Manmarjiyan Season 4 – 70
Manmarjiyan Season 4 – 70

गोलू डंडा उठाये पुरे आँगन में शर्मा जी के पीछे भाग रहा था लेकिन भागते भागते गोलू की आँख में कुछ गिरा और उसने अनजाने में डंडा दे मारा लल्लन के सर पर , अब लल्लन और गोलू का पहले से 36 का आकड़ा और जैसे ही लल्लन ने देखा कि उसको डंडा मारने वाला गोलू है तो बस फिर क्या था उसने गोलू के हाथ से डंडा छीना और कहा,”साले तूने हमे डंडा मारा तुम्हायी ऐसी की तैसी,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू जान बचाकर भागने लगा। कुछ देर पहले वह शर्मा जी के पीछे भाग रहा था अब लल्लन उसके पीछे भाग रहा था। जो डंडा उसके हाथ में था वो अब लल्लन के हाथ में था और लल्लन के सर पर खून सवार था। गोलू भागते भागते गुड्डू की तरफ आया और उसकी गोद में चढ़कर उस से चिपकते हुए कहा,”ए गुड्डू भैया हमे बचाय ल्यो , उह्ह्ह छगन हमाये खून का प्यासा हुई गवा है”
गुड्डू कुछ समझ पाता इस से पहले लल्लन भागते हुए आया गुड्डू ने अपना पैर आगे किया जिसमे उलझकर लल्लन सीधा जाकर मंडप में गिरा वो भी ऋतिक के बगल में , अब मक्खियों के चक्कर में भागने की वजह से इतना धूल मिटटी हो चुका था कि किसी को कुछ नजर नहीं आ रहा था। पंडित ने ऋतिक के बगल में किसी को बैठे देखा तो हाथ में पकड़ा मंगलसूत्र ऋतिक को देकर कहा,”कन्या को मंगलसूत्र पहनाइए”
लल्लन ने सुना और देखा ऋतिक उन्हें मंगलसूत्र पहनाने जा रहा है तो उसने खींचकर एक थप्पड़ ऋतिक को मारा और कहा,”अबे फूफा और लड़की मा फर्क नजर नहीं ना समझ आता है तुमको,,,,,,,,,,,साला दिमाग से भी लुल हो का ?”
थप्पड़ खाकर ऋतिक जोर से चिल्लाया,”बापुउउउउउउउउ,,,,,,,,,,,,,!!!”
अगले ही पल ऋतिक का बाप और लल्लन का साला मंडप में हाजिर था उसने ऋतिक को रोते देखकर कहा,”का हुआ रे ?”
“फूफा ने हमको मारा,,,,,,,,,,,!!!”,ऋतिक ने मुँह फाड़कर रोते हुए कहा
“तुम्हायी इतनी हिम्मत हमाये नाजुक से लौंडे पर हाथ उठाओ,,,,,,,,,,,!!”,कहते हुए ऋतिक के पिताजी ने इधर उधर देखा , लल्लन को मारने के लिए कुछ नहीं मिला तो मंडप में रखा स्टील का मटका उठाया और लल्लन को मारने उसके पीछे भागे।
अब लल्लन आगे उसका साला पीछे और हाथ में स्टील का मटका
“अबे का कर रहे हो ? हमहू तुम्हाये जीजा है बे तुम्हायी बहिन के सुहाग,,,,,,,,,,,!!!”,आगे भागता हुआ लल्लन चिल्लाया
“अबे काहे के जीजा बे , रीतिकवा के ब्याह के लिए हमसे दुइ लाख रूपये लिए और सब बर्बाद , ना घर मा बहू आयी ना बिटवा का ब्याह हुआ ,,, तुमको तो आज हम छोड़ेंगे नाही लल्लन , रुक जाओ साला भागते कहा हो ?”,ऋतिक के पिताजी ने पीछे आते हुए कहा
