रहा तो हमहू तो ओही बख्त अंदर चले आये , पूछिए भाभी से ,, जे खामखा हमे बदनाम कर रहे है”
“का ? अभी थोड़ी देर पहिले तुमहू हुआ नहीं थी ?”,आदर्श फूफा ने हैरानी से कहा
“हमरी रोमांटिक प्रेम कहानी की कसम हमहू नहीं थे”,भुआ ने बड़े प्यार से कहा
आदर्श फुफा के दिमाग की बत्ती जली वे एकदम से उठ खड़े हुए और कहा,”इह का मतलब उह्ह्ह ससुरा गोलुआ हम पर हाथ साफ़ कर गवा”
“कचरे जैसी सकल लेकर घूमोगे तो लोग तो हाथ साफ करेंगे ही ना”,रूपा ने धीरे से कहा लेकिन सबके साथ साथ आदर्श फूफा को भी सुन गया तो आदर्श फूफा ने रूपा की तरफ देखकर कहा,”आप चुप रहिये रूपा जी”
“रूपा जी,,,,,,,,,,,,,,!!!!”,भुआ ने जी पर कुछ ज्यादा ही जोर देकर कहा तो आदर्श फूफा ने तुरंत अपने शब्द बदलकर कहा,”तुमहू चुप रहो रूपा , इह हमरे घर का मामला है तुमहू बीच मा नाही बोलो समझी”
कहकर आदर्श फूफा ने राजकुमारी भुआ की तरफ देखा और धीरे से कहा,”अब ठीक है”
भुआ ने मुँह बनाया और लवली के बगल में जा बैठी। मिश्राइन ने आदर्श फूफा की तरफ देखा और कहा,”आदर्श बाबू ! गोलू को आप बाद में देखियेगा पहिले बैठिये और हमे इह बताईये आप दोनों में से चकिया जाने का पिरोगराम किसका था ?”
कहते हुए मिश्राइन ने मिश्रा जी की तरफ भी इशारा किया।
“अरे दोनों कहा उह्ह्ह शर्मा और गुप्ता भी रहा साथ मा और उह्ह्ह चांडाल यादव उह्ह भी तो गया था”,आदर्श फूफा ने मिश्राइन के सामने जो नहीं बोलना था वह बोल दिया और ये सुनकर मिश्रा जी ने आदर्श फूफा को खा जाने वाली निगाहो से देखा तो आदर्श फूफा ने झेंपते हुए कहा,”अरे उह्ह पता होना चाहिए ना कौन कौन गया था बाद में परेशानी होती है गिनती मा”
“उह्ह का हिया आधार कार्ड बनाय रही है जो आपको गिनती की परवाह है”,कहते हुए मिश्रा जी ने अपने बगल में बैठे आदर्श फूफा की पीठ पर एक मुक्का मार दिया और आदर्श फूफा की रीढ़ की हड्डी कुछ देर के लिए सीधी हो गयी
आदर्श फूफा ने पीठ से हाथ लगाए मिश्रा जी की तरफ देखा और कहा,”का नहीं बताना था का ?”
“भुगतो अब”,मिश्रा जी ने दबी आवाज में कहा और मिश्राइन की तरफ देखकर बोले,”अरे जाय दयो ना मिश्राइन , जो हो गवा उह्ह हो गवा अब काहे गड़े मुर्दे उखाड़ने मा लगी हो तुमहू”
“अच्छा ! जब गुड्डू और गोलू कोनो गलती करता है तो आपके एक हाथ मा बाटा की चप्पल और दूसरा हाथ इन मासूमो के गाल पर होता है और आज जब आपकी गलती सामने आय रही है तो जाय दो ना मिश्राइन,,,,,,,,,,,,,,,अरे सादी के मंडप से लड़की भगाकर लाये है आप सब इह का मतलब जानते है ना , गुड्डू गोलू तो नादान है अनजाने मा गलती करते रहते है पर आप तो समझदार है ना गुड्डू के पिताजी आप काहे जे सब मा सामिल हो गए,,,,,,,,,,,,
बिंदिया हमाये लवली से प्रेम करती है , इह से सादी करना चाहती है इह बात से कोनो दिक्कत नाही है हमे पर इह का घर से भगाकर ले आये जे गलत किया।”,मिश्राइन ने मिश्रा जी को फटकार लगाकर कहा
गुड्डू लवली के बगल में ही खड़ा था लेकिन भूल गया कि बगल में लवली है उसे लगा उसका दोस्त गोलु है तो खुश होकर दबी आवाज में कहा,”आज आये है पिताजी सही हाथो मा,,,,,,,,,,,अम्मा के सामने कैसे चुप बैठे है”
लवली ने गुड्डू को घूरकर देखा तो गुड्डू की ख़ुशी और मुस्कराहट गायब हो गयी और वह वेदी के बगल में आकर खड़ा हो गया
मिश्राइन की बात का मिश्रा जी के पास कोई जवाब नहीं था क्योकि उसे वक्त हालात ऐसे थे कि बिंदिया को वहा से लेकर भागना ही पड़ा। मिश्रा जी को खामोश देखकर मिश्राइन ने कहा,”हम पूछते है का जरूरत थी अपनी मण्डली को लेकर चकिया जाने की ? पिछली बार रामनगर की पहाड़ी पर जो तमाशा किये उह्ह काफी नहीं था !! अरे बख्त और था जब आप जे अंटू पंटू के साथ मिलकर रंगबाजी किया करते थे।
अब आप तीन बच्चो के बाप है , दो दो बहुओ के ससुर है और कुछो महीने बाद दादा बन जायेंगे,,,,,,,,,,,जे उम्र है आपकी इह सब करने की,,,,,,,,,?”