लवली , बिंदिया , मंगल फूफा और रूपा पीछे के रास्ते से भाग तो निकले लेकिन आगे उन्हें मिल गए मंगेश के आदमी और लवली को देखते ही वो उसे रोकने लगे क्योकि उन्हें नहीं पता था मंगेश के घर में क्या हुआ और क्या नहीं उन्हें तो लवली को पकड़ने का हुकुम मिला था। वो 7-8 थे और लवली अकेला जैसे ही वह लड़ने लगा मंगल फूफा को भी जोश आ गया और फिर रूपा के सामने थोड़ी हिम्मत भी तो दिखानी थी ताकि रूपा को इम्प्रेस कर सके। मंगल फूफा ने पूरा हीरो वाले स्टाइल में एक लड़के को घुसा मारा ये देखकर रूपा तो खुश ही हो गयी और हवा में ही मंगल की तरफ चुम्मा उछाल दिया।
“रूपा जे का कर रही हो ?”,बिंदिया ने उसे रोककर कहा क्योकि बिंदिया को नहीं पता था रूपा और मंगल फूफा के बीच क्या खिचड़ी पक रही है ? रूपा ने बिंदिया को देखा और मुस्कुरा दी।
जिस लड़के को मंगल फूफा ने घुसा मारा था उसने पलटकर मंगल फूफा को वापस मारा , एक , दो और तीसरे घुसे में मंगल फूफा रूपा के कदमो में ये देखकर रूपा ने अपना दुपट्टा उतारकर साइड में फेंका और चिल्लाई,”ए ! हमाये मंगल जी पर हाथ उठाता है,,,,,,,!!!”
कहकर रूपा ने लवली के साथ मिलकर लड़को को जो धोया है मजा ही आ गया। मंगल की आँखों में तो दिल चमकने लगे और चेहरा ख़ुशी से खिल उठा। सबसे निपटकर चारो आगे बढे
अह्हह्ह्ह्ह यहाँ मजा नहीं आ रहा वहा शादी वाले घर में चलते है
हाँ तो हर कोई किसी ना किसी के पीछे भाग रहा था। लल्लन के आधे लड़के मक्खियों के डंक से जमींन पर पड़े थे और आधे भाग गए थे। लल्लन बेचारा खुद अपनी जान बचाने के लिए ऋतिक के पिताजी के आगे भाग रहा था। आदर्श फूफा और यादव जी एक दूसरे से लड़ते लड़ते थक गए तो यादव रुका और कहा,”ए आदर्श्वा ! ए हम तो मिश्रा के साथ आये है न तो हम तो एक ही पार्टी मा हुए फिर हम आपस मा काहे लड़ रहे है ?”
“का है तुम दोनों हो एक नंबर के हुतिया”,गुप्ता जी की आवाज दोनों के कानो में पड़ी तो दोनों ने एक साथ गर्दन घुमाई , सामने गुप्ता जी खड़े थे , हाथ में कोल्ड ड्रिंक की बोतल और उसमे डूबी स्ट्रॉ मुँह में दबाये एक आँख मीचे कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे।
एक आँख बंद इसलिए थी क्योकि कुछ देर पहले ही एक मधुमक्खी ने काट लिया था और अब वो खुलने का नाम नहीं ले रही थी। इतनी भसड़ में भी गुप्ता जी के हाथ में कोल्ड ड्रिंक की बोतल देखकर आदर्श फूफा ने कहा,”ए साला ! तुमको इह कोल्ड ड्रिंक कहा से मिला रे ? हमको साला हिया आने के बाद पानी तक नाही नसीब हुआ तुमहू कोल्ड ड्रिंक पी रहे हो”
“एक दूसरे से लड़न मा फुर्सत मिले तब ना कुछो देख पाओ तुम लोग , हुआ सोफे के पास रखे है दुइ ठो छुपा के तुम लोगन के लिए,,,,,,,,,,जाओ दो दो घूंठ मर ल्यो”,गुप्ता जी ने कोल्ड ड्रिंक सुड़कते हुए कहा
“स्ट्रॉ भी रखे हो न ?”,आदर्श फूफा ने कहा
“नाही रखे , हमको मालूम नहीं ना था आपका स्टेंडर्ड इतना ऊपर है वरना रख देते”,गुप्ता जी ने चिढ़कर कहा
“अरे तो फिर हमहू पिएंगे कैसे ?”,आदर्श फूफा ने बच्चो की तरफ मुंह बनाकर कहा
गुप्ता जी उनकी तरफ पलटे और कहा,”हुआ बगल मा एक ठो संडास है ओह्ह का पाइप खींचकर बोतल मा डालकर पी लीजियेगा,,,,,,,,,,!!”
आदर्श फूफा ने सुना तो बुरा सा मुँह बनाया और वहा से चला गया।
गोलू बेचारा यहाँ वहा भागते और मक्खियों को भगाते भगाते थक गया था तो वही गुड्डू एक के बाद एक लल्लन के आदमियों को मार रहा था। थके हारे गोलू को मक्खिया अभी भी परेशान कर रही थी इसलिए वह अब दोनों हाथ से जोर से ताली मारता और कोई न कोई मक्खी उसके हाथो के बीच में आकर मर जाती।
गोलू को मजा आने लगा। उसने 10-12 मक्खिया मर दी और ऐसे खुश हो रहा था जैसे ना जाने क्या ही मिल गया हो।
मक्खियों को मारते हुए एकदम से वह गुड्डू के सामने आया और गुड्डू का मुँह उसके दोनों हाथो के बीच और गोलू के दोनों हाथ गुड्डू के दोनों गालो पर लेकिन साथ ही दो मक्खिया भी मरी। थप्पड़ इतने जोर के थे कि गुड्डू को दर्द हुआ और गोलू की मुस्कान देखकर वह दर्द और बढ़ गया जब उसने दोनों मक्खिया गुड्डू के सामने करके कहा,”गुड्डू भैया मर गयी ससुरी”
गुड्डू ने गुस्से में आकर खींचकर गोलू को एक थप्पड़ मारा और कहा,”तो साले अब तुम भी मर जाओ”
गोलू को थप्पड़ पड़ा तो वह घूमता हुआ जाकर लगा गुप्ता जी के सीने से और गुप्ता जी पी रहे थे कोल्डड्रिंक , जैसे ही गोलू उनके पास आया गुप्ता जी ने दूसरे हाथ से गोलू के गाल पर थप्पड़ बरसाए और फिर उसे सीने से लगाकर कहा,”आ रे मेरा गोलू , आ ले ले ले ले,,,,,,,,,,,,,!!”
गोलू मुँह फाड़कर रोता इस से पहले गुप्ता जी ने उसके
मुँह से स्ट्रॉ लगा दी , गोलू रोना भूल गया और एक घूंठ पीकर कहा,”पिताजी इह तो मिरिंडा है , कहा से लाये ?””हुआ सोफे के पास से लेकर आये लेकिन अब नाही है , दो थी उह्ह हमहू आदर्शवा और यादव को दे दिए”,गुप्ता जी ने गोलू के मुँह से स्ट्रॉ निकालकर अपने मुँह में रखते हुए कहा
गोलू ने सुना तो गुप्ता जी से दूर हटा और ताली बजाकर कहा,”वाह पिताजी वाह ! घर का भेदी लंका ढाये , आपके पास दो कोल्ड ड्रिंक पर हमे नाही बताये,,,,,,,,,उह्ह्ह चांडाल फूफा और गोबर प्रसाद इत्ते क्लोज हो गए कि हमाये मुँह का निवाला छीनकर ओह्ह्ह का खिलाय रहे है आप,,,,,,,,,,,,,,हमका इंसाफ चाही पिताजी,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू की इस नौटंकी पर गुप्ता जी कुछ कहते इस से पहले शर्मा जी आये और गोलू को साइड में करके गुप्ता जी से कहा,”ए गुप्ता ! मिश्रा जी हिया नाही है”