मिश्रा जी ने तो मिश्राइन के सामने अपने होंठ ही सिल लिए और सिलते भी क्यों नहीं गलत जो थे। बगल में बैठे आदर्श फूफा को मिश्राइन की सब बातें समझ आयी लेकिन दो शब्द समझ नहीं आये तो मिश्रा जी की तरफ झुककर कहा,”जे अंटू पंटू कौन है ?”
मिश्रा जी ने आदर्श फूफा को घुरा तो आदर्श फूफा ने सीधे बैठते हुए कहा,”नहीं हम तो बस ऐसे ही पूछे रहे थे जनरल नॉलेज के लिए”
मिश्रा जी को खामोश देखकर मिश्राइन ने गुस्से से कहा,”घर मा जवान बिटिया है ओह्ह्ह के ब्याह की तारीख पक्की हुयी गयी है , कल को ओह्ह का कोई सादी के मंडप से उठाकर ऐसे अपने साथ ले जाए तो का हाल हुई है आपको ? अरे बिंदिया भी कोनो की बिटिया है , ओह्ह्ह के बाप पर का गुजरी है कबो सोची हो आप सब ?”
मिश्राइन की बात सुनकर मिश्रा जी को अपनी गलती का अहसास हुआ। वे चाहते तो इस मामले को आराम से बैठकर बातचीत करके भी सुलझा सकते थे लेकिन उन्होंने सबके साथ मिलकर इस बार गलत रास्ता चुना।
मिश्रा जी को इतना सुनाने के बाद मिश्राइन आदर्श फूफा की तरफ पलटी और कहा,”और आप आदर्श बाबू आपको तो इह फूटी आँख नाही सुहाते थे फिर आप काहे इनकी पूछ पकड़ के इनके साथ चल पड़े। मान ना मान मैं तेरा मेहमान ना लवली से आपको प्रेम ना बिंदिया से आपकी पहिचान फिर का लेने गए रहय चकिया बताएँगे हमे ?”
आदर्श फूफा ने मुश्किल से थूक निगला और उठते हुए कहा,”हमहू ज़रा हल्के होकर आते है”
“बैठिये चुपचाप ! कोई कही नाही जाएगा , हमायी बात अभी तक पूरी नाही हुई है”,मिश्राइन ने गुस्से से कहा तो बेचारे आदर्श फूफा सहमकर वापस मिश्रा जी के बगल में आ बैठे और धीरे से कहा,”पहिले नाही बताये मिश्रा जी”
“का ?”,मिश्रा जी ने कहा
“जे ही कि शेरनी से सादी किये है”,आदर्श फूफा ने कहा तो मिश्रा जी ने सामने खड़ी मिश्राइन को देखा जो इस वक्त गुस्से में किसी शेरनी से कम तो नहीं लग रही थी।
आदर्श फूफा को एक छोटा सा हार्ट अटैक देकर मिश्राइन पलटी गुड्डू की तरफ और कहा,”का रे गुड्डू कहा है तुम्हाये उह्ह चड्डी बड्डी दोस्त जोन तुम्हरे हर काण्ड मा शामिल रहते है उह्ह ही आईडिया दिए रहा होगा तुमको इह नवा कांड करने का,हमे बताओ का जरूरत थी तुमको और गोलुआ को चकिया जाने की , का करने गए थे हुआ ?”