गोलू घूमता हुआ फिर गुड्डू के पास चला आया और कहा,”ए गुड्डू भैया ! पिताजी हुआ मिरिंडा पी रहे है”
“अबे हिया उह्ह्ह लल्लन दरिंदा हमाये पीछे पड़ा है और तुमको साला मिरिंडा की पड़ी है,,,,,,,,,,लवली भैया को देखे का तुम हमे कही नजर नाही आ रहे ?”,गुड्डू ने परेशान होकर कहा
“गुड्डू भैया का पता लवली भैया बिंदिया भाभी को लेकर हिया से चले गए हो , एक काम करते है हम भी निकल जाते है यहाँ रुके तो फंस जायेंगे,,,,,,,,,,,,हमहू पीछे का रास्ता जानते है आईये हमाये साथ”,गोलू ने कहा
“वो तो ठीक है गोलू लेकिन पिताजी और बाकि सब”,गुड्डू ने कहा
“अरे वो सब अपने अपने हिसाब से आ जायेंगे , जैसे कानपूर से चकिया आये थे वैसे चकिया से कानपूर भी पहुंच ही जायेंगे , अब चलो”,कहकर गोलू गुड्डू को साथ लेकर पीछे वाले रास्ते की तरफ चला गया
“अबे हिया नाही है मतलब ?”,गुप्ता जी ने कहा
“मतलब इह कि उह्ह्ह ससुरा मिश्रा हमे हिया फसाकर खुद हिया से भाग गवा,,,,,,,,,,ना लवली हिया है ना गुड्डू और ना ही बिंदिया”,शर्मा जी ने कहा
“ए साला ! मिश्रा तो बड़का समझदार निकला रे अब का करे ?”,गुप्ता जी ने कहा
“चुपचाप यहाँ से बाहर निकल जाते है और फिर सोचते है का करना है ? उह्ह्ह दो महमूर्ति कहा है ?”,शर्मा जी ने कहा
“उह्ह्ह वहा है सोफे के पास चलो उनको भी साथ लेकर चलते है,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर गुप्ता जी और शर्मा जी आदर्श फूफा और यादव को साथ लेकर घर से निकल गए।
मंगेश के घर में अब सिर्फ मंगेश था जो कि बेहोश पड़ा था। ऋतिक था जो कि पंडित को मंडप में पकडे बैठा कि आज वह बिना शादी करवाए उसे जाने नहीं देगा , लल्लन के पीछे भागते ऋतिक के पिताजी थे
और लल्लन मंगेश के कुछ आदमी थे जो बेचारे अभी भी मक्खियों से लड़ रहे थे।
लवली , बिंदिया , रूपा और मंगल भागते भागते गुड्डू की उस खटारा गाड़ी के पास आ पहुंचे। गाडी में लगी चाबी देखकर लवली की आँखे चमक उठी वह जैसे ही गाड़ी की तरफ आया मंगल ने कहा,”अरे लवली ! इह ना चली है”
लवली कुछ कहता इस से पहले गुड्डू और गोलू भागते हुए गाड़ी के पास आये। गोलू गाड़ी का दरवाजा खोलकर ड्राइवर सीट पर तो गुड्डू उसके बगल में आ बैठा और गोलू ने बाहर गर्दन निकालकर कहा,”अरे चली है चली है,,,,,,,,!!!!”
लवली ने सुना तो उसने बिंदिया से आने का इशारा किया और पीछे आ बैठा हालाँकि दोनों तरफ ही दरवाजा नहीं था लेकिन इस वक्त इन लोगो का निकलना जरुरी था। लवली ने देखा रुपए और मंगल बाहर ही खड़े है तो लवली ने कहा,”का हुआ ? आओ न”
“गाडी मा एक ही जन की जगह है लवली एक काम करो इन्हे ले जाओ हम आ जायेंगे”,मंगल फूफा ने मायूस होकर कहा
“अरे लेकिन आप कैसे आएंगे मंगल जी ? यहाँ खतरा है”,रूपा ने कहा
“हमायी चिंता नाही करो हमे कुछो नाही होगा,,,,,तुम जाओ,,,,,अपना ख्याल रखना रूपा”,मंगल फूफा ने कहा तो रूपा बिंदिया के बगल में आ बैठी।
“का एक्टिंग है फूफा,,,,,,,,,,,,,प्रेम मा इत्तो बड़ो बलिदान दिये रहय,,,,,,,,,,,,,,तुम्हरा नाम तो इतिहास के पन्नो मा लिखा जायेगा”,गोलू बड़बड़ाया और फिर गाड़ी स्टार्ट कर वहा से निकल गया। मंगल फूफा जाती हुई गाडी को देखकर हाथ हिलाते रहे तभी एक पिकअप उनके बगल में आकर रुकी और पीछे बैठे मिश्रा जी ने आवाज दी,”अबे ओह्ह्ह्ह मंगलू जल्दी आवा”
मंगल फूफा भागकर चलती पिकअप के पीछे चढ़े और अंदर आ बैठे।
गोलू गाड़ी लेकर निकल तो गया लेकिन कुछ दूर जाते ही उसने देखा मंगेश के आदमी उसका पीछा कर रहे है तो उसने स्पीड बढ़ा दी और गाड़ी खड़खड़खड़खड़ करने लगी। गुड्डू ने गाड़ी की ये हालत देखकर गोलू की जांघ पर हाथ रखा तो गोलू ने कहा,”अरे गुड्डू भैया चिंता नाही कीजिये , कानपूर तक पहुंच जायेंगे आराम से जे गाडी से,,,,,,,,,,,,,,अरे हम है ना”
गोलू ने इतना ही कहा की देखा सामने बड़ा सा बांस रास्ता रोकने के लिए गाड़ी की सिध में लगाया गया था और ये देखकर गोलू चिल्लाया,”सब झुक जाओ”
सब लोग झुक गए , गाड़ी बांस से टकराकर आगे बढ़ गयी लेकिन जैसे ही सब उठे तो पाया कि गाडी की छत गायब है। गोलू ने देखा सब सही सलामत है तो गुड्डू को देखकर मुस्कुराया और कहा,”बच गए गुड्डू भैया ! अरे चिंता नाही करो ऊपर का छत ही तो गवा है कानपूर जाकर नया लगवा लेंगे”
गोलू की बात सुनकर गुड्डू गुस्से से बौखला उठा उसने चलती गाडी में गोलू का गला दबाते हुए कहा,”कानपुर तो तब पहुंचोगे जब तुम जिन्दा बचोगे , साले एक नंबर के पनौती हो तुम जब से गाडी मा बैठे हो एक ही बात सुन रहे है चिंता नहीं करो चिंता नहीं करो , नाही करेंगे चिंता का है की अब हमहू तुम्हायी चिता सजायेंगे,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
लवली ने देखा तो गुड्डू को गोलू से दूर करके कहा,”का कर रहे हो गुड्डू छोडो इसे ?”
“नहीं लवली भैया आज हम जे तिकड़मबाज को ऊपर पहुंचाकर रहेंगे , ना रहेगा गोलू ना होंगे कांड”,गुड्डू ने कहा तो गोलू ने मरे हुए स्वर में कहा,”ऊपर तो जायेंगे गुड्डू भैया वो भी हम सब”
गुड्डू ने सुना तो गोलू का गला छोड़कर अपनी सीट पर बैठा और कहा,”का बक रहे हो बे ?”
“सही कह रहे है , जे गाड़ी के ब्रेक फेल हो गए है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!!”,गोलू ने कहा और रो पड़ा। गोलू रोया तो गुड्डू भी रोने लगा और पीछे बैठे लवली के चेहरे पर चिंता के भाव उभर ए। बिंदिया और रूपा ने घबराकर एक दूसरे का हाथ पकड़ लिया क्योकि अब तो इन सब के भगवान् ही मालिक थे।
उधर मिश्रा जी पिकअप में पीछे बैठे थे और उसे चला रहा था मनोज , हाँ मनोज जिसने आखरी समय में लवली का साथ दिया। मिश्रा जी सबको यहाँ से निकालने के लिए ही घर से बाहर आये थे। मंगल फूफा तो उन्हें मिल गए और मंगल फूफा ने मिश्रा जी को बता दिया की लवली गुड्डू गोलू और बिंदिया सही सलामत है और यहाँ से निकल गए है बस मंगल फूफा ने रूपा के बारे में नहीं बताया।
मिश्रा जी ने मनोज से पिकअप मंगेश के घर की तरफ लेकर चलने को कहा तो देखा कि सामने से शर्मा जी , गुप्ता जी , आदर्श फूफा और यादव जी भागे आ रहे है और उनके पीछे कुछ आदमी। मिश्रा जी ने जल्दी से सबको आने को कहा और एक एक को अपना हाथ देकर ऊपर चढ़ा लिया। सभी सही सलामत पिकअप में आ गए और मनोज उन्हें वहा से लेकर निकल पड़ा।
उधर गाड़ी के ब्रेक फेल होने की वजह से वह सीधी चली जा रही थी। गोलू हाथ जोड़कर भगवान से अपने पापो की माफ़ी मांग रहा था। गुड्डू घबराया हुआ सा अपने नाख़ून चबा रहा था। लवली ने देखा दोनों एक नंबर के डरपोक है और अब उसे ही कुछ करना होगा , तभी सामने कुछ दूरी पर नदी दिखाई दी ये देखकर लवली भी घबरा गया। गाडी का रुकना बहुत जरुरी था वरना सब पानी में डूबकर मरने वाले थे।
“अब एक ही रास्ता है हम सबको गाड़ी से कूदना होगा , हम तीन तक गिनेंगे उसके बाद सब एक साथ अपनी अपनी तरफ कूद जाना”,लवली ने कहा
रूपा और गुड्डू ने डरते डरते हामी भर दी , बिंदिया का हाथ लवली ने थाम लिया बचा गोलू तो वह गाड़ी के स्टेयरिंग को मजबूती से पकड़कर बोला,”ए लवली भैया , आपको का सिर्फ तीन तक गिनती आती है अरे कम से कम 10 तक तो गिनो”
“10 क्यों कहो तो 13 तक गिन ले”,लवली ने चिढ़कर कहा
“अरे उह्ह्ह तो हमायी तेहरवी पर वैसे भी गिन ही जाएगी,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने रोआँसा होकर कहा और गाड़ी का गेट खोल लिया
“एक दो तीन कूदो”,लवली ने कहा और सब गाडी से कूद गए। गाडी उछलकर दूर नदी में जा गिरी और धीरे धीरे डूब गयी। गुड्डू और रूपा एक तरफ गिरे लेकिन घास होने की वजह से उनको ज्यादा चोट नहीं लगी। बिंदिया , लवली एक तरफ तो उन्हें भी बस खरोच आयी। वही हमारे गोलू महाराज वो खुद तो गिरे सो गिरे साथ में गाड़ी का स्टेयरिंग भी उखाड़ लिया। गोलू स्टेयरिंग को पकडे उठा और देखा कि वह ज़िंदा है तो खुश हो गया। गुड्डू और रूपा भी सबकी तरफ चले आये।
“गुड्डू भैया ! जे बचा लिया हमने आपकी गाड़ी का”,गोलू ने खुश होकर कहा
गुड्डू ने एक नजर नदी में डूबती गाड़ी पर डाली और खींचकर एक थप्पड़ गोलू को दे मारा और कहा,”हमायी जिंदगी घुमाने के लिए तो तुम काफी हो जे स्टेयरिंग की का जरूरत है”
लवली ने सुना तो मुस्कुरा उठा और फिर पाँचो पैदल ही वहा से सड़क की तरफ चल पड़े।
सड़क पर पहुंचकर किसी गाड़ी से लिफ्ट लेने या बस का इंतजार करने लगे तभी गुड्डू को दूर से एक पिकअप आती दिखाई दी जो कि कुछ कुछ जाने पहचानी लगी
जैसे ही पिकअप नजदीक आकर रुकी ड्राइवर सीट पर बैठे मनोज को देखकर लवली मुस्कुरा उठा उसने गुड्डू की तरफ देखा तो गुड्डू भी मुस्कुराया और फिर सब मनोज की तरफ चले आये तो मनोज ने उन्हें पीछे जाकर देखने को कहा। पाँचो पीछे आये तो गुड्डू की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था मिश्रा जी सही सलामत सबके साथ पीछे बैठे थे।
सबको सही सलामत देखकर मिश्रा जी ने भी राहत की साँस ली और गुड्डू से कहा,”हमाये सौंदर्य दर्शन हो गए हो तो अंदर आ जाओ और बिटिया तुम दोनों आगे मनोज के साथ बइठो यहाँ मर्दो मा नाही,,,,,,,,,!!!”
बिंदिया और रूपा आगे मनोज के पास बैठ गयी , गोलू , गुड्डू और लवली पीछे आ बैठे और पिकअप आगे बढ़ गयी।
सबकी हालत खराब किसी का नाक सुजा हुआ था , किसी की आँखे तो किसी का मुँह ,, पर सब खुश थे क्योकि अंत भला तो सब भला तभी मिश्रा जी ने कहा,”ए भैया ! ए कांड मण्डली ! ए हम तुम सबसे हाथ जोड़कर बिनती करते है अब बस करो , जे सीजन के लिए इत्ती भसड़ काफी थी,,,,,,,,,,अब बस जे सीजन यही खत्म”
सबने मिश्रा जी की बात से सहमत होकर हामी में गर्दन हिला दी तभी मंगल फूफा ने उछलकर कहा,”अरे ऐसे कैसे खत्म ? अरे अभी तो रूपा से हमायी सादी भी ना हुई है”
मिश्रा जी ने मंगल फूफा की तरफ देखा और उनके टकले पर हाथ फेरकर प्यार से कहा,”अरे तो तुम्हायी सादी अगले सीजन मा करवाते है ना,,,,,,,,,!!!”
“जे Writer साहिबा हमाये लिए अगला सीजन काहे लिखेगी ?”,मंगल फूफा ने कहा
मिश्रा जी ने अपनी बाँयी भंव चढ़ाई और कहा,”काहे नाही लिखेगी , बिल्कुल लिखेगी , अगली बार जे का कानपूर नाही आनो ?”
“और मान लीजिये उह्ह्ह कह दे कि कानपूर से अब कोनो रिश्ता नाही रहो फिर , फिर तो हमायी और रूपा की कहानी अधूरी रह जाएगी ना मिश्रा जी”,मंगल फूफा ने कहा
मिश्रा जी मुस्कुराये और कहा,”तो फिर जे ना भूलो मंगल की बनारस जाने वाली मरुधर एक्सप्रेस कानपूर से ही होकर गुजरती है,,,,,,,,,,,,,,,उठवा लेंगे,,,,,,,,,,क्यों गोलू ?”
कहते हुए मिश्रा जी ने पीछे बेसुध पड़े गोलू को देखकर कहा तो गोलू बस मुस्कुरा दिया क्योकि इस जन्म में तो वह अब किसी को उठाने की बात बिल्कुल नहीं करने वाला था।
समाप्त
( समाप्त पढ़कर निराश मत होईये , अब देखो मिश्रा जी ने कहा ये सीजन यही खत्म करने का तो करने का बाकि अगले और आखरी सीजन के साथ वापस मिलूंगी ना मैं आप सबसे क्योकि मैं कानपूर जाना छोड़ सकती हूँ लेकिन बनारस जाना नहीं और बनारस की मेरी ट्रैन कानपूर होकर ही जाती है। तो मिलते है अगले सीजन के साथ तब तक के लिए शुक्रिया , अपना ख्याल रखे और पढ़ते रहे कहानियाँ क्योकि हर कहानी कुछ कहती है )
संजना किरोड़ीवाल
Read Manmarjiyan Season 1
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