“टेंट लगाने गए थे अम्मा , उह्ह्ह गोलू ने गलती से बिंदिया के ब्याह का ही टेंडर ले लिया। भगवान् कसम हमे तो पता भी नहीं था ऐसा कुछो होगा”,गुड्डू ने मासूम बनने की कोशिश करते हुए कहा
लेकिन मिश्राइन एक माँ थी और माँ की नजरो से कुछ नहीं छुपता है उन्होंने गुड्डू को घूरकर देखा और कहा,”ए बेटा ! अम्मा है तुम्हायी ,, तुम्हायी शक्ल देखकर बता सकते है का चल रहा है तुम्हरी इह खोपडिया मा,,,,,,,,,,,,हमको बोतल मा नाही उतारो तुमहू समझे,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने सुना तो मुँह ही घुमा लिया। बिंदिया , रूपा , वेदी और शगुन तो चुपचाप तमाशा देख रही थी वैसे भी चारो यहाँ क्या ही बोले जिनको बोलना चाहिए था वो भी आज मिश्राइन के डर से चुप बैठे थे।
मिश्रा जी , आदर्श फूफा और गुड्डू को सुनाने के बाद अब बारी थी लवली की
मिश्राइन ने लवली की तरफ देखा और कहा,”का बिटवा ! तुमसे बेहतर उम्मीद किये थे पर तुमहू तो जे सबसे भी आगे निकले , अरे तुमको बिंदिया पसंद थी जे से ब्याह करना चाहते थे तो एक बार आकर हमसे कहते , अरे हम अम्मा है तुम्हायी मानते है तुमको हमारी कोख से जन्म नाही दिए पर का दिल का कोनो रिश्ता नाही होता है।
हमसे कहते हमहू खुद बिंदिया के घर जाते तुम्हरे लिए जे का हाथ मांगते धूम धाम से तुम दोनों की सादी करवाते फिर काहे इत्तो बड़ो कदम उठाय लिए रे लवली ? इह करके तुमहू कित्ते लोगन का दिल दुखाये हो इह का अहसास भी है तुमको ?”
मिश्राइन की बात सुनकर बिंदिया रो पड़ी , उसे अब धीरे धीरे समझ आ रहा था कि उसे ऐसे भागकर नहीं आना चाहिए था।
बिंदिया को रोते देखकर मिश्राइन उसके पास आयी और उसे चुप कराते हुए कहा,”अरे तुम काहे रोने लगी बिटिया ? हमहू तुमसे कुछो नाही कह रहे है। तुम्हरी इह सब मा कोई गलती नाही है तुमहू अपना दिल छोटा नाही करो बिटिया,,,,,,,,,शगुन सम्हालो इह का”
मिश्राइन के कहने पर शगुन बिंदिया की तरफ आयी और उसे वहा से लेकर चली ! बिंदिया को रोते देखकर लवली और गुड्डू को भी अच्छा नहीं लगा , भला इन सब में बिंदिया की क्या गलती ?
मिश्राइन ने लवली की तरफ देखा और दुखी स्वर में कहा,”इह सब तुमहू काहे किये रे लवली ?”
“अम्मा ! जब हमे पता चला बिंदिया के बापू ओह्ह्ह का ब्याह कही और तय कर दिए तो उह बख्त हमे कुछो समझ नहीं आ रहा था। पिताजी और बिंदिया के पिताजी मा दुश्मनी है इह के चलते पिताजी इह रिश्ता कबो स्वीकार नाही करते , हम बहुते उलझन मा थे इहलीये हमहू जे बात गुड्डू और गोलू को बताये तो गोलू ने कहा,,,,,,,,,,,,,!!”
कहते कहते लवली रुक गया तो सबकी गर्दन लवली की तरफ मुड़ गयी और मिश्राइन ने कहा,”का कहा गोलू ने ?”
लवली ने मिश्राइन की तरफ देखा और कहा,”उसने कहा बिंदिया को उठा लेंगे”
मिश्राइन ने सुना तो उनकी भँवे तन गयी , गुड्डू ने रोआँसा होकर अपनी आँखे मीच ली क्योकि उसका दोस्त फिर पिटने वाला था , भुआ का मुँह खुला का खुला रह गया क्योकि उनके प्यारे गोलू का नया कांड सामने आया था , मिश्रा जी ने अपना सर पीट लिया क्योकि उनसे भी पहले इस कांड में गोलू महाराज शामिल थे और बचे आदर्श फूफा तो वे उठे और अपनी कमर से हाथ लगाकर गाना गाते हुए आगे बढ़ गए ,, आप सोच रहे होंगे कौनसा गाना तो वही उनका पसंदीदा गाना
“हेजी ! मंगल भवन अमंगल हारी”
( आज शाम के प्रोग्राम में पहुंच पाएंगे गोलू और मंगल फूफा या फिर गुड्डू रोक लेगा उन्हे ? क्या बिंदिया ने सच में कर दी शादी के मंडप से भागकर गलती ? सबसे पिटने के बाद क्या अब गोलू को मिलने वाली है मिश्राइन से भी परसादी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल

